(दैनिक समसामयिकी और प्रिलिम्स बूस्टर) यूपीएससी और सभी राज्य लोक सेवा आयोग परीक्षाओं के लिए हिंदी में समाचार पत्रों का संकलन (06 मई 2020)

दैनिक समसामयिकी और प्रिलिम्स बूस्टर


(दैनिक समसामयिकी और प्रिलिम्स बूस्टर) यूपीएससी और सभी राज्य लोक सेवा आयोग परीक्षाओं के लिए हिंदी में समाचार पत्रों का संकलन (06 मई 2020)


:: राष्ट्रीय समाचार ::

वंदे भारत मिशन

  • लॉकडाउन के दौरान देश में जगह-जगह फंसे मजदूरों को घर ले जाने के लिए श्रमिक स्पेशल ट्रेनों को चलाने के बाद अब सरकार गुरुवार से विदेश में फंसे लाखों भारतीयों की 'घरवापसी' का महाअभियान चलाने वाली है। पहले 7 दिनों में 12 देशों से करीब 15 हजार भारतीयों को स्पेशल फ्लाइट्स से लाया जाएगा। इस महाअभियान को 'वंदे भारत मिशन' नाम दिया गया है। इसके अलावा नेवी को भी इस महाअभियान में उतार दिया गया है। मालदीव से 1000 भारतीयों को लाने के लिए इंडियन नेवी ने मंगलवार को ही 'समुद्र सेतु' अभियान लॉन्च कर दिया है। यानी सरकार भारतीयों की वापसी के लिए नभ और जल के रास्ते बड़ा अभियान चलाने जा रही है।

12 देश, 15 हजार भारतीय, 64 स्पेशल फ्लाइट

  • स्पेशल फ्लाइट्स के जरिए विदेश में फंसे भारतीयों को घर लाने के लिए 7 मई यानी गुरुवार से स्पेशल फ्लाइट्स शुरू होने वाली हैं। 7 मई से 7 दिनों तक 12 देशों में फंसे करीब 15 हजार भारतीयों को एयर इंडिया की 64 स्पेशल फ्लाइट्स के जरिए लाया जाएगा। फंसे हुए लोगों से फ्लाइट का किराया भी लिया जाएगा और इसे तय कर दिया गया है।

इन देशों से भारतीयों को लाने के लिए स्पेशल फ्लाइट

  • अमेरिका, ब्रिटेन, बांग्लादेश, मलेशिया, फिलीपिंस, सिंगापुर, यूएई, सऊदी अरब, कतर, बहरीन, कुवैत और ओमान।

कब, कहां से लाए जाएंगे भारतीय

  • पहले हफ्ते में खाड़ी से 26, साउथ ईस्ट एशिया से 17 और अमेरिका, ब्रिटेन और बांग्लादेश से 7-7 स्पेशल फ्लाइटों के जरिए भारतीयों की घरवापसी होगी। पहले दिन आबू धाबी, दुबई, रियाद, दोहा, लंदन, सैन फ्रैंसिस्को, सिंगापुर, कुआलालंपुर, ढाका और मनीला से 2300 भारतीयों को लाया जाएगा। दूसरे दिन यानी 8 मई को बहरीन और कुवैत से करीब 2 हजार भारतीयों को लाया जाएगा।
  • तीसरे दिन भी इतनी ही तादाद में भारतीयों को लाया जाएगा। चौथे दिन करीब वॉशिंगटन समेत कई जगहों से 1800 भारतीयों को लाया जाएगा। इसी तरह पांचवें दिन 2 हजार से थोड़े ज्यादा भारतीयों को लाया जाएगा। इसमें सऊदी अरब में रह रहे भारतीय भी शामिल होंगे। छठे दिन 2500 भारतीयों और सातवें दिन करीब 2 हजार भारतीयों को लाने का प्लान है।

मालदीव से 1000 भारतीयों के लिए 'सेतु समुद्र' अभियान

  • द्वीपीय देश मालदीव में फंसे करीब 1 हजार भारतीयों को लाने के लिए इंडियन नेवी का 'सेतु समुद्र' अभियान मंगलवार से शुरू हो चुका है। नेवी अपने युद्धपोतों आईएनएस जलश्व और आईएनएस मगर को मालदीव भेज रही है। दोनों क्रमशः 8 मई और 10 मई को वहां पहुंचेंगे। इसके अलावा नेवी ने 12 अन्य युद्धपोतों को स्टैंडबाइ में रखा है ताकि जरूरत पड़ने पर खाड़ी में फंसे भारतीय नागरिकों को बड़े पैमाने पर घर लाया जा सके।

देखो अपना देश

चर्चा में क्यों?

  • पर्यटन मंत्रालय ने 'देश देखो अपना' लोगो डिजाइन प्रतियोगिता माईगो प्लेट फॉर्म पर शुरू की। इस प्रतियोगिता का उद्देश्य देश के नागरिकों के रचनात्मक विचारों से निकलने वाले 'देश देखो अपना'अभियान के लिए लोगो तैयार करवाना है।

क्या है देखो अपना देश?

