(दैनिक समसामयिकी और प्रिलिम्स बूस्टर) यूपीएससी और सभी राज्य लोक सेवा आयोग परीक्षाओं के लिए हिंदी में समाचार पत्रों का संकलन (06 अप्रैल 2020)

दैनिक समसामयिकी और प्रिलिम्स बूस्टर


(दैनिक समसामयिकी और प्रिलिम्स बूस्टर) यूपीएससी और सभी राज्य लोक सेवा आयोग परीक्षाओं के लिए हिंदी में समाचार पत्रों का संकलन (06 अप्रैल 2020)


:: राष्ट्रीय समाचार ::

दो साल के लिए सांसद निधि स्‍थगित, राष्‍ट्रपति, उपराष्‍ट्रपति व राज्‍यपाल भी कम लेंगे सैलरी

  • कोरोना वायरस महामारी के संकट को देखते हुए सोमवार को कैबिनेट मीटिंग में अहम फैसला लिया गया। इसके तहत सांसद निधि को दो साल के लिए टाल दिया गया वही राष्‍ट्रपति, उपराष्‍ट्रपति, राज्‍यपाल समेत तमाम सांसदों ने भी अपने वेतन का 30 फीसद योगदान देने का फैसला किया है। केंद्रीय मंत्रिमंडल ने संसद अधिनियम, 1954 के सदस्यों के वेतन, भत्ते और पेंशन में संशोधन के अध्यादेश को मंजूरी दे दी। 1 अप्रैल, 2020 से एक साल के लिए भत्ते और पेंशन को 30 फीसद तक कम किया जाएगा।
  • कैबिनेट मीटिंग के बाद केंद्रीय मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने कहा, कैबिनेट ने भारत में महामारी के प्रतिकूल प्रभाव के प्रबंधन के लिए 2020-21 और 2021-22 के लिए सांसदों को मिलने वाले MPLAD फंड को अस्थायी तौर पर निलंबित कर दिया है। 2 साल के लिए MPLAD फंड के 7900 करोड़ रुपये का उपयोग भारत की संचित निधि में किया जाएगा।'
  • केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्री जावड़ेकर ने प्रेस कांफ्रेंस में बताया, ‘दो साल के लिए सांसद निधि स्‍थगित कर दी गई है। राष्‍ट्रपति-उपराष्‍ट्रपति-राज्‍यपाल भी 30 फीसद कम सैलरी लेंगे।’  उन्‍होंने कहा, 'राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति, राज्यों के राज्यपालों ने स्वेच्छा से सामाजिक ज़िम्मेदारी के रूप में वेतन कटौती का फैसला किया है। यह धनराशि भारत के समेकित कोष में जाएगा।'
  • कोविड-19 के संक्रमण को देखते हुए सोमवार को केंद्रीय कैबिनेट की बैठक का आयोजन वीडियो कॉन्फ्रेंसिंगके जरिए कराया गया। बैठक की अध्‍यक्षता प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने की। पहली बार मंत्रिमंडल की बैठक वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए आयोजित कराई गई है।

महाराष्ट्र के खिलाड़ियों ने जरूरतमंदों के लिये ‘गेमचेंजर’ नाम से कोष शुरू किया

  • पिछले रणजी सत्र में कुछ समय के लिये महाराष्ट्र रणजी टीम का नेतृत्व करने वाले नौशाद शेख की की अगुवाई में खिलाड़ियों ने मैदानकर्मियों सहित जरूरतमंदों के लिये एक कोष तैयार किया है जिससे कोविड-19 महामारी के कारण तीन सप्ताह के बंद में उन्हें किसी तरह की परेशानी का सामना नहीं करना पड़े।इन सभी ने ‘गेमचेंजर राहत कोष’ नाम से कोष तैयार किया है।

तबलीगी जमात के विदेशी नागरिक सदस्यों पर कार्यवाई

  • तबलीगी जमात से जुड़े लोग अपनी हरकतों से बाज नहीं आ रहे हैं। मलेशिया से आए तबलीगी जमात के कुछ लोगों ने रविवार को देश से भागने की कोशिश की। उन्हें दिल्ली के इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट पर दबोच लिया गया। इन्हें अब पुलिस को सौंपा जाएगा। पर्यटक वीजा पर आए विदेशी जमातियों का वीजा पहले ही रद्द किया जा चुका है और अब इन पर कानूनी कार्रवाई की तलवार लटक रही है।

पृष्ठभूमि

  • गृह मंत्रालय ने निजामुद्दीन तबलीगी जमात में शामिल विदेशी नगारिकों का पर्यटन वीजा रद्द कर दिया है। गृह मंत्रालय 960 विदेशी नागरिकों को ब्लैकलिस्ट में डालते हुए जमात से संबंधित गतिविधियों में लिप्त पाए जाने पर उनका पर्यटन वीजा रद्द करन का फैसला किया है। इसके अलावा गृह मंत्रालय ने दिल्ली पुलिस और अन्य राज्यों के डीजीपी को निर्देश दिया है कि वे इन विदेशी नागरिकों के खिलाफ विदेशी एक्ट 1946 और आपदा प्रबंधन अधिनियम, 2005 के तहत कानूनी कार्रवाई करने का निर्देश भी दिया है। सरकार पहले भी कह चुकी है कि इनमें से अधिकतर पर्टयन वीजा पर भारत आए हैं। ऐसे में ये किसी धार्मिक कार्यक्रम में शामिल नहीं हो सकते। क्योंकि इसके लिए दूसरा वीजा जारी किया जाता है।

:: अंतर्राष्ट्रीय समाचार ::

कोरोना संक्रमण के लिए विषबेल बन जाता है समूह

  • एक साथ बड़ी संख्या में लोगों की उपस्थिति और उनके बीच अपेक्षित शारीरिक दूरी का अभाव समूह संक्रमण की बड़ी वजह बनता है। जिस संक्रमण से देश को बचाने के लिए लॉकडाउन किया गया, आज उस प्रयास को पलीता लगता नजर आ रहा है। वजह हम सबके सामने है। निजामुद्दीन की तब्लीगी जमात में शामिल लोगों की जांच रिपोर्ट ने चिंताएं बढ़ा दी हैं।
  • देश के अब तक जितने मामले आए हैं, एक चौथाई मामले अकेले तब्लीगी जमात से जुड़े है। जांचें अब भी चल रही हैं, और पॉजिटिव केस मिलने का सिलसिला जारी है। यह तो पहली परत है, कड़ियां खंगाली जाएंगी तो और भी भयावह आंकड़ों से सामना करना पड़ सकता है। दरअसल, लोगों का समूह में होना, शरीरिक दूरी न मानना कोरोना के लिए विषबेल बन जाता है। दुनिया के कई मामले सामने हैं। हमें इन भयावह उदाहरणों से सीख लेनी चाहिए। आइए, समूह संक्रमण के कुछ चर्चित मामलों को एक बार फिर पलट लेते है।

