(दैनिक समसामयिकी और प्रिलिम्स बूस्टर) यूपीएससी और सभी राज्य लोक सेवा आयोग परीक्षाओं के लिए हिंदी में समाचार पत्रों का संकलन (05 मई 2020)

दैनिक समसामयिकी और प्रिलिम्स बूस्टर


(दैनिक समसामयिकी और प्रिलिम्स बूस्टर) यूपीएससी और सभी राज्य लोक सेवा आयोग परीक्षाओं के लिए हिंदी में समाचार पत्रों का संकलन (05 मई 2020)


:: राष्ट्रीय समाचार ::

अटल सुरंग (Atal Tunnel)

चर्चा में क्यों?

  • हिमाचल प्रदेश में बन रही अटल सुरंग (Atal Tunnel) का काम तेजी से चल रहा है। मनाली और लेह की दूरी कम करनेवाली यह सुरंग इस साल के अंत तक पूरी हो सकती है। बॉर्डर रोड ऑर्गेनाइजेशन ने बताया कि काम अभी अहम स्टेज पर है। इसमें लाइटिंग, वेंटिलेशन, इंटेलिजेंट ट्रैफिक कंट्रोल सिस्टम आदि फिट किए जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि टनल के एक तरफ चंद्रा नदी है, जिसे पार करके टनल तक आने के लिए 100 मीटर का स्टील का पुल भी बनाया जा रहा है। काम कोरोना वायरस लॉकडाउन की वजह से 10 दिन ठप रहा था।
  • 15 अक्‍टूबर 2017 को सुरंग के दोनों छोर तक सड़क निर्माण पूरा कर लिया गया था। सीमा सड़क संगठन (बीआरओ) सुरंग का निर्माण कर रही है और निर्माण कार्य इसी साल यानी 2020 तक पूरा हो सकता है।
  • सुरंग पूरी होने पर सभी मौसम में लाहौल और स्पीति घाटी के सुदूर के क्षेत्रों में संपर्क आसान होगा। इससे मनाली और लेह की दूरी 46 किलोमीटर कम हो जाएगी।

पृष्ठभूमि

  • रोहतांग दर्रे के नीचे सुरंग बनाए जाने का ऐतिहासिक फैसला तीन जून 2000 को लिया गया था जब वाजपेयी देश के प्रधानमंत्री थे। सुंरग के दक्षिणी हिस्‍से को जोड़ने वाली सड़क की आधारशिला 26 मई 2002 को रखी गई थी। कुल 8.8 किलोमीटर लंबी यह सुरंग 3000 मीटर की ऊंचाई पर बनायी गई दुनिया की सबसे लंबी सुरंग है।
  • हिमाचल प्रदेश में बन रही इस सुरंग को पिछले वर्ष अटल सुरंग (Atal Tunnel) नाम दिया गया था। 25 दिसंबर को पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की 95वीं जयंती के अवसर पर उनके सम्मान में यह घोषणा की थी। मनाली को लेह से जोड़ने वाली यह रोहतांग सुरंग अब अटल सुरंग के नाम से जानी जाएगी।

समुद्र सेतु अभियान

  • कोरोना वायरस की महामारी के कारण दूसरे देशों में फंसे भारतीय नागरिकों को वापस लाने के लिए सरकार तेजी से काम कर रही है। इस बीच मालदीव और यूएई में फंसे नागरिकों को वापस लाने के लिए नौसेना ने समुद्र सेतु अभियान के तहत अपने जहाज भेजे हैं।
  • मालदीव और यूएई में फंसे अपने नागरिकों को निकालने के लिए भारत ने तीन नौसैनिक जहाज भेजे हैं। आईएनएस मागर के साथ आईएनएस जलाश्व को सोमवार रात मालदीव के लिए रवाना कर दिया गया। जबकि आईएनएस शार्दुल दुबई में फंसे भारतीय प्रवासियों को निकालने के लिए रवाना किया गया है। तीनों जहाज लोगों को लेकर कोच्चि लौटेंगे।
  • आईएनएस मगर और आईएनएस शार्दुल दक्षिणी नौसेना कमान के जहाज हैं, जबकि आईएनएस जलाश्व पूर्वी नौसेना कमान के हैं। आईएनएस जलाश्व विशाखापत्तनम से कुछ दिन पहले पूर्वी तट से पश्चिमी तट तक गया था।खाड़ी और अन्य देशों से भारतीय नागरिकों को निकालने के लिए कुल 14 युद्धपोतों को भेजा गया है।

ई कॉमर्स प्लेटफार्म: Bharat eMarket

  • देश के खुदरा कारोबारियों के संगठन कन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (CAIT) का E-Commerce प्लेटफॉर्म Bharat eMarket अगले एक माह के भीतर लांच हो जाएगा। CAIT के महासचिव प्रवीण खंडेलवाल ने मंगलवार को इस बात की जानकारी दी। खंडेलवाल ने कहा कि इस पोर्टल को लेकर काम बहुत तेजी से चल रहा है और विक्रेताओं का रजिस्ट्रेशन शुरू हो चुका है। संगठन ने पिछले सप्ताह पोर्टल के नाम का खुलासा किया था। ड्रिस्ट्रिब्यूटर्स, थोक विक्रेताओं, ब्रांड्स, रिटेलर्स से लेकर छोटे कारोबारी तक Bharat eMarket के जरिए सामानों की बिक्री के लिए रजिस्ट्रेशन कर सकते हैं। Bharat eMarket अभी ग्रॉसरी की ऑनलाइन बिक्री के साथ शुरुआत करेगी और बाद में अन्य श्रेणी के सामान को भी प्लेटफॉर्म पर लिस्ट किया जाएगा।
  • CAIT के इस मार्केट प्लेस का मुकाबला Flipkart, Amazon, Snapdeal और रिलायंस के आने वाले JioMart जैसी दिग्गज कंपनियों से होगा। कैट भारत सरकार के डिपार्टमेंट फॉर प्रमोशन ऑफ इंडस्ट्री एंड इंटरनल ट्रेड (DPIIT) के साथ साझेदारी में इस पोर्टल को लांच करेगा।

