(दैनिक समसामयिकी और प्रिलिम्स बूस्टर) यूपीएससी और सभी राज्य लोक सेवा आयोग परीक्षाओं के लिए हिंदी में समाचार पत्रों का संकलन (11 जुलाई 2020)

दैनिक समसामयिकी और प्रिलिम्स बूस्टर


(दैनिक समसामयिकी और प्रिलिम्स बूस्टर) यूपीएससी और सभी राज्य लोक सेवा आयोग परीक्षाओं के लिए हिंदी में समाचार पत्रों का संकलन (11 जुलाई 2020)


:: राष्ट्रीय समाचार ::

नौवहन सहायता (मसौदा) विधेयक-2020

चर्चा में क्यों

  • जहाजरानी मंत्रालय ने नौवहन सहायता विधेयक-2020 का मसौदा जारी कर हितधारकों और आम जनता से सुझाव मांगे हैं।

क्यों लाया गया नौवहन सहायता (मसौदा) विधेयक?

  • विधेयक का यह मसौदा लगभग नौ दशक पुराने लाइटहाउस अधिनियम, 1927 को बदलने के लिए लाया गया है।
  • इसके माध्यम से सर्वोत्तम वैश्विक प्रथाओं, तकनीकी विकास और समुद्री नौवहन के क्षेत्र में भारत के अंतर्राष्ट्रीय दायित्वों को समाहित किया जा सकेगा।
  • यह पहल पुरातन औपनिवेशिक कानूनों को निरस्त करने और उसके स्‍थान पर समुद्री परिवहन क्षेत्र की आधुनिक और समकालीन आवश्यकताओं के अनुरूप नई व्‍यवस्‍था अपनाने के सक्रिय दृष्टिकोण का हिस्सा है।

नौवहन सहायता विधेयक-2020 से जुड़े तथ्य

  • शासन में लोगों की भागीदारी और पारदर्शिता बढ़ाने के लिए जहाजरानी मंत्रालय ने हितधारकों और आम जनता से सुझाव आंमत्रित करने के लिए नौवहन सहायता विधेयक- 2020 का मसौदा जारी किया है। यह पहल पुरातन औपनिवेशिक कानूनों को निरस्त करने और उसके स्‍थान पर समुद्री परिवहन क्षेत्र की आधुनिक और समकालीन आवश्यकताओं के अनुरूप नई व्‍यवस्‍था करने के सक्रिय दृष्टिकोण का हिस्सा है। इस विधेयक से जुड़ें कुछ महत्वपूर्ण प्रावधान निम्न है
  • मसौदा विधेयक प्रकाशस्‍तंभ और प्रकाशपोत महानिदेशालय (डीजीएलएल) को निम्नलिखित मामलों में अतिरिक्‍त अधिकार और शक्तियां प्रदान करता है-
  1. पोत परिवहन सेवा
  2. रेक फ़्लैगिंग
  3. प्रशिक्षण और प्रमाणन
  4. भारत के हस्ताक्षर वाली अंतर्राष्ट्रीय संधियों के तहत अन्य दायित्वों का निर्वहन, आदि।
  • इसमें प्राचीन धरोहरों के रूप में मौजूद प्रकाश स्तंभों की पहचान करने और उनका विकास करने की भी व्‍यवस्‍था है।
  • मसौदा विधेयक में नौवहन में बाधा डालने और किसी तरह का नुकसान पहुंचाने तथा केंद्र सरकार एवं अन्य निकायों द्वारा जारी निर्देशों का अनुपालन नहीं किये जाने पर दंडात्मक व्‍यवस्‍था का प्रावधान किया गया है। साथ ही ऐसे कार्यों को अपराध की श्रेणी में रखने के लिए एक नई अनुसूची भी बनाई गई है।
  • समुद्री नौवहन के लिए उन्‍नत आधुनिक तकनीकी से लैस सहायक उपकरणों के आ जाने से समुद्री नौवहन को विनियमित करने और संचालित करने वाले अधिकारियों की भूमिका भी काफी बदल गई है।
  • नए कानून में प्रकाश स्तंभ के स्‍थान पर नौवहन के लिए आधुनिक सहायक सामग्रियों के इस्‍तेमाल पर बल दिया गया है।

'आत्मानिर्भर कुशल कर्मचारी-नियोक्ता मानचित्रण (असीम)' पोर्टल

चर्चा में क्यों?

  • कुशल कार्यबल को आजीविका के अवसर तलाशने, कुशल कार्यबल के बाजार में मांग- आपूर्ति के अंतर को पाटने और नियोक्ताओं को कुशल कार्यबल की खोज में मदद करने के मामले में सूचना की उपलब्धि एवं प्रवाह की स्थिति को बेहतर बनाने के प्रयास के तहत कौशल विकास और उद्यमिता मंत्रालय (एमएसडीई) के द्वारा 'आत्मानिर्भर कुशल कर्मचारी-नियोक्ता मानचित्रण (असीम)' पोर्टल को लॉन्च किया गया है।

क्या है असीम(ASEEM) पोर्टल?