  • देश देखो अपनापर्यटन मंत्रालय की एक पहल है जिसे 24 जनवरी 2020 को ओडिशा के कोणार्क में केंद्रीय पर्यटन मंत्री (स्वतंत्रण प्रभार) श्री प्रहलाद सिंह पटेल ने माईगो मंच पर एक समारोह के दौरान लॉन्च किया था। पर्यटन मंत्रालय की यह पहल 15 अगस्त 2019 को लाल किले की प्राचीर से की गई माननीय प्रधानमंत्री की अपील के अनुरूप है, जिसमें प्रत्येक नागरिक को घरेलू पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए वर्ष 2022 तक कम से कम 15 स्थलों की यात्रा करने के लिए कहा गया है। भारत में, इसका उद्देश्य पर्यटकों की रुचि और पर्यटन की रफ्तार को बढ़ाना है ताकि स्थानीय अर्थव्यवस्था को विकसित करने में मदद मिल सके।

एकीकृत मृदा पोषक तत्व प्रबंधन के लिए किसान आंदोलन का आह्वान

चर्चा में क्यों?

  • केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण, ग्रामीण विकास तथा पंचायती राज मंत्री श्री नरेंद्र सिंह तोमर ने एकीकृत मृदा पोषक तत्व प्रबंधन को किसान आंदोलन में तब्‍दील करने का आह्वान किया है।
  • मृदा स्वास्थ्य कार्यक्रम की प्रगति की समीक्षा करते हुए उन्होंने जैव एवं जैविक उर्वरकों के बढ़ते उपयोग और रासायनिक उर्वरकों के कम इस्‍तेमाल के लिए मिशन मोड में जागरूकता अभियान लॉन्च करने का निर्देश दिया, जो पूरी सख्ती के साथ मृदा स्वास्थ्य कार्ड की सिफारिशों पर आधारित होने चाहिए।
  • वर्ष 2020-21 के दौरान कार्यक्रम का प्रमुख फोकस देश के सभी जिलों को कवर करने वाले 1 लाख से भी अधिक गांवों के किसानों के लिए जन जागरूकता कार्यक्रम पर होगा। श्री तोमर ने कृषि में शिक्षा प्राप्त करने वाले युवाओं, महिला स्वयं सहायता समूहों, एफपीओ, इत्‍यादि द्वारा ग्राम स्तरीय मृदा परीक्षण प्रयोगशालाओं (लैब) की स्थापना करने की वकालत की।
  • एसएचसी योजना के तहत समुचित कौशल संवर्द्धन के बाद रोजगार सृजन सुनिश्चित करने पर फोकस किया जाएगा, जैसी कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी की मंशा है। जिलों में उन स्थानों पर, जहां प्रयोगशालाएं अभी नहीं हैं, वहां मृदा परीक्षण सुविधाएं स्थापित करने पर उन्होंने विशेष जोर दिया। सुरक्षित पौष्टिक भोजन के लिए भारतीय प्राकृत कृषि पद्धति सहित उर्वरकों के जैविक परीक्षण और जैविक खेती को बढ़ावा देने के लिए मिट्टी परीक्षण पर आधारित व्यापक अभियान पंचायत राज, ग्रामीण विकास और पेयजल तथा स्वच्छता विभागों के साथ मिलकर चलाया जाएगा।

क्या है राष्ट्रीय मृदा स्वास्थ्य कार्यक्रम?

  • राष्ट्रीय मृदा स्वास्थ्य कार्यक्रम और उसकी उर्वरता योजना इन उद्देश्यों के साथ केंद्र प्रायोजित योजना है, जिसे वर्ष 2014-15 के दौरान प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी के मार्गदर्शन में शुरू किया गया है: मृदा स्‍वास्‍थ्‍य को बनाए रखना तथा कृषि लागत को कम करने हेतु किसानों की सहायता के लिए उर्वरकों के विवेकपूर्ण उपयोग को बढ़ावा देना; उर्वरक प्रक्रिया में पोषक तत्वों की कमी को दूर करने के लिए देश के सभी किसानों को प्रत्येक 2 वर्ष के अन्तराल पर मृदा स्वास्थ्य कार्ड जारी करना; क्षमता निर्माण, कृषि छात्रों की भागीदारी और भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर)/राज्य कृषि विश्वविद्यालयों (एसएयू) के साथ प्रभावी लिंकेज के माध्यम से मृदा परीक्षण प्रयोगशालाओं (एसटीएल) के कामकाज को सुदृढ़ करना; राज्यों में समान रूप से नमूना लेने, मृदा विश्लेषण और उर्वरक संस्तुतियां प्रदान करने हेतु मानकीकृत प्रक्रियाओं के साथ मृदा की उर्वरता संबंधी बाधाओं का निदान; पोषक तत्व उपयोग दक्षता बढ़ाने के लिए पोषक तत्व प्रबंधन का विकास व संवर्धन; एकीकृत पोषक तत्व प्रबंधन प्रक्रियाओं को बढ़ावा देने के लिए जिला और राज्य स्तर के अधिकारियों और प्रगतिशील किसानों की क्षमता का निर्माण करना; मृदा स्वास्थ्य को बनाए रखने के लिए क्षारीयता, वृहत-पोषक तत्व (नाइट्रोजन, फास्फोरस, पोटैशियम) और सूक्ष्म पोषक तत्व (जिंक, लौह, तांबा, मैंगनीज तथा बोरॉन) जैसे महत्वपूर्ण मापदंडों का विश्लेषण।

योजना की प्रमुख उपलब्धियां :

