(दैनिक समसामयिकी और प्रिलिम्स बूस्टर) यूपीएससी और सभी राज्य लोक सेवा आयोग परीक्षाओं के लिए हिंदी में समाचार पत्रों का संकलन (07 अप्रैल 2020)

दैनिक समसामयिकी और प्रिलिम्स बूस्टर


(दैनिक समसामयिकी और प्रिलिम्स बूस्टर) यूपीएससी और सभी राज्य लोक सेवा आयोग परीक्षाओं के लिए हिंदी में समाचार पत्रों का संकलन (07 अप्रैल 2020)


:: राष्ट्रीय समाचार ::

आरोग्य संजीवनी

  • भारत में स्वास्थ्य बीमा के बेहद कम विस्तार को देखते हुए इंश्योरेंस रेगुलेटरी एंड डेवलपमेंट अथॉरिटी ऑफ इंडिया (IRDAI) एक मानक हेल्थ कवर पॉलिसी लेकर आया है, जिसकी पेशकश सभी सामान्य और स्टैंडअलोन स्वास्थ्य बीमाकर्ताओं द्वारा जरूर की जानी चाहिए। यह मानक हेल्थ पॉलिसी आरोग्य संजीवनी है।

आरोग्य संजीवनी से जुड़ें महत्वपूर्ण तथ्य

  • जो भी इंश्योरेंस कंपनियां इस पॉलिसी की पेशकश करेगी, उन सभी के यहां इस पॉलिसी का नाम और कवरेज सब एक जैसा ही होगा। साथ ही को-पेमेंट और सब-लिमिट्स भी एक जैसी ही होगी।
  • यह पॉलिसी इंडिविजुअल और फैमिली फ्लॉटर दोनों आधार पर उपलब्ध होगी।
  • यह पॉलिसी एक साल के लिए है। इसका मतलब है कि पॉलिसी धारक लगातार पॉलिसी का लाभ लेने के लिए इसका हर साल नवीकरण करा सकेगा।
  • आरोग्य संजीवनी कम से कम एक लाख और अधिकतम पांच लाख के बीमा की पेशकश करती है।
  • दूसरी अन्य हेल्थ पॉलिसीज की तरह ही आरोग्य संजीवनी भी 30 दिनों के न्यूनतम प्रतिक्षा समय और डिजीज स्पेसिफिक प्रतिक्षा समय के साथ आती है।
  • इस मानक पॉलिसी में पॉलिसीधारक को पोर्टेबिलीटी की सुविधा भी दी जाती है।
  • आरोग्य संजीवनी हेल्थ पॉलिसी में दांतों के उपचार और प्लास्टिक सर्जरी भी कवर होती है, बशर्ते यह किसी बिमारी या चोट के कारण जरूरी हो।
  • इस पॉलिसी में मातृत्व से संबंधित उपचार, वजन कम करना, बांझपन, लिंग परिवर्तन, साहसिक खेल और कानून के उल्लंघन या युद्ध कं चलते हुए खर्च पर कवरेज नहीं दी जाती है। साथ ही इस पॉलिसी में ओपीडी के खर्चों की भी कवरेज नहीं होती है।

भारतीय बीमा विनियामक और विकास प्राधिकरण (IRDAI) क्या है?

  • भारतीय नियामक और विकास प्राधिकरण एक स्वायत्त और वैधानिक निकाय है जो देश में बीमा और विनियमन को बढ़ावा देता है। IRDAI भारत में बीमा क्षेत्र की देखरेख करने वाली सर्वोच्च संस्था है। इसका मुख्य उद्देश्य पॉलिसीधारकों के हितों की रक्षा करना और बीमा उद्योग को नियंत्रित करना है। IRDAI का गठन बीमा नियामक और विकास प्राधिकरण अधिनियम - IRDAI अधिनियम, 1999 द्वारा किया गया था और इसका मुख्यालय हैदराबाद, तेलंगाना में है।

भारत में चिड़ियाघरों को हाई अलर्ट पर रहने की सलाह: केन्द्रीय चिड़ियाघर प्राधिकरण

  • अमेरिका के कृषि विभाग की राष्ट्रीय पशु चिकित्सा सेवा प्रयोगशाला ने 5 अप्रैल, 2020 को जारी वक्तव्य में इस बात की पुष्टि की है कि ब्रोंक्स चिड़ियाघर, न्यूयार्क के एक बाघ सार्स-कोव-2 (कोविड-19) से संक्रमित है।
  • इस तथ्य का संज्ञान लेते हुए पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के अन्तर्गत केन्द्रीय चिड़ियाघर प्राधिकरण ने देश के सभी चिड़ियाघरों को हाई अलर्ट पर रहने, किसी असामान्य व्यवहार/लक्षणों को ध्यान में रखते हुए सीसीटीवी की मदद से जानवरों की चौबीसों घंटे निगरानी करने, पीपीई (व्यक्तिगत सुरक्षा उपकरण) या अन्य सुरक्षा उपाय के बगैर चिड़ियाघर कर्मियों को जानवरों के नजदीक जाने, बीमार जानवरों को क्वारंटाइन/अलग-अलग रखने तथा जानवरों को भोजन देते समय कम से कम संपर्क करने की सलाह दी है।
  • एडवाइजरी में आगे कहा गया है कि मांसाहारी स्तनधारियों जैसे बिल्ली, नेवला और प्राइमेट्स की सावधानीपूर्वक निगरानी की जानी चाहिए। संदिग्ध मामलों के नमूनों को 15 दिनों की अवधि में कोविड-19 परीक्षण के लिए निर्दिष्ट पशु स्वास्थ्य संस्थानों में भेजे जाने चाहिए।
  • इसके साथ ही राष्ट्रीय/आईसीएमआर दिशा-निर्देश के अनुरूप अत्याधिक जोखिम वाले इस वायरस के जैव-रोकथाम और सुरक्षा उपायों का पालन किया जाना चाहिए।
  1. राष्ट्रीय उच्च सुरक्षा पशु रोग संस्थान (एनआईएचएसएडी), भोपाल।
  2. राष्ट्रीय अश्व अनुसंधान केन्द्र (एनआरसीई), हिसार, हरियाणा।
  3. पशु रोग अनुसंधान और निदान केन्द्र (सीएडीआरएडी), भारतीय पशु चिकित्सा अनुसंधान संस्थान, (आईवीआरआई) इज्जतनगर, बरेली, उत्तर प्रदेश।
  • केन्द्रीय चिड़ियाघर प्राधिकरण ने चिड़ियाघरों के सभी कर्मियों को सलाह दी है कि वे कोविड-19 के संदर्भ में सरकार द्वारा समय-समय पर जारी सुरक्षा और कीटाणुशोधन प्रोटोकॉल का कड़ाई से पालन करें।
  • इसके अलावा सभी चिड़ियाघरों को सलाह दी जाती है कि वे जन-स्वास्थ्य के लिए निर्दिष्ट नोडल एजेंसियों के साथ ताल-मेल बनाए रखें और नोडल एजेंसी के अनुरोध पर स्क्रीनिंग, परीक्षण, निगरानी और निदान के लिए नमूनों की अनुमति दें।

एमनेस्टी इंटरनेशनल ने असम सरकार से निरेाध केंद्रों से बंदियों को रिहा करने की अपील की

  • एमनेस्टी इंटरनेशनल इंडिया (एआईआई) ने सोमवार को असम सरकार से राज्य में ‘अनियमित विदेशी’ घोषित किये गये और खचाखच भरे निरोध केंद्रों में रखे गये लोगों को तत्काल रिहा करने की अपील की। एमनेस्टी ने कहा कि राज्य सरकार को अहसास करना चाहिए कि इन निरेाध केंद्रों में करीब 800 अनियमित विदेशियों पर संक्रमण का बड़ा खतरा है, इसलिए उनकी रक्षा के लिए हर कदम उठाया जाए एवं उन्हें तत्काल रिहा किया जाए।

एमनेस्टी इंटरनेशनल क्या है?

