(दैनिक समसामयिकी और प्रिलिम्स बूस्टर) यूपीएससी और सभी राज्य लोक सेवा आयोग परीक्षाओं के लिए हिंदी में समाचार पत्रों का संकलन (04 मई 2020)

दैनिक समसामयिकी और प्रिलिम्स बूस्टर


(दैनिक समसामयिकी और प्रिलिम्स बूस्टर) यूपीएससी और सभी राज्य लोक सेवा आयोग परीक्षाओं के लिए हिंदी में समाचार पत्रों का संकलन (04 मई 2020)


:: राष्ट्रीय समाचार ::

नेशनल लैंड मैनेजमेंट कॉरपोरेशन (NLMC)

चर्चा में क्यों?

  • औद्योगिक विकास में सबसे बड़ी बाधा जमीन को लेकर आती है। नेशनल इन्फ्रास्ट्रक्चर पाइपलाइन की टास्क फोर्स कमेटी ने इसे दूर करने के लिए सरकार को नेशनल लैंड मैनेजमेंट कॉरपोरेशन (एनएलएमसी) बनाने का प्रस्ताव दिया है। इस कॉरपोरेशन के गठन से सरकार को वित्तीय लाभ होने के साथ औद्योगिक विकास के लिए आसानी से जमीन भी मिल सकेगी।

नेशनल लैंड मैनेजमेंट कॉरपोरेशन (एनएलएमसी) क्या है?

  • प्रस्ताव के मुताबिक एनएलएमसी सरकारी संपदा के प्रबंधन का काम करेगी जो केंद्र सरकार और सार्वजनिक कंपनियों की जमीन का ब्योरा रखेगी। जमीन के बदले सरकार को वित्तीय लाभ दिलाने का काम भी एनएलएमसी का होगा। अभी केंद्र सरकार के साथ रेलवे, रक्षा जैसे विभागों की जमीन की देखरेख और उसके व्यावसायिक विकास के लिए अलग से कोई विभाग या संस्था नहीं है। कई विभागों को उनकी खाली जमीन की पूरी जानकारी तक नहीं है। उनकी जमीन का अतिक्रमण भी कर लिया गया है।

क्यों आवश्यकता है एवं कैसे कार्य करेगा

  • टास्क फोर्स कमेटी के मुताबिक अब सरकार के सभी विभागों के साथ सरकारी कंपनियों की खाली और इस्तेमाल हो रही जमीन की देखरेख के लिए अलग से संस्था बनाने की जरूरत है। इसका फायदा यह होगा कि सरकार की सभी जमीन का लेखा-जोखा रहेगा और उनका व्यावसायिक इस्तेमाल हो सकेगा। इन्फ्रास्ट्रक्चर विकास में उसके इस्तेमाल के साथ जरूरत पड़ने पर उससे वित्तीय इंतजाम भी किए जा सकेंगे जिसे सरकारी परियोजना या सार्वजनिक कंपनियों के विकास में लगाया जा सकेगा।
  • प्रस्ताव के मुताबिक इस काम के लिए सबसे पहले सरप्लस लैंड (अतिरिक्त जमीन) की पहचान करनी पड़ेगी। सरप्लस लैंड वैसी भूमि है जो खाली पड़ी है और भविष्य में भी जिसके इस्तेमाल के लिए कोई योजना नहीं बनाई गई है। एक बार सरप्लस लैंड की पहचान हो जाने पर बाजार व अन्य सरकारी एजेंसियां इसकी मांग कर सकती है। इससे सरकार को वित्तीय फायदा होगा।
  • प्रस्ताव के मुताबिक एनएलएमसी स्पेशल परपस व्हीकल (एसपीवी) के माध्यम से सरकार की जमीन को लीज पर मुहैया करा सकती है या फिर उसकी बिक्री के विकल्प पर भी विचार कर सकती है। इस एसपीवी में विभिन्न मंत्रलयों से संबंधित पेशेवर शामिल किए जा सकते हैं।
  • वित्त और रियल एस्टेट क्षेत्र के स्वतंत्र निदेशकों के साथ एक प्रोफेशनल सीईओ की नियुक्ति की जा सकती है। एसपीवी के माध्यम से ही जमीन की नीलामी और उसके वित्तीय पोषण का काम किया जाएगा।

शाहपुरकंडी परियोजना

चर्चा में क्यों?

  • पठानकोट जिले के शाहपुरकंडी क्षेत्र में बैराज निर्माण तेजगति से आगे तरफ बढ़ रहा है। लाकडाउन में काम बंद हो गया था और 30 अप्रैल को दोबारा इसे शुरू किया गया है। पंजाब एवं केंद्र सरकार की इस साझा परियोजना को पूरा करने का लक्ष्य मई 2022 निर्धारित किया गया है। इस बांध के सपने को साकार करने में सरकारी तंत्र ने पूरी ताकत झोंक दी है। रावी दरिया पर बनने वाले इस बैराज का विवादों से नाता रहा है। केंद्र एवं राज्य सरकारों ने बांध को बनाने में रुचि तो दिखाई, लेकिन इसमें कोई न कोई अड़ंगा लगता रहा। कभी होने वाले खर्च तो कभी जमीन को लेकर और कभी जल व बिजली के बंटवारे सहित अन्‍य बिंदुओं पर।
  • यही कारण है कि ढाई दशक पहले शुरू हुई इस परियोजना का कार्य अभी तक पूरा नहीं हो सकी है। शाहपुर कंडी परियोजना पर 2785 करोड़ की राशि व्यय होने का आंकलन है। बांध से 35 हजार हेक्टेयर भूमि क्षेत्र में सिंचाई की सुविधा मिलेगी।

पृष्ठभूमि

  • इस परियोजना के बारे में प्रस्‍ताव 41 वर्ष पूर्व 1979 में किया गया था। पंजाब सरकार ने जिला कठुआ के साथ लगती थीन सीमा पर रावी दरिया में रणजीत सागर झील को इसमें शामिल करने का प्रस्‍ताव दिया था। इसके बदले में जम्मू-कश्मीर को 1150 क्यूसिक पानी व परियोजना में उत्पन्न होने वाली बिजली का 20 फीसद देने पर समझौता किया गया। जिस भूमि पर रणजीत सागर बांध का निर्माण होना था, वहां की 65 प्रतिशत भूमि जम्मू-कश्मीर की थी। पंजाब ने इसके बदले में जम्मू-कश्मीर को शाहपुर कंडी बैराज के निर्माण के बाद 1150 क्यूसिक पानी देने के लिए लिखित समझौता किया।
  • शाहपुरकंडी में रणजीत सागर बांध परियोजना पहले से ही कार्यान्वित है। लेकिन, इस परियोजना से पानी छोड़ने पर करीब छह हजार क्यूसिक पानी पाकिस्तान चला जाता है। बांध से एक समय 24 हजार क्यूसिक पानी छोड़ने पर नहर 18 हजार पानी ही संभाल पाती है। इसका सीधा लाभ पड़ोसी मुल्क को मिलता है। इस पानी का समुचित प्रयोग करने के लिए शाहपुर कंडी बैराज का निर्माण किया जा रहा है।

क्या होंगे लाभ?

