(दैनिक समसामयिकी और प्रिलिम्स बूस्टर) यूपीएससी और सभी राज्य लोक सेवा आयोग परीक्षाओं के लिए हिंदी में समाचार पत्रों का संकलन (05 मार्च 2020)

दैनिक समसामयिकी और प्रिलिम्स बूस्टर


(दैनिक समसामयिकी और प्रिलिम्स बूस्टर) यूपीएससी और सभी राज्य लोक सेवा आयोग परीक्षाओं के लिए हिंदी में समाचार पत्रों का संकलन (05 मार्च 2020)


:: राष्ट्रीय समाचार ::

विश्व के 50 सर्वश्रेष्ठ संस्थानों में आइआइटी बांबे व आइआइटी दिल्ली

  • क्यूएस व‌र्ल्ड रैंकिंग के अनुसार पूरी दुनिया के 50 सर्वश्रेष्ठ इंजीनियरिंग कॉलेजों में भारत के प्रतिष्ठित आइआइटी बांबे और आइआइटी दिल्ली शामिल हैं। आइआइटी बांबे को 44वां और आइआइटी दिल्ली को 47वां स्थान मिला है। पिछले साल आइआइटी दिल्ली को 61वां और आइआइटी बांबे को 53वां स्थान हासिल हुआ था। इस साल सौ सर्वश्रेष्ठ संस्थानों में आइआइटी कानपुर समेत पांच संस्थान शामिल हैं।

भारत के पांच अन्य संस्थान शामिल

  • इस साल भारत के पांच अन्य संस्थानों को सौ सर्वश्रेष्ठ संस्थानों में शामिल किया गया है। इनमें आइआइटी खड़गपुर (आइआइटी-केजीपी) को 86वां स्थान, आइआइटी मद्रास को 88वां और आइआइटी कानपुर को 96वां स्थान मिला है। पिछले साल यानी वर्ष 2019 में सौ सर्वश्रेष्ठ संस्थानों में भारत के केवल तीन संस्थान आइआइटी बांबे, आइआइटी दिल्ली और आइआइटी मद्रास ही शामिल हुए थे। जबकि, कला संकाय यानी आर्ट एंड ह्यूमैनिटीज में जवाहरलाल नेहरु यूनिवर्सिटी (जेएनयू) को 162वां स्थान और दिल्ली विश्वविद्यालय को 231वां स्थान मिला है।

इंडिया फार्मा तथा इंडिया मेडिकल डिवाइस सम्मेलन 2020

  • रसायन और उर्वरक मंत्रालय का फार्मास्युटिकल्स विभाग भारतीय वाणिज्य और उद्योग मंडल (फिक्की) के सहयोग से गुजरात के गांधीनगर में 5-7 मार्च, 2020 तक इंडिया फार्मा 2020 तथा इंडिया मेडिकल डिवाइस 2020 सम्मेलन और प्रदर्शनी का आयोजन कर रहा है।
  • इस सम्मेलन का विषय है इंडिया फार्मा : किफायती और गुणवत्ता सम्पन्न स्वास्थ्य देखभाल की चुनौतियों का मुकाबला तथा इंडिया मेडिकल डिवाइस : सार्वभौमिक स्वास्थ्य देखभाल के लिए किफायती उत्तरदायी तथा गुणवत्ता सम्पन्न चिकित्सा उपकरण को प्रोत्साहन।

सम्मेलन का उद्देश्य

  • सम्मेलन का उद्देश्य नवाचार को प्रोत्साहित करना है ताकि सभी के लिए गुणवत्ता सम्पन्न स्वास्थ्य/देखभाल की लागत कम की जा सके और भारत में चिकित्सा उपकरण क्षेत्र के हितधारकों, केंद्र तथा राज्य सरकारों, अग्रणी कारोबारी हस्तियों, उद्योग के शीर्ष कार्यकारियों, शिक्षाविदों और विश्व के विशेषज्ञों को वैश्विक निवेश समुदाय से जोड़ने का मंच प्रदान किया जा सके।
  • सम्मेलन का उद्देश्य चिकित्सा इलेक्ट्रानिक्स, उपकरण, स्वास्थ्य निदान, अस्पताल तथा सर्जरी के उपकरणों को शामिल करके उपभोक्ता केंद्रित विनिर्माण को प्रोत्साहित करना और इलेक्ट्रानिक्स प्रौद्योगिक विकास तथा विनिर्माण आधार को सशक्त बनाने के लिए संपूर्ण प्रणाली बनाने की दिशा में विचार-विमर्श करना और प्रौद्योगिकी प्रदर्शित करना।
  • यह पांचवां सम्मेलन है और इसे पहली बार गुजरात में आयोजित किया जा रहा है। गुजरात इस सम्मेलन का पार्टनर राज्य है।

पृष्ठभूमि

  • भारतीय फार्मास्युटिकल्स बाजार मात्रा की दृष्टि से तीसरा सबसे बड़ा और मूल्य की दृष्टि से 13वां सबसे बड़ा बाजार है। भारत पूरे विश्व में जेनेरिक दवाओं का सबसे बड़ा आपूर्तिकर्ता है। भारत का चिकित्सा उपकरण उद्योग 5.2 बिलियन डॉलर का है। यह 96.7 बिलियन भारतीय स्वास्थ्य देखभाल उद्योग में 4-5 प्रतिशत का योगदान करता है।
  • सम्मेलन में फार्मास्युटिकल्स और चिकित्सा उपकरणों पर प्रदर्शनी लगायी जाएगी।इसमें 200 से अधिक फार्मास्युटिकल्स और चिकित्सा उपकरण कंपनियां भाग लेंगी। तीन दिन के इस सम्मेलन में पूरे विश्व के लगभग 5000 फार्मास्युटिकल्स तथा जैव प्रोद्योगिकी प्रोफेशनल भाग लेंगे।

जन औषधि सप्ताह

  • जन औषधि सप्ताह (1-7 मार्च तक) पूरे देश में 6200 से अधिक प्रधानमंत्री भारतीय जनऔषधि केंद्रों के माध्यम से मनाया जा रहा है। जनौषधि केंद्रों के मालिक स्वास्थ्य और स्वच्छता के बारे में जागरूकता पैदा करने के लिए विभिन्न प्रकार की गतिविधियों का आयोजन कर रहे हैं।

प्रधानमंत्री भारतीय जन औषधि परियोजना

  • प्रधानमंत्री भारतीय जन औषधि परियोजना भारत सरकार के फार्मास्युटिकल्स विभाग की एक अच्छी पहल है जो अब जनता को किफायती मूल्य पर गुणवत्ता वाली दवाएं उपलब्ध करा रही है। वर्तमान में इन केंद्रों की संख्या बढ़कर 6200 से अधिक हो गई है और आज 700 जिले इस योजना में शामिल हैं। इसके अलावा, वित्त वर्ष 2019-20 (फरवरी 2020 तक) में कुल बिक्री 383 करोड़ रुपये से अधिक हो गई है, जिससे आम नागरिकों की कुल बचत लगभग 2,200 करोड़ रुपये हो गई क्योंकि ये दवाएं औसत बाजार मूल्य के मुकाबले 50 प्रतिशत से 90 प्रतिशत तक सस्ती हैं। यह योजना स्थायी और नियमित आमदनी के साथ स्वरोजगार के अच्छे स्रोत उपलब्ध करा रही है।

प्रज्ञान सम्मेलन 2020

  • सेंटर फॉर लैंड वारफेयर स्टडिज (सीएलएडब्ल्यूएस) द्वारा आयोजित भारतीय सेना की अंतर्राष्ट्रीय संगोष्ठी ‘प्रज्ञान सम्मेलन 2020’ नई दिल्ली के मानेकशॉ सेंटर में प्रारंभ हुई। दो दिन के इस सम्मेलन में राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय विशेषज्ञ जमीनी युद्ध की बदलती विशेषताओं और सेना पर इसके प्रभाव पर विचार-विमर्श करेंगे।

गैरसैंण बनी उत्तराखंड की ग्रीष्मकालीन राजधानी

  • उत्तराखंड बजट सत्र के दौरान सीएम त्रिवेंद्र सिंह रावत ने गैरसैंण को उत्तराखंड की ग्रीष्मकालीन राजधानी घोषित कर दिया। इस घोषणा के साथ ही प्रदेश में अब दो राजधानियां हो जाएंगी।

पृष्ठभूमि

  • उत्तराखंड में राजधानी का मुद्दा जनभावनाओं से जुड़ा है। राज्य गठन के बाद से ही प्रदेश में पहाड़ की राजधानी पहाड़ में बनाए जाने को लेकर आवाज उठती रही हैं। राज्य आंदोलन के समय से ही गैरसैंण को जनाकांक्षाओं की राजधानी का प्रतीक माना गया है। प्रदेश की 70 फीसदी जनता गैरसैंण में स्थायी राजधानी चाहती है। राज्य गठन से पहले यूपी की मुलायम सरकार की गठित कौशिक समिति ने अपनी रिपोर्ट में यह कहा था।

