(दैनिक समसामयिकी और प्रिलिम्स बूस्टर) यूपीएससी और सभी राज्य लोक सेवा आयोग परीक्षाओं के लिए हिंदी में समाचार पत्रों का संकलन (07 जनवरी 2020)

दैनिक समसामयिकी और प्रिलिम्स बूस्टर


(दैनिक समसामयिकी और प्रिलिम्स बूस्टर) यूपीएससी और सभी राज्य लोक सेवा आयोग परीक्षाओं के लिए हिंदी में समाचार पत्रों का संकलन (07 जनवरी 2020)


:: राष्ट्रीय समाचार ::

एयर कंडीशनरों के लिए नए ऊर्जा कार्य प्रदर्शन मानक

  • केन्‍द्र सरकार ने ऊर्जा दक्षता ब्‍यूरो (बीईई) के साथ परामर्श करके रूम एयर कंडीशनरों (आरएसी) के लिए 30 अक्‍टूबर, 2019 को नये ऊर्जा कार्य प्रदर्शन मानक अधिसूचित किए हैं।
  • नए मानकों के अनुसार भारतीय सीजनल ऊर्जा दक्षता अनुपात (आईएसईईआर) स्‍प‍लिट एयर कंडीशनरों के लिए (3.30 से 5.00) और विंडो एयर कंडीशनर के लिए (2.70 से 3.50) तक होगा। इसके अलावा, इस अधिसूचना के द्वारा बीईई स्टार-लेबलिंग कार्यक्रम के दायरे में आने वाले सभी रूम एयर कंडीशनरों के लिए 24 डिग्री सेल्सियस डिफ़ॉल्ट सेटिंग को अनिवार्य कर दिया गया है। ये कार्य प्रदर्शन मानक 1 जनवरी, 2021 से लागू होंगे।
  • अधिसूचना के अनुसार स्‍टार लेबल वाले सभी ब्रांड और सभी प्रकार के रूम एयर कंडीशनरों अर्थात मल्टी-स्टेज कैपेसिटी एयर कंडीशनर, यूनिट्री एयर कंडीशनर और स्‍पलिट एयर कंडीशनरों को 10,465 वॉट (9,000 किलो कैलोरी/घंटा) की कूलिंग क्षमता तक की आपेक्षिक ऊर्जा, दक्षताओं के आधार पर एक से पांच स्टार तक रेटिंग दी गई है और जिनका भारत में निर्माण किया गया है या व्यावसायिक रूप से खरीदा या बेचा गया है, वे सभी 1 जनवरी 2020 से चौबीस डिग्री सेल्सियस पर कमरे के एयर कंडीशनर में तापमान की डिफ़ॉल्ट सेटिंग सुनिश्चित करेंगे।

पृष्टभूमि

  • बीईई ने 2006 में स्थिर गति रूम एयर कंडीशनरों (आरएसी) के लिए स्टार लेबलिंग कार्यक्रम शुरू किया था। यह कार्यक्रम 12 जनवरी, 2009 को अनिवार्य बना दिया गया। इसके बाद, 2015 में इन्वर्टर रूम एयर कंडीशनर के लिए स्वैच्छिक स्टार लेबलिंग कार्यक्रम शुरू किया गया। इसे 1 जनवरी 2018 से अनिवार्य बनाया गया था। रूम एयर कंडीशनरों के लिए बीईई स्टार लेबलिंग कार्यक्रम में अब 10,465 वॉट (2.97 टीआर) तक की कूलिंग क्षमता वाले फिक्स्ड और इन्वर्टर आरएसी दोनों ही शामिल हैं। प्रदर्शन के स्तर में लगातार वृद्धि से स्पलिट इकाइयों के लिए न्यूनतम ऊर्जा प्रदर्शन मानको (एमईपीएस) में लगभग 43 प्रतिशत ऊर्जा दक्षता सुधार हुआ है। ये इकाइयां बाजार में बेची जाने वाली सबसे लोकप्रिय आरएसी हैं। भारतीय सीजनल ऊर्जा दक्षता अनुपात (आईएसईईआर) रूम एयर कंडीशनरों (आरएसी) के लिए उपयोग किया जाने वाला ऊर्जा कार्य प्रदर्शन सूचकांक है और इसका आकलन आईएसओ 16358 में परिभाषित ‘बिन’ घंटों पर आधारित है।
  • रूम एयर कंडीशनरों (आरएसी) के लिए स्टॉर लेबलिंग कार्यक्रम ने अकेले वित्तीय वर्ष 2017-18 में अनुमानित 4.6 बिलियन यूनिट ऊर्जा बचत की है और इसके अलावा 38 मिलियन टन कार्बन उत्सर्जन में कमी लाने वाली 46 बिलियन इकाइयों की संचयी ऊर्जा बचत को भी बढ़ावा मिला है।

ऊर्जा दक्षता ब्‍यूरो (बीईई)

  • बीईई, विद्युत मंत्रालय, भारत सरकार के तहत एक वैधानिक निकाय है। यह भारतीय अर्थव्यवस्था की ऊर्जा तीव्रता को कम करने के प्राथमिक उद्देश्य के साथ नीतियों और रणनीतियों को विकसित करता है। बीईई ऊर्जा संरक्षण अधिनियम 2001 के तहत सौंपे गए कार्यों को पूरा करने के लिए मौजूदा संसाधनों और बुनियादी ढांचे की पहचान करने और उपयोग करने के लिए नामित उपभोक्ताओं, नामित एजेंसियों और अन्य संगठन के साथ तालमेल करता है।