  • बांध के बनने से पंजाब के साथ ही जम्मू -कश्मीर को भी लाभ होगा। बांध से 206 मेगावाट बिजली तैयार होगी। जबकि पंजाब की 5000 हेक्टेयर एवं जेएंडके की 32172 हेक्टेयर भूमि भी सिंचित होगी। इसके साथ ही पर्यटन विकास की संभावनाएं भी बढ़ेंगी। रणजीत सागर बांध परियोजना के मुख्य अभियंता एसके सलूजा का कहना है कि कोराना महामारी के चलते बांध निर्माण कार्य कुछ समय के लिए बंद रहा, लेकिन अब सरकार के निर्देश पर इसे चालू करवा दिया गया है। तय समयावधि में बैराज का निर्माण कार्य पूरा करने को हम सभी प्रतिबद्ध हैं।

महत्वपूर्ण तथ्य

  • इस परियोजना के जरिए पाकिस्तान जाने वाले रावी नदी के पानी को नियंत्रित किया जा सकेगा।
  • अभी पाकिस्तान की तरफ पानी चला रहा है, लेकिन डैम निर्माण के बाद पाक की तरफ पानी का बहाव कम हो जाएगा।
  • डैम में 206 मेगावाट के छोटे पावर प्लांट लगने हैं। इससे मिलने वाली बिजली से उद्योगों व किसानों को फायदा होगा।
  • डैम बनने से सालाना 852.73 करोड़ रुपये का सिंचाई और बिजली का लाभ होगा।
  • डैम के पानी से पंजाब व जम्मू-कश्मीर के खेत लहलहाएंगे। किसानों की सिंचाई जरूरतें पूरी होंगी।
  • पंजाब-हरियाणा के लाखों किसानों की किस्मत बदलेगी। कंडी क्षेत्र में हरियाली होगी।

गवर्नमेंट ई-मार्केटप्लेस (जीईएम) पोर्टल पर “द सरस कलेक्शन” का शुभारंभ

  • केंद्रीय ग्रामीण विकास और पंचायती राज तथा कृषि और किसान कल्याण मंत्री, श्री नरेंद्र सिंह तोमर ने, आज नई दिल्ली में सरकारी ई-मार्केटप्लेस (जीईएम) पोर्टल पर "द सरस कलेक्शन" का शुभारंभ किया। जेम और दीनदयालअनत्योदय योजना-राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (डीएवाई-एनआरएलएम), ग्रामीण विकास मंत्रालय की एक अनूठी पहल, सरस संग्रह, ग्रामीण स्वयं सहायता समूहों (एसएचजी) द्वारा बनाए गए दैनिक उपयोग वाले उत्पादों को प्रदर्शित करता है और इसका उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में एसएचजी को केंद्र और राज्य सरकार के खरीदारों तक पहुंचने के लिए बाजार उपलब्ध कराना है।
  • इस पहल के तहत, एसएचजी विक्रेता अपने उत्पादों को 5 उत्पाद श्रेणियों, अर्थात (i) हस्तशिल्प, (ii) हथकरघा और वस्त्र, (iii) कार्यालयों में इस्तेमाला होने वाले सामान, (iv) किराना और पेंट्री, और (v) व्यक्तिगत देखभाल और साफ सफाई की श्रेणी में सूचीबद्ध कर सकेंगे। पहले चरण में, 11 राज्यों के 913 एसएचजी पहले से ही विक्रेताओं के रूप में पंजीकृत हैं और 442 उत्पादों को पोर्टल पर अपलोड किया जा चुका है। थोड़े समय में देशभर में बड़ी संख्या में एसएचजी को पोर्टल पर पंजीकृत करने के लिए जीईएम ने एनआरएलएम डेटाबेस के साथ एपीआई आधारित एकीकरण तंत्र विकसित किया है।

क्या होंगें लाभ एवं कैसे करेगी कार्य?