दक्षिण कोरिया की ‘पेसेंट-31’ :

  • दक्षिण कोरिया से निकला पेसेंट-31 का यह टर्म कोरोना के संबंध में काफी प्रचलित हुआ है। दक्षिण कोरिया में शुरुआती दौर में कोरोना नियंत्रण में था। देश में 30 केस और उसकी हिस्ट्री से साबित हुआ था कि इसकी चेन लंबी नहीं है। लेकिन एक 35 वर्षीय महिला जिसने 5 फरवरी को डियॉक की प्रार्थना सभा में हिस्सा लिया। चोटिल होने पर अस्पताल गई, लंच के लिए मित्र के साथ होटल गई, 12 फरवरी को फिर चर्च सर्विस की। जांच में वह पॉजिटिव निकली। यह दक्षिण कोरिया की 31वीं पॉजिटिव थी। मार्च के मध्य तक यह महिला अकेले दक्षिण कोरिया के 60 फीसद मरीजों के पॉजिटिव होने का कारण बन गई।

चीन के बाजार :

  • वुहान का हुनान सी-फूड मार्केट कोरोना के समूह संक्रमण का पहला मामला था। जांच में सामने आया था कि चीन के शुरुआती 41 मरीजों में से दो-तिहाई लोगों को संक्रमण इसी बाजार में जाने से हुआ था। इसके बाद विश्व के अधिकांश देश जूझ रहे है।

इटली का अस्पताल :

  • इटली में कोरोना के समूह संक्रमण का बहुत बड़ा माध्यम अस्पताल माना गया। लोंबार्डी क्षेत्र के एक अस्पताल में 38 वर्षीय एक युवक आया, उसे कोरोना का संक्रमण था, लेकिन जब तक इसके लक्षण गंभीर दिखते वह यहां कई लोगों के संपर्क में आ चुका था। वह युवक चीन से लौटे अपने दोस्त के संपर्क में आया था।

सिंगापुर का होटल :

  • जनवरी में सिंगापुर के एक होटल में 100 से अधिक लोगों की अंतरराष्ट्रीय स्तर की एक व्यापारिक बैठक हुई थी। इनमें से सात लोग पॉजिटिव पाए गए थे। लेकिन जांच रिपोर्ट आने से पहले ही फ्रांस, ब्रिटेन, दक्षिण कोरिया और मलेशिया के 90 नागरिक अपने-अपने देश लौट चुके थे। संक्रमितों में से एक ब्रितानी घर लौटने से पहले घूमने निकल गया था, जिससे कम से कम तीन देशों के 10 लोग सीधे संपर्क में आए।

फ्रांस का चर्च :

  • 18 फरवरी को ओपन डोर मेगाचर्च इवेंट कोरोना के समूह संक्रमण का सबसे बड़ा कारण बन गया। यहां दुनियाभर से सैंकड़ों श्रद्धालु पहुंचे थे जिनमें एक कोरोना संक्रमित भी था। यहां उसने कई लोगों को संक्रमित किया और एक अनुमान के मुताबिक यह कार्यक्रम लगभग 2500 लोगों में कोरोना संक्रमण की वजह बना।

आस्ट्रिया का रिसॉर्ट :

  • आस्ट्रिया की पेजनॉन घाटी के इश्चगिल का एक स्काई रिसॉर्ट 600 के करीब आस्ट्रियाई आबादी और लगभग दोगुना अन्य देशों के लोगों में कोरोना संक्रमण का कारण बना। आस्ट्रियाई अधिकारियों ने भी 2 अप्रैल को यह स्वीकारा कि जर्मनी, नार्वे, आइसलैंड के सैंकड़ों पर्यटक इस रिसॉर्ट में संक्रमित हुए।

जापान के वृद्धाश्रम :

  • नागोया के एक वृद्धाश्रम में 50 कोरोना पॉजिटिव केस पाए गए। यह जापान का पहला बड़ा समूह संक्रमण का मामला था। वैसे भी जापान बुजुर्गों का देश माना जाता है और कोरोना जैसी बीमारी बुजुर्गों के लिए सबसे ज्यादा घातक है।

कैलिफोर्निया का मेगाचर्च :

  • अमेरिका के कई चर्चों ने कोरोना वायरस के प्रकोप के दौरान लोगों को एकत्रित होने दिया। कैलिफोर्निया के मेगाचर्च के 71 सदस्यों में कोरोना वायरस की पुष्टि हुई है। इसके साथ ही उनके बहुत से अन्य लोगों को संक्रमित करने की आशंका जताई जा रही है। वहीं सैक्रोकाउंटी के 350 संक्रमितों में से एक तिहाई को भी चर्च से जोड़ा गया है।

गांवों की ओर बढ़ रहा कोरोना :

  • कोरोना के समूह संक्रमण को रोकने अब अपने देश में बड़ी चुनौती का विषय बनता जा रहा है क्योंकि यह महामारी शहरों से गांवों की ओर बढ़ रही है। गांवों में लोग समूह में ज्यादा रहते हैं और यहां की चिकित्सा व्यवस्थाएं भी लचर हैं। आंकड़ों के लिहाजा से फिलहाल देश के एक तिहाई जिलों में कोविड ने दस्तक दे दी है।

:: भारतीय अर्थव्यवस्था ::

कोविड-19 से एनबीएफसी ने नकदी संकट को लेकर बैंकों से विशेष वित्तपोषण की मांग

  • गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (एनबीएफसी) ने कोरोना वायरस संकट के कारण नकदी को लेकर संकट की आशंका को देखते हुए बैंकों से वित्तपोषण की अतिरिक्त व्यवस्था करने की मांग की है। उद्योग संगठन फिक्की ने एनबीएफसी की ओर से बैंकों से वित्तपोषण की अतिरिक्त व्यवस्था करने की मांग की। इसके अलावा फिक्की ने रिजर्व बैंक से रेपो दर आधारित दीर्घकालिक नीलामी (टारगेटेड एलटीआरओ) में एनबीएफसी के लिये विशेष प्रबंध करने की भी मांग की।
  • फिक्की ने कहा कि यह दो तरीके से किया जा सकता है। उसने कहा, ‘‘बैंक विशेष कोविड-19 व्यवस्था के तहत 10 प्रतिशत अतिरिक्त ऋण दें तथा एनबीएफसी के पास मौजूदा सूचीबद्ध गैर-परिवर्तनीय डिबेंचरों (एनसीडी) के एवज में कुल कर्ज के 10 प्रतिशत के बराबर राशि पुनर्वित्तपोषण के तौर पर दें।’’ फिक्की ने इनके अलावा एनबीएफसी को गैर-निष्पादित परिसंपत्तियों संबंधी प्रावधानों में भी ढील देने की मांग की।

गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनी किसे कहते हैं?

गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनी उस कंपनी को कहते हैं जो ए) कंपनी अधिनियम, 1956 के अंतर्गत पंजीकृत हो, बी) इसका मुख्य कारोबार उधार देना, विभिन्न प्रकार के शेयरों/स्टॉक/ बांड्स/ डिबेंचरों/प्रतिभूतियों, पट्टा कारोबार, किराया-खरीद(हायर-पर्चेज), बीमा कारोबार, चिट संबंधी कारोबार में निवेश करना, तथा सी) इसका मुख्य कारोबार किसी योजना अथवा व्यवस्था के अंतर्गत एकमुश्त रूप से अथवा किस्तों में जमाराशियां प्राप्त करना है।

लॉकडाउन से अर्थव्यवस्था पर गहरी चोट, 52 फीसदी नौकरियों पर संकट

  • कोरोना वायरस ने पूरी दुनिया में कहर बरपाया है और अब तक साढ़े बारह लाख से अधिक लोग इस वायरस की चपेट में आ चुके हैं। यह वायरस करीब 70000 लोगों की जान ले चुका है। पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था को इस वायरस ने जबर्दस्त चोट पहुंचाई है। जहां तक भारत का सवाल है तो यहां की अर्थव्यवस्था भी एक गहरे संकट में फंस गई है। इस बीच भारतीय उद्योग परिसंघ (सीआईआई) के एक सर्वेक्षण से पता चला है कि देश में नौकरियों पर गहरा संकट आने वाला है और 52 फ़ीसदी लोगों की नौकरियां जा सकती हैं।

सीआईआई ने किया सर्वे

  • कोरोना वायरस के संक्रमण को रोकने के लिए देश में 21 दिनों का लॉकडाउन घोषित किया गया है। सीआईआई का मानना है कि इस लॉकडाउन का अर्थव्यवस्था पर गहरा असर पड़ने वाला है। सीआईआई ने अर्थव्यवस्था और नौकरियों पर संकट को लेकर हाल में एक सर्वेक्षण किया है। सीआईआई के करीब 200 मुख्य कार्यकारी अधिकारियों के बीच यह ऑनलाइन सर्वेक्षण किया गया है।

भारतीय उद्योग परिसंघ (सीआईआई)

  • भारतीय उद्योग परिसंघ (सीआईआई) भारतीय कारोबारियों का एक संघ है. जो देश में उद्योग के विकास के लिए अनुकूल माहौल बनाने के लिए काम करता है. इसकी स्थापना वर्ष 1985 में की गई थी. यह भारत के औद्योगिक विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है. इस संगठन का मुख्यालय नई दिल्ली में है.

:: विज्ञान और प्रौद्योगिकी ::

इलेक्ट्रो-फ्रीक्वेंसी-वाइब्रेंशन टेक्नोलॉजी से कोरोना वायरस का उपचार

  • पूरी दुनिया में कोरोना वायरस को हराने को लेकर शोध किए जा रहे हैं। बायोकेमिकल मॉडल (आधुनिक चिकित्सा पद्धति) ने जहां कोरोना वायरस के खिलाफ रासायनिक पदार्थों को लड़ाई का आधार बनाया है, वहीं एक वैकल्पिक पद्धति भी सामने आई है। पदार्थों की तरंगों की आवृत्ति के आधार पर ईएफवी (इलेक्ट्रो-फ्रीक्वेंसी-वाइब्रेंशन) मॉडल आया है। इसमें दावा किया गया है कि कुछ दिनों तक 61 मिनट का समय खर्च करके कोई भी संक्रमित व्यक्ति कोरोना वायरस से मुक्ति पा सकता है। वो भी बिना किसी दवा के। सिर्फ 21 मिनट तक कुछ अनुनाद आधारित आवाजें सुननी होगी

क्या है इलेक्ट्रो-फ्रीक्वेंसी-वाइब्रेंशन :

  • साउंड थेरेपिस्ट इक्वांक आनखा ने इस मॉडल को प्रस्तावित किया है। उन्होंने मशहूर वैज्ञानिक निकोला टेस्ला के सिद्धांत को आधार बनाया है। टेस्ला ने कहा था, ‘यदि आप यूनिवर्स के रहस्य जानना चाहते हैं तो ऊर्जा, तरंग और आवृत्ति पर फोकस कीजिए।’ इसी आधार पर इक्वांक का मानना है कि हर पदार्थ की अपनी आवृत्ति होती है, जिस पर उसकी तरंगें अनुनाद करती हैं। शोध में पाया गया कि कोरोना के जीनोम, पॉलिमर्स और प्रोटीन एक खास आवृत्ति पर अनुनाद करते हैं। मानव शरीर की भी अपनी आवृत्ति होती है और अनुनाद भी।

मिला आधार :

  • अमेरिका में गिलाड साइंसेज की दवा रेमडेसिर को कोरोना के खिलाफ कारगर माना गया है। पहला मानव ट्रायल भी सफल रहा है। अनुनाद मॉडल के शोधकर्ताओं ने माना कि रेमडेसिर के अणु भी कोरोना की तरह ही तीन आवृत्तियों पर अनुनाद करते हैं। इसके अलावा अभी कोरोना के इलाज में इस्तेमाल की जा रहीं क्लोरोक्वीन की आवृत्ति भी कोरोना की आवृत्ति के ही आसपास है।

कैसे करती है काम :

  • हमारा शरीर इलेक्ट्रो-मैग्नेटिक पल्स पर काम करता है। हमारा दिल जब सही आवृत्ति पर नहीं धड़कता है तो एक इलेक्ट्रो- मैग्नेटिक डिवाइस पेसमेकर लगाई जाती है, जो सही इलेक्ट्रॉनिक पल्स भेजकर दिल को सही आवृत्ति पर काम करने को कहती है। हमारे शरीर की भी अपनी आवृत्ति और अनुनाद होते हैं। कोई भी वायरस, जो मूलत: एक कोशिका होती है, अपनी आवृत्ति और अनुनाद हमारे शरीर पर थोप देता है। अपने अनुनाद के जरिये ही वायरस जहर फैलाता है और शरीर को कमजोर करता है। ईएफवी मॉडल मानता है कि कोरोना के तीन मूल हिस्सों जीनोम (जैविक पदार्थ, पॉलिमर्स और प्रोटीन के जोड़ को बाहर से विरोधी आवृत्ति का अनुनाद देकर तोड़ा जा सकता है। यदि वायरस का जोड़ ही टूट जाएगा तो वायरस अपने आप निष्प्रभावी होकर मर जाएगा।

तीन आवृत्तियों से होता है जोरदार वार :

