(दैनिक समसामयिकी और प्रिलिम्स बूस्टर) यूपीएससी और सभी राज्य लोक सेवा आयोग परीक्षाओं के लिए हिंदी में समाचार पत्रों का संकलन (09 मई 2020)

दैनिक समसामयिकी और प्रिलिम्स बूस्टर


(दैनिक समसामयिकी और प्रिलिम्स बूस्टर) यूपीएससी और सभी राज्य लोक सेवा आयोग परीक्षाओं के लिए हिंदी में समाचार पत्रों का संकलन (09 मई 2020)


:: राष्ट्रीय समाचार ::

भारत के वेदर बुलेटिन में गिलगिट-बाल्टिस्तान और मुजफ्फराबाद शामिल

  • गिलगित-बाल्टिस्तान (Gilgit-Baltistab) और मुजफ्फराबाद को भारतीय मौसम विभाग (IMD) ने अपने बुलेटिन में शामिल किया है। इसका मतलब साफ है कि भारत इन इलाकों को अपना अभिन्न अंग मानता है। भारत के इस कदम से पाकिस्तान ने अब संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (यूएनएससी) प्रस्तावों का उल्लंघन बताया है। पाकिस्तान ने इसे भारत का गैरजिम्मेदाराना कदम बताते हुए इस दावे को सिरे से नकारा है। IMD की ओर से अपने बुलेटिन में गिलगित-बाल्टिस्‍तान और मुजफ्फराबाद को जगह देना बड़ा अहम है। IMD के डायरेक्‍टर-जनरल मृत्‍युंजय महापात्रा ने कहा था, 'IMD पूरे जम्‍मू-कश्‍मीर और लद्दाख के लिए वेदर बुलेटिन जारी करता रहा है। हम बुलेटिन में गिलगित-बाल्टिस्‍तान, मुजफ्फराबाद का जिक्र इसलिए कर रहे हैं क्‍योंकि वह भारत का हिस्‍सा है।'
  • जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के अलग केंद्र शासित प्रदेश बनने के बाद भारत सरकार ने जो नया नक्शा जारी किया है, उसमें पाकिस्तानी कब्जे वाले कश्मीर (PoK) के हिस्सों को भारत के कश्मीर क्षेत्र में दर्शाया गया था। इसमें PoK के तीन जिलों मुजफ्फराबाद, पंच और मीरपुर को शामिल किया गया था। फिलहाल ये जिले पाकिस्तान के कब्जे वाले क्षेत्र में आते हैं।

पृष्ठभूमि

  • पाकिस्तान की सुप्रीम कोर्ट ने पाकिस्‍तान सरकार को गिलगित-बाल्टिस्‍तान में चुनाव कराने के आदेश दिए थे। भारत ने इसपर कड़ी प्रतिक्रिया दी और कहा कि पाकिस्‍तान को वहां पर दखल देने का कोई हक नहीं है। भारतीय मौसम विभाग (IMD) ने जम्‍मू-कश्‍मीर सब-डिविजन को अब 'जम्‍मू और कश्‍मीर, लद्दाख, गिलगित-बाल्टिस्‍तान और मुजफ्फराबाद' कहना शुरू कर दिया है। पाकिस्‍तान से भारत ने कहा था कि संसद से 1994 में पास एक प्रस्ताव में जम्मू-कश्मीर पर स्थिति साफ है। विदेश मंत्रालय ने कहा कि पाकिस्तान के हालिया कदम केंद्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के कुछ हिस्सों पर उसके 'अवैध कब्जे' को छुपा नहीं सकते हैं और न ही इस पर पर्दा डाल सकते हैं कि पिछले सात दशकों से इन क्षेत्रों में रहने वाले लोगों के 'मानवाधिकारों का उल्लंघन किया गया, शोषण किया गया और उन्हें स्वतंत्रता से वंचित' रखा गया।

भारत मौसम विज्ञान

  • भारत मौसम विज्ञान विभाग 1875 में स्थापित किया गया । यह देश की राष्ट्रीय मौसम विज्ञान सेवा और मौसम विज्ञान, भूकंप विज्ञान और संबद्ध विषयों से संबंधित सभी मामलों में प्रमुख सरकारी एजेंसी है। मई 1889 में कलकत्ता मुख्यालय में वेधशालाओं के प्रथम महानिदेशक सर जॉन एलियट कोनियुक्त किया गया । भारत मौसम विज्ञान विभाग का मुख्यालय बाद में शिमला, फिर पूना (अब पुणे) और अंत में नई दिल्ली स्थानांतरित किया गया।

:: अंतर्राष्ट्रीय समाचार ::

चिनाब नदी में जलप्रवाह घट जाने का पाकिस्तान का दावा

चर्चा में क्यों?