  • जीईएम राष्ट्रीय, राज्य, जिला और ब्लॉक स्तर पर पदाधिकारियों के लिए डैशबोर्ड प्रदान करेगा, जो उन्हें स्वयं सहायता समूहों द्वारा अपलोड किए गए उत्पादों की संख्या, और प्राप्त आदेशों की पूर्ति और मात्रा के बारे में वास्तविक समय की जानकारी प्रदान करेगा। पोर्टल पर एसएचजी उत्पादों की उपलब्धता के बारे में सरकारी खरीदारों को सिस्टम जनित संदेश / अलर्ट के जरिए जानकारी दी जाएगी। इच्छुक खरीदार इसके माध्यम से अपनी पसंद के उत्पादों को खोज, देख और खरीद सकेंगे।
  • इस पहल के तहत एसएचजी को शामिल करने का कार्य पहले बिहार, छत्तीसगढ़, झारखंड, कर्नाटक, केरल, हिमाचल प्रदेश, महाराष्ट्र, ओडिशा, राजस्थान, उत्तर प्रदेश एवं पश्चिम बंगाल के राज्यों में किया गया है। इसका कवरेज सभी राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों की बड़ी संख्या में एसएचजी को सक्षम बनाने के लिए तेजी से बढ़ाया जाएगा जिससे कि वे सरकारी क्रेताओं को अपना उत्पाद बेच सकें।
  • अपने उत्पादों को अपलोड करने में एसएचजी की आरंभिक सहायता करने एवं सुगम बनाने के लिए राज्य एवं राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशनों के साथ जीईएम उत्पाद कैटेलाग प्रबंधन, आर्डर पूरा करने एवं बोली की भागीदारी में विक्रेताओं की सहायता कर रही है। जीईएम एसएचजी के क्षमता निर्माण एवं प्रशिक्षण आवश्यकताओं पर ध्यान देने के लिए तथा आर्डर पैकेजिंग, कैटेलाग प्रबंधन एवं लॉजिस्टिक्स के लिए आवश्यक क्षमताओं के निर्माण के लिए राज्य पदाधिकारियों से भी गठबंधन करेगी।
  • एनआरएलएम एवं एसआरएलएम से इनपुट एवं सहायता के साथ, जीईएम एसएचजी एवं एसआरएलएम कर्मचारियों की यूजर विशिष्ट आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए मातृ भाषा कंटेंट में ऑनलाइन लर्निंग रिसोर्सेज को भी डेवलप करेगी। इसके अतिरिक्त, जीईएम राज्य आजीविका मिशनों में एसएचजी एवं पदाधिकारियों के लिए आनलाइन वेबिनारों का संचालन करेगी और निर्बाधित अध्ययन अनुभव के लिए वीडियो, ई-बुक, मैनुअल एवं अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्नों के भंडार का भी विकास करेगी।
  • एसएचजी को सरकारी क्रेताओं तक सीधी पहुंच उपलब्ध कराने के द्वारा सरस कलेक्शन आपूर्ति श्रृंखला में बिचैलियों को खत्म कर देगा और इस प्रकार एसएचजी के लिए बेहतर मूल्य सुनिश्चित करेगा तथा स्थानीय स्तर पर रोजगार अवसरों को बढ़ावा देगा। यह अभी केवल आरंभ है और जीईएम अपनी विकास गाथा में एसएचजी को साझीदार बनाने के इस अवसर से प्रसन्न है।

क्या है डीएवाई-एनआरएलएम?

  • डीएवाई-एनआरएलएम का लक्ष्य कुशल मजदूरी रोजगार अवसरों का सृजन करते हुए विविधीकृत और लाभदायक स्व-रोजगार के संवर्धन के जरिये गरीबी को कम करना है। यह स्कीम सामाजिक पूंजी के निर्माण में सहायता करती है और गरीबी में कमी लाने के लिए वित्तीय संपर्क सुनिश्चित करती है तथा ग्रामीण निर्धन महिलाओं का जीवन स्तर बढ़ाती है। इसकी डिजिटल वित, ग्रामीण उत्पादों के आसपास मूल्य श्रंखला के सृजन और बाजार पहुंच में सुधार, ग्रामीण उद्यम और सामुदायिक संस्थानों के सुदृढ़ीकरण जैसे वित्तीय समावेश के वैकल्पिक माध्यमों के लिए नवोन्मेषणों को लेकर महत्वाकांक्षी योजनाएं हैं।

क्या है जीईएम?

  • गवर्नमेंट ई मार्केटप्लेस (जीईएम) एक 100 प्रतिशत सरकारी स्वामित्व वाली सेक्शन 8 कंपनी है जिसकी स्थापना केंद्रीय एवं राज्य सरकार संगठनों के लिए आवश्यक वस्तुओं एवं सेवाओं की खरीद के लिए एक राष्ट्रीय सार्वजनिक खरीद पोर्टल के रूप में की गई है। जीईएम सभी केंद्रीय एवं राज्य सरकार मंत्रालयों, विभागों, सार्वजनिक क्षेत्र उपक्रमों (पीएसई), स्थानीय निकायों एवं स्वायत्तशासी संगठनों के लिए वस्तुओं एवं सेवाओं की खरीद का आनलाइन एवं अंतिम रूप से समाधान उपलब्ध कराती है। यह प्लेटफार्म खरीद में मानवीय अंतःक्षेपों को घटाता है और पारदर्शी, लागत बचतकारी, समावेशिता एवं चेहरारहित मानकीकृत सार्वजनिक खरीद की प्रभावोत्पादकता बढ़ाने में सक्षम बनाता है।

:: अंतर्राष्ट्रीय समाचार ::

गिलगिट बाल्टिस्तान

चर्चा में क्यों?

  • आने वाले दिनों में गिलगिट बाल्टिस्तान को लेकर भारत और पाकिस्तान के रिश्तों में और तनाव घुलने के आसार दिखते नजर आ रहे हैं। भारत ने गिलगिट बाल्टिस्तान (Gilgit Baltistan) इलाके में चुनाव कराने के पाकिस्तान सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर बेहद सख्त आपत्ति जताते हुए पाकिस्तान सरकार को डेमार्श (Demarche) जारी किया है। सामान्य भाषा में कहें तो भारत ने पाकिस्तान से अपनी गहरी नाराजगी जाहिर की है। भारत ने पाकिस्तान के सामने दो टूक में स्पष्ट किया है कि गिलगिट-बाल्टिस्तान का क्षेत्र भारत का वैध व अभिन्न हिस्सा है और पाकिस्तान की न्यायिक व्यवस्था का उसको लेकर फैसला करने का कोई अधिकार नहीं है। भारत ने पाकिस्तान को इसके साथ ही इस इलाके को खाली करने को भी कहा है।

पृष्ठभूमि

  • पाकिस्तान के सुप्रीम कोर्ट ने वहां की केंद्र सरकार को यह आदेश दिया है कि वह गिलगिट बाल्टिस्तान में आम चुनाव प्रक्रिया को आगे बढ़ा सकती है और नई सरकार के गठन तक वहां एक अस्थाई सरकार का गठन भी कर सकती है। इस क्षेत्र को पाकिस्तान के पूर्ण राज्य के तौर पर स्थापित करने की कोशिशों को इससे मदद मिलेगा। वर्ष 2018 में ही पाकिस्तान सरकार ने इस बारे में आदेश जारी किया था।

क्या है विशेषज्ञों की राय?