उजाला और स्‍ट्रीट लाइटिंग राष्‍ट्रीय कार्यक्रम

  • प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी द्वारा 5 जनवरी, 2015 को शुभारंभ किए गए उजाला (सभी के लिए किफायती एलईडी द्वारा उन्‍नत ज्‍योति) और एसएलएनपी (एलईडी स्‍ट्रीट लाइटिंग राष्‍ट्रीय कार्यक्रम) योजनाओं के पांच सफल वर्ष पूरे हुए।

पृष्टभूमि

  • एसएलएनपी दुनिया का सबसे बड़ा स्‍ट्रीट लाइट प्रतिस्‍थापन कार्यक्रम है। उजाला विश्‍व की सबसे बड़ी घरेलू लाइटिंग परियोजना है। ऊर्जा दक्षता सेवा लिमिटेड (ईईएसएल) ने इन दोनों योजनाओं को लागू किया है। ईईएसएल ऊर्जा मंत्रालय के तहत सार्वजनिक उद्यमों का एक संयुक्‍त उद्यम है।
  • एसएलएनपी कार्यक्रम के अंतर्गत अब तक 1.03 करोड़ स्‍ट्रीट लाइट लगाई गई हैं जिससे 6.97 बिलियन किलोवॉट प्रतिवर्ष ऊर्जा की बचत हुई है। इससे पीक डिमांड में 1161 मेगावॉट की कमी आई है और ग्रीन हाऊस गैस उत्‍सर्जन में प्रतिवर्ष 4.8 मिलियन टन कार्बनडाइऑक्‍साइड की कमी आई है। पूरे देश में एलईडी स्‍ट्रीट लाइटें लगाई गई हैं और इससे लगभग रोजगार के 13 हजार अवसरों का सृजन हुआ है तथा सरकार के मेक इन इंडिया कार्यक्रम को भी बढ़ावा मिला है।
  • उजाला योजना के तहत पूरे देश में 36.13 करोड़ एलईडी बल्‍ब वितरित किए गए हैं इससे प्रतिवर्ष 46.92 बिलियन किलोवॉट ऊर्जा की बचत हुई है। इससे पीक‍ डिमांड में 9394 मेगावॉट की कमी आई है और ग्रीन हाऊस गैस उत्‍सर्जन में प्रतिवर्ष 38 मिलियन टन कार्बनडाइऑक्‍साइड की कमी आई है।

पहले खेलो इंडिया विश्वविद्यालय खेल

  • पहले खेलो इंडिया विश्वविद्यालय खेल 22 फरवरी से एक मार्च के बीच आयोजित किए जाएंगे। इन खेलों का आयोजन कलिंग इंस्टीट्यूट ऑफ इंडस्ट्रियल टेक्नोलोजी यूनिवर्सिटी में किया जाएगा जिसमें देश भर के 100 विश्वविद्यालयों के 4000 से अधिक खिलाड़ी भाग लेंगे। कुल 17 खेलों को विश्वविद्यालय खेलों में शामिल किया है। इनमें तीरंदाजी, एथलेटिक्स, मुक्केबाजी, तलवारबाजी, जूडो, तैराकी, भारोत्तोलन, कुश्ती, बैडमिंटन, बास्केटबॉल, फुटबॉल, हॉकी, टेबल टेनिस, टेनिस, वॉलीबॉल, रग्बी और कबड्डी शामिल हैं।

:: अंतर्राष्ट्रीय समाचार ::

दक्षिण एशिया विश्वविद्यालय

  • आर्थिक तंगी से जूझ रहे पड़ोसी पाकिस्तान ने दक्षिण एशिया विश्वविद्यालय (एसएयू) परिसर के निर्माण के लिए तय अपना अंशदान अब तक नहीं दिया है। दिल्ली में बन रहे विवि परिसर के लिए उसे 5.10 लाख अमेरिकी डॉलर (करीब 36.59 करोड़ रुपये) का अंशदान देना है। विदेश मंत्रालय ने इस आशय की लिखित जानकारी संसदीय समिति को दी है।
  • संसदीय समिति की रिपोर्ट में बताया गया है कि वर्ष 2010-14 के दौरान अफगानिस्तान, बांग्लादेश, भूटान, भारत, मालदीव, नेपाल व श्रीलंका ने दक्षिण एशिया विश्वविद्यालय निर्माण के पहले चरण के परिचालन बजट के लिए अपना अंशदान दे दिया है। हालांकि, पाकिस्तान ने 5,10,436 डॉलर का अपना अंशदान नहीं दिया है। दक्षिण एशिया क्षेत्रीय सहयोग संगठन (सार्क) के सदस्य देशों ने अंशदान के रूप में विवि के परिचालन खर्च को उठाने पर सहमति जताई थी।

पृष्टभूमि

  • रिपोर्ट के अनुसार, भारत सरकार ने वर्ष 2009 में विवि परिसर स्थापित करने के लिए नई दिल्ली स्थित मैदानगढ़ी में 100 एकड़ जमीन अधिसूचित की। सितंबर 2011 में कुल 93.68 एकड़ जमीन सौंप दी गई। जमीन का मालिकाना हक विदेश मंत्रालय के पास है। मंत्रालय के अनुसार, विवि परिसर का निर्माण कार्य चार चरण में मई 2015 में शुरू किया गया।

