(दैनिक समसामयिकी और प्रिलिम्स बूस्टर) यूपीएससी और सभी राज्य लोक सेवा आयोग परीक्षाओं के लिए हिंदी में समाचार पत्रों का संकलन (11 दिसंबर 2019)

दैनिक समसामयिकी और प्रिलिम्स बूस्टर


(दैनिक समसामयिकी और प्रिलिम्स बूस्टर) यूपीएससी और सभी राज्य लोक सेवा आयोग परीक्षाओं के लिए हिंदी में समाचार पत्रों का संकलन (11 दिसंबर 2019)


:: राष्ट्रीय समाचार ::

भारतीय संस्कृति पोर्टल

  • केंद्रीय संस्कृति और पर्यटन राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्री प्रहलाद सिंह पटेल ने नई दिल्ली में भारतीय संस्कृति वेब पोर्टल का शुभारंभ किया। भारतीय संस्कृति पोर्टल की परिकल्पना संस्कृति मंत्रालय द्वारा की गई थी और इसे भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी), बॉम्बे की एक टीम द्वारा विकसित किया गया था, जबकि डेटा का क्यूरेशन इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मुक्त विश्वविद्यालय (आईजीएनओयू) द्वारा किया गया है।
  • भारतीय संस्कृति पोर्टल पहला सरकारी अधिकृत पोर्टल है जहाँ संस्कृति मंत्रालय के विभिन्न संगठनों के ज्ञान और सांस्कृतिक संसाधन अब एक ही मंच पर सार्वजनिक क्षेत्र में उपलब्ध हैं।
  • पोर्टल पर उपलब्ध सामग्री में मुख्य रूप से दुर्लभ पुस्तकें, ई-पुस्तकें, पांडुलिपियां, संग्रहालय की कलाकृतियों, आभासी दीर्घाओं, अभिलेखागार, फोटो अभिलेखागार, गजेटियर, भारतीय राष्ट्रीय ग्रंथ सूची, वीडियो, चित्र, व्यंजन, यूनेस्को, भारत के संगीत उपकरण शामिल हैं।

पूर्वावलोकन – नौसेना हथियार प्रणाली - नवआर्म्स- 2019 पर अंतर्राष्ट्रीय संगोष्ठी सह प्रदर्शनी

  • नौसेना हथियार प्रणाली “नवआर्म्स - 2019” पर चौथी अंतर्राष्ट्रीय संगोष्ठी सह प्रदर्शनी 12-13 दिसंबर, 2019 को नई दिल्ली के रक्षा अध्ययन और विश्लेषण संस्थान में होगी। संगोष्ठी का विषय है – “मेक इन इंडिया – युद्ध श्रेणी : अवसर और आवश्यकताएं”। दो दिन की संगोष्ठी में पांच सत्र होंगे जिनमें नौसेना हथियार प्रणाली के क्षेत्र में विचारों का आदान-प्रदान किया जाएगा और भारतीय/ अंतर्राष्ट्रीय रक्षा उद्योग की उभरती संभावनाओं की पहचान की जाएगी। नवआर्म्स नौसेना हथियार प्रणाली पर एक मात्र अंतर्राष्ट्रीय संगोष्ठी और प्रदर्शनी है। यह संगोष्ठी सभी हितधारकों को अपने विचार रखने का साझा मंच प्रदान करती है।
  • पहले नवआर्म्स संगोष्ठी 2007, 2010 तथा 2013 में आयोजित की जा चुकी हैं। इन संगोष्ठिओं से उद्योग, रक्षा मंत्रालय, डीआरडीओ तथा अन्य हितधारकों में भागीदारी के लिए उत्साह बढ़ा है।
  • भारत का सर्वश्रेष्ठ समुद्री चरित्र और महत्वपूर्ण भौगोलिक रणनीतिक स्थिति ने राष्ट्र के रूप में भारत के विकास को परिभाषित किया है। आज भारतीय नौसेना भारत की समुद्री शक्ति की प्रधान अभिव्यक्ति है और भारतीय नौसेना समुद्री क्षेत्र में भारत की सुरक्षा और राष्ट्रीय हितों का संरक्षण और प्रोत्साहन के कार्य में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। बदलती भौगोलिक-आर्थिक तथा भौगोलिक-रणनीतिक परिस्थितियों में नौसेना की भूमिका और जिम्मेदारियां काफी बढ़ी हैं। इससे भारत की सुरक्षा और खतरे के लिए हथियार प्रणाली की व्यापक आवश्यकता दिखी है।

देश का पहला काई संरक्षण और शोध सेंटर

  • नैनीताल में देश का पहला काई संरक्षण और शोध सेंटर बनाकर वन विभाग काई की प्रजातियों पर रिसर्च की शुरुआत कर चुका है। सबसे पुरानी वनस्पतियों में शामिल इस प्रजाति को आमतौर पर बेकार समझा जाता है, लेकिन पारिस्थितिकीय तंत्र में इसका खासा महत्व है। प्रदूषण का सबसे बड़ा इंडिकेटर मानी जानी वाली काई में एंटीसेप्टिक व एंटी बैक्टीरिया जैसे औषधीय गुण शामिल हैं। काई को प्रदूषण का इंडिकेटर इसलिए माना जाता है, क्योंकि यह धूल व गंदगी के बीच नहीं पनपती। चटक धूप व सूखी पत्तियां इसे पनपने में दिक्कत करती हैं। वनाधिकारियों के मुताबिक देश में पहली बार शुरू हुए रिसर्च में हिमालयी काई प्रजातियों को भी शामिल किया जाएगा।
  • खुर्पाताल में शुरुआती दौर में 21 प्रजातियों का संरक्षण हो चुका है। इसमें होफिला, फिसीडेंस, फोलिया, ब्रोथरा, स्टीरियोफिलम, लिकोडन आदि शामिल हैं। लोगों को इनका महत्व पता चल सके, इसलिए हर प्रजाति का पूरा विवरण दर्ज किया जाएगा।

