(दैनिक समसामयिकी और प्रिलिम्स बूस्टर) यूपीएससी और सभी राज्य लोक सेवा आयोग परीक्षाओं के लिए हिंदी में समाचार पत्रों का संकलन (05 और 06 जनवरी 2020)

दैनिक समसामयिकी और प्रिलिम्स बूस्टर


(दैनिक समसामयिकी और प्रिलिम्स बूस्टर) यूपीएससी और सभी राज्य लोक सेवा आयोग परीक्षाओं के लिए हिंदी में समाचार पत्रों का संकलन (05 और 06 जनवरी 2020)


:: राष्ट्रीय समाचार ::

देश का पहला ग्रीन विलेज: खोनोमा

  • नगालैंड का खोनोमा गांव कभी शिकार और जंगलों की कटाई के लिए बदनाम था, लेकिन आज यह देश के पहले ग्रीन विलेज के रूप में पहचाना जाता है। 2020 में इसने पूरी तरह ऑर्गेनिक बनने का संकल्प लिया है। स्वयं को बदलने के ये फैसले हमेशा से गांव ने खुद लिए और सख्ती से खुद पर लागू भी किए हैं।

पृष्टभूमि

  • नगालैंड के वाइल्डलाइफ एडवाइजरी बोर्ड में शामिल गांव के तिली शकीरे कहते हैं कि 1990 के दशक में गांव हरियाली से ढंका हुआ था। आसपास के जंगल में दुर्लभ वन्यजीव रहते थे, लेकिन फिर शिकार और जंगलों की कटाई ने पारिस्थितिक तंत्र उजाड़ दिया। 1994 में गांववालों ने शिकार प्रतियोगिता में एक ही हफ्ते में 300 से अधिक ब्लिथ ट्रगोपोपन पक्षियों का शिकार कर डाला। एक साथ इतने मृत पक्षियों को देख बुजुर्ग सकते में आ गए और तय किया कि अब न जंगल काटेंगे और न शिकार होगा। लेकिन यह इतना आसान नहीं था, क्योंकि कई आदिवासी परिवार जंगलों की कटाई और शिकार पर निर्भर थे। यही उनकी सांस्कृतिक परंपरा भी थी। गांव वालों ने दिसंबर 1998 में 25 वर्ग किमी के इलाके को ‘खोनोमा नेचर कंजरवेशन और ट्रगोपोपन सैंक्चुरी’ बना दिया। शिकार पर 3 हजार रु. जुर्माना रखा गया।
  • अगर कोई दूसरी बार पकड़ा जाता तो हुक्का-पानी बंद करने का नियम बना। गांववालों ने गौ-पालन सीखा। खेती को अपनाया। धान की खेती अब हर परिवार करता है, जिससे 5 लाख रु. तक की आय हो रही है। साथ ही लहसुन, आड़ू और सब्जियां भी उगाना शुरू किया। लहसुन की खेती तो सिर्फ महिलाएं ही करती हैं। इन परिवर्तनों के बाद सैंक्चुरी देखने पर्यटक आने लगे इसलिए युवाओं को गाइड के तौर पर तैयार किया जाने लगा। घरों को होम-स्टे में बदला गया। 2004 में गांव को सरकार ने ग्रीन विलेज घोषित किया। शकीरे कहते हैं कि इस साल हम पूरी तरह ऑर्गेनिक खेती को अपनाने जा रहे हैं। कोशिश होगी कि बाहर से कुछ भी न मंगवाना पड़े।

'चैंपियंस आफ चेंज': Champions of Change

  • विकास की रफ्तार में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले 20 जिलों को चुना गया है। इनमें से अकेले उत्तर प्रदेश के छह जिले के नाम प्रमुख है। है।सबसे पिछड़े जिलों में शुमार उत्तर प्रदेश के छह जिलों (बलरामपुर, श्रावस्ती, बहराईच, सिद्धार्थनगर, सोनभद्र और चित्रकूट) ने उत्कृष्ट प्रदर्शन किया है।
  • 'चैंपियंस आफ चेंज' की विभिन्न श्रेणियों में बेहतरीन प्रदर्शन करने वाले इन जिलों को केंद्र सरकार ने पुरस्कृत भी किया है। राज्यों की रैंकिंग में उत्तर प्रदेश 51 अंक लेकर दूसरे स्थान है, जबकि 53 अंक के साथ केरल पहले पायदान पर है।

पृष्टभूमि

  • बेहतर प्रदर्शन करने जिलों की रैंकिंग नीति आयोग ने निर्धारित मानकों के आधार पर किया है। राष्ट्रीय स्तर पर इन जिलों में चलाये गये अभियान के साल भर बाद लगातार समीक्षा व रैंकिंग की जा रही है। जिन मानकों के आधार पर इन जिलों का चयन किया गया, उन्हीं के आधार पर उनके विकास की रफ्तार को मापा गया है। स्वास्थ्य एवं पोषण, शिक्षा, कृषि एवं जल संसाधन, वित्तीय समावेशन, कौशल विकास और आधारभूत संरचना जैसे इंडेक्स को आधार बनाया गया है।
  • देश के 117 आकांक्षी (पिछड़े) जिलों में उत्तर प्रदेश के आठ जिलों को शामिल किया गया है। केंद्र सरकार की विशेष योजना के तहत इन जिलों में विकास की बयार बहाने की कोशिश की जा रही है, ताकि वे पिछड़े जिलों की सूची से 2022 तक बाहर निकल सकें। इनमें 35 जिले नक्सल प्रभावित हैं। जबकि पांच जिले पश्चिम बंगाल के इसमें शामिल नहीं हैं।