  • एमनेस्टी इंटरनेशनल लंदन का एक गैर अधिकारी संघठन है, जिसका मुख्य फोकस मानवीय अधिकारों पर है। एमनेस्टी इंटरनेशनल की स्थापना साल 1961 में लंदन में हुई थी। एमनेस्टी का ध्यान मानव अधिकारों के हनन पर होता है और वह अंतर्राष्ट्रीय मानकों व नियमो का पालन करते हुए मुहीम शुरू करते हैं।यह गैर सरकार संघठन जनता के विचारों को जुटाने और मानव अधिकारों का हनन करने वाले देशों की सरकार पर दबाव बनाने का कार्य करते हैं। इस संघठन को इंसानो की उत्पीड़न से रक्षा के लिए साल 1977 में नोबेल शांति पुरूस्कार और साल 1978 में मानवीय अधिकारों के क्षेत्र में उम्दा प्रदर्शन के लिए यूएन के पुरूस्कार से भी नवाजा गया था।

:: अंतर्राष्ट्रीय समाचार ::

यूक्रेन के चेर्नोबिल के जंगलों में लगी आग

  • यूक्रेन के चेर्नोबिल परमाणु ऊर्जा स्टेशन के आसपास के क्षेत्र आग लग गई है। यह आग दो अलग-अलग जगहों पर लगी है। यूक्रेनीफायर फाइटर आग पर काबू पाने की कोशिश में लगे हुए हैं। बता दें कि इस संयंत्र को 1986 में हुए विस्फोट के बाद रेडियोएक्टिव कचरे के कारण खाली कर दिया गया था।
  • आग 2600 वर्ग-किलोमीटर चेर्नोबिल अपवर्जन क्षेत्र के अंदर लगी है। 1986 में परमाणु ऊर्जा स्टेशन में हुए के बाद यूरोप के अधिकांश हिस्सों में रेडियोएक्टिव कचरे का गुबार छा गया था। यह ज़ोन रहने लायक नहीं है, बावजूद इसके लगभग 200 लोग यहां रहते हैं। वो इलाके को छोड़ने के आदेश के बाद भी यही पर बने हुए हैं।

इनकरेजिंग इंटरनेशनल सपोर्ट फॉर द रिकवरी एंड यूज़ ऑफ़ स्पेस रिसोर्सेज

  • अमेरिकी राष्‍ट्रपति डोनाल्‍ड ट्रंप ने एक एग्‍जीक्‍यूटिव ऑर्डर पर अपने दस्‍तखत किए हैं। इस ऑर्डर के बाद अमेरिका अंतरिक्ष में मौजूद संसाधनों का उपयोग अपने हितों के लिए कर सकेगा। इस आदेश का मकसद प्राइवेट इंडस्‍ट्री द्वारा स्‍पेस रिसोर्सिज की रिकवरी और उनके इस्‍तेमाल को लेकर देश की नीतियों को अंतरराष्‍ट्रीय समर्थन पाना है। इसका एक मकसद अंतरिक्ष में प्राइवेट पार्टनर्स की दखल को बढ़ाना भी है। इसमें केवल चंद्रमा पर किए गए कार्य ही शामिल नहीं है बल्कि मंगल ग्रह पर भविष्‍य में होने वाले कार्यक्रम भी शामिल हैं। इसकी जानकारी राष्‍ट्रपति के डिप्‍टी असिसटेंट और नेशनल स्‍पेस काउंसिल के एग्‍जीक्‍यूटिव सेक्रेटरी स्‍कॉट पेस ने दी है।
  • आपको बता दें कि अमेरिका चांद पर इंसान को भेजकर एक बार फिर से इतिहास को दोहराने की तैयारी में लगा हुआ है। इस एग्‍जीक्‍यूटिव ऑर्डर को Encouraging International Support for the Recovery and Use of Space Resources नाम दिया गया है। यह ऑर्डर अमेरिका द्वारा अंतरिक्ष को लेकर19767 में की गई संधि की भी पुष्टि करता है। लेकिन मंगल ग्रह को लेकर जो समझौता 1979 में हुआ था उसको खारिज करता है। अमेरिका का कहना है कि वो इस संधि में शामिल नहीं है।
  • इस संधि पर 95 में से केवल 17 देशों ने ही अपने दस्‍तखत किए हैं। ये सभी 95 सदस्‍य यूएन की उस कमेटी का हिस्‍सा हैं जो अंतरिक्ष के शांतिपूर्ण और मानवता की भलाई के लिए इस्‍तेमाल करने का समर्थन करती है। इस आदेश में ये भी साफ किया गया है कि अमेरिका सुदूर अंतरिक्ष को सभी के लिए समान नहीं मानता है। पेस के मुताबिक वर्ष 2015 में अमेरिकी कांग्रेस ने ये फैसला लिया था कि उनको अंतरिक्ष का अपने हित के लिए और व्‍यवसायिक मकसद के लिए इस्‍तेमाल करने का पूरा हक है।

कोरोना वायरस चर्चा करेंगे संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के सदस्य देश

  • दुनिया पर मंडरा रहे कोरोना वायरस के गंभीर खतरे के बीच संयुक्त राष्ट्र राष्ट्र सुरक्षा परिषद (यूएनएससी) के सदस्य देश गुरुवार को चर्चा करेंगे। पहली बार संयुक्त राष्ट्र का संगठन कोरोना वायरस पर एक बैठक आयोजित कर रहा है जिसकी वजह से 74 हजार से ज्यादा लोग मारे जा चुके हैं, जबकि विश्व स्तर पर 13 लाख से ज्यादा लोग संक्रमित हैं।
  • अप्रैल महीने के लिए परिषद के अध्यक्ष डोमिनिकन गणराज्य ने कहा कि यूएनएससी ने कोविड-19 के प्रभाव के संबंध में चर्चा के लिए वीडियो टेलीकॉन्फ्रेंसिंग के जरिए बैठक करने का फैसला किया है।अप्रैल के महीने के लिए अध्यक्षता डोमिनिकन गणराज्य के पास है। पिछले महीने यह चीन के पास थी। दुनियाभर में कोरोना वायरस के तेजी से बढ़ते मामलों के बावजूद पिछले महीने चीन की अध्यक्षता में सुरक्षा परिषद ने वैश्विक महामारी के बारे में कोई चर्चा नहीं की।

क्या है संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद?

  • संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में पाँच देशों – अमरीका, ब्रिटेन, फ्रांस, रूस और चीन को स्थाई सदस्यता प्राप्त है. इन देशो की सदस्यता दूसरे विश्व युद्ध के बाद के शक्ति संतुलन को प्रदर्शित करती है, जब सुरक्षा परिषद का गठन किया गया था. इस विशेषाधिकार प्राप्त गुट के सदस्य देशों के अलावा 10 अन्य देशों को दो साल के लिए अस्थाई सदस्य के रुप में सुरक्षा परिषद में शामिल किया जाता है. स्थाई और अस्थाई सदस्य बारी-बारी से एक महीने के लिए परिषद के अध्यक्ष बनाए जाते हैं.
  • अस्थाई सदस्यों को सभी सदस्य देशों का प्रतिनिधित्व करने वाली संस्था संयुक्त राष्ट्र महासभा चुनती है. अस्थाई सदस्य देशों को चुनने का उदेश्य सुरक्षा परिषद में क्षेत्रीय संतुलन क़ायम करना है. इसमें पाँच सदस्य एशियाई या अफ़्रीकी देशों से, दो दक्षिण अमरीकी देशों से, एक पूर्वी यूरोप से और दो पश्चिमी यूरोप या अन्य क्षेत्रों से चुने जाते हैं.

दक्षिण एशिया में 430 मिलियन बच्चे हो सकते हैं शिक्षा व्यवस्था से बाहर: यूनिसेफ

  • यूनाईटेड नेशंस चिल्ड्रेंस फंड यानि यूनिसेफ द्वारा जारी एक विज्ञप्ति के अनुसार दक्षिण एशिया के विभिन्न देशों में स्कूलों के बंद होने से लगभग 430 मिलियन बच्चों पर शिक्षा व्यवस्था से बाहर होने का खतरा मंडराने लगा है।
  • कोविड – 19 संकट के पहले से ही दक्षिण एशियाई देशों में 95 मिलियन स्कूल जाने वाली उम्र के बच्चे शिक्षा से वंचित थे।
  • रिपोर्ट के अनुसार बंद रखे जा रहे स्कूलों के इस दौर में यदि हम शिक्षा के लिए वैकल्पिक माध्यमों की व्यवस्था नहीं करते हैं तो ऐसे बच्चे जो कि पहले ही शिक्षा से दूर थे, वे स्कूली शिक्षा व्यवस्था में कभी वापस नहीं लौट पाएंगे।
  • भले ही दक्षिण एशियाई देशों में विभिन्न परीक्षा नियामकों द्वारा टर्म और परीक्षाओं के लिए रचनात्मक विकल्पों के जरिए स्कूली छात्रों पर कोविड -19 के असर को कम किया है, लेकिन सम्बन्धित एजेंसियों के लिए जरूरी है कि वे छात्रों की घर से पढ़ाई के वैकल्पिक तरीकों के पहुंचाने के लिए नीतियां भी लागू करें। इसके लिए रेडियो, टेलीविजन और मोबाईल का सहारा लिया जा सकता है और, रिपोर्ट के अनुसार, जिन बच्चों के पास इनकी सुलभता नहीं है, उन्हें प्रिंटेड मैटेरियल उपलब्ध कराया जाए।

UNICEF क्या है?