पोर्टल की विशेषता

  • पोर्टल पर सामान सर्च करने पर आपको सबसे पहले आपके पांच किलोमीटर के एरिया की दुकान से सामान खरीदने का ऑप्शन मिलेगा।
  • आपको दो घंटे के भीतर सामान की डिलिवरी मिल जाएगी।
  • इस पोर्टल से सामान मंगाने के लिए आपको डिलिवरी चार्ज नहीं देना होगा।
  • खंडेलवाल ने इस पोर्टल के बारे में जोर देकर कहा कि यह पूरी तरह से स्वदेशी पोर्टल होगा और इसमें एक रुपये का भी विदेशी निवेश नहीं होगा।
  • कैट विक्रेताओं से किसी तरह का कमीशन या शुल्क नहीं लेगा।

पृष्ठभूमि

  • CAIT प्रयागराज, गोरखपुर, वाराणसी, लखनऊ, कानपुर और बेंगलुरु में इस प्लेटफॉर्म को पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर शुरू कर चुका है। इस प्रोजेक्ट को रिटेलर्स, वितरकों और ग्राहकों का जबरदस्त रेस्पांस मिला है। पायलट प्रोजेक्ट से मिली सीख का इस्तेमाल करके सेवाओं को और बेहतर बनाया जाएगा।

जनजातीय संग्रहकर्ताओं एवं कारीगरों की आजीविका और सुरक्षा के लिए उठाये गए कदम

  • जनजातीय कारीगरों के सामने आने वाली अभूतपूर्व कठिनाइयों के आलोक में, सरकार जनजातीय संग्रहकर्ताओं और जनजातीय कारीगरों को सहायता प्रदान करने के लिए तत्काल कई पहल कर रही है। जनजातीय मामले मंत्रालय ने पहले ही ‘जनजातीय उत्पादों के विकास एवं विपणन के लिए संस्थागत सहायता’ स्कीम के तहत गौण वन ऊपज के मदों की एमएसपी में बढोतरी कर दी है। इस स्कीम के तहत जनजातीय मामले मंत्रालय की टीआरआईएफईडी लगभग 10 लाख जनजातीय कारीगरों के परिवारों से जुड़ी है। चूंकि पिछले 30 दिनों से, राष्ट्रव्यापी लाकडाउन के कारण जनजातीय कारीगरों की सारी वाणिज्यिक गतिविधियां रुक गई हैं, कारीगरों के समक्ष अनिश्चितता उत्पन्न हो गई है क्योंकि उनकी आजीविकाओं पर प्रभाव पड़ा है। उनके पास वर्तमान में बड़े भंडार इकट्ठे हो गए हैं जबकि बिक्री नाम मात्र की या बिल्कुल भी नहीं हो रही है। कारीगरों के पास उपलब्ध मदें कई वर्गों की हैं-वस्त्र, उपहार एवं सजावट, वन धन, प्राकृतिक वस्तुएं, धातु, आभूषण, जनजातीय चित्रकारी, पौट्री, केन एवं बांस आदि।
  • उपरोक्त को देखते हुए, जनजातीय समुदाय को तत्कान सहायता उपलग्ध कराने के लिए निम्नलिखित कदम उठाये गए हैं:

क) बिना बिके भंडार की खरीद:

  • अधिकांश जनजातीय कारीगर अपनी आजीविका के लिए अपने जनजातीय उत्पादों की बिक्री पर निर्भर हैं और इसलिए उन्हें तत्काल सहायता की आवश्यकता है। जनजातीय परिवारों को राहत सुनिश्चित करने के लिए जनजातीय मामले मंत्रालय ने वर्तमान लाकडाउन से सर्वाधिक प्रभावित जनजातीय कारीगरों से वर्तमान में उपलब्ध भंडार की खरीद को मंजूरी दी है। इसी के अनुरूप, टीआरआईएफईडी ने देश भर में जनजातीय कारीगरों से लगभग 23 करोड़ रुपये के मूल्य के बराबर के जनजातीय उत्पादों की खरीद की योजना बनाई है।
  • इसके अतिरिक्त, टीआरआईएफईडी उद्योग संघों, प्रमुख कंपनियों एवं व्यावसायिक संगठनों के पास जनजातीय कारीगरों के भंडार की खरीद के लिए वीडियो कॉन्फ्रेंस वेबिनारों के माध्यम से प्रोत्साहित करते हुए पहुंचने की कोशिश कर रही है जिसका उपयोग इनके लिए किया जा सकता है:
  1. एकमुश्त खरीद एवं बिक्री
  2. उपहार देने की आवश्यकताएं
  3. फोल्डरों, स्टेशनरी, आदि जैसे कांफ्रेस/सेमीनार की मदें
  4. पेंटिंग, डोकरा आदि जैसी अलंकरण मदेों सहित कार्यालयों के लिए आपूर्तियां
  5. फ्रैंचाइजी माडल की खोज की जा सकती है
  6. अनिवार्य वस्तुओं (वन धन नैचुरल्स) जैसे कि शहद, साबुन, मसाले, चावल, कदन्न, चाय और काफी की किस्मों आदि की थोक आपूर्तियों की खरीद की जा सकती है और नियमित आपूर्तियों के लिए करार किया जा सकता है।
  7. वर्तमान स्थिति में विश्व स्वास्थ्य संगठन, यूनिसेफ, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी दिशानिर्देशों का अनुपालन करते हुए कुछ जनजातीय कारीगरों द्वारा मास्क एवं हैंड सैनिटाइजरों का निर्माण किया जा रहा है।