स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) के दूसरे चरण का शुभारंभ

  • केन्द्रीय जल शक्ति मंत्री श्री गजेन्द्र सिंह शेखावत ने आज यहां एक राष्ट्रीय प्रसार और परामर्श कार्यशाला में स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) [एसबीएम (जी)] के दूसरे चरण का शुभारंभ किया। कैबिनेट द्वारा मिशन के दूसरे चरण की मंजूरी प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व में एसबीएम (जी) की उपलब्धियों को मान्यता है। यह 2 अक्टूबर, 2014 को आरंभ होने के बाद से पिछले पांच वर्षों में ग्रामीण क्षेत्रों में सार्वभौमिक कवरेज और सुरक्षित स्वच्छता तक पहुंच प्रदान करने का सफल मिशन है।

स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) के दूसरे चरण के मुख्य बिंदु

  • एसबीएम (जी) का दूसरे चरण का फोकस शौचालय पहुंच और उपयोग के मामले में पिछले पांच वर्षों में कार्यक्रम के तहत प्राप्त लाभ को बनाए रखने पर होगा। यह सुनिश्चित किया जाएगा कि कोई भी पीछे न रहे। दूसरे चरण यह सुनिश्चित करेगा कि देश के प्रत्येक ग्राम पंचायत में प्रभावी ठोस और तरल अपशिष्ट प्रबंधन (एसएलडब्ल्यूएम) स्थापित किया जाए।
  • एसबीएम (जी) दूसरे चरण को 2020-21 से 2024-25 तक मिशन मोड में 1,40,881 करोड़ रुपये के कुल परिव्यय के साथ लागू किया जाएगा। यह वित्तपोषण का आदर्श मॉडल होगा। इसमें से 52,497 करोड़ रुपये पेयजल और स्वच्छता विभाग के बजट से आवंटित किए जाएंगे, जबकि शेष राशि 15वें वित्त आयोग, एमजीएनआरईजीएस और राजस्व सृजन मॉडल के तहत विशेष रूप से ठोस और तरल अपशिष्ट प्रबंधन के लिए जारी की जा रही निधियों से प्राप्त की जाएगी।
  • खुले में शौच मुक्त (ओडीएफ) प्लस के ठोस और तरल अपशिष्ट प्रबंधन (एसएलडब्ल्यूएम) घटक की निगरानी चार प्रमुख क्षेत्रों (प्लास्टिक कचरा प्रबंधन, जैव-क्षरण योग्य ठोस प्रबंधन प्रबंधन (पशु अपशिष्ट प्रबंधन सहित), ग्रेयवॉटर प्रबंधन और फेकल कीचड़ प्रबंधन) के लिए उत्पादन-परिणाम संकेतकों के आधार पर की जाएगी। एसबीएम-जी का दूसरा चरण रोजगार उत्पन्न करता रहेगा और घरेलू शौचालयों और सामुदायिक शौचालयों के निर्माण के साथ-साथ एसएलडब्ल्यूएम के लिए बुनियादी ढांचे जैसे खाद गड्ढों, सोख गड्ढों, अपशिष्ट स्थिर तालाबों, सामग्री वसूली सुविधाओं आदि के माध्यम से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को गति प्रदान करेगा।

यूनिसेफ और बिल और मेलिंडा गेट्स फाउंडेशन द्वारा ग्रामीण महिलाओं पर एसबीएम का अध्यनन

  • कार्यशाला के भाग के रूप में और अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस 8 मार्च से पहले केंद्रीय मंत्री ने यूनिसेफ और बिल और मेलिंडा गेट्स फाउंडेशन (बीएमजीएफ) द्वारा ग्रामीण महिलाओं पर एसबीएम (जी) के प्रभाव पर एक अध्ययन जारी किया। अध्ययन - ग्रामीण भारत में महिलाओं की सुविधा, सुरक्षा और स्वाभिमान पर स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) का प्रभाव। फरवरी, 2020 में 5 राज्यों बिहार, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, राजस्थान और उत्तर प्रदेश में 6,993 महिलाओं का सर्वेक्षण किया गया। इस अध्ययन ने संकेत दिया कि घरेलू शौचालयों की बढ़ती पहुंच से ग्रामीण भारत में महिलाओं के सुविधा, सुरक्षा और स्वाभिमान में सुधार हुआ है।

मुख्य निष्कर्ष:

  1. शौच करने के लिए खुले में न जाने से 93% महिलाएं हमले से सुरक्षित महसूस करती हैं।
  2. 91% महिलाएं अपने दिन के एक घंटे तक समय बचाती हैं, जो पहले शौच स्थलों पर जाने में लगाती थीं।
  3. 88% महिलाओं को एक शौचालय का मालिक होने पर गर्व है
  • इससे पहले, 19 फरवरी, 2020 को केंद्रीय मंत्रिमंडल ने एसबीएम के दूसरे चरण को मंजूरी दी थी, जो ठोस और तरल अपशिष्ट प्रबंधन की चुनौती से प्रभावी रूप से निपटने में ग्रामीण भारत की मदद करेगा और देश में ग्रामीणों के स्वास्थ्य में पर्याप्त सुधार में मदद करेगा। 2014 में एसबीएम-जी के शुभारंभ ग्रामीण क्षेत्रों में 10 करोड़ से अधिक शौचालय बनाए गए हैं; 5.9 लाख से अधिक गांवों, 699 जिलों और 35 राज्यों / केंद्रशासित प्रदेशों ने स्वयं को खुले में शौच मुक्त (ओडीएफ) घोषित किया है।

:: अंतर्राष्ट्रीय समाचार ::

वर्ल्‍ड माइग्रेशन रिपोर्ट 2020

  • प्रवासियों और शरणार्थियों को लेकर सामने आई संयुक्‍त राष्‍ट्र की की वर्ल्‍ड माइग्रेशन रिपोर्ट 2020 रिपोर्ट बेहद खास है। ये रिपोर्ट यूएन की ही सहयोगी संस्‍था इंटरनेशनल ऑर्गेनाइजेशन ऑन माइग्रेंशन (International Organization for Migration) ने तैयार की है। इस रिपोर्ट के मुताबिक दुनिया में करीब 27 करोड़ प्रवासी हैं जिनमें सबसे अधिक भारतीय हैं। अकेले भारत के ही 17 करोड़ से अधिक प्रवासी दुनिया के विभिन्‍न देशों में रह रहे हैं। इसके बाद दूसरे नंबर पर मैक्सिको के नागरिकों की है जिनकी संख्‍या लगभग 12 करोड़ है। तीसरे नंबर पर विभिन्‍न देशों में रह रहे चीन के नागरिक आते हैं जिनकी संख्‍या 11 करोड़ से कुछ कम है। रिपोर्ट के मुताबिक 14 करोड़ प्रवासी यूरोप और उत्‍तरी अमेरिका में रहते हैं।