ऊपर से 10 प्रदेशों की औसत उपलब्धि

राज्य उपलब्धि अंक
केरल 53
उप्र 51
हरियाणा 38
बिहार 38
मध्य प्रदेश 35
पंजाब 33
हिमाचल 33
ओडीसा 30
जम्मू-कश्मीर 28
पूर्वोत्तर के राज्य 27

उजाला योजना

  • एलईडी वितरण के मामले में छत्तीसगढ़ पड़ोसी राज्यों की तुलना में पीछे है। करीब पांच करोड़ से अधिक एलईडी वितरण करने वाला ओडिशा देश में पहले स्थान पर है। गुजरात दूसरे और उत्तर प्रदेश तीसरे नंबर पर है। छत्तीसगढ़ का स्थान 11वां हैं।
  • छत्तीसगढ़ में 'उजाला' की रोशनी से हर वर्ष 557 करोड़ रुपये की बचत हो रही है। उजाला योजना के तहत राज्य में करीब चार वर्ष एक करोड़ से अधिक एलईडी बल्ब आदि का वितरण किया जा चुका है।

पृष्टभूमि

  • उजाला योजना की शुरुआत देश में एक मई 2015 को की गई थी। योजना के तहत करीब चार वर्ष में अब तक 36,13,86,121 एलईडी का वितरण हो चुका है। योजना का मकसद देश में बिजली (electricity) की खपत को कम कर राष्ट्र निर्माण में योगदान देना था। योजना के तहत अब तक देशभर में 36.02 करोड़ बल्ब वितरित किए जा चुके हैं। इससे एक ओर जहां हजारों करोड़ रुपये की बचत हुई है, वहीं वातावरण में कार्बन डाइऑक्साइड (Co2) जैसी हानिकारकर गैस का उत्ससर्जन कम हो गया है।
  • एलईडी बल्ब समेत अन्य उपकरण पर्यावरण के लिए भी फायदेमंद माने जाते हैं। इन उपरकणों से कार्बन डाइआक्साइड का उत्सर्जन कम होता है। राज्य में एलईडी के उपयोग से कार्बन डाइआक्साइड के उत्सर्जन में 11,27,692 कमी आई है।

एलईडी वितरण में टाप टेन राज्य

  • 5,22,28,550 ओडिशा
  • 4,07,73,569 गुजरात
  • 2,60,66,685 उत्तरप्रदेश
  • 2,20,36,938 आंध्रप्रदेश
  • 2,19,71,431 महाराष्ट्र
  • 1,94,77,263 बिहार
  • 1,75,36,255 मध्यप्रदेश
  • 1,71,01,023 राजस्थान
  • 1,55,81,000 हरियाणा
  • 1,36,23,967 झारखंड

:: अंतर्राष्ट्रीय समाचार ::

ननकाना साहिब:गुरु नानक देवजी का जन्मस्थान

  • पाकिस्तान के सैकड़ो कट्टरपंथी मुस्लिमों ने शुक्रवार शाम सिखों के पवित्र धर्मस्थल ननकाना साहिब गुरुद्वारे को घेरकर पथराव किया। प्रदर्शनकारियों ने सिखों को भगाने और ननकाना साहिब का नाम बदलने की धमकी भी दी। सिखों के सबसे पवित्र धर्मस्थलों में से एक ननकाना साहिब में हालात इतने खराब हैं कि यहां पहली बार भजन-कीर्तन रद्द करना पड़ा है।

ननकाना साहिब

  • पंजाब प्रांत में स्थित ननकाना साहिब लाहौर से करीब 80 किमी दूर स्थित है। 550 साल पहले सिख धर्म के संस्थापक गुरु नानकजी का जन्म यहीं हुआ था। उन्होंने पहली बार यहीं उपदेश दिए थे। इसलिए यह सिखों के लिए सबसे पवित्र तीर्थ स्थलों में शामिल है।
  • खास बात यह है कि जिस जगह अब ननकाना साहिब है, उसे पहले मुस्लिम राजपूत मुखिया राय भोए का नाम दिया गया था। यह जगह लंबे समय तक राय भोए दी तलवंडी के नाम से जानी गई। हालांकि, राय भोए के पड़पोते और मुखिया राय बुलार भट्टी ने करीब 18,750 एकड़ जमीन गुरु नानकजी को दे दी थी। गुरुनानकजी 35 साल तक तलवंडी में रहे थे। इसके बाद वह सुल्तानपुर लोधी चले गए जो अब भारतीय पंजाब के कपूरथला जिले में है। गुरु नानकजी के जन्म स्थान से जुड़ा होने के बाद में इस जगह का नाम ननकाना साहिब प्रचलित हो गया।
  • ननकाना साहिब में गुरुद्वारा जन्मस्थान सहित 9 गुरुद्वारे हैं। माना जाता है कि यहां पहला गुरुद्वारा गुरुनानकजी के पोते बाबा धरम चंद ने 16वीं सदी में बनाया। मौजूदा गुरुद्वारा महाराजा रणजीत सिंह ने 19वीं सदी में तैयार करवाया। इसी जगह पर गुरु नानकजी की जयंती पर बड़ा मेला भी लगने लगा। ननकाना साहिब में मेले का सबसे पुराना रिकॉर्ड साल 1868 का है।