  • शोधकर्ताओं ने जीनोम, पॉलिमर्स और प्रोटीन के तीन अलग-अलग आवृत्ति व अनुनाद खोज निकाले हैं। इनकी काट के लिए भी तीन आवृत्ति के अनुनाद पहचाने गए हैं। हेडफोन के जरिये साउंड वेब संक्रमित मरीज को भेजी जाती है, जो ब्रेनवेव ट्रांसमिशन के सिद्धांत को पालन करते हुए शरीर में फैल जाती है। यह आवाज साइनसोएडल टोन होती है। यह प्रकृति की मूल आवृत्तियां व अनुनाद हैं। आइसोक्रोनिक आवाजों को संगीत में ढाला जाता है, जिसे हम लोग सुन सकें। इस दौरान इंसान की दिमागी गतिविधियों पर सेंसर के जरिये निगाह रखी जाती है। साथ ही ईसीजी और एलएफटी (लीवर फंक्शन टेस्ट) किया जाता है, ताकि संक्रमित व्यक्ति के स्वास्थ्य की जानकारी मिल सके।

तीन डोज और 61 मिनट :

  • हर दिन महज 61 मिनट का समय संक्रमित मरीज का इस थेरेपी में लगता है। सात-सात मिनट तक हेडफोन के जरिये रोधी आवृत्ति व अनुनाद की इलेक्ट्रो-मैग्नेटिक तरंगें दिमाग को भेजी जाती है। हर बार इन आवाजों को काम करने का मौका देने के लिए 20-20 मिनट का ब्रेक दिया जाता है, ताकि शरीर बाहर से भेजे गए इस इलेक्ट्रो-मैग्नेटिक कोड को समझ सके और उस पर प्रतिक्रिया कर सके।

ईएफवी के फायदे :

  • चिकित्सा का यह मॉडल किसी प्रकार का साइड इफेक्ट पैदा नहीं करता है। इससे शरीर में किसी तरह का जहर पैदा नहीं होता है, जैसा आधुनिक चिकित्सा मॉडल में दवाओं के असर के कारण होता है। शोधकर्ताओं का दावा है कि इस मॉडल से किसी तरह का नुकसान संक्रमित व्यक्ति को नहीं होता है।

एंटी एजिंग दवाएं कोरोना पर असरकारक

  • जिन दवाओं को तमाम लोग बढ़ती उम्र को कम दिखाने के लिए प्रयोग करते हैं, वे दवाएं कोरोना पर असरकारक हो सकती हैं। इंटरनेशनल रिसर्च जर्नल में प्रकाशित शोध के मुताबिक एंटी एजिंग और कोशिकाओं को मरने से बचाने वाली (सेनोलाइटिक्स) दवाएं कोरोना से लड़ाई में बड़ा हथियार साबित हो सकती हैं।
  • क्लीनिकल इम्यूनोलाजिस्ट डॉ. स्कंध शुक्ला ने इंटरनेशनल मेडिकल जर्नल एजिंग में अपने कोविड-19 एंड क्रोनोलॉजिकल एजिंग (सेनोलाइटिक्स एंड अदर एंटी एजिंग ड्रग फार दी ट्रीटमेंट एंड प्रिवेंशन आफ कोरोना वायरस इंफेक्शन) शोध का हवाला देते कहा है कि बचाव और इलाज के लिए इन दवाओं के इस्तेमाल पर विचार किया जा सकता है। विशेषज्ञों का कहना है कि कोविड-19 सीवियर एक्यूट रेस्पिरेटरी सिंड्रोम और मिडिल ईस्ट रेस्पिरेटरी सिंड्रोम परिवार का एक नया उभरता हुआ वायरस है।

किस प्रकार ये दवा होंगी असरदार

  • कोविड-19 अधिक उम्र वाले रोगियों पर ज्यादा हमला करता है। यह इस सवाल का जवाब देता है कि कोरोना संक्रमण और उम्र बढऩे की प्रक्रिया के बीच एक कार्यात्मक संबंध है। कोविड-19 के लिए दो रिसेप्टर्स हैं, जो कि महत्वपूर्ण भूमिका अदा कर रहे हैं। एक सीडी 26 है और दूसरा एसीई-2 (एंजियोटेंसिन परिवर्तित एंजाइम 2) है। दिलचस्प बात यह है कि दोनों ही उम्र बढऩे से संबंधित हैं। इसी तरह कोरोना संक्रमण में दो प्रस्तावित दवाएं एजिथ्रोमाइसिन और क्वेरसेटिन भी महत्वपूर्ण सेनोलाइटिक गतिविधि यानि बुढ़ापे के सेल को मारते हैं। इसके अलावा क्लोरोक्वीन संबंधित बीटा-गैलेक्टोसि भी बुढ़ापे के मार्कर है। अन्य एंटी-एजिंग ड्रग्स पर भी विचार किया जाना चाहिए, जैसे कि रैपामाइसिन और डॉक्सीसाइक्लिन, क्योंकि वे प्रोटीन संश्लेषण के अवरोधक के रूप में व्यवहार करते हैं और कोशिकाओं से उच्चस्तर की सूजन वाले साइटोकिन्स, इम्यून मॉड्यूलेटर, ग्रोथ फैक्टर और प्रोटीन के स्राव को रोकते हैं।

इन्फ्रा-रेड व अल्ट्रा-वॉयलेट किरणों से थमेगी वायरस की रफ्तार

  • लंबे होते दिन और बढ़ती धूप नए कोरोना वायरस के संक्रमण की रफ्तार धीमी कर सकती है। खासतौर से खुली जगहों पर वायरस को रोकने में यह कारगर हो सकता है। ग्रीस के प्रमुख शोध संस्थानों के वैज्ञानिकों ने सूर्य के प्रकाश में मौजूद इन्फ्रा-रेड (आईआर) व अल्ट्रा-वॉयलेट (यूआर) किरणों से संक्रमण फैलने की गति पर रोक लगने की उम्मीद जताई है।
  • इन वैज्ञानिकों के अनुसार सर्दियों के बाद लंबे दिनों से वातावरण में सूर्य के प्रकाश संग इन किरणों की मौजूदगी बढ़ी है। ऐसे में इसका परिणाम जल्द सामने आ सकता है। प्राकृतिक रूप से खुले स्थानों पर सूर्य के प्रकाश में मौजूद इन किरणों से वायरस के बढ़ने की गति धीमी हो सकेगी। इसके अलावा कृत्रिम इन्फ्रा-रेड और अल्ट्रा वायलट किरणों को सैनिटाइजेशन के लिए भी इस्तेमाल हो सकता है।

