(दैनिक समसामयिकी और प्रिलिम्स बूस्टर) यूपीएससी और सभी राज्य लोक सेवा आयोग परीक्षाओं के लिए हिंदी में समाचार पत्रों का संकलन (05 अप्रैल 2020)

दैनिक समसामयिकी और प्रिलिम्स बूस्टर


(दैनिक समसामयिकी और प्रिलिम्स बूस्टर) यूपीएससी और सभी राज्य लोक सेवा आयोग परीक्षाओं के लिए हिंदी में समाचार पत्रों का संकलन (05 अप्रैल 2020)


:: राष्ट्रीय समाचार ::

आयुष्मान भारत योजना के तहत होगा प्राइवेट हॉस्पिटल में कोरोना टेस्ट और इलाज

  • केंद्र सरकार ने बताया कि अब प्राइवेट लैब्स और हॉस्पिटल में होने वाला कोरोना टेस्ट, आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना के तहत किया जाएगा। यानी इस योजना के लाभार्थियों का इलाज और टेस्ट फ्री हो जाएगा। सरकारी अस्पतालों में इसकी टेस्टिंग और इलाज पहले से ही फ्री है। करीब 50 करोड़ लोगों को फायदा मिलेगा। यह भारत सरकार की ओर से वंचित तबके के लिए शुरू की गई स्वास्थ्य बीमा योजना है। यह दुनिया की सबसे बड़ी सरकारी स्वास्थ्य बीमा योजना है। इसके तहत प्रत्येक परिवार को सालाना 5 लाख का बीमा कवर मिलता है।
  • इस योजना के लाभार्थी में संक्रमण की आशंका जताई जाती है और उसे किसी प्राइवेट हॉस्पिटल में आइसोलेशन में रहना पड़ता है, तो इसका खर्च भी आयुष्मान भारत योजना में शामिल होगा। प्राइवेट लैब्स में यह टेस्ट इंडियन काउंसिल फॉर मेडिकल रिसर्च (आईसीएमआर) के दिशा-निर्देशों के अनुसार किए जाएंगे।

तेलंगाना, ओडिशा और प. बंगाल सरकार ने नहीं लागू की है आयुष्मान योजना

  • तेलंगाना, ओडिशा और प.बंगाल की सरकार ने अपने राज्य में आयुष्मान भारत योजना को नहीं लागू किया है। दिल्ली ने वित्त वर्ष 2020-21 से इस योजना को लागू किया है। इससे पहले दिल्ली सरकार यह कहकर इस योजना का विरोध करती रही थी कि उसके पास पहले ही आयुष्मान योजना से बेहतर योजनाएं हैं।

प्रधानमंत्री जन आरोग्‍य योजना –आयुष्‍मान भारत

  • नरेन्‍द्र मोदी ने 23 दिसंबर, 2018 को रांची से प्रधानमंत्री जन आरोग्‍य योजना –आयुष्‍मान भारत की शुरूआत की थी। प्रधानमंत्री जन आरोग्‍य योजना का लक्ष्‍य गरीब और कमजोर लोगों को संकटपूर्ण महंगे अस्‍पतालों की परेशानियों से मुक्‍त करना और अच्‍छी स्‍वास्‍थ्‍य  सेवाओं तक उनकी पहुंच सुनिश्चित करना है। इस योजना में 50 करोड़ से अधिक लोगों के लाभ के लिए 5 लाख रूपये प्रति परिवार प्रतिवर्ष के स्‍वास्‍थ्‍य  बीमा का प्रावधान है और यह विश्‍व की सबसे बड़ी स्‍वास्‍थ्‍य बीमा योजना है। मोटे तौर पर इस योजना के लाभार्थियों की संख्‍या यूरोपीय संघ की जनसंख्‍या   अथवा कुल मिलाकर अमरीका, कनाडा तथा मेक्सिको की जनसंख्‍या के बराबर है।

पीएम की अपील पर आज ‘ब्लैकआउट’ पर ग्रिड की पूरी तैयारी

  • पीएम नरेंद्र मोदी के रविवार रात 9 बजे 9 मिनट के लिए बत्तियां बंद करने की अपील के बाद पावर ग्रिड को खतरे की आशंका के बीच ऊर्जा मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि इसका कोई असर नहीं होगा। सरकार ने इससे निपटने की पूरी तैयारी कर ली है। दरअसल, कई राज्यों ने पत्र लिखकर अपने-अपने यहां पावर ग्रिडों को इस स्थिति से निपटने की तैयारी करने को कहा है।
  • ऊर्जा मंत्रालय के अधिकारी ने बताया, यह पहली बार नहीं है जब बिजली मांग इतने बड़े पैमाने पर गिरेगी। इससे पहले ‘अर्थ ऑवर’ के दौरान भी मांग में गिरावट हुई है। एक अधिकारी के मुताबिक 9 मिनट के ब्लैकआउट के दौरान बिजली की मांग 10 से 12 गीगावॉट तक गिर सकती है। हालांकि उन्होंने कहा कि इसका राष्ट्रीय बिजली ग्रिड की स्थिरता पर कोई असर नहीं होगा।
  • देश में जारी 21 दिन के लॉकडाउन के चलते उद्योगों में काम काज बंद होने के कारण पिछले साल की तुलना में इस दौरान बिजली की मांग पहले ही 25 फीसदी कम है। पांच अप्रैल को इसमें 12 फीसदी की गिरावट और हो सकती है।

क्या है पॉवर ग्रिड?

  • विद्युत मंत्रालय के अधीन पावरग्रिड कॉरपोरेशन आफ इंडिया लिमिटेड (पावरग्रिड) देश की केंद्रीय पारेषण यूटिलिटी (सीटीयू) एवं एक नवरत्न कंपनी है। यह अंतर-राज्यीय पारेषण प्रणाली (आईएसटीएस) की आयोजना, कार्यान्वयन, प्रचालन एवं अनुरक्षण के उत्तरदायित्व सहित विद्युत पारेषण व्यापार का कार्य करती है और राष्ट्रीय एवं क्षेत्रीय पावर ग्रिडों का प्रचालन करती है। पावरग्रिड भारत सरकार के 57.90% के स्वामित्व एवं शेष स्वामित्व संस्थागत निवशकों एवं आम लोगों वाली एक सूचीबद्ध कंपनी है।

क्या करता है पावर ग्रिड?