नेहरू-लियाकत समझौता

  • लोकसभा में नागरिकता संशोधन विधेयक को सही ठहराते हुए सोमवार को गृह मंत्री अमित शाह ने नेहरू-लियाकत समझौते का उल्लेख किया। उन्होंने नेहरू-लियाकत समझौते को 'कैब' की वजह बताते हुए कहा, यदि पाकिस्तान द्वारा संधि का पालन किया गया होता, तो इस विधेयक को लाने की कोई आवश्यकता नहीं होती। 1950 में दिल्ली में तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू और पाकिस्तान के प्रधानमंत्री लियाकत अली खान ने एक समझौते पर हस्ताक्षर किए थे, जिसे नेहरू-लियाकत समझौता नाम दिया गया। आइए जानते हैं क्या है यह समझौता और यह क्यों किया गया था:

पृष्टभूमि

  • दोनों देशों के बीच अल्पसंख्यक समुदायों के बड़े पैमाने पर प्रवासन की पृष्ठभूमि में समझौते पर हस्ताक्षर किए गए थे। बड़ी चिंता पूर्वी पाकिस्तान (जो बाद में बांग्लादेश बना) से हिंदुओं और पश्चिम बंगाल से मुसलमानों का पलायन था। जम्मू-कश्मीर में पाकिस्तान की घुसपैठ के साथ दोनों देशों के बीच के रिश्ते पहले ही तनावपूर्ण हो चुके थे। पाकिस्तान से अल्पसंख्यक हिंदुओं, सिखों, जैन और बौद्धों के पलायन और भारत में मुसलमानों को गंभीर शरणार्थी संकट का सामना करना पड़ा। इसे रोकने के लिए दोनों देशों के बीच अप्रैल 1950 में नेहरू-लियाकत समझौता हुआ।

क्या है समझौता

  1. इस समझौते के तहत शरणार्थी अपनी संपत्ति का निपटान करने के लिए भारत-पाकिस्तान आ जा सकते थे।
  2. अगवा की गई महिलाओं और लूटी गई संपत्ति को वापस किया जाना था।
  3. जबरन धर्मातरण को मान्यता नहीं दी गई थी।
  4. दोनों देशों ने अपने-अपने देश में अल्पसंख्यक आयोग गठित किए।
  • दिल्ली पैक्ट के नाम से भी मशहूर इस समझौते का विरोध करते हुए नेहरू सरकार में उद्योगमंत्री रहे डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने इस्तीफा दे दिया था। मुखर्जी तब हिंदू महासभा के नेता थे। उन्होंने समझौते को मुस्लिम तुष्टिकरण करने वाला बताया था।
  • नेहरू-लियाकत समझौते ने अपने घोषित उद्देश्यों को हासिल किया या नहीं, यह बहस का विषय बना हुआ है। हालांकि, नेहरू-लियाकत समझौते पर हस्ताक्षर होने के बाद महीनों तक पूर्वी पाकिस्तान के हिंदुओं का पलायन भारत के पश्चिम बंगाल में जारी रहा।
  • अगस्त 1966 में, जनसंघ के नेता निरंजन वर्मा ने तत्कालीन विदेश मंत्री सरदार स्वर्ण सिंह से तीन प्रश्न पूछे।पहला सवाल: नेहरू-लियाकत समझौते की वर्तमान स्थिति क्या है?
  • दूसरा सवाल: क्या दोनों देश अभी भी समझौते की शतरें के अनुसार कार्य कर रहे हैं?
  • तीसरा सवाल: वह साल कौन सा है, जब से पाकिस्तान समझौते का उल्लघंन कर रहा है?
  • स्वर्ण सिंह ने अपने जवाब में कहा, 1950 का नेहरू-लियाकत समझौता भारत और पाकिस्तान के बीच एक स्थायी समझौता है। दोनों देशों को यह सुनिश्चित करने की आवश्यकता है कि अल्पसंख्यकों को भी नागरिकता के समान अधिकार प्राप्त हों।
  • दूसरे सवाल पर, स्वर्ण सिंह ने जवाब दिया, हालांकि भारत में, अल्पसंख्यकों के अधिकारों और सुरक्षा को लगातार और प्रभावी रूप से संरक्षित किया गया है, पाकिस्तान ने अल्पसंख्यक समुदाय के सदस्यों की लगातार उपेक्षा और उत्पीड़न करके समझौते का लगातार उल्लंघन किया है।
  • तीसरे प्रश्न का उत्तर नेहरू-लियाकत समझौते की विफलता के बारे में अमित शाह द्वारा किए गए दावे को परिलक्षित करता है। स्वर्ण सिंह ने कहा, इस तरह के उल्लंघनों के उदाहरण समझौते होने के तुरंत बाद ही सामने आने लगे थे।