इंटरनेशनल मिलेट्री एजुकेशन एंड ट्रेनिंग (आइएमईटी) प्रोग्राम

  • पाकिस्तानी सैनिकों को अमेरिका फिर से ट्रेनिंग देगा। ट्रंप प्रशासन ने पाक सैनिकों को अमेरिकी संस्थानों में प्रशिक्षण देने के कार्यक्रम को बहाल करने की स्वीकृति दे दी है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने करीब दो वर्ष पहले इस कार्यक्रम पर रोक लगा दी थी। हालांकि पाकिस्तान को अमेरिका से मिलनी वाली दूसरी कई सुरक्षा मदद पर रोक अभी प्रभावी रहेगी।

पृष्टभूमि

  • ट्रंप प्रशासन ने अगस्त 2018 में पाकिस्तान के लिए आइएमईटी प्रोग्राम पर रोक लगा दी थी। इस प्रोग्राम के तहत पिछले करीब दो दशक से पाकिस्तानी सैनिकों को अमेरिकी संस्थानों में प्रशिक्षण दिया जा रहा था।
  • आइएमईटी पर रोक लगने के कुछ समय बाद ही पाकिस्तान ने रूस के साथ इसी तरह का एक समझौता किया था। इस समझौते के तहत पाकिस्तानी सैनिकों को रूसी रक्षा केंद्रों में प्रशिक्षिण दिया जाएगा।
  • गौरतलब है कि एक ओर अमेरिका आतंकवाद के खिलाफ निर्णायक लड़ाई की बात करता है और पाकिस्‍तान को आतंकी संगठनों पर लगाम लगाने के लिए फटकार लगाता है तो दूसरी ओर आड़े हाथों से वह पाकिस्‍तान की मदद करने से भी पीछे नहीं हटता है। हालांकि, उसे पाकिस्‍तान में बैठे आतंकियों से खतरा भी महसूस होता है। अभी कल ही अमेरिकी विमानन नियामक फेडरल एविएशन एडमिनिस्ट्रेशन (एफएए) ने अपने यहां की एयरलाइनों को पाकिस्तानी हवाई सीमा का इस्तेमाल नहीं करने के निर्देश दिए हैं।

इराक द्वारा अमेरिकी फौज को देश से बाहर निकलाने का प्रस्ताव पारित

  • ईरानी जनरल कासिम सुलेमानी के मारे जाने के बाद खाड़ी क्षेत्र में पैदा हुए तनाव के बीच इराक की संसद ने अमेरिकी फौज को देश से बाहर निकलाने का प्रस्ताव पास किया है। हालांकि, सरकार के लिए इस प्रस्ताव को मानना बाध्यकारी नहीं है।
  • इराक की धरती पर अमेरिकी ड्रोन हमले में शीर्ष ईरानी कमांडर सुलेमानी के मारे जाने के बाद संसद का विशेष सत्र बुलाया गया था। पारित प्रस्ताव में सरकार से आग्रह किया गया है कि वह अमेरिका के नेतृत्व में गठबंधन सेनाओं की सहायता लेने के लिए किए गए समझौते को रद करे।
  • सरकार के लिए कानून की तरह संसद से पास प्रस्ताव को मानना बाध्यकारी नहीं होता। लेकिन इस प्रस्ताव को सरकार द्वारा मान लेने की संभावना है, क्योंकि प्रधानमंत्री अदल अब्दुल मेहदी ने पहले ही कहा था कि संसद देश में विदेशी सेना की मौजूदगी खत्म करे।
  • बता दें कि इराक में इस समय लगभग पांच हजार अमेरिकी सैनिक हैं, जो मुख्य रूप से स्थानीय सुरक्षा बलों को प्रशिक्षण देने और सलाहकार की भूमिका निभाते हैं। अमेरिका और ईरान के बीच दशकों पुरानी दुश्मनी है। इसके बावजूद इराक में ईरान समर्थित मिलिशिया आइएस के खिलाफ लड़ाई में अमेरिकी सेना का साथ दे रहे थे। लेकिन सुलेमानी की मौत के बाद इराक में हालात बदल गए हैं। उनके विरोधी भी अमेरिकी कार्रवाई का विरोध कर रहे हैं। उन्हें डर है कि इस घटना से कहीं उनका देश युद्ध का अखाड़ा न बन जाए।

