(दैनिक समसामयिकी और प्रिलिम्स बूस्टर) यूपीएससी और सभी राज्य लोक सेवा आयोग परीक्षाओं के लिए हिंदी में समाचार पत्रों का संकलन (06 जुलाई 2020)

दैनिक समसामयिकी और प्रिलिम्स बूस्टर


(दैनिक समसामयिकी और प्रिलिम्स बूस्टर) यूपीएससी और सभी राज्य लोक सेवा आयोग परीक्षाओं के लिए हिंदी में समाचार पत्रों का संकलन (06 जुलाई 2020)


:: राष्ट्रीय समाचार ::

गोधन न्याय योजना

चर्चा में क्यों?

  • छत्तीसगढ़ सरकार 20 जुलाई को मवेशी पालनकर्ताओं से 1.50 रुपये प्रति किलोग्राम की दर से गोबर खरीदने की योजना बना रही है, अधिकारियों ने कहा कि इसे हरेली उत्सव के साथ शुरू किया जाएगा।
  • गोबर को 'गौधन' समितियों और स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं द्वारा घर-घर जाकर एकत्र किया जाएगा और एक खरीद कार्ड जारी किया जाएगा जिसमें खरीद का डेटा रखा जाएगा। अधिकारी ने कहा कि नगरीय प्रशासन विभाग और वन समितियां अपने क्षेत्रों में इस योजना की देखरेख करेंगी।

पृष्ठभूमि

  • भारत के सभी राज्यों समेत छत्तीसगढ़ में खुले में पशुओं के चरने की परंपरा रही है, जो मवेशियों और फसलों दोनों को ही नुकसान पहुंचाता है।
  • शहरों की सड़कों पर आवारा जानवरों के कारण सड़क दुर्घटनाओं की आशंका बढ़ जाती हैं।
  • प्रायः जानवरों से दूध निकालने के बाद उन्हें खुले में छोड़ दिया जाता है, जो अन्य विभिन्न समस्याओं का कारण बनता है।

गोधन न्याय योजना के बारे में

  • गोधन न्याय योजना के तहत पशु पालकों को लाभ पहुंचाने के राज्य सरकार किसानों से गाय का गोबर खरीदेगी। गौ-पालन को आर्थिक रूप से लाभदायी बनाने तथा खुले में चराई की रोकथाम के किसानों से गाय का गोबर खरीद उससे वर्मी कंपोस्ट खाद बनाएगी। इसके उपरान्त प्राप्त वर्मी कंपोस्ट खाद को बाद में किसानों, वन विभाग और उद्यानिकी विभाग को दिया जाएगा।
  • गोधन न्याय योजना की शुरुआत 21 जुलाई को हरेली त्योहार के दिन होगी। आपको बता दे छत्तीसगढ़ देश का पहला राज्य होगा जो गोबर की खरीद करेगा।
  • इस योजना के तहत गोबर की खरीदी निर्धारित दर पर होगी वहीं सहकारी समितियों से वर्मी कम्पोस्ट की‍ बिक्री होगी। गोबर की खरीद की दर तय करने पांच सदस्यीय मंत्री मण्डल की उप समिति गठित की गई है।

गोधन न्याय योजना के लाभ

  • गोधन न्याय योजना से गांवों में रोजगार और अतिरिक्त आय के अवसर बढ़ेंगे।
  • इस योजना से जैविक कृषि को बढ़ावा मिलेगा।
  • पशुओं के अतिचारण से मृदा का संरक्षण किया जाना संभव होगा
  • इससे ना केवल सड़क दुर्घटनाओं पर नियन्त्र लगाया जा सकेगा बल्कि इससे जुड़े अन्य विभिन्न समस्याओं को भी कम किया जा सकेगा ।

दरबुक-श्योक-दौलबबेग ओल्डी (डीएसडीबीओ) मार्ग

चर्चा में क्यों?

  • प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लद्दाख दौरे का असर अग्रिम क्षेत्रों में लंबित परियोजनाओं में तेजी के रूप में सामने आने लगा है। प्रधानमंत्री के निर्देश के बाद सामरिक दृष्टि से महत्वपूर्ण सड़कों और आठ पुलों के निर्माण में गति लाने के लिए सीमा सड़क संगठन (बीआरओ) ने इंजीनियरों एवं श्रमिकों की संख्या बढ़ानी शुरू कर दी है।
  • प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 255 किलोमीटर लंबी दरबुक-श्योक-दौलबबेग ओल्डी (डीएसडीबीओ) मार्ग पर बन रहे आठ पुलों का निर्माण इसी साल पूरा करने का निर्देश दिया है।

