(दैनिक समसामयिकी और प्रिलिम्स बूस्टर) यूपीएससी और सभी राज्य लोक सेवा आयोग परीक्षाओं के लिए हिंदी में समाचार पत्रों का संकलन (09 जुलाई 2020)

दैनिक समसामयिकी और प्रिलिम्स बूस्टर


(दैनिक समसामयिकी और प्रिलिम्स बूस्टर) यूपीएससी और सभी राज्य लोक सेवा आयोग परीक्षाओं के लिए हिंदी में समाचार पत्रों का संकलन (09 जुलाई 2020)


:: राष्ट्रीय समाचार ::

शहरी प्रवासियों/गरीबों के लिए आवासीय योजना

चर्चा में क्यों?

  • प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में केन्द्रीय मंत्रिमंडल ने प्रधान मंत्री आवास योजना- शहरी (पीएमएवाई-यू) के अंतर्गत एक उप-योजना के रूप में शहरी प्रवासियों/गरीबों के लिए कम किराये वाले आवासीय परिसरों के विकास के लिए अपनी स्वीकृति दे दी है।

पृष्ठभूमि

  • आवासन एवं शहरी कार्य मंत्रालय (एमओएचयूए) ने प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) के अंतर्गत एक उप-योजना के रूप में शहरी प्रवासियों/गरीबों के लिए कम किराये वाले आवासीय परिसरों (एआरएचसी) की योजना की शुरुआत की है। माननीय वित्त मंत्री ने 14 मई, 2020 को इस योजना की घोषणा की थी। यह योजना 'आत्मनिर्भर भारत' के विजन को पूरा करेगी।
  • कोविड-19 महामारी के परिणाम स्वरूप देश में बड़े स्तर पर कामगारों/शहरी गरीबों का पलायन देखने को मिला है, जो बेहतर रोजगार के अवसरों की तलाश में ग्रामीण क्षेत्रों या छोटे शहरों से शहरी क्षेत्रों में आए थे। आमतौर पर, ये प्रवासी किराया बचाने के लिए झुग्गी बस्तियों, अनौपचारिक/ अनाधिकृत कॉलोनियों या अर्ध शहरी क्षेत्रों में रहते हैं। उन्होंने कार्यस्थलों पर जाने के लिए अपना काफी समय सड़कों पर चलकर/ साइकिल चलाकर बिताया है और खर्च बचाने के लिए अपने जीवन को जोखिम में डालते रहे हैं।

योजना से जुड़े प्रमुख बिंदु

  • योजना के रूप में शहरी प्रवासियों/गरीबों के लिए कम किराये वाले आवासीय परिसरों का कार्यान्वयन निम्न योजनानुसार किया जायेगा:
  • वर्तमान में खाली पड़े सरकार द्वारा वित्तपोषित आवासीय परिसरों को 25 साल के लिए रियायत (कन्सेशन) समझौते के माध्यम से एआरएचसी में परिवर्तित कर दिया जाएगा। कन्सेशनेर को कमरों की मरम्मत/पुराना रूप देकर (रिट्रोफिट) और पानी, निकासी/सेप्टेज, स्वच्छता, सड़क आदि आधारभूत ढांचे से जुड़ी कमियों को दूर करके परिसरों को रहने लायक बनाना होगा। राज्यों/संघ शासित क्षेत्रों को पारदर्शी प्रक्रिया के माध्यम से कन्सेशनेर (कंपनी) का चयन करना होगा। इन परिसरों को पहले की तरह नया चक्र शुरू करने या खुद ही चलाने के लिए 25 साल के बाद यूएलबी को लौटाना होगा।
  • 25 साल के लिए उपलब्ध अपनी खाली जमीन पर एआरएचसी के विकास के लिए निजी/सार्वजनिक इकाइयों को स्वीकृति का उपयोग, 50 प्रतिशत अतिरिक्त एफएआर/ एफएसआई, प्राथमिक क्षेत्र उधारी दर पर रियायती कर्ज, किफायती आवास से जुड़ी कर राहत आदि विशेष प्रोत्साहनों की पेशकश की जाएगी।
  • एआरएचसी के अंतर्गत विनिर्माण उद्योगों, आतिथ्य सेवा, स्वास्थ्य क्षेत्र में सेवा प्रदाताओं, घरेलू/व्यावसायिक प्रतिष्ठानों और निर्माण या अन्य क्षेत्रों में लगे अधिकांश कार्यबल, कामगार, विद्यार्थी आदि लक्षित लाभार्थी होंगे, जो ग्रामीण क्षेत्रों या छोटे शहरों से आते हैं और बेहतर अवसरों की तलाश में हैं।
  • तकनीक नवाचार अनुदान के रूप में इस पर 600 करोड़ रुपये की धनराशि का व्यय होने का अनुमान है, जो निर्माण के लिए चिन्हित नवाचार तकनीक का उपयोग करने वाली परियोजनाओं के लिए जारी की जाएगी। एआरएचसी के अंतर्गत शुरुआती तौर पर लगभग तीन लाख लाभार्थियों को कवर किया जाएगा।
  • एआरएचसी से शहरी क्षेत्रों में कार्यस्थल के नजदीक सस्ते किराये वाले आवासों की उपलब्धता के अनुकूल एक नया इकोसिस्टम तैयार होगा। एआरएचसी के अंतर्गत निवेश से रोजगार के नए अवसर पैदा होने का अनुमान है। एआरएचसी से अनावश्यक यात्रा, भीड़भाड़ और प्रदूषण में कमी आएगी।
  • सरकार द्वारा वित्तपोषित खाली पड़े आवासों को किफायती उत्पादक उपयोग के लिए एआरएचसी में कवर किया जाएगा। इस योजना से अपनी खाली पड़ी जमीन पर एआरएचसी के विकास करने की दिशाओं में इकाइयों के लिए अनुकूल माहौल तैयार होगा और किराये वाले आवासीय क्षेत्र में उद्यमशीलता को प्रोत्साहन मिलेगा।

प्रधानमंत्री आवास योजना शहरी- पीएमएवाई(यू) के बारे में

  • सबके लिए घर (एचएफए) के नारे के साथ प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) 2022 तक सबको घर उपलब्‍ध कराने का एक मिशन है, जिसे जून, 2015 से लागू किया गया है। इसके तहत शहरी स्‍थानीय निकायों और इसे लागू करने वाली अन्‍य एजेंसियों को राज्‍यों/केन्‍द्र शासित प्रदेशों के जरिये केन्‍द्रीय मदद दी जाती है। इसमें झुग्‍गी-झोपड़ियों में रहने वाले लोगों का पुनर्वास किया जाता है।
  • प्रधानमंत्री आवास योजना - शहरी (पीएमएवाई-यू) के पांच साल 25 जून 2020 को पूरे हो गए। पांच वर्ष के भीतर पीएमएवाई (यू) के तहत लगभग 1.12 करोड़ मकानों की सत्यापित मांग प्राप्त हुई है। 1.05 करोड़ मकानों के लिए स्वीकृतियां पहले ही मिल गई हैं जिनमें से 65 लाख मकानों की नींव डाल दी गई है और 35 लाख मकान निर्मित किए जा चुके हैं एवं देश भर में लाभार्थियों के बीच इनका वितरण हो चुका है।

प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना

चर्चा में क्यों?