  • पहले चक्र (2015-17) में 10.74 करोड़ और दूसरे चक्र (2017-19) में 9.33 करोड़ मृदा स्वास्थ्य कार्ड किसानों को वितरित किए गए हैं। चालू वित्त वर्ष में अब तक सवा दो करोड़ मृदा स्वास्थ्य कार्ड वितरित किए जा चुके हैं।
  • वर्ष 2019-20 में मॉडल विलेज पायलट प्रोजेक्ट में किसानों को 12.40 लाख मृदा स्वास्थ्य कार्ड वितरित किए गए हैं।
  • वर्ष 2019-20 के दौरान मृदा स्वास्थ्य प्रबंधन योजना के तहत 166 मृदा परीक्षण प्रयोगशालाओं को मंजूरी दी गई है और अब तक 122 करोड़ रुपये से भी ज्यादा की राशि जारी की गई है।

:: अंतर्राष्ट्रीय समाचार ::

‘लॉस्ट एट होम रिपोर्ट -Lost at Home’: यूनिसेफ

चर्चा में क्यों?

  • संयुक्त राष्ट्र की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि वर्ष 2019 में भारत में प्राकृतिक आपदाओं, संघर्ष और हिंसा के चलते 50 लाख से ज्यादा लोग आंतरिक रूप से विस्थापित हुए थे। इस अवधि के दौरान विश्व में आंतरिक रूप से हुए नए विस्थापनों की यह सबसे बड़ी संख्या थी। भारत के बाद फिलीपीन, बांग्लादेश और चीन में विस्थापितों की संख्या सबसे अधिक थी। संयुक्त राष्ट्र बाल कोष (यूनिसेफ) द्वारा प्रकाशित लॉस्ट एट होम रिपोर्ट में कहा गया कि 2019 में करीब 3.3 करोड़ नए विस्थापन रिकॉर्ड किए गए जिनमें से 2.5 करोड़ विस्थापन प्राकृतिक आपदा के कारण और 85 लाख विस्थापन संघर्ष एवं हिंसा की वजह से थे।

रिपोर्ट के मुख्य बिंदु

  • इस रिपोर्ट के मुताबिक कुल विस्‍थापितों में से 1.2 करोड़ बच्चे शामिल थे जिनमें से 38 लाख बच्चे संघर्ष एवं हिंसा के कारण विस्थापित हुए और 82 लाख बच्चे मौसम संबंधी आपदाओं के चलते विस्थापित हुए। रिपोर्ट में कहा गया है कि संघर्ष एवं हिंसा की तुलना में प्राकृतिक आपदाओं के कारण ज्यादा विस्थापित हुए। 2019 में करीब एक करोड़ नए विस्थापन पूर्वी एशिया और प्रशांत में हुए जबकि इतनी ही संख्या में दक्षिण एशिया में भी लोगों को विस्थापित होने का दंश सहना पड़ा।
  • इस रिपोर्ट में कहा गया है कि वर्ष 2019 में भारत, फिलीपींस, बांग्लादेश और चीन को प्राकृतिक आपदाएं झेलीं। इसकी वजह से लाखों लोग विस्थापित हुए जो वैश्विक आपदा के कारण हुए विस्थापनों का 69 फीसद है। इस रिपोर्ट में कहा गया है कि दुनिया भर में आपदा के कारण हुए करीब 82 लाख बच्‍चों को भी विस्‍थापित होना पड़ा था। भारत के अंदर ही नए आंतरिक विस्थापनों की कुल संख्या 50,37,000 रही जिसमें 50,18,000 प्राकृतिक आपदाओं के कारण और 19,000 लोगों का विस्थापन संघर्ष एवं हिंसा के चलते हुआ।
  • फिलीपींस में प्राकृतिक आपदाओं, संघर्ष एवं हिंसा के चलते 42.7 लाख लोग भीतरी रूप से विस्थापित हुए जबकि बांग्लादेश में यह संख्या 40.8 लाख और चीन में 40.3 लाख थी। इसमें कहा गया कि आज पहले से कहीं ज्यादा बच्चे अपने ही देश में विस्थापित हो गए। 2019 के अंत तक कुल 4.6 करोड़ लोग संघर्ष एवं हिंसा के कारण आंतरिक रूप से विस्थापित हुए। इस रिपोर्ट में ये भी कहा गया है कि करीब 1.9 करोड़ बच्‍चों को वर्ष 2019 में संघर्ष एवं हिंसा के चलते अपने ही देश के भीतर विस्थापित होने का दंश सहना पड़ा। ये आंकड़े किसी भी अन्य साल के मुकाबले ज्यादा हैं। यह उन्हें कोविड-19 के वैश्विक प्रसार के प्रति ज्यादा संवेदनशील बनाता है।
  • संयुक्त राष्ट्र एजेंसी में कोविड-19 को लेकर भी चेतावनी दी गई है। इसमें इस वैश्विक महामारी को गंभीर बताया गया है। इसमें कहा गया है कि अपने घरों एवं समुदायों से दूर हुए ये बच्चे विश्व में अधिक संवेदनशील लोगों में से हैं। कोविड-19 उनके जीवन के लिए और नुकसान एवं अनिश्चितता लेकर आई है। इसके मुताबिक विस्‍थापना का दंश झेल रहे बच्‍चों और अन्‍य लोगों को इसकी वजह से ऐसी जगहों पर रहना पड़ता है जहां पर भीड़-भाड़ होती है। अकस ये अस्‍थाई शिविर होते हैं जहां पर्याप्त साफ-सफाई और स्वास्थ्य सेवाओं का भी अभाव रहता है।
  • ऐसी जगहों पर न तो विश्‍व स्‍वास्‍थ्‍य संगठन द्वारा बताई गई एक दूसरे व्‍यक्ति से दूरी बनाए रखने के नियमों पालन हो सकता है और न ही दूसरे नियमों का यहां पर पालन किया जा सकता है। यूनिसेफ की कार्यकारी निदेशक हेनरीटा फोर के मुताबिक जब जब इस तरह की वैश्विक महामारी का संकट आता है तब ऐसे ही बच्चे अधिक संवेदनशील होते हैं। इस रिपोर्ट में आंतरिक रूप से विस्थापित बच्चों के सामने आने वाले खतरों का जिक्र भी किया गया है। इनमें बाल श्रम, बाल विवाह, बाल तस्करी आदि शामिल हैं।