  • असीम पोर्टल (Aatamanirbhar Skilled Employee Employer Mapping- ASEEM) जो मोबाइल ऐप के रूप में भी उपलब्ध है, को बेंगलुरु स्थित कंपनी बेटरप्लेस के सहयोग से राष्ट्रीय कौशल विकास निगम (एनएसडीसी) द्वारा विकसित और प्रबंधित किया गया है।
  • असीम पोर्टल का उद्देश्य है प्रोग्रामेटिक उद्देश्यों के लिए सिस्टम द्वारा उत्पन्न रुझानों और विश्लेषणों के माध्यम से समर्थन और नीति निर्धारण में सहायता प्रदान करना है।
  • असीम पोर्टल एनएसडीसी और इससे जुड़े क्षेत्र कौशल परिषद को वास्तविक समय डेटा एनालिटिक्स प्रदान करने में मदद करेगा, जिसमें उद्योग आवश्यकताओं, कौशल अंतर विश्लेषण, मांग प्रति जिला/राज्य/क्लस्टर, प्रमुख कार्यबल आपूर्तिकर्ता, प्रमुख उपभोक्ता, माइग्रेशन पैटर्न सहित आपूर्ति और पैटर्न जैसी बातें शामिल होंगी। इसके जरिए उम्मीदवारों के लिए कैरियर की कई संभावनाएं बनेंगी।
  • पोर्टल में तीन आईटी आधारित इंटरफेस हैं –
  1. नियोक्ता पोर्टल- नियोक्ता ऑनबोर्डिंग, डिमांड एग्रीगेशन, उम्मीदवार का चयन-
  2. डैशबोर्ड- रिपोर्ट, रुझान, विश्लेषण और अंतर को प्रमुखता से दिखाना-
  3. उम्मीदवार आवेदन - उम्मीदवार का प्रोफ़ाइल बनाना और ट्रैक करना , नौकरी का सुझाव देना

असीम पोर्टल ASEEM की विशेषताएं एवं लाभ

  • असीम का उपयोग उपलब्ध नौकरियों के साथ कुशल श्रमिकों का मिलान करने के लिए मैच-मेकिंग इंजन के रूप में किया जाएगा। पोर्टल और ऐप में नौकरी की भूमिकाओं, क्षेत्रों और भौगोलिक क्षेत्रों के श्रमिकों के लिए पंजीकरण और डेटा अपलोड का प्रावधान होगा।
  • कुशल कार्यबल इस ऐप पर अपनी प्रोफाइल पंजीकृत कर सकते हैं और अपने पड़ोस में रोजगार के अवसरों की तलाश कर सकते हैं। असीम के माध्यम से, विशिष्ट क्षेत्रों में कुशल कर्मचारियों की तलाश करने वाले नियोक्ताओं, एजेंसियों और जॉब एग्रीगेटर्स के पास सभी आवश्यक विवरण एक ही जगह मिलेंगे।
  • यह नीति निर्माताओं को विभिन्न क्षेत्रों में अधिक उद्देश्यपूर्ण दृष्टिकोण रखने में सक्षम बनाएगा।
  • यह पोर्टल विभिन्न क्षेत्रों में कुशल कार्यबल के लिए मांग-आपूर्ति की खाई को पाटने के हमारे सतत प्रयासों को गति देने के लिए परिकल्पित किया गया है। इसके माध्यम से देश के युवाओं के लिए असीम अवसर उपलब्ध कराने की कोशिश की गई है।
  • इस पहल का उद्देश्य कोविड महामारी के बाद के समय में कुशल कार्यबल की पहचान करके कार्यबल तंत्र की दिशा में देश की प्रगति को रफ्तार देना है और कुशल कार्यबल को स्थानीय स्तर पर प्रासंगिक आजीविका के अवसरों से जोड़ना है।
  • इस पोर्टल के माध्यम से मांग को संचालित करने और परिणाम-आधारित कौशल विकास कार्यक्रमों को चलाने के लिए सहायक रही प्रौद्योगिकी और ई-प्रबंधन प्रणालियों के बढ़ते उपयोग के साथ कौशल विकास से जुड़ी विभिन्न योजनाओ को एक साथ लाने का काम किया गया है।

प्रधानमंत्री किसान ऊर्जा सुरक्षा एवं उत्थान महाभियान (प्रधानमंत्री-कुसुम) योजना

चर्चा में क्यों?

  • नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय (एमएनआरई) ने आज प्रधानमंत्री किसान ऊर्जा सुरक्षा एवं उत्थान महाभियान (प्रधानमंत्री-कुसुम) योजना के तहत पंजीकरण का दावा करने वाले फर्जी वेबसाइटों के खिलाफ नए परामर्श जारी किये।

पृष्ठभूमि

  • हाल में देखा गया है कि दो नई वेबसाइटों ने अवैध रूप से पीएम-कुसुम योजना के लिए पंजीकरण पोर्टल होने का दावा किया है। इन वेबसाइटों के पीछे शरारती लोग आम जनता को धोखा दे रहे हैं और इन फर्जी पोर्टल्स के माध्यम से आम लोगों के डेटा का दुरुपयोग कर रहे हैं। एमएनआरई इन वेबसाइटों को संचालित करनेवालों के खिलाफ कार्रवाई कर रहा है। मंत्रालय द्वारा सभी संभावित लाभार्थियों और आम जनता को सूचित किया जाता है कि इन वेबसाइटों पर पैसा जमा करने या डेटा देने से बचें।

क्या है प्रधानमंत्री-कुसुम योजना?

  • प्रधानमंत्री-कुसुम योजना के लिए प्रशासनिक स्वीकृति एमएनआरई द्वारा 08 मार्च, 2019 को जारी की गई थी। योजना के कार्यान्वयन के लिए दिशानिर्देश 22 जुलाई, 2019 को जारी किए गए थे। इस योजना के लिए 34,422 करोड़ रुपये उपलब्ध कराने की घोषणा की गयी थी।
  • इस योजना में सौर पंपों की स्थापना, मौजूदा ग्रिड से जुड़े कृषि पंपों का सौर पंप में बदलना और ग्रिड से जुड़े नवीकरणीय बिजली संयंत्रों की स्थापना के प्रावधान हैं।
  • साल 2020 -21 के बजट में प्रधानमंत्री कृषि ऊर्जा सुरक्षा उत्थान महाभियान (पीएम कुसुम) के विस्तार करते हुए 20 लाख किसानों को सोलर पंप लगाने में सरकार द्वारा मदद की घोषणा की गयी थी।
  • इस योजना के तहत 2022 तक 26 गीगावॉट क्षमता और 1.7 मिलियन किसानों को लक्षित किया जायेगा।
  • कुसुम का उद्देश्‍य ग्रागीण भू-मालिकों को एक स्थिर, निरंतर और दीर्घकालिक आय का स्‍त्रोत प्रदान करना है।

