(दैनिक समसामयिकी और प्रिलिम्स बूस्टर) यूपीएससी और सभी राज्य लोक सेवा आयोग परीक्षाओं के लिए हिंदी में समाचार पत्रों का संकलन (07 जुलाई 2020)

दैनिक समसामयिकी और प्रिलिम्स बूस्टर


(दैनिक समसामयिकी और प्रिलिम्स बूस्टर) यूपीएससी और सभी राज्य लोक सेवा आयोग परीक्षाओं के लिए हिंदी में समाचार पत्रों का संकलन (07 जुलाई 2020)


:: राष्ट्रीय समाचार ::

प्रीडेटर-बी ड्रोन और सी गार्डियन ड्रोन

चर्चा में क्यों

  • लद्दाख में चीन के आक्रामक व्यवहार और पाकिस्तान को युद्धक ड्रोन बेंचने की कार्यवाही ने भारत को मध्यम ऊंचाई पर लंबे समय तक कार्य करने में साक्षम सशस्त्र प्रीडेटर-बी अमेरिकी ड्रोनों की नए सिरे से खरीद में रुचि व्यक्त करने के लिए प्रेरित किया है।

प्रीडेटर-बी ड्रोन

  • प्रीडेटर-बी ड्रोन का दूसरा नाम MQ- 9 रीपर है। यह एक मानवरहित वायुयान है जिसे रिमोट से कंट्रोल किया जा सकता है।
  • इसका विकास जनरल एटॉमिक्स सिस्टम्स (GA-ASI) द्वारा मुख्यतः अमेरिकी वायु सेना के लिए किया गया है।
  • यह पहला हंटर किलर यू ए वी है जिसे लंबी दूरियों, अधिक ऊंचाइयों, और निगरानी के लिए बनाया गया है।
  • अमेरिकी प्रीडेटर बी ड्रोन न सिर्फ खुफिया जानकारी इकट्ठा करता है, बल्कि लक्ष्य का पता लगाकर उसे मिसाइल और लेजर गाइडेड बम से नष्ट भी कर देता है।
  • वर्तमान में भारत द्वारा पूर्वी लद्दाख में सर्विलांस के इस्राइली हेरोन ड्रोन का उपयोग करता है।

सी गार्डियन ड्रोन

  • अमेरिका ने भारत को 4 अरब डालर से अधिक कीमत के 30 सी गार्डियन ड्रोन बेचने की पेशकश की है।
  • यह प्रीडेटर बी ड्रोन का समुद्री संस्करण है जिसमें रेथियन सी वूई मल्टीमोड मैरिटाइम रडार फिट है।
  • सी गार्डियन ड्रोन अमेरिका समेत उसकी सहयोगी सेनाओं का अहम रक्षा उपकरण है। ये ड्रोन लगातार 40 घंटे तक उड़ान भरते हुए दुश्मन की किसी भी हरकत पर नजर रखने में सक्षम है।
  • भारत पहला गैर-नाटो देश है, जिसके लिए वाशिंगटन ने सी गार्जियन के निर्यात को मंजूरी दी है।

NHAI द्वारा राजमार्गों की रैंकिंग की योजना

चर्चा में क्यों?

  • सड़कों को बेहतरीन बनाने के अपने प्रयासों के तहत सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय के अधीनस्‍थ भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) ने देश भर में राजमार्गों की दक्षता का आकलन करने के साथ-साथ उनकी रैंकिंग करने का भी निर्णय लिया है।
  • राष्ट्रीय राजमार्गों के आकलन ऑडिट एवं रैंकिंग का उद्देश्‍य जहां भी जरूरत हो, वहां आवश्‍यक सुधार सुनिश्चित करना है, ताकि उनकी गुणवत्ता बेहतर हो सके तथा राजमार्गों पर आवाजाही करने वाले यात्रियों को मनभावन सफर का आनंद मिल सके।