  • प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने उज्ज्वला लाभार्थियों के लिए प्रधानमंत्री गरीब कल्याण योजना के लाभ लेने की समय सीमा 1 जुलाई 2020 से 3 महीने के लिए बढ़ाने के पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है।

पृष्ठभूमि

  • सरकार ने प्रधानमंत्री गरीब कल्याण योजना नाम से एक राहत पैकेज घोषित किया था जिसका उद्देश्य गरीबों और समाज के ऐसे उपेक्षित लोगों को सुरक्षा कवच प्रदान करना है जो महामारी से सबसे अधिक प्रभावित हुए हैं पैकेज में उन गरीब परिवारों के लिए राहत को भी शामिल किया गया था जिन्होंने पीएमयू वाई के अंतर्गत एलपीजी कनेक्शन की सुविधा प्राप्त की थी।
  • कोरोनावायरस के दौरान इस योजना का विस्तार निर्धन वर्ग के लोगों को सीधा फायदा पहुंचाने के लिए किया गया है। सरकार के इस फैसले के माध्यम से निर्धन परिवारों को मुफ्त में एलपीजी सिलेंडर वितरित किए जा रहे है।

प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के बारे में

  • गरीबी रेखा से नीचे गुजर-बसर करने वाले परिवारों की महिलाओं को निशुल्क एलपीजी कनेक्शन देने के लिए प्रधानमंत्री की अध्यक्षता में आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति ने 10 मार्च 2016 को प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना को स्वीकृति दी थी।
  • इस योजना की शुरुआत 1 मई 2016 को उत्तर प्रदेश के बलिया जिले से हुई थी।
  • इस योजना में नया एलपीजी कनेक्शन उपलब्ध कराने के लिए 1600 रूपये की नकद सहायता देना शामिल है और यह सहायता राशि केंद्र सरकार द्वारा उपलब्ध कराई जाती है।
  • योजना के प्रारंभ में इसका लक्ष्य 5 करोड़ कनेक्शन बांटना था परंतु साल 2020 में यह आठ करोड़ तक कर दिया गया है। भविष्य में 10 करोड़ तक पहुचाने की योजना बनाई जा रही है।
  • प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना का उद्देश्य महिलाओं और बच्चों के स्वास्थ्य की रक्षा हेतु उन्हें खाना पकाने के लिए स्वच्छ इंधन प्रदान करना है।
  • इसके माध्यम से पर्यावरण प्रदूषण में भी कमी आएगी।
  • पश्चिमी अफ्रीका के घाना प्रदेश में भी उज्जवला योजना के समान ही गैस पहुंचाने की योजना है।

प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना

चर्चा में क्यों

  • कोविड-19 संकट के दौरान देशभर में गरीबों को खाद्यान्न सहायता देने के लिए शुरू की गयी 'प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना' की अवधि पांच महीने और बढ़ाने के फैसले पर केंद्रीय मंत्रिमंडल ने मंजूरी दे दी।

प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना

  • प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना की शुरुआत कोविड समस्या के दौरान खाद्यान आपूर्ति सुनिश्चित करने हेतु मार्च में की गयी थी।
  • यह योजना कोविड -19 के खिलाफ घोषित प्रधानमंत्री गरीब कल्याण पैकेज का ही एक हिस्सा है।
  • इस योजना के तहत 80 करोड़ व्यक्तियों, अर्थात, भारत की लगभग दो-तिहाई आबादी को आच्छादित किया गया एवं इनमें से प्रत्येक व्‍यक्ति को अगले तीन महीनों (मार्च, अप्रैल और जून) के दौरान मौजूदा निर्धारित अनाज के मुकाबले दोगुना खाद्यान्न दिया जाना था।
  • इसमे लोगों को मिलने वाला अतिरिक्त खाद्यान्न मुफ्त में प्रदान किया जाना था। इसके साथ ही सभी व्यक्तियों को प्रोटीन की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए क्षेत्रीय प्राथमिकताओं के अनुसार प्रत्‍येक परिवार को 1 किलो दाल भी मुफ्त में प्रदान की जानी थी।
  • वर्तमान में इस प्रधानमत्री गरीब कल्याण अन्न योजना की अवधि नवंबर के अंत तक विस्तारित कर दिया गया है।
  • राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम के अंतर्गत आने वाले सभी लाभार्थियों को यह लाभ दिया जाएगा और इस अधिनियम के अंतर्गत प्रदत्त खाद्यान्नों के अतिरिक्त यह लाभ दिया जाएगा।
  • पांच महीने तक इस योजना को और संचालित करने की सरकारी लागत 90,000 करोड़ रुपए से अधिक की है।

ऑपरेशन समुद्र सेतु

चर्चा में क्यों?

  • कोविड-19 महामारी के दौरान भारतीय नागरिकों को विदेश से वापस लाने के प्रयासों के तहत 5 मई, 2020 को शुरू किया गया ऑपरेशन समुद्र सेतु का समापन हो गया है, जिसके तहत समुद्र मार्ग से 3,992 भारतीय नागरिकों को अपने देश लाया गया। इस ऑपरेशन में भारतीय नौसेना के जहाज जलाश्व (लैंडिंग प्लेटफॉर्म डॉक), ऐरावत, शार्दुल तथा मगर (लैंडिंग शिप टैंक्स) ने हिस्सा लिया, जो लगभग 55 दिन तक चला और इसमें समुद्र में 23,000 किलोमीटर से ज्यादा दूरी तय की गई।
  • भारतीय नौसेना 2006 में ऑपरेशन सुकून (बेरूत) और 2015 में आपरेशन राहत (यमन) के तहत पूर्व में भी इसी तरह के निकासी अभियान चला चुकी है।

क्या है ऑपरेशन समुद्र सेतु?