  • भारतीय विदेश मंत्रालय की यह प्रतिक्रिया तब आई है जब जम्मू व कश्मीर के नियंत्रण रेखा पर दोनो देशों के बीच लगातार भीषण गोलीबारी हो रही है। भारतीय जानकार मान रहे हैं कि कोविड-19 से बुरी तरफ से प्रभावित होने के बावजूद जिस तरह से कश्मीर में आतंकी गतिविधियों को भड़काने में लगा है उसके तार गिलगिट बाल्टिस्तान में चुनाव कराने उसकी साजिश से भी जुड़ा है। पाकिस्तान की साजिश यह है कि दुनिया का ध्यान कश्मीर नियंत्रण रेखा पर रही गोलीबारी और आतंकी मुठभेड़ों पर भटका कर गिलगिट बाल्टिस्तान के इलाके में अपनी राजनीतिक साजिश को अंजाम दे। यही वजह है कि सीमा पार से हाल के हफ्तों में लगातार अकारण ही गोलीबारी हो रही है। वैसे भारत की जवाबी कार्रवाई में पाकिस्तान को भी भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है।

क्या आपत्ति जतायी भारत ने?

  • भारतीय विदेश मंत्रालय की तरफ से बताया गया है कि नई दिल्ली स्थित पाकिस्तान उच्चायोग के वरिष्ठ अधिकारी को बुला कर उससे भारतीय पक्ष की नाराजगी से अवगत कराया गया। उन्हें साफ तौर पर बताया गया कि जम्मू कश्मीर का पूरा संभाग, गिलगिट बाल्टिस्तान समेत पूरा लद्दाख का क्षेत्र पूरी तरह से भारत के वैध व अपरिवर्तनीय कदम है। पाकिस्तान ने इसे गैर कानूनी व ताकत के जरिए कब्जा किया है जिस पर वहां की न्यायिक व्यवस्था का कोई हक नहीं है। पाकिस्तान ने अवैध तरीके से भारतीय राज्य जम्मू व कश्मीर के भी एक बड़े हिस्से को कब्जा में किया है। इसे इन सभी इलाकों को जल्द से जल्द खाली करना चाहिए। इस तरह के न्यायिक फैसलों से पाकिस्तान सरकार अपने अवैध कब्जे को नहीं छिपा सकती है।
  • भारत ने यह भी कहा है कि पिछले सात दशकों से इस इलाके के लोगों का पाकिस्तान दमन कर रहा है और उनकी आजादी की मांग को कुचल रहा है। अंत में भारत ने वर्ष 1994 में भारतीय संसद में कश्मीर को लेकर स्वीकृत प्रस्ताव की भी दिलाई है जिसमें समूचे जम्मू व कश्मीर को भारत का अभिन्न हिस्सा बताया गया था।

:: भारतीय अर्थव्यवस्था ::

अमेरिकी कंपनी पियर-1

चर्चा में क्यों?

  • अमेरिका की 60 वर्ष पुरानी रिटेल कंपनी पियर-1 के 1,100 स्टोर बंद कर दिवालिया प्रक्रिया में जाने से भारतीय हस्तशिल्प उद्योग को तगड़ा झटका लगा है। नोएडा समेत देशभर के दर्जनों निर्यातकों के सामने आर्थिक संकट खड़ा हो गया है। हैरानी की बात यह रही कि कंपनी ने इस वर्ष फरवरी मध्य में ही दिवालिया प्रक्रिया के आवेदन की कागजी कार्रवाई पूरी कर ली थी। लेकिन उसने दो माह तक भारतीय निर्यातकों को अंधेरे में रखा। जब कंपनी के दिवालिया प्रक्रिया में जाने की जानकारी निर्यातकों को हुई, तब उन्होंने कंपनी अधिकारियों से संपर्क साधा, फिर भी कंपनी एक माह तक निर्यातकों के समक्ष टालमटोल करती रही।
  • इसे देखते हुए ईपीसीएच ने स्पष्ट किया है कि अब वैश्विक कारोबार करने के लिए संबंधित कंपनियों की प्रत्येक गतिविधि पर विशेष नजर रखनी होगी। साथ ही अपने माल को सुरक्षित रखने के लिए ईसीजीसी से ऑर्डर का बीमा कराना अनिवार्य होगा।
  • प्रकाश में आया है कि निर्यातकों ने कंपनी के ऑर्डर को बीमित ही नहीं कराया है। संभावित नुकसान से बचने के लिए एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल फॉर हैंडीक्राफ्ट (ईपीसीएच) ने एक्सपोर्ट क्रेडिट गारंटी कॉरपोरेशन (ईसीजीसी) से संपर्क कर तत्काल बीमित राशि निर्यातकों को जारी करने का आग्रह किया है। ईसीजीसी के दिल्ली प्रमुख सौरभ श्रीवास्तव ने निर्यातकों को भरोसा दिया है कि बीमित राशि का 90 दिन के बजाय अब 30 दिन में भुगतान कर दिया जाएगा।

क्या है एक्सपोर्ट क्रेडिट गारंटी कॉरपोरेशन(EPCH)?

  • हस्त-शिल्प निर्यात संवर्धन परिषद एक गैर लाभकारी संगठन है, जो हस्तशिल्प के निर्यात को बढ़ावा देने, समर्थन, संरक्षण, रख-रखाव का कार्य करता है।

क्या है एक्सपोर्ट क्रेडिट गारंटी कॉरपोरेशन-ECGC?

  • भारत से किए जाने वाले निर्यात को बीमा सुरक्षा उपलब्ध करवाने वाली शीर्ष भारतीय संस्था एक्सपोर्ट क्रेडिट गारंटी कॉरपोरेशन-ECGC है एवं इसकी स्थापना1957 में की गई थी।

सिल्वर लेक पार्टनर्स ने रिलायंस जियो में किया निवेश

  • अमेरिका की निजी इक्विटी दिग्गज कंपनी सिल्वर लेक पार्टनर्स ने रिलायंस के जियो प्लेटफॉर्म में एक फीसदी की हिस्सेदारी 5,655.75 करोड़ रुपये में खरीदी है। यह डील ऐसे समय पर हुई जब दो हफ्ते से भी कम समय पहले फेसबुक ने जियो में 9.99 फीसदी की हिस्सेदारी खरीदी थी। RIL की पूर्ण स्वामित्व वाली कंपनी Reliance Jio Infocommलिमिटेड 388 मिलियन से अधिक ग्राहकों को कनेक्टिविटी प्लेटफॉर्म प्रदान करता है।
  • हाल ही में मुकेश अंबानी की रिलायंस इंडस्ट्रीज की कंपनी रिलायंस जियो में अमेरिकी सोशल मीडिया कंपनी फेसबुक ने निवेश किया था। फेसबुक ने रिलायंस जियो की 9.99 फीसदी हिस्से को 5.7 बिलियन यानि 43,574 करोड़ रुपये में खरीदने के लिए समझौता किया था। लॉकडाउन के दौरान इसे पूरी दुनिया में होने वाली सबसे बड़ी डील के तौर पर देखा जा रहा था।