:: अंतर्राष्ट्रीय समाचार ::

अंतरराष्ट्रीय धार्मिक स्वतंत्रता पर अमेरिकी आयोग

  • नागरिकता (संशोधन) विधेयक (CAB) पर अंतर्राष्ट्रीय धार्मिक स्वतंत्रता (USCIRF) पर अमेरिकी आयोग द्वारा की गई टिप्पणियों को लेकर भारतीय विदेश मंत्रालय ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है. भारतीय विदेश मंत्रालय की ओर से कहा गया है कि नागरिकता (संशोधन) विधेयक पर अमेरिकी आयोग (USCIRF) का बयान सटीक नहीं है. विदेश मंत्रालय के अनुसार, अमेरिका सहित हर देश को अपनी नीतियों को मानने और मान्य करने का पूरा विशेषाधिकार है. विदेश मंत्रालय ने यह भी कहा, नागरिकता (संशोधन) विधेयक (CAB) भारतीय नागरिकता के लिए कुछ देशों में धार्मिक अल्पसंख्यकों को सताए जाने वाले लोगों के लिए लाया गया है. यह उनकी वर्तमान कठिनाइयों को दूर करने और उनके बुनियादी मानवाधिकारों को पूरा करने का प्रयास करता है. न तो Cizizenship Amendment Bill 2019 और न ही National Register of Citizens प्रक्रिया किसी भी भारतीय नागरिक से किसी भी विश्वास की नागरिकता छीनना चाहती है.

पृष्टभूमि

  • अंतरराष्ट्रीय धार्मिक स्वतंत्रता पर गठित अमेरिका के एक संघीय आयोग ने नागरिकता संशोधन विधेयक को 'गलत दिशा में खतरनाक मोड़' करार दिया है. आयोग ने गृह मंत्री अमित शाह के खिलाफ अमेरिकी प्रतिबंधों की मांग भी की है. अमेरिकी अंतर्राष्ट्रीय धार्मिक स्वतंत्रता आयोग (USCIRF) की ओर से सोमवार को जारी एक बयान में कहा गया, आयोग भारत के लोकसभा में नागरिकता संशोधन विधेयक पारित होने को लेकर बहुत चिंतित है. आयोग ने यह भी कहा, "अगर नागरिकता संशोधन विधेयक संसद के दोनों सदनों से पारित हो जाता है, तो अमेरिकी सरकार को गृह मंत्री अमित शाह और अन्य प्रमुख नेताओं पर प्रतिबंधों को लेकर विचार करना चाहिए."
  • एक दिन पहले भारत के गृह मंत्री अमित शाह ने नागरिकता (संशोधन) विधेयक, 2019 लोकसभा में पेश किया. बिल पेश करते हुए उन्‍होंने कहा, विधेयक का उद्देश्‍य पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान के गैर-मुस्लिम प्रवासियों, जिन्‍हें धर्म के आधार पर वहां प्रताड़ित किया गया है, को नागरिकता देना है.

:: भारतीय राजव्यवस्था ::

आर्म्‍स संशोधन बिल 2019

  • संसद ने मंगलवार को आयुध संशोधन विधेयक 2019 को मंजूरी दे दी, जिसमें प्रतिबंधित हथियारों के निर्माण पर आजीवन कारावास तक की सजा और एक लाइसेंस पर अब केवल दो हथियार तक रखने का प्रावधान किया गया है. अभी तक एक लाइसेंस पर तीन हथियार रख सकते हैं.

विधेयक के मुख्य तथ्य

  • अब एक लाइसेंस पर अधिकतम दो शस्‍त्र ही रखे जा सकते हैं
  • एक लाइसेंस पर दो से अधिक हथियार होने पर अपने तीसरे या अधिक हथियारों को पुलिस थाना या हथियार विक्रेता के पास जमा करना होगा
  • प्रस्तावित कानून के गजट में अधिसूचित होने के एक वर्ष के भीतर इन हथियारों को निष्क्रिय किया जाएगा.
  • गैर कानूनी हथियारों को बेचने और तस्करी करने वालों को आजीवन कारावास का प्रावधान
  • पुलिस से शस्त्र छीनने वाले और चुराने वालों के लिए भी सख्त प्रावधान
  • प्रतिबंधित गोला-बारूद रखने वालों को 7 से 14 वर्ष की सजा का प्रावधान
  • प्रतिबंधित हथियारों के निर्माण, बिक्री, मरम्मत और रखने पर न्यूनतम 14 वर्ष और अधिकतम उम्र कैद का प्रावधान
  • विधेयक में लाइसेंस हथियार के नवीनीकरण की अवधि को तीन साल से बढ़ाकर पांच साल की गई
  • त्योहारों, शादी विवाह के मौकों पर फायरिंग करने वालों को अब जेल जाना पड़ेगा
  • आने वाले समय में कारतूसों पर भी एक नंबर होगा,कारतूसों का नंबर होने से पता चलेगा कि इसे किस दुकान से किस व्यक्ति ने उस कारतूस को खरीद है
  • कारतूसों के नंबर होने से हथियारों एवं कारतूस के उपयोग पर नजर रखने में मदद मिलेगी
  • सरकार लाइसेंस की पूरी प्रकिया को ऑनलाइन बनाने के लिए एक पोर्टल तैयार करेगी