  • पाकिस्तान ने कहा है कि चिनाब नदी में जल प्रवाह बहुत घट गया है जबकि भारत ने उसके इस दावे को ‘आधारहीन प्रलाप’ बताया है। सिंधु जल संधि के तहत सिंधु नदी आयोग के भारतीय आयुक्त प्रदीप कुमार सक्सेना को को भेजे पत्र में उनके पाकिस्तानी समकक्ष सैयद मोहम्मद मेहर अली शाह ने कहा है कि भारत से पाकिस्तान में जाने वाली चिनाब नदी में मराला हेडवर्क्स से जलप्रवाह 31,853 क्यूसेक से अप्रत्याशित रूप से घट कर 18,700 क्यूसेक रह गया है। उन्होंने सक्सेना से इस स्थिति पर गौर करने और चीजों से उन्हें अवगत कराने को भी कहा है।

भारत का रुख

  • सक्सेना ने इस दावे को पाकिस्तान का ‘एक और आधारहीन प्रलाप’ करार दिया और कहा कि मामले का परीक्षण किया गया है। सक्सेना ने ‘‘ भारत में चिनाब और तवी नदियों पर क्रमश: आखिरी आकलन एवं निकास स्थलों --अखनूर और सिधरा में संबंधित अवधि में पानी का निकास एक जैसा पाया गया है और कोई बड़ा अंतर नजर नहीं आया।’’ उन्होंने कहा कि यह बात पाकिस्तान को बता दी गयी है और उसे मामले का परीक्षण कराने की सलाह दी गयी है।

सिंधु जल संधि

  • सिंधु जल समझौते, 1960 के तहत स्थायी सिंधु आयोग का गठन किया गया था। तीन पूर्वी नदियां-- रावी, ब्यास और सतलुज पूरी तरह से भारत को आवंटित की गयी हैं। पश्चिमी नदियां-- सिंधु, चिनाब और झेलम पाकिस्तान को आवंटित की गयी हैं तथा भारत को कृषि, नौवहन, घरेलू उपयोग और निर्धारित मापदंड के तहत पनबिजली परियोजनाएं विकसित करने का कुछ अधिकार दिया गया है।
  • समझौते के मामलों में दोनों देशों के सिंधु आयुक्त अपने-अपने देशों के प्रतिनिधि के तौर पर कार्य करते हैं।दोनों देशों के सिंधु आयुक्त संधि के मामलों में अपनी अपनी सरकारों का प्रतिनिधित्व करते हैं। इस संधि के तहत हर साल कम से कम एक बार दोनों आयुक्तों की बैठक होती है जो एक बार पाकिस्तान में तो एक बार भारत में होती है। मार्च में दोनों देशों के सिंधु आयुक्तों की बैठक स्थगित कर दी गयी क्योंकि भारत ने कोरोना वायरस महामारी एवं लोकडाउन के चलते उसे टालने का प्रस्ताव दिया था।

सऊदी अरब से हटेगी पैट्रियट मिसाइलें

चर्चा में क्यों?

  • ईरान के खिलाफ सऊदी अरब के साथ खड़े होने का दावा कर रहे अमेरिका ने रियाद को झटका दिया है। अमेरिका ने फैसला किया है कि वह सऊदी अरब में तैनात ऐंटी-मिसाइल सिस्टम पैट्रियट को हटाएगा। इन्हें पिछले साल तैनात किए गया था जब सऊदी ने आरोप लगाया था कि ईरान की ओर से उसके तेल के ठिकानों पर हमला किया गया। हालांकि, अमेरिका ने दावा किया है कि यह मिसाइलों को हटाया जाना एक नियमित प्रक्रिया है और वह अभी भी सऊदी के साथ खड़ा है।

पृष्ठभूमि

  • न्यूज एजेंसी रॉयटर्स के मुताबिक पिछले महीने एक फोन कॉल पर ट्रंप ने सलमान को चेतावनी दी थी कि अगर सऊदी ने तेल का उत्पादन कम नहीं किया तो अमेरिका अपनी फोर्स हटाने पर मजबूर हो जाएगा। कोरोना वायरस महामारी की वजह से तेल की खपत कम हो चुका है और ग्लोबल इकॉनमी पर नकारात्मक असर पड़ा है। इसे देखते हुए ट्रंप ने सलमान ने कहा था कि सऊदी को तेल का आउटपुट कम करना होगा। हालांकि, इसके बाद उत्पादन कम करने का ऐलान कर दिया गया था।