रिपोर्ट के मुख्य तथ्य

  • यूएन की इस रिपोर्ट के मुताबिक दुनिया की पूरी आबादी के करीब 3.5 फीसद लोग प्रवासियों के रूप में विभिन्‍न देशों में रह रहे हैं। इस आबादी में 52 फीसद लोग पुरुष और 48 फीसद महिलाएं हैं। करीब 74 फीसद प्रवासी 20-64 वर्ष की आयु के हैं, जो एक वर्किंग एज होती है। इसका सीधा सा अर्थ ये है कि ज्‍यादातर लोग काम की तलाश में अपना वतन छोड़कर दूसरे देश की राह पकड़ते हैं। लेकिन इसी रिपोर्ट में ये भी दर्ज है कि महज 3.5 फीसद प्रवासी दुनिया की आबादी का बेहद छोटा सा हिस्‍सा हैं। रिपोर्ट के मुताबिक पूरी दुनिया में 96.5 फीसद लोग अपनी पूरी जिंदगी उसी देश में बिताते हैं जहां पर वो पैदा होते हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि आने वाले 30 वर्षों में प्रवासियों की संख्‍या में कमी आ जाएगी और यह करीब 23 करोड़ रह जाएंगे।
  • इस रिपोर्ट का एक तथ्‍य ये भी है कि ज्‍यादातर प्रवासी विकासशील देशों से संबंध रखते हैं जिनका रुख अधिक आय वाले देश होते हैं। इनमें अमेरिका ज्‍यादातर लोगों की पसंद होता है। इसके अलावा फ्रांस, रूस, यूएई, सऊदी अरब भी लोगों की पसंद बनता है। जहां तक आने वाले समय में प्रवासियों की संख्‍या में कमी की बात है तो इसको दो तरह से देखा जा सकता है। पहला विकसित देशों में बने प्रवासियों के लिए कड़े नियम, दूसरा विकासशील देशों का तेजी से होता विकास।
  • इस रिपोर्ट का एक रोचक तथ्‍य ये भी है कि वर्ष 2013-2017 के दौरान अमेरिका जाने वाले लोगों में करीब एक फीसद की कमी आई है। वहीं अमेरिका की तुलना में कम आय वाले देशों में प्रवासियों की संख्‍या में लगभग दोगुना इजाफा हुआ है।
  • रिपोर्ट का एक तथ्‍य और खास है। इसके मुताबिक विदेशों से धन भेजने के मामले में भी भारतीय सबसे आगे हैं। वर्ष 2018 में भारतीयों द्वारा भेजी गई राशि करीब 78.6 खरब डॉलर भेजे थे। वहीं दूसरे नंबर पर चीन था जिसके नागरिकों 67.4 खरब डॉलर और तीसरे नंबर पर मैक्सिको, जिसने 35.7 खरब डॉलर स्‍वदेश भेजे थे।
  • संयुक्‍त राष्‍ट्र की की वर्ल्‍ड माइग्रेशन रिपोर्ट 2020 में केवल प्रवासियों का ही जिक्र नहीं किया गया है बल्कि इसमें दुनिया भर में फैले शरणार्थियों की भी संख्‍या बताई गई है। इस रिपोर्ट के मुताबिक वर्ष 2018 में पूरी दुनिया में करीब ढाई करोड़ शरणार्थी थे। ये वो शरणार्थी है जो यूएनएचसीआर और UNRWA के तहत हैं। इससे सबसे चौंकाने वाला तथ्‍य ये भी है कि शरणार्थियों में सबसे ज्‍यादा करीब 52 फीसद 18 वर्ष से कम उम्र के हैं। इन लोगों के अपना देश छोड़कर दूसरे देश में बसने की कोशिश की वजह हिंसा, हमले, गृहयुद्ध रहा है।
  • इस रिपोर्ट के मुताबिक गृहयुद्ध की वजह से अपना घर छोड़ने वालों की संख्‍या 4 करोड़ को भी पार कर चुकी है। यह संख्‍या 1998 के बाद से सबसे अधिक है। इसमें सबसे अधिक सीरिया है। इसके बाद 5.8 करोड़ लोग कोलंबिया और फिर करीब 3 करोड़ लोग कांगो के हैं। शरणार्थियों की गिनती और संख्‍या कई जगह और वजहों से अलग अलग है। जैसे 2018 में राज्‍य विहीन (stateless persons) लोगों की संख्‍या भी चार करोड़ के करीब पहुंच चुकी है। इसमें बांग्‍लादेश के सबसे अधिक करीब 9 लाख थे। इसके बाद कोट द आइवोरे (Côte d’Ivoire) के करीब 7 लाख और फिर म्‍यांमार के 6 लाख 20 हजार लोग शामिल थे।

ईरान ने तय सीमा से पांच गुना ज्यादा यूरेनियम का भंडार जमा किया: IAEA

  • ईरान ने 2015 में विश्व शक्तियों के साथ हुए करार में निर्धारित सीमा से पांच गुना अधिक संवर्धित यूरेनियम का भंडार जमा किया है। संयुक्त राष्ट्र के परमाणु निगरानी निकाय ने यह खुलासा करते हुए बताया कि ईरान ने उसे दो केंद्र की जांच करने की अनुमति देने से भी मना कर दिया है।
  • अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (आईएईए) की रिपोर्ट के मुताबिक 19 फरवरी 2020 तक ईरान के पास 1,510 किलोग्राम संवर्धित यूरेनियम का भंडार था, जबकि समझौते में इसकी अधिकतम सीमा 300 किलोग्राम निर्धारित की गई थी।
  • कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि इतनी सामग्री से परमाणु हथियार बनाया जा सकता है। हालांकि, घातक हथियार बनाने के लिए यूरेनियम को और अधिक संवर्धित करने के साथ कई चरण पार करने होंगे। रिपोर्ट के मुताबिक ईरान का यूरेनियम संवर्धित करने का स्तर 4.5 प्रतिशत से अधिक नहीं है, लेकिन परमाणु हथियार बनाने के लिए संवर्धन का स्तर करीब 90 प्रतिशत होना चाहिए।

पृष्ठभूमि

  • उल्लेखनीय है कि 2015 में हुए समझौते से अमेरिका मई 2018 में अलग हो गया था और ईरान पर कड़े प्रतिबंध लगा दिए थे। आईएईए की रिपोर्ट ऐसे समय आई है जब कुछ दिन पहले ही करार को बचाने के लिए वियना में अन्य पक्षकारों की हुई बैठक बिना किसी नतीजे के समाप्त हुई थी। आईएईए ने मंगलवार (3 मार्च) को बताया कि जनवरी में उसके दल को ईरान ने तीन परमाणु केंद्रों में से दो का निरीक्षण करने की अनुमति नहीं दी। एजेंसी ने इन स्थानों की पहचान अघोषित परमाणु संबंधी गतिविधि स्थल के रूप में की थी और इससे जुड़े कई सवाल किए थे।

क्या है IAEA?

  • संयुक्त राष्ट्र की विशेषीकृत एजेंसियों में सर्वाधिक महत्वपूर्ण आईएईए (अंतर्राष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी) है जो संयुक्त राष्ट्र की परमाणु निगरानी एजेंसी है। परमाणु प्रौद्योगिकियों के सुरक्षित और शांतिपूर्ण उपयोग को बढ़ावा देने के लिए अपने सदस्य राज्यों और दुनिया भर में कई भागीदारों के साथ काम करता है। इसका उद्देश्य परमाणु ऊर्जा के शांतिपूर्ण उपयोग को बढ़ावा देना और परमाणु हथियारों सहित किसी भी सैन्य उद्देश्य के लिए इसके उपयोग को रोकना है।

कश्मीर मुद्दे और ओआईसी

  • जम्मू कश्मीर के लिए इस्लामिक सहयोग संगठन (ओआईसी) द्वारा नियुक्त विशेष दूत युसूफ एम अल दोबे ने कश्मीर की स्थिति पर चिंता जताई और कहा कि इस मुद्दे का समाधान संगठन के एजेंडे में शीर्ष पर है।
  • दोबे ने कहा कि गत वर्ष भारत द्वारा जम्मू कश्मीर का विशेष दर्जा समाप्त किए जाने के बाद पाकिस्तान के अनुरोध पर ओआईसी का एक औपचारिक सत्र बुलाया गया था।
  • इससे पहले, फरवरी माह में ही सऊदी अरब ने पाकिस्तान को झटका देते हुए इस्लामी सहयोग संगठन (ओआईसी) की विदेश मंत्री परिषद (सीएमएफ) की बैठक में कश्मीर मुद्दे पर उनके तुरंत बहस की अपील को खारिज कर दिया था।

पृष्ठभूमि

  • ओआईसी में 57 मुस्लिम देश शामिल हैं। पाकिस्तान की चाहत है कि ओआईसी के विदेश मंत्रियों की बैठक हो जिसमें बीते साल पांच अगस्त को भारत द्वारा जम्मू-कश्मीर से विशेष दर्जा वापस लेने के फैसले पर विचार किया जाए। लेकिन, विदेश मंत्रियों की यह बैठक हो नहीं सकी है। ओआईसी ऐसा कोई भी कदम उठाए, इसके लिए सऊदी अरब व खाड़ी के अन्य देशों का समर्थन अनिवार्य है क्योंकि ओआईसी में इन्हीं का दबदबा है। सऊदी अरब ने पाकिस्तान को सीएफएम बैठक बुलाने के स्थान पर ओआईसी के संसदीय फोरम या मुस्लिम देशों के सदनों के स्पीकर की बैठक करने का सुझाव दिया है जिसमें कश्मीर और फिलिस्तीन के मुद्दे पर बात हो।
  • गौरतलब है कि एक तरफ जहां तुर्की और मलेशिया ने कश्मीर मुद्दे पर खुलकर पाकिस्तान का साथ दिया है, वहीं सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात ने इस पर एहतियात बरती है और भारत के खिलाफ जाकर कुछ नहीं कहा है।

:: भारतीय राजव्यवस्था ::

विवाद से विश्वास बिल, 2020

  • लोकसभा ने बहुप्रतिक्षित विवाद से विश्वास बिल, 2020 को पास कर दिया है। बुधवार को बजट सत्र के दौरान इस बिल के पास हो जाने से अब डायरेक्ट टैक्स से जुड़े विवादों का निपटान आसान हो जाएगा। यह योजना टैक्स अधिकारियों के वार्षिक प्रदर्शन के मूल्यांकन का आधार भी बनेगी।