बिल लाने के कारण

  • साल 2016 में 169 लोगों की ऐसी हर्ष फायरिंग की घटनाओं में जान गई थी
  • अर्द्ध सैनिक बलों ने 2019 में 1438 अवैध बंदूकों-पिस्तौलों को जब्त किया है.
  • रिपोर्ट के मुतबिक विश्व में बंदूक से आत्महत्या के जो मामले होते हैं, उनमें भारत तीसरे स्थान पर है

एससी-एसटी आरक्षण

  • सरकारी नौकरियों में एससी और एसटी को पदोन्नति के लिए कोटा देने से संबंधित याचिका पर सुनवाई के लिए सुप्रीम कोर्ट ने 28 जनवरी, 2020 का दिन तय किया है।
  • इससे पहले केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट से अनुरोध किया था कि एससी/एसटी समुदाय के क्रीमी लेयर को आरक्षण के लाभों से बाहर रखने वाले 2018 के उसके आदेश को पुनर्विचार के लिए सात सदस्यीय पीठ के पास भेजा जाए।
  • पांच सदस्यीय संविधान पीठ ने 2018 में कहा था कि अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के समृद्ध लोग यानी कि क्रीमी लेयर को कॉलेज में दाखिले तथा सरकारी नौकरियों में आरक्षण का लाभ नहीं दिया जा सकता।
  • इस मुद्दे पर जनहित याचिकाओं पर सुनवाई कर रही प्रधान न्यायाधीश बोबडे की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा था कि एससी/एसटी की क्रीमी लेयर को आरक्षण के लाभ से बाहर रखने या न रखने के पहलू पर दो सप्ताह बाद विचार किया जाएगा।
  • इसे लेकर समता आंदोलन समिति और पूर्व आईएएस अधिकारी ओ पी शुक्ला ने नई याचिका दायर की थी। एक जनहित याचिका में एससी/एसटी की क्रीमी लेयर की पहचान के लिए तर्कसंगत जांच करने और उन्हें एससी/एसटी की नॉन क्रीमी लेयर से अलग करने का निर्देश देने का अनुरोध किया गया है।

:: भारतीय अर्थव्यवस्था ::

सीसीआई ने निप्‍पन एक्‍सप्रेस द्वारा फ्यूचर सप्‍लाई के शेयर अधिग्रहण को मंजूरी दी

  • भारतीय प्रतिस्‍पर्धा आयोग (सीसीआई) ने प्रतिस्‍पर्धा अधिनियम, 2002 की धारा 31(1) के तहत निप्‍पन एक्‍सप्रेस (साउथ एशिया एंड ओशिनिया) पीटीई.लिमिटेड (निप्‍पन एक्‍सप्रेस) द्वारा फ्यूचर सप्‍लाई चेन सॉल्‍यूशंस लिमिटेड (फ्यूचर सप्‍लाई) की अंशभागिता या हिस्‍सेदारी खरीदे जाने को मंजूरी दे दी।
  • प्रस्‍तावित अधिग्रहण का वास्‍ता निप्‍पन एक्‍सप्रेस द्वारा फ्यूचर सप्‍लाई की कुल निर्गमित एवं चुकता शेयर पूंजी का लगभग 22 प्रतिशत खरीदे जाने से संबंधित है। यह शेयर खरीद ‘फुली-डाइल्‍यूटेड (समस्‍त तरह के बदलाव के बाद खुले बाजार में ट्रेडिंग के लिए उपलब्‍ध कुल शेयर)’ के आधार पर हुई है।
  • निप्‍पन एक्‍सप्रेस दरअसल निप्‍पन एक्‍सप्रेस कंपनी लिमिटेड की सिंगापुर स्थित पूर्ण स्‍वामित्‍व वाली सहयोगी कंपनी है जिसके परिचालन दक्षिण एशिया एवं ओशिनिया क्षेत्रों में फैले हुए हैं। यह जापान स्थित एक वैश्विक लॉजिस्टिक्‍स कंपनी है जो एकल स्‍थान पर लॉजिस्टिक्‍स सेवाएं मुहैया कराती है जिनमें परिवहन सेवाएं, वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला प्रबंधन, वेयरहाउस एवं वितरण सेवाएं इत्‍यादि शामिल हैं।
  • फ्यूचर सप्‍लाई भारत में एक थर्ड-पार्टी सप्‍लाई चेन और लॉजिस्टिक्‍स सेवा प्रदाता है जो ऑटोमेटेड एवं आईटी आधारित वेयरहाउसिंग एवं वितरण तथा अन्‍य लॉजिस्टिक्‍स सॉल्‍यूशंस मुहैया कराती है। इन सेवाओं में ये शामिल हैं: अनुबंध पर लॉजिस्टिक्‍स, एक्‍सप्रेस लॉजिस्टिक्‍स और तापमान नियंत्रित लॉजिस्टिक्‍स। इसके अलावा, यह जल एवं हवाई मार्गों के जरिए अंतर्राष्‍ट्रीय माल अग्रेषण (फ्रेट फॉरवर्डिंग) सेवाएं भी मुहैया कराती है।

:: पर्यावरण और पारिस्थितिकी ::