क्यों की गयी थी तैनाती

  • सितंबर 2019 में सऊदी अरब के तेल ठिकानों पर ड्रोन से हमला किया गया। इस हमले की जिम्मेदारी यमन के एक गुट ने ली थी लेकिन सऊदी ने ईरान के ऊपर आरोप लगाया था। इस पर ईरान ने विदेशों ताकतकों को जिम्मेदार ठहराया और अमेरिका से इलाका छोड़ देने को कहा। इसके बाद अमेरिका ने अपनी पैट्रियट मिसाइलों और दूसरे डिफेंस सिस्टम वहां तैनात किए थे।

:: विज्ञान और प्रौद्योगिकी ::

कोविड-19 के लिए दो दवाओं के क्लीनिकल ट्रायल को मंजूरी

  • काउंसिल फॉर साइंटिफिक एंड इंडस्टि्रयल रिसर्च (सीएसआइआर) को ड्रग कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया (डीजीसीआइ) से कोविड-19 से मुकाबले के लिए दो दवाओं- फेविपिरविर और फाइटोफार्मास्युटिकल के क्लीनिकल ट्रायल की मंजूरी मिल गई है।
  • फेविपिरविर दवा का इस्तेमाल आम तौर पर जापान, चीन और कुछ अन्य देशों में इंफ्लुएंजा के इलाज में किया जाता है। सीएसआइआर फाइटोफार्मास्युटिकल के रूप में जैविक दवा की खोज कर रहा है, जिसे पहले से ही डेंगू के इलाज में सफल पाया गया है।

ह्यूमन मोनोक्लोनल एंटीबॉडीज से कोविड-19 के इलाज को मंजूरी

  • काउंसिल ऑफ साइंटिफिक एंड इंडस्टि्रयल रिसर्च (सीएसआइआर) ने ह्यूमन मोनोक्लोनल एंटीबॉडीज को कोविड-19 के इलाज के रूप में विकसित करने के लिए एक परियोजना को मंजूरी दी है। इस परियोजना का नेतृत्व प्रमुख टीका और जैव-चिकित्सा निर्माता भारत बायोटेक द्वारा किया जा रहा है। इसका उद्देश्य वैकल्पिक प्रभावी चिकित्सा द्वारा अत्यधिक प्रभावी और विशिष्ट मानव मोनोक्लोनल एंटीबॉडी उत्पन्न करना है, जो एसएआरएस-सीओवी-2 वायरस को बेअसर करने में सक्षम हैं।
  • यह सार्वजनिक स्वास्थ्य आपात स्थिति के दौरान नेशनल सेंटर फॉर सेल साइंस-पुणे, इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी-इंदौर, प्रीडोमिक्स टेक्नोलॉजीज-गुड़गांव और भारत बायोटेक को एक साथ लाएगा। भारत बायोटेक के चेयरमैन और प्रबंध निदेशक डॉ कृष्णा एला ने कहा, टीकाकरण का उद्देश्य भविष्य में होने वाले संक्रमणों से स्वास्थ्य की रक्षा करना है। शायद यह अकेले पूर्ण समाधान प्रदान करने में सक्षम न हो।

चेचक उन्मूलन के 40 साल पूरे होने पर डाक टिकट जारी

  • विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) और संयुक्त राष्ट्र की पोस्टल एजेंसी ने दुनिया से चेचक के उन्मूलन के 40 साल पूरे होने के मौके पर एक स्मारक डाक टिकट जारी किया है। इस दौरान डब्ल्यूएचओ ने संयुक्त राष्ट्र के शीर्ष भारतवंशी अधिकारी अतुल खरे का आभार व्यक्त किया।

पृष्ठभूमि

  • मई 1980 में 33वीं वर्ल्ड हेल्थ असेंबली ने आधिकारिक रूप से घोषणा की थी, ‘दुनिया और उसके सारे लोग चेचक से लड़ाई जीत चुके हैं।’ डब्ल्यूएचओ के 10 साल तक चले वैश्विक प्रयासों के चलते चेचक का उन्मूलन हुआ था जिसमें दुनियाभर में हजारों स्वास्थ्य कर्मियों ने चेचक को समाप्त करने के लिए 50 करोड़ से ज्यादा टीके लगाए। ‘जब 1967 में डब्ल्यूएचओ का चेचक उन्मूलन अभियान शुरु हुआ था तब देशों ने डाक टिकटों के माध्यम से जागरुकता लाने का प्रयास किया।

क्या होता है चेचक रोग?