  • यूनिसेफ की स्थापना संयुक्त राष्ट्र की महासभा द्वारा 11 दिसम्बर, 1946 को हुआ था, जिसका मुख्यालय न्यूयॉर्क में स्थित है। इसकी स्थापना पूरे विश्व में मौजूद बच्चों के स्वास्थ्य, पोषण, शिक्षा और कल्याण के लिए की गई थी। यूनीसेफ दुनियाभर में मौजूद स्वास्थ्य सेवा संस्थानों खासकर विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के साथ मिलकर बच्चों को पानी, स्वच्छता, इंफेक्शंस से बचाने के कैंपैन चलाती हैं।

अफ्रीका में COVID-19 वैक्सीन का परीक्षण नहीं होगा

  • कोवि़ड-19 की वैक्सीन तैयार करने के लिए सभी देश अपने स्तर पर तैयारी कर रहे हैं, लेकिन खबर है अफ्रीका यह वैक्सीन तैयार नहीं करेगा। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के महानिदेशक टेड्रोस अदनोम घेब्रेयसस कहा कि अफ्रीफा कोविड-19 से लड़ने के लिए तैयार होने वाले वैक्सीन का हिस्सा नहीं बनेगा। यानी अफ्रीका में किसी भी प्रकार की वैक्सीन का परीक्षण नहीं होगा।

पृष्ठभूमि

  • कुछ वैज्ञानिकों द्वारा पिछले सप्ताह की गई टिप्पणियों  के आधार पर कहा गया था कि कोरोना वायरस की वैक्सीन का परीक्षण अफ्रीका में होगा। इसके जवाब में डब्ल्यूएचओ की तरफ से सफाई पेश की गई है।
  • गौरलतब है कि इंसान से इंसान को फैलने वाले इस वायरस का अभी तक कोई इलाज नहीं मिल पाया है। ऐसे में कई देश इसकी रोकथाम बनाने के लिए वैक्सीन बना बना रहे हैं हालांकि अभी तक इसका कारगर उपाय सामने नहीं आये है।

आतंकी वित्‍तपोषण में पाकिस्‍तान के कदमों की समीक्षा: FATF

  • फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स (एफएटीएफ) की जून होने वाली बैठक में मनी लॉन्ड्रिंग और आतंकी वित्‍तपोषण के मामले में पाकिस्‍तान द्वारा उठाए गए कदमों की समीक्षा करेगा। यह बैठक चीन के बीजिंग में होगी।

पृष्ठभूमि

  • फरवरी 2020 में पेरिस में एफएटीएफ का पूर्ण सत्र की बैठक में पाकिस्तान को लेकर बड़ा फैसला सुनाया गया था। एफएटीएफ ने पाकिस्‍तान को ग्रे लिस्‍ट में बरकरार रखने का फैसला किया गया था। इस दौरान आतंकी फंडिंग को लेकर पाकिस्तान को एफएटीएफ की निगरानी सूची में बनाए रखने को कहा गया था। एफएटीएफ ने पाकिस्तान को सिर्फ चार महीने की मोहलत दी थी, लेकिन इसके साथ कहा है कि अगर पाकिस्तान ने जून 2020 तक आतंकी गतिविधियों को रोकने के लिए बताए गए कदम नहीं उठाए तो उसे ब्लैकलिस्ट यानि प्रतिबंधित सूची में डाला जा सकता है।
  • फिलहाल पाकिस्तान, एफएटीएफ की निगरानी सूची में शामिल है और एफएटीएफ ने 2018 में ही पाकिस्तान को 27 कार्यों की एक सूची सौंपी थी। सूत्रों के अनुसार पाकिस्तान को वित्तीय कार्रवाई टास्क फोर्स (एफएटीएफ) की ग्रे लिस्ट पर बने रहने की संभावना प्रबल है।

क्या है फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स (FATF)

  • फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स (FATF) एक अंतर-सरकारी निकाय है जिसे फ्रांस की राजधानी पेरिस में जी7 समूह के देशों द्वारा 1989 में स्थापित किया गया था। इसका काम अंतरराष्ट्रीय स्तर पर धन शोधन (मनी लॉन्ड्रिंग), सामूहिक विनाश के हथियारों के प्रसार और आतंकवाद के वित्तपोषण पर निगाह रखना है।
  • इसके अलावा एफएटीएफ वित्त विषय पर कानूनी, विनियामक और परिचालन उपायों के प्रभावी कार्यान्वयन को बढ़ावा भी देता है। एफएटीएफ का निर्णय लेने वाला निकाय को एफएटीएफ प्लेनरी कहा जाता है। इसकी बैठक एक साल में तीन बार आयोजित की जाती है।

:: भारतीय राजव्यवस्था ::

संसद सदस्य अधिनियम, 1954 के वेतन, भत्ते और पेंशन में संशोधन का अध्यादेश

  • हाल ही में संसद सदस्य अधिनियम, 1954 के वेतन, भत्ते और पेंशन में संशोधन का अध्यादेश मंजूर किया गया है जो इसी महीने की शुरुआत से लागू हो गया है। एक साल तक सभी सांसदों के वेतन से तीस फीसद धनराशि कोरोना के खिलाफ लड़ाई में जाएगी।
  • हर साल हर सांसद को मिलने वाली पांच करोड़ रुपये की सांसद निधि भी दो साल तक सरकार के कंसोलिडेटेड फंड में जाएगी। अगर दो साल तक सांसद निधि रुकती है तो सरकार के खाते में 7900 करोड़ रुपये आएंगे। अब वित्त वर्ष 2020-21 और 2021-22 की पूरी सांसद निधि सरकारी खाते में जाएगी।
  • कोरोना संकट को देखते हुए राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति और सभी राज्यपालों ने भी स्वेच्छा से साल भर तक तीस फीसद कम वेतन लेने का निर्णय लिया है।

कब हुई थी सांसद निधि की शुरुआत?

  • सांसद निधि यानी एमपीलैड स्कीम की शुरुआत भारत के तत्कालीन प्रधानमंत्री पीवी नरसिंह राव ने 1993 में की थी। इसके तहत तय किया गया था कि सांसदों को अपने निर्वाचन क्षेत्र में विकास कार्य कराने के लिए प्रतिवर्ष वित्तीय सहायता दी जाएगी। लोकसभा के सांसदों को उनके संसदीय क्षेत्र के विकास में खर्च करना होता है। राज्यसभा सांसद देश के किसी भी हिस्सें में विकास कार्य में इसकी अनुशंसा करने के लिए स्वतंत्र होते हैं।सांसद निधि की व्यवस्था गांव-गांव तक विकास को पहुंचाना था।
  • 1993-94 में पांच लाख रुपए सांसद को विकास कार्य के लिए खर्च करने के लिए दिए जाते थे। वर्ष 1994-94 में सांसद निधि योजना में खर्च की सीमा एक करोड़ रुपए की गई थी। 1989-99 में बढ़ाकर 2 करोड़ और 2011-12 में पांच करोड़ रुपए सालाना किया गया है।

संचित निधि (Consolidated Fund)

  • सरकार को प्राप्त सभी राजस्व, बाजार से लिए गए ऋण और स्वीकृत ऋणों पर प्राप्त ब्याज संचित निधि (Consolidated Fund) में जमा होते हैं।भारतीय संविधान के अनुच्छेद 266 के तहत स्थापित है यह ऐसी निधि है जिस में समस्त एकत्र कर/राजस्व जमा, लिये गये ऋण जमा किये जाते है यह भारत की सर्वाधिक बडी निधि है जो कि संसद के अधीन रखी गयी है कोई भी धन इसमे बिना संसद की पूर्व स्वीकृति के निकाला/जमा या भारित नहीं किया जा सकता है अनु 266 प्रत्येक राज्य की समेकित निधि का वर्णन भी करता है।