ग्रीस के वैज्ञानिकों का आकलन

  • वायरस खत्म करने में लंबे दिन और धूप की भी होगी भूमिका

नमी-गर्मी पर विरोधाभासी दावे

  • दरअसल, इस वायरस पर बदलते मौसम, नमी और गर्मी से होने वाले असर को लेकर विरोधाभासी दावे किए जाते रहे हैं। लेकिन इंफ्रा रेड और अल्ट्रा वायलट किरणों को लेकर ऐसा कोई शोध नहीं।

यूवी किरणों से सैनिटाइजेशन

  • शोध में दावा किया गया है कि चीन ने अपने देश की मुद्रा, बस, अस्पताल, आदि सैनिटाइज करने के लिए कृत्रिम यूवी किरणों का उपयोग किया है। सेल-कल्चर रूम और खाद्य पदार्थों के विसंक्रमण के लिए भी इनका उपयोग होता है

क्या हैं अल्ट्रा वायलेट-इंफ्रा रेड किरणें

  • सूर्य के प्रकाश से छिपे लेकिन महत्वपूर्ण तत्वों के रूप में आईआर व यूआर किरणें निकलती हैं। आईआर किरणें वातातवरण में गर्मी को लो-एनर्जी इलेक्ट्रोमैग्नेटिक (ईएम) तरंगों से आगे बढ़ाती हैं। तो यूवी किरणें हाई-एनर्जी ईएम तरंगें पैदा करती हैं। सर्दी या आसमान में बादल होने के बावजूद सूर्य से निकली ये तरंगे धरती तक पहुंचती हैं। इनकी वेवलैंथ कम होती है, इसलिए इन्हें सामान्य परिस्थितियों में देखा नहीं जा सकता।

इसलिए उम्मीद...

  • यह पूर्व-प्रमाणित है कि अधिक ऊर्जा लिए यूवी किरणें किसी भी जीव के डीएनए और आरएनए में मौजूद न्यूक्लिक एसिड को नुकसान कर सकती हैं। इन किरणों का असर वायरस व बैक्टीरिया के आरएनए पर भी होता है।

सस्ता स्वदेशी वेंटिलेटर, पर्सनल सैनिटाइजेशन चैंबर और फेस मास्क

  • कोरोनावायरस के खिलाफ छिड़ी इस जंग में देश का हर शख्स अपना योगदान दे रहा है। सामाजिक संस्थानों से जुड़े लोग गरीबों की मदद कर रहे हैं। शैक्षणिक, शोध संस्थानों और निजी संस्थानों से जुड़े वैज्ञानिक इलाज को लेकर तमाम तकनीक तैयार कर रहे हैं। शनिवार को देश के वैज्ञानिकों ने तीन नए इनोवेटिव प्रोडक्ट तैयार करने में कामयाबी हासिल की। एक तरफ जहां गुजरात के वैज्ञानिकों ने बेहद सस्ता वेंटिलेटर बनाया तो दूसरी ओर पुणे के वैज्ञानिकों ने कोरोना का सैंपल लेने वाला स्वाब डेवलप किया। डीआरडीओ के वैज्ञानिकों ने सर्जिकल सूट और फेस मास्क के बाद अब सेल्फ सैनिटाइजेशन चैंबर तैयार किया है। खास बात यह है कि तीनों प्रोडक्ट कोरोना के खिलाफ इस लड़ाई में देश की काफी मदद कर सकते हैं।

स्वदेशी पॉलिमर स्वाब

  • पुणे की सेंटर फॉर मटेरियल्स फॉर इलेक्ट्रॉनिक्स टेक्नोलॉजी (सीमेट) के वैज्ञानिकों ने कम लागत वाला स्वदेशी पॉलिमर स्वाब तैयार करने में कामयाबी हासिल की है। केंद्र के डॉ. मिलिंद कुलकर्णी के मुताबिक, स्वाब का उपयोग कोरोनावायरस परीक्षण के लिए एकत्रित किए जाने वाले सैंपल को रखने में काम आता है। अभी इसे इटली, अमेरिका और जर्मनी से मंगाया जाता है।

स्वदेशी वेंटिलेटर

  • गुजरात के राजकोट की ज्योति सीएनसी कंपनी ने स्वदेशी वेंटिलेटर तैयार करने में कामयाबी हासिल की है। इसे धामन-1 नाम दिया गया है। इसके सभी हिस्से स्वदेशी हैं। कंपनी का दावा है कि इसकी कीमत महज 1 लाख रुपये है जबकि विदेश से आने वाला 1 वेंटिलेटर कम से कम 6.50 लाख रुपये का मिलता है।

डीआरडीओ ने बनाया सैनिटाइजेशन चैंबर और फेस प्रोटेक्शन मास्क

  • कोरोनावायरस से निपटने के लिए तैयार डिफेंस रिसर्च एंड डेवलपमेंट ऑर्गनाइजेसन (डीआरडीओ) ने एक फुल बॉडी डिसइन्फेक्शन चैंबर बनाया है। इसे सैनिटाइजेशन चैंबर भी कहा जा रहा है। साथ ही फेस प्रोटेक्शन मास्क भी बनाया है, जिसे हॉस्पिटल में सप्लाई भी किया जा रहा है। दिल्ली के अहमदनगर में डीआरडीओ की लेबोरेटरी ‘व्हीकल रिसर्च एंड डेवलपमेंट इस्टैबिलसमेंट’ने इस सैनिटाइजेशन चैंबर को डिजाइन किया है। डीआरडीओ ने कहा कि यह एक पोर्टेबल सिस्टम है। इस चैंबर में व्यक्ति को एक बार में पूरी तरह से सैनिटाइज किया जाएगा। इसमें एक पैडल के माध्यम से खुद को सैनिटाइज किया जाता है। चैंबर में पंप के माध्यम से हाइपो सोडियम क्लोराइड की तेज फुहार डाली जाती है। यह स्प्रे 25 सेकंड तक चलता है। इस चैंबर में व्यक्ति को अपनी आंखे बंद रखनी होती हैं। इस चैंबर में 700 लीटर का टैंक है। एक बार में करीब 650 लोगों को सैनिटाइज किया जा सकता है

एंटीबॉडी आधारित त्वरित रक्त जाँच शुरू कराये सरकारः ICMR DG

  • भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) महानिदेशक ने स्वास्थ्य सचिव को पत्र लिखकर उन्हें राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में कोरोना वायरस संक्रमण का पता लगाने के लिये एंटीबॉडी-आधारित त्वरित रक्त जांच शुरू करने के परामर्श का प्रसार करने को कहा है। एंटीबॉडी-आधारित त्वरित रक्त जांच के नतीजे 15-30 मिनट में आ जाते हैं। आईसीएमआर ने शनिवार को उन क्षेत्रों में एंटीबॉडी आधारित त्वरित रक्त जांच शुरू करने का परामर्श जारी किया, जो अत्यधिक प्रभावित हैं और जहां बाहर से बड़ी संख्या में प्रवासी पहुंचे हैं।