•    बिजली उत्पादन और बिजली आपूर्ति के तंत्र को पावर ग्रिड कहा जाता है. इससे बिजली उत्पादन संयंत्र, इंडस्ट्री और घरों में बिजली आपूर्ति का प्रबंधन जुड़ा होता है.

कोरोना वायरस को रोकने के लिए कंटेनमेंट प्लान तैयार

  • देश में कोरोना वायरस के बढ़ते मरीजों की संख्या और उनके हॉटस्पॉट की पहचान के बाद सरकार ने वायरस को उसी इलाके तक सीमित रखने के लिए कंटेनमेंट प्लान तैयार कर लिया है। हॉटस्पॉट वाले इलाके में कोरोना वायरस के और फैलने की स्थिति में कंटेनमेंट प्लान को लागू किया जाएगा। प्लान में विस्तार से बताया गया है कि वायरस को फैलने के लिए किन-किन उपायों की जरूरत होगी और किस-किसकी क्या भूमिका होगी।
  • वायरस को सीमित रखने का काम युद्ध स्तर पर होगा
  • कंटेनमेंट प्लान के अनुसार कोरोना वायरस के स्वाइन फ्लू के एच1एन1 वायरस की तरह कुछ इलाकों में आउटब्रेक होने की आशंका है। वहीं देश के अधिकांश हिस्से इससे बचे रहेंगे। ऐसे में इस वायरस को उसी इलाके तक सीमित रखने का काम युद्ध स्तर पर करना होगा। इसमें जरा भी चूक से वायरस दूसरे इलाके में तबाही मचा सकता है। सरकार को आशंका है कि कोरोना वायरस के आउटब्रेक की आशंका शहरों के घनी आबादी वाले इलाकों में ज्यादा और खुले ग्रामीण इलाके में कम है।

कंटेनमेंट प्लान के मुख्य तथ्य

  • कंटेनमेंट प्लान में कहा गया है कि इससे पीड़ित 81 फीसदी मरीजों में सामान्य रूप से बीमारी के लक्षण होते हैं। केवल 14 फीसदी मरीजों को अस्पताल में रखने की जरूरत होगी और केवल पांच फीसदी ऐसे मरीज होते हैं जिन्हें वेंटिलेटर जैसे लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर ऱखना होगा।
  • कोरोना के लिए बने विशेष अस्पताल में केवल उन्हीं मरीजों को रखा जाएगा, जिनकी स्थिति गंभीर हो। स्वास्थ्य सेवाओं के बेहतर इस्तेमाल के लिए यह जरूरी है।
  • कंटेनमेंट प्लान का सबसे अहम हिस्सा ऐसे इलाके को पूरी तरह अलग-थलग रखने का है। इसके अनुसार ऐसे इलाके से किसी भी व्यक्ति को बाहर निकलने की इजाजत नहीं होगी। सारे रास्तों को बंद कर दिया जाएगा। जरूरी सेवाओं के लिए हर आने-जाने वाले की विस्तृत जानकारी रखी जाएगी और उसके बारे में लगातार अधिकारियों को अपडेट किया जाएगा।
  • जिला मजिस्ट्रेट की निगरानी में चलने वाले कंटेनमेंट प्लान में लोगों में बड़े पैमाने पर टेस्टिंग का अभियान चलाया जाएगा और कोरोना के हर पोजेटिव को तत्काल अलग-थलग किया जाएगा।
  • आउटब्रेक वाले इलाके में सांस और जुकाम से ग्रसित हर व्यक्ति की कोरोना जांच कराकर इसके वायरस की उपस्थिति सुनिश्चत की जाएगी।
  • कंटेनमेंट प्लान में चिह्नित किये गए इलाके के चारों ओर एक बफर जोन की पहचान किये जाने का भी प्रावधान है। इस बफर जोन में कोरोना के वायरस के लक्षण वाले मरीजों पर खास ध्यान रखा जाएगा। ताकि किसी तरह यदि कंटेनमेंट वाले इलाके से वायरस बाहर निकलने में सफल भी हो जाए, तो इसे बफर जोन में ही रोका जा सके।

कोविड-19 महामारी को देखते हुए एनआरएलएम के अंतर्गत मास्‍क बनाने की शुरूआत

  • ग्रामीण विकास मंत्रालय के राष्‍ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (एनआरएलएम) के अंतर्गत देश के 24 राज्‍यों के 399 जिलों में स्‍व-सहायता समूहों (एसएचजी) ने फेस मास्‍क बनाना शुरू किया है।

राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (एनआरएलएम) क्या है?

राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन - ग्रामीण विकास मंत्रालय का उददेश्य ग्रामीण गरीब परिवारों को देश की मुख्यधारा से जोड़ना और विभिन्न कार्यक्रमों के जरिये उनकी गरीबी दूर करना है। इसी बात को ध्यान में रखते हुए मंत्रालय ने जून, 2011 में आजीविका-राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (एनआरएलएम) की शुरूआत की थी। आजीविका-एनआरएलएम का मुख्य उददेश्य गरीब ग्रामीणों को सक्षम और प्रभावशाली संस्थागत मंच प्रदान कर उनकी आजीविका में निरंतर वद्धि करना, वित्तीय सेवाओं तक उनकी बेहतर और सरल तरीके से पहुंच बनाना और उनकी पारिवारिक आय को बढ़ाना है। इसके लिए मंत्रालय को विश्व बैंक से आर्थिक सहायता मिलती है।

‘संकट को हैक करो’-हैकाथॉन

  • संकट को हैक करो-भारत, कोविड-19 महामारी पर विजय पाने का समाधान निकालने के लिए एक ऑनलाइन हैकाथॉन की शुरुआत की है।