ख) ट्राइब्स इंडिया कारीगरों को मासिक राशन का प्रावधान

  • जनजातीय कारीगरों को कुछ राहत उपलब्ध कराने के लिए टीआरआईएफईडी ने जनजातीय परिवार घटक के साथ खड़े होने सहित उनके #iStandWithHumanity अभियान के साथ जुड़ने के लिए आर्ट आफ लिविंग फाउंडेशन के साथ भी करार किया है। इसमें भारत भर में जनजातीय परिवारों को 1000 रुपये के मूल्य के राशन किटों की खरीद एवं वितरण (सोशल डिस्टैंसिंग दिशानिर्देशों का अनुपालन करते हुए) शामिल है। प्रत्येक राशन किट में 5 किग्रा गेहूं का आटा, 2 किग्रा दाल, 3 किग्रा चावल, 500 एमएल तेल, 100 ग्राम हल्दी का पावडर, 100 ग्राम लाल मिर्च का पावडर, 100 ग्राम जीरा, 100 ग्राम राई के बीज, 100 ग्राम करी मसाला, 2 साबुन जैसी मदें शामिल हैं।

ग) छोटे कारीगरों को कार्यशील पूंजी का प्रावधान

  • टीआरआईएफईडी परिक्रामी निधियों के रूप में जनजातीय कारीगरों को नरम ऋण के लिए अनुकूल वित्तपोषण शर्त उपलब्ध कराने के लिए वित्तीय संस्थानों के साथ चर्चा कर रही है जिसका लाभ उनके भंडार को गिरवी रखने के द्वारा उठाया जा सकता है। जनजातीय कारीगरों के लिए ऐसी कार्यशील पूंजी एवं तरलता का प्रावधान उन्हें इस अभूतपूर्व कठिनाई से उबरने में सक्षम बनायेगा।

घ) जनजातीय क्षेत्रों में मास्कों, साबुनों, दस्तानों एवं पीपीई का प्रावधान

  • कोविड-19 के कारण वर्तमान स्थिति ने देश के सबसे निर्बल लोगों, जनजातीय कारीगरों एवं संग्रहकर्ताओं सहित निर्धनों एवं सीमांत समुदायों की आजीविकाओं को गहरी चोट पहुंचाई है। कई क्षेत्रों में यह वन उत्पादों की खेती एवं संग्रह का पीक सीजन है जो जनजातीय कारीगरों को उनका व्यवसाय करने को प्रेरित करेगा जिससे उनकी सुरक्षा खतरे में पड़ जाएगी। जनजातीय कारीगरों एवं संग्रहकर्ताओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए टीआरआईएफईडी का इरादा जनजातीय लाभार्थियों को क्रमशः एक मिलियन फेस मास्क, साबुन एवं दस्ताने एवं 20,000 पीपीई किट उपलब्ध कराने का है।

वेबिनार और कोविड 19 परामर्शी

  • टीआरआईएफईडी ने यूनिसे़फ के सहयोग से सोशल डिस्टैंसिंग उपायों का अनुपालन करने और प्रचालनों को जारी रखने के लिए आवश्यक स्वच्छता बनाये रखने के लिए जनजातीय संग्रहकर्ताओं के बीच जागरूकता फैलाने हेतु सभी राज्य नोडल एवं कार्यान्वयन एजेन्सियों, प्रतिपालक संगठनों, वन धन केंद्रों तथा अन्य हितधारकों के साथ 09 अप्रैल 2020 को एक राष्ट्रीय स्तर के वेबिनार का संचालन किया है।
  • इसके अतिरिक्त, टीआरआईएफईडी ने सभी राज्य नोडल एवं कार्यान्वयन एजेन्सियों के समन्वय से एकल रूप में यूनिसेफ की क्षेत्रीय इकाइयों के साथ एवं जिला एजेन्सियों, वन धन केंद्रों, प्रतिपालक संगठनों की भागीदारी के साथ 14 अप्रैल से 17 अप्रैल 2020 तक राज्य स्तरीय वेबिनारों का आयोजन किया। सूचना सामग्री यूनिसेफ द्वारा फ्लायर्स, डिजिटल पाकेट बुक, आडियो संदेश, प्रस्तुतियों आदि के रूप में क्षेत्रीय भाषाओं में उपलब्ध कराई गई।
  • टीआरआईएफईडी ने एमएफपी खरीद एवं प्रचालन कार्य के दौरान सावधानी बरतने एवं सुरक्षा उपायों के लिए राज्य एजेन्सियों, नोडल विभाग, कार्यान्वयन एजेन्सियों, वीडीवीके सदस्यों को कोविड 19 से संबंधित परामर्शियां जारी की।

गुटनिरपेक्ष आंदोलन (एनएएम) संपर्क समूह का ऑनलाइन शिखर सम्मेलन

  • प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने मौजूदा कोविड-19 वैश्विक महामारी के संकट पर चर्चा करने के लिए 4 मई, 2020 की शाम को आयोजित गुटनिरपेक्ष आंदोलन (एनएएम) संपर्क समूह के ऑनलाइन शिखर सम्मेलन में भाग लिया।
  • 'यूनाइटेड अगेन्‍स्‍ट कोविड-19' विषय पर एनएएम संपर्क समूह का यह ऑनलाइन शिखर सम्‍मेलन एनएएम के वर्तमान अध्यक्ष और अजरबैजान गणराज्य के राष्ट्रपति महामहिम इल्हाम अलीयेव द्वारा आयोजित किया गया था। इस शिखर सम्मेलन का उद्देश्य कोविड-19 वैश्विक महामारी के खिलाफ लड़ाई में अंतर्राष्ट्रीय एकजुटता को बढ़ावा देना और इस वैश्विक महामारी से निपटने के लिए विभिन्‍न देशों और अंतर्राष्ट्रीय संगठनों के प्रयासों को गति देना था। इस कार्यक्रम ने अंतरराष्‍ट्रीय बहुपक्षवाद एवं शांति के लिए कूटनीति दिवस की भी याद दिलाई।

क्या है गुटनिरपेक्ष आंदोलन (एनएएम)?