:: भारतीय अर्थव्यवस्था ::

ग्लोबल टॉप 100 रिच लिस्ट:

  • भारत के सबसे बड़े रईस मुकेश अंबानी की नेटवर्थ में पिछले दो माह में 28 फीसद की भारी कमी दर्ज की गई है। हुरुन ग्लोबल रिच लिस्ट के मुताबिक अंबानी की नेटवर्थ 300 मिलियन डॉलर (30 करोड़)  प्रति दिन गिरकर 31 मार्च को 48 बिलियन डॉलर रह गई है।  उनकी संपत्ति करीब 1 लाख 44 हजार करोड़ घट चुकी है और अब यह 3 लाख 65 हजार करोड़ रह गई है। अंबानी के अलावा गौतम अडाणी, शिव नाडर और उदय कोटक की संपत्ति में भी कमी दर्ज की गई है।
  • मुकेश अंबानी की संपत्ति में कमी की बड़ी वजह शेयर बाजारों में गिरावट है। रिलायंस इंडस्ट्रीज के चेयरमैन और मैनेजिंग डायरेक्टर की संपत्ति में फरवरी-मार्च की अवधि में 19 अरब डॉलर की कमी दर्ज की गई। इस वजह से वह दुनियाभर की अमीर शख्सियतों की सूची में आठ स्थान फिसलकर 17वें पायदान पर पहुंच गए हैं।
  • इस रिपोर्ट के मुताबिक अडाणी के नेटवर्थ में इस दौरान छह अरब डॉलर (37 फीसद), एचसीएल के संस्थापक शिव नाडर की संपत्ति में 5 अरब डॉलर या 26 फीसद और बैंकर उदय कोटक के नेट वर्थ में  4 अरब डॉलर या 28 फीसद की कमी दर्ज की गई। वहीं गौतम अडाणी, शिव नाडर और उदय कोटक की संपत्ति में भी कमी दर्ज की गई है। इस हालिया लिस्ट के मुताबिक तीनों उद्योगपति दुनिया के 100 सबसे अमीर शख्सियतों की सूची से बाहर हो गए हैं। इस लीग में अकेले अंबानी का नाम है।
  • अमेजन के सीईओ जेफ बेजोस 131 बिलियन डॉलर के नेटवर्थ के साथ दुनिया के सबसे अमीर आदमी बने हुए हैं, जिनकी संपत्ति में पिछले दो महीनों के दौरान केवल 9 प्रतिशत की गिरावट हुई है। इसके बाद बिल गेट्स, बफेट और अर्नाल्ट हैं।

सर्विसेज बिजनेस एक्टिविटी इंडेक्स (सर्विसेज पीएमआई) में गिरावट

  • मार्च में सर्विस सेक्टर की गतिविधियों में तेज गिरावट आई। इन्फॉर्मेशन प्रोवाइडर आईएचएस मार्किट इंडिया का सर्विसेज बिजनेस एक्टिविटी इंडेक्स (सर्विसेज पीएमआई) मार्च में 49.3 पर आ गया। फरवरी में यह 57.5 रहा जो कि 85 महीने में सबसे ज्यादा था। कोरोनावायरस का असर बढ़ने की वजह से पिछले महीने इसमें कमी आई।

क्या है पीएमआई में गिरावट का मतलब

  • पीएमआई का 50 से ऊपर रहना सेक्टर की गतिविधियों में विस्तार को दर्शाता है जबकि 50 से कम रहने का मतलब है कि गतिविधियों में गिरावट आई है। आईएचएस मार्किट के इकोनॉमिस्ट जोए हेयज का कहना है कि भारत के सर्विस सेक्टर पर कोरोनावायरस के असर का पूरा अनुमान अभी नहीं लगाया गया है। लॉकडाउन को ध्यान में रखते हुए 12 मार्च से 27 मार्च तक के आंकड़ों के आधार पर यह सर्वे किया गया है।
  • मैन्युफैक्चरिंग और सर्विस सेक्टर की गतिविधियां बताने वाला कंपोजिट पीएमआई आउटपुट इंडेक्स घटकर 50.6 पर आ गया। फरवरी में यह 57.6 पर था। इससे पता चलता है कि प्राइवेट सेक्टर के आउटपुट में तेज गिरावट आई है।

:: विज्ञान और प्रौद्योगिकी ::

इलेक्ट्रो-फ्रीक्वेंसी-वाइब्रेंशन टेक्नोलॉजी से कोरोना वायरस का उपचार

  • पूरी दुनिया में कोरोना वायरस को हराने को लेकर शोध किए जा रहे हैं। बायोकेमिकल मॉडल (आधुनिक चिकित्सा पद्धति) ने जहां कोरोना वायरस के खिलाफ रासायनिक पदार्थों को लड़ाई का आधार बनाया है, वहीं एक वैकल्पिक पद्धति भी सामने आई है। पदार्थों की तरंगों की आवृत्ति के आधार पर ईएफवी (इलेक्ट्रो-फ्रीक्वेंसी-वाइब्रेंशन) मॉडल आया है। इसमें दावा किया गया है कि कुछ दिनों तक 61 मिनट का समय खर्च करके कोई भी संक्रमित व्यक्ति कोरोना वायरस से मुक्ति पा सकता है। वो भी बिना किसी दवा के। सिर्फ 21 मिनट तक कुछ अनुनाद आधारित आवाजें सुननी होगी

क्या है इलेक्ट्रो-फ्रीक्वेंसी-वाइब्रेंशन :

  • साउंड थेरेपिस्ट इक्वांक आनखा ने इस मॉडल को प्रस्तावित किया है। उन्होंने मशहूर वैज्ञानिक निकोला टेस्ला के सिद्धांत को आधार बनाया है। टेस्ला ने कहा था, ‘यदि आप यूनिवर्स के रहस्य जानना चाहते हैं तो ऊर्जा, तरंग और आवृत्ति पर फोकस कीजिए।’ इसी आधार पर इक्वांक का मानना है कि हर पदार्थ की अपनी आवृत्ति होती है, जिस पर उसकी तरंगें अनुनाद करती हैं। शोध में पाया गया कि कोरोना के जीनोम, पॉलिमर्स और प्रोटीन एक खास आवृत्ति पर अनुनाद करते हैं। मानव शरीर की भी अपनी आवृत्ति होती है और अनुनाद भी।

मिला आधार :

  • अमेरिका में गिलाड साइंसेज की दवा रेमडेसिर को कोरोना के खिलाफ कारगर माना गया है। पहला मानव ट्रायल भी सफल रहा है। अनुनाद मॉडल के शोधकर्ताओं ने माना कि रेमडेसिर के अणु भी कोरोना की तरह ही तीन आवृत्तियों पर अनुनाद करते हैं। इसके अलावा अभी कोरोना के इलाज में इस्तेमाल की जा रहीं क्लोरोक्वीन की आवृत्ति भी कोरोना की आवृत्ति के ही आसपास है।

कैसे करती है काम :

  • हमारा शरीर इलेक्ट्रो-मैग्नेटिक पल्स पर काम करता है। हमारा दिल जब सही आवृत्ति पर नहीं धड़कता है तो एक इलेक्ट्रो- मैग्नेटिक डिवाइस पेसमेकर लगाई जाती है, जो सही इलेक्ट्रॉनिक पल्स भेजकर दिल को सही आवृत्ति पर काम करने को कहती है। हमारे शरीर की भी अपनी आवृत्ति और अनुनाद होते हैं। कोई भी वायरस, जो मूलत: एक कोशिका होती है, अपनी आवृत्ति और अनुनाद हमारे शरीर पर थोप देता है। अपने अनुनाद के जरिये ही वायरस जहर फैलाता है और शरीर को कमजोर करता है। ईएफवी मॉडल मानता है कि कोरोना के तीन मूल हिस्सों जीनोम (जैविक पदार्थ, पॉलिमर्स और प्रोटीन के जोड़ को बाहर से विरोधी आवृत्ति का अनुनाद देकर तोड़ा जा सकता है। यदि वायरस का जोड़ ही टूट जाएगा तो वायरस अपने आप निष्प्रभावी होकर मर जाएगा।

तीन आवृत्तियों से होता है जोरदार वार :