  • कोविड-19 महामारी के दौरान भारतीय नौसेना ने विदेशों से भारतीय नागरिकों को स्वदेश लाने के लिए ऑपरेशन "समुद्र सेतु" शुरू किया है- जिसका अर्थ है "समुद्री पुल"। इस ऑपरेशन में भारतीय नौसेना के जहाज जलाश्व (लैंडिंग प्लेटफॉर्म डॉक), ऐरावत, शार्दुल तथा मगर (लैंडिंग शिप टैंक्स) ने हिस्सा लिया।

:: अंतर्राष्ट्रीय समाचार ::

एफ -1 और एम -1 वीजा

चर्चा में क्यों?

  • संयुक्त राज्य अमेरिका ने भारत से कहा है कि वह छात्रों के हितों को ध्यान रखते हुए एफ - 1 वीज़ा और एम -1 वीजा के बारे में नए नियम के प्रभाव को कम करने की कोशिश करेगा।

पृष्ठभूमि

  • ट्रम्प प्रशासन ने एफ -1 और एम -1 वीजा धारकों के लिए नए नियमो की घोषणा की है जो केवल ऑनलाइन कक्षाएं ले रहे हैं। इसके तहत वर्तमान में ऐसे कोर्स में नामांकित छात्रों को अमेरिका छोड़ना होगा।

क्या है F-1 वीजा?

  • F-1 वीजा अमेरिका में अकादमिक पाठ्यक्रम में दाखिला लेने वाले अंतरराष्ट्रीय छात्रों को प्रदान किया जाने वाला वीजा है। यह वीजा अंतरराष्ट्रीय छात्रों को अमेरिका के मान्यता प्राप्त कॉलेज, विश्वविद्यालय, मदरसा, शैक्षणिक उच्च विद्यालय, प्राथमिक विद्यालय या अन्य शैक्षणिक संस्थान में में पूर्णकालिक छात्र के रूप में अध्यनन की की अनुमति देता है।

क्या है M-1 वीजा?

  • एम 1 वीजा अमेरिका में अंतरराष्ट्रीय छात्रों को दिया जाने वाला एक गैर-सरकारी वीजा है। यह वीजा प्राय: ऐसे छात्रों को दिया जाता है जो गैर अकादमिक पाठ्यक्रम में अध्ययन करते है उदाहरण के लिए व्यावसायिक या वोकेशनल कोर्स इत्यादि में।

कुलभूषण जाधव

चर्चा में क्यों?

  • पाकिस्तान की जेल में बंद कुलभूषण जाधव के मामले में पाकिस्तान के एडीश्नल अटॉर्नी जनरल ने कहा कि 17 जून 2020 को भारतीय राष्ट्रीय कुलभूषण जाधव को उनकी सजा पर पुनर्विचार के लिए एक याचिका दायर करने के लिए आमंत्रित किया गया था। अपने कानूनी अधिकार का प्रयोग करते हुए उन्होंने अपनी सजा पर पुनर्विचार के लिए याचिका दायर करने से इनकार कर दिया। कुलभूषण जाधव ने इसके बजाय उनकी लंबित दया याचिका का पालन करना पसंद किया। पाकिस्तान ने उन्हें दूसरा काउंसुलर एक्सेस ऑफर किया है।

पृष्ठभूमि

  • आपको बता दें कि भारतीय नौसेना के रिटायर्ड अधिकारी कुलभूषण जाधव पाकिस्तान की जेल में बंद हैं। अप्रैल 2017 में पाकिस्तान सैन्य अदालत ने जाधव को जासूसी और आतंकवाद के आरोप में मौत की सजा सुनाई थी। बाद में भारत जाधव तक राजनायिक पहुंच प्रदान करने से इनकरा करने और मौत की सजा को चुनौती देते हुए पाकिस्तान के खिलाफ आईसीजे पहुंचा था जहां पर जीत मिली थी।
  • इससे पहले जुलाई 2019 में नीदरलैंड स्थित अंतरराष्ट्रीय अदालत ने करीब 26 महीने चली सुनवाई के बाद दिए भारत के हक में फैसला सुनाते हुए कुलभूषण जाधव के लिए कौंसुलर संपर्क की इजाजत देने को कहा था। साथ ही जाधव के मामले की सिविलियन अदालत में सुनवाई के लिए भी अवसर मुहैया कराने को कहा था।
  • पाकिस्तान का दावा है कि उसके सुरक्षा बलों ने 2016 तीन मार्च को अपने अशांत प्रांत बलूचिस्तान से जाधव उर्फ हुसैन मुबारक पटेल को उस वक्त गिरफ्तार किया था जब वह कथित तौर पर ईरान से पाकिस्तानी सीमा में दाखिल हुए। बहरहाल, भारत का कहना है कि जाधव को ईरान से अगवा किया गया और भारतीय नौसेना से रिटायर होने के बाद वहां उनके व्यापारिक हित हैं ।

ईरान की अंडरग्राउंड 'मिसाइल सिटी'

चर्चा में क्यों?

  • ईरान के परमाणु संयंत्र पर इजरायली हमले के बाद से दोनों देशों में तनाव चरम पर है। इस बीच ईरान ने ऐलान किया है कि उसने गल्फ कोस्ट के निकट अंडरग्राउंड मिसाइल सिटी का निर्माण किया है। जो देश के दुश्मनों को पल भर में खत्म कर सकती है। ईरानी नौसेना के प्रमुख अलिर्जा तांगिसिरी ने कहा कि ईरान ने फारस की खाड़ी और ओमान की खाड़ी के तटों पर भूमिगत मिसाइल सिटी की स्थापना की है जो ईरान के दुश्मनों के लिए एक बुरा सपना होगा। इस मिसाइल सिटी में ग्राउंड टू एयर मिसाइल और क्रूज मिसाइलों के जखीरे हैं।

क्या होती है मिसाइल सिटी

  • मिसाइल सिटी का मतलब जमीन के नीचे मौजूद ऐसे ठिकाने से है जहां दुश्मन के हवाई हमलों से बचने के लिए बडी संख्या में मिसाइलों को तैनात किया जाता है। नौसेना प्रमुख ने दावा किया कि ईरान जल्द ही लंबी दूरी तक मार करने में सक्षम नई मिसाइल और नौसैनिक युद्धपोतों को लेकर भी ऐलान करेगा।