इंटरनेशनल ऑर्गनाइजेशन फॉर माइग्रेशन (IOM)

  • ग्लोबल माइग्रेशन एजेंसी ने चेतावनी देते हुए कहा है कि आने वाला समय अफगानिस्तान के लिए काफी मुश्किल भरा हो सकता है। कोरोना वायरस के पॉजिटिव मामलों की संख्या बताती है कि अफगानिस्तान में दुनिया के किसी भी देश के मुकाबले सबसे ज्यादा संक्रमण दर हो सकती है।

रिपोर्ट के मुख्य बिंदु

  • रिपोर्ट में कहा गया है कि युद्धग्रस्त देश में संघर्ष का विस्तार कोरोना वायरस की प्रतिक्रिया को बढ़ा रहा है। इंटरनेशनल ऑर्गनाइजेशन फॉर माइग्रेशन (IOM) ने कहा कि लगभग पांच मई तक अफगानिस्तैान में कोरोना वायरस के 2,900 पुष्टि मामले थे, जबकि इस दौरान 90 लोगों की मौत भी हुई है। वहीं, अफगान अधिकारियों ने जोर दिया है कि तत्काल किए जाने वाले उपायो के अभाव में देश की कुल 3.5 करोड़ की आबादी में से 80 प्रतिशत लोग संक्रमित हो सकते हैं।
  • पॉजिटिव मामलों की संख्या बताती है कि अफगानिस्तान में दूसरे देशों के मुकाबले सबसे अधिक कोरोना वायरस संक्रमण की दर हो सकती है। हाल के दिनों में, 50 से 70 लाख की आबादी वाले काबुल के 500 व्यक्तियों के नमूनों में संक्रमण की दर 50 प्रतिशत की थी।
  • वैश्विक एजेंसी ने यह भी चेतावनी दी थी कि कोरोना वायरस महामारी के खिलाफ लड़ाई के बीच जनवरी से ईरान और पाकिस्तान से लौटे 2 लाख 71 हजार से अधिक लोगों को सुरक्षित रूप से संभालने में अफगानिस्तान संघर्ष कर रहा है। संयुक्त राष्ट्र के शरणार्थियों के लिए उच्चायुक्त (UNHCR) के कार्यालय ने कहा कि कोरोना वायरस के एहतियाती उपायों के कारण ईरान और पाकिस्तान से आए अफगान शरणार्थी को निलंबित कर दिया गया है।

क्या है इंटरनेशनल ऑर्गनाइजेशन फॉर माइग्रेशन (IOM)?

  • माइग्रेशन के सन्दर्भ में इंटरनेशनल ऑर्गनाइजेशन फॉर माइग्रेशन (IOM) अंतर सरकारी संस्था एक शीर्ष संस्था है। इसकी स्थापना 1951 में हुई एवं इसका मुख्यालय स्विजरलैंड में स्थित है।

:: भारतीय राजव्यवस्था ::

सहकारी बैंकों के कर्ज की वसूली को संसद कानून बनाने में सक्षम

चर्चा में क्यों?

  • सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को कहा कि बैंकिंग से संबंधित गतिविधियों से जुड़े सहकारी बैंक ‘बैंकिंग कंपनी’ की परिभाषा के दायरे में आते हैं और प्रतिभूतियां एवं वित्तीय संपदाओं के पुनर्गठन और प्रतिभूति हित लागू करने संबंधी कानून (सरफेसी), 2002 के तहत संसद कर्ज वसूली की प्रक्रिया निर्धारित करने का कानून बनाने में सक्षम है। सरफेसी कानून, 2002 बैंकों और वित्तीय संस्थाओं को उन कर्जदारों की रिहायशी और व्यावसायिक संपत्तियों की नीलामी की अनुमति देता है जो कर्ज लौटाने में असफल हो जाते हैं। यह बैंकों को वसूली और पुनर्गठन के जरिये गैर निष्पादित संपत्तियां (एनपीए) कम करने में मदद करता है।

क्या कहा पांच सदस्यीय संविधान पीठ ने?