जलवायु परिवर्तन प्रदर्शन सूचकांक

  • स्पेन की राजधानी मैड्रिड में 'कॉप 25' जलवायु परिवर्तन सम्मेलन में सीसीपीआइ रिपोर्ट जारी की गई। भारत पहली बार इस वर्ष के जलवायु परिवर्तन प्रदर्शन सूचकांक (CCPI) में शीर्ष दस देशों में शामिल हुआ है। रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत में प्रति व्यक्ति उत्सर्जन और ऊर्जा इस्तेमाल का मौजूदा स्तर 'उच्च श्रेणी' में नौवें स्थान पर है। हालांकि यह अभी तुलनात्मक रूप से कम है।वहीं अमेरिका सबसे खराब प्रदर्शन करने वाले देशों में पहली बार शामिल हुआ है। यहां तक कि कोयला उद्योगों के दम पर अब भी अपनी अर्थव्यवस्था चला रहे ऑस्ट्रेलिया और सऊदी अरब भी अत्यधिक कार्बन उत्सर्जन करने वाले देशों में शामिल हैं।
  • हालांकि, अपनी जलवायु नीति के प्रदर्शन के लिए उच्च रेटिंग के बावजूद विशेषज्ञों का कहना है कि भारत सरकार को अभी जीवाश्म ईंधन पर दी जा रही सब्सिडी को चरणबद्ध तरीके से कम करने के लिए रूपरेखा बनानी होगी। इसके परिणामस्वरूप कोयले पर देश की निर्भरता कम हो जाएगी।

रिपोर्ट के मुख्य बिंदु

  • रिपोर्ट में कहा गया है कि 57 उच्च उत्सर्जन वाले देशों में से 31 में उत्सर्जन का स्तर कम होने के रुझान दर्ज किए गए हैं। ये देश 90 प्रतिशत उत्सर्जन के लिए जिम्मेदार हैं। जर्मनवॉच न्यूक्लाइमेट इंस्टीट्यूट एंड क्लाइमेट एक्शन नेटवर्क के संयुक्त रूप से पेश सूचकांक के विश्लेषकों में से एक उर्सुला हेगन ने कहा, 'नए जलवायु परिवर्तन प्रदर्शन सूचकांक से कोयले की खपत में कमी समेत उत्सर्जन में वैश्विक बदलाव के संकेत दिखाई देते हैं।' इस सूचकांक में स्वीडन चौथे और डेनमार्क पांचवें स्थान पर है। सबसे बड़े वैश्विक उत्सर्जक चीन ने सूचकांक में अपनी रैंकिंग में मामूली सुधार करते हुए 30वां स्थान हासिल किया है।
  • केवल दो जी20 देशों ब्रिटेन (7वें) और भारत (नौंवे) को 'उच्च' श्रेणी में स्थान दिया गया है जबकि जी20 के आठ देश सूचकांक की सबसे खराब श्रेणी (बहुत निम्न) में बने हुए हैं। ऑस्ट्रेलिया (61 में से 56वां), सऊदी अरब और खासकर अमेरिका खराब प्रदर्शन करने वाले देशों में हैं। अमेरिका पहली बार सबसे खराब प्रदर्शन करने वाले देश में शामिल हुआ है। सूचकांक के मुताबिक ट्रंप प्रशासन की अगुआई में अमेरिका विभिन्न श्रेणियों में पहली बार 'निम्न' और 'बेहद निम्न' में आते हैं।
  • पर्यावरण से संबंधित विवादित मुद्दों को सुलझाने के लिए विभिन्न देशों के मंत्री स्पेन की राजधानी मैड्रिड पहुंचने लगे हैं। करीब 200 देशों के अधिकारी यहां पिछले एक हफ्ते से अंतरराष्ट्रीय कार्बन बाजार को नियमों से बांधने के प्रयास में कामयाब नहीं हो सके हैं।

वैश्विक निवेशकों की पर्यावरण के लिए कार्रवाई की अपील

  • वैश्विक निवेशकों ने संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण सम्मेलन (COP25) में शामिल होने वाली सरकारों से अपील की है कि वह पर्यावरण के वैश्विक संकट का हल निकालने का प्रयास करें और पेरिस समझौते के लक्ष्यों को हासिल करने के लिए कोयले से उत्पन्न ऊष्मा ऊर्जा को बंद करेंगे। साथ ही कार्बन से होने वाले प्रदूषण की कीमत भी बढ़ाएंगे। जीवाश्म ईंधन पर सब्सिडी बंद करने की भी सिफारिश की गई है। कुल 37 अरब डॉलर के संस्थानों को चलाने वाले निवेशकों ने विभिन्न सरकारों से यह अपील की है।

:: विज्ञान और प्रौद्योगिकी ::

PSLV-C48 और निगरानी उपग्रह रीसेट-2बीआर1

  • RISAT-2BR1 और नौ विदेशी उपग्रहों को ले जाने वाले PSLV-C48 क्यूएल रॉकेट को बुधवार श्रीहरिकोटा के सतीश धवन स्पेस सेंटर में पहले लॉन्च पैड से किया जाना है। RISAT-2BR1 ताकतवर इमेजिंग सैटेलाइट है जो अंतरिक्ष में तैनात होने के बाद भारत की राडार इमेजिंग की ताकत में कई गुना इजाफा कर देगा।
  • PSLV-C48 क्यूएल रॉकेट 628 किलोग्राम वजनी RISAT-2BR1 सैटेलाइट को पृथ्वी से 576 किलोमीटर ऊपर की कक्षा में स्थापित किया जाएगा। RISAT-2BR1 सैटेलाइट के अलावा अमेरिका के 6, इजरायल, जापान और इटली के भी एक-एक सैटेलाइट को इसी रॉकेट से लॉन्च किया जा रहा है। लॉन्च होने के करीब 21 मिनट बाद सभी 10 उपग्रह अपनी-अपनी निर्धारित कक्षाओं में स्थापित हो जाएंगे। यह पीएसएलवी की 50वीं फ्लाइट होगी, जबकि श्रीहरिकोटा स्पेसपोर्ट से 75वां लॉन्च व्हीकल मिशन।