क्या होंगें रैंकिंग के मानदंड

  • आकलन के मानदंड विभिन्न अंतरराष्ट्रीय प्रथाओं या तौर-तरीकों और अध्ययनों पर आधारित हैं जिसका उद्देश्‍य भारतीय संदर्भ में राजमार्गों की दक्षता के मानकों को तय करना है। आकलन के लिए मानदंड को मुख्यत: तीन अहम भागों में वर्गीकृत किया गया है: राजमार्ग की दक्षता (45%), राजमार्ग पर सुरक्षा (35%) और उपयोगकर्ता को मिलने वाली सेवाएं (20%)। इस आकलन के निष्‍कर्षों के आधार पर प्राधिकरण व्यापक विश्लेषण करेगा और सेवाओं की समग्र गुणवत्ता बढ़ाने के लिए विभिन्‍न आवश्यक कदमों को उठाने के बारे में निर्णय लेगा।
  • इसके अलावा, आकलन करते समय कई और महत्वपूर्ण मानदंडों पर भी विचार किया जाएगा जिनमें परिचालन की गति, कई दिशाओं से वाहनों की पहुंच पर नियंत्रण, टोल प्लाजा पर लगने वाला समय, सड़क संकेतक, सड़क चिन्‍ह, दुर्घटना की दर, किसी घटना से निपटने में लगने वाला समय, क्रैश बैरियर, रोशनी, उन्नत यातायात प्रबंधन प्रणाली (एटीएमएस) की उपलब्धता, संरचनाओं की कार्यक्षमता, श्रेणीबद्ध पृथक चौराहों की व्‍यवस्‍था, स्वच्छता, वृक्षारोपण, सड़क के किनारे मिलने वाली सुविधाएं और ग्राहक संतुष्टि शामिल हैं।
  • प्रत्येक मानदंड या पैमाने पर प्रत्येक कॉरिडोर द्वारा हासिल किए जाने वाला स्कोर दरअसल परिचालन के उच्च मानकों, बेहतर सुरक्षा एवं उपयोगकर्ताओं को अच्‍छे अनुभव कराने के लिए आवश्‍यक जानकारियां सुलभ कराएगा और इसके साथ ही उन सुधारात्मक कदमों को भी सुझाएगा जिन पर अमल करके मौजूदा राजमार्गों को बेहतर बनाना संभव ही पाएगा। इससे एनएचएआई की अन्य परियोजनाओं के लिए भी डिजाइन, मानकों, प्रथाओं, दिशा-निर्देशों और अनुबंध समझौतों में खामियों को पहचानने एवं उन्‍हें पाटने में मदद मिलेगी।
  • कॉरिडोर यानी गलियारों की रैंकिंग त्‍वरित रूप से परिवर्तनशील होगी और रियायत प्राप्‍तकर्ता/ठेकेदार/ऑपरेटर को उस कॉरिडोर पर उपलब्‍ध सेवाओं में सुधार करके अपनी रैंकिंग को बेहतर करने का अवसर मिलेगा। समस्‍त गलियारों की समग्र रैंकिंग के अलावा बीओटी, एचएएम और ईपीसी परियोजनाओं के लिए भी अलग-अलग रैंकिंग की जाएगी। रैंकिंग की इस प्रक्रिया से परिचालन में दक्षता के साथ-साथ सड़कों का बेहतरीन रखरखाव भी सुनिश्चित होगा।

:: अंतर्राष्ट्रीय समाचार ::

कुवैत का एक्‍सपैट कोटा(नया प्रवासी) बिल

चर्चा में क्यों?

  • कुवैत की नेशनल असेंबली की कानूनी और विधायी समिति ने एक्‍सपैट कोटा बिल को मंजूरी दे दी है। इस बिल के पास होने पर कुवैत में रह रहे 8 लाख भारतीयों को कुवैत छोड़ना पड़ सकता है। कोरोना महामारी के बीच अगर ऐसा हुआ तो भारत में एक बड़ी आबादी बेरोजगोर हो जाएगी। देश के सामने उन्‍हें रोजगार देने की बड़ी समस्‍या पैदा हो सकती है। कुवैत में रह रहे भारतीय न केवल कुवैत की अर्थव्‍यवस्‍था की रीढ़ है, बल्कि भारतीय अर्थव्‍यवस्‍था को भी सुदृढ़ करते हैं।

पृष्ठभूमि

  • कुवैत सरकार देश में काम करने वाले प्रवासी नागरिकों की संख्या कम करना चाह रही है, इसके लिए एक कानून का मसौदा तैयार किया गया है। इस कानून का सबसे बड़ा असर भारतीय नागरिकों पर हो सकता है। कुवैत में अभी करीब 10 लाख भारतीय नागरिक रहते हैं।
  • हालांकि, इस कानून का असर कुवैत में काम करने वाले सभी देशों के नागरिकों पर होगा, लेकिन सबसे ज्यादा भारतीय नागरिक प्रभावित होंगे, क्योंकि प्रवासियों में सबसे बड़ी संख्या भारतीयों की ही है। अगर यह कानून पारित हो गया तो संभावना है कि तीन से चार लाख प्रवासी भारतीयों को देश छोड़ना पड़ सकता है।

क्या है कुवैत की समस्या?

  • धीरे-धीरे बड़ी संख्या में प्रवासियों को अपनी तरफ आकर्षित करते करते कुवैत एक प्रवासी-बहुल देश बन गया है। देश की कुल 48 लाख आबादी में सिर्फ 30% कुवैती और 70% प्रवासी हैं। लेकिन आर्थिक चुनौतियों की वजह से अब वहां प्रवासी-विरोधी भावनाएं गहरा रही हैं, जिसकी वजह से सरकार को इस समस्या पर ध्यान देना पड़ा।
  • कुवैत सरकार ने लक्ष्य बनाया है कि आबादी में प्रवासियों की संख्या को 70% से कम कर के 30% पर लाना है। मीडिया में आई खबरों के अनुसार प्रस्तावित कानून में देश की आबादी में प्रवासी भारतीयों की संख्या घटाकर आबादी का 15% करने की बात की गई है।
  • अगर यह कानून लागू हो गया तो सिर्फ लगभग सात लाख प्रवासी भारतीयों को ही कुवैत में रहने की अनुमति मिल पाएगी और कम से कम तीन से चार लाख भारतीयों को कुवैत छोड़ना पड़ेगा।
  • स्थानीय मीडिया में कहा जा रहा है कि करीब आठ लाख भारतीयों को देश छोड़ना पड़ सकता है। इस कानून को अभी तक कुवैती संसद की दो महत्वपूर्ण समितियों से स्वीकृति मिल चुकी है और एक और समिति से स्वीकृति मिलना बाकी है।