कुसुम योजना के लाभ

  • ग्रामीण लोड केन्‍द्रों और कृषि पंप सेटो के लिए केन्द्रित स्‍थानीय स्‍वच्‍छ बिजली उपलब्ध किया जा सकेगा
  • ग्रिड लोड को जोड़े बिना ऊर्जा तक आम लोगों की पहुंच सुनिश्चित होगी
  • यह बिजली के पारेषण से होने वाले नुकसान को कम करेगी
  • मंहगे और प्रदूषण फैलाने वाले डीजल चलित पम्‍पों का कम इस्‍तेमाल करते हुए तथा सिचांई के विश्‍वसनीय स्‍त्रोत तक पहुच सुनिश्चित होगी
  • किसानों को दो तरह से फायदा होगा एक तो उन्हें सिंचाई के लिए मुफ्त बिजली मिलेगी और दूसरा वह अतिरिक्त बिजली बना कर ग्रिड को भेजकर कमाई भी कर रहे हैं ।
  • अगर किसी किसान के पास बंजर ज़मीन है तो वह उसका इस्तेमाल सौर ऊर्जा उत्पादन के लिए कर सकता है। इससे उन्हें बंजर जमीन से भी आमदनी होने लगेगी।
  • इससे सिंचाई में लगने वाली डीजल की खपत कम होगी जिससे कच्चे तेल का आयात होगा। इससे राजस्व घाटे में कमी आएगी और विदेशी मुद्रा कोष में भी बढ़ोत्तरी भी होगी।
  • इससे भारत सरकार के जलवायु लक्ष्य की प्राप्ति में मदद मिलेगी एवं स्वच्छ उर्जा को बढावा दिया जाना सुनिश्चित होगा।

गोईंग ऑनलाइन ऐज लीडर्स (गोल) परियोजना

चर्चा में क्यों?

  • जनजातीय मंत्रालय ने ‘गोईंग ऑनलाइन ऐज लीडर्स (गोल) परियोजना’ पर भारत के अनुसूचित जनजाति (एसटी) संसदीय निर्वाचन क्षेत्रों के संसद सदस्यों (एमपी) के संवेदीकरण के लिए फेसबुक इंडिया के साथ वेबिनार की मेजबानी की।

क्या है गोईंग ऑनलाइन ऐज लीडर्स (गोल) परियोजना?

  • गोईंग ऑनलाइन ऐज लीडर्स (गोल) जनजातीय मामले मंत्रालय द्वारा फेसबुक इंडिया की साझीदारी में आरंभ एक पहल है जो डिजिटल प्रौद्योगिकी की शक्ति का लाभ उठाने के जरिये भविष्य का नेता बनने के लिए अनुसूचित समुदायों के 5000 युवकों को डिजिटल तरीके से कौशल प्रदान करेगी एवं अधिकारसंपन्न बनायेगी।
  • गोल परियोजना का लक्ष्य पूरे भारत के जनजातीय क्षेत्र के युवकों को व्यक्तिगत रूप से संरक्षण प्रदान करने के लिए उद्योग (नीति निर्माता एवं प्रभाव डालने वाले), शिक्षक, कलाकार, उद्यमी, सामाजिक कार्यकर्ता आदि अपने कार्य क्षेत्रों में अपनी उपलब्धियों के लिए विख्यात 2500 लोगों की पहचान करना एवं उन्हें प्रोत्साहित करना है।
  • संरक्षण कार्यक्रम के मुख्य क्षेत्र हैं डिजिटल साक्षरता, जीवन कौशल तथा उद्यमशीलता।

गोईंग ऑनलाइन ऐज लीडर्स (गोल) परियोजना के उद्देश्य

  • इस कार्यक्रम का लक्ष्य तैयारी एवं डिजाइन चरण सहित संरचित चरणों में काम करना, संरक्षकों एवं संरक्षण प्राप्त करने वालों का चयन करना, निष्पादन जिसमें संरक्षण, प्रशिक्षण, प्रशिक्षुता आदि शामिल हैऔर युवाओं से जुड़ी आर्थिक एवं नेतृत्व गतिविधियां की अनुवर्ती कार्रवाई करना है।
  • इस कार्यक्रम का उद्देश्य युवाओं को आरंभिक सहायता प्रदान करना है भले ही वे आगामी रोजगारों के लिए स्नातक हो चुके होते हैं या सरकारी स्कीमों के जरिये स्वरोजगार/उद्यमशीलता पहलों से जुड़ चुके होते हैं।
  • इस कार्यक्रम का उद्देश्य गुणवत्ता आश्वासन, निगरानी, सामयिक मूल्यांकन नवाचारों का एक मजबूत घटक तलाशना है तथा यह निरंतर सुधार, निर्णय निर्माण तथा संधारणीयता के लिए विश्लेषकों एवं प्रौद्योगिकी का उपयोग करता है।