  • शोधकर्ताओं ने जीनोम, पॉलिमर्स और प्रोटीन के तीन अलग-अलग आवृत्ति व अनुनाद खोज निकाले हैं। इनकी काट के लिए भी तीन आवृत्ति के अनुनाद पहचाने गए हैं। हेडफोन के जरिये साउंड वेब संक्रमित मरीज को भेजी जाती है, जो ब्रेनवेव ट्रांसमिशन के सिद्धांत को पालन करते हुए शरीर में फैल जाती है। यह आवाज साइनसोएडल टोन होती है। यह प्रकृति की मूल आवृत्तियां व अनुनाद हैं। आइसोक्रोनिक आवाजों को संगीत में ढाला जाता है, जिसे हम लोग सुन सकें। इस दौरान इंसान की दिमागी गतिविधियों पर सेंसर के जरिये निगाह रखी जाती है। साथ ही ईसीजी और एलएफटी (लीवर फंक्शन टेस्ट) किया जाता है, ताकि संक्रमित व्यक्ति के स्वास्थ्य की जानकारी मिल सके।

तीन डोज और 61 मिनट :

  • हर दिन महज 61 मिनट का समय संक्रमित मरीज का इस थेरेपी में लगता है। सात-सात मिनट तक हेडफोन के जरिये रोधी आवृत्ति व अनुनाद की इलेक्ट्रो-मैग्नेटिक तरंगें दिमाग को भेजी जाती है। हर बार इन आवाजों को काम करने का मौका देने के लिए 20-20 मिनट का ब्रेक दिया जाता है, ताकि शरीर बाहर से भेजे गए इस इलेक्ट्रो-मैग्नेटिक कोड को समझ सके और उस पर प्रतिक्रिया कर सके।

ईएफवी के फायदे :

  • चिकित्सा का यह मॉडल किसी प्रकार का साइड इफेक्ट पैदा नहीं करता है। इससे शरीर में किसी तरह का जहर पैदा नहीं होता है, जैसा आधुनिक चिकित्सा मॉडल में दवाओं के असर के कारण होता है। शोधकर्ताओं का दावा है कि इस मॉडल से किसी तरह का नुकसान संक्रमित व्यक्ति को नहीं होता है।

एंटी एजिंग दवाएं कोरोना पर असरकारक

  • जिन दवाओं को तमाम लोग बढ़ती उम्र को कम दिखाने के लिए प्रयोग करते हैं, वे दवाएं कोरोना पर असरकारक हो सकती हैं। इंटरनेशनल रिसर्च जर्नल में प्रकाशित शोध के मुताबिक एंटी एजिंग और कोशिकाओं को मरने से बचाने वाली (सेनोलाइटिक्स) दवाएं कोरोना से लड़ाई में बड़ा हथियार साबित हो सकती हैं।
  • क्लीनिकल इम्यूनोलाजिस्ट डॉ. स्कंध शुक्ला ने इंटरनेशनल मेडिकल जर्नल एजिंग में अपने कोविड-19 एंड क्रोनोलॉजिकल एजिंग (सेनोलाइटिक्स एंड अदर एंटी एजिंग ड्रग फार दी ट्रीटमेंट एंड प्रिवेंशन आफ कोरोना वायरस इंफेक्शन) शोध का हवाला देते कहा है कि बचाव और इलाज के लिए इन दवाओं के इस्तेमाल पर विचार किया जा सकता है। विशेषज्ञों का कहना है कि कोविड-19 सीवियर एक्यूट रेस्पिरेटरी सिंड्रोम और मिडिल ईस्ट रेस्पिरेटरी सिंड्रोम परिवार का एक नया उभरता हुआ वायरस है।

किस प्रकार ये दवा होंगी असरदार

  • कोविड-19 अधिक उम्र वाले रोगियों पर ज्यादा हमला करता है। यह इस सवाल का जवाब देता है कि कोरोना संक्रमण और उम्र बढऩे की प्रक्रिया के बीच एक कार्यात्मक संबंध है। कोविड-19 के लिए दो रिसेप्टर्स हैं, जो कि महत्वपूर्ण भूमिका अदा कर रहे हैं। एक सीडी 26 है और दूसरा एसीई-2 (एंजियोटेंसिन परिवर्तित एंजाइम 2) है। दिलचस्प बात यह है कि दोनों ही उम्र बढऩे से संबंधित हैं। इसी तरह कोरोना संक्रमण में दो प्रस्तावित दवाएं एजिथ्रोमाइसिन और क्वेरसेटिन भी महत्वपूर्ण सेनोलाइटिक गतिविधि यानि बुढ़ापे के सेल को मारते हैं। इसके अलावा क्लोरोक्वीन संबंधित बीटा-गैलेक्टोसि भी बुढ़ापे के मार्कर है। अन्य एंटी-एजिंग ड्रग्स पर भी विचार किया जाना चाहिए, जैसे कि रैपामाइसिन और डॉक्सीसाइक्लिन, क्योंकि वे प्रोटीन संश्लेषण के अवरोधक के रूप में व्यवहार करते हैं और कोशिकाओं से उच्चस्तर की सूजन वाले साइटोकिन्स, इम्यून मॉड्यूलेटर, ग्रोथ फैक्टर और प्रोटीन के स्राव को रोकते हैं।

इन्फ्रा-रेड व अल्ट्रा-वॉयलेट किरणों से थमेगी वायरस की रफ्तार

  • लंबे होते दिन और बढ़ती धूप नए कोरोना वायरस के संक्रमण की रफ्तार धीमी कर सकती है। खासतौर से खुली जगहों पर वायरस को रोकने में यह कारगर हो सकता है। ग्रीस के प्रमुख शोध संस्थानों के वैज्ञानिकों ने सूर्य के प्रकाश में मौजूद इन्फ्रा-रेड (आईआर) व अल्ट्रा-वॉयलेट (यूआर) किरणों से संक्रमण फैलने की गति पर रोक लगने की उम्मीद जताई है।
  • इन वैज्ञानिकों के अनुसार सर्दियों के बाद लंबे दिनों से वातावरण में सूर्य के प्रकाश संग इन किरणों की मौजूदगी बढ़ी है। ऐसे में इसका परिणाम जल्द सामने आ सकता है। प्राकृतिक रूप से खुले स्थानों पर सूर्य के प्रकाश में मौजूद इन किरणों से वायरस के बढ़ने की गति धीमी हो सकेगी। इसके अलावा कृत्रिम इन्फ्रा-रेड और अल्ट्रा वायलट किरणों को सैनिटाइजेशन के लिए भी इस्तेमाल हो सकता है।

ग्रीस के वैज्ञानिकों का आकलन

  • वायरस खत्म करने में लंबे दिन और धूप की भी होगी भूमिका

नमी-गर्मी पर विरोधाभासी दावे

  • दरअसल, इस वायरस पर बदलते मौसम, नमी और गर्मी से होने वाले असर को लेकर विरोधाभासी दावे किए जाते रहे हैं। लेकिन इंफ्रा रेड और अल्ट्रा वायलट किरणों को लेकर ऐसा कोई शोध नहीं।

यूवी किरणों से सैनिटाइजेशन

  • शोध में दावा किया गया है कि चीन ने अपने देश की मुद्रा, बस, अस्पताल, आदि सैनिटाइज करने के लिए कृत्रिम यूवी किरणों का उपयोग किया है। सेल-कल्चर रूम और खाद्य पदार्थों के विसंक्रमण के लिए भी इनका उपयोग होता है

क्या हैं अल्ट्रा वायलेट-इंफ्रा रेड किरणें

  • सूर्य के प्रकाश से छिपे लेकिन महत्वपूर्ण तत्वों के रूप में आईआर व यूआर किरणें निकलती हैं। आईआर किरणें वातातवरण में गर्मी को लो-एनर्जी इलेक्ट्रोमैग्नेटिक (ईएम) तरंगों से आगे बढ़ाती हैं। तो यूवी किरणें हाई-एनर्जी ईएम तरंगें पैदा करती हैं। सर्दी या आसमान में बादल होने के बावजूद सूर्य से निकली ये तरंगे धरती तक पहुंचती हैं। इनकी वेवलैंथ कम होती है, इसलिए इन्हें सामान्य परिस्थितियों में देखा नहीं जा सकता।

इसलिए उम्मीद...