लॉकडाउन का साइड इफेक्ट: मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में सबसे बड़ी गिरावट

  • पूरे देश में लॉकडाउन के कारण गत अप्रैल में देश के विनिर्माण क्षेत्र (Manufacturing Sector) में अब तक की सबसे बड़ी गिरावट देखी गई और आईएचएस मार्किट द्वारा जारी खरीद प्रबंधक सूचकांक (पीएमआई) लुढ़ककर 27.4 रह गया। आईएचएस मार्किट माह दर माह आधार पर विनिर्माण और सेवा क्षेत्र के आंकड़े जारी करता है। सूचकांक का 50 से ऊपर रहना वृद्धि और इससे नीचे रहना गिरावट को दर्शाता है, जबकि 50 पर होना स्थिरता दिखाता है। सूचकांक 50 से जितना अधिक नीचे गिरता है वह उत्पादन में उतनी बड़ी गिरावट को दर्शाता है। अप्रैल महीने की गिरावट कितनी बड़ी है इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि 2009 की वैश्विक आर्थिक मंदी के दौरान भी देश का विनिर्माण पीएमआई करीब 44 तक ही लुढ़का था।

भारी संख्या में कर्मचारियों की छंटनी

  • एजेंसी की आज जारी रिपोर्ट में कहा गया है कि अप्रैल में भारतीय विनिर्माण उत्पादन में अभूतपूर्व गिरावट देखी गई। कोरोना वायरस 'कोविड-19' महामारी का संक्रमण रोकने के लिए लगाये गये राष्ट्रव्यापी लॉकडाउन के कारण कारोबार बंद रहने से ऐसा हुआ। बेदह कम मांग के माहौल में नये ऑर्डरों में रिकॉर्ड गिरावट रही और कंपनियों ने भारी संख्या में कर्मचारियों की छंटनी की।

उम्मीद की किरण

  • आईएचएस मार्किट के अर्थशास्त्री इलिअट केर ने रिपोर्ट पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि उत्पादन, नये ऑर्डर, मांग और रोजगार में गिरावट के बीच एक सकारात्मक पहलू यह है कि अगले एक साल के परिदृश्य को लेकर कारोबारियों की धारणा आशापूर्ण है, हालांकि आशावाद का स्तर ऐतिहासिक औसत से काफी कम है।

लॉकडाउन के बीच मांग में कमी

  • आंकड़ों के अनुसार, लॉकडाउन के बीच मांग में कमी से नये ऑर्डरों में भी भारी गिरावट रही। पिछले ढाई साल में पहली बार नये ऑर्डरों में कमी दर्ज की गई है। विदेशों से आने वाली मांग में 15 साल की सबसे बड़ी गिरावट रही। उल्लेखनीय है कि आईएचएस मार्किट 15 साल से ही दुनिया की अर्थव्यवस्थाओं के आंकड़े एकत्र कर रहा है। मांग में कमी के कारण कंपनियों ने जमकर कर्मचारियों की छंटनी की। छंटनी की रफ्तार भी 15 साल में सवार्िधक रही। साथ ही कच्चे माल की खरीद की रफ्तार में भी 15 साल की सबसे तेज गिरावट दर्ज की गई।

:: विज्ञान और प्रौद्योगिकी ::

अफ्रीकी स्वाइन फीवर/ फ्लू (ASF)

  • हाल ही में असम में अफ्रीकी स्वाइन फीवर का बड़ी तेजी से प्रसार हुआ है एवं इस वायरस की चपेट में आने से करीब 2,500 सुअरों की मौत हो चुकी है। भेजे गए सैंपल में भोपाल के राष्ट्रीय उच्च सुरक्षा पशुरोग संस्थान (NIHSAD) ने सूअरों में अफ्रीकी स्वाइन फीवर(ASF) की पुष्टि की है। असम सरकार ने इस वायरस के प्रसार के रोकथाम हेतु अफ्रीकन स्वाइन फीवर से संक्रमित सुअरों की ट्रेसिंग करने में जुट गई है जिससे संक्रमित सूअरों को संक्रमण फैलाने फौरन मारा जा सके। ऐसा माना जा रहा है कि इस वायरस का प्रसार चीन के जियांग प्रांत शुरू होकर अरुणाचल प्रदेश होते हुए असम में पहुंचा है।

क्या है अफ्रीकी स्वाइन फीवर(ASF)?

  • अफ्रीकी स्वाइन फीवर घरेलू और जंगली पशुओं में होने वाला एक अत्यधिक संक्रामक रक्तस्रावी वायरल रोग है। यह एसफेरविरिडे(Asfarviridae) परिवार के एक बड़े डीएनए वाले वायरस के कारण होता है। इस रोग में पशु की उत्पादकता ना केवल प्रभावित होती है बल्कि इससे पशुधन की मृत्यु भी हो जाती है।इस बीमारी के लक्षण में शामिल है,सूअर को तेज बुखार, लड़खड़ा कर चलना, सफेद सूअर के शरीर पर नीले चकते होना, सुस्ती, खाना-पीना छोड़ना इत्यादि। इस बीमारी में सर्वाधिक प्रभावित फार्म वाले सूअर होते हैं क्योंकि जंगली सूअर या देसी सूअर की प्रतिरोधक क्षमता काफी उच्च होती है। ।
  • अफ्रीकी स्वाइन फ्लू एएसएफ विश्व पशु स्वास्थ्य संगठन (OIE) के पशु स्वास्थ्य कोड में सूचीबद्ध एक ऐसी बीमारी है जिसके संदर्भ में तुरंत OIE को सूचना देना आवश्यक है।पशुओं में यह बीमारी संक्रमित घरेलू या जंगली सूअरों के संक्रमण से सामने आता है। इसके साथ ही यह बीमारी अप्रत्यक्ष संपर्क जैसे खाद्य पदार्थ, अवशिष्ट या कचरे इत्यादि से भी फैलता है।इसके अलावा ये वायरस सुअर के मांस, सलाइवा, खून और टिशू से फैलता है। इस बीमारी में संक्रमित पशुओं के हताहत होने की दर 100% है।
  • यद्यपि अफ्रीकन स्वाइन फीवर और सामान्य स्वाइन फीवर के लक्षण समान होते हैं लेकिन यह स्वाइन फीवर से अलग है। अफ्रीकन स्वाइन फीवर का प्रसार मनुष्य में नहीं होता।

क्या है इस रोग से बचाव के उपाय?