अमेरिका डब्ल्यूएचओ से बाह

  • प्रशासन ने कोरोना वायरस वैश्विक महामारी के बीच विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) से सभी संबंध तोड़ते हुए इस वैश्विक स्वास्थ्य संगठन से अमेरिका के बाहर होने के अपने फैसले से संयुक्त राष्ट्र को औपचारिक रूप से अवगत करा दिया है।

पृष्ठभूमि

  • राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने संगठन को आर्थिक मदद रोकने की घोषणा अप्रैल मध्य में की थी और डब्ल्यूएचओ से अमेरिका के बाहर होने की अपनी मंशा भी मई में स्पष्ट रूप से जाहिर कर दी थी। साथ ही, उन्होंने कहा था, 'यह (डब्ल्यूएचओ बार-बार) अनुरोध किये गये और बहुत जरूरी सुधार करने में विफल रहा है।"
  • अमेरिका ने पिछले साल चीन के वुहान शहर से फैली कोरोना वायरस महामारी को लेकर डब्ल्यूएचओ पर चीन का पक्ष लेने का भी आरोप लगाया है। उसका आरोप है कि स्वास्थ्य संगठन ने विश्व को गुमराह किया, जिस कारण से दुनिया भर में पांच लाख लोगों की मौत हुई। इनमें से 1,30,000 मौत अकेले अमेरिका में हुई।

:: अर्थव्यवस्था ::

सीबीडीटी और सेबी के बीच समझौता ज्ञापन (एमओयू)

  • केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (सीबीडीटी) और भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (सेबी) ने दोनों संगठनों के बीच डेटा-साझा करने के उदेश्य से एक औपचारिक समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए।
  • समझौता ज्ञापन से सेबी और सीबीडीटी को आपस में स्वचालित और नियमित आधार पर डेटा और सूचना साझा करने की सुविधा प्राप्त होगी। डेटा के नियमित आदान-प्रदान के अलावा, सेबी और सीबीडीटी विभिन्न कानूनों के तहत अपने कार्यों को पूरा करने के उद्देश्य से, अनुरोध पर या अपने आप डेटाबेस में उपलब्ध जानकारी का आदान-प्रदान भी करेंगे।
  • समझौते पर हस्ताक्षर वाले दिन से एमओयू लागू हो जायेगा। यह सीबीडीटी और सेबी की पहल है, जो पहले से ही विभिन्न तंत्रों के माध्यम से आपस में सहयोग कर रहे हैं। इसके लिए एक डेटा एक्सचेंज स्टीयरिंग ग्रुप का भी गठन किया गया है, जो डेटा साझा स्थिति की समीक्षा करने और डेटा साझा तंत्र की प्रभावशीलता को और बेहतर बनाने के लिए समय-समय पर बैठक करेगा।

एलएनजी पर ग्लोबल एनर्जी मानीटर की रिपोर्ट गैस बबल

चर्चा में क्यों?

  • ग्लोबल एनर्जी मानीटर द्वारा जारी रिपोर्ट गैस बबल में एलएनजी के वैश्विक परिदृश्य का आकलन किया गया है। रिपोर्ट में कहा गया है कि एलएनजी के विस्तार के लिए पूर्व में काफी प्रयास हुए हैं।
  • तरलीकृत प्राकृतिक गैस (एलएनजी) को कोयला और मीथेन गैस के विकल्प के रूप में आगे बढ़ाने की कोशिशें शुरू हुई थी लेकिन एलएनजी उद्योग अब संकट में फंसता हुआ दिख रहा है। इसके पीछे कई कारण हैं, लेकिन एक प्रमुख कारण अक्षय ऊर्जा की लागत में लगातार कमी आना है।

रिपोर्ट से जुड़े प्रमुख बिंदु

  • निर्माणाधीन एलएनजी टर्मिनल की क्षमता और संख्या में इजाफा होना इसका साफ संकेत है। इस क्षेत्र में पूंजीगत निवेश 82.8 अरब डालर से बढ़कर बीते वर्ष 196.1 अरब डालर तक पहुंच गया है।
  • रिपोर्ट में कहा गया है कि दुनिया में अक्षय ऊर्जा की लागत में कमी आ रही है, इसलिए उस दिशा में निवेश बढ़ने लगा है। क्योंकि एलनएनजी कोयले और मीथेन की तुलना में कम प्रदूषणकारी है लेकिन अक्षय ऊर्जा पूर्ण रूप से प्रदूषण मुक्त है।
  • यूरोप एवं कई देशों में एनएनजी को विभिन्न कारणों से कानूनी अड़चनों एवं राजनीतिक विरोधों का भी सामना करना पड़ा है जिससे परियोजनाओं के निर्माण में विलंब होने लगा। नतीजा यह है कि दो दर्जन से अधिक मेगा परियोजना संघर्ष का सामना कर रही हैं।
  • एलएनजी को ब्रिज फ्यूल के तौर पर इस्तेमाल किया जा रहा था। कोयले और मीथेन गैस के विकल्प के रूप में इसे लाया गया। दरअसल, कोयले से उत्सर्जन काफी है। जबकि मीथेन से भी उत्सर्जन हैं लेकिन उसके इस्तेमाल में लीकेज बहुत ज्यादा होता है जो पर्यावरण को भारी नुकसान पहुंचाती है। इस हिसाब से एलनएनजी अपेक्षाकृत कम प्रदूषणकारी और सहज सुलभ तरलीकृत गैस है तथा इसे छोटे स्वरूप में परिवर्तित कर दुनिया में कहीं भी ले जाना आसान है। लेकिन तमात देशों की दिलचस्पी इसमें घट रही है।

तरलीकृत प्राकृतिक गैस (एलएनजी) के बारे में

  • एल एन. जी (तरलीकृत प्राकृतिक गैस) प्राकृतिक गैस का तरल रुप है जिसे आमतौर पर जहाजों के माध्यम से बड़ी मात्रा में उन देशों में भेजा जाता है जहाँ पाइप लाइन का जाना संभव नहीं है। बड़े पैमाने पर शामिल ऑपरेशन्स की वजह से परिवहन रसद में अर्थव्यवस्था का स्तर उँचा हो जाएगा।
  • प्राकृतिक गैस को 160 डिग्री सेल्सियस तक ठंडा करके तरल अवस्था में लाया जा सकता है जिससे कि यह गैसीय मात्रा के मुकाबले 1/600वे हिस्से में रखी जा सके और इसलिए इसे तरलीकृत प्राकृतिक गैस कहा जाता है जिसे गैस परिवहन में कम जगह का इस्तेमाल करती है। प्राकृतिक गैस से तरलीकृत प्राकृतिक गैस बनाने की प्रक्रिया के दौरान बहुत सारी अशुद्धियाँ निकल जाती है। इसलिए एल. एन. जी, प्रकृतिक गैस का शुद्धतम रुप है।