अमेरिका-ईरान: एक समग्र अवलोकन

  • अमेरिका और ईरान के बीच चल रहा दशकों पुराना विवाद फिर गरमा गया है। गुरुवार को इराक में अमेरिका ने एयर स्ट्राइक के जरिए शीर्ष ईरानी कमांडर कासिम सुलेमानी को मार गिराया है। इस घटना के बाद खाड़ी क्षेत्र में तनाव गहरा गया है। असर पूरी दुनिया सहित भारत पर भी पड़ेगा। तात्कालिक असर के रूप में शुक्रवार को हमले के बाद ही क्रूड के दाम चार फीसदी बढ़ गए। भारत के लिए ईरान कई मायनों में महत्वपूर्ण है। चीन के बाद भारत ही है, जो ईरान से सर्वाधिक तेल खरीदता है। इतना ही नहीं, पश्चिम एशिया में 80 लाख भारतीय काम कर रहे हैं। इनमें अधिकतर खाड़ी देशों में है। युद्ध जैसी आपात स्थिति आती है तो इन लोगों को इस क्षेत्र से वापस लाना बड़ी चुनौती होगी। हालांकि, सैन्य क्षमता में ईरान...अमेरिका के मुकाबले कहीं नहीं ठहरता। इसके बावजूद अगर हथियारों से संघर्ष शुरू होता है तो खाड़ी देशों में फिर से अफरा-तफरी मच सकती है। अमेरिका पहले ही अपने नागरिकों से इराक छोड़ने के लिए कह चुका है। इतना ही नहीं, ब्रिटेन ने भी मिडिल ईस्ट में अपने सैन्य अड्‌डों की सुरक्षा बढ़ा दी है।
  • अमेरिका के इस हमले को विशेषज्ञ अमेरिकी चुनाव से जोड़कर भी देख रहे हैं। अमेरिका में इस साल चुनाव भी है। हालांकि, मौजूदा राष्ट्रपति ट्रंप का रवैया हमेशा ईरान के खिलाफ रहा है। ओबामा प्रशासन द्वारा किए गए परमाणु समझौते को उन्होंने सत्ता में आते ही तोड़ दिया था। दरअसल, अमेरिका और ईरान के संबंध कभी भी मधुर नहीं रहे हैं। दशकों से अलग-अलग घटनाओं की वजह से दोनों देशों के संबंध खराब रहे हैं। अगर अमेरिका और ईरान में युद्ध होता है तो एशियाई देशों में सबसे अधिक असर भारत पर पड़ेगा। भारत की जियो स्ट्रैटजिक और जियो पॉलिटिकल स्थिति बिगडे़गी। कारण भारत के दाेनों ही देशों के साथ अच्छे संबंध है। राजनीतिक रूप से ईरान भारत के लिए बहुत महत्वपूर्ण है। ऐसे में उसके किसी एक राष्ट्र के साथ खड़े होने में दूसरे के साथ बुराई का खामियाजा भुगतना होगा। युद्ध के और बढ़ने पर चीन और रूस जैसी महाशक्तियों के भी पक्ष और विपक्ष में आने की संभावनाएं बढ़ेंगी जो परिस्थितियों को भयावह रूप देंगी।

1. अमेरिका और ईरान का ताजा विवाद क्या है?

  • अमेरिका ने शुक्रवार को एक हवाई हमले में ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स के शक्तिशाली कमांडर जनरल कासिम सुलेमानी को मार गिराया। हमला बगदाद के इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर हुआ। सुलेमानी को ईरान के क्षेत्रीय सुरक्षा हथियारों का रचयिता कहा जाता था। अमेरिका के इस कदम से दोनों देशों के साथ ही खाड़ी क्षेत्र में तनाव काफी बढ़ गया है।

2. भारत पर क्या असर पड़ेगा? तेल महंगा होगा

  • चीन के बाद भारत ही है, जो ईरान से सबसे अधिक कच्चा तेल खरीदता है। भारत अपनी जरूरतों का 38 प्रतिशत तेल सऊदी अरब और ईरान से खरीदता है। अगर यह संकट बढ़ता है तो ईरान अपने इलाके से गुजरने वाले तेज के जहाजों को रोक सकता है असर यह होगा कि दुनिया भर में कच्चे तेल की कमी हो जाएगी और दाम आसमान छूने लगेंगे।

नागरिक खतरे में होंगे

  • पूरी दुनिया में ईरान के बाद सबसे अधिक शिया मुसलमान भारत में रहते हैं। दोनों देशों के संबंध मधुर हैं। लेकिन युद्ध जैसी स्थिति आती है तो नागरिक सबसे ज्यादा प्रभावित होंगे। पश्चिम एशिया में 80 लाख भारतीय रहते हैं/काम करते हैं। युद्ध इन्हें संकट में डाल सकता है। जैसा कि खाड़ी युद्ध के दौरान हुआ था। भारत को तब 1.10 लाख भारतीयों को एयरलिफ्ट कर स्वदेश लाना पड़ा था।

3. चार बड़े घटनाक्रमों से समझिए...आखिर ये दोनों देश झगड़ते क्यों रहते हैं?

  • 1953 - तख्तापलट : यह वो वर्ष था, जब दुश्मनी की शुरुआत हुई। अमेरिकी खुफिया एजेंसी सीआईए ने ब्रिटेन के साथ मिलकर ईरान में तख्तापलट करवाया। निर्वाचित प्रधानमंत्री मोहम्मद मोसाद्दिक को हटाकर ईरान के शाह रजा पहलवी के हाथ में सत्ता दे दी गई। इसकी मुख्य वजह था-तेल। मोसाद्दिक तेल के उद्योग का राष्ट्रीयकरण करना चाहते थे।
  • 1979 - ईरानी क्रांति: ईरान में एक नया नेता उभरा-आयतोल्लाह रुहोल्लाह ख़ुमैनी। आयतोल्लाह पश्चिमीकरण और अमेरिका पर ईरान की निर्भरता के सख्त खिलाफ थे। शाह पहलवी उनके निशाने पर थे। ख़ुमैनी के नेतृत्व में ईरान में असंतोष उपजने लगा। शाह को ईरान छोड़ना पड़ा। 1 फरवरी 1979 को ख़ुमैनी निर्वासन से लौट आए।
  • 1979-81 - दूतावास संकट: ईरान और अमेरिका के राजनयिक संबंध खत्म हो चुके थे। तेहरान में ईरानी छात्रों ने अमेरिकी दूतावास को अपने कब्जे में ले लिया। 52 अमेरिकी नागरिकों को 444 दिनों तक बंधक बनाकर रखा गया। 2012 में इस विषय पर हॉलीवुड फिल्म-आर्गो आई। इसी बीच इराक ने अमेरिका की मदद से ईरान पर हमला कर दिया। युद्ध आठ साल चला।
  • 2015 - परमाणु समझौता: ओबामा के अमेरिकी राष्ट्रपति रहते समय दोनों देशों के संबंध थोड़ा सुधरने शुरू हुए। ईरान के साथ परमाणु समझौता हुआ, जिसमें ईरान ने परमाणु कार्यक्रम को सीमित करने की बात की। इसके बदले उस पर लगे आर्थिक प्रतिबंधों में थोड़ी ढील दी गई थी। लेकिन ट्रंप ने राष्ट्रपति बनने के बाद यह समझौता रद्द कर दिया। दुश्मनी फिर शुरू हो गई।

4. हमले का अमेरिकी चुनाव से संबंध है?