  • गुट निरपेक्ष आंदोलन की शुरुआत शीत युद्ध की राजनीति से दूर रहने की सोच को लेकर हुई थी ।इसमे शामिल देशों का शुरआत से एक ही मकसद था की कैसे दुनिया के दो गुटों से अलग रहा जाये । इसके अलावा इस संगठन में ज़्यादातर देश ऐसे थे जिन्होंने अभी अभी आज़ादी पायी थी ।ये सारे देश किसी भी तरह के सैन्य गठबंधनों से दूर रहना चाहते थे । इसके अलावा इस समूह का मकसद पश्चिमी देशों की रंगभेद नीति के खिलाफ संघर्ष करना भी था । दुनिया में तेज़ी से बढ़ रहे मानवाधिकार उल्लंघन के खिलाफ लड़ना भी इस संगठन के अहम् मकसदों में एक था ।
  • गुट निरपेक्ष आंदोलन एक अंतराराष्ट्रीय संस्था है। इस आंदोलन की नीव भारत के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू, मिस्र के पूर्व राष्ट्रपति गमाल अब्दुल नासर और युगोस्लाविया के राष्ट्रपति जोसिप ब्रॉज टीटो ने मिलकर रखी थी । इसकी शुरुआत अप्रैल 1961 में हुई थी। संयुक्त राष्ट्र के बाद NAM विश्व का दूसरा सबसे बड़ा मंच है। इस मंच के तहत 120 सदस्य और 17 पर्यवेक्षक देश हैं।

:: अंतर्राष्ट्रीय समाचार ::

इजराइल का कोरोना वैक्सीन बनाने का दावा

  • दुनियाभर में फैले कोरोना वायरस महामारी से निपटने के लिए कई देश इसकी वैक्सीन बनाने में लगे हुए हैं। इसी बीच इजरायल के रक्षा मंत्री नफ़तली बेनेट ने कहा कि उन्होंने देश के जैविक अनुसंधान संस्थान द्वारा COVID -19 संक्रमण के लिए एक एंटीबॉडी विकसित करने में महत्वपूर्ण सफलता मिली है।
  • बेनेट ने इजरायल इंस्टीट्यूट फॉर बायोलॉजिकल रिसर्च (IIBR) की प्रयोगशाला का दौरा किया, जो एक गुप्त इकाई है, जो नेस जियोना में प्रधानमंत्री कार्यालय के अधीन काम करती है। अनुसंधान दल द्वारा इसकी जानकारी दी गई, जिसने खुलासा किया कि कोरोना वायरस (COVID-19) एंटीबॉडी या निष्क्रिय के विकास के चरण में है वैक्सीन जो वायरस पर हमला करती है और शरीर में इसे बेअसर कर देती है। IIBR अब अपने एंटीबॉडी को पेटेंट करने और अपने वाणिज्यिक विकास के लिए एक अनुबंध को सुरक्षित करने के लिए काम कर रहा है।
  • एक दूसरे इजरायली शोध दल, मिगवैक्स ने भी रिपोर्ट किया है कि यह कोरोना वायरस वैक्सीन के विकास के पहले चरण को पूरा करने के करीब है। पिछले हफ्ते, इसने क्लिनिकल ट्रायल के को तेज करने के लिए OurCrowd से 12 मिलियन अमरीकी डालर का निवेश हासिल किया। जानकारी के लिए बता दें कि दुनियाभर में कोरोना वायरस की चपेट में करीब 33 लाख से अधिक लोग आ चुके हैं।

:: भारतीय राजव्यवस्था ::

अधीर रंजन चौधरी लोक लेखा संसदीय समिति के अध्यक्ष पद पर नियुक्त

  • लोकसभा में कांग्रेस नेता अधीर रंजन चौधरी को लोक लेखा संसदीय समिति का अध्यक्ष नियुक्त किया गया। लोकसभा और राज्य सभा के 19 अन्य सदस्यों को भी समिति के सदस्य के रूप में चुना गया है। न्यूज एजेंसी एएनआइ पर इसका एक नोटिस जारी किया गया है। इस संदर्भ में एकनोटिस जारी किया गया है। लोक लेखा संसदीय समिति में चुने गए सदस्यों में14 लोकसभा से नियुक्त किए गए हैं। वहीं राज्य सभा से पांच सदस्यों को नियुक्त किया गया है। समिति का कार्यकाल एक मई 2020 से शुरू हो चुका है जो 30 अप्रैल 2021 तक रहेगा।

क्या है लोक लेखा समिति?

  • लोक लेखा समिति का काम सरकारी खर्चों के खातों की जांच करना है। इसके लिए नियंत्रक और महालेखा परीक्षक (कैग) की रिपोर्ट आधार होती है। लोक लेखा समिति की रिपोर्टों में सिफारिशें होती हैं जो तकनीकी रूप से सरकार के लिए जरुरी नहीं है लेकिन उन्हें गंभीरता से लिया जाता है और सरकार संसद में कार्रवाई करती है।इस समिति का कार्यकाल एक साल का होता है। विपक्षी दलों की राय से लोकसभा अध्यक्ष इस समिति के अध्यक्ष की नियुक्ति करता है। समिति में अधिकतम सदस्य संख्या 22 होती है।

:: भारतीय अर्थव्यवस्था ::