‘गोईंग ऑनलाइन ऐज लीडर्स (गोल) परियोजना के लाभ

  • गोईंग ऑनलाइन ऐज लीडर्स (गोल) एक डिजिटल कौशल निर्माण एवं संरक्षण पहल है जो डिजिटल तंत्रों के जरिये पूरे भारत के अनुसूचित जनजाति के युवकों को व्यक्तिगत रूप से संरक्षण प्रदान करने के लिए व्यवसाय, शिक्षा, स्वास्थ्य, राजनीति, कला एवं उद्यमशीलता से जुड़े क्षेत्रों के विख्यात नेता एवं विशेषज्ञों को इससे जोड़ेगी।
  • यह कार्यक्रम अनुसूचित जनजाति के युवकों को भविष्य में बदलाव लाने वालों के रूप में अधिकारसंपन्न एवं सक्षम बनायेगी।
  • यह पहल मुख्य रूप से जनजातीय क्षेत्रों में रहने वाले युवकों के क्षमता निर्माण को लक्षित करती है जो उन्हें उनका आत्म विश्वास स्तर बढ़ाने एवं उनमें उच्च आकांक्षा भरने के लिए उन्हें प्रेरित, दिशा निर्देशित और प्रोत्साहित करेगी।
  • अर्जित कौशल एवं क्षमताएं उन्हें नेतृत्व कौशलों को हासिल करने, उनके समाज की समस्स्याओं का पता लगाने, चुनौतियों से लड़ने के लिए समाधानों को ढूंढने तथा उनकी आजीविका में सहायता करने के लिए तथा समाज में सामाजिक-आर्थिक दर्जा प्राप्त करने के लिए उनके ज्ञान का उपयोग करने में मदद करेगी।

रीवा सौर परियोजना

चर्चा में क्यों?

  • प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी ने वीडियो कॉन्‍फ्रेंस के माध्‍यम से मध्‍य प्रदेश के रीवा में अत्‍याधुनिक मेगा सौर ऊर्जा परियोजना राष्‍ट्र को समर्पित की। यह एशिया की सबसे बड़ी सौर ऊर्जा परियोजना है।

रीवा सौर परियोजना के बारे में

  • इस परियोजना में एक सौर पार्क (कुल क्षेत्रफल 1500 हेक्टेयर) के अंदर स्थित 500 हेक्टेयर भूमि पर 250-250 मेगावाट की तीन सौर उत्पादन इकाइयां शामिल हैं। इस सौर पार्क को रीवा अल्ट्रा मेगा सोलर लिमिटेड (आरयूएमएसएल) ने विकसित किया है जो मध्य प्रदेश उर्जा विकास निगम लिमिटेड (एमपीयूवीएन) और केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र की ईकाई सोलर एनर्जी कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया (एसईसीआई) की संयुक्त उद्यम कंपनी है।
  • इस सौर पार्क के विकास के लिए आरयूएमएसएल को 138 करोड़ रुपये की केंद्रीय वित्तीय मदद प्रदान की गई है। पार्क के विकसित हो जाने के बाद, रीवा अल्ट्रा मेगा सोलर लिमिटेड (आरयूएमएसएल) ने पार्क के अंदर 250 मेगावाट की तीन सौर उत्पादन इकाइयों का निर्माण करने के लिए रिवर्स ऑक्शन के माध्यम से महिंद्रा रिन्यूएबल्स प्राइवेट लिमिटेड, एसीएमई जयपुर सोलर पावर प्राइवेट लिमिटेड, और आरिन्सन क्लीन एनर्जी प्राइवेट लिमिटेड का चयन किया था।

रीवा सौर परियोजना की उपलब्धिया

  • रीवा सौर परियोजना उन उत्कृष्ट अक्षय ऊर्जा परियोजना का एक उदाहरण है जिन्हें केंद्र और राज्य सरकारों के बीच तालमेल होने पर हासिल किया जा सकता है।
  • रीवा सौर परियोजना सौर उर्जा को ग्रिड से जोड़ने वाली वाली देश की पहली सौर परियोजना है।
  • वर्ष 2017 की शुरूआत में सौर परियोजना से प्राप्त बिजली की दर लगभग 4.50 रुपये / यूनिट थी जबकि रीवा परियोजना ने 15 वर्षों तक 0.05 रुपये /यूनिट की वृद्धि के साथ पहले वर्ष में 2.97 रुपये /यूनिट और 25 साल की अवधि के लिए 3.30 रुपये /यूनिट की वहनीय दर को प्राप्त करने में सफलता हासिल की गयी।
  • यह परियोजना सालाना लगभग 15 लाख टन कार्बन डाय ऑक्साइड (CO2) के बराबर कार्बन उत्सर्जन को कम करेगी।
  • रीवा परियोजना को भारत और विदेशों में इसकी ठोस परियोजना संरचना और नवाचारों के लिए जाना जाता है। एमएनआरई द्वारा बिजली डेवलपर्स के जोखिम को कम करने के लिए इसके भुगतान सुरक्षा तंत्र को अन्य राज्यों के लिए एक मॉडल के रूप में अनुशंसित किया गया है।
  • नवाचार और उत्कृष्टता के लिए इसे वर्ल्ड बैंक ग्रुप प्रेसिडेंट अवॉर्ड भी मिला है। यही नहीं, इसे प्रधानमंत्री की‘अ बुक ऑफ इनोवेशन: न्यू बिगनिंग्स’पुस्तक में भी शामिल किया गया है।
  • यह परियोजना राज्य के बाहर एक संस्थागत ग्राहक को आपूर्ति करने वाली पहली अक्षय ऊर्जा परियोजना भी है। अर्थात, यह दिल्ली मेट्रो को अपनी कुल उत्पादन का 24 प्रतिशत बिजली देगी जबकि शेष 76 प्रतिशत बिजली मध्य प्रदेश के राज्य बिजली वितरण कंपनियों (डिस्कॉम) को आपूर्ति की जाएगी।
  • रीवा परियोजना 100 गीगा वाट (जीडब्ल्यू) की सौर स्थापित क्षमता के साथ 2022 तक 175 गीगा वाट (जीडब्ल्यू) की स्थापित अक्षय ऊर्जा क्षमता के लक्ष्य को प्राप्त करने की भारत की प्रतिबद्धता का उदाहरण भी है।

डाटा संग्रह के लिए क्रिस गोपालकृष्णन समिति

चर्चा में क्यों?