  • युद्ध हमेशा से अमेरिकी चुनाव पर असर डालता रहा है। 2003 में इराक पर हमला और 2004 के राष्ट्रपति चुनाव को लेकर एक अध्ययन सामने आया था। मिशन एकॉम्पिशल्ड : द वॉरटाइम इलेक्शन ऑफ 2004। 2004 में अमेरिका में चुनाव तय थे। 2003 में बुश ने इराक पर हमले का फैसला किया। शोधकर्ताओं के अनुसार- बुश ने यह चुनाव ‘युद्ध के कारण’ जीता था।
  • अमेरिका ने बगदाद पर हवाई हमला उस वक्त किया है, जब अमेरिका में राष्ट्रपति चुनाव की तैयारियां जोरों पर हैं। अमेरिका में इस साल चुनाव हैं। बता दें, डोनाल्ड ट्रंप ने 29 नवंबर 2011 को ट्वीट कर कहा था कि तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा फिर चुनाव जीतने के लिए ईरान के साथ युद्ध शुरू कर सकते हैं।

5. अब तक क्या असर हुआ?

  1. बगदाद में अमेरिकी दूतावास ने अपने नागरिकों से तत्काल इराक छोड़ देने को कहा है।
  2. ब्रिटेन ने मिडिल ईस्ट में अपने सैन्य अड्डों की सुरक्षा भी बढ़ा दी है।
  3. इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ग्रीस का दौरा बीच में छोड़कर अपने देश लौट आए हैं।
  4. क्रूड के दाम 4 प्रतिशत बढ़ गए हैं।

:: भारतीय अर्थव्यवस्था ::

कालाधन और स्विस बैंक

  • स्विस बैंकों में कालाधन रखने के लिए लोग अपने नाम के साथ-साथ अलग-अलग ट्रस्ट के नाम से खाता खुलवा लेते हैं। भारत और स्विट्जरलैंड के कर अधिकारियों ने अब ऐसे ट्रस्टों की पहचान की है। ऐसे ट्रस्टों को स्विट्जरलैंड के कर प्राधिकरणों ने नोटिस जारी किए हैं। इतना ही नहीं, स्विट्जरलैंड के कर अधिकारी ऐसे व्यक्तियों की बैंक जानकारियां भारत के कर अधिकारियों के साथ साझा भी कर रहे हैं।

पृष्टभूमि

  • कालाधन और कर चोरों के पनाहगाह की छवि से परेशान स्विट्जरलैंड सरकार ने अपने देश की छवि को बदलने के लिए विगत कुछ वषरें में कई सुधार किए हैं। वह इस संबंध में समझौते के तहत विभिन्न देशों के साथ बैंकिंग सूचनाओं को साझा करने लगी है। इतना ही नहीं, उसने सूचनाएं साझा करने की प्रक्रिया भी तेज कर दी है।
  • कालेधन का मामला भारत में राजनीतिक तौर पर बेहद संवेदनशील है। स्विट्जरलैंड के अधिकारियों ने मार्च से अब तक करीब 3,500 भारतीय खाताधारकों को नोटिस जारी किया है। कर चोरी के मामले में कदम उठाने के वैश्विक स्तर पर समझौते के बाद उसने भारत सरकार के साथ भी समझौता किया और इसी के तहत उसने खाताधारकों की जानकारियां देना शुरू किया है।
  • बता दें कि स्विट्जरलैंड के सरकारी गजट में पिछले एक महीने के दौरान प्रकाशित नोटिसों में कुछ कारोबारियों समेत ऐसे कई व्यक्तियों, केमैन आइलैंड्स स्थित ट्रस्टों और कंपनियों को कहा गया है कि यदि वे भारत के साथ बैंक जानकारियां साझा करने के खिलाफ अपील करना चाहते हैं तो वे अपना प्रतिनिधि नामित करें।
  • केमैन आइलैंड्स, पनामा और ब्रिटिश वर्जिन आइलैंड्स जैसी जगहों पर बनाए गए ट्रस्ट्रों को सामान्यत: कर चोरी का जरिया माना जाता है। इन नोटिसों में जिन कारोबारियों का नाम शामिल है उनमें अतुल पुंज, गौतम खेतान, सतीश कालरा, विनोद कुमार खन्ना, दुल्लाभाई कुंवरजी वाघेला, रीवाबेन दुल्लाभाई कुंवरजी वाघेला और बलवंतकुमार दुल्लाभाई वाघेला शामिल हैं।

:: विज्ञान और प्रौद्योगिकी ::