एनबीएफसी के 2021 तक सभी ऋणों को एकबार पुनर्गठित करने की दरख्वास्त

  • गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (एनबीएफसी) ने रिजर्व बैंक से सभी ऋणों को मार्च 2021 तक एक बार पुनर्गठित करने की अनुमति मांगी है। एनबीएफसी का कहना है कि कोरोना वायरस महामारी और लॉकडाउन (बंद) की वजह से उनके ग्राहकों को धन की दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है, इसलिए उन्हें ऐसा करने दिया जाए।एनबीएफसी ने उन्हें बैंकों का ऋण चुकाने पर दी गयी मोहलत को आगे बढ़ाने की भी मांग रखी है। साथ ही रिजर्व बैंक से ऋण प्रावधान नियमों में छूट और भारतीय लघु उद्योग विकास बैंक (सिडबी) और राष्ट्रीय कृषि और ग्रामीण विकास बैंक (नाबार्ड) से पुनर्वित्त के रूप में अतिरिक्त कोष उपलब्ध कराने के लिए भी कहा है।
  • एनबीएफसी कंपनियों की प्रतिनिधि संस्था वित्त उद्योग विकास परिषद (एफआईडीसी) के अनुसार इस संबंध में रिजर्व बैंक के साथ एक बैठक हुई। बैठक के दौरान कंपनियों ने ये सुझाव रखे।
  1. ऋणों को एक बार पुनगर्ठित करने की अनुमति मार्च 2021 तक के लिए दी जाए। इसके तहत परिसंपत्तियों के वर्गीकरण में बदलाव के बगैर मासिक किस्त को फिर से तय करने, ऋण की अवधि बढ़ाने जैसे संशोधन करने की मंजूरी दी जाए जो ग्राहकों की नकदी हालत के अनुरूप हो।
  2. रिजर्व बैंक ने बैंकों और एनबीएफसी को एमएसएमई को बांटे गए ऋणों का दिसंबर 2020 तक एक बार पुनर्गठन करने की अनुमति दी है। जबकि एनबीएफसी कंपनियां यह छूट सभी ग्राहकों के ऋणों का पुनर्गठन करने के लिए चाहती हैं।
  3. परिषद ने कहा कि इसी तरह ऋण चुकाने के लिए दी गयी तीन महीने की छूट से ऋण ग्राहकों को थोड़ी राहत मिली है। लेकिन चौथे महीने में भी वह ऋण चुकाने में समर्थ होंगे, इसे लेकर संशय है। इसलिए रिजर्व बैंक को इस पर भी विचार करना चाहिए।

पृष्ठभूमि

  • एफआईडीसी ने कहा कि कोरोना वायरस महामारी और बंद के चलते उनके अधिकतर ग्राहकों के नकदी प्रवाह में बाधा आयी है। इसके चालू वित्त वर्ष में लंबे समय तक बने रहने की संभावना है। सबसे ज्यादा प्रभावित लघु और मध्यम उद्योग (एमएसएमई) , ट्रांसपोर्टर और ठेकेदार हुए हैं।

:: विज्ञान और प्रौद्योगिकी ::

अंतरिक्ष में फिल्म की शूटिंग

  • टॉम क्रूज ने स्पेस की एक ऐसी कहानी को फिल्मी परदे पर उतारने की योजना बनाई है जो असलियत में धरती के परे अंतरिक्ष में ही शूट की जाएगी.इसे मुमकिन बनाने के लिए हॉलीवुड स्टार ने स्पेस की दुनिया के सबसे बड़े एक्सपर्ट्स से हाथ मिलाया है. एक रिपोर्ट के मुताबिक ये पहली बार है जब किसी कमर्शियल फिल्म की शूटिंग असलियत में अंतरिक्ष में की जाएगी. अंतरिक्ष की कहानी पर आधारित ये एक एक्शन एडवेंचर फिल्म होगी. इस फिल्म के लिए टॉमक्रूज़ ने एलन मस्क की एविएशन कंपनी SPACE-X और अंतरिक्ष ऐजंसी नासा से हाथ मिलाया है.

केले की फसल को फफूंद रोग को नियंत्रित करने के प्रयास

  • लखनऊ स्थित आईसीएआर संस्थानों के कृषि वैज्ञानिक, केले की फसल में म्लानि रोग पैदा करने वाली फफूंद को नियंत्रित करने में कोविड-19 के जोखिमों के बीच भी जुटे हुए हैं। इस बीमारी में केले की फसल मुर्झाने लगती है और फलियां भी सूख जाती हैं। विशेष रूप से उत्तर प्रदेश और बिहार में केले की फसल की रोपाई से पहले वैज्ञानिक इस फंगस के प्रकोप को नियंत्रित करने के प्रबंधों में लगे हुए हैं।
  • वैज्ञानिक रेस 4 (टीआर 4) ‘स्ट्रेन’ का ‘फुसारियम विल्ट’ रोग कहते हैं जो केले की कुछ खास किस्मों को प्रभावित करता है। इस कवक के लक्षण तीन साल पहले उत्तर प्रदेश में केले के खेतों में पाये गये थे। अब यह बिहार तक फैल गया है।
  • हालांकि, केंद्रीय मृदा लवणता अनुसंधान संस्थान (सीएसएसआरआई) और सेंट्रल इंस्टीट्यूट फॉर सबट्रॉपिकल हॉर्टिकल्चर (सीआईएसएच) के कृषि वैज्ञानिकों ने मिलकर इस फफूंद से लड़ने के लिए 'आईसीएआर-फूसिकोन्ट’ नामक जैव औषधि को विकसित किया है, लेकिन ‘लॉकडाऊन’ की वजह से उत्पादन बड़े पैमाने पर नहीं हो पा रहा है।