:: अर्थव्यवस्था ::

11.5 लाख करोड़ रुपए की मार्केट कैप वाली देश की पहली कंपनी: RIL

  • रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड (आरआईएल) का कुल बाजार पूंजीकरण सोमवार को 11.5 लाख करोड़ रुपये के आंकड़े को पार कर गया। कंपनी के शेयरों का दाम बढ़ने से बाजार पूंजीकरण में वृद्धि हुई है। इसके साथ ही 11.5 लाख करोड़ रुपए मार्केट कैप वाली पहली भारतीय कंपनी बन गई है। देश की सबसे बड़ी कंपनी का बाजार पूंजीकरण पिछले महीने पहली बार 11 लाख करोड़ रुपये के आंकड़े का पार कर गया था।

सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों हेतु 'आपातकालीन उपाय कार्यक्रम'

चर्चा में क्यों?

  • विश्व बैंक और भारत सरकार ने आज 'एमएसएमई आपातकालीन उपाय कार्यक्रम' के लिए 750 मिलियन डॉलर के समझौते पर हस्ताक्षर किए। इसका मुख्‍य उद्देश्‍य कोविड-19 संकट से बुरी तरह प्रभावित सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) को वित्त का प्रवाह बढ़ाने में आवश्‍यक सहयोग प्रदान करना है।

पृष्ठभूमि

  • कोविड-19 महामारी से एमएसएमई सेक्‍टर बुरी तरह प्रभावित हुआ है जिससे आजीविका और रोजगार दोनों ही मोर्चों पर व्‍यापक नुकसान उठाना पड़ा है। भारत सरकार यह सुनिश्चित करने पर फोकस कर रही है कि वित्तीय सेक्‍टर में प्रचुर मात्रा में उपलब्ध तरलता का प्रवाह एनबीएफसी की ओर हो और जोखिम मोल लेने से कतरा रहे बैंक एनबीएफसी को ऋण देकर अर्थव्यवस्था में निरंतर धनराशि डालते रहें। यह परियोजना लक्षित गारंटी प्रदान करने में सरकार को आवश्‍यक सहयोग देगी, जिससे लाभप्रद एमएसएमई को उधार देने के लिए एनबीएफसी और बैंकों को प्रोत्साहित किया जा सकेगा। इससे लाभप्रद एमएसएमई को मौजूदा संकट का डटकर सामना करने में मदद मिलेगी।

'एमएसएमई आपातकालीन उपाय कार्यक्रम' कार्यक्रम के बारे में

  • विश्व बैंक का 'एमएसएमई आपातकालीन उपाय कार्यक्रम' तकरीबन 1.5 मिलियन लाभप्रद एमएसएमई की नकदी और ऋण संबंधी तात्कालिक आवश्यकताओं को पूरा करेगा जिससे उन्‍हें मौजूदा सदमे के प्रभावों को झेलने के साथ-साथ लाखों नौकरियों की रक्षा करने में भी मदद मिलेगी। यह एमएसएमई सेक्‍टर को समय के साथ आगे बढ़ाने के लिए आवश्‍यक सुधारों के बीच पहला कदम है।
  • विश्व बैंक समूह, जिसमें उसकी निजी क्षेत्र शाखा अंतर्राष्ट्रीय वित्त निगम (आईएफसी) भी शामिल हैं, एमएसएमई सेक्‍टर की रक्षा के लिए सरकार द्वारा की गई पहलों में निम्‍नलिखित कदमों के जरिए आवश्‍यक सहयोग देगा:

तरलता को उन्‍मुक्‍त करना

  • बाजार में तरलता या नकदी प्रवाह (लिक्विडिटी) सुनिश्चित करने के लिए आरबीआई और भारत सरकार द्वारा उठाए गए शुरुआती एवं निर्णायक कदमों से भारत की वित्तीय प्रणाली में मजबूती आई। मौजूदा अनिश्चितताओं के मद्देनजर कर्जदारों की ऋण अदायगी क्षमता को लेकर उधारदाता अब भी काफी चिंतित हैं जिसके कारण यहां तक कि इस सेक्‍टर के लाभप्रद उद्यमों के लिए भी ऋण का प्रवाह काफी सीमित है। यह कार्यक्रम एमएसएमई सेक्‍टर में तरलता लाने में सरकार के प्रयासों में आवश्‍यक सहयोग देगा। इसके तहत बैंकों और गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (एनबीएफसी) की ओर से एमएसएमई को दिए जाने वाले ऋणों में अंतर्निहित जोखिम को ऋण गारंटी सहित विभिन्‍न प्रपत्रों की एक श्रृंखला के माध्यम से समाप्‍त करने की कोशिश की गई है।