  • डाटा संग्रह करने के लिए नियुक्त पैनल ने रिपोर्ट को अंतिम रूप दे दिया है और यह इसे जल्द ही इसे सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय को सौंपने वाला है।

पृष्ठभूमि

  • सरकार ने अपने नागरिकों का गैर निजी डाटा संग्रह करने वाली कंपनियों फेसबुक, गूगल और अमेजन पर नीति नियंत्रण के लिए सिफारिशें सुझाने के लिए पिछले साल एक पैनल गठित किया था।

समिति की सिफारिशें

  • सरकार को डाटा नियामक की स्थापना कर कंपनियों को गैर निजी डाटा संग्रह करने के तौर-तरीकों को सार्वजनिक करने को कहना चाहिए।
  • दरअसल भारतीय नागरिकों के गैर निजी डाटा का विश्लेषण कर विभिन्न कंपनियां अपने व्यवसाय में इसका इस्तेमाल करती हैं। हालांकि लोगों की निजता का ख्याल रखते हुए उनके नाम हटाकर या अज्ञात के तौर पर उनका डाटा इस्तेमाल किया गया। सरकार द्वारा नियुक्त इस पैनल ने अपनी रिपोर्ट में डाटा व्यवसाय के लिए केंद्रीकृत नियमों के लिए नियामक या संस्था बनाए जाने की जरूरत बताई है।
  • रिपोर्ट में नियामक को कानूनी रूप से शक्ति संपन्न बनाने की सिफारिश की गई है ताकि वह डाटा के लिए आग्रह करने के साथ निगरानी कर सके और जरूरत पड़ने पर किसी विवाद का निपटारा भी करा सके।
  • इस रिपोर्ट में डाटा संग्रह करने वाली कंपनियों को खुद को 'डाटा व्यवसायी' के तौर पर भारत में पंजीकरण कराना होगा। हालांकि पंजीकरण संबंधी नियमों को अभी निर्धारण किया जाना है। उन्हें सरकारी एजेंसियों को बताना होगा कि वे किस तरह का डाटा संग्रह करती हैं और उसका वह किस तरह उपयोग करती हैं।
  • इसमें भी एक नियामक बनाने की सिफारिश की गई है। इसी तरह निजता संबंधी एक बिल की समीक्षा जारी है। इन सब गतिविधियों से टेक कंपनियों की मनमानी पर अंकुश लगेगा। पैनल ने यह भी कहा कि नियामक बनने से जरूरत पड़ने पर हम निजी कंपनियों के कब्जे से डाटा वापस भी ले सकते हैं। इसका इस्तेमाल स्वास्थ्य संबंधी प्रोजेक्ट बनाने जैसे काम में किया जा सकता है।

:: अंतर्राष्ट्रीय समाचार ::

मालाबार युद्धाभ्यास

चर्चा में क्यों?

  • हिंद महासागर में होने वाले मालाबार युद्धाभ्यास में ऑस्ट्रेलिया को न्यौता दिए जाने से चीन की प्रतिक्रिया सामने आई है। चीनी कम्युनिस्ट पार्टी के मुखपत्र ग्लोबल टाइम्स ने लिखा कि भारत ने मालाबार युद्धाभ्यास में इस साल ऑस्ट्रेलिया को शामिल करने की योजना बनाई है जिसके पीछे रणनीतिक कारण हैं। अभी तक इस युद्धाभ्यास में भारत अमेरिका और जापान की नौसेना ही हिस्सा लेती रही हैं। इस साल ऐसा पहली बार होगा जब ऑस्ट्रेलिया की नौसेना भी इस युद्धाभ्यास में भाग लेगी।

मालाबार युद्धाभ्यास के बारे में

  • मालाबार नौसैनिक युद्धाभ्यास की शुरुआत 1992 में अमेरिका और भारत के बीच द्विपक्षीय सैन्य डील के रूप में हुई थी। जापान इस युद्धाभ्यास में 2015 में शामिल हुआ था। इस अभ्यास को तीन देशों के बीच सैन्य सहयोग बढ़ाने के लिए डिज़ाइन किया गया है।

क्यों महत्वपूर्ण है ऑस्ट्रेलिया का शामिल होना?

  • मालाबार युद्धाभ्यास में ऑस्ट्रेलिया के शामिल होने के बाद पहली बार अनौपचारिक रूप से बने क्वॉड ग्रुप (Quad group) को सैन्य मंच पर देखा जाएगा। इसमें भारत और ऑस्ट्रेलिया के साथ जापान और अमेरिका शामिल हैं। अभी तक भारत ने ऑस्ट्रेलिया को इससे अलग रखा था लेकिन लद्दाख में सीमा पर चीन की हरकत को देखते हुए उसे भी बुलाने का प्लान है।
  • ब्लूमबर्ग की एक रिपोर्ट के मुताबिक अगले हफ्ते तक ऑस्ट्रेलिया को औपचारिक रूप से निमंत्रण के प्रस्ताव पर मुहर लग सकती है। मालाबार पहले एक सीमित नौसैनिक युद्धाभ्यास हुआ करता था लेकिन अब इंडो-पैसिफिक रणनीति का अहम हिस्सा है। इसके तहत हिंद महासागर में चीन के बढ़ते कदमों को रोकना एक बड़ा लक्ष्य है। जापान इससे 2015 में जुड़ा था।

:: राजव्यवस्था ::