ईरान- अमेरिका तनाव: एक समग्र अवलोकन

  • ईरानी कुद्स फोर्स के चीफ मेजर जनरल कासिम सुलेमानी की मौत के बाद मिडिल ईस्‍ट के सभी देश डर के साए में जी रहे हैं। इराक ने भी इस कासिम पर हुए हमले को कड़ाई से लिया है और इसको राजनीतिक हत्‍या करार दिया है। इतना ही नहीं इराक की पार्लियामेंट में पीएम ने देश में मौजूद विदेशी सेनाओं को वापस चले जाने की भी अपील की है। उनका कहना है कि देश और क्षेत्र की शांति के लिए यही सबसे बेहतर विकल्‍प है। कासिम की मौत के बाद विभिन्‍न अमेरिकी ठिकानों पर हमले किए गए हैं।

क्‍या कहते हैं जानकार

  • मध्‍य पूर्व के लगातार खराब होते हालातों पर विदेश मामलों के जानकार कमर आगा ये तो मानते हैं कि हालात काफी हद तक खराब हो रहे हैं, लेकिन उनका ये भी कहना है कि खाड़ी युद्ध या वर्ल्‍ड वार के हालात नहीं बनने वाले हैं। उनका मानना है कि अमेरिका के पास ऐसा करने के लिए न तो उतना पैसा है और न ही इतना समय। इसके अलावा यदि अमेरिका ऐसा कदम उठाता भी है तो भी उससे अमेरिका का मकसद पूरा नहीं हो सकेगा। उनके मुताबिक यदि हम ईरानी सरकार सरकार को हटाकर दूसरी सरकार के बारे में सोच भी लें तब भी यह तय है कि वह अमेरिकी हितों की रक्षा करने वाली नहीं होगी।

अमेरिका मकसद में नहीं होगा पूरा

  • खाड़ी युद्ध की ही बात करें तो वहां पर अमेरिका का मकसद वहां की सत्‍ता से सद्दाम हुसैन को बेदखल करना था। लेकिन इसमें सफलता मिलने के बाद भी इराक में अमेरिका के मकसद को पूरा करने वाली सरकार नहीं बनी। ठीक वही हाल अफगानिस्‍तान में भी हुआ। वहां पर वर्षों से अमेरिका की मौजूदगी और तालिबान से लंबी लड़ाई के बाद अब अमेरिका उन्‍हीं से शांति वार्ता में जुटा है। वहीं तालिबान की बात करें तो उन्‍होंने अफगानिस्‍तान में किसी भी तरह से सीजफायर करने से साफ इनकार कर दिया है। ये इस बात का सुबूत है कि अमेरिका का मकसद पूरा नहीं होता है। इतना जरूर है कि वह अपनी कार्रवाई के जरिए मध्‍य पूर्व को अस्थिर करने की कोशिश जरूर कर सकता है।

तीन बड़ी वजह

  • मध्‍य पूर्व में अमेरिका के हस्‍तक्षेप के पीछे आगा कुछ बड़ी वजहों को मानते हैं। इनमें पहली वजह अमेरिका इस पूरे क्षेत्र में अपना वर्चस्‍व बढ़ाना चाहता है। दूसरी वजह मध्‍य पूर्व के तेल कारोबार में अमेरिकी कंपनियों का बड़ा शेयर। लेकिन वर्तमान में जो हालात अमेरिका की बदौलत मध्‍य पूर्व में बनें हैं उसमें प्रो अमेरिकन गवर्नमेंट का आना संभव दिखाई नहीं देता है। वहीं दूसरी तरह अब लोगों की सोच अमेरिका को लेकर काफी कुछ बदल गई है। इतना ही नहीं सऊदी अरब, कतर और बहरीन जहां पर प्रो अमेरिकन गवर्नमेंट है वहां पर भी लोगों की सोच अमेरिका के खिलाफ हो रही है। तीसरी वजह ईरान की वो कोशिश है जिसमें वह इस क्षेत्र में अपने साथ रूस और चीन को लाने की कोशिश कर रहा है। इन दोनों का ही अमेरिका से छत्‍तीस का आंकड़ा है।

नहीं बनने देगा जंग का मुहाना

  • वर्तमान हालातों में कोई भी देश मध्‍य पूर्व को जंग का मुहाना नहीं बनने देना चाहता है। यूरोपीय संघ की यदि बात करें तो उसके अपने हित भी जंग के न होने से ही जुड़ हैं। वहीं जब ईरान और अमेरिका के बीच परमाणु डील हुई थी तब भी यूरोपीय देशों ने बड़ी अहम जिम्‍मेदारी उसमें निभाई थी। इस डील के बाद ईरान और ईयू के देशों के बीच संबंध काफी बेहतर हुए थे। इतना ही नहीं जब ये डील अमेरिका ने खत्‍म की थी तब भी इन देशों ने ईरान का ही साथ दिया था। वहीं ईयू की अर्थव्‍यवस्‍था काफी कमजोर है, इस लिहाज से ईयू इस क्षेत्र में तनाव नहीं चाहता है। यदि तनाव बढ़ता है तो तेल की कीमतों में इजाफा होगा और इससे कोई एक देश नहीं बल्कि पूरी दुनिया प्रभावित होगी। आपको बता दें कि ईयू के कई देशों ने ईरान पर लगाए गए प्रतिबंधों का भी विरोध किया था।

अमेरिका में दो धड़े

  • ईरान और परमाणु डील को लेकर अमेरिका में भी दो धड़े बने हुए हैं। इनमें से एक का मानना था कि परमाणु डील को आगे चलना चाहिए था। ये सोच रखने वाले गुट का मानना था कि ईरान इतना कमजोर नहीं है जितना अमेरिका सोचता है। किसी बड़ी कार्रवाई के जवाब में ईरान अमेरिकी हितों को निशाना बना सकता है। यह अमेरिका के लिए घातक होगा। हालांकि इसमें कोई शक नहीं है कि ईरान को ही इस कार्रवाई की ज्‍यादा कीमत चुकानी पड़ेगी।