निगरानी उपग्रह रीसेट-2बीआर1

  • RISAT-2BR1 ताकतवर इमेजिंग सैटेलाइट है जो 0.35 मीटर रिज़ॉल्यूशन पर तस्वीरों को कैप्चर करने की क्षमता रखता है। RISAT-2BR1 की X-Band SAR की क्षमताएं मौसम की परवाह किए बगैर बादलों में भी तस्वीरों को क्लिक कर सकती हैं। इसे भारत की सीमाओं की निगरानी और अगले पांच वर्षों के लिए किसी भी घुसपैठ या आतंकवादी अभियानों को मॉनिटर करने के लिए डिज़ाइन किया गया है।

स्पेस जंक कलेक्टर: रोबोट 'क्लीयर स्पेस-1'

  • अंतरिक्ष में एकत्र हुए मलबे को उठाने के लिए यूरोपीयन स्पेस एजेंसी (ईएसए) 2025 में दुनिया का पहला ‘स्पेस जंक कलेक्टर’ भेजेगा जिसे क्लीयर स्पेस-1 नाम दिया है। चार हाथों वाला रोबोट इस मिशन को पूरा करने में अहम भूमिका निभाएगा। अंतरिक्ष विशेषज्ञों का मानना है कि अंतरिक्ष में एकत्र हुआ मलबा भविष्य के मिशन के लिए परेशानी खड़ी कर सकता है। इसी को देखते हुए अंतरिक्ष को साफ करने की जरूरत है। मिशन पर करीब 943 करोड़ रुपये खर्च होंगे।

ऐसे साफ होगा अंतरिक्ष में जमा मलबा

  • अंतरिक्ष में जमा मलबा हटाने के लिए ईएसए ने 2013 में वेस्पा नाम का एक मलबा पृथ्वी की कक्षा से 800 किमी दूर वेगा लॉन्चर की मदद से छोड़ा था। वेस्पा का वजन करीब 100 किग्रा है जो एक छोटे सैटेलाइट के वजन के बराबर है। 2025 में क्लीयर स्पेस-1 प्रोब जब अंतरिक्ष की संबंधित कक्षा में छोड़ा जाएगा तब वो वेस्पा को अपनी चार रोबोटिक आर्म्स से पकड़कर कक्षा से बाहर लाएगा। इसके बाद दोनों वातावरण में जल जाएंगे और धरती की सतह पर गिर जाएंगे। खास बात ये है कि जब इस मलबे को रोबोटिक आर्म पकड़ेगा तो इसके टुकड़े-टुकड़े होने की संभावना भी कम रहेगी।

सफाई की जरूरत क्यों?

  • अंतरिक्ष विशेषज्ञों का मानना है कि पिछले 60 साल में अंतरिक्ष में हजारों टन मलबा पृथ्वी के आसपास जमा हो गया है। इसमें आमतौर पर पुराने रॉकेट के कुछ हिस्से, न इस्तेमाल होने वाले सैटेलाइट और कुछ दूसरी अंतरिक्ष मिशन से जुड़ी सामग्री हैं। अगर अंतरिक्ष को साफ करने का अभियान शुरू नहीं किया गया तो भविष्य में इस तरह का कचरा और बढ़ेगा और सैटेलाइट के इनसे टकराने की संभावना भी अधिक रहेगी।
  • एक रिपोर्ट के अनुसार अंतरिक्ष में पृथ्वी के आसपास पिछले 60 वर्षों में हजारों टन मलबा जमा हुआ है। इसमें पुराने रॉकेट के हिस्सों के साथ, 3,500 सैटेलाइट और 7,50000 छोटे-छोटे टुकड़े मौजूद हैं। अंतरिक्ष में छोटे-छोटे टुकड़े 20 हजार किमी. प्रतिघंटे की रफ्तार से चल रहे हैं।

नए नियम बनाने की भी तैयारी

  • यूरोपीयन स्पेस एजेंसी के महानिदेशक जैन वॉर्नर का कहना है कि अंतरिक्ष को स्वच्छ रखने के लिए नए नियम की जरूरत है। उन्होंने कहा है कि जो भी सैटेलाइट लॉन्च करेगा उसको इस बात की भी जिम्मेदारी लेनी होगी कि जब सैटेलाइट उपयोग में न हो तो उसे संबंधित कक्षा से हटाना भी होगा। इसी में सभी की भलाई है और किसी हालत में अब इसे जारी नहीं रखा जा सकता है।

:: विविध ::

नोबेल अवॉर्ड 2019

  • नोबेल अवॉर्ड 2019 की घोषणा हो चुकी है और मंगलवार को इसे दिया जाएगा। 10 दिसंबर को होने वाले समारोह में नोबेल पुरस्कार विजेताओं को राशि और मेडल से सम्मानित किया जाएगा। इस बार भारतीय मूल के अभिजीत बनर्जी को भी नोबेल पुरस्कार दिया गया है। अर्थशास्त्र के क्षेत्र में अभिजीत बनर्जी के साथ उनकी पत्नी एस्थर डफ्लो और माइकल क्रेमर को भी नोबेल अवॉर्ड दिए जाने का ऐलान हो चुका है। यहां जानिए विभिन्न क्षेत्रों में नोबेल पुरस्कार जीतने वालों की पूरी लिस्ट:

अर्थशास्त्र का नोबेल

  • भारतीय मूल के अभिजीत बनर्जी को वर्ष 2019 के लिए अर्थशास्त्र का नोबेल पुरस्कार दिया गया है। उन्हें यह पुरस्कार फ्रांस की एस्थर डुफ्लो (अभिजीत बनर्जी की पत्नी) और अमेरिका के माइकल क्रेमर के साथ संयुक्त रूप से दिया गया है। यह पुरस्कार 'वैश्विक स्तर पर गरीबी उन्मूलन के लिए किये गये कार्यों के लिए मिला।

शांति का नोबेल

  • इस बार नोबेल शांति पुरस्कार इथियोपिया के प्रधानमंत्री अबी अहमद अली को देने की घोषणा हुई है। यह पुरस्कार उनके देश के चिर शत्रु इरिट्रिया के साथ संघर्ष को सुलझाने के लिए दिया गया है। नोबेल पुरस्कार जूरी ने जानकारी दी थी कि अबी अहमद अली को शांति और अंतर्राष्ट्रीय सहयोग प्राप्त करने के प्रयासों के लिए और विशेष रूप से पड़ोसी इरिट्रिया के साथ सीमा संघर्ष को सुलझाने के निर्णायक पहल के लिए इस पुरस्कार से सम्मानित किया गया।

साहित्य का नोबेल

  • 'द रिमेन्स ऑफ द डे' उपन्यास के लिए मशहूर ब्रिटिश लेखक काजुओ इशिगुरो को इस वर्ष के साहित्य के नोबेल पुरस्कार के लिए चुना गया है। घोषणा में कहा गया था कि 62 साल के लेखक ने शानदार भावनात्मक प्रभाव वाले उपन्यासों में दुनिया के साथ हमारे जुड़ाव की अवास्तविक भावना के नीचे के शून्य को दिखाया है।

फिजिक्स के लिए नोबेल

  • कनाडा-अमेरिका के जेम्स पीबल्स, स्विट्जरलैंड के माइकल मेयर और डिडियर क्वेलोज को फिजिक्स के लिए नेाबेल अवॉर्ड दिए जाने की घोषणा हुई है।

कैमेस्ट्री का नोबेल

  • कैमेस्ट्री के क्षेत्र के लिए भी नोबेल पुरस्कार के नामों की घोषणा हो चुकी है। नोबेल पुरस्कार के लिए अमेरिकी वैज्ञानिक जॉन गुडइनफ, ब्रिटेन के स्टेनली व्हिटिंघम और जापानी वैज्ञानिक अकीरा योशिनो को चुना गया है।

चिकित्सा क्षेत्र में नोबल पुरस्कार

  • दो प्रतिरक्षा वैज्ञानिकों (इम्यूनोलाजिस्ट) अमेरिका के जेम्स एलीसन और जापान के तासुकु होन्जो को कैंसर थेरेपी की खोज के लिए चिकित्सा के क्षेत्र का नोबेल पुरस्कार दिए जाने की घोषणा की हो चुकी है।

सुनील शेट्टी बनें नाडा के ब्रांड एंबेसडर

  • सुनील शेट्टी को राष्ट्रीय डोपिंग रोधी एजेंसी (नाडा) का ब्रांड एंबेसडर बनाया गया है और इस संस्था को उम्मीद है कि उनकी लोकप्रियता से देश में खेलों को डोपिंग के कलंक से निजात दिलाने में मदद मिलेगी।
  • बता दें कि इस साल 150 से अधिक खिलाड़ी डोप परीक्षण में नाकाम रहे। इनमें हालांकि एक तिहाई से भी अधिक बॉडी बिल्डर हैं। तोक्यो ओलंपिक खेलों में जब 8 महीने से भी कम समय बचा है तब इसे अच्छा संकेत नहीं माना जा सकता है।
  • विश्व डोपिंग रोधी एजेंसी (वाडा) ने इस साल के शुरू में नाडा प्रयोगशाला को निलंबित कर दिया था और अब नाडा जो भी नमूने एकत्रित करता है उनका भारत से बाहर परीक्षण किया जाएगा।
  • नाडा के महानिदेशक नवीन अग्रवाल ने कहा कि शेट्टी की ख्याति और लोकप्रियता का प्रभाव किसी पूर्व या वर्तमान खिलाड़ी की तुलना में अधिक पड़ेगा। उन्होंने कहा, 'हमारा मानना है कि सुनील शेट्टी जैसा मशहूर अभिनेता डोपिंग के खिलाफ संदेश देने में सफल रहेगा कि डोपिंग खुद के और देश के लिये सही नहीं है। हमें लगता है कि किसी अभिनेता की देश के लोगों में ज्यादा पहुंच होती है।'