टिकटॉक, फेसबुक पर भड़काऊ वीडियो: वॉयेजर इंफोसेक की रिपोर्ट

  • भारत में कोरोना वायरस के संक्रमण की रोकथाम के प्रयासों के खिलाफ मुस्लिमों को उकसाने के लिये टिकटॉक, यूट्यूब और ट्विटर जैसे सोशल मीडिया मंचों पर बड़े स्तर पर भड़काऊ वीडियो डाले जा रहे हैं। तथ्यों की जांच करने वाली सूचना प्रौद्योगिकी कंपनी वॉयेजर इंफोसेक की एक रिपोर्ट में इसका खुलासा किया गया है।
  • रिपोर्ट के अनुसार, ये वीडियो भारत के साथ ही अन्य देशों में भी शूट किये जा रहे हैं तथा इन्हें मुख्यत: टिकटॉक पर डाला जा रहा है। कंपनी ने यह रिपोर्ट भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र को सौंप दी है। उल्लेखनीय है कि टिकटॉक चीन की कंपनी द्वारा तैयार ऐप है। यह वीडियो आधारित सोशल मीडिया है।

रिपोर्ट के मुख्य बिंदु

  • रिपोर्ट के अनुसार, कोरोना वायरस को लेकर गलत जानकारियों तथा स्वास्थ्य एवं चिकित्सा संबंधी परामर्शों के खिलाफ धर्म की आड़ में भड़काऊ सामग्रियों को परोसने में टिकटॉक को मुख्य माध्यम के तौर पर इस्तेमाल किया जा रहा है। ये वीडियो टिकटॉक पर तैयार किये जा रहे हैं और लोगों के बीच फैलाये जा रहे हैं। वहां से इन्हें व्हाट्सऐप, ट्विटर और फेसबुक जैसे अन्य सोशल मीडिया पर भी शेयर किया जा रहा है।
  • रिपोर्ट में कहा गया है कि पिछले पांच दिन में 30 हजार से अधिक वीडियो का विश्लेषण किया गया है। इसके बाद पाया गया कि इनमें से अधिकांश वीडियो पेशेवर सॉफ्टवेयर की मदद से तैयार किये जा रहे हैं। जिन खातों से इन्हें सबसे पहले शेयर किया जा रहा है, उन्हें वीडियो के वायरल होते ही डिलीट कर दिया जा रहा है।
  • रिपोर्ट के अनुसार, ‘‘मुस्लिमों के बीच इस तरह के वीडियो साझा करने वाले कुछ खाते पाकिस्तान के ऐसे मुस्लिम धर्मगुरुओं का प्रचार करते भी पाये गये हैं, जिनके आतंकवादियों के साथ संबंध हैं। इन मामलों में विदेशी ताकतों के हाथ होने को लेकर आगे अलग से जांच की जरूरत है।’’
  • रिपोर्ट तैयार करने वाले शोधकर्ताओं का कहना है कि इस तरह के वीडियो तैयार करने में हिंदी और बोलचाल की उर्दू का इस्तेमाल किया जा रहा है। इससे पता चलता है कि इनका निशाना भारत के लोग हैं। इनमें से कुछ वीडियो पाकिस्तान और पश्चिम एशिया में बनाये गये हैं तथा बाद में इनमें एडिट करके हिंदी के संवाद डाले गये हैं।
  • इस बारे में पूछे जाने पर टिकटॉक के एक प्रवक्ता ने भ्रामक सूचनाएं साझा करने के प्रयासों की निंदा की। उसने कहा, ‘‘हम लगातार निगरानी कर रहे हैं तथा अने मंच से वीडियो, ऑडियो व तस्वीरों समेत उन सभी सामग्रियों को हटा रहे हैं जो हमारे दिशानिर्देशों और सरकार के परामर्शों के खिलाफ हैं।’’
  • ट्विटर के प्रवक्ता ने इस बारे में कहा कि कंपनी लोगों को बरगलाने वाली तथा नफरत फैलाने वाली सामग्रियों को हटाने के लिये मशीन लर्निंग का इस्तेमाल कर रही है।
  • सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय इंटरनेट पर फर्जी खबरों का संज्ञान लेते हुए पहले ही सभी सोशल मीडिया कंपनियों को भ्रामक सूचनाएं फैलाने वाली सामग्रियां हटाने के लिये कह चुका है।

कोविड-19 कॉम्‍पीटिशन (सी3)

  • ऐसे समय में जब देश कोरोना महामारी के कारण बहुत बड़े संकट का सामना कर रहा है, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय, भारत सरकार के अंतर्गत एक स्‍वायत्‍त संस्‍थान राष्‍ट्रीय नवप्रवर्तन प्रतिष्‍ठान–भारत (एनआईएफ) ने नवाचारी नागरिकों को अपने चैलेंज कोविड-19 कॉम्‍पीटिशन (सी3)में भाग लेने के लिए आमंत्रित किया है।
  • सभी इच्‍छुक नवाचारियों का कोरोना को फैलने से रोकने जैसीसमस्‍याओं अथवा मसलों के समाधान के लिए अपने मौलिक रचनात्‍मक विचारों और नवाचारों के साथ इस प्रतिस्‍पर्धा में भाग लेने के लिए स्‍वागत है। ऐसे नवाचारों में इस बीमारी के फैलने की रफ्तार को धीमा करने या और फैलने से रोकने संबंधी सरकार के प्रयासों को पूर्णता प्रदान करने वाले विचार, हाथों, शरीर, घरेलू वस्‍तुओं और घरों, सार्वजनिक स्‍थानों को स्‍वच्‍छ बनाने जैसी गतिविधियों को ज्‍यादा रोचक और प्रभावी बना सकने वाले विचार,लोगों विशेषकर अकेले रहने वाले बुजुर्गों तकआवश्‍यक वस्‍तुओं की आपूर्ति एवं वितरण करने के लिए विचार, आवश्‍यक वस्‍तुओं और घर से बाहर जाने की जरूरत कम करने वाली सेवाओं की घर-घर आपूर्ति  के लिए विचार शामिल हैं।

:: अंतर्राष्ट्रीय समाचार ::