पृष्ठभूमि

  • बता दें प्रत्यक्ष कर विवाद के मामलों को निपटाने के लिए आम बजट में विवाद से विश्वास योजना पेश की गई थी। 21 फरवरी की एक सूचना में केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड यानी CBDT ने कहा था कि अधिकारियों के अप्रेजल और पोस्टिंग में विवाद से विश्वास योजना के तहत उनके प्रदर्शन की एक बड़ी भूमिका होगी। बोर्ड के अनुसार, इससे टैक्स अधिकारी बेहतर प्रदर्शन करने के लिए प्रोत्साहित होंगे।

बिल से संबंधित मुख्य तथ्य

  • बिल के अनुसार, 31 जनवरी 2020 तक जो मामले कमिश्‍नर (अपील), इनकम टैक्‍स अपीलीय ट्रिब्‍यूनल, हाई कोर्ट या सुप्रीम कोर्ट में लंबित थे, उन मामलों पर यह योजना लागू होगी।
  • लंबित अपील टैक्‍स विवाद, पेनाल्‍टी या ब्‍याज से जुड़ी हो सकती है और यह एसेसमेंट या रीएसेसमेंट से भी जुड़ा हो सकता है।
  • इसमें TDS और TCS से जुड़े मामलों को भी शामिल किया जाएगा और नोटबंदी के समय के मामले भी इसमें शामिल होंगे। हालांकि 31 मार्च, 2020 तक बकाया टैक्स की पूरी रकम जमा करानी होगी। 30 जून, 2020 तक टैक्स भुगतान करने पर बकाया टैक्स के साथ ही 10 प्रतिशत रकम या टैक्स का ब्याज और जुर्माना या इनमें से जो भी रकम कम हो।
  • अगर ब्याज और पेनल्टी बकाया है, तो 31 मार्च, 2020 तक 25 प्रतिशत रकम देकर केस खत्म कर सकते हैं। 31 मार्च के बाद 30 जून तक ब्याज और पेनल्टी का 30 प्रतिशत भुगतान करना होगा। इनकम टैक्स छापे के मामले में 31 मार्च तक बकाया टैक्स के साथ 25 प्रतिशत अतिरिक्त रकम देनी होगी। 30 जून तक टैक्स के साथ ही 35 प्रतिशत एक्स्ट्रा रकम देनी होगी। अगर अपीलैट ट्रिब्यूनल में फैसला करदाता के पक्ष में आ चुका है, तो उसे केवल 50 फीसदी ही रकम देनी होगी।
  • बता दें इससे पहले केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 'प्रत्यक्ष कर विवाद से विश्वास विधेयक, 2020 में बदलाव को मंजूरी दे दी थी। इस बदलाव का उद्देश्य विधेयक का दायरा बढ़ाकर उन कर विवादों को भी इसके दायरे में लाना है, जो विभिन्न कर्ज वसूली न्यायाधिकरणों (डीआरटी) में लंबित हैं।

सुप्रीम कोर्ट ने क्रिप्टोकरेंसी से बैन हटाया

  • सुप्रीम कोर्ट ने क्रिप्टोकरेंसी (Cryptocurrency ) को लेकर बुधवार को एक बड़ा फैसला सुनाया है। सर्वोच्च न्यायालय ने इस पर लगे सभी प्रतिबंध हटा लिए हैं। न्यायमूर्ति रोहिंटन नरीमन की अध्यक्षता वाली पीठ ने यह निर्णय दिया और इसमें जस्टिस अनिरुद्ध बोस और वी रामसुब्रमण्यन भी शामिल थे। यानी अब देश के सभी बैंक Bitcoin जैसी क्रिप्टोकरेंसी की लेन-देन शुरू कर सकते हैं।

पृष्ठभूमि

  • RBI ने साल 2018 में एक सर्कुलर जारी कर क्रिप्टोकरेंसी (Cryptocurrency) कारोबार को बैन दिया था। आरबीआई ने पांच अप्रैल 2018 को सर्कुलर जारी कर सभी बैंकों से इन बिटक्वाइन एक्सचेंजों को सेवाएं बंद करने का आदेश दिया था।
  • आरबीआई के सर्कुलर को चुनौती देने के लिए इंटरनेट एंड मोबाइल एसोसिएशन ऑफ इंडिया (IAMAI) द्वारा सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की गई थी। कोर्ट में सुनवाई के दौरान आईएएमएआई द्वारा कहा गया कि केंद्रीय बैंक के इस कदम से क्रिप्टोकरेंसी में होने वाली वैध कारोबारी गतिविधियों पर प्रभावी रूप से पाबंदी लग गई है, जिसके जवाब में आरबीआई ने कोर्ट में हलफनामा दाखिल किया। आरबीआई ने कहा कि उसने क्रिप्टोकरेंसी के माध्यम से मनी लाउंड्रिंग और टेरर फंडिंग के खतरे के मद्देनजर यह कदम उठाया है।

क्या है क्रिप्टोकरेंसी?

  • बता दें क्रिप्टोकरेंसी एक डिजिटल करेंसी होती है, जो ब्लॉकचेन तकनीक पर आधारित है। इस करेंसी में Coding technique का प्रयोग होता है। इस तकनीक के जरिए करेंसी के ट्रांजेक्शन का पूरा लेखा-जोखा होता है, जिससे इसे हैक करना बहुत मुश्किल है। यही कारण है कि क्रिप्टोकरेंसी में धोखाधड़ी की संभावना बहुत कम होती है।

क्रिप्टोकरेंसी से संबंधित महत्वपूर्ण तथ्य

  • यह डिजिटल करेंसी होती है और किसी भी सरकार या किसी भी बैंक से जुड़ी हुई नहीं है। एक यूजर दूसरे को क्रिप्टोकरेंसी भेजता है तो इसका रिकॉर्ड एन्क्रिप्शन के जरिए यानी सांकेतिक भाषा में होता है। इसे कोई अन्य डिकोड नहीं कर सकता है। इसलिए इसे क्रिप्टोकरेंसी कहते हैं।
  • बिटक्वाइन ट्रांजेक्शन के डेटा को मेंटेन करने के लिए कंप्यूटर के सीपीयू की पावर इस्तेमाल होती है। सीपीयू में बिटक्वाइन से जुड़ा सॉफ्टवेयर इन्सटॉल किया जाता है। यह सॉफ्टवेयर कॉम्प्लेक्स गणितीय गणना कर बिटक्वाइन के लिए इनक्रिप्शन तैयार करता है। माइनिंग का काम हाई एंड सीपीयू के जरिए कोई भी कर सकता है।
  • बिटक्वाइन इस समय सबसे बड़ी क्रिप्टोकरेंसी है। बिटक्वाइन का रिकॉर्ड पब्लिक लेजर में मेंटेन होता है। 2009 से अब तक सभी ट्रांजेक्शन पब्लिक लेजर में सेव होते रहे हैं। ट्रांजेक्शन के सभी रिकॉर्ड कई ब्लॉक में रखे जाते हैं। इसलिए ये ब्लॉकचेन भी कहलाते हैं।
  • बिटक्वाइन में इस साल 50% तेजी आ चुकी है। अक्टूबर 2019 के बाद पहली बार बिटक्वाइन पिछले दिनों 10,000 डॉलर पर पहुंचा था। मौजूदा वैल्यू 8,771 डॉलर (6.40 लाख रुपए) है। दूसरी क्रिप्टोकरेंसी में भी इस साल तेजी बनी हुई है। इथेरियम की वैल्यू दोगुनी हुई है।
  • जापान ने बिटक्वाइन को कानूनी रूप दिया। इसके बाद से इसकी वैल्यू 60% से ज्यादा बढ़ गई। ट्रांजेक्शन के लिए यह काफी सुरक्षित माना जाता है। साथ ही इस पर किसी अथॉरिटी का नियंत्रण न होने के कारण इसमें हाइपर इनफ्लेशन का खतरा नहीं होता है।
  • रेगुलेशन न होने की वजह से ट्रांजेक्शन की लागत काफी कम।
  • इसमें वोलाटैलिटी यानी उतार-चढ़ाव ज्यादा है। बिटक्वाइन की अभी एक लिमिट है। मौजूदा स्ट्रक्चर के मुताबिक संख्या में 2.1 करोड़ से ज्यादा बिट क्वाइन नहीं हो सकते हैं।

:: भारतीय अर्थव्यवस्था ::