दरबुक-श्योक-दौलब बेग ओल्डी मार्ग के बारे में

  • दरबुक-श्योक-दौलब बेग ओल्डी सड़क ही चीन की आंख का कांटा बनी है। इस मार्ग पर गलवन घाटी में प्वाइंट 14 को जोड़ने वाला एक पुल श्योक दरिया पर बन चुका है। यह सड़क एलएसी के समानांतर समुद्रतल से करीब 13 हजार फुट की ऊंचाई से लेकर 16 हजार फुट की ऊंचाई वाले इलाकों से गुजरते हुए लेह से जुड़ती है। इस सड़क का निर्माण करीब 20 साल पहले आरंभ हुआ था और वर्ष 2014 में इसका काम फास्टट्रैक आधार पर शुरू किया गया। दौलत बेग ओल्डी को कराकोरम दर्रे का आधार भी माना जाता है। कराकोरम दर्रा ही चीन के जियांग इलाके को लद्दाख से अलग करता है।
  • डीएसडीबीओ की तरह सासोमा से सोसेर ला तक बिछाई जा रही सड़क भी अहम है। यह सड़क कराकोरम दर्रे के पास दौलत बेग ओल्डी के लिए वैकल्पिक मार्ग उपलब्ध कराएगी। यह सड़क दौलत बेग ओल्डी के दक्षिण पश्चिम में है और इसका ज्यादातर हिस्सा समुद्रतल से 17800 फुट की ऊंचाई वाल इलाके से गुजरता है। यह सड़क परियोजना बीआरओ के हार्डनेस इंडेक्स-तीन में आती है।

सिख फॉर जस्टिस

चर्चा में क्यों?

  • एक गैरकानूनी संगठन 'सिख फॉर जस्टिस' से जुड़ी 40 वेबसाइट्स को सरकार ने बैन करने का फैसला किया है। आरोप है कि वेबसाइट्स के जरिए यह संगठन गैरकानूनी काम करने के लिए लोगों का समर्थन जुटाने की कोशिश कर रहा था। इसके बाद गृह मंत्रालय की सिफारिश पर इलेक्ट्रॉनिक्स ऐंड इन्फोटेक मिनिस्ट्री ने यह कदम उठाया है।

पृष्ठभूमि

  • एक दिन पहले ही इस खालिस्तान समर्थक संगठन के स्वयंभू मुखिया गुरपतवंत सिंह पन्नू के खिलाफ हरियाणा पुलिस ने देशद्रोह और अलगाववाद के आरोप में केस दर्ज किया है। पन्नू अमेरिका में रहता है और वहीं से टेलीकॉलिंग और वेबसाइट के जरिए अपना पुलिस ने बताया कि पन्नू देश की अखंडता और सांप्रदायिक सौहार्द के लिए खतरा है। वह 4 जुलाई को एक अवैध जनमत संग्रह करवाने वाला था और वेबसाइट के जरिए भी इसका प्रचार कर रहा था। पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट ने इस संगठन पर कार्रवाई पर असंतुष्टि जाहिर की थी। पंजाब सरकार ने बताया था कि इस संगठन से जुड़े 116वॉट्सऐप ग्रुप बैन किए जा चुके हैं और 16 एफआईआर दर्ज हुई हैं।

केरल में एक साल तक के लिए कोरोना सेफ्टी गाइडलाइंस अनिवार्य

  • COVID-19 संकट के मद्देनजर केरल में मुख्यमंत्री पिनरई विजयन के नेतृत्व वाली सरकार ने रविवार को बड़ा फैसला लिया है। राज्य सरकार ने एक साल तक के लिए कोरोना वायरस से जुड़े सुरक्षा संबंधी दिशा-निर्देश का पालन करना सभी के लिए अनिवार्य कर दिया गया है। यानी अब इन गाइडलाइंस का पालन सूबे में हर किसी को पूरे साल भर तक करना पड़ेगा।
  • नए नियम ‘Kerala Epidemic Disease Corona Virus Disease (Covid-19) Additional Regulations, 2020’ के तौर पर जाने जाएंगे और ये जुलाई 2021 तक या सरकार के अगले निर्देश तक रहेंगे। जिला कलेक्टरों को भी इन्हीं नियमों का कड़ाई से पालन कराने के निर्देश दिए गए हैं।
  • राज्य सरकार ने इसी के साथ साफ कहा है कि जो भी नियमों का पालन नहीं करेगा, उसे Kerala Epidemic Diseases Ordinance, 2020 के प्रावधानों के तहत सजा दी जाएगी।

गाइडलाइंस में क्या-क्या है शामिल?