  • चेचक के विशेष लक्षणों की शुरुआत वेरिओला मेजर वायरस के संपर्क में आने के लगभग दो हफ्ते बाद बुखार और सुस्ती के साथ शुरू होते थे। आमतौर पर सिरदर्द, गले का खराश, और उल्टियां भी होती थी। 2-3 दिनों के बाद, शरीर का तापमान गिरने लगता था और चेहरे और शरीर पर चकत्ते निकल जाते थे, और आगे चलकर धड़ में भी उभर आते थे। धीरे-धीरे, जख्म मुंह, गला और नाक के अंदर बनने लगते थे। द्रव-भरे हुए दाने बनते थे और फैलते थे, कुछ स्थितियों में कुछ दाने एक दूसरे से जुड़ जाते थे और त्वचा के बड़े हिस्से तक फैल जाते थे। रुग्णता के लगभग तीसरे हफ्ते में, पपड़ियां बननी शुरू हो जाती थीं त्वचा से अलग होने लगती थी।

किसने बनाया चेचक का टीका?

  • सन 1796 में एडवार्ड जेनर द्वारा इस बात की खोज किए जाने के बाद से ही लोगों ने टीके का प्रयोग शुरू कर दिया था, कि काउपॉक्स के फोड़ों से निकले पदार्थ के संपर्क में आने से लोगों को चेचक से सुरक्षा मिल सकती है। जेनर के काम से आखिरकार दुनिया भर में चेचक के टीके का निर्माण वाणिज्यीकीरण शुरू हुआ।

व्हाट्सऐप का देसी वर्जन

  • सोशल मीडिया के यूजर्स जल्द ही इंडियन व्हाट्सऐप के जरिए लोगों से चैट करते दिखेंगे। केंद्रीय सूचना और तकनीकी मंत्री रविशंकर प्रसाद ने कहा कि भारत में इंडियन व्हाट्सऐप बनाने का काम जारी है। इसे नेशलन इंफॉर्मेटिक्स सेंटर (NIC) और सेंटर फॉर डेवलपमेंट ऑफ टेलीमैटिक्स (CDOT) मिलकर डेवलप कर रही हैं।

:: पर्यावरण और पारिस्थितकी ::

रसायन बनाने वाले संयंत्र कराएं सुरक्षा ऑडिट: केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड

  • कोविड-19 लॉकडाउन के बीच तीन औद्योगिक दुर्घटनाओं के एक दिन बाद केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने राज्यों को निर्देश दिया कि वे सुनिश्चित करें कि खतरनाक रसायनों का निर्माण करने वाले उद्योग काम शुरू करने से पहले अपना उचित सुरक्षा ऑडिट करा लें। बोर्ड ने राज्यों के प्रदूषण नियंत्रण बोर्डों तथा प्रदूषण नियंत्रण समितियों को अपने पत्र में निर्देश दिया कि इस तरह की सभी इकाइयां कोविड-19 लॉकडाउन के बाद ही काम शुरू करें।

पृष्ठभूमि

  • हाल में रसायन रिसाव और औद्योगिक हादसों के गंभीर मामले आए हैं। इसके मद्देनजर सभी राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और प्रदूषण नियंत्रण समितियों को सुनिश्चित करना चाहिए कि सभी इकाइयां काम शुरू करने से पहले उचित सुरक्षा ऑडिट कराएं। देश में गुरुवार को तीन औद्योगिक हादसे हुए। पहला हादसा विशाखापत्तनम में एलजी पॉलीमर संयंत्र में गैस के रिसाव से जुड़ा है जिसमें 11 लोगों की मौत हो गई और कम से कम एक हजार लोग बीमार हो गए। इसी तरह का हादसा छत्तीसगढ़ में एक पेपर मिल में हुआ जहां जहरीली गैस की चपेट में आने से सात लोग बीमार पड़ गए। ये दोनों कारखाने लॉकडाउन के बाद काम शुरू करने की तैयारी कर रहे थे। तीसरा हादसा तमिलनाडु में ताप विद्युत संयंत्र में हुआ जहां बॉयलर फटने से आठ लोग झुलस गए। इन हादसों के बाद केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड का निर्देश काफी मायने रखता है।