मंत्रिमंडल ने नागरिक उड्डयन में प्रत्‍यक्ष विदेशी निवेश नीति को मंजूरी दी

  • प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी की अध्‍यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने मैसर्स एयर इंडिया लिमिटेड के मामले में उन एनआरआई को स्‍वचालित मार्ग से 100 प्रतिशत तक विदेशी निवेश की अनुमति देने के लिए मौजूदा एफडीआई नीति में संशोधन को मंजूरी दी है जो भारत के नागरिक हैं।
  • मौजूदा एफडीआई के अनुसार, अनुसूचित हवाई परिवहन सेवा/ घरेलू अनुसूचित यात्री एयरलाइन में स्वचालित मार्ग से 100 प्रतिशत एफडीआई की अनुमति है (49 प्रतिशत तक स्वचालित और 49 प्रतिशत से अधिक सरकार के जरिये)। हालांकि एनआरआई के लिए अनुसूचित हवाई परिवहन सेवा/ घरेलू अनुसूचित यात्री एयरलाइन में स्वचालित मार्ग के तहत 100 प्रतिशत एफडीआई की अनुमति है। लेकिन शर्त यह है कि विमान नियम 1937 के अनुसार पर्याप्‍त स्‍वामित्‍व एवं प्रभावी नियंत्रण (एसओईसी) भारतीय नागरिकों में निहित होगा।
  • हालांकि मैसर्स एयर इंडिया लिमिटेड के लिए मौजूदा नीति के अनुसार, मैसर्स एयर इंडिया लिमिटेड में प्रत्‍यक्ष अथवा अप्रत्‍यक्ष तौर पर 49 प्रतिशत से अधिक विदेशी निवेश की अनुमति नहीं है और वह इस शर्त पर आधारित है कि मैसर्स एयर इंडिया लिमिटेड में पर्याप्‍त स्‍वामित्‍व एवं प्रभावी नियंत्रण भारतीय नागरिकों में निहित हो। इसलिए अनुसूचित हवाई परिवहन सेवा/ घरेलू अनुसूचित यात्री एयरलाइन में एनआरआई के लिए स्वचालित मार्ग के तहत 100 प्रतिशत एफडीआई की अनुमति होने के बावजूद मैसर्स एयर इंडिया लिमिटेड के मामले में यह केवल 49 प्रतिशत तक सीमित है।

लाभ:

  • भारत सरकार द्वारा मैसर्स एयर इंडिया लिमिटेड के 100 प्रतिशत प्रस्तावित रणनीतिक विनिवेश के संदर्भ में मैसर्स एयर इंडिया लिमिटेड में सरकार की कोई शेष हिस्‍सेदारी नहीं होगी और वह पूरी तरह निजी स्वामित्व में होगी। इसलिए यह निर्णय लिया गया है कि एम/एस एयर इंडिया लिमिटेड में विदेशी निवेश के जरिये उसे अन्य अनुसूचित विमानन कंपनियों की श्रेणी में लाया जाना चाहिए।
  • एफडीआई नीति में इस संशोधन से मैसर्स एयर इंडिया लिमिटेड में अन्य अनुसूचित एयरलाइन ऑपरेटरों के अनुरूप विदेशी निवेश की अनुमति मिल जाएगी यानी मैसर्स एयर इंडिया लिमिटेड में उन एनआरआई को 100 प्रतिशत तक विदेशी निवेश की अनुमति होगी जो भारतीय नागरिक हैं। एफडीआई नीति में प्रस्तावित संशोधन एनआरआईएस को स्वचालित मार्ग से मैसर्स एयर इंडिया लिमिटेड में 100 प्रतिशत तक विदेशी निवेश करने में समर्थ बनाएगा।
  • एफडीआई नीति में उपरोक्‍त संशोधन का उद्देश्‍य देश में कारोबारी सुगमता उपलब्‍ध कराने के लिए एफडीआई नीति को उदार और सरल बनाना है। इसके जरिये सबसे बड़े एफडीआई का मार्ग प्रशस्‍त होगा जिससे निवेश, आय और रोजगार में वृद्धि को बल मिलेगा।

पृष्ठभूमि:

  • एफडीआई आर्थिक विकास का एक प्रमुख वाहक है और यह देश के आर्थिक विकास के लिए गैर-ऋण वित्तपोषण का एक स्रोत है। देश में बड़े पैमाने पर विदेशी निवेश को आकर्षित करने के उद्देश्‍य से एफडीआई नीति की लगातार समीक्षा की जाती है। सरकार ने निवेशकों के अनुकूल एफडीआई नीति तैयार की है जिसके तहत अधिकतर क्षेत्रों/ गतिविधियों में स्वचालित मार्ग पर 100 प्रतिशत तक एफडीआई की अनुमति दी गई है।
  • भारत को एक आकर्षक निवेश गंतव्य बनाने के लिए हाल के दिनों में विभिन्न क्षेत्रों में एफडीआई नीति के प्रावधानों को लगातार उदार बनाया गया है। इन क्षेत्रों में रक्षा, निर्माण एवं विकास, व्यापार, औषधि, बिजली विनिमय, बीमा, पेंशन, अन्य वित्तीय सेवाएं, परिसंपत्ति पुनर्गठन कंपनियां, प्रसारण, एकल ब्रांड खुदरा व्‍यापार, कोयला खनन, डिजिटल मीडिया आदि शामिल हैं।
  • इन सुधारों ने हाल के दिनों में भारत में हुए एफडीआई निवेशक में उल्‍लेखनीय योगदान दिया है। वर्ष 2014-15 में भारत में एफडीआई प्रवाह 45.15 बिलियन अमेरिकी डॉलर था और तब से इसमें लगातार वृद्धि हुई है। वर्ष 2015-16 में एफडीआई प्रवाह 55.56 बिलियन अमेरिकी डॉलर रहा जबकि वर्ष 2016-17 में 60.22 बिलियन अमेरिकी डॉलर और वर्ष 2017-18 में 60.97 बिलियन अमेरिकी डॉलर का एफडीआई निवेश हुआ। पिछले वित्‍त वर्ष यानी 2018-19 में देश में एफडीआई प्रवाह 62.00 बिलियन अमेरिकी डॉलर (अनंतिम आंकड़ा) दर्ज किया गया जो अब तक का सर्वाधिक है। पिछले पिछले साढ़े उन्‍नीस वर्षों (अप्रैल 2000 से सितंबर 2019) के दौरान कुल एफडीआई प्रवाह 642 बिलियन अमेरिकी डॉलर रहा जबकि पिछले साढ़े पांच वर्षों (अप्रैल 2014 से सितंबर 2019) के दौरान देश में कुल 319 बिलियन अमेरिकी डॉलर का एफडीआई प्रवाह हुआ जो पिछले साढ़े उन्‍नीस वर्षों में हुए कुल एफडीआई निवेश का लगभग 50 प्रतिशत है।
  • पिछले कुछ वर्षों से वैश्विक एफडीआई के अंतरप्रवाह में चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। यूएनसीटीएडी की वर्ल्ड इनवेस्टमेंट रिपोर्ट 2019 के अनुसार, वर्ष 2018 में वैश्विक प्रत्‍यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) 13 प्रतिशत घटकर 1.3 ट्रिलियन रह गया जो इसकी लगातार तीसरी वार्षिक गिरावट है। वैश्विक तस्वीर साफ न होने के बावजूद भारत वैश्विक एफडीआई प्रवाह के लिए एक पसंदीदा और आकर्षक गंतव्य बना हुआ है। हालांकि देश में विदेशी निवेश आकर्षित करने की क्षमता मौजूद है। लेकिन ऐसा महसूस किया गया है कि एफडीआई नीति के नियमों को अधिक उदार एवं सरल बनाकर कहीं अधिक एफडीआई निवेश आकर्षित किया जा सकता है।

सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों (पीएसबी) में व्‍यापक विलय को मंजूर

  • प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी की अध्‍यक्षता में केन्‍द्रीय मंत्रिमंडल ने सार्वजनिक क्षेत्र के 10 बैंकों के 4 बैंकों में विलय के व्‍यापकएकीकरण को मंजूरी दे दी है, इस विलय में शामिल हैं :-
  1. ओरिएंटल बैंक ऑफ कॉमर्स और यूनाइटेड बैंक ऑफ इंडिया का पंजाब नेशनल बैंक में विलय
  2. सिंडिकेट बैंक का केनरा बैंक में विलय
  3. आंध्रा बैंक और कॉरपोरेशन बैंक का यूनियन बैंक ऑफ इंडिया में विलय
  4. इलाहाबाद बैंक का इंडियन बैंक में विलय