  • सार्वजनिक स्थलों/कार्यस्थलों पर सभी को फेस मास्क/फेस कवर पहनना होगा।
  • सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करना होगा।
  • शादी से जुड़े कार्यक्रमों में अधिकतम 50 लोग ही बुलाए जा सकेंगे।
  • गैर-कोरोना वाले अंतिम संस्कारों में महज 20 लोगों को जाने की अनुमति होगी।
  • दुकानों और कमर्शियल जगहों पर एक वक्त पर 20 से अधिक लोगों को रहने/आने की अनुमति नहीं दी जाएगी। कमरे या जगह के हिसाब से यह संख्या तय होगी। साथ ही वहां उस दौरान छह फुट की सामाजिक दूरी का पालन भी करना होगा।
  • सार्वजनिक स्थलों, सड़कों और फुटपाथ पर खुले में थूंकना सख्त मना रहेगा।

:: अंतर्राष्ट्रीय समाचार ::

संयुक्त राष्ट्र खाद्य और कृषि संगठन (FAO)

चर्चा में क्यों

  • संयुक्त राष्ट्र खाद्य और कृषि संगठन (FAO) के अनुसार, भारत पिछले चार महीनों से टिड्डीदल के सबसे गंभीर हमले से जूझ रहा है। साथ ही एफएओ ने भारत लिए अगले चार हफ्तों के दौरान "हाई अलर्ट" पर रहने की चेतावनी भी दी है।
  • अपने नवीनतम अपडेट में एफएओ ने कहा है कि भारत-पाक सीमा से भारत के पूर्व और उत्तर कि गई टिड्डियों का दल मानसून के दौरान वापस राजस्थान की ओर लौट सकता है।
  • गौरतलब है कि वैश्विक स्तर पर संयुक्त राष्ट्र खाद्य एवं कृषि संगठन (एफएओ) का टिड्डी निगरानी प्रकोष्ठ टिड्डियों के प्रजनन एवं आवाजाही मार्ग पर नजर रखता है। भारत में टिड्डियों की निगरानी एवं चेतावनी टिड्डी चेतावनी संगठन की स्थापना (एलडब्ल्यूओ) द्वारा की जाती है।

टिड्डियों के बारे में

  • टिड्डी ऐक्रिडाइडी परिवार के ऑर्थाप्टेरा गण से संबंधित उष्णकटिबंधीय कीट है। विश्व में टिड्डियों की 10 प्रमुख प्रजातियां पाई जाती हैं:- रेगिस्तानी टिड्डी, बोम्बे टिड्डी, प्रवासी टिड्डी, इटेलियन टिड्डी, मोरक्को टिड्डी, भूरी टिड्डी, दक्षिणी अमेरिकन टिड्डी, आस्ट्रे्लियन टिड्डी और वृक्ष टिड्डी। रेगिस्तानी टिड्डों की प्रजाति को सबसे खतरनाक और विनाशकारी माना जाता है। भारत में रेगिस्तानी टिड्डी, प्रवासी टिड्डियां, बॉम्बे टिड्डी और ट्री (वृक्ष) टिड्डियों की चार प्रजातियों का प्रकोप होता है।
  • सामान्यतः गर्मी और बारिश में टिड्डियां के विकास की परिस्थितियां काफी अनुकूल होती हैं एवं इस मौसम में यह काफी तेजी से प्रजनन करते हुए तीन महीनों में 20 गुना तक बढ़ सकते हैं। टिड्डियों का एक छोटा दल एक दिन में 10 हाथी और 25 ऊंट या 2500 आदमियों के बराबर खाना खा सकता है।

खाद्य और कृषि संगठन (FAO)

  • खाद्य एवं कृषि संगठन कृषि उत्पादन, वानिकी और कृषि विपणन संबंधी शोध विषयों का अध्ययन करने वाला संयुक्‍त राष्‍ट्र संघ का एक विशेषज्ञ अंतर्राष्ट्रीय संगठन है।
  • राष्ट्र खाद्य और कृषि संगठन की स्‍थापना वर्ष 1945 में की गई थी और इसका मुख्यालय रोम (इटली) में है।
  • वैश्विक स्तर पर संयुक्त राष्ट्र खाद्य एवं कृषि संगठन (एफएओ) का टिड्डी निगरानी प्रकोष्ठ टिड्डियों के प्रजनन एवं आवाजाही मार्ग पर नजर रखता है।

भारत में टिड्डी चेतावनी तंत्र

  • भारत में टिड्डियों के प्रकोप से बचने के लिए टिड्डी चेतावनी संगठन की स्थापना (एलडब्ल्यूओ) 1946 में की गई थी। इसका केन्‍द्रीय मुख्‍यालय फरीदाबाद में एवं क्षेत्रीय मुख्‍यालय जोधपुर में स्थित है। इसके अलावा 10 टिड्डी सर्किल कार्यालय समेत एक टिड्डी क्षेत्र अन्‍वेषण केन्‍द्र बीकानेर में स्‍थित है।