एनबीएफसी और एसएफबी को मजबूत करना

  • ऋण के प्रमुख बाजारोन्मुख चैनलों जैसे कि एनबीएफसी और स्मॉल फाइनेंस बैंक (एसएफबी) की वित्‍त पोषण (फंडिंग) क्षमता बढ़ाने से उन्हें एमएसएमई की तात्कालिक एवं विवि‍ध आवश्यकताओं का पूरा करने में मदद मिलेगी। इसमें एनबीएफसी के लिए सरकार की पुनर्वित्त सुविधा में आवश्‍यक सहयोग देना भी शामिल होगा। यही नहीं, आईएफसी भी ऋणों और इक्विटी के माध्यम से एसएफबी को सीधे तौर पर सहयोग प्रदान कर रहा है।

वित्तीय नवाचारों को सक्षम करना

  • मौजूदा समय में सिर्फ लगभग 8 प्रतिशत एमएसएमई की ही कर्ज संबंधी आवश्‍यकताओं की पूर्ति औपचारिक ऋण चैनलों से हो रही है। यह कार्यक्रम एमएसएमई को ऋण देने और भुगतान में फिनटेक एवं डिजिटल वित्तीय सेवाओं के उपयोग को प्रोत्साहित करेगा तथा इसे मुख्यधारा में लाएगा। डिजिटल प्लेटफॉर्म उधारदाताओं, आपूर्तिकर्ताओं और खरीदारों की पहुंच विभिन्‍न कंपनियों, विशेषकर उन छोटे उद्यमों तक बड़ी तेजी से और कम लागत पर सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे जिनकी पहुंच वर्तमान में औपचारिक चैनलों तक नहीं है।

अन्य संबंधित तथ्य

  • एमएसएमई सेक्‍टर भारत के विकास एवं रोजगार सृजन के केंद्र में है और इसके साथ ही यह कोविड-19 के बाद भारत में आर्थिक विकास की गति तेज करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। तत्काल जरूरत तो यह सुनिश्चित करने की है कि सरकार द्वारा वित्‍तीय प्रणाली में डाली गई तरलता अवश्‍य ही एमएसएमई तक पहुंच जाए। इतना ही नहीं, एमएसएमई के लिए वित्तपोषण से जुड़े समग्र परिवेश को मजबूत करना भी उतना ही आवश्‍यक है। यह कार्यक्रम प्रभावकारी वित्तीय मध्यवर्ती संस्‍थाओं के रूप में एनबीएफसी और एससीबी की भूमिका को और आगे बढ़ाकर तथा एमएसएमई सेक्‍टर में वित्त की पहुंच को व्यापक बनाने के लिए फिनटेक का लाभ उठाकर इन दोनों उद्देश्यों की पूर्ति करना चाहता है।
  • विश्व बैंक ने एमएसएमई परियोजना सहित भारत के आपातकालीन कोविड-19 उपायों में आवश्‍यक सहयोग देने के लिए अब तक 2.75 अरब डॉलर देने की प्रतिबद्धता व्‍यक्‍त की है। 1 अरब डॉलर की पहली आपातकालीन सहायता की घोषणा भारत के स्वास्थ्य क्षेत्र में तत्काल सहयोग देने के लिए इस साल अप्रैल महीने में की गई थी। 1 अरब डॉलर की एक और परियोजना को मई महीने में गरीबों और कमजोर वर्गों को नकद हस्तांतरण एवं खाद्य संबंधी लाभों में वृद्धि करने के लिए मंजूरी दी गई थी। इसमें अपेक्षाकृत अधिक समग्र डिलीवरी प्‍लेटफॉर्म भी शामिल है, जो सभी राज्यों में रहने वाली ग्रामीण और शहरी दोनों ही आबादी के लिए सुलभ है।
  • अंतर्राष्ट्रीय पुनर्निर्माण और विकास बैंक (आईबीआरडी) से मिलने वाले 750 मिलियन डॉलर के ऋण की परिपक्वता अवधि 19 साल है जिसमें 5 साल की मोहलत अवधि भी शामिल है।

:: विज्ञान और प्रौद्योगिकी ::

हाईटेक जासूसी उपग्रह: ओफेक-16

  • इजरायल के रक्षा मंत्री ने सोमवार को एक नए जासूसी उपग्रह के सफलतापूर्वक प्रक्षेपण की घोषणा की इससे क्षेत्र में खतरों की निगरानी में आसानी होगी। इजरायल में करीब दो दशक से इस तरह के उपग्रह प्रक्षेपित किए जा रहे हैं और ओफेक-16 इसी जासूसी बेड़े में शामिल हो गया है।
  • उपग्रह की सफलता से इजराइल के दुश्मनों के खिलाफ पास में या दूर तक कार्रवाई करने की क्षमता बढ़ जाती है। इससे जमीन पर, समुद्र में, हवा में और यहां तक की अंतरिक्ष में भी कार्रवाई करने की हमारी क्षमता बढ़ जाती है।

ब्यूबोनिक प्लेग (bubonic plague)

चर्चा में क्यों?

  • हाल ही में उत्तरी चीन के एक शहर में बुबोनिक प्लेग का एक संदिग्ध मामला सामने आया है। बुबोनिक प्लेग को लेकर बेन्नूर, (आंतरिक मंगोलिया स्वायत्त क्षेत्र) ने प्लेग की रोकथाम और नियंत्रण के स्तर III की चेतावनी की घोषणा की गयी है।

क्या है ब्यूबोनिक प्लेग?