:: विज्ञान और प्रौद्योगिकी ::

युवाओं का डिजिटल स्किल सिखाने के लिए माइक्रोसॉफ्ट और एनएसडीसी में समझौता

  • दिग्गज टेक कंपनी माइक्रोसॉफ्ट (Microsoft) ने देश के युवाओं के डिजिटल स्किल को निखारने के लिए नेशनल स्किल डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन (NSDC) के साथ हाथ मिलाया है। इसके तहत अगले एक साल में देश में एक लाख से अधिक युवाओं को डिजिटली सक्षम बनाया जाएगा। माइकोसॉफ्ट और एनएसडीसी की साझेदारी का मकसद भारत को स्किल्ड नेशन में बदलना है। इसके तहत माइक्रोसॉफ्ट एनएसडीसी के ईस्किल इंडिया पोर्टल के साथ समन्वय करेगी ताकि नई पीढ़ी को डिजिटल स्किल की बारीकियां सिखाई जा सकें। देश को डिजिटल इकनॉमी बनाने के लिए यह बहुत जरूरी है।
  • इस साझेदारी के तहत माइक्रोसॉफ्ट के लर्निंग रिसोर्स सेंटर माइक्रोसॉफ्ट लर्न को ईस्किल इंडिया के डिजिटल प्लेटफॉर्म के साथ जोड़ा जाएगा। ताकि युवाओं को आज की डिजिटल इकनॉमी की बारीकियों से रूबरू कराया जा सके। इसके तहत इन युवाओं के एंट्री लेवल से लेकर एआई और क्लाउड कम्प्यूटिंग जैसे एडवांस लेवल की क्रिटिकल तकनीक से अवगत कराया जाएगा। एनएसडीसी के साथ पार्टनरशिप माइक्रोसॉफ्ट की ग्लोबल स्किलिंग इनिशिएटिव का विस्तार है। इसके तहत कंपनी पूरी दुनिया में 2.5 करोड़ लोगों को नए डिजिटल स्किल सिखा रही है जिनकी कोविड-19 इकनॉमी में जरूरत है।

केन्या में गुब्बारों की मदद से इंटरनेट सेवा

  • गूगल की मूल कंपनी अल्फाबेट ने केन्या के नेरौबी इलाके में इंटरनेट सेवा प्रदान करने के लिए नई व्यवस्था शुरू की है। इन इलाकों में अल्फाबेट की तरफ से ऐसे 35 गुब्बारे लांच किए गए हैं जिनसे केन्या में मोबाइल नेटवर्क प्रदान किया जाएगा।
  • अल्फाबेट ने उच्च ऊंचाई वाले गुब्बारों के एक बेड़े ने केन्या में इंटरनेट सेवा प्रदान करना शुरू कर दिया, जिससे तकनीक के पहले-पहले वाणिज्यिक तैनाती में हजारों लोगों की ऑनलाइन पहुंच बढ़ गई। ये गुब्बारे राजधानी, नैरोबी सहित पूरे मध्य और पश्चिमी केन्या में लगभग 31,000 वर्ग-मील क्षेत्र में एक 4 जी एलटीई नेटवर्क कनेक्शन प्रदान करेगा।
  • गुब्बारे पहले ही आपातकालीन स्थितियों में इस्तेमाल किए गए थे, जैसे कि 2017 में तूफान रिको के बाद प्यूर्टो रिको में सेल टावरों को मिटा दिया गया था। लूनर सेवा को एक लागत प्रभावी समाधान के रूप में रेखांकित दूरस्थ क्षेत्रों में लोगों तक इंटरनेट की पहुंच को कठिन चुनौती के रूप में पेश करता है। केन्या उद्यम को अन्य देशों में दूरसंचार प्रदाताओं द्वारा बारीकी से देखा जा रहा है कि क्या प्रौद्योगिकी विश्वसनीय है और सेवा लाभदायक हो सकती है।

कैसे करता है यह कार्य?

  • पॉलीइथिलीन की चादरों से बने गुब्बारे टेनिस कोर्ट के आकार के होते हैं। वे सौर पैनलों द्वारा संचालित होते हैं और जमीन पर सॉफ्टवेयर द्वारा नियंत्रित होते हैं। हवा में रहते हुए, वे "फ्लोटिंग सेल टॉवर" के रूप में कार्य करते हैं। इंटरनेट सिग्नल को ग्राउंड स्टेशन और व्यक्तिगत उपकरणों तक पहुंचाते हैं। वे धरती पर वापस आने से पहले स्ट्रैटोस्फियर में 100 दिनों तक अच्छी तरह से रहते हैं। फोन कंपनियों को अपनी कवरेज का विस्तार करने की अनुमति देकर जहां जरूरत होती है, गुब्बारे देशों को केबल बिछाने या सेल टॉवर बनाने की तुलना में एक सस्ता विकल्प प्रदान करने का इरादा है।

इस योजना का महत्व

  • संयुक्त राष्ट्र की एजेंसी इंटरनेशनल टेलीकम्युनिकेशन यूनियन के अनुसार, अफ्रीका में प्रभावी हो सकता है, जहां महाद्वीप के 1.3 बिलियन लोगों में से सिर्फ 28% ही 2019 में दुनिया के किसी भी क्षेत्र में सबसे कम दर का उपयोग कर रहे हैं। और यहां तक ​​कि अधिक उपयोगकर्ता ऑनलाइन आ गए हैं, कई अफ्रीकियों के लिए इंटरनेट की लागत बहुत अधिक है।