सकतेंग वन्‍यजीव अभयारण्य

चर्चा में क्यों :-

  • चीन द्वारा आधिकारिक तौर पर यह पहली बार स्वीकारा गया है कि भूटान की पूर्वी सीमा चीन के साथ विवादित है । इस के उपरान्त भारत तथा चीन में तनाव बढ़ने की सम्भावना है क्योंकि भारत तथा भूटान के मध्य हुई संधि के अनुसार भारत भूटान का सीमा संरक्षण करता है। दरअसल, भूटान की पूर्वी अरुणाचल प्रदेश से लगती है और इसी इलाके में अब चीन सीमा विवाद का दावा कर रहा है।
  • इसके पहले चीन द्वारा ग्‍लोबल इन्‍वायरमेंट फसिलिटी काउंसिल की बैठक में भूटान के सकतेंग वन्‍यजीव अभयारण्य की जमीन को 'विवादित' बताया। । जबकि भूटान ने इस क्षेत्र को अपना सम्प्रभू भाग बताया है।

पृष्ठ्भूमि:-

  • चीन तथा भूटान के मध्य सीमांकन नहीं हुआ है। चीन और भूटान ने वर्ष 1984 से लेकर 2016 के बीच में अब तक 24 दौर की बातचीत की है। इस दौरान बातचीत में केवल पश्चिम और मध्‍य इलाके के विवाद पर चर्चा हुई थी , पूर्वी सीमा पर विवाद नहीं हुआ था।

सकतेंग वन्यजीव अभयारण्य के बारे में

  • सकतेंग वन्यजीव अभयारण्य भूटान राष्ट्रीय उद्यान है जोकि भूटान के उत्तर पूर्वी क्षेत्र में 650 वर्ग किमी में फैला राष्ट्रीय उद्यान है। यह राष्ट्रीय उद्यान अरुणाचल प्रदेश के सेला पास से करीब 17 किमी की दूरी पर है। सकतेंग वन्यजीव अभयारण्य लाल पांडा, हिमालयन ब्लैक बियर और हिमलयन मोनाल तीतर जैसे दुर्लभ वन्यजीवों का घर है।

चाबहार बंदरगाह

चर्चा में क्यों?

  • एक महत्वपर्ण रणनीतिक घटनाक्रम के रूप में चाबहार बंदरगाह पर माल चढ़ाने -उतारने का काम शुरू हो गया है। केंद्रीय पोत परिवहन मंत्री मनसुख लाल मंडाविया ने कहा कि इस बंदरगाह के विकास के बाद मध्य एशिया के लिए चीन या यूरोप का रास्ता नहीं लेना पड़ेगा।
  • ईरान में रणनीतिक चाबहार बंदरगाह के विकास से भारत और मध्य एशिया के सोवियत गणराज्य से अलग हुए देशों (सीआईएस) के साथ कंटेनर की परिवहन लागत 20 प्रतिशत कम होगी। सीआईएस देशों में आर्मेनिया, अजरबेजान, बेलारूस, कजाखस्तान, किर्गिस्तान, रूस और उज्बेकिस्तान आदि देश आते हैं।

चाबहार बंदरगाह क बारे में

  • उल्लेखनीय है कि ओमान सागर में स्थित चाबहार बंदरगाह मध्य एशिया और अफगानिस्तान को सिस्तान-बलूचिस्तान से जोड़ने वाला एक मात्र बंदरगाह है। भारत- ईरान-अफगानिस्तान के बीच हुए समझौते के तहत भारत ने इस बंदरगाह को विस्तार देने का काम किया है। इस विस्तार से चाबहार बंदरगाह की क्षमता तीन गुना बढ़ने की संभावना है। यही नहीं इस बंदरगाह को पड़ोसी मुल्क पाकिस्तान में चीन के सहयोग से CPEC के तहत विस्तार दिए जा रहे ग्वादर बंदरगाह का रणनीतिक जवाब माना जाता रहा है। भारत के लिए चाबहार बंदरगाह इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि इससे भारत के लिए पश्चिमी एशिया से पाकिस्तान के दखल के बिना सीधे जुड़ने का रास्ता साफ हो गया। इस बंदरगाह के विकास के बाद मध्य एशिया के लिए चीन या यूरोप का रास्ता नहीं लेना पड़ेगा।

ईरान परमाणु कार्यक्रम या संयुक्त समग्र कार्रवाई योजना (जेसीपीओए)

चर्चा में क्यों?