इंसान के साथ जानवरों में भी फैल रहा कोरोना वायरस, भारत ने जारी की एडवाइजरी

  • दुनियाभर में इस समय कोरोना वायरस का कहर जारी है। हाल में आई रिपोर्ट ने लोगों की चिंताओं को और बढ़ा दिया है। अब तक विश्व में लगभग 60 हजार लोगों की जान जा चुकी है। लोगों के साथ अब जानवर भी इस बीमारी की चपेट में आ रहे हैं। अमेरिका के न्‍यूयॉर्क राज्‍य में एक टाइगर को कोरोना वायरस से संक्रमित पाया गया है। दावा किया जा रहा है कि इंसानों से जानवरों बीच संक्रमण फैलने का यह पहला मामला है। विशेषज्ञों ने चेतावनी देते हुए कहा है कि अगर दुनिया के अन्य देशों में भी जानवरों में संक्रमण फैलता है तो स्थिति ज्यादा खराब हो सकती है। वहीं भारत ने पूरे देश में स्थित चिड़ियाघरों को एडवाइजरी जारी करते हुए अतिरिक्त सतर्कता बरतने के निर्देश जारी किया है।
  • न्‍यूयॉर्क के ब्रोन्‍क्‍स जू में एक मादा टाइगर में कोरोना वायरस के संक्रमण की पुष्टि हुई है। नादिया नाम के इस मलेशियाई टाइगर और तीन अन्‍य बाघों को सूखी खांसी आने के बाद उसकी कोरोना जांच की गई थी। इस जांच में नादिया को कोरोना पॉजिटिव पाया गया। ब्रोनक्स चिड़ियाघर के वाइल्डालाइफ कन्जरवेशन सोसाइटी ने एक बयान जारी करके इसकी जानकारी दी।

भारत ने भी चिड़ियाघरों को जारी की चेतावनी

  • भारतीय केंद्रीय चिड़ियाघर प्राधिकरण ने देश के सभी चिड़ियाघरों को चेतावनी जारी करते हुए कहा है कि वे अतिरिक्त सतर्कता बरतें और किसी भी असामान्य व्यवहार के लिए सीसीटीवी के माध्यम से जानवरों की सतत निगरानी करें।
  • विश्व पशु स्वास्थ्य संगठन ने पालतू जानवरों को घर के अंदर ही रखने को कहा
  • विश्व पशु स्वास्थ्य संगठन ने भी अपनी रिपोर्ट में कहा है कि इस बात का कोई सबूत नहीं है कि संक्रमित जानवर अपने द्वारा संक्रमण को और ज्यादा जानवरों में फैला सकते हैं। हालांकि उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि पालतू जानवरों के मालिक उन्हें जितना हो सके घरों के अंदर ही रखें।

पहले भी एक बिल्ली और दो कुत्तों को हो चुका है संक्रमण

  • बेल्जियम में मार्च के अंत में एक पालतू बिल्ली भी कोरोना वायरस से संक्रमित पाई गई थी। इसके अलावा हॉन्ग कॉन्ग में भी इसी तरह के दो मामले सामने आए थे, जहा दो कुत्ते कोरोना वायरस से संक्रमित मिले थे। इन सभी जानवरों के बारे में कहा गया था कि ये अपने मालिकों के संपर्क में आने के कारण संक्रमित हो गए थे।

:: पर्यावरण और पारिस्थितिकी ::

खनन और खनिज (विकास एवं विनियम) अधिनिययम 1957 में संशोधन

  • कुम्हारों को मिट्टी के बर्तन आदि बनाने के लिये मिट्टी के खनन और बारिश में आयी बाढ़ के कारण खेतों में जमा होने वाली बालू को हटाने के लिये किसानों को अब पर्यावरण नियमों के तहत मंजूरी लेने की बाध्यता को खत्म कर दिया गया है।
  • पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने खनन और खनिज (विकास एवं विनियम) अधिनिययम 1957 में संशोधन कर इस तरह की अन्य गतिविधियों के लिये पर्यावरण मंजूरी लेने से अब छूट दे दी है।
  • उल्लेखनीय है कि मौजूदा व्यवस्था में खनन संबंधी इस तरह की तमाम गतिविधियों के लिये पर्यावरण मंत्रालय से अनापत्ति प्रमाण पत्र लेना अपेक्षित है।

क्या किया गया संशोधन

  • कुम्हारों को मिट्टी के बर्तन आदि बनाने के लिये बिना मशीनों का इस्तेमाल किये हाथ से मिट्टी या बालू की उनकी प्रथाओं के अनुसार निकासी (मैनुअल खनन) के लिए भी अब पर्यावरण मंजूरी लेना जरूरी नहीं होगा। इस दायरे में मिट्टी के खपरैल (मिट्टी की टाइल) बनाने के लिये साधारण मिट्टी या बालू के गैर मशीनी खनन को भी शामिल किया गया है।इन नियमों में संशोधन को जरूरी बताते हुये दलील दी कि इस प्रकार की आजीविका से जुड़ी पारंपरिक गतिविधियों से संबद्ध समुदायों ने ऐसी गैरजरूरी मंजूरी लेने की अनिवार्यता को खत्म करने का अनुरोध किया था। इनके प्रतिवेदनों पर विचार विमर्श के बाद नियमों में बदलाव किया गया है। इसमें अंतरज्वारीय क्षेत्रों में रहने वाले समुदायों की हाथ से चूना पत्थर के खनन में पर्यावरण मंजूरी को हटाने की मांग भी शामिल थी।
  • किसानों को हर साल बारिश जनित बाढ़ के कारण खेतों में आयी बालू को हटाने के लिये खनन नियमों के तहत पर्यावरण मंजूरी लेने की जरूरत को भी समाप्त कर दिया गया है। इतना ही नहीं ग्राम पंचायत की जमीन से बालू या मिट्टी के व्यक्तिगत उपयोग या गांव में सामुदायिक कार्य के लिये पूर्व प्रचलित प्रथाओं के अनुसार खनन को भी पर्यावरण मंजूरी के दायरे से बाहर कर दिया गया है।
  • अब गांव के तालाब या अन्य जलस्रोत से गाद हटाने और मनरेगा सहित तमाम सरकारी योजनाओं द्वारा प्रायोजित ग्रामीण सड़क, तालाब या बांध बनाने के लिये, सड़क और पाइपलाइन बिछाने जैसे कामों में मिट्टी की निकासी और आपदा प्रबंधन के तहत जलस्रोतों से गाद निकालने के कार्यों को भी पर्यावरण मंजूरी की बाध्यता से मुक्त किया गया है।
  • इसके अलावा ग्रामीण क्षेत्रों के लिये सिंचाई और पेयजल के लिये कुंओं की खुदाई और ऐसी इमारतों, जिनके निर्माण के लिये पर्यावरीण अनापत्ति अपेक्षित नहीं है, की नींव खोदने से पहले अब पर्यावरण मंजूरी लेना जरूरी नहीं होगा।