केन्द्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड

  • केन्द्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी), एक सांविधिक संगठन है। इसका गठन जल (प्रदूषण निवारण एवं नियंत्रण) अधिनियम, 1974 के अधीन सितंबर, 1974 में किया गया था। इसके अलावा, केन्द्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को वायु (प्रदूषण निवारण एवं नियंत्रण) अधिनियम,1981 के अधीन भी शक्तियां और कार्य सौंपे गए।
  • यह पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के एक फील्ड संघटन का काम करता है तथा मंत्रालय को पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986 के उपबंधों के बारे में तकनीकी सेवाएं भी प्रदान करता है। जल (प्रदूषण निवारण एवं नियंत्रण) अधिनियम, 1974 तथा वायु (प्रदूषण, निवारण एवं नियंत्रण) अधिनियम,1981 में निर्धारित किए गए अनुसार, केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के प्रमुख कार्य हैं, (i) जल प्रदूषण के निवारण, नियंत्रण तथा न्यूनीकरण द्वारा राज्यों के विभिन्न क्षेत्रों में नदियों और कुओं की स्वच्छता को बढ़ावा देना, और (ii) देश की वायु गुणवत्ता में सुधार करना तथा वायु प्रदूषण का निवारण, नियंत्रण और न्यूनीकरण करना।

विश्व प्रवासी पक्षी दिवस: 2020

  • प्रवासी पक्षियों के संरक्षण, भोजन और आवास की आवश्यकता को विश्व भर के लोगों को समझाने और जागरूक करने के लिए मई और अक्टूबर महीने के शुरू के दूसरे शनिवार को प्रति वर्ष विश्व प्रवासी पक्षी दिवस (World Migratory Bird Day-WMBD) मनाया जाता है। इस बार विश्व प्रवासी पक्षी दिवस 9 मई को मनाया जा रहा है। इस वर्ष विश्व प्रवासी पक्षी दिवस की थीम “पक्षी हमारी दुनिया को जोड़ते हैं” (Birds Connect Our World) है।
  • विश्व प्रवासी पक्षी दिवस को मनाने की शुरुआत 2006 में अफ्रीकन-यूरेशियन माइग्रेटरी वॉटरबर्ड्स (AEWA) और वन्यजीवों की प्रवासी प्रजातियों के संरक्षण (CMS) के कन्वेंशन के द्वारा समन्वित रूप से की गई।

पक्षी और जीव जंतु क्यों करते हैं प्रवास?

  • अधिकांश जंतु भोजन, आवास और प्रजनन के साथ-साथ मौसम में आए बदलाव के प्रति प्रवास करते हैं। इनमें कुछ का प्रवास कम दूरी का होता है लेकिन कुछ जीव जंतुओं 10000 किलोमीटर से भी ज्यादा दूर तक प्रवास करते हैं।
  • जैसा दूसरे देश के पश्चिम भारत में आते हैं वैसे ही भारत के पश्चिमी दूसरे देश में जाते हैं। भारत के पक्षी भी 10000 किलोमीटर तक का सफर कर रूस के साइबेरिया तक जाते हैं। भारत का सुप्रसिद्ध पक्षी राजहंस भारत में सर्दियां गुजारता है और तिब्बत जाकर मानसरोवर झील के किनारे अंडा देता है।

कौन से प्रवासी पक्षी भारत में आते हैं?

  • भारत में आने वाले पक्षियों में साइबेरियन क्रेन, ग्रेटर फ्लेमिंगो, रफ, ब्लैक विंग्ट स्टिल्ट, कॉमन टील, कॉमन ग्रीनशैंक, नॉर्दर्न पिनटेल, रोजी पेलिकन, गडवाल, वूड सैंडपाइपर, स्पॉटेड सैंडपाइपर, यूरेसियन विजन, ब्लैक टेल्ड गॉडविट, स्पॉटेड रेडशैंक, स्टार्लिग, ब्लूथ्रोट, लांग बिल्ड पिपिट इत्यादि प्रमुख है।इन पक्षियों को हम सांभर झील, जिम कार्बेट, दिल्ली बायोडायवर्सिटी पार्क, भरतपुर,पुलिकट झील,चिल्का झील,कोलेरू झील इत्यादि में देखा जा सकता है।
  • प्रवासी पक्षियों में सारस प्रजाति का साइबेरियन क्रेन पक्षी केवलादेव राष्ट्रीय उद्यान सहित भारत के अनेक नदियों- झीलों में आते हैं । यूरेशिया से आने वाली बत्तख ‘यूरेशियन टील’ या कॉमन टील हर वर्ष सर्दियों में दक्षिण दिशा में यूरोप और अफ्रीका के कई देशों में प्रवास करता है। एशियाई कोयल सिंगापुर से भारत के पुडुचेरी में आती है। केवल रात में ही उड़ान भरने वाले ग्रेटर फ्लैमिंगो पक्षी श्रीलंका और भारत के विभिन्न क्षेत्रों में प्रवास करता है। बत्तख प्रजाति का गढ़वाल पक्षी एशिया महाद्वीप में प्रवास करता है। ब्लैक टेल्ड गोडविट पक्षी साइबेरिया और यूरोप से मध्य एशिया के विभिन्न क्षेत्रों में प्रवास करता है। दुनिया में सबसे लम्बे प्रवास मने जाने वाले आर्कटिक टर्न अंटार्कटिका से आर्कटिक आकर प्रवास करता है। कांब डक प्रति वर्ष दक्षिण एशिया या मेडागासकर से भारत के हरियाणा में आता है।