  • घातक बीमारी ब्यूबोनिक प्लेग(bubonic plague) को मध्य काल में ब्लैक डेथ (Black Death) के रूप में जाना जाता था।
  • बुबोनिक प्लेग बैक्टीरिया यर्सिनिया पेस्टिस के कारण होता है। यर्सिनिया पेस्टिस बैक्टीरिया, आमतौर पर छोटे स्तनधारियों और उनके पिस्सू में पाए जाने वाले एक जूनोटिक जीवाणु होते हैं।
  • इस रोग में मरीजों को बुखार, सिरदर्द, ठंड लगना, कमजोरी, सूजन, लिम्फ नोड्स (जिन्हें बुबोस कहा जाता है) की अचानक शुरुआत होती है। यह रूप आमतौर पर एक संक्रमित पिस्सू के काटने से होता है । बैक्टीरिया लिम्फ नोड को बढ़ा देते हैं जहां से और अधिक बैक्टीरिया मानव शरीर में प्रवेश करते हैं। यदि रोगी को उचित एंटीबायोटिक दवाओं के साथ इलाज नहीं किया जाता है, तो बैक्टीरिया शरीर के अन्य भागों में फैल सकता है।
  • इस रोग के लक्षणों में लिम्फ नोड्स में सूजन शामिल हैं एवं इसका प्रभाव कमर, बगल या गर्दन में दिखता है ।
  • बुखार, ठंड लगना, सिरदर्द, थकान और मांसपेशियों में दर्द इसके अन्य लक्षण है।
  • बुबोनिक प्लेग की स्थिति में हैवी डोज के एंटीबायोटिक दवाओं के साथ तत्काल अस्पताल उपचार की आवश्यकता होती है।

'डिजिटल सुरक्षा और ऑनलाइन स्वास्थ्य' तथा 'ऑगमेंटिड रियलिटी' पर पाठ्यक्रम

  • केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री रमेश पोखरियाल निशंक ने घोषणा की कि केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) और फेसबुक मिलकर छात्रों और शिक्षकों के लिए 'डिजिटल सुरक्षा और ऑनलाइन स्वास्थ्य' तथा 'ऑगमेंटिड रियलिटी' पर पाठ्यक्रम शुरू करेंगे।,
  • पाठ्यक्रम का उद्देश्य छात्रों के ऑनलाइन रहने के दौरान उनकी सेहत का ध्यान रखते हुए भविष्य के लिए उन्हें तैयार करना है। बोर्ड के ये प्रारूप माध्यमिक स्कूलों के छात्रों के लिए हैं। पाठ्यकम सीबीएसई की वेबसाइट पर है।
  • इस साझेदारी की अगुवाई 'फेसबुक फॉर एजुकेशन' कर रही है जो फेसबुक की वैश्विक पहल है।

:: पर्यावरण और पारिस्थितिकी ::

ऑर्किड फूल की दुर्लभ प्रजाति: ग्राउंड ऑर्किड

  • भारत में 118 सालों के बाद ऑर्किड फूल की दुर्लभ प्रजाति मिली है। उत्तर प्रदेश के दुधवा टाइगर रिजर्व में वन अधिकारियों और वन्यजीव एक्सपर्ट्स को निरीक्षण के दौरान वैज्ञानिक नाम Eulophia obtusa वाला फूल देखने को मिला, जिसे ग्राउंड ऑर्किड के तौर पर जाना जाता है।
  • IUCN की रेड लिस्ट में विलुप्तप्राय लिस्टेड पौधे की इस प्रजाति को आखिरी बार पीलीभीत में 1902 में देखा गया था। इंग्लैंड में क्यू हर्बेरियम के दस्तावेजों में यह बात दर्ज है। 19वीं सदी में गंगा नदी के मैदानी इलाकों से वनस्पति वैज्ञानिक इस प्रजाति को यहां ले आए थे। लेकिन पिछले 100 सालों से इसे फिर कभी नहीं देखा गया। 'दुधवा फॉरेस्ट रेंज में यह प्रजाति दो अलग जगहों पर पाई गई है। इसके और भी जगहों पर होने की उम्मीद है।' वर्ल्ड वाइल्ड फंड फॉर नेचर (WWF) भारत के कोऑर्डिनेटर डॉक्टर मुदित गुप्ता ने बताया कि जल्द ही डिटेल सर्वे किया जा सकता है।

जलवायु परिवर्तन से 10 लाख प्रजातियों के विलुप्त होने का खतरा

चर्चा में क्यों?