लॉकडाउन से कार्बन उत्सर्जन में ऐतिहासिक गिरावट

  • कोरोना वायरस के संक्रमण के कारण अमेरिका, भारत समेत सैकड़ों देशों में लॉकडॉउन के कारण भले ही अर्थ व्यवस्थाएं थम गई हों। लेकिन दुनिया भर में बड़े पैमाने पर औद्योगिक और मानवीय गतिविधियां कम होने से पिछले कुछ ही दिनों में पर्यावरण में बेहतरीन सुधार आया है। पूरे विश्व में कार्बन उत्सर्जन इस साल इतना अधिक कम हो गया है जितना 75 साल पहले द्वितीय विश्व युद्ध के बाद हुआ था। कार्बन उत्सर्जन के आंकड़े जुटाने वाले विश्व भर के वैज्ञानिकों के अनुसार साल दर साल इसी रफ्तार से कार्बन उत्सर्जन 5 फीसद तक कम हो सकता है।

पांच फीसद कम हो सकता है कार्बन उत्‍सर्जन

  • वैश्विक कार्बन उत्सर्जन का हिसाब रखने वाले ग्लोबल कार्बन प्रोजेक्ट के चेयरमैन रॉब जैक्सन का कहना है कि 2008 के वित्तीय संकट के बाद 1.4 फीसद कार्बन उत्सर्जन में कमी आई थी जो अब पांच फीसद तक हो सकती है। कैलीफोर्निया की स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी अर्थ सिस्टम साइंस के प्रोफेशर जैक्सन ने कहा कि इस साल कार्बन उत्सर्जन में पांच फीसद या उससे भी ज्यादा की गिरावट आश्चर्यजनक होने वाली है। ऐसा द्वितीय विश्व युद्ध के बाद से नहीं देखा गया है।

कभी नहीं दिखा इतना अच्‍छा प्रभाव

  • जैक्सन ने कहा कि कितने ही बड़े संकट आए हों, चाहे सोवियत संघ का विघटन हो, तेल संकट हो या बैंकों के कर्ज का संकट हो, कभी भी उसका पर्यावरण पर इतना अच्छा प्रभाव नहीं पड़ा है। लेकिन इस लॉकडाउन ने औद्योगिक इकाइयों, एयरलाइनों और सभी प्रकार की मानवीय गतिविधियों की रोकथाम कर दी है। नतीजतन, पिछले 50 सालों में किसी संकट ने कार्बन उत्सर्जन पर इतना असर नहीं डाला जितना कोरोना वायरस संक्रमण की रोकथाम के लिए विभिन्न देशों में किए गए लॉकडाउन ने किया है।

अगले साल फिर बिगड़ जाएंगे हालात

  • हालांकि इंग्लैंड की एक्सटर यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिक पीयरे फ्रेडलिंगस्टन का कहना है कि पर्यावरण में यह सुधार कुछ ही अरसे के लिए है। चूंकि कोविड-19 महामारी के बाद विश्व में आर्थिक संकट से निपटने के लिए दुनिया फिर से अपनी पुरानी दिनचर्या पर चल देगी। अगले साल तक कार्बन उत्सर्जन की स्थिति फिर वहीं की वहीं पहुंच जाएगी।

लॉकडाउन से यमुना हो गया निर्मल

  • यमुना की अविरलता और निर्मलता के लिए केंद्र व दिल्ली सरकार के प्रयास बीते करीब तीन दशकों से बेशक कामयाब न हो सके हों, लेकिन 10 दिन के लॉकडाउन के दौरान नदी ने खुद ही अपने को साफ कर लिया है।
  • नदी का जल नीला होने साथ ही नजदीक जाने पर उसकी तली भी इस वक्त दिख रही है। लॉकडाउन से पहले काले पानी से लबालब नदी दूर से नाले सरीखी नजर आती थी। यानी यमुना ने खुद को पुनर्जीवित करने का अपना मॉडल पेश कर दिया है।
  • कोरोना वायरस से पैदा हुए संकट के इस दौर में विशेषज्ञ नदी की अपने स्तर पर की जाने वाली साफ-सफाई को भविष्य के मॉडल के तौर पर देख रहे हैं, जिसके सहारे सभी नदियों को पुनर्जीवित करना संभव हो सकेगा।
  • विशेषज्ञों का कहना है कि अगर केंद्र व राज्य सरकारों ने लॉकडाउन के दौरान नदी के इस नैसर्गिक मॉडल को समझ लिया और उसके अनुसार योजनाएं बनाईं तो बगैर बड़े पैमाने पर मानवीय व वित्तीय संसाधन लगाए नदियों को साफ-सुथरा रखा जा सकेगा। इससे देश की बड़ी आबादी की जल संकट की समस्या भी दूर होगी।
  • उधर, केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) और दिल्ली जल बोर्ड इस तरह के बदलावों का अध्ययन करने की योजना तैयार कर रहा है। सीपीसीबी के एक वरिष्ठ वैज्ञानिक ने बताया कि बोर्ड जल्द ही नदी से सैंपल लेगा। इसके आधार पर देखा जाएगा कि लॉकडाउन का नदी की सेहत पर असर क्या रहा है। हालांकि, इस तरह की एक स्टडी बोर्ड वायु की गुणवत्ता पर पहले से कर रहा है। दूसरी तरफ, दिल्ली जल बोर्ड के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि नदी से सैंपल लिया जाएगा। इसके आधार पर बोर्ड भविष्य में नदी को स्वच्छ रखने का खाका तैयार करेगा।

औद्योगिक वेस्ट और सीवर का लोड नहीं होने का परिणाम

इस वक्त औद्योगिक वेस्ट शून्य है। फिर, बाजार बंद होने से सीवर का लोड भी कम हुआ है। साथ ही, नदी के जल में इंसानों का दखल कम है। इससे नदी अपनी गाद को तली तक छोड़ बह रही है। इसका मिला-जुला असर साफ-सुथरे पानी के तौर पर दिख रहा है। नदी के खुद को पुनर्जीवित करने के नैसर्गिक मॉडल का भविष्य में इस्तेमाल किया जा सकता है। नजफगढ़ और शाहदरा ड्रेन में कॉस्ट्रक्टिव वेटलैंड बनाकर दिल्ली में नदी की बड़ी समस्या दूर की जा सकेगी।