विटामिन बी-12

  • उत्तर भारत के 74 फीसदी लोगों में विटामिन बी-12 की कमी है। इन राज्यों में 26% आबादी ही ऐसी है जिसके शरीर में पर्याप्त मात्रा में विटामिन बी-12 मौजूद है। इंडियन जर्नल ऑफ एंडोक्रिनोलॉजी एंड मेटाबॉलिज्म में प्रकाशित एक अध्ययन में यह दावा किया गया है।
  • 200-300 पीकोग्राम प्रति मिलीलीटर के बीच विटामिन बी-12 के स्तर को बॉर्डर लाइन कमी माना जाता है। अध्ययन में कहा गया है कि उत्तर भारत में 47 फीसदी आबादी में विटामिन बी-12 इस स्तर से काफी कम है। वहीं, 27 फीसदी आबादी बॉर्डर लाइन कमी के दायरे में आती है। दोनों मिलाकर 74% लोगों इसकी कमी है।
  • विटामिन बी-12 की कमी की वजह बताते हुए कहा गया कि उत्तर भारत में शाकाहारी लोगों की संख्या अधिक है। विटामिन बी-12 मांस, अंडों और दूध व दुग्ध निर्मित उत्पादों से मिलता है। अध्ययन में न्यूरोपैथिक लक्षण वाले लोगों में विटामिन बी-12 की जांच कराने और खाद्य पदार्थों में विटामिन बी-12 के लिए फोर्टिफिकेशन करने की अनुशंसा की गई है।

विटामिन बी-12 क्यों जरूरी-

  • विटामिन बी-12 हमारे शरीर की कोशिकाओं को काम करने में मदद करता है। इसकी कमी से कोशिकाएं ठीक से काम करना बंद कर देती हैं। यह नर्व सिस्टम (तंत्रिका तंत्र) की कार्यप्रणाली भी दुरुस्त रखता है।

कमी के लक्षण-

  • थकान, बाल गिरना, कमजोर याददाश्त। महिलाओं में विटामिन बी-12 की कमी से अवसाद होता है। ज्यादा कमी होने पर तलवों और हाथों में जलन होने लगती है।

स्वाइन फीवर की स्वदेशी दवा

  • सुअरों में होने वाले क्लासिकल स्वाइन फीवर के लिए देश में पहली बार स्वदेशी तकनीक से दवा तैयार की गई है। भारतीय पशु चिकित्सा अनुसंधान संस्थान (आइवीआरआइ) के वैज्ञानिकों की टीम ने मिलकर इसमें कामयाबी हासिल की है।
  • खास बात है कि इस स्वदेशी तकनीक में दवा बनाने के लिए अब खरगोश को मारने की जरूरत नहीं पड़ेगी। इसमें सेल कल्चर का प्रयोग किया गया है। अभी तक देश में ज्यादातर कंपनियां लाखों खरगोश को मारकर ही स्वाइन फीवर की दवाएं तैयार करती थीं।
  • इसके अलावा दो ऐसे संस्थान थे जो विदेशी स्ट्रेन की पद्धति से दवा तैयार करते थे। जबकि आइवीआरआइ वैज्ञानिकों ने जो तकनीक तैयार की है वो पूरी तरह से स्वदेशी है। इस तकनीक का पेटेंट फाइल करने की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है। जल्द ही केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर इसे बाजार में लांच कर देंगे।

स्वाइन फीवर

  • स्वाइन फीवर सुअरों में फैलने वाली सबसे बड़ी बीमारी है जिसकी चपेट में आने के बाद वह बचाया नहीं जा सकता। जबकि संक्रमित सुअरों के माध्यम से इस बीमारी का इंसानों तक फैलना फ्लू कहलाता है। आइवीआरआइ ने जो दवा तैयार की है वह स्वाइन फीवर की रोकथाम के लिए है। जिसकी एक खुराक हर साल सुअरों को देनी होगी। इससे सुअरों में यह बीमारी फैलना कई गुना तक कम हो जाएगा। इससे इंसानों में स्वाइन फ्लू होने का खतरा भी काफी हद तक कम हो जाएगा।

'ब्रह्मा' ब्रेन टेम्प्लेट

  • देश के वैज्ञानिकों ने पहली बार ऐसा ब्रेन टेम्प्लेट विकसित किया है जो भारतीय लोगों के मस्तिष्क की रचना के बारे में जानकारी देगा। इस ब्रेन टेम्प्लेट की मदद से सिजोफ्रेनिया, अल्जाइमर, पार्किंसंस और अवसाद जैसे रोग की पहचान शुरुआती स्तर पर ही की जा सकेगी।
  • हरियाणा के मानेसर में नेशनल ब्रेन रिसर्च सेंटर (एनबीआरसी) में न्यूरोइमेजिंग और न्यूरोस्पेक्ट्रोस्कोपी लैबोरेटरीज (एनआईएनएस) के वरिष्ठ वैज्ञानिक प्रवत मंडल के नेतृत्व में वैज्ञानिकों की एक टीम ने इस मस्तिष्क टेम्प्लेट ‘ब्रह्मा’ को विकसित किया है।
  • यह तकनीक दिमाग से जुड़ी बीमारियों की पहचान करने के लिए दिमाग के तनाव के स्तर और पीएच का उपयोग करती है। ब्रेन टेम्पलेट मानसिक रोग की स्थिति में इंसान के मस्तिष्क की कार्यक्षमता को समझने के लिए विभिन्न मस्तिष्क छवियों एक सकल प्रतिनिधित्व है, जो यह बताता है कि किसी खास स्थिति में मरीज का दिमाग किस तरह काम करता है।