श्रीलंका और मालदीव खसरा और रूबेला से मुक्त

  • संयुक्त राष्ट्र स्वास्थ्य एजेंसी ने कहा कि श्रीलंका और मालदीव विश्व स्वास्थ्य संगठन के दक्षिण पूर्व एशिया क्षेत्र में 2023 के लक्ष्य से पहले खसरा और रूबेला को समाप्त करने वाले पहले दो देश बन गए हैं।
  • डब्ल्यूएचओ दक्षिण पूर्व एशिया की क्षेत्रीय निदेशक पूनम खेत्रपाल सिंह ने एक बयान में कहा कि जब दुनिया कोरोना वायरस से जूझ रही है ऐसे में बीमारी से निपटने में ,' यह सफलता उत्साह बढ़ाने वाली है और संयुक्त प्रयासों की अहमियत को दर्शाती है।'
  • किसी देश को खसरा और रूबेला से मुक्त तब समझा जाता है जब देश में तीन साल से अधिक समय तक संक्रमण फैलने के कोई साक्ष्य नहीं हो और देशों में संतोषजनक काम कर रहा निगरानी तंत्र हो।
  • मालदीव ने 2009 में खसरा और अक्टूबर 2015 में रूबेला के अपने अंतिम स्थानीय मामले की सूचना दी, जबकि श्रीलंका ने मई 2016 में खसरा और मार्च 2017 में रूबेला के अपने अंतिम स्थानीय मामले की सूचना दी।

:: पर्यावरण और पारिस्थितिकी ::

महाराष्ट्र की लोनार झील

  • बॉम्बे हाईकोर्ट की नागपुर पीठ ने कहा है कि गुलाबी रंग में बदली लोनार झील की स्थिति बहुत खराब और दयनीय है। अदालत ने झील और उसके आसपास के क्षेत्र के संरक्षण एवं सुरक्षा के प्रति 'संवेदनहीन और उदासीन रवैये' को लेकर बुलढाणा के जिलाधिकारी और लोनार निगम परिषद की खिंचाई की। न्यायमूर्ति सुनील शुक्रे और न्यायमूर्ति अनिल किलोर की पीठ ने सोमवार को कीर्ति निपांकर की याचिका पर सुनवाई के दौरान झील का रंग बदलने पर चिंता प्रकट की है।

पृष्ठभूमि

  • गुलाबी रंग में बदली लोनार झील की स्थिति पर पिछले महीने अदालत ने राष्ट्रीय पर्यावरण अभियांत्रिकी अनुसंधान संस्थान और भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण संस्थान को इस झील पर पर्यावरणीय प्रभाव आकलन करने का निर्देश दिया था। महाराष्ट्र के बुलढाणा में लोनार झील एक लोकप्रिय पर्यटक केंद्र है। हाल ही में इस झील का पानी गुलाबी हो गया जिससे स्थानीय लोग ही नहीं बल्कि प्रकृति प्रेमी और वैज्ञानिक भी चकित हैं।

क्यों बदलता है जलीय तंत्र का रंग?

  • झीलों का रंग बदलने की पीछे कई कारक उत्तरदाई होते हैं। इसमें सबसे प्रमुख शैवालों का बढ़ना माना जाता है । दरसल सुपोषण (Eutrophication)की प्रक्रिया में जलाशय में पौधों तथा शैवाल का विकास बड़ी तेजी से होता है।ऐसी दशा में शैवाल प्रस्फुटन (Algae Bloom) के कारण झील का रंग बदल जाता है। इसके अलावा लवणता का बढ़ना और प्रदूषण के बढ़ने से भी झीलों के रंग प्रभावित होते हैं।

लोनार झील के बारे में

  • लोनार झील महाराष्ट्र के बुलढ़ाणा ज़िले में स्थित एक क्रेटर झील है। यह पर्यटकों के बीच काफी लोकप्रिय है।
  • इस झील का निर्माण करीब 50,000 साल पहले एक उल्का पिंड के पृथ्वी से टकराने के कारण हुआ था।
  • करीब 1.2 किमी के व्यास वाली झील का पानी खारा है और इसका पीएच स्तर 10.5 है।
  • गौरतलब है कि भारत में खारे पानी की सबसे बाद स्थलबद्ध झील राजस्थान की सांभर झील है।

क्या होती है क्रेटर झील

  • क्रेटर किसी खगोलीय वस्तु पर एक गोल या लगभग गोल आकार के गड्ढे को कहते हैं जो किसी ज्वालामुखी विस्फोट, अंतरिक्ष से गिरे उल्कापिंड के प्रहार या फिर ज़मीन के अन्दर किसी अन्य विस्फोट जैसे परमाणु बम आदि के कारण बनते हैं। इन गड्ढो में पानी भर जाने से जो झील बनती है उसे ही क्रेटर झील करते है।

गंगा डाल्फिन

चर्चा में क्यों?

  • राष्ट्रीय वनजीव बोर्ड (एनबीडब्ल्यूएल) की 58वीं बैठक में गंगा में पाई जाने वाली डॉल्फिन का संरक्षण भी टाइगर, घड़ियाल और हाथियों की तरह किया जाएगा। अब तक संरक्षित श्रेणी में आने वाली डॉल्फिन की संख्या को बढ़ाने और गंगा में फिर से इनकी अठखेलियां बढ़ाने के लिए केंद्र सरकार एक मुश्त योजना बनाकर काम करेगी।

गंगा डाल्फिन के बारे में

  • मीठे पानी की डॉलफिन भारत का राष्‍ट्रीय जलीय जीव है। पर्यावरण और वन मंत्रालय ने राष्ट्रीय एक्वाटिक पशु के रूप में 18 मई 2010 को गंगा नदी डॉल्फिन अधिसूचित किया। यह स्‍तनधारी जंतु पवित्र गंगा की शुद्धता को भी प्रकट करता है, क्‍योंकि यह केवल शुद्ध और मीठे पानी में ही जीवित रह सकता है। आमतौर पर एकांत प्रिय और एकल रहने वाला यह जीव कभी कभी छोटे छोटे समूहों में भी विचरण करता है। ज्यादातर मां डॉल्फिन बच्चे के साथ ही रहती है।
  • नदी में रहने वाली डॉलफिन मछलियां एकल रचनाएं है और मादा मछली नर मछली से बड़ी होती है। इन्‍हें स्‍थानीय तौर पर सुसु कहा जाता है क्‍योंकि यह सांस लेते समय ऐसी ही आवाज निकालती है। इस प्रजाति को भारत, नेपाल, भूटान और बंगलादेश की गंगा, मेघना और ब्रह्मपुत्र नदियों में तथा बंगलादेश की कर्णफूली नदी में देखा जा सकता है।
  • नदी में पाई जाने वाली डॉलफिन भारत की एक महत्‍वपूर्ण संकटापन्‍न प्रजाति है और इसलिए इसे वन्‍य जीवन (संरक्षण) अधिनियम, 1972 में शामिल किया गया है।
  • गंगा नदी में पाई जाने वाली डॉल्फिन एक ऐसी प्रजाति है, जिसे अंतरराष्ट्रीय प्रकृति संरक्षण संगठन और भारतीय वनजीव अधिनियम द्वारा संरक्षित जीवों की श्रेणी में सूची बद्ध किया गया है।