सीधे युद्ध में शामिल नहीं होगा कोई अन्‍य देश

  • मध्‍य पूर्व के हालातों और बड़े युद्ध के खतरे पर पूछे गए एक सवाल के जवाब में आगा ने कहा कि ईरान को सपोर्ट करने वाले रूस, सीरिया या दूसरी बड़ी ताकत कभी नहीं चाहेंगी कि यहां पर युद्ध हो और न ही वो इसमें सीधेतौर पर भागीदार बनेंगे। कोई भी देश ईरान के साथ आकर अमेरिका से जंग नहीं करना चाहेगा। ऐसे में हालात को काबू करने के लिए दुनिया के सभी बड़े देशों को संयुक्‍त राष्‍ट्र समेत डिप्‍लोमेसी का सहारा लेना होगा। अमेरिका पर भी पीछे हटने के लिए दबाव बनाना होगा। जंग होने की सूरत में अमेरिका भी जानता है कि उसको कुछ हाथ नहीं लगने वाला है। इराक युद्ध में वह इस बात को बखूबी देख चुका है। वर्तमान की यदि बात करें तो दुनिया के कई देशों की सहानुभूति ईरान की तरफ है।

आईएस के सफाए में बड़ी भूमिका

  • आगा का कहना है कि ईरानी कमांडर कासिम सुलेमानी कोई आतंकी नहीं था। उसका इराक से आईएस के सफाए में बड़ा योगदान रहा है। उस वक्‍त अमेरिकी एयर फोर्स ने इसको कवर दिया था। वहीं कासिम का जिन इलाकों में प्रभुत्‍व था वो सुन्‍नी इलाके हैं। ये इस बात का सुबूत है कि इराक में भी कासिम को सपोर्ट हासिल था। इसके अलावा लिबिया, लेबनान, यमन में भी कासिम को समर्थन हासिल था।

भारत की भूमिका

  • दूसरी तरफ अमेरिका में इस वर्ष राष्‍ट्रपति चुनाव होने हैं, लिहाजा ऐसा नहीं लगता है ट्रंप युद्ध का जोखिम उठाएंगे। वहीं ईरान भी ऐसा नहीं चाहेगा। लेकिन माहौल में नरमी लाने के लिए उन देशों को बड़ी भूमिका निभानी होगी जिनके ईरान और अमेरिका दोनों से ही बेहतर संबंध हैं। इनमें भारत भी शामिल है। मध्‍य एशिया के कुछ देशों से भारतीय पीएम को वहां का सर्वोच्‍च सम्‍मान भी दिया जा चुका है। ऐसे में भारत को यूरोपीय देशों के साथ मिलकर हालात को काबू करने की कोशिश करनी चाहिए।

तिब्बत में चीनी सेना का सैन्य अभ्यास

  • चीन की सेना पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (पीएलए) ने नए साल में भारत की सीमा से सटे तिब्बत में बड़ा सैन्य अभ्यास शुरू किया है। इस अभ्यास के लिए चार हजार मीटर से ज्यादा की ऊंचाई वाले सीमावर्ती क्षेत्र में नई हथियार प्रणालियां तैनात की गई हैं। इनमें हल्के युद्धक टैंक टाइप-15 और 155-एमएम व्हीकल-माउंटेड होवित्जर तोप जैसे हथियार भी शामिल हैं।
  • भारत और चीन के बीच 3,488 किलोमीटर लंबी वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) है। चीन के सरकारी अखबार ग्लोबल टाइम्स के अनुसार, पीएलए की तिब्बत सैन्य कमान यह अभ्यास कर रही है। इसके लिए तिब्बत की राजधानी ल्हासा से लेकर समूचे सीमावर्ती क्षेत्र में हेलीकॉप्टर, सशस्त्र वाहन, भारी तोपखाने और एंटी-एयरक्राफ्ट मिसाइलें तैनात की गई हैं। चीन ने पिछले वर्ष एक अक्टूबर को राष्ट्रीय सैन्य परेड में टाइप-15 टैंक और होवित्जर तोप को पहली बार प्रदर्शित किया था।
  • अखबार के अनुसार, ऊंचाई वाले स्थानों के लिहाज से तैयार किए गए ये हथियार सीमा क्षेत्रों की सुरक्षा में अहम भूमिका निभा सकते हैं। अखबार में सैन्य मामलों के एक विशेषज्ञ के हवाले से बताया गया है कि उन्नत टैंकों में शक्तिशाली इंजन लगाए गए हैं। इससे उन्हें तिब्बत जैसे ऊंचाई वाले स्थानों पर आसानी से ले जाया जा सकता है। भारी हथियारों की ऑक्सीजन की कमी वाले सीमा क्षेत्रों में तैनाती नहीं जा सकती। टाइप-15 दुनिया में इकलौता आधुनिक हल्का टैंक है, जो 105 मिलीमीटर गन और उन्नत सेंसर से लैस है।

:: भारतीय राजव्यवस्था ::

नौ सदस्यीय संविधान पीठ करेगी सबरीमाला मामले की सुनवाई

  • केरल के सबरीमाला मंदिर में सभी उम्र की महिलाओं व लड़कियों के प्रवेश तथा मुस्लिम व पारसी महिलाओं के साथ कथित भेदभाव जैसे अन्य मुद्दों पर सुप्रीम कोर्ट की नौ सदस्यीय संविधान पीठ 13 जनवरी से सुनवाई शुरू करेगी। हालांकि, पीठ सदस्यों के नामों की घोषणा अभी नहीं की गई है।
  • केरल के सबरीमाला मंदिर में 10 से 50 वर्ष की महिलाओं के प्रवेश पर पाबंदी के मामले में सुप्रीम कोर्ट की 9 न्यायाधीशों की संविधान पीठ करेगी विचार। 13 जनवरी से होगी सुनवाई। यह पीठ साथ ही मुस्लिम और पारसी महिलाओं से धर्म के आधार पर भेदभाव के नियमो पर भी विचार करेगी।