आईसीजे ने यूएनएचआरसी से चीन पर जुर्माना लगाने की मांग

  • लंदन की इंटरनेशनल काउंसिल ऑफ ज्यूरिस्ट ने संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद से अपील की है कि चीन पर 'मानवता के खिलाफ गंभीर अपराध करने के लिए कड़ा जुर्माना' लगाया जाए। संगठन ने आरोप लगाया है कि कोरोना वायरस महामारी प्राथमिक रूप से बीजिंग का षड्यंत्र है ताकि वह खुद को महाशक्ति बना सके।
  • आईसीजे के अध्यक्ष आदिश सी. अग्रवाल ने कहा, 'वायरस को फैलने से रोकने के लिए चीन द्वारा कार्रवाई नहीं करने से पूरी दुनिया में मंदी आ गई और खरबों डॉलर का नुकसान हुआ है तथा भारत एवं दुनिया के अन्य हिस्सों में लाखों लोग बेरोजगार हो गए।'
  • वायरस चीन के सभी प्रांतों में कैसे नहीं फैला जबकि दुनिया के सभी देशों में यह फैल गया है। उन्होंने जिनेवा स्थित मानवाधिकार संगठन से अपील की कि वायरस फैलाने के लिए वह चीन, उसकी सेना और वुहान को जिम्मेदार ठहराए, जिसके कारण पूरी दुनिया में 50 हजार से अधिक लोगों की मौत हो गई और दुनिया ठप हो गई।
  • अग्रवाल ने यूएनएचआरसी से मांग की वह चीन को निर्देश दे कि बीमारी फैलाने के लिए वह 'पूरी दुनिया और खासकर भारत को क्षतिपूर्ति' करे।

क्या है संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद?

2006 में संयुक्त राष्ट्र ने मानवाधिकार परिषद की स्थापना की थी. बनाने का मकसद था दुनिया भर में मानवाधिकारों के रक्षा करना. लेकिन पिछले कुछ समय से परिषद विवादों में बना रहा है. संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद को संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार आयोग की जगह बनाया गया था. परिषद का मकसद था दुनिया में मानवाधिकारों को प्रोत्साहित करना और इस दिशा में काम करना. इसका मुख्यालय स्विट्जरलैंड के जेनेवा शहर में है. इसके सदस्य हर साल तीन बार, मार्च, जून और सितंबर में मिलते हैं.

फॉकलैंड द्वीप पर कोरोना वायरस संक्रमण का पहला मामला

  • फॉकलैंड द्वीप समूह सरकार ने अपने क्षेत्र में कोरोना वायरस संक्रमण के पहले मामले की पुष्टि की है। लक्षणों के बाद 31 मार्च को भर्ती कराए गए एक मरीज में कोरोना वायरस संक्रमण की पुष्टि हुई। कहा गया कि उसे पृथक वार्ड में रखा गया है और हालत स्थिर है।
  • दक्षिण अटलांटिक महासागर में स्थित फॉकलैंड द्वीप समूह ब्रिटेन का स्वायत्त प्रवासी क्षेत्र है और वैश्विक महामारी के दौरान कुछ ऐसे सुदूर क्षेत्रों में शामिल है, जहां अभी तक कोरोना वायरस संक्रमण के मामले सामने नहीं आए हैं। बयान के मुताबिक, 3400 की जनसंख्या वाले इस द्वीप समूह के स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि जांच के लिए नमूनों को ब्रिटेन भेजा जा रहा है।

ओपेक व अन्य तेल उत्पादक देशों की स्पेशल वर्चुअल बैठक

  • तेल निर्यातक देशों के संगठन (ओपेक) और अन्य तेल उत्पादक देशों के बीच सोमवार को आयोजित विशेष बैठक कुछ दिनों के बाद हो सकती है। संभावना है कि यह बैठक 8 व 9 अप्रैल को हो, ताकि तेल उत्पादक देशों को आपूर्ति घटाने की योजना पर विचार करने के लिए कुछ वक्त और मिल जाए। इस बीच एक अन्य रिपोर्ट में कहा गया कि यदि सोमवार की बैठक असफल रही, तो 10 डॉलर प्रति बैरल तक गिर सकता है क्रूड का भाव।
  • कोरोनावायरस के कारण कच्चे तेल का भाव में हाल में काफी गिरावट देखी गई है। ओपेक और रूस के बीच उत्पादन कटौती का समझौता नहीं हो पाने और उल्टे प्राइस वार शुरू हो जाने के कारण क्रूड में और गिरावट आई और इसने करीब 18 साल का निचला स्तर (करीब 22 डॉलर प्रति बैरल) को छू लिया। हालांकि ओपेक व अन्य क्रूड उत्पादक देशों की सोमवार को आयोजित विशेष बैठक में कोई समझौता हो जोन की उम्मीद से पिछले कुछ दिनों में क्रूड का भाव चढ़ा है।

ओपेक क्या है?

  • ओपेक, पेट्रोलियम निर्यात करने वाले देशों का एक स्थायी अंतर सरकारी संगठन है. इसकी स्थापना । सितम्बर, 1960 को ईरान, इराक, कुवैत, सऊदी अरब और वेनेज़ुएला द्वारा बगदाद सम्मेलन में की गयी थी. ओपेक का मुख्यलय का मुख्यालय ऑस्ट्रिया के वियना में स्थित है

अमेरिका ने हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन दवा भेजने का किया अनुरोध

  • अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने कहा कि उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से अमेरिका में बढ़ रहे कोरोना वायरस के मरीजों के इलाज के लिए हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन दवा भेजने का अनुरोध किया है।
  • भारत ने हाल ही में इस दवा के निर्यात पर प्रतिबंध लगा दिया था। इसके बाद अमेरिका ने इस दवा का ऑर्डर दिया। ट्रम्प ने कहा कि उन्होंने शनिवार सुबह प्रधानमंत्री मोदी से बात की और उनसे मलेरिया के इलाज में दशकों से इस्तेमाल की जा रही और किफायती दवा हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन जारी करने का अनुरोध किया। भारत के विदेश व्यापार महानिदेशालय ने 25 मार्च को हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन के निर्यात पर रोक लगा दी थी लेकिन कहा था कि कुछ भंडार को मानवीय आधार पर भेजने की अनुमति दी जा सकती है।
  • मलेरिया की इस दवा का इस्तेमाल अब कई जगह कोरोना वायरस के मरीजों के इलाज में किया जा रहा है। कोरोना वायरस के तीन लाख मामलों की पुष्टि होने और 8,000 से अधिक लोगों की मौत होने के साथ अब अमेरिका इस संक्रामक रोग का वैश्विक केंद्र बनकर सामने आया है।दुनियाभर में वैज्ञानिक इस बीमारी का टीका या इलाज खोजने में जुटे हैं। इससे जानलेवा रोग से 150 से अधिक देशों में 64,000 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है और 12 लाख लोग संक्रमित हो चुके हैं।

:: भारतीय अर्थव्यवस्था ::

वैश्विक मंदी की शुरुआत : IMF

  • अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) प्रमुख क्रिस्टालिना जॉर्जीवा ने कहा कि कोरोना के कारण वैश्विक मंदी की शुरुआत हो चुकी है। उन्होंने यह भी कहा कि 2020 की मंदी 2008 में आए वित्तीय संकट से ज्यादा गंभीर है। उन्होंने कहा कि यह दोहरा संकट है। यहां आर्थिक और स्वास्थ्य दोनों समस्याएं गंभीर हैं।
  • जॉर्जीवा ने कहा कि दुनियाभर में कोविड-19 से लड़ाई के बीच जीवन बचाने और आजीविका की रक्षा पर साथ में काम किए जाने की आवश्यकता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के आंकड़ों के अनुसार, वर्तमान में 10 लाख से अधिक लोग दुनियाभर में कोविड-19 संक्रमण से संक्रमित हुए हैं, जिनमें से 50 हजार से अधिक व्यक्तियों ने अपनी जान गंवाई है।

अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष क्या है?

  • इस कोष की स्थापना जुलाई 1944 में सम्पन्न हुए संयुक्त राष्ट्र मौद्रिक एवं वित्तीय सम्मेलन (ब्रेटन वुड्स, संयुक्त राज्य अमेरिका) में हस्ताक्षरित समझौते के अंतर्गत की गयी, जो 27 दिसंबर, 1948 से प्रभावी हुआ। इसका मुख्यालय वाशिंगटन डीसी में स्थित है। अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष द्वारा वैश्विक वित्तीय स्थिरता रिपोर्ट (Global Financial Stability Report), वित्तीय निगरानी (Fiscal Monitor), क्षेत्रीय आर्थिक रिपोर्ट (Regional Economic Reports) प्रकाशित किये जाते है।

:: विज्ञान और प्रौद्योगिकी ::

स्टारशिप के प्रोटोटाइप का तीसरा परीक्षण भी असफल

  • स्पेस-एक्स कंपनी के मालिक एलन मस्क के अगली पीढ़ी के अंतरिक्ष यान 'स्टारशिप' (एसएन3) के प्रोटोटाइप का तीसरा परीक्षण भी असफल रहा है। टेक्सास के बोका चीका स्थित कंपनी के परीक्षण स्थल पर प्रेशर टेस्ट के दौरान यह फट गया। परीक्षण असफल होने के थोड़ी देर बाद मस्क ने ट्वीट करके कहा कि इस संबंध में उपलब्ध आंकड़ों का विश्लेषण किया जाएगा, लेकिन प्रथमदृष्टया ऐसा लगता है कि कांफिगरेशन की गलती के चलते ऐसा हुआ है।
  • घटना से जुड़े एक वीडियो में प्रोटोटाइप का ऊपरी हिस्सा फटता हुआ दिखाई दे रहा है। वहीं टेक्नोलॉजी और साइंस से जुड़ी एक वेबसाइट के मुताबिक, विस्फोट इसलिए हुआ, क्योंकि लिक्विड नाइट्रोजन को रॉकेट के प्रणोदक टैंक में डाला गया था।
  • यह स्टारशिप प्रोटोटाइप का तीसरा असफल परीक्षण है। पिछले साल 20 नवंबर को क्रायोजेनिक प्रेशर टेस्ट के दौरान एम1 प्रोटोटाइप का ऊपरी हिस्सा फट गया था। वहीं इसी साल 28 फरवरी को क्रायोजेनिक प्रेशर टेस्ट के दौरान एन2 प्रोटोटाइप की सतह में विस्फोट हो गया था। मस्क ने संकेत दिया है कि स्टारशिप सही तरीके से काम करे, इसके लिए इसके प्रोटोटाइप में सुधार का काम जारी रहेगा।

स्टारशिप परियोजना

  • बता दें कि स्पेस-एक्स कंपनी के मालिक एलन मस्क का दावा है कि इस अंतरिक्षयान से चांद, मंगल या अपने सौर मंडल के किसी भी ग्रह पर आप अंतरिक्षयात्री और कार्गो (सामान) को एक साथ भेज सकते हैं। यह यान वापस भी लौट आएगा, लेकिन इसकी लैंडिंग सीधी होगी।

परजीवी रोधी दवाई प्रयोगशाला में विकसित कोशिकाओं में कोरोना वायरस को मारने में सक्षम : अध्ययन