  • जलवायु परिवर्तन के कारण दुनिया में 10 लाख से अधिक प्रजातियों के विलुप्त होने का खतरा उत्पन्न हो गया है। संयुक्त राष्ट्र संघ की एक ताजा रिपोर्ट में कहा गया है कि जलवायु परिवर्तन मानवीय गतिविधियों की तुलना में कही अधिक प्रजातियों को जोखिम में डाल रहा है। इसकी वजह से पौधों और जीव समूह की करीब 25 प्रतिशत प्रजातियां विलुप्त होने के खतरे का सामना कर रही है। यदि इन कारकों से निपटने के लिए प्रयास नहीं हुए तो कुछ ही दशकों में 10 लाख से अधिक प्रजातियां विलुप्त हो सकती है।

रिपोर्ट से जुड़ें प्रमुख तथ्य

  • भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद की कृषि पत्रिका में प्रकाशित आलेख के अनुसार मूल निवासियों और स्थानीय समुदायों द्वारा प्रयास किये जाने के बावजूद वर्ष 2016 तक पालतू स्तनधारी पशुओं की 6190 में से 559 र्पजातियां विलुप्त हो गयी। इनका उपयोग भोजन और कृषि उत्पादन में किया जाता था।
  • संयुक्त राष्ट्र पयार्वरण कार्यक्रम ने कहा है कि हर साल लगभग 80 लाख टन प्लास्टिक कचरा समुद्र में फेंका जाता है जो 800 से ज्यादा प्रजातियों के लिए खतरा पैदा करता है । इनमें से 15 प्रजातियां विलुप्त होने के कगार पर है । प्लास्टिक के बारीक कण को मछलियां और अन्य जीव खा लेते हैं। आम लोग जब मछली खाते हैं तो इसका असर उन पर होता है । वर्ष 1980 के बाद जल में प्लास्टिक प्रदूषण की मात्रा दस गुना बढी है। इससे कम से कम 267 जलीय प्रजातियों के लिए खतरा बढ़ गया है। इनमें 86 प्रतिशत कछुए , 44 प्रतिशत समुद्री पक्षी और 43 प्रतिशत समुद्री स्तनधारी जीव हैं।
  • विश्व में तीन अरब से अधिक लोग अपनी आजीविका के लिए समुद्र और तटीय जैव विविधता पर निर्भर हैं। समुद्र प्रोटीन का भी स्त्रोत है और इससे तीन अरब से अधिक लोगों को प्रोटीन मिलता है। रिपोर्ट के अनुसार लगभग 40 प्रतिशत महासागर प्रदूषण , घटती मछलियों की संख्या और तटीय पयार्वास के क्षय के साथ इंसानी गतिविधियों से बुरी तरह प्रभावित है।

उष्णकटिबंधीय चक्रवात एडवर्ड

चर्चा में क्यों?

  • हाल ही में एक उष्णकटिबंधीय तूफान 'एडवर्ड' महाद्वीपीय अमेरिका से दूर अटलांटिक महासागर की ओर बढ़ने लगा। मियामी में स्थित अमेरिकी राष्ट्रीय तूफान केंद्र ने कहा के अनुसार एडवर्ड में सबसे तेज गति की हवाएं 65 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चल रही हैं। एडवर्ड तूफान करीब 57 किलोमीटर प्रति घंटे की गति से उत्तरपूर्व की तरफ बढ़ रहा है।

क्या होते है उष्णकटिबंधीय चक्रवात?

  • उष्णकटिबंधीय चक्रवात एक ऐसा तूफान है जिसके बीच में काफी कम दबाव का क्षेत्र होता है। चक्रवात के आने के साथ बिजली कड़कने के साथ तेज़ हवाएं चलती हैं और भारी बारिश होती है।
  • उष्णकटिबंधीय चक्रवात तब पैदा होता है जब नम हवा ऊपर उठती है। नम हवा के ऊपर उठने से गर्मी पैदा होती है। इस गर्मी की वजह से हवा की नमी का संघनन होता है और बादल बनते हैं जिससे बारिश होती है।
  • उष्ण कटिबंधीय चक्रवात या ट्रॉपिकल साइक्लोन आम तौर पर 30° उत्तरी एवं 30° दक्षिणी अक्षांशों के बीच पैदा होते हैं । इसकी वजह इन अक्षांशों में इन चक्रवातों के पैदा होने के लिए आदर्श स्थितिया है।
  • भूमध्य रेखा या इक्वेटर पर कम दबाव होने के बावजूद कोरिओलिस बल न के बराबर होता है ।इसकी वजह से हवाएं वृत्ताकार रूप में नहीं चलतीं,और चक्रवात नहीं बन पाते । दोनों गोलार्द्धों में 30° अक्षांश के बाद ये हवाएं पछुआ पवनों के प्रभाव में आकर स्थल पर पहुँचकर ख़त्म हो जाती हैं।
  • आम तौर पर उष्ण कटिबंधीय चक्रवात बनने के लिए समुद्री सतह का तापमान 27°C से ज़्यादा होना चाहिए , कोरिओलिस बल का असर होना चाहिए , ऊपर चलने वाली हवा न के बराबर हो
  • उष्णकटिबंधीय चक्रवात का प्रभाव प्रमुख रूप से प्रशांत महासागर, हिंद महासागर और उत्तरी अटलांटिक महासागर के क्षेत्रों पर ज्यादा रहता है। इस क्षेत्र में आने वाले चक्रवातों को अपने स्थान और तीव्रता के आधार पर अलग-अलग नामों से जाना जाता है। इस श्रेणी में हरिकेन, टाइफ़ून, ट्रोपिकल स्ट्रोमी, साइक्लोनिक स्टोर्म ट्रोपिकल डिप्रेशन और साइक्लोन यानी चक्रवात शामिल होते हैं।

भारतीय रेलने का ज़ीरो कार्बन उत्सर्जन वाले जन परिवहन नेटवर्क बनने का लक्ष्य

चर्चा में क्यों?