सभी कानूनी प्रक्रियाओं के लिए अनिवार्य समन और नोटिस भेजने की नयी विधि

  • सुप्रीम कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए वाट्सएप, ईमेल और फैक्स से लगभग सभी कानूनी प्रक्रियाओं के लिए अनिवार्य समन और नोटिस भेजने की इजाजत दे दी है।
  • मुख्य न्यायाधीश एसए बोबडे की अगुआई में पीठ ने माना कि यह अदालत के संज्ञान में लाया गया है कि नोटिस, समन और वाद की सेवा के लिए डाकघरों का दौरा करना संभव नहीं है। पीठ, जिसमें जस्टिस एएस बोपन्ना और आर सुभाष रेड्डी भी शामिल हैं, ने महसूस किया कि वाट्सएप और अन्य फोन मैसेंजर सेवाओं के माध्यम से उसी दिन नोटिस और समन भेजा जाना चाहिए।
  • शीर्ष अदालत ने कोरोना वायरस महामारी को रोकने के लिए लगाए गए लॉकडाउन को देखते हुए रिजर्व बैंक को चेक की वैधता बढ़ाने की भी अनुमति दे दी। रिजर्व बैंक की ओर से पेश वकील वी गिरि ने पीठ को सूचित किया कि उन्होंने पिछली सुनवाई पर जारी निर्देशों के अनुसार चेक की वैधता के संबंध में टिप्पणी जारी की थी।

:: अर्थव्यवस्था ::

“मेक इन इंडिया के लिए विशिष्ट हस्तक्षेप: कोविड–19 के बाद”

चर्चा में क्यों?

  • केंद्रीय विज्ञान और प्रौद्योगिकी, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण और पृथ्वी विज्ञान मंत्री डॉ. हर्ष वर्धन ने एक वर्चुअल कार्यक्रम में प्रौद्योगिकी सूचना, पूर्वानुमान और मूल्यांकन परिषद (टीआईएफएसी) द्वारा तैयार किए गए “मेक इन इंडिया के लिए विशिष्ट हस्तक्षेप: कोविड–19 के बाद” और "सक्रिय दवा सामग्री: स्थिति, मुद्दे, प्रौद्योगिकी तैयारी तथा चुनौतियाँ" पर श्वेत पत्र जारी किये।

श्वेत पत्र के बारे में

  • “टीआईएफएसी का श्वेत पत्र भारतीय अर्थव्यवस्था पर महामारी के प्रभाव को समझने, मूल्यांकन और परिभाषित करने मदद करेगा। इस से नीति निर्धारकों (भारत सरकार) और जनता को व्यापक आर्थिक आघात को कम करने और भारतीय अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देने में मार्गदर्शन मिलेगा। इससे मंदी के शोर को कम करने और नए मंत्र के रूप में आत्मनिर्भरता को अपनाकर पुनरुत्थान के लिए जमीन तैयार करने में सहायता मिलेगी।’’
  • इस श्वेत पत्र में क्षेत्र-विशेष की ताकत, बाजार के रुझान और पांच क्षेत्रों में उपलब्ध अवसरों के बारे में बताया गया है। देश के लिए महत्वपूर्ण इन पांच क्षेत्रों में शामिल हैं- स्वास्थ्य देखभाल, मशीनरी, आईसीटी, कृषि, विनिर्माण और इलेक्ट्रॉनिक्स। इन क्षेत्रों के सम्बन्ध में आपूर्ति और मांग, आत्मनिर्भरता और बड़े पैमाने पर उत्पादन क्षमता के बारे में जानकारी दी गयी है। पत्र में मुख्य रूप से सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रणाली, एमएसएमई क्षेत्र, वैश्विक संबंध: एफडीआई, पुनर्गठित व्यापार संतुलन, नए-युग की प्रौद्योगिकियों आदि क्षेत्रों में नीति विकल्पों की पहचान की गयी है। यह प्रमुख क्षेत्रों में प्रौद्योगिकी समूहों के विकास, स्टार्ट-अप एक्सचेंज, दस ब्लॉकबस्टर प्रौद्योगिकियों की पहचान और समर्थन करने तथा इज़राइल, जर्मनी के इन्क्यूबेटरों के साथ सहयोग करने, आयात प्रतिस्थापन को बढ़ावा देने के साथ-साथ सनराइज टेक्नोलॉजी में प्रौद्योगिकी प्लेटफार्मों को विकसित करने के लिए महत्वपूर्ण है। भारत को 'आत्मनिर्भर' बनाने के उद्देश्य से तत्काल प्रौद्योगिकी और नीतिगत प्रोत्साहन देने के लिए इन सिफारिशों को तैयार किया गया है पत्र में विभिन्न क्षेत्रों के उत्पादन के बीच संबंधों और एक-दूसरे पर निर्भर होने आधार पर, विभिन्न क्षेत्रों के लिए उत्पादन और आय में गुणात्मक वृद्धि को प्रस्तुत किया गया है।

:: विज्ञान और प्रौद्योगिकी ::

एएच-64 अपाचे हेलीकॉप्टर

चर्चा में क्यों?

  • चीन के साथ सीमा पर तनावपूर्ण गतिरोध के बीच प्रमुख अमेरिकी एयरोस्पेस कंपनी बोइंग ने 22 अपाचे लड़ाकू हेलीकॉप्टरों में से अंतिम पांच हेलीकाप्टर पिछले महीने भारतीय वायुसेना को सौंप दिये और यह पूरी फ्लीट अब वास्तविक नियंत्रण रेखा के पास प्रमुख हवाई ठिकानों पर तैनात विमानों एवं हेलीकाप्टरों का हिस्सा बन गई है।
  • संयुक्त उद्यम, टाटा बोईंग एयरोस्पेस लिमिटेड (टीबीएएल) अमरीकी सेना और अंतर्राष्ट्रीय ग्राहकों के लिए एएच-64 अपाचे हेलीकॉप्टर के एयरो स्ट्रक्चर का निर्माण कर रहा है।