  • यूरोपीय संघ के एक शीर्ष राजनयिक ने कहा कि उन्हें ईरान से एक पत्र प्राप्त हुआ है जिससे उस अंतरराष्ट्रीय समझौते में विवाद निवारण प्रक्रिया शुरू हो गई है जो तेहरान की परमाणु महत्वकांक्षाओं को सीमित करने से संबंधित है। पत्र में चिंता जताई गई है कि ब्रिटेन, फ्रांस और जर्मनी अपनी ओर से इस समझौते को नहीं निभा रहे हैं।
  • संयुक्त समग्र कार्रवाई योजना (जेसीपीओए) नाम के इस समझौते के समन्वयक और यूरोपीय संघ के विदेश नीति प्रमुख जोसेप बोरेल नेशुक्रवार (3 जुलाई) को कहा कि ईरान के विदेश मंत्री जवाद जरीफ ने पत्र में समझौते के पैराग्राफ 36 में अंकित विवाद निवारण प्रणाली के तहत उपायों की मांग की है। विवाद निवारण प्रणाली करीब एक महीने की अवधि के लिए होती है जो किसी समझौते को सुलझाने वाले सभी पक्षों के सहमत होने पर लंबी हो सकती है।

क्या है ईरान परमाणु कार्यक्रम या संयुक्त समग्र कार्रवाई योजना (जेसीपीओए)?

  • ईरान परमाणु समझौता 2015 में ईरान और संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के पांच स्थायी सदस्यों जर्मनी तथा यूरोपीय संघ के बीच वियना में हुआ था ।जुलाई 2015 में अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा के दौरान लंबे समय से कूटन‍ीतिक पहल के बाद ईरान के परमाणु कार्यक्रम को सीमित करने वाले इस परमाणु समझौते पर बात बनी थी।
  • समझौते के मुताबिक़ ईरान को अपने संवर्धित यूरेनियम के भंडार को कम करना था। साथ ही अपने परमाणु संयंत्रों को निगरानी के लिए खोलना था। इसके अलावा समझौते के ज़रिए ईरान को अपने उच्च संवर्धित यूरेनियम भंडार का 98 प्रतिशत हिस्सा नष्ट करना था और ईरान को अपने मौजूदा परमाणु सेंट्रीफ्यूज में से दो तिहाई को भी हटाना था। अमेरिका इन समझौते के बदले ईरान को तेल और गैस के कारोबार, वित्तीय लेन देन, उड्डयन और जहाज़रानी के क्षेत्रों में लागू प्रतिबंधों में ढील देने के लिए राजी था। लेकिन साल 2016 में आए ट्रम्प ने इस समझौते को घाटे का सौदा बताया और मई 2018 में अमेरिका ईरान परमाणु समझौते से बाहर हो गया।

:: राजव्यवस्था ::

दिव्यांगजन अधिकार कानून, 2016

चर्चा में क्यों?

  • सामाजिक कार्यकर्ताओं ने सरकार से अनुरोध किया है कि वह छोटी आर्थिक गलतियों को अपराध की श्रेणी से बाहर करने संबंधी दिव्यांगजन अधिकार कानून में प्रस्तावित संशोधन को आगे ना बढ़ावे क्योंकि इससे वर्षों में हासिल की गई छोटी-छोटी उपलब्धियां धुल जाएंगी और दिव्यांगजनों पर इसका नकारात्मक प्रभाव होगा।

पृष्ठभूमि

  • गौरतलब है कि भारत सरकार के सामाजिक न्‍याय एवं अधिकारिता मंत्रालय के तहत आने वाले दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग ने दिव्यांगजन अधिकार कानून के तहत छोटी आर्थिक गलतियों को अपराध की श्रेणी से बाहर करने का प्रस्ताव रखा है ताकि ‘‘बिजनेस के प्रति रुख बेहतर बनाया जा सके और अदालतों पर बोझ कम हों।’’ वित्त मंत्रालय ने पिछले महीने चेक बाउंस और ऋण वापसी में चूक आदि सहित 19 कानूनों के तहत छोटी गलतियों को अपराध की श्रेणी से बाहर करने का प्रस्ताव रखा था। इसी के अनुरुप, भारत सरकार के सामाजिक न्‍याय एवं अधिकारिता मंत्रालय के तहत आने वाले दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग ने अपनी वेबसाइट पर दिव्यांगजन अधिकार कानून में संशोधन का एक प्रस्ताव अपलोड तक उसपर 10 जुलाई तक राय मांगी है। ‘छोटी गलतियों को अपराध की श्रेणी से बाहर करने, ताकि बिजनेस को बढ़ावा दिया जा सके और अदालतों पर बोझ कम हो-- दिव्यांगजन अधिकार कानून, 2016 में संशोधन’ शीर्षक के तहत प्रस्ताव में प्रावधान 89, 92ए और 93 के तहत दिव्यांगजन अधिकार कानून में संशोधन सूचीबद्ध करता है। दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग ने कानून में एक नया प्रावधान 95ए जोड़ने का भी प्रस्ताव रखा है।

डॉक्टर रणबीर सिंह समिति

चर्चा में क्यों?