  • यह पूर्व-प्रमाणित है कि अधिक ऊर्जा लिए यूवी किरणें किसी भी जीव के डीएनए और आरएनए में मौजूद न्यूक्लिक एसिड को नुकसान कर सकती हैं। इन किरणों का असर वायरस व बैक्टीरिया के आरएनए पर भी होता है।

सस्ता स्वदेशी वेंटिलेटर, पर्सनल सैनिटाइजेशन चैंबर और फेस मास्क

  • कोरोनावायरस के खिलाफ छिड़ी इस जंग में देश का हर शख्स अपना योगदान दे रहा है। सामाजिक संस्थानों से जुड़े लोग गरीबों की मदद कर रहे हैं। शैक्षणिक, शोध संस्थानों और निजी संस्थानों से जुड़े वैज्ञानिक इलाज को लेकर तमाम तकनीक तैयार कर रहे हैं। शनिवार को देश के वैज्ञानिकों ने तीन नए इनोवेटिव प्रोडक्ट तैयार करने में कामयाबी हासिल की। एक तरफ जहां गुजरात के वैज्ञानिकों ने बेहद सस्ता वेंटिलेटर बनाया तो दूसरी ओर पुणे के वैज्ञानिकों ने कोरोना का सैंपल लेने वाला स्वाब डेवलप किया। डीआरडीओ के वैज्ञानिकों ने सर्जिकल सूट और फेस मास्क के बाद अब सेल्फ सैनिटाइजेशन चैंबर तैयार किया है। खास बात यह है कि तीनों प्रोडक्ट कोरोना के खिलाफ इस लड़ाई में देश की काफी मदद कर सकते हैं।

स्वदेशी पॉलिमर स्वाब

  • पुणे की सेंटर फॉर मटेरियल्स फॉर इलेक्ट्रॉनिक्स टेक्नोलॉजी (सीमेट) के वैज्ञानिकों ने कम लागत वाला स्वदेशी पॉलिमर स्वाब तैयार करने में कामयाबी हासिल की है। केंद्र के डॉ. मिलिंद कुलकर्णी के मुताबिक, स्वाब का उपयोग कोरोनावायरस परीक्षण के लिए एकत्रित किए जाने वाले सैंपल को रखने में काम आता है। अभी इसे इटली, अमेरिका और जर्मनी से मंगाया जाता है।

स्वदेशी वेंटिलेटर

  • गुजरात के राजकोट की ज्योति सीएनसी कंपनी ने स्वदेशी वेंटिलेटर तैयार करने में कामयाबी हासिल की है। इसे धामन-1 नाम दिया गया है। इसके सभी हिस्से स्वदेशी हैं। कंपनी का दावा है कि इसकी कीमत महज 1 लाख रुपये है जबकि विदेश से आने वाला 1 वेंटिलेटर कम से कम 6.50 लाख रुपये का मिलता है।

डीआरडीओ ने बनाया सैनिटाइजेशन चैंबर और फेस प्रोटेक्शन मास्क

  • कोरोनावायरस से निपटने के लिए तैयार डिफेंस रिसर्च एंड डेवलपमेंट ऑर्गनाइजेसन (डीआरडीओ) ने एक फुल बॉडी डिसइन्फेक्शन चैंबर बनाया है। इसे सैनिटाइजेशन चैंबर भी कहा जा रहा है। साथ ही फेस प्रोटेक्शन मास्क भी बनाया है, जिसे हॉस्पिटल में सप्लाई भी किया जा रहा है। दिल्ली के अहमदनगर में डीआरडीओ की लेबोरेटरी ‘व्हीकल रिसर्च एंड डेवलपमेंट इस्टैबिलसमेंट’ने इस सैनिटाइजेशन चैंबर को डिजाइन किया है। डीआरडीओ ने कहा कि यह एक पोर्टेबल सिस्टम है। इस चैंबर में व्यक्ति को एक बार में पूरी तरह से सैनिटाइज किया जाएगा। इसमें एक पैडल के माध्यम से खुद को सैनिटाइज किया जाता है। चैंबर में पंप के माध्यम से हाइपो सोडियम क्लोराइड की तेज फुहार डाली जाती है। यह स्प्रे 25 सेकंड तक चलता है। इस चैंबर में व्यक्ति को अपनी आंखे बंद रखनी होती हैं। इस चैंबर में 700 लीटर का टैंक है। एक बार में करीब 650 लोगों को सैनिटाइज किया जा सकता है

एंटीबॉडी आधारित त्वरित रक्त जाँच शुरू कराये सरकारः ICMR DG

  • भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) महानिदेशक ने स्वास्थ्य सचिव को पत्र लिखकर उन्हें राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में कोरोना वायरस संक्रमण का पता लगाने के लिये एंटीबॉडी-आधारित त्वरित रक्त जांच शुरू करने के परामर्श का प्रसार करने को कहा है। एंटीबॉडी-आधारित त्वरित रक्त जांच के नतीजे 15-30 मिनट में आ जाते हैं। आईसीएमआर ने शनिवार को उन क्षेत्रों में एंटीबॉडी आधारित त्वरित रक्त जांच शुरू करने का परामर्श जारी किया, जो अत्यधिक प्रभावित हैं और जहां बाहर से बड़ी संख्या में प्रवासी पहुंचे हैं।

इंसान के साथ जानवरों में भी फैल रहा कोरोना वायरस, भारत ने जारी की एडवाइजरी

  • दुनियाभर में इस समय कोरोना वायरस का कहर जारी है। हाल में आई रिपोर्ट ने लोगों की चिंताओं को और बढ़ा दिया है। अब तक विश्व में लगभग 60 हजार लोगों की जान जा चुकी है। लोगों के साथ अब जानवर भी इस बीमारी की चपेट में आ रहे हैं। अमेरिका के न्‍यूयॉर्क राज्‍य में एक टाइगर को कोरोना वायरस से संक्रमित पाया गया है। दावा किया जा रहा है कि इंसानों से जानवरों बीच संक्रमण फैलने का यह पहला मामला है। विशेषज्ञों ने चेतावनी देते हुए कहा है कि अगर दुनिया के अन्य देशों में भी जानवरों में संक्रमण फैलता है तो स्थिति ज्यादा खराब हो सकती है। वहीं भारत ने पूरे देश में स्थित चिड़ियाघरों को एडवाइजरी जारी करते हुए अतिरिक्त सतर्कता बरतने के निर्देश जारी किया है।
  • न्‍यूयॉर्क के ब्रोन्‍क्‍स जू में एक मादा टाइगर में कोरोना वायरस के संक्रमण की पुष्टि हुई है। नादिया नाम के इस मलेशियाई टाइगर और तीन अन्‍य बाघों को सूखी खांसी आने के बाद उसकी कोरोना जांच की गई थी। इस जांच में नादिया को कोरोना पॉजिटिव पाया गया। ब्रोनक्स चिड़ियाघर के वाइल्डालाइफ कन्जरवेशन सोसाइटी ने एक बयान जारी करके इसकी जानकारी दी।

भारत ने भी चिड़ियाघरों को जारी की चेतावनी

  • भारतीय केंद्रीय चिड़ियाघर प्राधिकरण ने देश के सभी चिड़ियाघरों को चेतावनी जारी करते हुए कहा है कि वे अतिरिक्त सतर्कता बरतें और किसी भी असामान्य व्यवहार के लिए सीसीटीवी के माध्यम से जानवरों की सतत निगरानी करें।
  • विश्व पशु स्वास्थ्य संगठन ने पालतू जानवरों को घर के अंदर ही रखने को कहा
  • विश्व पशु स्वास्थ्य संगठन ने भी अपनी रिपोर्ट में कहा है कि इस बात का कोई सबूत नहीं है कि संक्रमित जानवर अपने द्वारा संक्रमण को और ज्यादा जानवरों में फैला सकते हैं। हालांकि उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि पालतू जानवरों के मालिक उन्हें जितना हो सके घरों के अंदर ही रखें।

पहले भी एक बिल्ली और दो कुत्तों को हो चुका है संक्रमण

  • बेल्जियम में मार्च के अंत में एक पालतू बिल्ली भी कोरोना वायरस से संक्रमित पाई गई थी। इसके अलावा हॉन्ग कॉन्ग में भी इसी तरह के दो मामले सामने आए थे, जहा दो कुत्ते कोरोना वायरस से संक्रमित मिले थे। इन सभी जानवरों के बारे में कहा गया था कि ये अपने मालिकों के संपर्क में आने के कारण संक्रमित हो गए थे।

:: पर्यावरण और पारिस्थितिकी ::