विलय से लाभ

  • यह विलय 01 अप्रैल, 2020 से प्रभावित होगा और इसके परिणामस्‍वरूप सार्वजनिक क्षेत्र के 7 बड़े बैंकों का व्‍यापक स्‍तर पर सृजन होने के अलावा प्रत्‍येक व्‍यापक एकीकरण में 80 लाख करोड़ रुपये से अधिक के कारोबार के साथ-सा‍थ इसकी राष्‍ट्रीय स्‍तर तक पहुंच होगी। व्‍यापक स्‍तर पर हुए इस एकीकरण से बैंकों को न सिर्फ वैश्विक बैंकों के साथ तुलनात्‍मक क्षेत्र में अपितु भारत और अंतर्राष्‍ट्रीय स्‍तर पर भी प्रभावी रूप से प्रतिस्‍पर्धा करने में सक्षम बनाने में मदद मिलेगी। इस एकीकरण के माध्‍यम से बड़े पैमाने पर लागत लाभ को सुनिश्चित किया जाएगा, जिससे सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक भारतीय बैंकिंग प्रणाली में अपनी प्रतिस्‍पर्धात्‍मकता और सकारात्‍मक प्रभाव का विस्‍तार करने में सक्षम बनेंगे।
  • इसके अतिरिक्‍त, इस एकीकरण से इन बैंकों में बड़े स्‍तर के ऋणों में सहायता के साथ-साथ व्‍यापक वित्‍तीय क्षमता के द्वारा प्रतिस्‍पर्धात्‍मक कार्य संचालनों को भी प्रोत्‍साहन मिलेगा। सभी एकीकृत बैंकों में सर्वोत्‍तम कार्य प्रणालियों को अपनाने से बैंकों में उनकी लागत कुशलता और जोखिम प्रबंधन में सुधार होगा एवं व्‍यापक पहुंच के माध्‍यम से वित्‍तीय समावेशन के लक्ष्‍य में भी वृद्धि होगी।
  • सभी एकीकृत बैंकों में उन्‍नत तकनीकियों को अपनाने से न सिर्फ व्‍यापक योग्‍य समूह और एक बड़े डाटा बेस तक पहुंच होगी, अपितु सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक तेजी से डिजिटल होते बैंकिंग परिदृश्‍य में विश्‍लेषणात्‍मक कार्य क्षमता के द्वारा प्रतिस्‍पर्धा का लाभ लेने की स्थिति में होंगे।

NCLAT ने फ्लिपकार्ट के खिलाफ जांच के आदेश दिए

  • राष्ट्रीय कंपनी विधि अपीलीय न्यायाधिकरण (एनसीएलएटी) ने बुधवार को ई-कॉमर्स कंपनी फ्लिपकार्ट को बड़ा झटका देते हुए सीसीआई के पूर्व के आदेश को रद्द कर दिया है। पीठ ने व्यापार नियामक सीसीआई को कंपनी के खिलाफ जांच करने का आदेश दिया है।
  • एनसीएलएटी के चेयरमैन जस्टिस एसजी मुखोपाध्याय की अगुवाई वाली तीन सदस्यीय पीठ ने भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग (सीसीआई) से कहा कि फ्लिपकार्ट के खिलाफ अपने प्रभावशाली का दुरुपयोग करते हुए अनुचित व्यापार को लेकर पर्याप्त दलीलें मिली हैं। लिहाजा व्यापार नियामक अपने महानिदेशक को आरोपों की जांच करने का आदेश दे।

पृष्ठभूमि

  • प्रतिस्पर्धा आयोग ने अपने पिछले आदेश में ई-कॉमर्स कंपनी फ्लिपकार्ट को प्रभावशाली स्थिति का दुरुपयोग कर अनुचित व्यवहार के आरोप से दोषमुक्त कर दिया था। सीसीआई ने 6 नवंबर, 2018 को जारी अपने आदेश में कहा था कि फ्लिपकार्ट और अमेजन ने प्रतिस्पर्धा नियमों का उल्लंघन नहीं किया है और प्रभावशाली स्थिति के दुरुपयोग के मामले में एआईओवीए के आरोपों को खारिज कर दिया था।

:: विज्ञान और प्रौद्योगिकी ::

क्‍वांटम सेंसिंग के लिए एन्टैंगलमेंट तकनीक

  • विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के अधीनस्‍थ स्‍वायत्त निकाय ‘रामन अनुसंधान संस्‍थान (आरआरआई)’ के अनुसंधानकर्ताओं ने एन्टैंगलमेंट सिद्धांत का उपयोग करते हुए क्‍वांटम सिक्‍का अथवा ‘क्‍यूबिट’ की सटीकता जानने के लिए एक नया परीक्षण विकसित किया है, जो क्‍वांटम कम्‍प्‍यूटर में सूचना की बुनियादी या मूल यूनिट है।
  • यह दरअसल क्‍वांटम की स्थिति की पहचान करने में एक उल्‍लेखनीय योगदान है, जो क्‍वांटम सूचना विज्ञान का एक आवश्‍यक पहलू है। इससे क्‍वांटम सेंसिंग पर उल्‍लेखनीय असर पड़ने की आशा है। नए परीक्षण में ‘एन्टैंगलमेंट’ का उपयोग किया जाता है, ताकि क्‍वांटम सिक्‍के की सटीकता का परीक्षण किया जा सके।

क्या है एन्टैंगलमेंट?

  • ‘एन्टैंगलमेंट’ दरअसल एक विशेष प्रकार का सह-संबंध है जो क्‍वांटम की दुनिया में मौजूद है और जिसका कोई पारम्परिक समकक्ष नहीं है। आरआरआई के अनुसंधानकर्ताओं ने इस क्‍वांटम संसाधन का उपयोग किया, ताकि क्‍वांटम सिक्‍के (क्‍यूबिट) की सटीकता जानने के लिए कोई विशिष्‍ट परीक्षण विकसित किया जा सके। इस रणनीति में ‘एन्टैंगलमेंट’ का उपयोग किया जाता है और इससे क्‍वांटम की स्थितियों की पहचान बेहतर ढंग से हो सकती है। इस तरह की अनुकूल स्थिति क्‍वांटम सेंसरों में अत्‍यंत अहम होती है।

लाभ:

  • यह नया परीक्षण दरअसल क्‍वांटम की स्थिति की पहचान करने वाले क्षेत्र में एक उल्‍लेखनीय योगदान है, जो क्‍वांटम सूचना विज्ञान का एक महत्‍वपूर्ण पहलू है। यह क्‍वांटम की स्थिति की पहचान करने से जुड़ी हमारी क्षमता को बेहतर करने में ‘एन्टैंगलमेंट’ की महत्‍वपूर्ण भूमिका को दर्शाता है। इस महत्‍वपूर्ण कार्य में अनुसंधानकर्ताओं ने आईबीएम क्‍वांटम कम्‍प्‍यूटर की सिमुलेशन सुविधा से जुड़े सैद्धांतिक आइडिया पर बिल्‍कुल सही ढंग से अमल किया है। अनुसंधानकर्ताओं ने आईबीएम क्‍वांटम कम्‍प्‍यूटर पर विभिन्‍न प्रयोग भी किए हैं जिनसे प्रायोगिक हार्डवेयर की कमियां उभर कर सामने आई हैं। इन अनुसंधानकर्ताओं के ठोस प्रयासों से आईबीएम क्‍वांटम कंप्‍यूटिंग सुविधा में इस्‍तेमाल किए गए प्रायोगिक उपकरणों को बेहतर करने का मार्ग प्रशस्‍त होगा। इसके तहत असम्बद्धता के कारण गेट संबंधी त्रुटियों और आवाज को कम किया जाता है।
  • बार-बार परीक्षण के जरिए किसी भी पारम्परिक सिक्‍के की सटीकता को पूरे विश्‍वास के साथ जाना जा सकता है। परीक्षण की संख्‍या बढ़ने के साथ ही इससे जुड़ा विश्‍वास भी बढ़ता जाता है।
  • अनुसंधानकर्ताओं ने अपनी खोज के दौरान इन उपकरणों (टूल) का उपयोग किया है- विश्लेषणात्मक तकनीक, संख्यात्मक एवं कम्‍प्‍यूटर सिमुलेशन और आईबीएम क्वांटम कम्‍प्‍यूटिंग सुविधा पर प्रयोग। क्‍वांटम की स्थिति की पहचान करने में ‘एन्टैंगलमेंट’ की भूमिका को समझने के लिए इन सभी उपकरणों का सामूहिक रूप से उपयोग किया गया।

पृष्ठभूमि

  • क्‍वांटम सूचना और क्‍वांटम कम्‍प्‍यूटिंग प्रौद्योगिकी पर हो रहे अनुसंधान में काफी तेजी आई है। इससे ‘डेटा प्रोसेसिंग’ पर व्‍यापक असर पड़ने की आशा है, जो सूचना के इस युग में हमारे जीवन में केन्‍द्रीय भूमिका निभाती है। उदाहरण के लिए, बैंकिंग से जुड़े लेन-देन; ऑनलाइन शॉपिंग; इत्‍यादि सूचनाओं की आवाजाही की दक्षता पर काफी हद तक निर्भर करते हैं। अत: क्‍वांटम की स्थिति की पहचान करने से जुड़े नये परीक्षण के आज के जमाने के लोगों के जीवन में काफी महत्‍वपूर्ण साबित होने की आशा है।