  • प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी के निर्देशानुसार अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए आत्मनिर्भर होने के प्रयास तथा अक्षय ऊर्जा (आरई) परियोजनाओं के लिए अपनी खाली भूमि का उपयोग करने के साथ ही भारतीय रेल एक नए दौर में प्रवेश करने जा रही है। रेलवे अपनी कर्षण शक्ति की आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए सौर ऊर्जा का उपयोग करने के साथ ही जन परिवहन का एक हरित माध्‍यम बनने के लिए प्रतिबद्ध है।

पृष्ठभूमि

  • 'भारतीय रेलने 2030 तक खुद को ज़ीरो'कार्बन उत्सर्जन वाले जन परिवहन नेटवर्क के रूप में बदलने के लिए मिशन मोड पर काम कर रही है।
  • भारतीय रेलवे की ऊर्जा मांग को सौर परियोजनाओं द्वारा पूरा किया जाएगा, जिससे यह पहला ऐसा जन परिवहन माध्‍यम बन जाएगा जो पूरी तरह से ऊर्जा के मामले में आत्मनिर्भर होगा। इससे भारतीय रेलवे को परिवहन का हरित माध्‍यम बनाने के साथ ही पूरी तरह से 'आत्म निर्भर' भी बनाया जा सकेगा।

अक्षय ऊर्जा (आरई) की दिशा में रेलवे के प्रयास

  • भारतीय रेलवे हरित ऊर्जा खरीद के मामले में अग्रणी रहा है। इसने एमसीएफ रायबरेली (यूपी) में स्थापित 3 मेगावाट के सौर संयंत्र जैसे विभिन्न सौर परियोजनाओं से ऊर्जा खरीद शुरू की है। भारतीय रेलवे के विभिन्न स्टेशनों और भवनों पर लगभग 100 मेगावाटवाले सौर पैनल पहले से ही चालू हो चुके हैं।
  • इसके अलावा, बीना (मध्य प्रदेश) में 1.7 मेगावाट की एक परियोजना जो सीधे ओवरहेड ट्रैक्शन सिस्टम से जुड़ी होगी, पहले ही स्थापित हो चुकी है और वर्तमान में व्यापक परीक्षण के तहत है। इसके 15 दिनों के भीतर चालू होने की संभावना है। भारत हेवी इलेक्ट्रिकल्स लिमिटेड (बीएचईएल) के सहयोग से भारतीय रेलवे द्वारा शुरू की गई दुनिया में यह अपनी तरह की पहली परियोजना है। इसमें रेलवे के ओवरहेड ट्रैक्शन सिस्टम को सीधे फीड करने के लिए डायरेक्ट करंट (डीसी) को सिंगल फेज अल्टरनेटिंग करंट (एसी) में बदलने के लिए अभिनव तकनीक को अपनाया गया है। सौर ऊर्जा संयंत्र को बीना ट्रैक्शन सब स्टेशन (टीएसएस) के पास स्थापित किया गया है। यह सालाना लगभग 25 लाख यूनिट ऊर्जा का उत्पादन कर सकता है और रेलवे के लिए हर साल लगभग 1.37 करोड़ रुपये की बचत करेगा।
  • इसके अतिरिक्त, भारतीय रेलवे की विद्युत कर्षण ऊर्जा आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए भूमि आधारित सौर संयंत्रों की योजना के लिए दो पायलट परियोजनाएं कार्यान्वित की जा रही हैं। उनमें से एक भिलाई (छत्तीसगढ़) की खाली पड़ी अनुपयोगी भूमि पर 50 मेगावाट का सौर ऊर्जा संयंत्र है, जो केंद्रीय पारेषण उपयोगिता (सीटीयू) से जुड़ा होगा और 31 मार्च, 2021 से पहले चालू करने का लक्ष्य है। दीवाना में 2 मेगावाट का सौर ऊर्जा संयंत्र हरियाणा) जो राज्य ट्रांसमिशन उपयोगिता (एसटीयू) से जुड़ा होगाके 31 अगस्त, 2020 से पहले चालू होने की उम्मीद है।
  • रेलवे ऊर्जा प्रबंधन कंपनी लिमिटेड (आईएमसीएल) मेगा पैमाने पर सौर ऊर्जा के उपयोग को आगे बढ़ाने के लिए अथक प्रयास कर रही है। यह पहले से ही भारतीय रेलवे के लिए 2 गीगावॉट की सौर परियोजनाओं के लिए अप्रयुक्त रेलवे भूमि पर स्थापित करने के लिए निविदाएं जारी कर चुका है। भारतीय रेलवे भी परिचालन रेलवे लाइनों के साथ सौर परियोजनाओं की स्थापना की एक अभिनव अवधारणा को अपना रहा है। यह ट्रैक्शन नेटवर्क में सौर ऊर्जा के सीधे इंजेक्शन के कारण अतिक्रमण को रोकने, गाड़ियों की गति और सुरक्षा को बढ़ाने और बुनियादी ढांचे की लागत को कम करने में मदद करेगा। रेलवे पटरियों पर 1गीगावाट केसौर संयंत्रों की स्थापना के लिए एक और निविदा भी आरईएमसीएल द्वारा जल्द ही जारी करने की योजना है।
  • इन मेगा पहलों के साथ, भारतीय रेलवे जलवायु परिवर्तन की चुनौती के खिलाफ भारत की लड़ाई का नेतृत्व कर रहा है और एक शून्य कार्बन उत्सर्जन परिवहन प्रणाली बनने के अपने महत्वाकांक्षी लक्ष्य को पूरा करने और भारत के राष्ट्रीय स्तर पर निर्धारित योगदान (आईएनडीसी) लक्ष्यों को पूरा करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठा रहा है।