  • शोधकर्ताओं ने पता लगाया है कि दुनिया भर में पहले से उपलब्ध परजीवी रोधी दवाई 48 घंटे के भीतर कोशिकाओं में पैदा किए गए कोरोना वायरस को मार सकती है। इस प्रगति से कोरोना वायरस के लिए नयी नैदानिक चिकित्सा का रास्ता साफ हो सकता है। यह अध्ययन ‘‘एंटीवायरल रिसर्च’’ नामक पत्रिका में प्रकाशित हुआ है।
  • अध्ययन के अनुसार दवा ‘इवरमेक्टिन’ ने वायरस सार्स-सीओवी -2 को 48 घंटे के भीतर कोशिकाओं में बढ़ने से रोक दिया। ऑस्ट्रेलिया के मोनाश विश्वविद्यालय से जुड़े काइली वागस्टाफ ने कहा, "हमने पाया कि एक खुराक भी 48 घंटों तक सभी वायरल आरएनए को हटा सकती है और 24 घंटे में भी इसमें काफी कमी आती है।" वह अध्ययन के सह-लेखक भी हैं।
  • वैज्ञानिकों ने कहा कि ‘इवरमेक्टिन’ एक मान्यताप्राप्त दवा है जिसे एचआईवी, डेंगू, इन्फ्लुएंजा और जीका वायरस सहित विभिन्न वायरसों के खिलाफ प्रभावी माना गया है। वागस्टाफ ने हालांकि आगाह किया कि अध्ययन में किए गए परीक्षण प्रयोगशाला के हैं और ये परीक्षण लोगों में किए जाने की आवश्यकता है।
  • वागस्टाफ ने कहा, "आइवरमेक्टिन व्यापक रूप से इस्तेमाल की जाती है और इसे एक सुरक्षित दवा माना जाता है। हमें अब यह पता लगाने की जरूरत है कि मनुष्यों में इस्तेमाल की जाने वाली इसकी मात्रा प्रभावी होगी या नहीं, यह अगला कदम होगा।’’ उन्होंने कहा कि ऐसे समय, जब हम वैश्विक महामारी का सामना कर रहे हैं और इसका कोई मान्यताप्राप्त उपचार नहीं है, ऐसे में हमारे पास पहले से मौजूद यौगिक जल्द ही लोगों की मदद कर सकता है वैज्ञानिकों ने हालांकि कहा कि इस रोग का मुकाबला करने के लिए ‘इवरमेक्टिन’ का उपयोग भविष्य के नैदानिक परीक्षणों के परिणामों पर निर्भर करेगा।

कोविड-19 से बचाने के लिए सैनिटेशन इंक्लोजर्स और फेस शील्ड्स का निर्माण

  • कोविड 19 महामारी के खिलाफ जारी प्रयासों में, रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (डीआरडीओ) त्वरित तरीके से उत्पादों का विकास करने के लिए वैज्ञानिक प्र्रयत्नों का उपयोग करता रहा है। डीआरडीओ प्रयोगशालाएं अधिक मात्रा में उत्पादन के लिए उद्योग के साझीदारों के साथ कार्य कर रही हैं।

पर्सनल सैनिटाइजेशन इंक्लोजर्स

  • डीआरडीओ की एक अहमदनगर स्थित एक प्रयोगशाला प्रयोगशाला वाहन अनुसंधान विकास प्रतिष्ठान (वीआरडीई) ने पीएसई नामक एक फुल बाडी डिस्इंफेक्शन चैंबर की डिजाइन तैयार की है। इस वाक थ्रू इंक्लोजर की डिजाइन एक समय पर एक व्यक्ति के लिए पर्सनल डिकान्टामिनेशन के लिए तैयार की गई है। यह सैनिटाइजर एवं सोप डिस्पेंसर से सुसज्जित एक पोर्टेबल सिस्टम है। डिकान्टामिनेशन एंट्री के समय एक फुट पैडल का उपयोग करने के जरिये शुरु होता है। चैंबर में प्रविष्ट होने के बाद, विद्युत तरीके से प्रचालित पंप डिस्इंफेक्शन के लिए हाइपो सोडियम क्लोराइड का एक डिस्इंफेक्टैंट मिस्ट तैयार करता हे। इस मिस्ट स्प्रे को 25 संकेंड के एक परिचालन के लिए अशांकित किया जाता है और यह परिचालन की पूर्णता का संकेत देते हुए स्वचालित रूप से बंद हो जाता है। प्रक्रिया के अनुसार, चैंबर के भीतर रहने के दौरान डिस्इंफेक्शन से गुजर रहे कार्मिक को अपनी आंखें बंद रखने की आवश्यकता होगी।
  • इस प्रणाली में कुल 700 लीटर क्षमता के साथ रूफ माउंटेड और बाटम टैंकों की आवश्यकता होती है। लगभग 650 कार्मिक डिस्इंफेक्शन के लिए चैंबर से गुजर सकते हैं जबतक कि रिफिल की आवश्यकता न पड़े।
  • इस प्रणाली में निगरानी के प्रयोजन के लिए साइड वॅल्स पर सी-थ्रू ग्लास पैनल होते हैं और ये रात के समय के आपरेशनों के दौरान प्रदीपन के लिए रोशनी से सुसज्जित होते हैं। समग्र आपरेशन की निगरानी के लिए एक पृथक आपरेटर केबिन उपलब्ध कराया जाता है।
  • इस प्रणाली को चार दिनों की समयावधि के भीतर मेसर्स डी एच लिमिटेड, गाजियाबाद की सहायता से विनिर्मित किया गया है। इस प्रणाली का उपयोग अस्पतालों, मालों, कार्यालय भवनों एवं महत्वपूर्ण प्रतिष्ठानों के प्रवेश एवं निकास पर कंट्रोल्ड इंग्रेस एवं एग्रेस के क्षेत्रों में कार्मिक के डिस्इंफेक्शन के लिए किया जा सकता है।