  • फिलहाल इस रोग का कोई भी टीका या इलाज उपलब्ध नहीं है। इस रोग के रोकथाम के लिए विभिन्न देशों के द्वारा स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार भिन्न भिन्न प्रकार की रणनीतियां अपनाई जाती हैं।
  • इसमें संक्रमित देशों से आने जाने वाले पशु आहार, पशुधन आयात, वाहनों इत्यादि पर रोक लगाई जाती है। इसके साथ ही संक्रमित सूअरों की ट्रेसिंग कर उन्हें मार दिया जाता है।रोग के प्रसार को रोकने के लिए पशुओं की गतिविधियों पर नियंत्रण लगाया जाता है। इसके साथ ही पशुधन के प्रयोग में आए जाने वाले अवशिष्ट, भोजन समेत कचरो का उचित तरीके से निस्तारण किया जाता है।

सैनिटाइजर का स्वदेशी फार्मूला तैयार

  • कोरोना वायरस मारने के लिए सैनिटाइजर का उपयोग किया जा रहा है। इसके ज्यादा इस्तेमाल से चमड़ी सूखने, कटने की शिकायतें आ रही हैं। वैज्ञानिक एवं औद्योगिक अनुसंधान परिषद (सीएसआइआर) के प्रगत पदार्थ व प्रक्रम अनुसंधान संस्थान (एम्प्री) ने इसकी काट निकाली है। एम्प्री का दावा है कि उन्होंने ऐसा सैनिटाइजर बनाया है, जो न सिर्फ वायरस को मारेगा बल्कि चमड़े के अच्छे बैक्टीरिया और नमी को खत्म नहीं होने देगा।
  • भोपाल स्थित एम्प्री के निदेशक प्रो.(डॉ.) अवनीश कुमार श्रीवास्तव और उनकी टीम ने ये सैनिटाइजर बनाया है। प्रो. श्रीवास्तव ने बताया कि डब्ल्यूएचओ के दिशा-निर्देशों के तहत बने इस सैनिटाइजर में विशेष पदार्थो और तकनीक का उपयोग किया गया है। इस सैनिटाइजर में एलोवेरा का उपयोग भी किया गया है, जिससे स्कीन ग्लो होगी। इसके साथ ही घर की अन्य वस्तुएं जैसे टीवी, फ्रीज सहित अन्य सामान सैनिटाइज करने में भी इसका उपयोग कर सकते हैं।
  • सैनिटाइजर बाजार में अभी मिल रहे सैनिटाइजर के मुकाबले काफी किफायती भी साबित होगा, बशर्ते कोई कंपनी इस पर ज्यादा मुनाफा न कमाए। बाजार में अभी अच्छा सैनिटाइजर 200 से 250 रुपये में 250 मिलीलीटर मिलता है। अनुमान है कि एम्प्री के बनाए सैनिटाइजर की लागत 250 से 300 रुपये प्रति लीटर आएगी।

क्या है पारम्परिक सैनिटाइजर के नुकसान?

  • सैनिटाइजर में एल्कोहल होता है। इसके उपयोग से स्किन सूखती है। ज्यादा इस्तेमाल से स्किन कटती है और एग्जिमा का रूप ले सकती है। इससे बचने के लिए रात में सोते समय नारियल तेल, गुलाब जल, ग्लीसरीन लगाकर सोएं। सैनिटाइजर को मानकों पर खरे उतरने के बाद ही लाना चाहिए।

नेचर बॉक्स स्मार्ट डस्टबिन

  • हमारे देश में कचरा निस्तारण की समुचित व्यवस्था नहीं के बराबर है। हर तरह के कचरे को एक ही डिब्बे में लोग फेंक देते हैं, जिससे हानिकारक गैसों का रिसाव कचरे वाले लैंडफिल से होने लगता है। दूसरी बड़ी समस्या यह है कि सड़क किनारे जो कूड़ेदान लगे होते हैं, वे खुले होते है। इसमें चूहे से लेकर चिड़ियां तक सभी घुसकर कूड़े को इधर-उधर कर देते हैं। अब आईआईटी कानपुर के वैज्ञानिकों ने नेचर बॉक्स नाम का ऐसा डस्टबिन या कूड़ादान बनाया है, जिसमें किसी चूहे या चिड़िया का घुसना मुश्किल हो जाएगा। इससे हानिकारक रसायन भी बाहर नहीं निकलेंगे।
  • आईआईटी-कानपुर के एक पूर्व छात्र ने आईआईटी के दो वरिष्ठ प्राध्यापकों के साथ मिलकर नई किस्म के कचरे का डिब्बा यानी 'नेचर बॉक्स स्मार्ट डस्टबिन सिस्टम विकसित किया है, जो कोविड-19 महामारी से बचाने में मददगार साबित हो सकता है।

क्या है विशेषता?