जीसैट-1 का प्रक्षेपण रद्द : इसरो

  • भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन(इसरो) ने बुधवार को बताया कि जीएसएलवी-एफ 10 के जरिये जीसैट-1 का प्रक्षेपण तकनीकी कारणों के चलते स्थगित कर दिया गया है। यह पहले आगामी पांच मार्च को होने वाला था।

जीसैट-1 के बारे में महत्वपूर्ण तथ्य

  • जीसैट-1 क्षेत्र के बड़े भाग का रियल टाइम इमेज प्रदान करेगा. यह प्राकृतिक आपदा और दूसरी घटनाओं की निगरानी करने में सक्षम होगा.जीसैट-1 का वजन 2,268 किग्रा है. यह कृषि, वन, खनिज विज्ञान, आपदा चेतावनी, बादल, बर्फ, ग्लेसियर और समुद्र विज्ञान से जुड़ी जानकारी भी प्रदान करेगा.
  • जीसैट-1 का वजन 2,268 किलोग्राम है. इसे तीन चरणों के जियो-सिनक्रोनस सैटेलाइट लॉन्च व्हिकिल (जीएसएलवी-एफ10) से प्रक्षेपित किया जाना है.भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के अनुसार, 51.70 मीटर लंबे और 420 टन वजनी जीएसएलवी-एफ10 रॉकेट से आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा के दूसरे लॉन्च पैड से लॉन्च किया जाना था.

कोरोना वायरस के बचाव में प्रोटेक्टिव इक्‍यूपमेंट्स की कमी बन सकती है घातक: WHO

  • विश्‍व स्‍वास्‍थ्‍य संगठन (World Health Organization) ने दुनिया को चेताया है कि कोरोना से निपट रहे स्‍वास्‍थ्‍यकर्ताओं के लिए जल्‍द ही प्रोटेक्टिव इक्‍यूपमेंट्स की सप्‍लाई को बढ़ाना होगा। यदि ऐसा न हुआ तो समस्‍या खड़ी हो सकती है। डब्‍ल्‍यूएचओ की तरफ से जारी एक रिपोर्ट में स्‍वास्‍थ्‍यकर्मियों के बचाव की चीजों में कमी पर गहरी चिंता जताई गई है। इस पर संगठन ने इंडस्‍ट्री और सरकारों को विश्‍व में बढ़ती मांग के मुताबिक प्रोटेक्टिव इक्‍यूपमेंट्स की मैन्‍यूफैक्‍चरिंग को 40 फीसद तक बढ़ाने की अपील की है। आपको यहां पर ये भी बता दें कि विश्व स्वास्थ्य संगठन की 3 मार्च को जारी रिपोर्ट के मुताबिक चीन के अलावा 72 देशों में कोरोना वायरस फैला हुआ है।
  • कोरोना के बढ़ते प्रकोप और प्रोटेक्टिव इक्‍यूपमेंट्स की कमी को देखते हुए संगठन ने दुनिया के 47 देशों में इनकी सप्‍लाई की है। इसमें मास्‍क, दस्‍‍‍‍‍ताने गूगल्‍स, फेस शील्‍ड, गाउन और एप्रेन शामिल हैं। जिन देशों में इन चीजों की सप्‍लाई की गई है उसमें से ज्‍यादातर अफ्रीका के हैं। इसके अलावा अफगानिस्‍तान,, ईरान, पाकिस्‍तान, भूटान, बांग्‍लादेश, मालदीव, म्‍यांमार, नेपाल भी शामिल हैं।
  • डब्‍ल्‍यूएचओ ने ये भी कहा है कि कोरोना को लेकर पूरी दुनिया के लोगों में दहशत व्‍याप्‍त है। इसकी वजह से भी दिक्‍कत बढ़ रही है। कुछ जगहों पर जरूरी चीजों के अभाव में खुद स्‍वास्‍थ्‍यकर्मी ही कोरोना वायरस की चपेट में आ रहे हैं।
  • संगठन के महानिदेशक डॉक्‍टर टेडरॉस अधनोम घेबरेसस ने ये भी कहा है कि कोरोना को देखते हुए सरकारों को तेजी से कदम उठाने की जरूरत है। सरकारों को चाहिए कि इसको लेकर फैल रही अफवाहों को रोकने के लिए होर्डिंग लगाए जाने चाहिए। लेकिन इससे भी ज्‍यादा जरूरी अपने स्‍वास्‍थ्‍यकर्मियों को बचाकर रखने की है। कोरोना वायरस के सामने आने के बाद से एन95 मास्‍क समेत प्रोटेक्टिव गाउन की मांग दोगुना हो गई है।
  • संगठन ने इस बात पर भी चिंता जताई है कि मांग के मुताबिक प्रोटेक्टिव इक्‍यूपमेंट्स की सप्‍लाई करने में एक महीने तक का समय लग सकता है। संगठन के मुताबिक COVID-19 के प्रकोप को देखते हुए हर माह लगभग 9 करोड़ मेडिकल मास्‍क की जरूरत है। इसके अलावा करीब आठ करोड़ दस्‍ताने और करीब दो करोड़ गूगल्‍स की भी जरूरत होगी।
  • संगठन ने जिन 73 देशों में इस वायरस के मरीज होने की पुष्टि की है उसमें भारत भी एक है। आपको बता कि भारत में अब तक कोरोना वायरस से जुड़े 28 मामले सामने आए हैं। इनमें से तीन जो केरल के थे वो ठीक हो चुके हैं। इस तरह से वर्तमान में कोरोना के 25 मामले हैं। इनमें 1 दिल्‍ली, 6 आगरा, 16 इटली नागरिक और 1 इनका ड्राइवर, 1 तेलंगाना और 3 केरल के मामले शामिल हैं। गौरतलब है कि चीन के वुहान से फैले इस वायरस के संक्रमण की चपेट में आकर अब तक पूरे विश्‍व में 3000 से ज्‍यादा लोगों की मौत हो चुकी है। वहीं 90 हजार से ज्‍यादा लोग इससे संक्रमित हो चुके हैं।

इन देशों में की है डब्‍ल्‍यूएचओ ने प्रोटेक्टिव इक्‍यूमेंट्स की सप्‍लाई

  • कंबोडिया, फिजी, किरीबाती, लाओ पिपुल्‍स डेमोक्रेटिक रिपब्लिक, मंगोलिया, नोरू, पापुआ न्‍यूगिनी, समोआ, सोलोमान द्वीप, टोंगा, वेनाटू, फिलीपींस, बांग्‍लादेश, भूटान, मालदीव, म्‍यांमार, नेपाल, तिमूर-लेस्‍ते, अफगानिस्‍तान, जिबूती, लेबनान, सोमालिया, पाकिस्‍तान, सूडान, जोर्डन, मोरक्‍को, ईरान, सेनेगल, अल्‍जीरिया, इथियोपिया, टोगो, आइवरी कॉस्‍ट, मॉरीशस, नाइजीरिया, यूगांडा, तंजानिया, अंगोला, घाना, केन्‍या, जांबिया, इक्‍यूटॉरियल गुएना, गांबिया, मेडागास्‍कर, मॉरिशनिया, मोजांबिक, सिशेल्‍स और जिंबाव्‍बे शामिल हैं।

:: पर्यावरण एवं पारिस्थितिकी ::

वर्ल्ड वेदर ऐट्रिब्यूशन (डब्ल्यूडब्ल्यूए) की रिपोर्ट

  • जलवायु परिवर्तन के चलते हर मोर्चे पर खतरा मंडरा रहा है। एक नए अध्ययन में कहा गया है कि इसके चलते आग लगने का खतरा भी तेजी से बढ़ रहा है। वर्ल्ड वेदर ऐट्रिब्यूशन (डब्ल्यूडब्ल्यूए) की रिपोर्ट में कहा गया है कि वर्ष 1900 की तुलना में इस खतरे में 30 फीसदी की बढ़ोतरी हो चुकी है, लेकिन सदी के अंत तक यदि तापमान में बढ़ोतरी दो डिग्री सेल्सियस की होती है तो यह खतरा मौजूदा स्तर से चार गुना और बढ़ जाएगा।
  • रिपोर्ट के अनुसार, वैज्ञानिकों ने दो अलग-अलग मॉडलों का इस्तेमाल कर आग फायर वेदर इंडेक्स तैयार किया है। यह इंडेक्स बताता है कि बढ़ती गर्मी के कारण आग लगने की आशंका में इजाफा हुआ है। ऑस्ट्रेलिया के जंगलों में लगी हालिया आग के साथ-साथ दुनिया के तमाम हिस्सों के जंगलों में बढ़ती आग की घटनाओं के आंकड़ों का भी विश्लेषण किया गया है। जिससे यह नतीजा निकलता है कि जलवायु परिर्वतन से आग का खतरा बढ़ रहा है।
  • इस अध्ययन में दुनिया के विभिन्न हिस्सों के सात दिनों के अधिकतम औसत तापमान को आधार बनाया गया है। तापमान के आंकड़ों के आधार पर फायर वेदर इंडेक्स तैयार किया गया है। इसमें यह आकलन किया गया है कि बीसवीं सदी के शुरू की तुलना में आज तापमान में 1-2 डिग्री की बढ़ोतरी हो चुकी है तथा गर्म हवाएं चलने की घटनाएं करीब दस गुना बढ़ चुकी हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि गर्म महीनों के अलावा नवंबर-दिसंबर के शुष्क महीनों में भी आग की आशंकाओं में बढ़ोतरी हुई है।