फुल फेस मास्क

  • रिसर्च सेंटर इमारात (आरसीआई), हैदराबाद एवं टर्मिनल बैलिस्टिक्स रिसर्च लैबोरेटरी (टीबीआरएल), चंडीगढ़ ने कोविड-19 के संपर्क में आने वाले स्वास्थ्य पेशेवरों के लिए फेस प्रोटेक्शन मास्क का विकास किया है। इसका हल्का वजन इसे लंबी अवधि के लिए आरामदायक वियर के रूप में सुविधाजनक बनाता है। इसकी डिजाइन चेहरे की सुरक्षा के लिए सामान्य रूप से उपलब्ध ए4 साइज ओवर-हेड प्रोजेक्शन (ओएचपी) फिल्म का उपयोग करता है।
  • होल्डिंग फ्रेम का विनिर्माण फ्यूज्ड डिपोजिशन मोडेलिंग (3डी प्रिंटिंग) के उपयोग के द्वारा किया जाता है। फ्रेम की 3डी प्रिंटिंग के लिए पोलीलैक्टिक एसिड फिलामेंट का उपयोग किया जाता है। इस थर्मोप्लास्टिक को धान्य मांड या गन्ने जैसे नवीकरणीय संसाधनों से प्राप्त किया जाता है तथा यह बायोडिग्रेडेबल होता है। इस फेस मास्क का बड़ी मात्रा में उत्पादन के लिए इंजेक्शन मोल्डिंग तकनीक का उपयोग कर बड़े पैमाने पर निर्माण किया जाएगा।
  • टीबीआरएल में रोजाना एक हजार फेस शील्डों का निर्माण किया जा रहा है और इन्हें पोस्टग्रैजुएट इंस्टीच्यूट आफ मेडिकल एजुकेशन एंड रिसर्च (पीजीआईएमईआर) को उपलब्ध कराया जा रहा है। इसी प्रकार, आरसीआई में 100 का निर्माण किया जा रहा है और इन्हें कर्मचारी राज्य बीमा निगम (ईएसआईसी), हैदराबाद को सुपुर्द कर दिया गया है। सफल यूजर ट्रायल के आधार पर पीजीआईएमईआर एवं ईएसआईसी अस्पतालों से 10000 शील्डों की मांग प्राप्त हुई है।

जलीय-आधारित कोलाइडल चांदी सोल्‍यूशन

  • विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग (डीएसटी) और जैव प्रौद्योगिकी विभाग (डीबीटी) द्वारा संयुक्त रूप से समर्थित पुणे के एक स्टार्टअप वेइनोवेट बायोसोल्यूशंस ने अल्कोहल के बिना जलीय-आधारित कोलाइडल चांदी सोल्‍यूशन तैयार किया है जिसे हाथों और पर्यावरणीय सतहों को कीटाणुरहित करने के लिए नैनोएगसाइड टेक्‍नोलॉजी से बनाया गया है।

क्या है विशेषता?

  • यह तरल गैर-ज्वलनशील और खतरनाक रसायनों से मुक्त है और महामारी के ट्रांसमिशन की प्रमुख विधि–सम्‍पर्क से होने वाले संक्रमण को फैलने से रोकने के लिए एक प्रभावी सैनिटाइजर हो सकता है, जिससे स्वास्थ्य पेशेवरों और अन्य संक्रमित लोगों की रक्षा हो सकती है।
  • वाइनोवेट बायोसोल्यूशंस का कोलाइडल सिल्वर सॉल्यूशन, जो वायरल नेगेटिव-स्ट्रैंड आरएनए और वायरल बडिंग के संश्लेषण को रोकने के लिए सिल्वर नैनोपार्टिकल्स की क्षमता पर आधारित है, खतरनाक रसायनों से मुक्त है और इसमें अल्कोहल-आधारित कीटाणुनाशकों की तुलना में ज्‍वलनशीलता का कोई खतरा नहीं है।
  • इस सॉल्यूशन का प्रयोगशाला परीक्षण हुआ है, और निर्माताओं ने परीक्षण लाइसेंस प्राप्त कर लिया है। छोटे पैमाने पर कोलाइडल सिल्वर को संश्लेषित करने और 5 लीटर तक के स्केल-अप बैच पर प्रारंभिक कार्य दोबारा तैयार करने के लिए किया जा रहा है।
  • "नैनोकण थेरानोस्टिक्‍स (थेरेपी और डॉयग्नोस्टिक्स) से कीटाणुशोधन से लेकर इमेजिंग तक कोविड -19 से संबंधित विभिन्न मुद्दों के प्रभावी समाधान के रूप में तेजी से उभर रहे हैं। नैनोकणों की प्रासंगिकता उनके आकार (100 एनएम से कम) के कारण है, जो कोविड-19 वायरस से तुलनीय है और कार्यशीलता की अधिकता जैसे लक्ष्य बनाना और दवा वितरण आवश्‍यकतानुसार किया जा सकता है।

क्या होंगें इसके लाभ?

  • सिल्वर नैनोकण को एक प्रभावी एंटीवायरल पाया गया है जो एचआईवी, हेपेटाइटिस बी, हरपीज सिम्प्लेक्स वायरस, इन्फ्लूएंजा वायरस जैसे घातक वायरसों के खिलाफ काम करता है। हाल की रिपोर्टों में वायरल नेगेटिव-स्ट्रैंड आरएनए और वायरल बडिंग के संश्लेषण को रोककर कोरोनो वायरस के प्रसार को रोकने में ग्लुटाथियोन कैप्ड-एजी2एस एनसी (सिल्वर नैनोक्लस्टर्स) की भूमिका का सुझाव दिया गया है।
  • नेशनल डिफेंस मेडिकल कॉलेज रिसर्च इंस्टीट्यूट, साइतामा, जापान के शिंगो नाकामुरा जैसे वैज्ञानिकों द्वारा किए गए शोध से पता चलता है कि एजी एनपी-आधारित सामग्री रोगी के संक्रमण को रोकने के अलावा स्वास्थ्य देखभाल कर्मियों (एचसीडब्ल्यू) के संपर्क संक्रमण को रोकने में सक्षम होगी। इस प्रकार कोलाइडल सिल्वर जिस पर वाइनोवेट बायोसोल्यूशन के सैनिटाइज़र की तकनीक आधारित है, वह सतह ग्लाइकोप्रोटीन को अवरुद्ध करके आरएनए प्रतिकृति और संक्रामकता को रोककर कोविड -19 को फैलने से रोक सकता है। कोलाइडल सिल्वर बनाने की प्रक्रिया के लिए एक भारतीय पेटेंट दायर किया गया है, और हैंड सैनिटाइज़र और कीटाणुनाशक बनाने के लिए एक परीक्षण लाइसेंस प्रदान किया गया है

:: विविध ::