पृष्टभूमि

  • बता दें कि पिछले साल 28 सितंबर को ही केरल के सबरीमाला मंदिर पर सुप्रीम कोर्ट ने सीजेआई दीपक मिश्रा की अगुआई में फैसला सुनाते हुए सभी महिलाओं को मंदिर में प्रवेश की इजाजत दी थी। कोर्ट ने 10 से 50 वर्ष की महिलाओं के प्रवेश पर पाबंदी को लिंग आधारित भेदभाव बताते हुए निरस्त कर दिया था। इसके बाद पूरे राज्य भर में व्यापक विरोध प्रदर्शन हुए थे। जगह-जगह हिंसा भड़की थी।
  • कोर्ट के इस फैसले पर करीब 54 पुनर्विचार याचिकाएं दाखिल की गईं थी, जिस पर सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रख लिया। याचिका दायर करने वालों में नैशनल अयप्पा डिवोटीज (विमिन) एसोसिएशन, नायर सर्विस सोसायटी और ऑल केरल ब्राह्मण एसोसिएशन की याचिकाएं शामिल हैं।

सबरीमाला मंदिर

  • केरल के पठनामथिट्टा जिले की पहाड़ियों के बीच वृद्धि के भगवान अयप्पा का मंदिर है, जिसे आप सबरीमाला मंदिर के नाम से जानते हैं। इसी जिले में पेरियार टाइगर रिजर्व भी है, जिसकी 56.40 हेक्टेयर जमीन सबरीमाला को मिली हुई है। इस मंदिर तक पहुंचने के लिए 18 पावन सीढ़ियों को पार करना पड़ता है, जिनके अलग-अलग अर्थ भी बताए गए हैं। इस मंदिर में हर साल नवंबर से जनवरी तक, श्रद्धालु अयप्पा भगवान के दर्शन के लिए आते हैं क्योंकि बाकी पूरे साल यह मंदिर आम भक्तों के लिए बंद रहता है। मकर संक्रांति के अलावा यहां 17 नवंबर को मंडलम मकर विलक्कू उत्सव मनाया जाता है। मलयालम महीनों के पहले पांच दिन भी मंदिर के कपाट खोले जाते हैं।

सबरीमाला मंदिर का विवाद एक नजर में

  • सबरीमाला मंदिर करीब 800 साल से अस्तित्व में है और इसमें महिलाओं के प्रवेश पर विवाद भी दशकों पुराना है। वजह यह है कि भगवान अयप्पा नित्य ब्रह्मचारी माने जाते हैं, जिसकी वजह से उनके मंदिर में ऐसी महिलाओं का आना मना है, जो मां बन सकती हैं। ऐसी महिलाओं की उम्र 10 से 50 साल निर्धारित की है। माना गया कि इस उम्र की महिलाएं पीरियड्स होने की वजह से शुद्ध नहीं रह सकतीं और भगवान के पास बिना शुद्ध हुए नहीं आया जा सकता।
  • इस साल एस. महेंद्रन नाम के एक शख्स ने कोर्ट में जनहित याचिका दाखिल की। यह याचिका मंदिर में महिलाओं के प्रवेश को लेकर थी। साल 1991 में कोर्ट ने याचिका पर फैसला सुनाया कि महिलाओं को सबरीमाला मंदिर नहीं जाने दिया जाएगा।
  • 2006 में मंदिर के मुख्य पुजारी परप्पनगडी उन्नीकृष्णन ने कहा था कि मंदिर में स्थापित अयप्पा अपनी ताकत खो रहे हैं। वह इसलिए नाराज हैं, क्योंकि मंदिर में किसी युवा महिला ने प्रवेश किया है। इसके बाद ही कन्नड़ ऐक्टर प्रभाकर की पत्नी जयमाला ने दावा किया था कि उन्होंने अयप्पा की मूर्ति को छुआ और उनकी वजह से अयप्पा नाराज हुए। उन्होंने कहा था कि वह प्रायश्चित करना चाहती हैं। अभिनेत्री जयमाला ने दावा किया था कि 1987 में अपने पति के साथ जब वह मंदिर में दर्शन करने गई थीं तो भीड़ की वजह से धक्का लगने के चलते वह गर्भगृह पहुंच गईं और भगवान अयप्पा के चरणों में गिर गईं। जयमाला का कहना था कि वहां पुजारी ने उन्हें फूल भी दिए थे।
  • जयमाला के दावे पर केरल में हंगामा होने के बाद मंदिर में महिलाओं का प्रवेश वर्जित होने के इस मुद्दे पर लोगों का ध्यान गया। 2006 में राज्य के यंग लॉयर्स असोसिएशन ने सुप्रीम कोर्ट में इसके खिलाफ याचिका दायर की। इसके बावजूद अगले 10 साल तक महिलाओं के सबरीमाला मंदिर में प्रवेश का मामला लटका रहा।
  • याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने मंदिर के ट्रस्ट त्रावणकोर देवासम बोर्ड से महिलाओं को मंदिर में प्रवेश की अनुमति न देने पर जवाब मांगा था। बोर्ड ने कहा था कि भगवान अयप्पा ब्रह्मचारी थे और इस वजह से मंदिर में वही बच्चियां व महिलाएं प्रवेश कर सकती हैं, जिनका मासिक धर्म शुरू न हुआ हो या फिर खत्म हो चुका हो। 7 नवंबर 2017 को सुप्रीम कोर्ट ने अपना रुख जाहिर किया था कि वह सबरीमाला मंदिर में हर उम्र की महिलाओं को प्रवेश देने के पक्ष में है।
  • 11 जुलाई 2016 को सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि महिलाओं के मंदिर में प्रवेश पर रोक का यह मामला संवैधानिक पीठ को भेजा जा सकता है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि ऐसा इसलिए क्योंकि यह संविधान द्वारा प्रदत्त मौलिक अधिकारों के उल्लंघन का मामला है और इन अधिकारों के मुताबिक महिलाओं को प्रवेश से रोका नहीं जाना चाहिए। 2017 में सुप्रीम कोर्ट ने मामला संविधान पीठ को सौंप दिया था और जुलाई, 2018 में पांच जजों की बेंच ने मामले की सुनवाई शुरू की थी।
  • 28 सितंबर, 2018 को सुप्रीम कोर्ट ने ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए केरल के सबरीमाला मंदिर में महिलाओं को प्रवेश की अनुमति दे दी। कोर्ट ने साफ कहा कि हर उम्र वर्ग की महिलाएं अब मंदिर में प्रवेश कर सकेंगी। सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि हमारी संस्कृति में महिला का स्थान आदरणीय है। यहां महिलाओं को देवी की तरह पूजा जाता है और मंदिर में प्रवेश से रोका जा रहा है। यह स्वीकार्य नहीं है।