लोकमत पार्लियामेंट्री अवार्ड्स-2019

  • लोकमत पार्लियामेंट्री अवार्ड्स-2019 में पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को लाइफ टाइम एचीवमेंट अवॉर्ड (राज्यसभा) दिया गया। यह लोकमत संसदीय पुरस्कार का तीसरा समारोह है। इस कार्यक्रम के मुख्य अतिथि उपराष्ट्रपति एम वेंकैया नायडू हैं। विशिष्ट अतिथिगण गजेंद्र सिंह शेखावत (केंद्रीय जल शक्ति मंत्री), कांग्रेस नेता और लोकसभा सदस्य अधीर रंजन चौधरी, राज्यसभा सांसद और एनसीपी अध्यक्ष शरद पवार, सुभाष सी. कश्यप (पूर्व महासचिव, लोकसभा) हैं। इस कार्यक्रम में कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और सांसद शशि थरूर, एआईएमआईएम चीफ और सांसद असदुद्दीन ओवैसी और रेल मंत्री पीयूष गोयल स्पीकर हैं।

:: प्रिलिम्स बूस्टर ::

  • हाल ही में लाँच हुए संस्कृति वेब पोर्टल को किस संस्था के द्वारा बनाया गया है? (भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान- मुंबई)
  • देश का पहला काई संरक्षण और शोध सेंटर को कहाँ स्थापित किया गया है? (नैनीताल)
  • हाल ही में चर्चा में रहे नेहरू-लियाकत समझौते पर किस वर्ष हस्ताक्षर किया गया था? (1950)
  • हाल ही में भारतीय नागरिक संशोधन विधेयक पर किस देश के अंतर्राष्ट्रीय धार्मिक स्वतंत्रता आयोग के द्वारा चिंता व्यक्त की गई है? (अमेरिका)
  • हाल ही में जारी हुए जलवायु परिवर्तन प्रदर्शन सूचकांक (CCPI) में भारत कौन-से स्थान पर रहा? (नौवें स्थान पर)
  • हाल ही में जारी हुए जलवायु परिवर्तन प्रदर्शन सूचकांक (CCPI) में कौन सा देश शीर्ष स्थान पर रहा? (स्वीडेन चौथे स्थान पर- नोट: प्रथम तीन स्थानों को इस रिपोर्ट में खाली रखा गया है)
  • हाल ही में जारी हुए जलवायु परिवर्तन प्रदर्शन सूचकांक (CCPI) को किस संस्था के द्वारा विकसित किया गया है? (जर्मनवॉच न्यूक्लाइमेट इंस्टीट्यूट एंड क्लाइमेट एक्शन नेटवर्क)
  • हाल ही में PSLV-C48 के द्वारा किस निगरानी उपग्रह को अंतरिक्ष में स्थापित किया गया है? (RISAT-2BR1)
  • हाल ही में किस अंतरिक्ष एजेंसी के द्वारा 2025 में दुनिया का पहला ‘स्पेस जंक कलेक्टर’ भेजने की घोषणा की गई है? (यूरोपीयन स्पेस एजेंसी-ईएसए)
  • 2025 में भेजी जाने वाली दुनिया की पहली ‘स्पेस जंक कलेक्टर’ मिशन का क्या नाम दिया गया है? (क्लीयर स्पेस-1)
  • 10 दिसंबर को आयोजित नोबेल अवार्ड 2019 में अर्थशास्त्र के नोबेल पुरस्कार से किसे सम्मानित किया गया? (अभिजीत बनर्जी, एस्थर डफ्लो और माइकल क्रेमर)
  • 10 दिसंबर को आयोजित नोबेल अवार्ड 2019 में शांति के नोबेल पुरस्कार से किसे सम्मानित किया गया? (इथियोपिया के प्रधानमंत्री अबी अहमद अली)
  • 10 दिसंबर को आयोजित नोबेल अवार्ड 2019 में साहित्य के नोबेल पुरस्कार से किसे सम्मानित किया गया? (काजुओ इशिगुरो-'द रिमेन्स ऑफ द डे' उपन्यास के लिए)
  • 10 दिसंबर को आयोजित नोबेल अवार्ड 2019 में फिजिक्स के लिए नोबेल पुरस्कार से किसे सम्मानित किया गया? (कनाडा-अमेरिका के जेम्स पीबल्स, स्विट्जरलैंड के माइकल मेयर और डिडियर क्वेलोज)
  • 10 दिसंबर को आयोजित नोबेल अवार्ड 2019 में कैमेस्ट्री के नोबेल पुरस्कार से किसे सम्मानित किया गया ? (अमेरिकी वैज्ञानिक जॉन गुडइनफ, ब्रिटेन के स्टेनली व्हिटिंघम और जापानी वैज्ञानिक अकीरा योशिनो)
  • 10 दिसंबर को आयोजित नोबेल अवार्ड 2019 में किसे चिकित्सा क्षेत्र में नोबल पुरस्कार से सम्मानित किया गया ? (अमेरिका के जेम्स एलीसन और जापान के तासुकु होन्जो)
  • हाल ही में किस व्यक्ति को राष्ट्रीय डोपिंग रोधी एजेंसी (नाडा) का ब्रांड एंबेसडर बनाया गया है? (अभिनेता सुनील शेट्टी)

स्रोत साभार: Dainik Jagran (Rashtriya Sanskaran), Dainik Bhaskar (Rashtriya Sanskaran), Rashtriya Sahara (Rashtriya Sanskaran) Hindustan Dainik (Delhi), Nai Duniya, Hindustan Times, The Hindu, BBC Portal, The Economic Times (Hindi & English), PTI, PIB

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