  • केंद्र सरकार कई ऐसे अपराधों की परिभाषा को वर्तमान समय के हिसाब से बदलने की तैयारी में है। वैवाहिक दुष्कर्म, इच्छामृत्यु, यौन अपराधों और राजद्रोह से संबंधित कई अपराधों की परिभाषा पर फिर से विचार करने की तैयारी गृह मंत्रालय की ओर से की गई है। इसके लिए एक समिति का गठन भी किया गया है।

डॉक्टर रणबीर सिंह समिति के बारे में

  • वैवाहिक दुष्कर्म का अपराधीकरण, यौन अपराधों को लिंग तटस्थ बनाने से लेकर इच्छामृत्यु को वैध बनाने और राजद्रोह की परिभाषा पर पुनर्विचार करने के लिए केंद्रीय गृह मंत्रालय ने पांच सदस्यीय समिति का गठन किया है।
  • समिति ने 49 तरह के अपराधों को पुनर्विचार के लिए चुना है। इनमें से एक यह है कि क्या धारा 124ए के तहत देशद्रोह के अपराध की परिभाषा, दायरे और संज्ञान में संशोधन किए जाने की आवश्यकता है। नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी, दिल्ली के कुलपति डॉक्टर रणबीर सिंह, की अध्यक्षता वाली समिति ने प्रमाणिक और प्रक्रियात्मक आपराधिक कानून और साक्ष्य कानून पर ऑनलाइन सार्वजनिक और विशेषज्ञों की सलाह मांगी है।
  • इस समिति का गठन पांच मई को किया गया था। सिंह के अलावा समिति में नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी के रजिस्ट्रार, दिल्ली के जीएस बाजपेई, जबलपुर में धर्मशास्त्र राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय के कुलपति बलराज चौहान, वरिष्ठ वकील महेश जेठमलानी और दिल्ली जिला अदालत के पूर्व न्यायाधीश जीपी थरेजा भी शामिल हैं।

:: विज्ञान और प्रौद्योगिकी ::

कोरोना संक्रमण का पता लगाने वाला सबसे सस्ता सेंट्रीफ्यूज: हैंडीफ्यूज

  • भारतीय वैज्ञानिक के नेतृत्व में शोधकर्ताओं ने सस्ता और बिना बिजली के चलने वाला सेंट्रीफ्यूज विकसित किया है, जिससे कोरोना वायरस संक्रमण का पता लगाया जा सकता है। गरीब देशों में यह कोरोना महामारी के खिलाफ लड़ाई में काफी उपयोगी साबित हो सकता है।
  • ‘हैंडीफ्यूज’ नामक यह उपकरण कोरोना संदिग्ध के लार के नमूनों से वायरस जीनोम को अलग कर सकता है। यह काफी तेज गति से सैंपल वाली ट्यूब को घुमाता है और इसमें बिजली की भी आवश्यकता नहीं होती।
  • इस सेंट्रीफ्यूज की कीमत पांच अमेरिकी डॉलर से भी कम है। इससे चिकित्सकों व वैज्ञानिकों को मरीज के लार के नमूने द्वारा की जाने वाली जांच ‘लैंप’ में आसानी होगी। इससे जांच जल्दी और सस्ती होगी।

हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन और लोपिनवीर/ रटनवीर

  • विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने कहा कि वह कोरोना संक्रमित मरीजों को एक साथ दी जाने वाली मलेरिया की दवा हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन और एचआईवी दवा के परीक्षण को रोक रहा है। ऐसा इसलिए किया जा रहा है कि दोनों दवाओं का असर कोरोना संक्रमित मरीजों की मृत्युदर को कम करने में विफल रहा है।
  • डब्ल्यूएचओ ने कहा कि एक ही दिन में पहली बार दुनियाभर में दो लाख से अधिक कोराना के मरीजों की संख्या पहुंचने पर संगठन को झटका लगा है। संयुक्त राज्य अमेरिका में कुल 212,326 में से 53,213 नए मामले शुक्रवार को दर्ज किए गए।
  • डब्ल्यूएचओ ने कहा कि रोगियों के सही होने के मानकों को देखते हुए हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन और लोपिनवीर/ रटनवीर के अंतरिम परीक्षण के परिणामों से यह पता चलता है कि संक्रमित मरीजों की मृत्यु दर में कमी की रफ्तार बेहद कम रही या कोई कमी ही नहीं हुई। यह स्थिति एकजुट होकर परीक्षण में जुटे जांचकर्ताओं को तत्काल प्रभाव से बाधित करेगी।
  • यूएन एजेंसी ने कहा कि परीक्षण की अंतर्राष्ट्रीय संचालन समिति की सिफारिश पर यह निर्णय लिया गया है। एजेंसी से साफ किया कि यह निर्णय अन्य अध्ययनों को प्रभावित नहीं करेगा। न ही गैर-अस्पतालों में भर्ती मरीजों पर इस दवा के उपयोग को प्रभावित करेगा।