बोईंग AH-64 अपाचे की खूबियां

  • यह अटैक हेलीकॉप्टर हेलफायर मिसाइल्स, 70mm रॉकेट्स, अधिकतम 1200 शक्तिशाली विस्फोटकों वाली 30mm ऑटोमैटिक कैनन से लैस है।
  • इसमें अत्याधुनिक राडार और निशाना साधने वाला सिस्टम लगा हुआ है।
  • इसके वैकल्पिक स्टिंगर या साइडवाइंडर मिसाइल इसमें हवा से हवा में हमला करने में भी सक्षम बनाते हैं।
  • दो हाई-पर्फामेंस टर्बोशाफ्ट इंजन वाला अपाचे टू सीटर हेलीकॉप्टर है और इसकी रेंज 476 किलोमीटर है।
  • अपाचे की अधिकतम रफ्तार 284 किलोमीटर प्रतिघंटा है और इसका अधिकतम भार 10.4 टन यानी 10400 किलोग्राम है।
  • 17.73 मीटर लंबे अपाचे की ऊंचाई 4.64 मीटर है।
  • निर्माण कंपनी बोईंग कंपनी का दावा है कि अपाचे दुनिया का सबसे अत्याधुनिक मल्टी-रोल कॉम्बैट हेलीकॉप्टर है।
  • टार्गेट को लोकेट, ट्रैक और अटैक करने के इसमें लेजर, इंफ्रारेड, केवल टार्गेट को ही देखने, पायलट के लिए नाइट विजन सेंसर समेत अन्य आधुनिक तकनीक दी गई हैं।
  • इनमें हर मौसम और रात में दूर के लक्ष्यों पर बिल्कुल सटीक निशाना लगाने की क्षमता है।
  • अपाचे बिना पहचान में आए रुके या चलते-फिरते लक्ष्यों तो भांप सकता है।
  • अपाचे में लगे अत्याधुनिक सेंसर्स नेटवर्किंग-डिजिटल कम्यूनिकेशन से जुड़े होते हैं जो युद्ध क्षेत्र की पूरी स्थिति, तस्वीरें, लक्ष्यों के ठिकानें आदि की रीयल टाइम जानकारी ग्राउंड कमांडर्स को भेजते रहते हैं।

:: पर्यावरण और पारिस्थितिकी ::

भारतीय सेना को पर्यावरण संरक्षण के लिए लेबनान में मिला प्रथम पुरस्कार

  • भारतीय सेना के पराक्रम को दुनिया ने एक बार फिर सराहा है। संयुक्त राष्ट्र शांति मिशन में लेबनान में तैनात भारतीय सेना को पर्यावरण संरक्षण के लिए प्रथम पुरस्कार मिला है। भारतीय सेना के जवानों ने संयुक्त राष्ट्र शांति मिशन के तहत लेबनान में तैनाती के बात से ही यहां शांति स्थापना में सराहनीय कार्य किए हैं।
  • भारतीय जवानों ने यहां पर्यावरण संरक्षण की दिशा में भी काफी काम किए हैं। मिशन के दौरान जवानों ने यहां बड़े पैमाने पर पौधारोपण का काम किया है। जवानों ने लेबनान में स्वच्छता अभियान के साथ प्लास्टिक रीसाइक्लिंग, ग्रीन हाउस निर्माण और कूड़ा फैलाने पर सख्ती जैसे अनेक काम किए हैं। इसकों लेकर लेबनान में भारतीय जवानों की काफी सराहना हो रही है।
  • लेबनान में संयुक्त राष्ट्र अंतरिम बल के प्रमुख मेजर जनरल स्टेफनो डेल कोल पुरस्कार के बारे में जानकारी देते हुए कहा कि इस बार कुल सात टीमों को पर्यावरण पुरस्कार दिए गए हैं। भारतीय टीम इसमें सबसे आगे रही है। पर्यावरण संरक्षण के लिए सालाना पुरस्कार की घोषणा पिछले साल दिसंबर में की गई थी।

पृष्ठभूमि

  • इस समय दुनियाभर में 13 जगहों पर यूएन शांति मिशन चल रहे हैं। इसमें भारतीय सैनिकों का योगदान हमेशा सबसे बेहतर रहा है। भारत संयुक्‍त राष्‍ट्र के शांति अभियानों में सबसे ज्‍यादा सैनिकों का योगदान करने वाले देशों में से एक है।

भारतीय शांति सैनिकों को संयुक्‍त राष्‍ट्र का प्रतिष्ठित पदक

  • पिछले साल दिसंबर, 2019 में दक्षिण सूडान में तैनात लगभग 850 भारतीय शांति सैनिकों को समर्पण और बलिदान के लिए संयुक्‍त राष्‍ट्र का प्रतिष्ठित पदक प्रदान किया गया था। भारतीय शांति सैनिकों ने संघर्षग्रस्‍त दक्षिण सूडान में शांति बनाए रखने में उत्‍कृष्‍ट योगदान दिया। भारतीय जवानों ने स्‍थानीय समुदायों की सहायता करने के लिए अपने कर्तव्‍य से भी बढ़कर काम किया।

:: विविध ::

फोर्ब्स रियल टाइम बिलिनेयर रैंकिंग्स: दुनिया के सातवें सबसे अमीर बने मुकेश अंबानी

चर्चा में क्यों?