कोरोना महामारी से लड़ने में मदद कर सकता है Hepatitis C ड्रग्स

  • सुपरकंप्यूटर सिमुलेशन से किए गए विस्तृत गणनाओं पर आधारित एक अध्ययन के अनुसार वायरल संक्रमण हेपेटाइटिस सी (Hepatitis C) के उपचार के लिए स्वीकृत कई दवाओं को कोरोना वायरस (COVID-19) के लिए संभावित दवाओं के रूप में पहचाना गया है।
  • जर्मनी में जोहान्स गुटेनबर्ग यूनिवर्सिटी मेंज (JGU) के शोधकर्ताओं ने खुले डेटाबेस में सूचीबद्ध लगभग 42,000 विभिन्न पदार्थों का अनुकरण किया है जो कोरोना वायरस महामारी पैदा करने वाले वायरस सार्स-कोव-2 के कुछ प्रोटीनों को बंधेते हैं। इस तरह से मानव शरीर में वायरस के प्रवेश को रोकने में मदद मिलती है।
  • जेजूयू और हेल्महोल्त्ज इंस्टीट्यूट मेंज द्वारा संचालित शक्तिशाली MOGON II सुपरकंप्यूटर का उपयोग करते हुए शोधकर्ताओं ने दो महीनों के भीतर 30 बिलियन से अधिक एकल गणना की है। इस दौरान उन्होंने पाया कि चार हेपेटाइटिस सी ड्रग्स सिमेप्रेविर (Simeprevir), पेरिटाप्रेविर (Paritaprevir), ग्राजोप्रेविर (Grazoprevir,) और वेलपैटसवीर (Velpatasvir) से सार्स-कोव-2 को बहुत मजबूती से बांधने में सक्षम है, इसलिए संक्रमण को रोकने में मदद मिल सकती है।
  • विश्व स्वास्थ्य संगठन के बुलेटिन में प्रकाशित अध्ययन के प्रमुख लेखक, जेजीयू के प्रोफेसर थॉमस एफर्ट ने कहा कि इस कंप्यूटर सिमुलेशन विधि को 'मॉलिक्यूलर डॉकिंग' के रूप में जाना जाता है। इसे वर्षों से मान्यता प्राप्त है और इसका उपयोग भी किया जाता है। यह लैब में किए जाने वाले प्रयोगों की तुलना में बहुत तेज और कम खर्चीला भी है।
  • शोधकर्ताओं के अनुसार, जापानी हनीसकल (लोनिकेरा जपोनिका) का एक प्राकृतिक पदार्थ, जो एशिया में पिछले कुछ समय से विभिन्न अन्य बीमारियों के खिलाफ इस्तेमाल किया जाता है, कोरोना वायरस के खिलाफ एक और मजबूत उम्मीदवार हो सकता है।

यूवी ब्लास्टर डिसइंफेक्सन टॉवर

  • रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) ने भारी संक्रमण वाले क्षेत्रों के त्वरित और रसायन मुक्त कीटाणुशोधन के लिए एक अल्ट्रा वॉयलेट (यूवी) डिसइंफेक्सन टॉवर विकसित किया है।
  • यूवी ब्लास्टर नाम का यह उपकरण एक यूवी आधारित क्षेत्र सैनिटाइजर है, जिसे डीआरडीओ की दिल्ली स्थित प्रतिष्ठित प्रयोगशाला लेजर साइंस एंड टेक्नोलॉजी सेंटर (एलएएसटीईसी) ने एम/एस न्यू एज इंस्ट्रुमेंट्स एंड मैटेरियल्स प्राइवेट लिमिटेड, गुरुग्राम की सहायता से डिजाइन और विकसित किया है।

यूवी ब्लास्टर की विशेषता

  • यूवी ब्लास्टर प्रयोगशालाओं और कार्यालयों में इलेक्ट्रॉनिक उपकरण, कम्प्यूटर और अन्य गैजेट जैसे उच्च प्रौद्योगिकी वाली सतहों में उपयोगी है, जो रासायनिक विधियों से कीटाणुशोधन के लिए उपयुक्त नहीं हैं। यह उत्पाद हवाई अड्डों, शॉपिंग माल, मेट्रो, होटलों, कारखानों, कार्यालयों आदि ऐसे क्षेत्रों के लिए भी प्रभावी है, जहां लोगों की आवाजाही खासी ज्यादा होती है।
  • यूवी आधारित क्षेत्र सैनिटाइजर को वाईफाई लिंक का इस्तेमाल करते हुए लैपटॉप/मोबाइल के माध्यम से दूरस्थ परिचालन के द्वारा उपयोग किया जा सकता है। इस उपकरण में 360 डिग्री प्रकाश के लिए 254 एनएम वेवलेंथ पर छह लैम्प होती हैं, जिसमें हरेक लैम्प की क्षमता 43 वाट यूवी-सी पावर है। कमरे के भीतर विभिन्न स्थानों पर उपकरण लगाकर लगभग 12x12 फुट आकार के एक कमरे को लगभग 10 मिनट और 400 वर्ग फुट के कमरे को 30 मिनट में कीटाणुमुक्त किया जा सकता है।
  • अचानक कमरा खुलने या मानवीय दखल पर यह सैनिटाइजर बंद हो जाता है। उत्पाद की एक अन्य विशेषता उसका हाथ से होने वाला परिचालन है।

भारत में मई के अंत तक शुरू होगा एबॉट का एंटीबॉडी टेस्ट

  • हेल्थकेयर क्षेत्र की दुनिया की बड़ी कंपनी एबॉट ने सोमवार को कहा कि उसे अपने कोविड-19 टेस्ट के लिए सीई मार्क मिल गया है। कंपनी की लैब आधारित सीरम खून की जांच को सही पाया गया है और इस टेस्ट की सुविधा भारत में मई के अंत से मिलनी शुरू हो जाएगी।

क्या है सीई मार्क?

  • बता दें सीई मार्क एक सर्टिफिकेशन मार्क होता है, जिसका मतलब होता है कि कोई तकनीक, स्वास्थ्य, सुरक्षा और पर्यावरण के मानकों पर सही पाई गई है और इसे बेचा जा सकता है। एबॉट ने कहा है कि कंपनी टेस्ट को मई से भारत भेजना शुरू कर देगी और यहां पर मांग को देखते हुए इसकी आपूर्ति को बाद में बढ़ाया जाएगा।

टेस्ट की जानकारी वैक्सीन के विकास में मददगार

  • कंपनी ने बयान में यह भी कहा है कि एंटीबॉडी टेस्टिंग यह पता लगाने के लिए एक महत्वपूर्ण कदम है कि कोई पहले कोरोना वायरस से संक्रमित हो चुका है या नहीं। इससे कोरोना वायरस को समझने में भी मदद मिलेगी। इससे यह पता लगाने में भी मदद मिलेगी कि एंटीबॉडी शरीर में कितने समय तक रहती है और उससे रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है या नहीं।

:: पर्यावरण और पारिस्थितकी ::

सी स्पार्कल नॉक्टील्यूका सिल्टीलैन्स (Noctiluca scintillans)