फीफा अंडर 17 महिला विश्व कप स्थगित

  • भारत में नवंबर में होने वाला फीफा अंडर 17 महिला विश्व कप कोरोना वायरस महामारी के कारण स्थगित कर दिया गया। यह टूर्नामेंट पांच शहरों कोलकाता, गुवाहाटी, भुवनेश्वर, अहमदाबाद और नवी मुंबई में 2 से 21 नवंबर के बीच होना था। टूर्नामेंट में 16 टीमें भाग लेने वाली थी जिसमें मेजबान होने के नाते भारत को स्वत: प्रवेश मिला था। यह अंडर 17 महिला विश्व कप में भाग लेने का भारत का पहला मौका था। फीफा परिसंघों के कार्यसमूह ने यह फैसला लिया। फीफा परिषद के ब्यूरो ने कोरोना वायरस महामारी के परिणामों से निपटने के लिये इस कार्यसमूह का गठन किया है । कार्यसमूह ने फीफा परिषद से पनामा कोस्टा रिका में 2020 में होने वाला फीफा अंडर 20 विश्व कप भी स्थगित करने का अनुरोध किया।

‘राष्ट्रीय समुद्री दिवस’ (National Maritime Day)

  • प्रत्येक वर्ष 5 अप्रैल को ‘राष्ट्रीय समुद्री दिवस’ (National Maritime Day) मनाया जाता है।
  • प्रत्येक वर्ष इस दिवस को मनाने का उद्देश्य भारत के लोगों को भारतीय जहाजरानी उद्योग की गतिविधियों और देश की अर्थव्यवस्था में इसकी भूमिका से अवगत कराना है।
  • प्रत्येक वर्ष 5 अप्रैल को  ‘राष्ट्रीय समुद्री दिवस’ मनाये जाने का निर्णय इसलिए लिया गया क्योंकि इसी दिन 5 अप्रैल, 1919 को सिंधिया स्टीम नेविगेशन कंपनी लि. (Scindia Steam Navigation Company Ltd.) का पहला स्टीम शिप ‘एसएस लॉयल्टी’ (SS Loyalty) मुंबई से लंदन की पहली समुद्री यात्रा के लिए अंतरराष्ट्रीय जल क्षेत्र में उतारा गया था।

नवीन पटनायक को ‘हीरो टू एनिमल्स अवार्ड’

  • ओड़िशा के मुख्यमंत्री नवीन पटनायक को पशु अधिकार संस्था पेटा इंडिया ने कोरोना वायरस महामारी को लेकर चल रहे लॉकडाउन के दौरान राज्य में सामुदायिक पशुओं को खिलाने के लिए धन आवंटित करने के लिए एक पुरस्कार से सम्मानित किया गया है।उल्लेखनीय है कि राज्य सरकार ने पांच नगर निगमों और सभी 48 नगर पालिकाओं में आवारा पशुओं को
  • खिलाने के लिए 54 लाख रुपये मंजूर किया है। लॉकडाउन के दौरान पशुओं को भोजन मिलने में मुश्किलें हो रही हैं।
  • उनके प्रयासों का सम्मान करते हुए, पीपुल फॉर द एथिकल ट्रीटमेंट ऑफ एनिमल्स (पेटा) इंडिया ने पटनायक के लिए ‘हीरो टू एनिमल्स अवार्ड’ की घोषणा की। पुरस्कार स्वरूप उन्हें एक प्रमाण पत्र और प्रशस्ति पत्र दिया गया।

:: प्रिलिम्स बूस्टर ::

  • कोविड-19 महामारी के नियंत्रण के समाधान हेतु किस ऑनलाइन हैकाथॉन की शुरुआत की गई है? (‘संकट को हैक करो’-हैकाथॉन)

  • हाल ही में किस राज्य के मुख्यमंत्री को पेटा (PETA) के द्वारा ‘हीरो टू एनिमल्स अवार्ड’ प्रदान करने की घोषणा की गई है? (नवीन पटनायक, उड़ीसा)

  • हाल ही में अमेरिका के द्वारा भारत से किस दवा को भेजे जाने की अनुरोध की गई है? (हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन)

  • हाल ही में चर्चा में रहे अंतरिक्ष परियोजना ‘स्टारशिप’ किस स्पेस एजेंसी से संबंधित है? (स्पेस-एक्स,SpaceX)

  • चीन पर जुर्माना लगाने की मांग को लेकर चर्चा में रहे संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद की स्थापना कब हुई थी एवं उसका मुख्यालय कहाँ है? (2006, जेनेवा-स्विट्जरलैंड)

  • 9 बजे 9 मिनट के लिए बत्तियां बंद करने की अपील के बाद चर्चा में रहे पावर ग्रिड क्या है? (बिजली उत्पादन और बिजली आपूर्ति का तंत्र)

  • ‘राष्ट्रीय समुद्री दिवस’ (National Maritime Day) कब मनाया जाता है? (5 अप्रैल)

  • हाल ही में चर्चा में रहे ‘फॉकलैंड द्वीप समूह’ किस महासागर में स्थित है एवं इस पर किस देश का नियंत्रण है? (दक्षिण अटलांटिक महासागर, ब्रिटेन)

  • हाल ही में चर्चा में रहे ओपेक (OPEC) की स्थापना कब हुई थी एवं इसका मुख्यालय कहाँ है? (1960 , वियना-ऑस्ट्रिया)

  • वैश्विक मंदी की घोषणा करने से चर्चा में रहे अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) के द्वारा कौन सी मुख्य रिपोर्ट प्रकाशित की जाती है? (वैश्विक वित्तीय स्थिरता रिपोर्ट-Global Financial Stability Report, वित्तीय निगरानी रिपोर्ट-Fiscal Monitor Report)

  • हाल ही में चर्चा में रहे राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (NRLM) की शुरुआत कब हुई थी? (2011)

 

 

 

स्रोत साभार: Dainik Jagran (Rashtriya Sanskaran), Dainik Bhaskar (Rashtriya Sanskaran), Rashtriya Sahara (Rashtriya Sanskaran) Hindustan Dainik (Delhi), Nai Duniya, Hindustan Times, The Hindu, BBC Portal, The Economic Times (Hindi & English), PTI, PIB

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