:: विविध ::

देश के 66वें शतरंज ग्रैंडमास्टर: जी आकाश

  • तमिलनाडु के जी आकाश देश के 66वें शतरंज ग्रैंडमास्टर जबकि उनके राज्य के एम प्रणेश और गोवा के अमेया ऑडी अंतरराष्ट्रीय मास्टर्स बन गये हैं। आकाश के ग्रैंडमास्टर खिताब की अंतरराष्ट्रीय शतरंज महासंघ (फिडे) परिषद की हाल में हुई बैठक में पुष्टि की गयी। चेन्नई के इस खिलाड़ी की फिडे रेटिंग 2495 है।

:: प्रिलिम्स बूस्टर ::

  • हाल ही में चीन में ब्लैक डेथ (Black Death) के नाम से मशहूर किस बीमारी के मामले दर्ज किए गए हैं एवं यह बीमारी के वाहक कौन होते हैं? (ब्यूबोनिक प्लेग-bubonic plague, पिस्सू )
  • हाल ही में किस देश ने प्रवासियों से संबंधित एक्‍सपैट कोटा बिल को मंजूरी दी है जिसमें भारतीयों की जनसंख्या कुल जनसंख्या का 15 प्रतिशत तक सीमित करने का फैसला किया गया है? (कुवैत)
  • भारतीय सेना द्वारा सैन्य उपकरणों की खरीद की संदर्भ में चर्चा में रहे 'प्रीडेटर-बी' और 'सी गार्डियन' क्या है एवं इसे किस देश द्वारा निर्मित किया गया है? (सशस्त्र हमला करने में सक्षम ड्रोन, अमेरिका)
  • हाल ही में 12 लाख करोड़ का मार्केट कैप प्राप्त करने की उपलब्धि किस भारतीय कंपनी ने हासिल की है? (रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड)
  • हाल ही में भारत के किस राज्य के कैबिनेट द्वारा निजी क्षेत्र की नौकरियों में राज्य के 75% युवाओं को आरक्षण देने के लिए अध्यादेश के प्रारूप को मंजूरी प्रदान की गई है? (हरियाणा)
  • सीबीएससी किस दिग्गज प्रौद्योगिकी कंपनी के साथ मिलकर 'डिजिटल सुरक्षा और ऑनलाइन स्वास्थ्य' तथा 'ऑगमेंटिड रियलिटी' पर पाठ्यक्रम की शुरुआत करेगी? (फेसबुक)
  • भारतीय रेलवे ने किस समय सीमा तक खुद को ज़ीरो'कार्बन उत्सर्जन वाले जन परिवहन नेटवर्क के रूप में बदलने के लक्ष्य रखा है? (2030)
  • हाल ही में सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय ने सड़कों की गुणवत्ता के सुधार हेतु किन प्रमुख मानदंडों पर सड़कों को रैंकिंग प्रदान करने की घोषणा की गई है? (राजमार्ग की दक्षता 45%, राजमार्ग पर सुरक्षा 35% और उपयोगकर्ता को मिलने वाली सेवाएं 20%)
  • भारत में 118 सालों के बाद दुर्लभ प्रजाति के आर्किड फूल 'ग्राउंड ऑर्किड' मिलने से चर्चा में रहे 'दुधवा टाइगर रिजर्व' किस राज्य में अवस्थित है? (उत्तर प्रदेश)
  • हाल ही में किस खिलाड़ी ने भारत के 66वें शतरंज ग्रैंडमास्टर की उपलब्धि अपने नाम की? (जी आकाश, तमिलनाडु)
  • हाल ही में चर्चा में रहे उष्णकटिबंधीय तूफान 'एडवर्ड' किस सागर/ महासागर से संबंधित है? (अटलांटिक महासागर)
  • हाल ही में सफलतापूर्वक प्रक्षेपण से चर्चा में रहे ओफेक-16 किस देश का जासूसी उपग्रह है? (इजरायल)

स्रोत साभार: Dainik Jagran (Rashtriya Sanskaran), Dainik Bhaskar (Rashtriya Sanskaran), Rashtriya Sahara (Rashtriya Sanskaran) Hindustan Dainik (Delhi), Nai Duniya, Hindustan Times, The Hindu, BBC Portal, The Economic Times (Hindi & English), PTI, PIB