'मदरसा सेवा कानून 2008'

  • सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को पश्चिम बंगाल मदरसा सेवा आयोग कानून, 2008 की संवैधानिक वैधता को बरकरार रखा। इसके साथ ही राज्य के मदरसों में शिक्षकों की नियुक्ति का रास्ता साफ कर दिया। इस अधिनियम के तहत गठित आयोग द्वारा की गई शिक्षकों की नियुक्ति को भी शीर्ष अदालत ने बरकरार रखा है। न्यायमूर्ति अरूण मिश्रा और न्यायमूर्ति यूयू ललित की पीठ ने कलकत्ता उच्च न्यायालय के उस आदेश को रद कर दिया, जिसमें इस कानून को असंवैधानिक करार दिया गया था। पीठ ने कहा कि मदरसा प्रबंध समिति की ओर से अब तक की गई नियुक्तियां व्यापक हितों को देखते हुए वैध रहेंगी। शीर्ष अदालत ने पश्चिम बंगाल मदरसा सेवा आयोग कानून, 2008 की संवैधानिक वैधता भी बरकरार रखी है।

पृष्टभूमि

  • गौरतलब है कि इससे पहले साल 2014 में बोर्ड ने शिक्षकों की नियुक्ति के लिए परिणामों की घोषणा की थी, जिसमें 2,600 से अधिक शिक्षकों की नियुक्ति की जानी थी, लेकिन हाईकोर्ट के आदेश के बाद इस पर रोक लगा दी गई थी।

प्रोहिबिशन ऑफ इलेक्ट्रॉनिक सिगरेट एक्ट (पीईसीए)

  • केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने राज्यों से प्रोहिबिशन ऑफ इलेक्ट्रॉनिक सिगरेट एक्ट (पीईसीए) के तहत की गई कार्रवाई का ब्योरा मांगा है।

ई-सिगरेट

  • ई-सिगरेट एक तरह का इलेक्ट्रॉनिक इनहेलर होता है, जिसमें निकोटिन और अन्य रसायनयुक्त तरल भरा जाता है. ये इनहेलर बैट्री की ऊर्जा से इस लिक्विड को भाप में बदल देता है, जिससे पीने वाले को सिगरेट पीने जैसा अहसास होता है. ऐसे उपकरणों को ईएनडीएस कहा जाता है, जिनका प्रयोग किसी घोल को गर्म कर एरोसोल बनाने के लिए किया जाता है. जिसमें विभिन्न स्वाद भी होते हैं. लेकिन ई-सिगरेट में जिस लिक्विड का इस्तेमाल किया जाता है, वह कई बार निकोटिन होता है और कई बार उससे भी ज्यादा खतरनाक रसायन होते हैं. इसके अलावा कुछ ब्रांड्स ई-सिगरेट में फॉर्मलडिहाइड का इस्तेमाल करते हैं, जो बेहद खतरनाक और कैंसरकारी तत्व हैं.

पृष्टभूमि

  • प्रोहिबिशन ऑफ इलेक्ट्रॉनिक सिगरेट एक्ट (पीईसीए) के तहत की गई कार्रवाई का ब्योरा मांगा है। कानून की अधिसूचना पांच दिसंबर 2019 को जारी हुई थी। इसके तहत वैकल्पिक धूमपान उपकरण के उत्पादन, आयात, निर्यात, परिवहन, बिक्री या विज्ञापन संज्ञेय अपराध है। ऐसा करने पर सजा और जुर्माना का प्रावधान है।

:: भारतीय अर्थव्यवस्था ::

दिसंबर में PMI 5 महीने के टॉप पर: IHS मार्किट इंडिया सर्विसेज बिजनेस एक्टिविटी इंडेक्स