गंगा डाल्फिन के संरक्षण के लिए वनजीव बोर्ड की सिफारिश

  • नेशनल बोर्ड फॉर वाइल्ड लाइफ की स्थायी समिति ने गंगा डॉल्फिन, राष्ट्रीय जलीय पशु के संरक्षण के लिए समर्पित परियोजना शुरू करने की सिफारिश की और मंत्रालय के प्रोजेक्ट टाइगर और प्रोजेक्ट हाथी की तर्ज पर गंगा डॉल्फिन जो कि संरक्षण अनुसूची में एक नंबर पर खतरे वाली प्रजाति की श्रेणी जीव है को भी बाकायदा एक परियोजना चलाकर बचाने की सिफारिश की गई है।
  • इसमें इस प्रजाति के घर कहलाने वाले असम, बिहार, झारखंड, मध्यप्रदेश, राजस्थान, उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल राज्यों में गहरी नदी के साथ-साथ गंगा-ब्रह्मपुत्र-मेघना और कर्णफुली नदी में पाई जाने वाली डॉल्फिन के संरक्षण के लिए कृत संकल्पित होगी।
  • इसके तहत डॉल्फिन की आबादी के हिसाब से मुफीद नदी के हिस्सों में संरक्षण की कवायद करके इनके संरक्षण और आबादी को बढ़ाने के लिए उपयुक्त वातावरण का निर्माण किया जाएगा। संरक्षित क्षेत्र में इनकी आमद को बनाए रखने के लिए साफ पानी की अविरल धारा भी सुनिश्चित की जाएगी। इसके अलावा संरक्षित जीवों की तरह ही अब इनके रहने और संवर्धन के लिए एक मुश्त प्रयास शुरू किए जाएंगे।

अपशिष्ट के निस्तारण की व्यवस्था बिना नये उद्योगों को अनुमति नहीं: एनजीटी

  • राष्ट्रीय हरित अधिकरण ने केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) और सभी राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को निर्देश दिया कि खतरनाक प्रदूषकों का उत्सर्जन करने वाले नये उद्योगों को लगाने की तब तक अनुमति नहीं दी जाए जब तक कि इस तरह के अपशिष्ट के निस्तारण की सुविधा उपलब्ध नहीं हो जाती।
  • हरित पैनल ने सीपीसीबी को निर्देश दिया कि 'प्रदूषक भुगतान' सिद्धांत के आधार पर पर्यावरण को लगातार क्षति पहुंचाने वालों से उसके दिशानिर्देश के मुताबिक मुआवजे की वसूली की जाए। एनजीटी के अध्यक्ष न्यायमूर्ति आदर्श कुमार गोयल की अध्यक्षता वाली पीठ ने सीपीसीबी से कहा कि खतरनाक कचरा उत्पादन करने वाले उद्योगों की पुष्टि के लिए व्यवस्था बनाए।
  • पीठ ने राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को निर्देश दिए कि मानकों का उल्लंघन करने वाले उद्योगों से पर्यावरण मुआवजा वसूला जाए।
  • पीठ ने कहा, 'सीपीसीबी और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड किसी नये उद्योग को अनुमति नहीं दे सकते हैं जिनके खतरनाक कचरा उत्पादन की संभावना है, जब तक कि इस तरह के कचरे के निस्तारण की सुविधाएं उपलब्ध नहीं हो जाएं।' अधिकरण ने सभी राज्यों और केंद्र शासित क्षेत्रों को निर्देश दिए कि वे 31 अक्टूबर 2020 तक अनुपालन रिपोर्ट सीपीसीबी को सौंपें।

रीवा सौर ऊर्जा संयंत्र

चर्चा में क्यों?

  • मप्र के रीवा में स्थापित 750 मेगावाट क्षमता वाले अल्ट्रा मेगा सोलर प्लांट (अत्याधुनिक सौर ऊर्जा संयंत्र) का औपचारिक उद्घाटन 10 जुलाई को होने जा रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ऑनलाइन इसका शुभारंभ करेंगे। कोयला संयंत्रों के मुकाबले इस संयंत्र से सस्ती बिजली मिल रही है। यहां से दो रपये 97 पैसे प्रति यूनिट बिजली बेची जा रही है। संयंत्र की 24 फीसद बिजली दिल्ली मेट्रो ट्रेन के लिए मुहैया कराई जाती है, जबकि 76 फीसद मप्र सरकार उपयोग करती है।

रीवा सौर ऊर्जा संयंत्र के बारे में

  • प्लांट का औपचारिक उद्घाटन अब हो रहा है, लेकिन जनवरी 2020 से ही बिजली का उत्पादन शुरू हो चुका है। रीवा से 25 किमी दूर गुढ़ क्षेत्र के पांच गांव की करीब 1590 एकड़ जमीन पर यह प्लांट लगाया गया है। मप्र ऊर्जा विकास निगम और भारत सरकार के सौर ऊर्जा निगम के संयुक्त उपक्रम के तौर पर इसे स्थापित किया गया है। यहां तीन निजी कंपनियां 250-250 मेगावाट बिजली का उत्पादन कर रही हैं।
  • जनवरी 2020 में पूरा उत्पादन प्रारंभ हुआ। अब प्रतिदिन 37 हजार यूनिट बिजली का उत्पादन किया जा रहा है। प्रदेश की भाजपा सरकार का अहम प्रोजेक्ट था। सोलर पॉवर प्लांट को देख रहे मप्र ऊर्जा विकास निगम के अधिकारी एसएस गौतम ने बताया कि प्लांट पूरी क्षमता से चल रहा है।
  • अल्ट्रा सोलर प्लांट से पैदा हो रही बिजली को ग्रिड के जरिए भेजा जा रहा है। ऊर्जा विकास निगम के क्षेत्रीय अधिकारी प्रवीण तिवारी ने बताया कि 250-250 मेगावॉट क्षमता वाले तीन सब स्टेशन बनाए गए हैं। यहां से पैदा हुई बिजली को ग्रिड में भेजा जाता है, जहां से मप्र और अन्य इलाकों में बिजली भेजी जाती है।
  • कोयले से बनी बिजली का औसत प्रति यूनिट दाम 3.50 रुपये के आसपास होता है जबकि सौर ऊर्जा संयंत्र से बनी बिजली की दर इससे कम है। ये प्राकृतिक ऊर्जा है जबकि कोयला से बिजली उत्पादन पर्यावरण के लिए भी अच्छा नहीं है।