प्रवासी पक्षियों के संरक्षण हेतु संस्थाएं और कानून

कन्वेंशन ऑन माइग्रेटरी स्पीशीज(CMS)

  • संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम के आलोक में प्रवासी प्रजातियों की संरक्षण के लिए एक कन्वेंशन के रूप में(सीएमएस) को लागू किया गया। 1979 में जर्मनी के बान में इस कन्वेंशन पर हस्ताक्षर होने के कारण इसे ‘बान कन्वेंशन’ के रूप में भी जाना जाता है। यह कन्वेंशन 1983 से शक्ति में आया। आपको बता दें भारत ने भी 1983 में इस कन्वेंशन पर हस्ताक्षर किया। यह कन्वेंशन प्रवासी जीव-जंतु की सुरक्षा और संरक्षण के लिए सभी हितधारकों को एक मंच पर लाता है। जिस रास्ते से प्रवासी जीव-जंतु गुजरते हैं एवं जिन स्थानों पर ये प्रवास करते हैं वहां पर उनके आवासों के संरक्षण हेतु यह कन्वेंशन अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कानूनी अधिकार प्रदान करता है।
  • आपको बता दें सीएमएस प्रवासी जीव जंतुओं को आसन्न खतरे के आधार पर दो श्रेणियों में विभाजित करता है।
  1. परिशिष्ट I - लुप्तप्राय प्रवासी प्रजातियां-इसमें उन प्रजातियों के जीवो को शामिल किया जाता है जिन पर विलुप्त होने का खतरा हो।
  2. परिशिष्ट 2 - समझौतों के द्वारा संरक्षित प्रवासी प्रजातियां: इसमें उन प्रजातियों के जीवो को शामिल किया जाता है जिनके संरक्षण की स्थिति प्रतिकूल है एवं इनके संरक्षण एवं प्रबंधन के लिए अंतरराष्ट्रीय समझौता आवश्यक है।
  • सीएमएस प्रवासी जातियों के संरक्षण हेतु को बैठक का आयोजन करता है। अब तक 13कोप शिखर का आयोजन किया जा चुका है। 13वें कोप शिखर का आयोजन भारत में किया गया।

13 वें कोप शिखर से संबंधित मुख्य तथ्य:

  • 13 वें कोप शिखर सम्‍मेलन का आयोजन इस वर्ष गांधीनगर गुजरात में किया गया। भारत 3 वर्ष के लिए इस सम्मेलन की अध्यक्षता करेगा।
  • इस बार इस सम्‍मेलन की थीम है “प्रवासी प्रजातियां दुनिया को जोड़ती हैं और हम उनका अपने यहां स्‍वागत करते हैं”। प्रतीक चिन्‍ह में कोलम कला के माध्‍यम से भारत में आने वाले प्रमुख प्रवासी पक्षियों जैसे आमूर फाल्‍कन, हम्‍पबैक व्‍हेल और समुद्री कछुओं के साथ प्रमुख को दर्शाया गया है।वन्‍य जीव संरक्षण कानून 1972 के तहत संकटापन्‍न प्रजाति में घोषित द ग्रेट इंडियन बस्‍टर्ड को सम्‍मेलन का शुभंकर बनाया गया है। सम्‍मेलन का प्रतीक चिन्‍ह दक्षिण भारत की पांरपरिक कला कोलम से प्रेरित है।आपको बता दें दक्षिण राज्यों में रंगोली को कोलम कहा जाता है।
  • इस सम्मेलन में प्रवासी प्रजातियों के संरक्षण की दिशा में गांधीनगर घोषणा पत्र प्रस्तुत किया गया।इस सम्मलेन में स्टेट ऑफ इंडियाज़ बर्ड्स 2020 (State of India’s Birds- SoIB) नामक रिपोर्ट जारी की गई है।