  • जस्टिस अरुण मिश्र की अध्यक्षता वाली पांच सदस्यीय संविधान पीठ ने फैसले में कहा, ‘हमारी राय में यह नहीं कहा जा सकता कि संविधान निर्माताओं ने बैंकिंग के मायने को एक विशेष प्रकार की परिभाषा तक सीमित रखा था, जैसा बैंकिंग नियमन कानून, 1949 में है। बैंकिंग शब्द प्रथम सूची की प्रविष्टि-45 में शामिल है और रुस्तम कावासजी कूपर मामले में 1970 के फैसले ने सहकारी बैंकों की बैंकिंग गतिविधियों के प्रथम सूची की प्रविष्टि-45 के दायरे में आने को लेकर संदेह की कोई गुंजाइश ही नहीं छोड़ी।’ संविधान पीठ के अन्य सदस्यों में जस्टिस इंदिरा बनर्जी, जस्टिस विनीत सरन, जस्टिस एमआर शाह और जस्टिस अनिरुद्ध बोस शामिल थे। पीठ ने कहा कि सहकारी बैंकों की बैंकिंग गतिविधियों को देखते हुए इन प्रविष्टियों को पूरी तरह से प्रभावी बनाना होगा।
  • पीठ ने 159 पेज के फैसले में कह, राज्य कानून के तहत पंजीकृत सहकारी समितियों द्वारा संचालित सहकारी बैंक नियमन व परिसमापन के संदर्भ में संविधान की सातवीं अनुसूची की प्रथम सूची की प्रविष्टि के दायरे से बाहर हैं, लेकिन बैंकिंग गतिविधियों से संबंधित कार्यो में संलिप्त सहकारी बैंक बैंकिंग विनियमन कानून, 1949 की धारा 5(सी) व 56(ए) में परिभाषित ‘बैंकिंग कंपनी’ के दायरे में आते हैं। पांच सदस्यीय संविधान पीठ ने फैसले में तीन न्यायाधीशों की पीठ द्वारा भेजे मामले का जवाब दिया है।

क्या है सरफेसी कानून, 2002?

  • सरफेसी कानून बैंकों और अन्य वित्तीय संस्थानों को यह अधिकार देता है कि फंसे कर्जों की वसूली के लिए रेहन रखी गई आवासीय या कारोबारी संपत्ति को नीलाम कर सकें। देश की पहली एसेट रिकंस्ट्रक्शसन कंपनी आरसिल का गठन इसी कानून के तहत हुआ है जो कि इस तरह की संपत्ति की नीलामी करती है।

:: भारतीय अर्थव्यवस्था ::

सेवा गतिविधियां अप्रैल में रिकॉर्ड निचले स्तर पर आयीं: पीएमआई

  • देश के सेवा क्षेत्र की गतिविधियां अप्रैल में रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंच गयी। एक मासिक सर्वेक्षण के अनुसार देशव्यापी लॉकडाउन (बंद) के दौरान नागरिकों की आवाजाही पर कड़े प्रतिबंध और कारोबारों के बंद रहने का असर सेवा क्षेत्र पर भी पड़ा और क्षेत्र की गतिविधियां लगभग रुकी रहीं।

सर्वेक्षण के मुख्य बिंदु

  • ‘आईएचएस मार्किट इंडिया सर्विसेस बिजनेस एक्टिविटी इंडेक्स’ (पीएमआई-सेवा) अप्रैल में 5.4 अंक पर रहा। यह मार्च के 49.3 अंक के मुकाबले ऐतिहासिक निचला स्तर है। यह दिसंबर 2005 में सर्वेक्षण की शुरुआत के बाद पहली बार सेवा क्षेत्र के सबसे बुरे दौर का संकेतक भी है।
  • पीएमआई का 50 अंक से ऊपर होना गतिविधियों में विस्तार जबकि 50 अंक से नीचे रहना उनमें गिरावट को दिखाता है।
  • विशेषज्ञों के अनुसार देशव्यापी लॉकडाउन के चलते मांग में कमी रही। इससे कारोबार और उत्पादन ठप रहे और कारोबारी गतिविधियों में गिरावट दर्ज की गयी।
  • आईएचएस मार्किट से जुड़े अर्थशास्त्री जो हाएस ने कहा कि पीएमआई के मुख्य सूचकांक ‘कंपोजिट पीएमआई आउटपुट इंडेक्स’ में भी 40 अंक से अधिक की गिरावट दर्ज की गयी है। यह दिखाता है कि लॉकडाउन की वजह से आर्थिक गतिविधियां लगभग रुकी रहीं।
  • ‘कंपोजिट पीएमआई आउटपुट इंडेक्स’ अप्रैल में गिरकर 7.2 अंक पर आ गया जो मार्च में 50.6 अंक पर था। यह सर्वेक्षण के इतिहास में आर्थिक गतिविधियों में सबसे बड़ी गिरावट को दर्शाता है। ‘कंपोजिट पीएमआई आउटपुट इंडेक्स’ को पीएमआई-सेवा और पीएमआई-विनिर्माण को मिलाकर तैयार किया जाता है।
  • पुराने आंकड़ों से तुलना करने पर अप्रैल में देश की सकल घरेलू उत्पाद वृद्धि दर में सालाना आधार पर 15 प्रतिशत का संकुचन हुआ है।
  • रोजगार के पक्ष पर सर्वेक्षण में कहा गया है कि कारोबारी जरूरतें घटने पर कुछ सेवा कंपनियों ने वर्ष की दूसरी तिमाही से छंटनी शुरू कर दी है।

:: विज्ञान और प्रौद्योगिकी ::

आरोग्य सेतु ऐप

चर्चा में क्यों?