मस्तिष्क की बेहतर समझ विकसित होगी-

  • ‘ब्रह्मा’ भारतीय मस्तिष्क वैज्ञानिकों के लिए एक महत्वपूर्ण मार्गदर्शक साबित होगा, क्योंकि देश के डॉक्टरों को रोगियों की सर्जरी और उपचार के लिए उनकी शारीरिक संरचना और विवरण को समझने के लिए अब तक अमेरिका और कनाडाई मस्तिष्क के टेम्प्लेट्स के सहारे रहना पड़ता था। जबकि, इस बात से सभी वाकिफ हैं कि भारतीय लोगों के दिमाग की संरचना अमेरिकी दिमाग से भिन्न हो सकती है।

लिथियम-सल्फर बैटरी

  • वैज्ञानिकों ने एक ऐसी बैटरी बनाने में कामयाबी पाई है जो एक बार चार्ज होने के बाद लगातार पांच दिनों तक आपके स्मार्टफोन को पावर दे सकती है। इतना ही नहीं, लिथियम और सल्फर से बनी इस बैटरी के बड़े स्वरूप को यदि आप एक बार फुल चार्ज कर देते हैं तो इससे किसी इलेक्ट्रिक वाहन को 1,000 किमी तक आसानी से चलाया जा सकता है।
  • ऑस्ट्रेलिया के मोनाश विश्वविद्यालय की शोधकर्ता महदोखत शाबानी व उनके सहयोगियों ने लिथियम -आयन बैटरी की तुलना में पांच गुना अधिक क्षमता वाली लिथियम-सल्फर बैटरी विकसित की है।
  • इस बैटरी की खासियत है कि बार-बार चार्ज करने पर भी इसकी ऊर्जा देने की क्षमता में कमी नहीं आती, यानी 200 बार चार्ज करने पर भी इसकी ऊर्जा देने के क्षमता 99 फीसदी बनी रहती है। यह बैटरी सल्फर-आयन से बनने वाली बैटरी से पांच गुना अधिक शक्तिशाली है। इससे अब स्मार्टफोन से लेकर इलेक्ट्रिक वाहनों तक के लिए बेहद बैटरी बनाई जा सकती है। क्योंकि सल्फर काफी मात्रा में उपलब्ध है और यह काफी सस्ती भी है।
  • वहीं, लिथियम-आयन बैटरी को बार-बार चार्ज करने पर उसकी क्षमता घटती जाती है। लिथियम-सल्फर से बनी बैटरी उपभोक्ता इलेक्ट्रॉनिक्स में उपयोग के लिए अव्यावहारिक मानी जाती थी, क्योंकि इससे बनी बैटरी के साथ सबसे बड़ी चुनौती कैथोड की अस्थिरता रही है, लेकिन अब शोधकर्ताओं ने इसका हल खोज लिया है। उन्होंने ऐसा लचीला कैथोड विकसित किया है जो चार्ज होने पर आकार में होने वाले विस्तार और संकुचन से होने वाले परिवर्तन को रोकने में सक्षम है।

:: पर्यावरण और पारिस्थितिकी ::

जलवायु परिवर्तन और पश्मीना

  • 14 हजार फीट से अधिक की ऊंचाई, सर्दियों में बर्फ से पूरी तरह ढका पठार, माइनस 40 डिग्री फारेनहाइट तक गिरकर हड्डियों तक को गला देने वाला तापमान। ऐसी दुश्कर परिस्थितियों में यह यकीन करना तक मुश्किल है कि बर्फ के विशाल रेगिस्तान में कोई जीवित भी रह सकता है। भारत और चीन के पठार पर स्थित चांगथांग का विशाल रेगिस्तान हिमालय और काराकोरम पर्वत श्रृंखलाओं के मध्य स्थित है। यह अत्यंत दुर्लभ चांगरा बकरी का घर है, जिसे हम पश्मीना बकरी के नाम से भी जानते हैं। पश्मीना ऊन की बनी वस्तुओं के मुरीदों की दुनिया में कोई कमी नहीं है। जलवायु परिवर्तन ने बकरी की इस प्रजाति को भी अपने कोप का शिकार बना लिया है। वैज्ञानिकों के अनुसार तमाम प्रतिकूल हालातों के साथ अब इस खास ऊन की गुणवत्ता और उत्पादकता में काफी गिरावट दिखी है।

गुणवत्ता पर पड़ रहा असर

  • वैज्ञानिकों के अनुसार जलवायु परिवर्तन इस क्षेत्र में पश्मीना उत्पादन के लिए सबसे बड़ा खतरा है। बर्फबारी के बावजूद, सर्दियां गर्म हो रही हैं। यह मूल्यवान पश्मीना ऊन की गुणवत्ता और मात्र को कम करती हैं। गर्म तापमान का मतलब है कि बकरियां इस तरह के मोटे अंडरकोट नहीं उगाती हैं। यह नर्म फर की उपज को कम करते हैं, जिसे मोटे बाहरी फर से अलग करना कठिन होता है।

एक शॉल में 180 घंटे

  • पश्मीना के लिए बसंत के मौसम में बकरियों के बालों की कटाई की जाती है। इसके बाद अच्छे फाइबर को हाथ से अलग किया जाता है। एक बार साफ करने के बाद एक कश्मीरी बकरी से उपयोगी ऊन मात्र चार औंस तक होती है। रेशों को फिर हाथ से काटा जाता है। इसके बाद ही बुनाई की प्रक्रिया शुरू होती है। एक पश्मीना शॉल बनाने में करीब 180 घंटे लग सकते हैं। वहीं बड़ी वस्तुओं को लकड़ी के करघे पर बुनाई के लिए उच्च कुशल कारीगरों को कई महीने या एक साल भी लग सकता है। फिर उन्हें दुनिया भर में निर्यात किया जाता है
  • चांगरा बकरी के बाल की चौड़ाई महज 12 माइक्रान होती है जो इंसानी बालों से करीब आठ गुना पतले होते हैं। एक सामान्य भेड़ की ऊन से आठ गुना ज्यादा गर्म होते हैं। इस शानदार रेशे को पश्मीना के रूप में जाना जाता है, जो दुनिया में सबसे नर्म और सबसे महंगी कश्मीरी ऊन है। यहां के चांगपा खानाबदोश लोग इन बकरियों को चराते घूमते रहते हैं।