:: विविध ::

राष्‍ट्रपति ने 61वें वार्षिक ललित कला अकादमी पुरस्‍कार प्रदान किए

  • राष्‍ट्रपति श्री राम नाथ कोविंद ने आज (04 मार्च, 2020) राष्‍ट्रपति भवन में आयोजित एक समारोह में 15 श्रेष्‍ठ कलाकारों को 61वें वार्षिक ललित कला अकादमी पुरस्‍कार प्रदान किए।
  • जिन कलाकारों को आज सम्‍मानित किया गया वे हैं: अनूप कुमार मन्‍झुखी गोपी, डेविड मलाकार, देवेन्‍द्र कुमार खरे, दिनेश पांड्या, फारूख अहमद हलदर, हरिराम कुम्‍भावत, केशरी नंदन प्रसाद, मोहन कुमार टी, रतन कृष्‍ण साहा, सागर वसंत काम्‍बले, सतविंदर कौर, सुनील थिरूवयूर, तेजस्‍वी नारायण सोनावाने, यशपाल सिंह और यशवंत सिंह। इन कलाकारों की कला का प्रदर्शन 22 मार्च 2020 तक, नई दिल्‍ली स्थित ललित कला अकादमी दीर्घा में किया जाएगा।
  • ललित कला अकादमी कला को बढ़ावा देने और प्रतिभा को सम्‍मानित करने के लिए हर वर्ष कला प्रदर्शनियां और पुरस्‍कार समारोह आयोजित करती है। यह प्रदर्शनी देश भर की प्रतिभाओं को एक स्‍थान पर लाती है और उभरती हुई कला प्रतिभाओं को प्रोत्‍साहित करती है ताकि वे पेंटिंग, मूर्तिकला, ग्राफिक्‍स, फोटोग्राफी, ड्राइंग, प्रतिष्‍ठापन और मल्‍टीमीडिया आदि की दुनिया की नई प्रकृति और माध्‍यमों को सीख सकें।

केपीआईटी स्पार्कल 2020

  • केपीआईटी ऑटोमोटिव सॉफ्टवेयर और गतिशीलता समाधानों में एक वैश्विक दिग्गज है। इसने गतिशीलता और ऊर्जा में परिवर्तनकारी समाधानों पर अपने विचार प्रस्तुत करने वाली 30 चुनिंदा टीमों में से केपीआईटी स्पार्कल 2020 के विजेताओं की घोषणा की है।
  • आर्मी इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी, पुणे की टीम ने 5 लाख रुपये का स्वर्ण पुरस्कार जीता है जबकि भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान खड़गपुर और जवाहरलाल नेहरू सेंटर फॉर एडवांस्ड साइंटिफिक रिसर्च बेंगलुरु दोनों ने संयुक्त रूप से 2.5 लाख रुपये का रजत पुरस्कार जीता हैं।
  • आर्मी इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी पुणे की टीम को यह पुरस्कार संशोधित ऊर्ध्वाधर एक्सिस पवन टरबाइन को डिजाइन करने के लिए दिया गया है। जो टरबाइन की ऊर्जा सृजन की दक्षता को बढ़ाती है।
  • भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान खड़गपुर ने हाइड्रोकाइनेटिक ऊर्जा से नवीकरणीय ऊर्जा का उत्पादन करने के लिए एक नई तकनीक तैयार की है। जवाहरलाल नेहरू सेंटर फॉर एडवांस साइंटिफिक रिसर्च, बेंगलुरु की टीम ने इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए इको-फ्रेंडली रिचार्जेबल जिंक-एयर बैटरी का निर्माण किया है।

क्या है केपीआईटी स्पार्कल?

  • केपीआईटी स्पार्कल एक राष्ट्रीय स्तर की वार्षिक प्रतियोगिता है। यह विज्ञान, प्रौद्योगिकी, जीनियरिंग, प्रबंधन विधाओं छात्रों को प्रोत्साहन देकर नवाचार की संस्कृति को बढ़ावा देती हैं। केपीआईटी स्पार्कल 2020 को विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग के साथ जोड़ा गया है। नीति आयोग का अटल नवाचार मिशन अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद, भारत डिजाइन परिषद राष्ट्रीय डिजाइन संस्थान और ओएनजीसी ऊर्जा केंद्र इसके बौद्धिक भागीदार हैं।

बीसीसीआई : सुनील जोशी चीफ सिलेक्टर

  • बीसीसीआई की क्रिकेट सलाहकार समिति ने बुधवार को भारत के लिए 15 टेस्ट खेलने वाले पूर्व स्पिनर सुनील जोशी को टीम इंडिया का नया चीफ सिलेक्टर चुना।

:: प्रिलिम्स बूस्टर ::

  • हाल ही में जारी हुई 50 सर्वश्रेष्ठ इंजीनियरिंग कॉलेजों की क्यूएस वर्ल्ड रैंकिंग में भारत की कौन सी संस्था अग्रणी रही? (आईआईटी बॉम्बे)
  • इंडिया फार्मा 2020 तथा इंडिया मेडिकल डिवाइस 2020 सम्मेलन का आयोजन कहां किया जाएगा? (गांधीनगर, गुजरात)
  • इंडिया फार्मा 2020 तथा इंडिया मेडिकल डिवाइस 2020 सम्मेलन का पार्टनर राज्य कौन है? (गुजरात)
  • पूरे देश में जनऔषधि सप्ताह 2020 कब से कब मनाया जाएगा? (1 से 7 मार्च)
  • हाल ही में किस जगह को उत्तराखंड की ग्रीष्मकालीन राजधानी बनाई गई है? (गैरसैंण)
  • हाल ही में जारी हुए वर्ल्ड माइग्रेशन रिपोर्ट 2020 को किस संस्था के द्वारा प्रकाशित किया गया है? (इंटरनेशनल ऑर्गेनाइजेशन ऑन माइग्रेशन)
  • वर्ल्ड माइग्रेशन रिपोर्ट 2020 के अनुसार प्रवासियों नागरिकों की संख्या में कौन सा देश शीर्ष पर बना हुआ है? (भारत प्रथम, मेक्सिको द्वितीय)
  • वर्ल्ड माइग्रेशन रिपोर्ट 2020 के अनुसार कौन सा देश प्रवासियों की सबसे पसंदीदा जगह है? (अमेरिका)
  • वर्ल्ड माइग्रेशन रिपोर्ट 2020 के अनुसार प्रवासियों के द्वारा भेजे गए धन की सर्वाधिक प्राप्ति करने वाला देश कौन है? (भारत)
  • हाल ही में नागरिक उड्डयन क्षेत्र में एनआरआई लोगों को स्वचालित मार्ग से कितने प्रतिशत कि एफडीआई की अनुमति दी गई है? (100%)
  • हाल ही में किस कंपनी के विरुद्ध राष्ट्रीय कंपनी विधि अपीलीय न्यायाधिकरण ने सीसीआई को जांच करने के आदेश दिए हैं? (फ्लिपकार्ट)
  • केपीआईटी स्पार्कल 2020 में प्रथम पुरस्कार इस संस्थान को मिला? (आर्मी इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी, पुणे)
  • हाल ही में किसे बीसीसीआई का चीफ सिलेक्टर के रूप में चुना गया है? (सुनील जोशी)

स्रोत साभार: Dainik Jagran (Rashtriya Sanskaran), Dainik Bhaskar (Rashtriya Sanskaran), Rashtriya Sahara (Rashtriya Sanskaran) Hindustan Dainik (Delhi), Nai Duniya, Hindustan Times, The Hindu, BBC Portal, The Economic Times (Hindi & English), PTI, PIB

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