  • ‘आरोग्य सेतु’ ऐप के निजता में सेंध लगाने के विपक्ष के आरोपों को खारिज करते हुए केंद्रीय सूचना एवं प्रौद्योगिकी मंत्री रविशंकर प्रसाद ने कहा है कि यह ‘मोबाइल ऐप’ निजता की सुरक्षा एवं डेटा सुरक्षा के संदर्भ में ‘‘पूरी तरह से मजबूत और सुरक्षित’’ है।
  • ‘‘यह भारत का प्रौद्योगिकीय आविष्कार है--इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी, हमारे वैज्ञानिकों, एनआईसी (राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केंद्र), नीति आयोग और कुछ निजी(संस्थानों) का-- जो कोविड-19 के खिलाफ लड़ाई में मदद के लिये पूरी तरह से एक जिम्मेदार मंच है।’’

पृष्ठभूमि

  • उल्लेखनीय है कि कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने बीते शनिवार को आरोप लगाया था कि ‘आरोग्य सेतु’ ऐप एक अत्याधुनिक निगरानी प्रणाली है, जिससे निजता एवं डेटा सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंता पैदा हो रही हैं। उन्होंने कहा था, ‘‘प्रौद्योगिकी हमें सुरक्षित रहने में मदद कर सकती है, लेकिन (कोविड-19 के) इस डर का इस्तेमाल नागरिकों की सहमति के बगैर उन पर नजर रखने के लिये नहीं किया जाना चाहिए।’’
  • इससे पहले एथिकल हैकर ने ऐप में संभावित सुरक्षा मुद्दे को लेकर चिंता जताई थी। फ्रांस के एक हैकर और साइबर सुरक्षा विशेषज्ञ एल्लोट एल्ड्रसन ने मंगलवार को दावा किया था कि ऐप में सुरक्षा से जुड़ा एक मुद्दा पाया गया है और नौ करोड़ भारतीयों की निजता को खतरा है।

क्या है सरकार का पक्ष?

  • यह सुरक्षित है एवं इसमे डेटा ‘इनक्रीप्टेड’ रूप में है।
  • मोबाइल ऐप किसी व्यक्ति के संक्रमित होने की स्थिति में उसके संपर्क में आये लोगों का पता लगाने में भी मदद करता है।
  • यह प्रौद्योगिकी का एक बहुत ही मजबूत आविष्कार है और कई अन्य देश कोविड-19 से लड़ने के लिये इसी तरह के ऐप का इस्तेमाल कर रहे हैं।
  • सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि डेटा सीमित (अवधि के लिए) है। नियमित डेटा 30 दिनों के लिये रहेंगे और यदि आप संक्रमित होते हैं तो यह 45 से 60 दिनों के लिये रहेगा।’
  • इस ऐप को मोबाइल फोन से हटाने का विकल्प हमेशा ही उपलब्ध है। उन्होंने कहा,
  • आरोग्य सेतु ऐप स्मार्ट फोन के लिये है। ‘‘फीचर फोन के लिये हमने आरोग्य सेतु आईवीआरएस विकसित किया है।
  • यह ऐप निजता की सुरक्षा और डेटा सुरक्षा के संदर्भ में पूरी तरह से मजबूत है।
  • आरोग्य सेतु ऐप में कोई डेटा या सुरक्षा उल्लंघन का मामला नहीं पाया गया है।

इजरायल के बाद इटली के वैज्ञानिकों ने किया वायरस वैक्सीन बनाने का दावा: रिपोर्ट

  • इजरायल के बाद इटली के वैज्ञानिकों ने कोरोना वायरस का वैक्सीन बनाए जाने की बात कही है। समाचार एजेंसी आइएएनएस ने एक रिपोर्ट का हवाला देते हुए बताया है कि इटली के शोधकर्ताओं (वैज्ञानिकों) ने दावा किया है कि उन्होंने कोरोनावायरस (कोविड -19) का वैक्सीन (टीका) विकसित करने में सफलता हासिल कर ली है। अरब न्यूज़ ने बताया कि दवा विकसित करने वाली फर्म ताकीस (Takis) के सीईओ लुइगी औरिसिचियो (Luigi Aurisicchio) का कहना है कि उनकी कोरोना वायरस वैक्सीन ने पहली बार मानव कोशिकाओं में वायरस को बेअसर कर दिया है।
  • यह इटली में बने टीके के परीक्षण का सबसे उन्नत चरण है। इतालवी समाचार एजेंसी एएनएसए ने लुइगी औरिसिचियो (Luigi Aurisicchio) के हवाले से कहा है कि इस गर्मी के बाद इस वैक्सीन के मनुष्यों पर परीक्षण किए जाने की उम्मीद है। Spallanzani अस्पताल के अनुसार, जहां तक हम जानते हैं कि हम दुनिया में ऐसे पहले हैं, जिन्होंने एक वैक्सीन द्वारा कोरोना वायरस के निष्प्रभावीकरण का प्रदर्शन किया है।हम उम्मीद करते हैं कि इंसानों में भी ऐसा होगा।
  • शोधकर्ताओं ने चूहों पर वैक्सीन का प्रयोग किया जिसमें सफलतापूर्वक एंटीबॉडी विकसित किया गया, जो कोशिकाओं को संक्रमित करने से वायरस को अवरुद्ध करता था।उन्होंने आगे पाया कि पांच टीकों ने बड़ी संख्या में एंटीबॉडी उत्पन्न किए और इनमें से दो को सर्वश्रेष्ठ परिणामों के साथ चुना गया।वर्तमान में विकसित किए जा रहे सभी वैक्सीन डीएनए प्रोटीन स्पाइक की आनुवंशिक सामग्री पर आधारित हैं, जो मानव कोशिकाओं में प्रवेश करने के लिए कोरोना वायरस द्वारा उपयोग किए जाने वाले आणविक टिप है।
  • उन्होंने कहा कि इस लक्ष्य तक पहुंचने के लिए, हमें राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय संस्थानों और भागीदारों के समर्थन की आवश्यकता है, जो प्रक्रिया को गति देने में हमारी मदद कर सकते हैं। इटली में कोरोना वायरस के अब तक कुल मामले बढ़कर 2,13,013 तक पहुंच गए हैं।