  • विशेष तौर पर डिजाइन किये गये इस कचरे के डिब्बे में जानवर, चिड़िया और चूहे मुंह नहीं मार सकेंगे। सुरक्षित और स्वच्छ तरीके से कचरे को छोड़ने के लिए डिब्बे का उपयोग इसका आवश्यक पहलू है।
  • पुराने तरह के कूड़े के डिब्बे खराब डिजाइऩ के हैं, जिससे संक्रमण फैलने का खतरा ज्यादा है, लेकिन इस बॉक्स को इस तरह तैयार किया गया है, जिससे कोरोना वायरस को 95 प्रतिशत तक कम किया जा सकता है। स्टील का ये डस्टबिन सुरक्षा स्तर को बढ़ाता है और अन्य उपयोगकर्ताओं और श्रमिकों में संक्रमण की संभावना भी कम करता है।
  • कूड़ेदान पर एक 'डैशबोर्ड है, जो बताता है कि पिछली बार इसे कब साफ किया गया था और कूड़ेदान का भार कितना है और कब इसे साफ करना है। इससे कूड़ेदान को समय पर साफ करने में मदद मिलती है। यह डस्टबिन हर जगह के लिए उपयोगी है, जहां कहीं भी कूड़े के डिब्बे की जरूरत होती है। हालांकि मौजूदा संकट को देखते हुए ये अस्पतालों, नगर निगम क्षेत्रों और कोविड-19 के जोखिम वाले क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित करके तैयार किया गया है।

:: पर्यावरण और पारिस्थितकी ::

सिंगल युज मास्क, दस्ताने और सैनिटाइजर की बोतलें बन रही समुद्री और वन्यजीवों के लिए खतरा

  • इन दिनों दुनियाभर में कोरोना वायरस के संक्रमण से लोग परेशान हैं। इससे बचने के लिए दुनियाभर में मास्क, दस्ताने और सैनिटाइजर इस्तेमाल किए जा रहे हैं। कई जगहों पर इनको एकबारगी इस्तेमाल किया जा रहा है उसके बाद उसे यहां-वहां फेंक दिया जा रहा है। देश के अलावा दुनिया के कई अन्य हिस्सों में भी इस तरह के मामले देखने को मिल रहे हैं।
  • लोग एकबारगी मास्क का इस्तेमाल करने के बाद उसे फेंक दे रहे हैं, उसका प्रॉपर तरीके से निस्तारण नहीं किया जा रहा है, इस वजह से वो बीमारियां फैलाने में योगदान दे रहे हैं। देश-दुनिया में प्लास्टिक के कचरे की समस्या पहले से ही देखी जा रही थी, अब ऐसे में ये मास्क और ग्लव्स दूसरी बड़ी समस्या बनते जा रहे हैं। डीडब्ल्यूए वेबसाइट पर भी इस तरह की खबर को प्रमुखता से कैरी किया गया है।
  • ग्रीस को देखें या फिर न्यूयॉर्क और लंदन की सड़कों को, प्लास्टिक के कचरे की समस्या हर जगह दिखेगी। हांगकांग से कुछ किलोमीटर की दूरी पर स्थित सोको द्वीप जैसी जगहों पर भी प्लास्टिक का कचरा पहुंच गया है, इन द्वीपों पर कोई इंसान नहीं रहता, उसके बाद भी यहां ऐसे कचरे देखने को मिल रहे हैं। सभी जगहों पर तमाम तरह की एनजीओ काम कर रही है।
  • सोको द्वीप पर काम करने वाले पर्यावरण संरक्षण समूह ओशेन्सएशिया के गैरी स्टोक्स बताते हैं कि उन्होंने द्वीद के किनारे तीन बार निरीक्षण किया, इस दौरान उनको द्वीप के किनारे 100 मास्क समुद्र के तट पर फैले मिले हैं। वो बताते हैं कि ऐसी सुनसान जगहों पर इतने सारे मास्क पहले कभी नहीं मिले थे। उन्हें अंदेशा है कि ये पास के हांगकांग या चीन से बहकर आए हैं। स्टोक्स को जब सैकड़ों की संख्या में मास्क बह कर आए दिखे थे, तब इन देशों में मास्क का चलन शुरु हुए 6-8 हफ्ते ही हुए थे।

जंगली जीव जंतुओं पर असर

  • इन दिनों सिंगल-यूज प्लास्टिक वाले मास्क, दस्ताने, सैनिटाइजर की बोतलें और पीपीई (पर्सनल प्रोटेक्टिव इक्विपमेंट) डॉक्टरों और मेडिकल स्टाफ के अलावा आम लोगों द्वारा भी बड़े स्तर पर इस्तेमाल की जा रही हैं। इन सभी का इस्तेमाल तो किया जा रहा है मगर इनके निस्तारण के लिए बेहतर व्यवस्था नहीं है। चूंकि इस्तेमाल के बाद इनका निपटारा सही तरीके से नहीं हो रहा है इसलिए पर्यावरण का ख्याल करने वालों की चिंता बढ़ गई है। उन्हें चिंता है कि इस तरह से हो रही बढ़ोतरी से प्लास्टिक प्रदूषण के खिलाफ प्रयासों को झटका लगेगा।
  • ग्रीस जैसी जगहों पर कचरे के निपटारे की व्यवस्था पहले से ही बहुत अच्छी नहीं है इसलिए अगर इन्हें कचरे के डिब्बे में भी डाला जाए तो भी यह प्रकृति में कहीं बिखरे हुए मिलेंगे। समुद्री जीवों की रिसर्चर और ग्रीस के आर्किपेलागोज इंस्टीट्यूट ऑफ मरीन कंजर्वेशन की रिसर्च निदेशक अनेस्तेसिया मिलिऊ कहती हैं कि अगर उन्हें सड़क पर ही फेंक दिया जाए तो बारिश के पानी के साथ दस्ताने और मास्क बहकर समुद्र में ही पहुंचेगे।
  • यदि हांगकांग की बात करें तो यहां शायद ही कहीं कचरा फैला दिखता है। स्टोक्स बताते हैं कि वहां से भी तमाम दूसरे तरीकों से मास्क समुद्र में पहुंच रहा है। वे बताते हैं कि कभी लोगों की जेब से गलती से गिरकर तो कभी कचरे के डिब्बे से उड़ कर भी मास्क पानी तक पहुंच जाते हैं। उनका कहना है कि हांगकांग के पानी में गुलाबी डॉल्फिन और हरे कछुए पाए जाते हैं लेकिन अगर पानी में इतनी देर तक प्लास्टिक रह जाए कि उस पर एल्गी और बैक्टीरिया उग जाए, तो वह कछुओं को भोजन जैसा महकने लगता है।

रीसाइकिल करने का इंतजाम नहीं

  • पीपीई आइटमों को अगर पानी या जीवों तक पहुंचने से बचा भी लिया जाए तो भी इनका सही तरीके से निपटारा आसान नहीं होता। जीरो वेस्ट यूरोप के कार्यकारी निदेशक जोआन मार्क साइमन कहते हैं कि यूरोप की रीसाइक्लिंग योजना में रीटेलर्स और निर्माताओं को प्लास्टिक पैकेजिंग के इकट्ठा करने और ट्रीट किए जाने का खर्च उठाना होता है।
  • साइमन बताते हैं कि चूंकि दस्ताने पैकेजिंग की श्रेणी में नहीं आते, इसलिए उन्हें घरेलू कचरे वाले कूड़ेदान में नहीं डाल सकते। यहां तक कि लेटेक्स रबर से बने दस्ताने बहुत इको फ्रेंडली नहीं होते, कइयों को बनाने में ऐसे केमिकल इस्तेमाल होते हैं, जो गलने पर पर्यावरण को नुकसान पहुंचाते हैं।

क्या हैं उपाय?