  • भारत के सबसे अमीर शख्स और रिलायंस इंडस्ट्रीज के चेयरमैन मुकेश अंबानी अब दुनिया के सातवें सबसे अमीर शख्स बन गए हैं। उन्होंने बर्कशायर हैथवे के वॉरेन बफेट, गूगल के लैरी पेज और Serge Brin को पीछे छोड़ दिया है।
  • विश्व के टॉप-10 अमीरों की लिस्ट में पूरे एशिया से एकमात्र मुकेश अंबानी शामिल हैं। फोर्ब्स के मुताबिक, उनकी कुल संपत्ति 70 अरब डॉलर पर पहुंच गई है।
  • इससे पहले 20 जून के मुकेश अंबानी फोर्ब्स की लिस्ट में नौवें पायदान पर थे। उस समय उनकी कुल संपत्ति 64.5 अरब डॉलर थी। उस हिसाब से पिछले 20 दिनों में उनकी संपत्ति में 5.4 अरब डॉलर का इजाफा हुआ है। रिलायंस इंडस्ट्रीज का मार्केट कैप हाल ही में 12 लाख करोड़ करोड़ को पार किया था। यह भारत की पहली कंपनी है जिसका मार्केट कैप 12 लाख करोड़ पर पहुंचा है।

फोर्ब्स रियल टाइम बिलिनेयर रैंकिंग्स के बारे में

  • फोर्ब्स रियल टाइम बिलिनेयर रैंकिंग्स (Forbes' Real-Time Billionaires rankings) में संपत्ति का आकलन शेयर की कीमत के आधार पर तय किया जाता है। यह हर पांच मिनट में अपडेट होता है।

जेफ बेजोस पहले नंबर पर

  • आज की लिस्ट में जेफ बेजोस पहले नंबर पर हैं। उनकी कुल संपत्ति 188.2 अरब डॉलर, बिल गेट्स दूसरे नंबर पर (110.70 अरब डॉलर), बर्नार्ड ऑर्नोल्ट फैमिली तीसरे नंबर पर (108.8 अरब डॉलर), मार्क जुकरबर्ग चौथे नंबर पर (90 अरब डॉलर), स्टीव बॉल्मर पांचवे नंबर पर (74.5 अरब डॉलर), लैरी एलिसन छठे नंबर पर (73.4 अरब डॉलर), मुकेश अंबानी सातवें नंबर पर (70.10 अरब डॉलर) हैं। इसके बाद वॉरेन बफेट, उसके बाद लैरी पेज और सर्जी ब्रिन हैं।

:: प्रिलिम्स बूस्टर ::

  • बाजार में कुशल श्रम की मांग और आपूर्ति के अंतराल को भरने हेतु हाल ही में सरकार के द्वारा AI आधारित किस पोर्टल की शुरूआत की गई है (असीम-Aatamanirbhar Skilled Employee Employer Mapping-ASEEM)
  • हाल ही में सरकार के द्वारा भारत के पांच महत्वपूर्ण क्षेत्रों से संबंधित किस श्वेत पत्र को जारी किया गया? (“Focused Interventions for ‘Make in India’: Post COVID 19)
  • जहाजरानी मंत्रालय के द्वारा सर्वोत्तम वैश्विक प्रथाओं, तकनीकी विकास और नौवहन में अंतर्राष्ट्रीय दायित्वों के निर्वहन हेतु किस मसौदा विधेयक को प्रस्तुत किया गया है? (नौवहन सहायता विधेयक-2020)
  • हाल ही में किस देश में संयुक्त राष्ट्र शांति मिशन के तहत तैनात भारतीय सेना को पर्यावरण संरक्षण में योगदान के लिए प्रथम पुरस्कार प्रदान किया गया है? (लेबनान)
  • हाल ही में उच्चतम न्यायालय ने सभी कानूनी प्रक्रियाओं के लिए अनिवार्य समन और नोटिस भेजने के लिए किन इलेक्ट्रॉनिक माध्यम को मंजूरी प्रदान की गई है? (वाट्सएप, ईमेल और फैक्स)
  • भारत सरकार द्वारा नागरिकों के गैर निजी डाटा संग्रह करने वाली कंपनियों (फेसबुक, गूगल और अमेजन) पर नीति नियंत्रण हेतु किसकी अध्यक्षता में एक पैनल का गठन किया गया था? (क्रिस गोपालकृष्णन)
  • वेबीनार से चर्चा में रहे ‘गोल (Going Online as Leaders)’ कार्यक्रम को क्यों एवं किस कंपनी के सहयोग से लॉन्च किया गया था? (आदिवासी युवाओं को मेंटरशिप प्रदान करनेहेतु, फेसबुक)
  • नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय द्वारा परामर्श जारी करने से चर्चा में रहे ‘प्रधानमंत्री- कुसुम योजना’ किससे संबंधित है? (सौर पंपों की स्थापना एवं अन्य आधारित कृषि पंपों का सौर पंपों में रूपांतरण)
  • हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के द्वारा देश के किस स्थान पर स्थित एशिया की सबसे बड़ी सौर परियोजना को राष्ट्र को समर्पित किया गया? (रीवा, मध्य प्रदेश)
  • ऑस्ट्रेलिया को युद्धाभ्यास में शामिल किए जाने के संदर्भ में चर्चा में रहे मालाबार सैन्य अभ्यास किन दो देशों के मध्य आयोजित की जाती है? (अमेरिका, जापान और भारत)
  • हाल ही में किस भारतीय कारोबारी को दुनिया के सातवें सबसे अमीर व्यक्ति के रूप में विश्व के टॉप-10 अमीरों की सूची में अपनी जगह बनाई है? (मुकेश अंबानी- रिलायंस इंडस्ट्रीज)
  • वास्तविक नियंत्रण रेखा पर भारतीय वायुसेना द्वारा तैनाती से ‘अपाचे (AH-64 Apache)क्या है एवं इसे किस कंपनी द्वारा निर्मित किया गया है? (लड़ाकू हेलीकॉप्टर, बोइंग-अमेरिका)

स्रोत साभार: Dainik Jagran (Rashtriya Sanskaran), Dainik Bhaskar (Rashtriya Sanskaran), Rashtriya Sahara (Rashtriya Sanskaran) Hindustan Dainik (Delhi), Nai Duniya, Hindustan Times, The Hindu, BBC Portal, The Economic Times (Hindi & English), PTI, PIB