:: विविध ::

'हिज होलीनेस द फोर्टिंथ दलाई लामा : एन इलेस्ट्रेटेड बॉयोग्राफी'

  • दलाई लामा पर एक नयी किताब अक्टूबर में आएगी। इसमें तिब्बती आध्यात्मिक नेता के जीवन से जुड़ी अनेक नयी चीजें और 400 से ज्यादा अनदेखी तस्वीरों को शामिल किया गया है।
  • प्रकाशक रोली बुक्स ने बताया कि 352 पन्नों की किताब 'हिज होलीनेस द फोर्टिंथ दलाई लामा : एन इलेस्ट्रेटेड बॉयोग्राफी' दलाई लामा के करीबी सहयोगी और 40 साल से सलाहकार तेनजिंग ग्याचे तेथोंग ने लिखी है ।
  • किताब में करीब 400 तस्वीरों के साथ आध्यात्मिक नेता के निजी संदेशों को भी शामिल किया गया है। दलाई लामा के आरंभिक वर्षों से लेकर कम्युनिस्ट चीन के साथ बाद में खतरनाक संबंधों का भी इसमें विवरण दिया गया है । इतिहास के उस हिस्से को भी इसमें शामिल किया गया है जब मार्च 1959 में दलाई लामा को भारत आने के लिए मजबूर होना पड़ा था ।

कौन है दलाई लामा?

  • दलाई लामा तिब्बती आध्यात्मिक नेता है। दलाई लामा जब 23 साल के थे तब वह तिब्बत से निकल गए थे और उन्होंने भारत में शरण ली थी। वर्तमान में वह हिमाचल प्रदेश के धर्मशाला में निवास करते हैं । अहिंसा और आजादी के मुखर पैरोकार दलाई लामा को 1989 में नोबेल शांति पुरस्कार दिया गया था । जर्मन, डच, रूसी, इतालवी, चेक, एस्टोनिया, लिथुआनिया, स्लोवाक सहित अन्य भाषाओं में भी इस किताब का प्रकाशन होगा ।

:: प्रिलिम्स बूस्टर ::

  • हाल ही में दक्षिण पूर्व एशिया के किन देशों ने 2023 के निर्धारित लक्ष्य से पहले ही खसरा और रूबेला को समाप्त करने में सफलता हासिल की? (श्रीलंका और मालदीव)
  • भारतीय नौसेना के द्वारा सफलतापूर्वक ऑपरेशन को पूरा करने से चर्चा में रहे 'ऑपरेशन समुद्र सेतु' को किस उद्देश्य हेतु प्रारंभ किया गया था? (कोविड-19 उपरांत विदेश से भारतीयों को वापस लाने हेतु)
  • हाल ही में अमेरिका प्रशासन के द्वारा बदलाव से चर्चा में रहे क्रमशः एफ-1 और एम-1 वीजा किस लिए जारी किए जाते हैं? (क्रमशः अकादमिक पाठ्यक्रम हेतु, वोकेशनल कोर्स हेतु)
  • हाल ही में किस योजना के तहत मंत्रिमंडल द्वारा शहरी प्रवासियों/गरीबों के लिए कम किराये वाले आवासीय परिसरों के विकास के लिए स्वीकृति दी गई है? (प्रधानमंत्री आवास योजना)
  • राष्ट्रीय वन्यजीव बोर्ड द्वारा टाइगर, घड़ियाल और हाथियों के समान संरक्षण की सिफारिश करने से चर्चा में रहे डॉल्फिन को किस वर्ष "राष्ट्रीय जलीय जीव" घोषित किया गया था? (2009)
  • प्रधानमंत्री द्वारा 10 जुलाई को मध्य प्रदेश के किस स्थान पर 750 मेगावाट क्षमता वाले अल्ट्रा मेगा सोलर प्लांट (अत्याधुनिक सौर ऊर्जा संयंत्र) का औपचारिक उद्घाटन किया जाएगा? (रीवा)
  • प्रधानमंत्री गरीब कल्याण योजना के तहत अगले 3 महीने के लिए लाभार्थियों को एलपीजी प्रदान करने से चर्चा में रहे उज्ज्वला योजना की शुरुआत कब और कहां से की गई थी? (2016, बलिया उत्तर प्रदेश)
  • उच्चतम न्यायालय द्वारा सुनवाई से चर्चा में रहे किस राज्य ने अध्यादेश द्वारा राज्य निर्वाचन आयुक्त का कार्यकाल घटाकर 3 वर्ष कर दिया है? (आंध्र प्रदेश)
  • हाल ही में किस देश औपचारिक तौर पर विश्व स्वास्थ्य संगठन(WHO) से बाहर होने की सूचना संयुक्त राष्ट्र को प्रदान की है? (अमेरिका)
  • हाल ही में ग्लोबल एनर्जी मानीटर द्वारा जारी रिपोर्ट गैस बबल से चर्चा में रहे तरलीकृत प्राकृतिक गैस (एलएनजी) के कौन-कौन से संगठक तत्व होते हैं? (मीथेन, ईथेन और प्रोपेन)
  • हाल ही में किस प्रौद्योगिकी कंपनी ने 1 लाख युवाओं को डिजिटल स्किल को निखारने के लिए नेशनल स्किल डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन (NSDC) के साथ समझौता किया है? (माइक्रोसॉफ्ट)
  • दलाई लामा के जीवन से जुड़ी 'हिज होलीनेस द फोर्टिंथ दलाई लामा : एन इलेस्ट्रेटेड बॉयोग्राफी' को मुख्य रूप से किसके द्वारा लिखा गया है? (तेनजिंग ग्याचे तेथोंग)

स्रोत साभार: Dainik Jagran (Rashtriya Sanskaran), Dainik Bhaskar (Rashtriya Sanskaran), Rashtriya Sahara (Rashtriya Sanskaran) Hindustan Dainik (Delhi), Nai Duniya, Hindustan Times, The Hindu, BBC Portal, The Economic Times (Hindi & English), PTI, PIB