जिओ मीट JioMeet

  • रिलायंस जियो ने अपनी वेब कॉन्फ्रेंस ऐप 'जियो मीट' (Jio Meet) की सेवा आम लोगों के लिए शुरू कर दी। कंपनी की वेबसाइट पर उपलब्ध जानकारी के मुताबिक इस ऐप पर एक बार में 100 लोग तक वीडियो कॉन्फ्रेंस कर सकते हैं।

पृष्ठभूमि

  • भारत और चीन के बीच लद्दाख से लगी एलएसी पर जारी तनाव के दौरान ही मोदी सरकार ने 59 चीनी ऐप्स को बैन करने का फैसला किया। इनमें टिकटॉक और यूसी ब्राउजर समेत कई बड़ी ऐप्स शामिल थीं। इस बैन के बाद कुछ टेक एक्सपर्ट्स और सोशल मीडिया यूजर्स ने चीन से संबंध रखने वाली एक वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग ऐप ZOOM को भी प्रतिबंधित करने की मांग की। इस बीच मुकेश अंबानी की जियो ने जूम को टक्कर देने के लिए VC ऐप JioMeet बाजार में उतार दी है।

जिओ मीट JioMeet के बारे में

  • जियोमीट को किसी भी प्लेटफॉर्म से व किसी भी डिवाइस से ऐक्सेस किया जा सकता है। अगर आप मोबाइल से कनेक्टेड है तो जूम ऐप में आप मात्र चार प्रतिभागियों को एक बार में देख सकते हैं शेष को देखने के लिए आपको स्क्रॉल करना पड़ता है जबकि जियोमीट में एक बार में आठ प्रतिभागियों को देखा जा सकता है।
  • सुरक्षा के मामले में भी जियोमीट, जूम से बेहतर है। फरवरी और मार्च माह में सरकार की तरफ से जूम को असुरक्षित प्लेटफॉर्म माना गया था।
  • जियोमीट पर विडियो कॉन्फ्रेंसिंग के लिए अब किसी इनवाइट कोड की जरूरत नही पड़ेगी। 100 यूजर्स तक एक बार में जियोमीट पर विडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए जुड़ सकते हैं। जियोमीट लगभग सभी तरह के डिवायस पर बखूबी काम करता है।

:: पर्यावरण और पारिस्थितिकी ::

यमुना निगरानी समिति

चर्चा में क्यों?

  • एनजीटी के विशेषज्ञ सदस्य बी एस साजवान और दिल्ली की पूर्व मुख्य सचिव शैलजा चंद्रा की दो सदस्यीय यमुना निगरानी समिति ने एनजीटी को अपनी अंतिम रिपोर्ट सौप दी है।

पृष्ठभूमि

  • यमुना की सफाई की निगरानी करने के लिए राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) ने एक विशेषज्ञ निगरानी समिति का गठन किया था। एनजीटी के विशेषज्ञ सदस्य बी एस साजवान और दिल्ली की पूर्व मुख्य सचिव शैलजा चंद्रा की दो सदस्यीय यमुना निगरानी समिति में शामिल है।

समिति के रिपोर्ट के मुख्य बिंदु

  • समिति ने कहा, “आधिकारिक उदासीनता पर काबू पाना सबसे बड़ी चुनौती है। यह एनजीटी के निर्देशों को पूरा करने या यमुना निगरानी समिति के प्रयासों को विफल करने के लिये किसी अवज्ञा या अनिच्छा की वजह से नहीं बल्कि इसलिये है क्योंकि जल प्रदूषण तमाम वैधानिक प्रावधानों और उपदेशों के बावजूद प्राथमिकता नहीं है।”
  • रखरखाव के काम को राजनीतिक स्तर पर नई आधारभूत परियोजनाओं या योजनाओं के मुकाबले कम महत्व दिया जाता है। यह अधिकारियों और अभियंताओं के दिमाग में बैठ गया है कि जिस मानक पर उनके प्रदर्शन को आंका जाएगा वह मुख्य रूप से अधिकारी की नई परियोजनाओं को मंजूरी दिलाने, उसके लिये कोष हासिल करने और समय पर सामान व सेवाएं हासिल करने की उसकी क्षमता पर निर्भर करता है।
  • नागरिकों को प्रभावित करने वाले जीवन की गुणवत्ता संबंधी मुद्दे अकसर पृष्ठभूमि में चले जाते हैं और दैनिक रखरखाव के मामलों को निपटाने के लिये कनिष्ठ लोगों पर छोड़ दिया जाता है।
  • समिति ने कहा कि स्वच्छ यमुना के लिये ज्यादा बड़े स्तर पर जनता की भागीदारी जरूरी है और इसे हासिल करने के लिये नागरिकों को सक्रिय भूमिका निभानी होगी।
  • नदी को साफ करने को सरकार के चुनावी वादों की सूची में इस साल शामिल किया गया था और समिति को बताया गया था कि राजनीतिक स्तर पर भी इस पर ध्यान दिया जाना शुरू हो चुका है। लेकिन मौजूदा स्वास्थ्य संकट की वजह से यह एक बार फिर पीछे छूट गया है।
  • समिति ने दिल्ली परिवहन निगम (डीटीसी) से अनुशंसा की कि मिलेनियम बस डिपो को यमुना किनारे से स्थानांतरित किया जाए। समिति ने यह भी कहा कि पर्यावरण के लिहाज से यह असुरक्षित है। समिति ने एनजीटी को बताया कि डीटीसी बिना आवश्यक अनुमति हासिल किए इसका संचालन कर रहा है और अपशिष्ट जल को नदी में छोड़ रहा है।