क्या है गांधी नगर घोषणा पत्र:

  • सीएमएस ने पारिस्थितिकीय तंत्रों के आपसी संबंध को बनाए रखने और उन्हें बहाल करने की ज़रुरत पर विशेष बल दिया है खासकर प्रवासी प्रजातियों और उनके पर्यावास के प्रबंधन में। गांधीनगर घोषणापत्र जिस पर 130 देशों ने अपनी मुहर लगाई है ।
  • घोषणापत्र में प्रवासी जीव जंतुओं और पारिस्थितिकीय तंत्रों के आपसी रिश्तों को 2020 के बाद वैश्विक जैव विविधता मसौदे में शामिल करने और इसको वरीयता देने की भी बात कही गयी ।
  • एशियाई हाथी, तेंदुआ और हुकना या बंगाल फ्लोरिकन को सम्मेलन में परिशिष्ट 1 के अंतर्गत शामिल कर लिया गया । इन 3 प्रजातियों के अलावा 7 प्रजातियों को परिशिष्ट 2 के अंतर्गत शामिल किया गया है। इनमें शामिल हैं- जगुआर, यूरियाल, लिटिल बस्टर्ड, एंटीपोडियन अल्बाट्रॉस, ओशनिक व्हाइट-टिप शार्क, स्मूथ हैमरहेड शार्क और टोपे शार्क। इस सम्मेलन में पहली बार प्रवासी प्रजातियों के मौजूदा हालातों पर एक रिपोर्ट को जारी किया गया।
  • रिपोर्ट के मुताबिक़ सीएमएस संधि में शामिल ज़्यादातर प्रजातियों की संख्या में गिरावट दर्ज की जा रही है जिसके पीछे की वजहों को समझने की कोशिश इस रिपोर्ट में की गयी है । इसके अलावा प्रवासी जीव जंतुओं पर मौजूदा खतरों की पहचान और उसको दूर करने की भी बात इस रिपोर्ट में कही गयी है ।
  • एक सप्‍ताह के सम्‍मेलन में संधि के प्रथम परिशिष्‍ट में 10 और द्वितीय परिशिष्‍ट में 13 प्रजातियों को शामिल किया गया। प्रवासी प्रजातियों और उनके पर्यावास के संरक्षण के लिए प्रवासी प्रजाति संरक्षण संधि का दूत कार्यक्रम फिर से शुरू किया गया। भारतीय अभिनेता रणदीप हुड्डा को 2023 तक के लिए प्रवासी प्रजाति दूत मनोनीत किया गया।

भारत में प्रवासी प्रजातियों एवं इसके संरक्षण के प्रयास

  • भारत कई प्रजातियों के प्रवासी वन्‍य जीवों का प्राकृतिक आवास है। इन प्रजातियों में मुख्य रूप से बर्फीले प्रदेश वाले चीते, आमुर फाल्‍कन, बार हेडेड गीज, काले गर्दन वाला सारस, समुद्री कछुआ, डुगोंग्‍स और हम्‍पबैक व्‍हेल आदि का प्राकृतिक आवास है। भारत में वन्‍य जीव संरक्षण कानून 1972 के तहत प्रवासी जनजातियों का संरक्षण किया जाता है। इसके अलावा भारत ने प्रवासी प्रजातियों के संरक्षण की दिशा में 1983 में बान कन्वेंशन पर भी हस्ताक्षर किए। भारत अब तक साइबेरियाई सारस के लिए 1998में, समुद्री कछुओं के लिए 2007 में, डुगोंग्‍स के लिए 2008 में और रेप्‍टर्स के संरक्षण के लिए 2016 में सीएमएस के साथ कानूनी रूप से अबाध्‍यकारी समझौता ज्ञापनों पर हस्‍ताक्षर कर चुका है।
  • आपको बता दें भारतीय उप-महाद्वीप महत्वपूर्ण बर्ड फ्लाईवे, सेंट्रल एशियाई फ्लाईवे (CAF) नेटवर्क का हिस्सा है। सेंट्रल एशियाई फ्लाईवे (CAF) नेटवर्क आर्कटिक और हिंद महासागर को कवर करता है। इस फ्लाईवे नेटवर्क में लगभग 279 प्रजातियां शामिल, एवं इसमें कई ऐसी प्रजातियां भी शामिल है जो अंतरराष्ट्रीय रूप से विलुप्त होने के कगार पर है।

:: विविध ::