खनन और खनिज (विकास एवं विनियम) अधिनिययम 1957 में संशोधन

  • कुम्हारों को मिट्टी के बर्तन आदि बनाने के लिये मिट्टी के खनन और बारिश में आयी बाढ़ के कारण खेतों में जमा होने वाली बालू को हटाने के लिये किसानों को अब पर्यावरण नियमों के तहत मंजूरी लेने की बाध्यता को खत्म कर दिया गया है।
  • पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने खनन और खनिज (विकास एवं विनियम) अधिनिययम 1957 में संशोधन कर इस तरह की अन्य गतिविधियों के लिये पर्यावरण मंजूरी लेने से अब छूट दे दी है।
  • उल्लेखनीय है कि मौजूदा व्यवस्था में खनन संबंधी इस तरह की तमाम गतिविधियों के लिये पर्यावरण मंत्रालय से अनापत्ति प्रमाण पत्र लेना अपेक्षित है।

क्या किया गया संशोधन

  • कुम्हारों को मिट्टी के बर्तन आदि बनाने के लिये बिना मशीनों का इस्तेमाल किये हाथ से मिट्टी या बालू की उनकी प्रथाओं के अनुसार निकासी (मैनुअल खनन) के लिए भी अब पर्यावरण मंजूरी लेना जरूरी नहीं होगा। इस दायरे में मिट्टी के खपरैल (मिट्टी की टाइल) बनाने के लिये साधारण मिट्टी या बालू के गैर मशीनी खनन को भी शामिल किया गया है।इन नियमों में संशोधन को जरूरी बताते हुये दलील दी कि इस प्रकार की आजीविका से जुड़ी पारंपरिक गतिविधियों से संबद्ध समुदायों ने ऐसी गैरजरूरी मंजूरी लेने की अनिवार्यता को खत्म करने का अनुरोध किया था। इनके प्रतिवेदनों पर विचार विमर्श के बाद नियमों में बदलाव किया गया है। इसमें अंतरज्वारीय क्षेत्रों में रहने वाले समुदायों की हाथ से चूना पत्थर के खनन में पर्यावरण मंजूरी को हटाने की मांग भी शामिल थी।
  • किसानों को हर साल बारिश जनित बाढ़ के कारण खेतों में आयी बालू को हटाने के लिये खनन नियमों के तहत पर्यावरण मंजूरी लेने की जरूरत को भी समाप्त कर दिया गया है। इतना ही नहीं ग्राम पंचायत की जमीन से बालू या मिट्टी के व्यक्तिगत उपयोग या गांव में सामुदायिक कार्य के लिये पूर्व प्रचलित प्रथाओं के अनुसार खनन को भी पर्यावरण मंजूरी के दायरे से बाहर कर दिया गया है।
  • अब गांव के तालाब या अन्य जलस्रोत से गाद हटाने और मनरेगा सहित तमाम सरकारी योजनाओं द्वारा प्रायोजित ग्रामीण सड़क, तालाब या बांध बनाने के लिये, सड़क और पाइपलाइन बिछाने जैसे कामों में मिट्टी की निकासी और आपदा प्रबंधन के तहत जलस्रोतों से गाद निकालने के कार्यों को भी पर्यावरण मंजूरी की बाध्यता से मुक्त किया गया है।
  • इसके अलावा ग्रामीण क्षेत्रों के लिये सिंचाई और पेयजल के लिये कुंओं की खुदाई और ऐसी इमारतों, जिनके निर्माण के लिये पर्यावरीण अनापत्ति अपेक्षित नहीं है, की नींव खोदने से पहले अब पर्यावरण मंजूरी लेना जरूरी नहीं होगा।

लॉकडाउन से कार्बन उत्सर्जन में ऐतिहासिक गिरावट

  • कोरोना वायरस के संक्रमण के कारण अमेरिका, भारत समेत सैकड़ों देशों में लॉकडॉउन के कारण भले ही अर्थ व्यवस्थाएं थम गई हों। लेकिन दुनिया भर में बड़े पैमाने पर औद्योगिक और मानवीय गतिविधियां कम होने से पिछले कुछ ही दिनों में पर्यावरण में बेहतरीन सुधार आया है। पूरे विश्व में कार्बन उत्सर्जन इस साल इतना अधिक कम हो गया है जितना 75 साल पहले द्वितीय विश्व युद्ध के बाद हुआ था। कार्बन उत्सर्जन के आंकड़े जुटाने वाले विश्व भर के वैज्ञानिकों के अनुसार साल दर साल इसी रफ्तार से कार्बन उत्सर्जन 5 फीसद तक कम हो सकता है।

पांच फीसद कम हो सकता है कार्बन उत्‍सर्जन

  • वैश्विक कार्बन उत्सर्जन का हिसाब रखने वाले ग्लोबल कार्बन प्रोजेक्ट के चेयरमैन रॉब जैक्सन का कहना है कि 2008 के वित्तीय संकट के बाद 1.4 फीसद कार्बन उत्सर्जन में कमी आई थी जो अब पांच फीसद तक हो सकती है। कैलीफोर्निया की स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी अर्थ सिस्टम साइंस के प्रोफेशर जैक्सन ने कहा कि इस साल कार्बन उत्सर्जन में पांच फीसद या उससे भी ज्यादा की गिरावट आश्चर्यजनक होने वाली है। ऐसा द्वितीय विश्व युद्ध के बाद से नहीं देखा गया है।

कभी नहीं दिखा इतना अच्‍छा प्रभाव

  • जैक्सन ने कहा कि कितने ही बड़े संकट आए हों, चाहे सोवियत संघ का विघटन हो, तेल संकट हो या बैंकों के कर्ज का संकट हो, कभी भी उसका पर्यावरण पर इतना अच्छा प्रभाव नहीं पड़ा है। लेकिन इस लॉकडाउन ने औद्योगिक इकाइयों, एयरलाइनों और सभी प्रकार की मानवीय गतिविधियों की रोकथाम कर दी है। नतीजतन, पिछले 50 सालों में किसी संकट ने कार्बन उत्सर्जन पर इतना असर नहीं डाला जितना कोरोना वायरस संक्रमण की रोकथाम के लिए विभिन्न देशों में किए गए लॉकडाउन ने किया है।

अगले साल फिर बिगड़ जाएंगे हालात

  • हालांकि इंग्लैंड की एक्सटर यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिक पीयरे फ्रेडलिंगस्टन का कहना है कि पर्यावरण में यह सुधार कुछ ही अरसे के लिए है। चूंकि कोविड-19 महामारी के बाद विश्व में आर्थिक संकट से निपटने के लिए दुनिया फिर से अपनी पुरानी दिनचर्या पर चल देगी। अगले साल तक कार्बन उत्सर्जन की स्थिति फिर वहीं की वहीं पहुंच जाएगी।

लॉकडाउन से यमुना हो गया निर्मल

  • यमुना की अविरलता और निर्मलता के लिए केंद्र व दिल्ली सरकार के प्रयास बीते करीब तीन दशकों से बेशक कामयाब न हो सके हों, लेकिन 10 दिन के लॉकडाउन के दौरान नदी ने खुद ही अपने को साफ कर लिया है।
  • नदी का जल नीला होने साथ ही नजदीक जाने पर उसकी तली भी इस वक्त दिख रही है। लॉकडाउन से पहले काले पानी से लबालब नदी दूर से नाले सरीखी नजर आती थी। यानी यमुना ने खुद को पुनर्जीवित करने का अपना मॉडल पेश कर दिया है।
  • कोरोना वायरस से पैदा हुए संकट के इस दौर में विशेषज्ञ नदी की अपने स्तर पर की जाने वाली साफ-सफाई को भविष्य के मॉडल के तौर पर देख रहे हैं, जिसके सहारे सभी नदियों को पुनर्जीवित करना संभव हो सकेगा।
  • विशेषज्ञों का कहना है कि अगर केंद्र व राज्य सरकारों ने लॉकडाउन के दौरान नदी के इस नैसर्गिक मॉडल को समझ लिया और उसके अनुसार योजनाएं बनाईं तो बगैर बड़े पैमाने पर मानवीय व वित्तीय संसाधन लगाए नदियों को साफ-सुथरा रखा जा सकेगा। इससे देश की बड़ी आबादी की जल संकट की समस्या भी दूर होगी।
  • उधर, केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) और दिल्ली जल बोर्ड इस तरह के बदलावों का अध्ययन करने की योजना तैयार कर रहा है। सीपीसीबी के एक वरिष्ठ वैज्ञानिक ने बताया कि बोर्ड जल्द ही नदी से सैंपल लेगा। इसके आधार पर देखा जाएगा कि लॉकडाउन का नदी की सेहत पर असर क्या रहा है। हालांकि, इस तरह की एक स्टडी बोर्ड वायु की गुणवत्ता पर पहले से कर रहा है। दूसरी तरफ, दिल्ली जल बोर्ड के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि नदी से सैंपल लिया जाएगा। इसके आधार पर बोर्ड भविष्य में नदी को स्वच्छ रखने का खाका तैयार करेगा।