इजरायल ने किया कोरोना वैक्सीन बनाने का दावा

  • इजरायल के रक्षा मंत्री नफताली बेन्नेट ने सोमवार को दावा किया कि उनके देश के वैज्ञानिकों ने कोरोना वायरस को मरीज के शरीर में ही खत्म कर देने वाले एंडीबॉडी को तैयार करने में बड़ी सफलता मिली है। अब इस टीके को पेटेंट कराने और उसके व्यापक पैमाने पर उत्पादन की दिशा में काम हो रहा है।इजरायल के अत्याधुनिक इंस्टीट्यूट फॉर बायोलॉजिकल रिसर्च (आइआइबीआर) ने कोरोना वायरस का यह टीका बनाया है।

:: पर्यावरण और पारिस्थितकी ::

वर्ष 2018-19 के लिए ऊर्जा दक्षता उपायों का प्रभाव’

चर्चा में क्यों?

  • केंद्रीय बिजली एवं नवीन तथा नवीकरणीय राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) तथा कौशल विकास एवं उद्यमशीलता मंत्री श्री आर. के. सिंह ने ‘वर्ष 2018-19 के लिए ऊर्जा दक्षता उपायों का प्रभाव’ पर वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिये एक रिपोर्ट जारी की। ई-बुक का अनावरण करते हुए श्री सिंह ने कहा, ‘हमने सीओपी-21 में संकल्प किया है कि 2005 के स्तरों की तुलना में 2030 तक हम अर्थव्यवस्था की ऊर्जा तीव्रता 33 से 35 प्रतिशत की कमी ला देंगे। अब हमारी ऊर्जा दक्षता पहलों से हम पहले ही 2005 के स्तरों की तुलना में हमारी अर्थव्यवस्था की ऊर्जा तीव्रता 20 प्रतिशत तक घटा चुके हैं जो वास्तव में एक बहुत अच्छा प्रदर्शन है।’
  • यह रिपोर्ट एक विशेषज्ञ एजेंसी पीडब्ल्यूसी द्वारा तैयार की गई थी जिसकी सेवाएं ब्यूरो आफ एनर्जी इफिसिएंसी (बीईई) द्वारा भारत में विभिन्न पहलों के जरिये सीओ2 उत्सर्जन में कमी तथा इसके परिणामस्वरूप ऊर्जा में वार्षिक बचत का आकलन करने के लिए एक स्वतंत्र सत्यापन के लिए ली गई थीं।

रिपोर्ट के मुख्य बिंदु

  • रिपोर्ट के निष्कर्षों से प्रदर्शित होता है कि विभिन्न ऊर्जा दक्षता स्कीमों के कार्यान्वयन से 2018-19 में 113.16 बिलियन यूनिट तक की बचत हुई है जोकि निवल बिजली उपभोग का 9.39 प्रतिशत है। ऊर्जा उपभोग क्षेत्रों (अर्थात मांग पक्ष सेक्टर) में अर्जित ऊर्जा बचत (इलेक्ट्रिकल एवं थर्मल) 16.54 एमटीओई का है जो 2018-19 में निवल कुल ऊर्जा उपभोग ( लगभग 581.60 एमटीओई) का 2.84 प्रतिशत है।
  • 2018-19 में अर्जित कुल ऊर्जा बचत 23.73 एमटीओई (तेल समरूप का मिलियन टन) है जो 2018-19 के दौरान कुल प्राथमिक ऊर्जा आपूर्ति (भारत में अनुमानित 879.23 एमटीओई) का 2.69 प्रतिशत है। इसमें अर्थव्यवस्था के मांग पक्ष एवं आपूर्ति पक्ष दोनों ही सेक्टर शामिल हैं। कुल मिला कर, इस अध्ययन ने अनुमान लगाया है कि विभिन्न ऊर्जा दक्षता उपायों से पिछले वर्ष (2017-18) के 53,627 करोड़ रुपये की बचत के मुकाबले 89,122 करोड़ रुपये (लगभग) की बचत हुई है। इन प्रयासों ने 151.74 मिलियन टन कार्बन डाई ऑक्साइडके उत्सर्जन में कमी लाने में भी योगदान दिया है जबकि पिछले वर्ष यह संख्या 108 एमटी कार्बन डाई ऑक्साइड थी।
  • चूंकि 2017-18 से प्रत्येक वर्ष ब्यूरो ऑफ एनर्जी इफिसिएंसी (बीईई) अनुमानित ऊर्जा उपभोग के साथ विभिन्न ऊर्जा योजनाओं के कारण वास्तविक ऊर्जा उपभोग की तुलना के लिए अध्ययन संचालित करने के लिए एक थर्ड पार्टी एक्सपर्ट एजेंसी नियुक्त करती है, वर्तमान ऊर्जा दक्षता उपाय आरंभ नहीं किए गए थे। इस अध्ययन का उद्वेश्य बचत हुई कुल ऊर्जा एवं सीओ2 उत्सर्जन में संबंधित कमी के लिहाज से भारत में सभी प्रमुख ऊर्जा दक्षता कार्यक्रमों के प्रदर्शन एवं प्रभाव का मूल्यांकन करना है। अध्ययन वित्त वर्ष 2018-19 के लिए राष्ट्रीय एवं राज्य स्तरीय वर्तमान योजनाओं के परिमाणस्वरूप प्रभाव का आकलन करता है और इसकी तुलना उस स्थिति से करता है जहां इन्हें कार्यान्वित नहीं किया गया था।
  • इस वर्ष अध्ययन ने निम्नलिखित प्रमुख कार्यक्रमों अर्थात परफॉर्म, अचीव और ट्रेड स्कीम, स्टैंडर्ड्स एंड लेबेलिंग प्रोग्राम, उजाला प्रोग्राम, नगरपालिका मांग पक्ष प्रबंधन कार्यक्रम आदि की पहचान की है।