द्वितीय विश्व युद्ध के 75वें विजय दिवस

  • पीएम नरेंद्र मोदी ने द्वितीय विश्व युद्ध के 75वें विजय दिवस पर रूस को बधाई दी है। पीएम मोदी ने कहा कि इस मौके पर भारत आज रूस के साथ खड़ा है। उन्होंने द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान हजारों भारतीय सैनिकों के बलिदान को भी याद किया।
  • गौरतलब है कि रूस और पूर्व सोवियत गणराज्यों में हर वर्ष 9 मई का दिन द्वितीय विश्व युद्ध में नाजी जर्मनी पर विजय दिवस के रूप में मनाया जाता है। इससे पहले शुक्रवार को ब्रिटेन में द्वितीय विश्व युद्ध में यूरोपीय देशों की जीत की 75वीं वर्षगांठ मनाई गई। 8 मई 1945 को नाजी जर्मनी ने औपचारिक रूप से आत्मसमर्पण कर दिया था, जिसके साथ ही यूरोप में द्वितीय विश्व युद्ध का अंत हो गया था। कोरोना वायरस के चलते, द्वितीय विश्वयुद्ध में यूरोपीय देशों की जीत से संबंधित समारोह पहले ही रद्द किए जा चुके हैं

:: प्रिलिम्स बूस्टर ::

  • हाल ही में मनाए गए विश्व प्रवासी पक्षी दिवस की थीम क्या थी एवं यह किस दिवस को मनाया जाता है? (Birds Connect Our World, मई और अक्टूबर महीने के दूसरे शनिवार को)
  • प्रवासियों प्रजातियों के संरक्षण के लिए संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम(UNEP) के द्वारा कौन सा कन्वेंशन लागू किया गया था? (कन्वेंशन ऑन माइग्रेटरी स्पीशीज या बान कन्वेंशन, 1979)
  • प्रजाति पक्षियों के कारण चर्चा में रही गांधीनगर घोषणा पत्र और State of India’s Birds- SoIB किस सम्मेलन की उपलब्धियां थी? (CMS के 13 वें कोप शिखर सम्‍मेलन,गांधीनगर)
  • चर्चा में रहे सिंधु जल समझौता कब किया गया था एवं इसके तहत पाकिस्तान को कौन सी नदियां आवंटित की गई थी? (1960; सिंधु, चिनाब और झेलम)
  • हाल ही में भारतीय मौसम विभाग (IMD) द्वारा पाक अधिकृत किन क्षेत्रों को अपने मौसम में शामिल किया गया? (गिलगित-बाल्टिस्तान और मुजफ्फराबाद)
  • चर्चा में रहे भारतीय मौसम विभाग विज्ञान को कब स्थापित किया गया था एवं वर्तमान में इसका मुख्यालय कहां स्थित है? (1875, नई दिल्ली)
  • हाल ही में चर्चा में रहे पैट्रियट (Patriot) क्या है? (अमेरिका का ऐंटी-मिसाइल सिस्टम)
  • चर्चा में रहे गोपाल कृष्ण गोखले ने शिक्षा के लिए किस संस्था की स्थापना की एवं वह किस वर्ष कांग्रेस के अध्यक्ष बने? (सर्वेंट ऑफ़ इंडिया सोसाइटी, 1905)
  • चेचक उन्मूलन के 40 वर्ष पूर्ण होने पर संयुक्त राष्ट्र द्वारा स्मारक टिकट जारी करने से चर्चा में रहे चेचक के टीके की खोज किसने की थी? (एडवर्ड जेनर)
  • भारत सरकार ने व्हाट्सएप के देसी वर्जन तैयार करने का दायित्व किन कंपनियों को सौंपा है? (नेशलन इंफॉर्मेटिक्स सेंटर और सेंटर फॉर डेवलपमेंट ऑफ टेलीमैटिक्स)
  • रसायन संयंत्र को सुरक्षा ऑडिट का आदेश देने से चर्चा में रहे केन्द्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) का गठन कब किया गया था? (1974)
  • कोविड-19 के इलाज क्लीनिकल ट्रायल से चर्चा में रहे ‘फाइटोफार्मास्युटिकल- Phytopharmaceutical’ क्या है? (एक जैविक दवा , डेंगू के इलाज में कारगर)

स्रोत साभार: Dainik Jagran (Rashtriya Sanskaran), Dainik Bhaskar (Rashtriya Sanskaran), Rashtriya Sahara (Rashtriya Sanskaran) Hindustan Dainik (Delhi), Nai Duniya, Hindustan Times, The Hindu, BBC Portal, The Economic Times (Hindi & English), PTI, PIB

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