  • 'बर्फ का खजाना' कहे जाने वाले हिमालय के ग्‍लेशियर पिघलने का बेहद गंभीर असर अब समुद्र पर भी दिखाई देने लगा है। अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा के ताजा शोध से पता चला है कि हिमालय की बर्फ पिघलने से अरब सागर में बड़े पैमाने पर जहरीला हरा शैवाल फैल रहा है। भारत, पाकिस्‍तान और खाड़ी देशों के तटों पर फैल यह शैवाल इतना विशाल है कि उसे अंतरिक्ष से भी असानी से देखा जा सकता है।
  • नासा की ओर से जारी की गई तस्‍वीरों से पता चलता है कि समुद्र में पाया जाने वाला शैवाल नॉक्टील्यूका सिल्टीलैन्स (Noctiluca scintillans) अरब सागर के तटीय इलाके में बहुत तेजी से पैर पसार रहा है। नॉक्टील्यूका सिल्टीलैन्स को 'समुद्री चमक' भी कहा जाता है। रात में यह शैवाल रात में काफी चमकता है। यह एक मिलीमीटर का होता है और यह तटीय इलाके के पानी में आसानी से जिंदा रह सकता है। यह हरा शैवाल समुद्र में अपना मोटा छल्‍ला बना रहा है जिसकी वजह से यह अंतरिक्ष से भी दिखाई देता है।

15 करोड़ लोगों के लिए खाने का संकट!

  • समुद्र की चमक कहा जाने वाले इस शैवाल के बारे में 20 साल पहले तक सुना नहीं गया था। हालांकि अब यह शैवाल अब बहुत तेजी से भारत, पाकिस्‍तान और अन्‍य खाड़ी देशों के तटों पर बहुत तेजी से अपने पैर पसार रहा है। इस शैवाल की वजह से प्‍लवकों के लिए संकट पैदा हो गया है जो अरब सागर में फूड चेन में काफी अहम भूमिका निभाते हैं। इस जहरीले शैवाल की वजह से अरब सागर में मछलियों के अस्तित्‍व पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं। दक्षिण एशिया में इन्‍हीं मछलियों पर 15 करोड़ लोग भोजन के लिए निर्भर हैं।

हिमालय की पिघल रही बर्फ बनी वजह

  • शोधकर्ताओं ने कहा है कि हिमालय और तिब्‍बत के पठार पर लगातार कम होती बर्फ से अरब सागर में समुद्र की सतह लगतार गरम हो रही है। इसकी वजह से यह शैवाल बहुत आसानी से अब तटीय इलाकों में बहुत तेजी से आगे बढ़ रहा है। नासा के सैटलाइट से ली गई तस्‍वीरों से पता चला है कि नॉक्टील्यूका सिल्टीलैन्स का सीधा संबंध ग्‍लेशियर के पिघलने और कमजोर मानसून से है। आमतौर पर हिमालय से आने वाली ठंडी हवाओं की वजह से अरब सागर की सतह ठंडी हो जाती थी लेकिन बर्फ के पिघलने से यह कम हो रहा है।

थाइलैंड से लेकर अफ्रीका तक फैला है शैवाल

  • नासा से जुड़े कोलंबिया विश्‍वविद्यालय के जोअक्‍यूइम गोज ने इस बदलाव पर कहा, 'जलवायु परिवर्तन से जुड़ा हमने यह संभवत: सबसे नाटकीय बदलाव देखा है। हम नॉक्टील्यूका सिल्टीलैन्स को दक्षिण पूर्व एशिया के देशों थाइलैंड और वियतनाम और अफ्रीका के पास स्थित सेशेल्‍स में देखा गया है और यह बड़ी समस्‍या बनकर उभर रहा है।' 1990 के दशक में पहली बार इस शैवाल को देखा गया था। इस शैवाल से न केवल फूड चेन बल्कि पानी की गुणवत्‍ता खराब हो रही है और मछलियों की मौत हो रही है।

जानें, क्‍यों 'अमर' बन रही 'समुद्री चमक'

  • समुद्र में मछलियां प्‍लवकों को खाकर जिंदा रहती हैं लेकिन शैवाल की वजह से प्‍लवकों पर ही संकट आ गया है। यह प्‍लवक समुद्र की ऊपर सतह पर पाए जाते हैं। उधर, नॉक्टील्यूका सिल्टीलैन्स को सूरज के रोशनी और पोषक पदार्थों की जरूरत नहीं होती है। यह शैवाल अन्‍य जीवों का खाकर जिंदा रहता है। नॉक्टील्यूका सिल्टीलैन्स खुद को दो और फ्लजेलम से खुद को आगे बढ़ाता है। इस शैवाल को केवल जेलीफ‍श और साल्‍प्‍स खाना पसंद करते हैं। इसके प्रसार की हालत यह है कि ओमान में तो इस शैवाल की वजह से तेल रिफाइनरी को अपना काम कम करना पड़ा।

:: विविध ::

किमजोंग उन को द्वितीय विश्व युद्ध स्मारक पदक

  • रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने नाजी जर्मनी पर जीत की 75वीं सालगिरह पर उत्तर कोरिया के शासक किम जोंग उन को स्मारक युद्ध पदक से सम्मानित किया है। उत्तर कोरिया के नेता को यह पदक उनके देश में जान गंवाने वाले सोवियत सैनिकों की यादों को संरक्षित रखने के लिए दिया गया है।

मनीषा सिंह

  • अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने भारतीय मूल की अमेरिकी नागरिक मनीषा सिंह को आर्थिक सहयोग और विकास संगठन (ओईसीडी) में अपने दूत पद के लिए नामित किया है।
  • पेरिस स्थित ओईसीडी आर्थिक प्रगति और विश्व व्यापार को बढ़ावा देने वाला एक अंतर सरकारी आर्थिक संगठन है। 36 देश इसके सदस्य हैं।

Pulitzer Prize 2020:

  • दुनिया में जारी कोरोना वायरस (Covid-19) महामारी के बीच साल 2020 के लिए पुलित्जर पुरस्कार (Pulitzer Prize) के विजेताओं की घोषणा कर दि गई है। जम्मू-कश्मीर से आर्टिकल 370 हटने के बाद वहां की कवरेज के लिए फोटोग्राफर्स यासीन डार (Dar Yasin), मुख्तार खान (Mukhtar Khan) और चन्नी आनंद (Channi Anand) को पुलित्जर फीचर फोटोग्राफी पुरस्कार मिला है। यासीन डार और मुख्तार खान श्रीनगर के पत्रकार हैं, जबकि चन्नी आनंद जम्मू में रहते हैं।
  • इनके अलावा 'द न्यू यॉर्कर', 'द वॉशिंगटन पोस्ट', 'असोसिएटेड प्रेस', 'द लॉल एंजिलिस टाइम्स', 'द बाल्टिमोर सन', 'द फीलिस्तीन हेराल्ड प्रेस' को भी अलग-अलग खबरों के लिए पुलित्जर पुरस्कार से सम्मानित किया गया है। कोरोना वायरस के संक्रमण की वजह से पिछले महीने बोर्ड ने पुरस्कार विजेताओं के नामों की घोषणा को स्थगित कर दिया था।

पृष्ठभूमि

  • पुलित्जर पुरस्कार की शुरुआत 1917 में हुई थी। यह अमेरिका का एक प्रमुख पुरस्कार है, जो समाचार पत्रों, साहित्य एवं संगीत के क्षेत्र में कार्य करने वालों को दिया जाता है। पिछले साल यह पुरस्कार 'न्यूयॉर्क टाइम्स' और 'वॉल स्ट्रीट जर्नल' को अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और उनके परिवार से संबंधित जानकारियां सामने लाने के लिए दिया गया था।

सरिता कोमातिरेड्डी

  • अमेरिका में एक महिला भारतवंशी ने भारत का मान बढ़ाया है। भारतीय मूल की अभियोजक सरिता कोमातिरेड्डी को न्यूयॉर्क की संघीय अदालत में न्‍यायाधीश के पद पर नियुक्‍त किया गया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोमवार को न्यूयॉर्क में एक संघीय अदालत में कोमातिरेड्डी को जिला जज के रूप में नामित किया।

:: प्रिलिम्स बूस्टर ::

  • विदेशों में रहने वाले भारतीय लोगों को वापस लाने के लिए भारतीय नौसेना के द्वारा कौन सा अभियान चलाया गया है? (समुद्र सेतु)
  • किस वैज्ञानिक को नैनो विज्ञान और प्रौद्योगिकी के लिए वर्ष 2020 का ‘यंग कैरियर अवार्ड’ प्रदान किया गया है? (प्रोफेसर सौरभ लोढा)
  • चर्चा में रहे अटल सुरंग (Atal Tunnel) कहाँ बनाया जा रहा है एवं किन दो स्थानों को आपस में जोड़ेगी? (रोहतांग दर्रा- हिमाचल प्रदेश, मनाली और लेह को)
  • हाल ही में अमेरिका के द्वारा किस भारतीय मूल के व्यक्ति को आर्थिक सहयोग और विकास संगठन (OECD) में अपने दूत के लिए नामित किया गया है? (मनीषा सिंह)
  • रूस के द्वारा जर्मनी पर जीत की 75वीं सालगिरह के उपलक्ष्य में किसे स्मारक युद्ध पदक से सम्मानित किया गया है? (किम जोंग- उत्तर कोरिया)
  • चर्चा में रहे सी स्पार्कल के नाम से जाने जाने वाले नॉक्टील्यूका सिल्टीलैन्स (Noctiluca scintillans) क्या है? (जहरीले शैवाल)
  • हाल ही में किस भारतवंशी को न्यूयॉर्क के संघीय अदालत में न्यायाधीश के पद पर नियुक्ति प्रदान की गई है? (सरिता कोमातिरेड्डी)
  • हाल ही में किन भारतीय पत्रकारों को पुलित्जर फीचर फोटोग्राफी पुरस्कार प्रदान किया गया है? (यासीन डार, मुख्तार खान और चन्नी आनंद)
  • रिटेल व्यापारियों के संगठन कैट और डिपार्टमेंट फॉर प्रमोशन ऑफ इंडस्ट्री एंड इंटरनल ट्रेड (DPIIT) के साझेदारी में किस ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म का विकास किया जा रहा है? (Bharat eMarket)
  • लोक लेखा समिति में अधिकतम कितने सदस्य होते हैं एवं हाल में ही इस समिति का अध्यक्ष किसे नियुक्त किया गया है? (22 सदस्य-15 लोकसभा और 7 राज्य सभा, अधीर रंजन चौधरी)
  • 'यूनाइटेड अगेन्‍स्‍ट कोविड-19' से चर्चा में रहे गुटनिरपेक्ष आंदोलन का प्रथम शिखर सम्मेलन का आयोजन कहाँ हुआ था एवं इस आंदोलन के जनक कौन थे? (1961 बेलग्रेड; जवाहर लाल नेहरू, अब्दुल नासिर, सुकर्णो और मार्शल टीटो)
  • अंतरिक्ष में फिल्मों की शूटिंग हेतु किस अंतरिक्ष एजेंसी एवं किस अभिनेता ने संयुक्त परियोजना की तैयारी की शुरुआत की है? (नासा और स्पेस एक्स, टॉम क्रूज)
  • जनजातीय लोगों को राहत पहुंचाने हेतु TRIFED किस संगठन के सहयोग से #iStandWithHumanity कार्यक्रम चला रहा है? (आर्ट आफ लिविंग फाउंडेशन)

स्रोत साभार: Dainik Jagran (Rashtriya Sanskaran), Dainik Bhaskar (Rashtriya Sanskaran), Rashtriya Sahara (Rashtriya Sanskaran) Hindustan Dainik (Delhi), Nai Duniya, Hindustan Times, The Hindu, BBC Portal, The Economic Times (Hindi & English), PTI, PIB

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