जलवायु परिवर्तन से बढ़ी मुश्किलें

  • अब चांगपा का जीवन जीने का प्राचीन तरीका जलवायु परिवर्तन और चीन से नकली पश्मीना आयात के डर के साए में है। पिछले कुछ वषों से यहां तेजी से ज्यादा बर्फबारी हो रही है। अप्रत्याशित बर्फबारी चरवाहों के लिए बड़ी असुविधा है।

पश्मीना बकरी का क्लोन

  • इस बीच, कश्मीर विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों ने दुनिया की पहली पश्मीना बकरी का क्लोन तैयार किया। 2012 में नूरी का जन्म हुआ। लेकिन व्यापक रूप से क्लोन का उपयोग करने का विचार चांगपा चरवाहों के बीच विवादास्पद साबित हो चुका है। वे अपने बौद्ध विश्वासों के कारण इसे ठीक नहीं मानते हैं।

कच्ची पश्मीना मांग पूरी कर रहा चीन

  • चांगथांग पठार के दर्जनों घुमंतू परिवार 180 किलोमीटर दूर लेह के बाहरी इलाके में अपने गांव खरनाक से दूर चले जाते हैं। वहां चरवाहों ने अपना खानाबदोश जीवन छोड़ दिया है। यदि मौसम का यही पैटर्न जारी रहा तो यह चांगथांग पर पश्मीना बकरी पालन पर अपरिवर्तनीय प्रभाव हो सकता है। लद्दाख के चरवाहों से पश्मीना ऊन की कमी के चलते कश्मीर के बुनकरों ने अपने उत्पादों की बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए चीन और मंगोलिया से कच्ची पश्मीना आयात करना शुरू कर दिया है।

:: विविध ::

इस्माइल गनी

  • इराक की राजधानी बगदाद में हवाई अड्डे के पास हुए अमेरिकी हवाई हमलों में ईरानी जनरल कासिम सुलेमानी की मौत के बाद ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला खामनेई ने सुलेमानी के डिप्टी कमांडर इस्माइल गनीको कुद्स बल का नया कमांडर नियुक्त कर दिया है।

दुनिया की सबसे उम्रदराज जीवित इंसान: केन तनाका

  • जापान की केन तनाका दुनिया की सबसे उम्रदराज जीवित इंसान बन गई हैं। उन्होंने रविवार को फुकुओका के नर्सिंग होम में दोस्तों, रिश्तेदारों और करीबियों के साथ अपना 117 वां जन्मदिन मनाया। उनका जन्म 2 जनवरी, 1903 को हुआ था।
  • पिछले साल 9 मार्च को 116 साल 66 दिन पूरे करने के बाद उनका नाम सबसे उम्रदराज महिला के तौर पर गिनीज वर्ल्ड रिकार्ड्स में दर्ज किया गया था और प्रमाणपत्र सौंपा था।

:: प्रिलिम्स बूस्टर ::

  • उजाला योजना के तहत एलईडी वितरण में कौन सा राज्य शीर्ष स्थान पर बना हुआ है? (आंध्र प्रदेश)
  • देश के ग्रीन विलेज का नाम क्या है एवं यह कहाँ स्थित है? (खोनोमा गांव-नगालैंड)
  • चैंपियंस ऑफ चेंज की रैंकिंग में कौन सा राज्य प्रथम एवं द्वितीय स्थान पर शामिल है? (क्रमशःकेरल एवं उत्तर प्रदेश)
  • हाल ही में चर्चित रहने वाले ननकाना साहिब में किस धर्म गुरु का जन्म हुआ था? (गुरु नानक जी)
  • हाल ही में अमेरिका ने किस देश के साथ इंटरनेशनल मिलेट्री एजुकेशन एंड ट्रेनिंग (आइएमईटी) प्रोग्राम को पुनः प्रारंभ किया है? (पाकिस्तान)
  • हाल ही में किस देश की संसद के द्वारा अमेरिकी फौज को देश से बाहर निकालने हेतु प्रस्ताव पारित किया गया? (इराक)
  • हाल ही में भारतीय वैज्ञानिकों ने किस ब्रेन टेम्प्लेट को विकसित किया है? (ब्रह्मा ब्रेन टेम्प्लेट)
  • हाल ही में जलवायु परिवर्तन के कारण चर्चित रहने वाले पश्मीना ऊन को उनको किस जानवर से प्राप्त किया जाता है? (चांगरा बकरी)
  • हाल ही में किसे कुद्स बल का नया कमांडर नियुक्त किया गया है? (इस्माइल गनी)
  • विश्व की सबसे उम्रदराज जीवित इंसान की उपलब्धि किसके नाम दर्ज है? (केन तनाका)

स्रोत साभार: Dainik Jagran (Rashtriya Sanskaran), Dainik Bhaskar (Rashtriya Sanskaran), Rashtriya Sahara (Rashtriya Sanskaran) Hindustan Dainik (Delhi), Nai Duniya, Hindustan Times, The Hindu, BBC Portal, The Economic Times (Hindi & English), PTI, PIB

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