औद्योगिक वेस्ट और सीवर का लोड नहीं होने का परिणाम

इस वक्त औद्योगिक वेस्ट शून्य है। फिर, बाजार बंद होने से सीवर का लोड भी कम हुआ है। साथ ही, नदी के जल में इंसानों का दखल कम है। इससे नदी अपनी गाद को तली तक छोड़ बह रही है। इसका मिला-जुला असर साफ-सुथरे पानी के तौर पर दिख रहा है। नदी के खुद को पुनर्जीवित करने के नैसर्गिक मॉडल का भविष्य में इस्तेमाल किया जा सकता है। नजफगढ़ और शाहदरा ड्रेन में कॉस्ट्रक्टिव वेटलैंड बनाकर दिल्ली में नदी की बड़ी समस्या दूर की जा सकेगी।

दिल्ली के 33 औद्योगिक क्षेत्रों में एक लाख से ज्यादा फैक्टरियां हैं। हालांकि यहां सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) लगे हुए हैं, लेकिन बड़ी मात्रा में औद्योगिक कचरा सीधे नालों में छोड़ दिया जाता है। इससे नदी प्रदूषित होती है। इस वक्त औद्योगिक कचरा एकदम नहीं निकल रहा है। इससे नदी की सेहत बेहतर हुई है।

भविष्य के लिए बेसलाइन हो सकते हैं 21 दिन

  • करीब तीन दशक पहले यमुना को साफ करने के लिए यमुना एक्शन प्लान लागू हुआ था। इस बीच करोड़ों-करोड़ रुपये इस पर खर्च भी किए गए, लेकिन नदी बद से बदतर होती गई। पिछले दस दिन के लॉकडाउन ने इसे साफ-सुथरा कर दिया है। सरकारों व उसकी एजेसियों के लिए यह 21 दिन बेसलाइन की तरह हो सकते हैं। केवल यमुना ही नहीं, पूरे देश की नदियों का पानी इस बीच साफ हुआ है।
  • आंकड़ों में यमुना
  • नदी की कुल लंबाई का महज दो फीसदी हिस्सा दिल्ली में होता है प्रवाहित, लेकिन 70 फीसदी प्रदूषण दिल्ली से।
  • दिल्ली से निकलता है 3267 मिलियन लीटर प्रतिदिन (एमएलडी) सीवर, जबकि शोधन क्षमता करीब 2400 एमएलडी।
  • शोधन क्षमता के 37 फीसदी का नहीं होता इस्तेमाल।
  • 60-70 एमएलडी होता है औद्योगिक वेस्ट।
  • दिल्ली के 16 नालों से यमुना में पहुंचती है गंदगी, नजफगढ़ और शाहदरा नाले का बड़ा रोल।
  • नजफगढ़ नाले से आता है 60 फीसदी सीवेज और 45 फीसदी बीओडी।

केन्द्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड

  • केन्द्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी), एक सांविधिक संगठन है। इसका गठन जल (प्रदूषण निवारण एवं नियंत्रण) अधिनियम, 1974 के अधीन सितंबर, 1974 में किया गया था। इसके अलावा, केन्द्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को वायु (प्रदूषण निवारण एवं नियंत्रण) अधिनियम,1981 के अधीन भी शक्तियां और कार्य सौंपे गए।

:: विविध ::

AFC एशियाई कप की मेजबानी के लिए भारत ने पेश किया आधिकारिक दावा

  • भारत ने 2027 में होने वाली एएफसी एशियाई कप फुटबॉल टूर्नामेंट की मेजबानी के लिए अपना दावा पेश किया है। अखिल भारतीय फुटबॉल महासंघ (एआईएफएफ) के एक अधिकारी ने रविवार को इसकी पुष्टि की। अगर भारत को मेजबानी मिल जाती है तो यह पहला अवसर होगा जबकि वह महाद्वीप की सबसे बड़ी खेल प्रतियोगिता का आयोजन करेगा।
  • एएफसी के अगले साल के शुरू में मेजबान देश की घोषणा करने की संभावना है। भारत के अलावा अभी तक सऊदी अरब ने ही 2027 में एशियाई कप की मेजबानी करने की इच्छा जताई है। सऊदी अरब ने तीन बार यह टूर्नामेंट जीता है, लेकिन उसने कभी इसकी मेजबानी नहीं की। भारत ने इससे पहले 2023 एएफसी एशिया कप की मेजबानी के लिए भी दावा किया था, लेकिन अक्टूबर 2018 में वह इस दौड़ से हट गया था। बाद में थाईलैंड और दक्षिण कोरिया ने भी नाम वापस ले लिया था, जिसके बाद चीन को मेजबानी मिली।

:: प्रिलिम्स बूस्टर ::

  • कोरोना वायरस के संभावित इलाज से चर्चा में रहे सेनोलाइटिक्स (Senolytics) दवाओं का प्रयोग किस लिए किया जाता है? (बढ़ती उम्र को रोकने के लिए-एंटी एजिंग और कोशिकाओं को मरने से बचाने)

  • भारत के राष्ट्रपति, उपराष्‍ट्रपति, राज्‍यपाल समेत सांसदों के वेतन में कटौती हेतु किस अधिनियम में  संशोधन किए जाएंगे? (वेतन, आवंटन और पेंशन और संसदीय अधिनियम, 1954)

  • हाल ही में चर्चा में रहे विश्व पशु स्वास्थ्य संगठन (OIE) की स्थापना कब की गई थी एवं इसका मुख्यालय कहाँ है? (1924, पेरिस- फ्रांस)

  • कोरोना वायरस से उत्पन्न चुनौतियों में जरूरतमंदों को राहत पहुंचाने के लिए किस राज्य के खिलाड़ियों के द्वारा ‘गेमचेंजर’कोष की शुरुआत की गई है? (महाराष्ट्र)

  • गरीब लोगों को सस्ती दरों पर जेनेरिक दवा उपलब्ध कराने वाली ‘प्रधानमंत्री जन औषधि योजना’ की शुरुआत कब की गई थी? (2015)

  • हाल ही में कोरोनावायरस की त्वरित एवं सघन जांच के लिए भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (ICMR) के द्वारा जांच की किस प्रणाली को अपनाने की अनुशंसा की गई है? (एंटीबॉडी-आधारित त्वरित रक्त जांच प्रणाली)

  • हाल ही में चर्चा में रहे ‘केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड’(CPCB)  स्थापना किस अधिनियम के तहत की गई थी? (जल प्रदूषण निवारण एवं नियंत्रण अधिनियम, 1974)

  • हाल ही में किस अधिनियम में संशोधन करके बालू या मिट्टी के व्यक्तिगत उपयोग या गांव में सामुदायिक कार्य के लिए खनन अनुमति से छूट प्रदान की गई है? (खनन और खनिज, विकास एवं विनियम अधिनिययम 1957)

  • चर्चा में रहे गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (NBFC) का पंजीकरण किस अधिनियम के तहत किया जाता है? (कंपनी अधिनियम, 1956)

  • हाल ही में चर्चा में भारतीय उद्योग परिसंघ (CII) की स्थापना कब हुई एवं इसका मुख्यालय कहाँ है? (1985, नई दिल्ली)

  • तबलीगी जमात से जुड़े विदेशी नागरिकों पर किस अधिनियम के तहत कार्यवाई की जाएगी? (विदेशी एक्ट 1946)

 

 

 

स्रोत साभार: Dainik Jagran (Rashtriya Sanskaran), Dainik Bhaskar (Rashtriya Sanskaran), Rashtriya Sahara (Rashtriya Sanskaran) Hindustan Dainik (Delhi), Nai Duniya, Hindustan Times, The Hindu, BBC Portal, The Economic Times (Hindi & English), PTI, PIB

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