दिल्ली के 33 औद्योगिक क्षेत्रों में एक लाख से ज्यादा फैक्टरियां हैं। हालांकि यहां सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) लगे हुए हैं, लेकिन बड़ी मात्रा में औद्योगिक कचरा सीधे नालों में छोड़ दिया जाता है। इससे नदी प्रदूषित होती है। इस वक्त औद्योगिक कचरा एकदम नहीं निकल रहा है। इससे नदी की सेहत बेहतर हुई है।

भविष्य के लिए बेसलाइन हो सकते हैं 21 दिन

  • करीब तीन दशक पहले यमुना को साफ करने के लिए यमुना एक्शन प्लान लागू हुआ था। इस बीच करोड़ों-करोड़ रुपये इस पर खर्च भी किए गए, लेकिन नदी बद से बदतर होती गई। पिछले दस दिन के लॉकडाउन ने इसे साफ-सुथरा कर दिया है। सरकारों व उसकी एजेसियों के लिए यह 21 दिन बेसलाइन की तरह हो सकते हैं। केवल यमुना ही नहीं, पूरे देश की नदियों का पानी इस बीच साफ हुआ है।
  • आंकड़ों में यमुना
  • नदी की कुल लंबाई का महज दो फीसदी हिस्सा दिल्ली में होता है प्रवाहित, लेकिन 70 फीसदी प्रदूषण दिल्ली से।
  • दिल्ली से निकलता है 3267 मिलियन लीटर प्रतिदिन (एमएलडी) सीवर, जबकि शोधन क्षमता करीब 2400 एमएलडी।
  • शोधन क्षमता के 37 फीसदी का नहीं होता इस्तेमाल।
  • 60-70 एमएलडी होता है औद्योगिक वेस्ट।
  • दिल्ली के 16 नालों से यमुना में पहुंचती है गंदगी, नजफगढ़ और शाहदरा नाले का बड़ा रोल।
  • नजफगढ़ नाले से आता है 60 फीसदी सीवेज और 45 फीसदी बीओडी।

केन्द्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड

  • केन्द्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी), एक सांविधिक संगठन है। इसका गठन जल (प्रदूषण निवारण एवं नियंत्रण) अधिनियम, 1974 के अधीन सितंबर, 1974 में किया गया था। इसके अलावा, केन्द्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को वायु (प्रदूषण निवारण एवं नियंत्रण) अधिनियम,1981 के अधीन भी शक्तियां और कार्य सौंपे गए।

:: विविध ::

AFC एशियाई कप की मेजबानी के लिए भारत ने पेश किया आधिकारिक दावा

  • भारत ने 2027 में होने वाली एएफसी एशियाई कप फुटबॉल टूर्नामेंट की मेजबानी के लिए अपना दावा पेश किया है। अखिल भारतीय फुटबॉल महासंघ (एआईएफएफ) के एक अधिकारी ने रविवार को इसकी पुष्टि की। अगर भारत को मेजबानी मिल जाती है तो यह पहला अवसर होगा जबकि वह महाद्वीप की सबसे बड़ी खेल प्रतियोगिता का आयोजन करेगा।
  • एएफसी के अगले साल के शुरू में मेजबान देश की घोषणा करने की संभावना है। भारत के अलावा अभी तक सऊदी अरब ने ही 2027 में एशियाई कप की मेजबानी करने की इच्छा जताई है। सऊदी अरब ने तीन बार यह टूर्नामेंट जीता है, लेकिन उसने कभी इसकी मेजबानी नहीं की। भारत ने इससे पहले 2023 एएफसी एशिया कप की मेजबानी के लिए भी दावा किया था, लेकिन अक्टूबर 2018 में वह इस दौड़ से हट गया था। बाद में थाईलैंड और दक्षिण कोरिया ने भी नाम वापस ले लिया था, जिसके बाद चीन को मेजबानी मिली।

:: प्रिलिम्स बूस्टर ::

  • कोरोना वायरस के संभावित इलाज से चर्चा में रहे सेनोलाइटिक्स (Senolytics) दवाओं का प्रयोग किस लिए किया जाता है? (बढ़ती उम्र को रोकने के लिए-एंटी एजिंग और कोशिकाओं को मरने से बचाने)

  • भारत के राष्ट्रपति, उपराष्‍ट्रपति, राज्‍यपाल समेत सांसदों के वेतन में कटौती हेतु किस अधिनियम में  संशोधन किए जाएंगे? (वेतन, आवंटन और पेंशन और संसदीय अधिनियम, 1954)

  • हाल ही में चर्चा में रहे विश्व पशु स्वास्थ्य संगठन (OIE) की स्थापना कब की गई थी एवं इसका मुख्यालय कहाँ है? (1924, पेरिस- फ्रांस)

  • कोरोना वायरस से उत्पन्न चुनौतियों में जरूरतमंदों को राहत पहुंचाने के लिए किस राज्य के खिलाड़ियों के द्वारा ‘गेमचेंजर’कोष की शुरुआत की गई है? (महाराष्ट्र)

  • गरीब लोगों को सस्ती दरों पर जेनेरिक दवा उपलब्ध कराने वाली ‘प्रधानमंत्री जन औषधि योजना’ की शुरुआत कब की गई थी? (2015)

  • हाल ही में कोरोनावायरस की त्वरित एवं सघन जांच के लिए भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (ICMR) के द्वारा जांच की किस प्रणाली को अपनाने की अनुशंसा की गई है? (एंटीबॉडी-आधारित त्वरित रक्त जांच प्रणाली)

  • हाल ही में चर्चा में रहे ‘केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड’(CPCB)  स्थापना किस अधिनियम के तहत की गई थी? (जल प्रदूषण निवारण एवं नियंत्रण अधिनियम, 1974)

  • हाल ही में किस अधिनियम में संशोधन करके बालू या मिट्टी के व्यक्तिगत उपयोग या गांव में सामुदायिक कार्य के लिए खनन अनुमति से छूट प्रदान की गई है? (खनन और खनिज, विकास एवं विनियम अधिनिययम 1957)

  • चर्चा में रहे गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (NBFC) का पंजीकरण किस अधिनियम के तहत किया जाता है? (कंपनी अधिनियम, 1956)

  • हाल ही में चर्चा में भारतीय उद्योग परिसंघ (CII) की स्थापना कब हुई एवं इसका मुख्यालय कहाँ है? (1985, नई दिल्ली)

  • तबलीगी जमात से जुड़े विदेशी नागरिकों पर किस अधिनियम के तहत कार्यवाई की जाएगी? (विदेशी एक्ट 1946)

 

 

 

स्रोत साभार: Dainik Jagran (Rashtriya Sanskaran), Dainik Bhaskar (Rashtriya Sanskaran), Rashtriya Sahara (Rashtriya Sanskaran) Hindustan Dainik (Delhi), Nai Duniya, Hindustan Times, The Hindu, BBC Portal, The Economic Times (Hindi & English), PTI, PIB

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