  • भारत के सर्विस सेक्टर की ग्रोथ में दिसंबर के दौरान रिकवरी दर्ज की गई. नए बिजनेस ऑर्डर मिलने से सर्विस सेक्टर की गतिविधियों में तेजी आई और यह पांच महीने के टॉप पर पहुंच गई. इससे न केवल उत्पादन में बढ़ोतरी हुई बल्कि रोजगार में भी तेजी आई है. IHS मार्किट इंडिया सर्विसेज बिजनेस एक्टिविटी इंडेक्स के मंथली सर्वे में यह जानकारी सामने आई है .
  • आईएचएस मार्किट सर्वे के अनुसार दिसंबर में सर्विस पीएमआई बढ़कर 53.3 पर पहुंच गई, जो नवंबर में 52.7 पर थी. पिछले साल जुलाई के बाद सर्विस पीएमआई में दूसरी सबसे बड़ी तेजी रही. सूचकांक का 50 अंक से ऊपर होना कारोबार के विस्तार को दर्शाता है और इसके आगे भी जारी रहने का अनुमान है.
  • इस बीच सर्विस और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर दोनों को मिला कर कुल परचेज मैनेजर उत्पाद सूचकांक (पीएमआई आउटपुट इंडेक्स) दिसंबर में बढ़ कर 53.7 रहा. नवंबर में यह सूचकांक 52.7 अंक था.

:: पर्यावरण और पारिस्थितिकी ::

साइक्‍लोन ‘Blake’

  • इस सप्‍ताह ऑस्‍ट्रेलिया के उत्‍तर पश्चि‍मी तट पर साइक्‍लोन का पूर्वानुमान जताया गया है। इस साइक्‍लोन के दौरान 125 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से हवा चलने की आशंका जताई गई है। यह विनाशाकारी हवा टाउन ऑफ ब्रूम के लिए खतरनाक साबित होगी। यह साइक्‍लोन कैटेगरी 1 के तहत रखा गया है।
  • मौसम वि‍भाग ने अपने पूर्वानुमान में बताया कि इस साइक्‍लोन के कारण भारी बारिश हो सकती है। पश्चिमी किंबरले (Kimberley) और पूर्वी पिलबारा (Pilbara) तटीय इलाकों के लिए बाढ़ का भी अलर्ट जारी किया गया है। इस बात की संभावना से इंकार किया गया है कि इस साइक्‍लोन को कोई प्रभाव यहां की आग पर पड़ेगा।

क्यों आता है चक्रवात?

  • गर्म क्षेत्रों के समुद्र में सूर्य की भयंकर गर्मी से हवा गर्म होकर अत्यंत कम वायुदाब का क्षेत्र बना देती है। हवा गर्म होकर तेजी से ऊपर आती है और ऊपर की नमी से संतृप्त होकर संघनन से बादलों का निर्माण करती हैं। रिक्त स्थान को भरने के लिए नम हवाएं तेजी के साथ नीचे जाकर ऊपर आती हैं। फलस्वरूप ये हवाएं बहुत ही तेजी के साथ उस क्षेत्र के चारों तरफ घूमकर घने बादलों और बिजली कड़कने के साथ-साथ मूसलधार बारिश करती हैं। कभी-कभी तो तेज घूमती इन हवाओं के क्षेत्र का व्यास हजारों किमी में होता हैं।

क्या है चक्रवात?

  • कम वायुमंडलीय दाब के चारों ओर गर्म हवाओं की तेज आंधी को चक्रवात कहते हैं। दक्षिणी गोलाद्र्ध में इन गर्म हवाओं को चक्रवात के नाम से जानते हैं और ये घड़ी की सुई के चलने की दिशा में चलते हैं। जबकि उत्तरी गोलाद्र्ध में इन गर्म हवाओं को हरीकेन या टाइफून कहा जाता है। ये घड़ी की सुई के विपरीत दिशा में घूमते है।

चक्रवात का नामकरण?

  • विश्व मौसम संगठन और युनाइटेड नेशंस इकोनामिक एंड सोशल कमीशन फार एशिया एंड पैसिफिक द्वारा जारी चरणबद्ध प्रक्रियाओं के तहत किसी चक्रवात का नामकरण किया जाता है। आठ उत्तरी भारतीय समुद्री देश (बांग्लादेश, भारत, मालदीव, म्यांमार, ओमान, पाकिस्तान, श्रीलंका, और थाईलैंड) एक साथ मिलकर आने वाले चक्रवातों के 64 (हर देश आठ नाम) नाम तय करते हैं। जैसे ही चक्रवात इन आठों देशों के किसी हिस्से में पहुंचता है, सूची से अगला दूसरा सुलभ नाम इस चक्रवात का रख दिया जाता है। इन आठ देशों की ओर से सुझाए गए नामों के पहले अक्षर के अनुसार उनका क्रम तय किया जाता है और उसी क्रम के अनुसार इन चक्रवाती तूफानों के नाम रखे जाते हैं। 2004 में नामकरण की यह प्रकिया शुरू की गई।

:: विविध ::

पहला अंतर्राष्‍ट्रीय योग दिवस मीडिया सम्‍मान

  • केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्री श्री प्रकाश जावड़ेकर 7 जनवरी, 2020 को नई दिल्‍ली में पहला ‘अंतर्राष्‍ट्रीय योग दिवस मीडिया सम्‍मान’ प्रदान करेंगे।
  • भारत और विदेश में योग के प्रचार-प्रसार में सकारात्‍मक भूमिका और जिम्‍मेदारी को मान्‍यता देने के लिए सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने जून 2019 में पहले अंतर्राष्‍ट्रीय योग दिवस मीडिया सम्‍मान की स्‍थापना की। सम्‍मान का उद्देश्‍य योग के संदेश के प्रसार में मीडिया के योगदान को रेखांकित करना है।