  • WHO(विश्व स्वास्थ्य संगठन) का कहना है कि नियमित तौर पर हाथ धोते रहने से दस्ताने पहनने के मुकाबले ज्यादा सुरक्षा मिलती है। इसी तरह अमेरिकी स्वास्थ्य एजेंसी बता चुकी है कि आम लोगों को बार-बार इस्तेमाल हो सकने वाले कपड़े के मास्क कोविड-19 के खिलाफ पर्याप्त सुरक्षा प्रदान कर सकते हैं।
  • वहीं हेल्थ प्रोफेशनल्स के काम आने वाले पीपीई के सस्टेनेबल विकल्प लाने पर काम चल रहा है। अमेरिकी कार निर्माता फोर्ड बार बार इस्तेमाल किए जाने वाले गाउन बना रही है जिसे 50 बार तक इस्तेमाल किया जा सकेगा। नेब्रास्का यूनिवर्सिटी टेस्ट कर रही है कि क्या अल्ट्रावायलेट किरणों से ट्रीट करने पर मेडिकल मास्क को पूरी तरह साफ कर फिर से काम में लाया जा सकता है।

:: विविध ::

पाकिस्‍तानी एयर फोर्स में शामिल हुआ पहला हिंदू पायलट

  • पाकिस्‍तान के इतिहास में पहली बार एक हिंदू को पाकिस्‍तान एयर फोर्स में पायलट चुना गया है। इस युवक का नाम है राहुल देव और उन्‍हें पाकिस्‍तान एयर फोर्स में जनरल ड्यूटी पायलट ऑफिसर के रूप में चुना गया है। राहुल देव थारपारकर के रहने वाले हैं। थारपारकर पाकिस्‍तान के सिंध प्रांत का सबसे बड़ा जिला है। थारपारकर जिले में बड़ी संख्‍या में हिंदू समुदाय के लोग रहते हैं।

:: प्रिलिम्स बूस्टर ::

  • चर्चा में रहे वायरल रोग अफ्रीकी स्वाइन फ्लू की शुरुआत कहाँ से हुई इसके संक्रमण से कौन से जीव/ जंतु प्रभावित होते हैं? (जियांग प्रांत- चीन, जंगली और पालतू सूअर)
  • चर्चा में रहे राष्ट्रीय उच्च सुरक्षा पशुरोग संस्थान (NIHSAD) कहाँ स्थित है? (भोपाल मध्य प्रदेश)
  • भारत से किए जाने वाले निर्यात को बीमा सुरक्षा उपलब्ध करवाने वाली शीर्ष भारतीय संस्था कौन है एवं इसकी स्थापना कब की गई थी? (एक्सपोर्ट क्रेडिट गारंटी कॉरपोरेशन-ECGC, 1957)
  • औद्योगिक विकास में भूमि की बाधा को दूर करने हेतु नेशनल इन्फ्रास्ट्रक्चर पाइपलाइन की टास्क फोर्स कमेटी ने किस संस्था के गठन का प्रस्ताव दिया है? (नेशनल लैंड मैनेजमेंट कॉरपोरेशन-NLMC)
  • शाहपुर कंडी परियाेजना किस नदी से संबंधित है एवं इस परियोजना का निर्माण किसके द्वारा किया जा रहा है? (रावी नदी, केंद्र और पंजाब राज्य की संयुक्त परियोजना)
  • ई-मार्केटप्लेस (जीईएम) पर चर्चा में रही "द सरस कलेक्शन" किससे संबंधित है? (ग्रामीण स्वयं सहायता समूहों द्वारा निर्मित दैनिक उपयोग वाले उत्पादों से)
  • धूमकेतु एटलस से चर्चा में रहे धूमकेतु सौरमंडल में किसकी परिक्रमा करते हैं एवं इनके निर्माण में किन तत्वों की भूमिका होती है? (सूर्य की परिक्रमा; चट्टान, धूल और जमी हुई गैसों से निर्मित)
  • हाल ही में चर्चा में रहे आर्यभट्ट प्रेक्षण विज्ञान शोध संस्थान (एरीज) कहाँ स्थित है? (नैनीताल, उत्तराखंड)
  • हाल ही में किस उच्च न्यायालय ने किस अनुच्छेद के तहत किसी व्यक्ति के नाम को उसके अभिव्यक्ति के अंतर्गत एक मौलिक अधिकार माना है? (केरल उच्च न्यायालय, अनुच्छेद19)
  • भारत सरकार के द्वारा पाकिस्तान के सुप्रीम कोर्ट द्वारा किन क्षेत्रों में चुनाव कराने कराए जाने वाले आदेश पर डेमार्श (Demarche) जारी किया गया है? (गिलगित-बालटिस्तान)
  • पाकिस्तान एयर फोर्स में पायलट के रूप में चयनित होने वाले प्रथम हिंदू कौन है? (राहुल देव)
  • फेसबुक के उपरांत रिलायंस जियो प्लेटफार्म पर किस विदेशी कंपनी ने 1% की हिस्सेदारी खरीदी है? (सिल्वर लेक पार्टनर्स,अमेरिका)

स्रोत साभार: Dainik Jagran (Rashtriya Sanskaran), Dainik Bhaskar (Rashtriya Sanskaran), Rashtriya Sahara (Rashtriya Sanskaran) Hindustan Dainik (Delhi), Nai Duniya, Hindustan Times, The Hindu, BBC Portal, The Economic Times (Hindi & English), PTI, PIB

<< मुख्य पृष्ठ पर वापस जाने के लिये यहां क्लिक करें