:: विविध ::

भारत की पहली ट्रांसजेंडर ऑपरेटर : जोया खान

  • केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद ने ज़ोया खान को गुजरात में एक कॉमन सर्विस सेंटर (CSC) के भारत के पहले ट्रांसजेंडर ऑपरेटर के रूप में तैनाती की घोषणा की थी। जोया खान ने सीएससी के साथ टेली मेडिसिन कंसल्टेंट के रूप में काम करना शुरू कर दिया है।

:: प्रिलिम्स बूस्टर ::

  • हाल ही में एनजीटी को अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करने से चर्चा में रहे यमुना निगरानी समिति में कौन से विशेषज्ञ शामिल है? (बी एस साजवान और शैलजा चंद्रा)
  • हाल ही में आधिकारिक रूप से चीन द्वारा दावा करने से चर्चा में रहे ‘सकतेंग वन्‍यजीव अभयारण्य’ किस देश में स्थित है? (भूटान)
  • हाल ही में सरकार के द्वारा खालिस्तानी समर्थक किस गैरकानूनी संगठन से जुड़ी 40 वेबसाइट को प्रतिबंधित कर दिया गया है? (सिख फॉर जस्टिस)
  • हाल ही में किस राज्य ने एक साल तक के लिए कोरोना वायरस से जुड़े सुरक्षा संबंधी दिशा- निर्देश का पालन करना सभी के लिए अनिवार्य कर दिया गया है? (केरल)
  • हाल ही में भारतीय वैज्ञानिकों ने कोविड-19 का संक्रमण पता लगाने के लिए सस्ता और बिना बिजली के चलने वाले किस सेंट्रीफ्यूज का विकास किया है? (‘हैंडीफ्यूज’)
  • हाल ही में गृह मंत्रालय द्वारा वैवाहिक दुष्कर्म, यौन अपराधों, इच्छामृत्यु, राजद्रोह इत्यादि की परिभाषा पर पुनर्विचार हेतु किसकी अध्यक्षता में 5 सदस्यीय समिति का गठन किया है? (डॉक्टर रणबीर सिंह)
  • हाल ही में रिलायंस कंपनी के द्वारा कॉन्फ्रेंसिंग ऐप ZOOM की तर्ज पर किस ऐप को लांच किया गया है? (JioMeet)
  • अंतरराष्ट्रीय समझौते में विवाद निवारण प्रक्रिया से चर्चा में रहे संयुक्त समग्र कार्रवाई योजना (जेसीपीओए) पर ईरान के साथ किन देशों में हस्ताक्षर किए थे? (P5+1:अमेरिका, ब्रिटेन, जर्मनी, फ्रांस, चीन और रूस )
  • हाल ही में विश्व स्वास्थ्य संगठन ने कोरोना संक्रमित मरीजों किन्नर दवाओं के परीक्षण की रुकने की घोषणा की है? (हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन और लोपिनवीर/ रटनवीर)
  • हाल ही में कॉमन सर्विस सेंटर (CSC) पर नियुक्त होने वाले भारत के पहले ट्रांसजेंडर ऑपरेटर कौन है? (ज़ोया खान, गुजरात)
  • भारत में टिड्डियों के हमले की चेतावनी से चर्चा में रहे खाद्य एवं कृषि संगठन (एफएओ) की स्थापना कब हुई एवं इसका मुख्यालय कहां स्थित है? (1945, रोम इटली)
  • केंद्रीय पोत परिवहन मंत्री द्वारा बंदरगाह पर परिचालन की शुरुआत से चर्चा में रहे चाबहार बंदरगाह का निर्माण कहां किया जा रहा है एवं यह किस सागर/ खाड़ी में स्थित है? (ईरान, ओमान की खाड़ी)

स्रोत साभार: Dainik Jagran (Rashtriya Sanskaran), Dainik Bhaskar (Rashtriya Sanskaran), Rashtriya Sahara (Rashtriya Sanskaran) Hindustan Dainik (Delhi), Nai Duniya, Hindustan Times, The Hindu, BBC Portal, The Economic Times (Hindi & English), PTI, PIB