:: विविध ::

तरुण बजाज भारतीय रिजर्व बैंक के केंद्रीय निदेशक मंडल में निदेशक नियुक्त

  • केंद्र सरकार ने आर्थिक मामलों के सचिव तरुण बजाज को भारतीय रिजर्व बैंक के केंद्रीय निदेशक मंडल में निदेशक नियुक्त किया है।बजाज 30 अप्रैल को सेवानिवृत्त हो रहे अतनु चक्रवर्ती का स्थान लेंगे।

:: प्रिलिम्स बूस्टर ::

  • हाल ही में किस संस्था के द्वारा लोगों के विस्थापन से जुड़ी ‘लॉस्ट एट होम रिपोर्ट -Lost at Home’ रिपोर्ट जारी की गई? (संयुक्त राष्ट्र बाल कोष-यूनिसेफ)
  • चर्चा में रहे ‘देखो अपना देश’ पहल किस मंत्रालय के द्वारा एवं कहाँ से प्रारंभ किया गया था? (पर्यटन मंत्रालय, 2020 कोणार्क ओडिसा)
  • चर्चा में रहे आयुष मंत्रालय के अधीन कौन-कौन सी प्राचीन चिकित्सा पद्धतियां शामिल है? (आयुर्वेद, योग और प्राकृतिक चिकित्सा, यूनानी, सिद्ध, सोवा रिग्पा और होम्योपैथी)
  • हाल ही में चर्चा में रहे वह महान व्यक्ति कौन थे जिन्हें कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष, स्वराज पार्टी का नेता एवं समाचार पत्र ‘इंडिपेंडेंट’ से ख्याति प्राप्त थी? (मोतीलाल नेहरू)
  • कोविड-19 से विभिन्न देशों में में फंसे भारतीय लोगों को वापस लाने के लिए भारत सरकार ने किस महा अभियान की शुरुआत की है? (वंदे भारत मिशन)
  • चर्चा में रहे अंतर सरकारी संस्था इंटरनेशनल ऑर्गनाइजेशन फॉर माइग्रेशन (IOM) की स्थापना कब हुई एवं इसका मुख्यालय कहाँ स्थित है? (1951, स्विजरलैंड)
  • भारत सरकार ने COP-21 में किस वर्ष तक उत्सर्जन तीव्रता को 2005 के मुकाबले 33-35% तक कम करने का लक्ष्य रखा है? (2030)
  • चर्चा में रहे मृदा स्वास्थ्य कार्ड(SHC) को सर्वप्रथम कब एवं कहाँ लागू किया गया था? (19 फरवरी 2015 सूरतगढ़, राजस्थान)
  • मृदा स्वास्थ्य कार्ड में कुल कितने पैरामीटर पर मृदा की जाँच होती है एवं कितने वर्ष के अंतराल पर मृदा कार्ड जारी किए जाते हैं? (12 पैरामीटर, 2 वर्ष)
  • चर्चा में रहे आरोग्य सेतु अनुप्रयोग किन संस्थानों की संयुक्त पहल है? (इलेक्ट्रॉनिक्स एवं आईटी मंत्रालय, NIC और नीति आयोग)
  • अप्रैल माह के लिए आईएचएस मार्किट इंडिया सर्विसेस बिजनेस एक्टिविटी इंडेक्स’ (पीएमआई-सेवा) कितना रहा? (5.4)
  • हाल ही में किसे रिजर्व बैंक के केंद्रीय निदेशक मंडल में निदेशक के तौर पर नामित किया गया है? (तरुण बजाज)
  • चर्चा में रहे सरफेसी एक्ट (SARFAESI ACT) क्यों लाया गया एवं यह कब लागू हुआ था? (वित्तीय संस्थानों को संपत्ति की नीलामी के द्वारा ऋण वसूली के लिए, 2002 में)

स्रोत साभार: Dainik Jagran (Rashtriya Sanskaran), Dainik Bhaskar (Rashtriya Sanskaran), Rashtriya Sahara (Rashtriya Sanskaran) Hindustan Dainik (Delhi), Nai Duniya, Hindustan Times, The Hindu, BBC Portal, The Economic Times (Hindi & English), PTI, PIB

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