अंतर्राष्‍ट्रीय योग दिवस की पृष्टभूमि

  • अंतर्राष्‍ट्रीय योग दिवस 2015 से प्रतिवर्ष 21 जून को मनाया जाता है। प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी ने 27 सितंबर, 2014 को संयुक्‍त राष्‍ट्र महासभा (यूएनजीए) के अपने संबोधन में पहली बार अंतर्राष्‍ट्रीय योग दिवस का विचार रखा था।
  • इस प्रारंभिक प्रस्‍ताव के बाद संयुक्‍त राष्‍ट्र महासभा ने 14 अक्‍टूबर, 2014 को अंतर्राष्‍ट्रीय योग दिवस के मसौदे पर अनौपचारिक परामर्श किया। इन परामर्श सत्रों को भारत के प्रतिनिधिमंडल ने आयोजित किया था। भारत के स्‍थायी प्रतिनिधि ने 11 दिसंबर, 2014 को संयुक्‍त राष्‍ट्र महासभा में मसौदा प्रस्‍ताव रखा। मसौदे को 177 सदस्‍य राष्‍ट्रों का समर्थन प्राप्‍त हुआ और इसे बिना मतदान के स्‍वीकार कर लिया गया। विश्‍व के अधिकांश राजनेताओं ने इस पहल को समर्थन दिया। कुल 177 देशों ने प्रस्‍ताव को सह-प्रायोजित किया। संयुक्‍त राष्‍ट्र महासभा में मसौदे को सह-प्रायोजित करने वालों की यह सबसे बड़ी संख्‍या है।

गोल्डन ग्लोब अवॉर्ड

  • सिनेमा के क्षेत्र में दिए जाने वाले दुनिया के सबसे मशहूर अवॉर्ड्स में से एक गोल्डन ग्लोब अवॉर्ड की शुरुआत हो गई है। गोल्डन ग्लोब 2020 अवॉर्ड सेरेमनी अमेरिका स्थित लॉस एंजिलिस शहर के बेवर्ली हिल्टन होटल में हो रहा है और इसे ऑस्कर के बाद दूसरा सबसे प्रतिष्ठित अवॉर्ड माना जाता है। इस साल भी भारत की किसी भी फिल्म का अवॉर्ड्स में नॉमिनेशन नहीं हुआ है।
  • इस बार अवॉर्ड्स में फिल्म 'जोकर' का बोलबाला रहा और फिल्म के एक्टर योकिन फीनिक्स को बेस्ट एक्टर का अवॉर्ड मिला।

Golden Globes 2020 Winner List:

  • फिल्म 1917 को मिला बेस्ट मोशन पिक्चर ड्रामा अवॉर्ड।
  • Renee Zellweger को फिल्म judy के लिए मिला बेस्ट एक्ट्रेस का अवॉर्ड।
  • Joaquin Phoenix को फिल्म जोकर के लिए मिला बेस्ट एक्टर का अवॉर्ड।
  • Once Upon a Time... in Hollywood को मिला बेस्ट मोशन पिक्टर का अवॉर्ड।
  • Awkwafina को मिला बेस्ट एक्ट्रेस मोशन पिक्चर, म्यूजिकल ऑर कॉमेडी फॉर दे फेयरवेल।
  • ब्रैड पिट को मिला बेस्ट सपोर्टिंग एक्टर इन मोशन पिक्चर अवॉर्ड।
  • जोकर को मिला बेस्ट ऑरिजनल स्कोर अवॉर्ड।
  • Michelle Williams को मिला बेस्ट एक्ट्रेस इन लिमिटेड सीरीज का अवॉर्ड।

:: प्रिलिम्स बूस्टर ::

  • बीईई स्टार-लेबलिंग कार्यक्रम के तहत सभी रूम एयर कंडीशनरों के लिए कितने डिग्री की डिफॉल्ट सेटिंग अनिवार्य कर दिया गया है? (24 डिग्री)
  • हाल ही में भारत सरकार की किस घरेलू एलईडी लाइटिंग परियोजना के पांच सफल वर्ष पूरे किए गए हैं? (उजाला योजना)
  • प्रथम खेलो इंडिया विश्वविद्यालय खेल का आयोजन कहाँ किया जाएगा? (ओडिशा)
  • किस संस्था के द्वारा प्रथम खेलो इंडिया विश्वविद्यालय खेल का आयोजन किया जा रहा है? (कलिंग इंस्टीट्यूट ऑफ इंडस्ट्रियल टेक्नोलोजी यूनिवर्सिटी)
  • दक्षिण एशिया विश्वविद्यालय की स्थापना कहां की जा रही है? (नई दिल्ली)
  • कितने सदस्यों की संविधान पीठ सबरीमाला मामले की सुनवाई करेगी? (9 सदस्य)
  • साइक्लोन ब्लैक से किस देश के प्रभावित होने की आशंका जताई गई है? (ऑस्ट्रेलिया)
  • गोल्डन ग्लोब अवार्ड में किस फिल्म को सर्वश्रेष्ठ फिल्म का पुरस्कार प्रदान किया गया? (1917)
  • गोल्डन ग्लोब अवार्ड में किस अभिनेता को सर्वश्रेष्ठ अभिनेता का पुरस्कार प्रदान किया गया? (योकिन फीनिक्स)
  • गोल्डन ग्लोब अवार्ड में किस अभिनेत्री को सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री का पुरस्कार प्रदान किया गया? (रेनी ज़ेल्वेगर)

स्रोत साभार: Dainik Jagran (Rashtriya Sanskaran), Dainik Bhaskar (Rashtriya Sanskaran), Rashtriya Sahara (Rashtriya Sanskaran) Hindustan Dainik (Delhi), Nai Duniya, Hindustan Times, The Hindu, BBC Portal, The Economic Times (Hindi & English), PTI, PIB

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