(दैनिक समसामयिकी और प्रिलिम्स बूस्टर) यूपीएससी और सभी राज्य लोक सेवा आयोग परीक्षाओं के लिए हिंदी में समाचार पत्रों का संकलन (04 अगस्त 2019)

दैनिक समसामयिकी और प्रिलिम्स बूस्टर


(दैनिक समसामयिकी और प्रिलिम्स बूस्टर) यूपीएससी और सभी राज्य लोक सेवा आयोग परीक्षाओं के लिए हिंदी में समाचार पत्रों का संकलन (04 अगस्त 2019)


:: राष्ट्रीय समाचार ::

राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर (एनपीआर)

  • सरकार ने राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (एनआरसी) को देशभर में लागू करने से पहले उसका आधार तैयार करने के लिए सितंबर, 2020 तक राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर (एनपीआर) तैयार करने का फैसला किया है। भारत के प्रत्येक निवासी को एनपीआर में पंजीकरण कराना अनिवार्य होगा। इसका मकसद देश में रहने वाले हर सामान्य निवासी की पहचान का व्यापक डाटाबेस तैयार करना है। इस डाटाबेस में जनसांख्यिकी के साथ-साथ बायोमेट्रिक जानकारियां भी होंगी।
  • एक अधिकारी ने बताया कि एनपीआर देश के सामान्य निवासियों की एक सूची होगी। एक बार जब एनपीआर तैयार होकर प्रकाशित हो जाएगा तो संभावना है कि यह असम एनआरसी के देशव्यापी संस्करण 'नेशनल रजिस्टर ऑफ इंडियन सिटिजंस' (एनआरआइसी) को तैयार करने का आधार बनेगा।

एनपीआर

  • एनपीआर के लिए एक सामान्य निवासी उसे माना जाएगा जो उस स्थानीय इलाके में पिछले छह महीने या उससे अधिक समय से रह रहा हो अथवा जो उस इलाके में छह महीने या इससे अधिक समय तक रहने का इरादा रखता हो।
  • महापंजीयक एवं जनगणना आयुक्त विवेक जोशी की ओर से जारी एक अधिसूचना के मुताबिक, 'नागरिकता (नागरिकों के पंजीयन एवं राष्ट्रीय पहचान पत्र जारी करने संबंधी) नियमावली, 2003 के नियम तीन के उपनियम चार के तहत केंद्र सरकार ने जनसंख्या रजिस्टर तैयार करने और उसे अपडेट करने का फैसला किया है।' साथ ही इसमें कहा गया है कि असम को छोड़कर देशभर में घर-घर जाकर गणना करने और सभी लोगों की जानकारियां एकत्र करने के लिए फील्ड वर्क एक अप्रैल, 2020 से 30 सितंबर 2020 तक किया जाएगा। एनपीआर को स्थानीय (ग्राम/कस्बा), अनुमंडल, जिला, राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर तैयार किया जाएगा।

पृष्ठभूमि

  • नई लोकसभा (17वीं) के गठन के बाद 20 जून को राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद के अभिभाषण में नरेंद्र मोदी सरकार के दूसरे कार्यकाल की प्राथमिकताओं का उल्लेख किए जाने के करीब महीनेभर बाद यह कदम उठाया गया है। कोविंद ने कहा था, 'मेरी सरकार ने घुसपैठ प्रभावित इलाकों में प्राथमिकता के आधार पर राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (एनआरसी) की प्रक्रिया को लागू करने का फैसला किया है।'
  • असम को इसमें शामिल नहीं किए जाने की वजह यह है कि वहां एनआरसी की प्रक्रिया पहले से चल रही है। असम में पिछले साल 30 जुलाई को जब एनआरसी का मसौदा प्रकाशित किया गया था तब 40.7 लाख लोगों को इससे बाहर किए जाने पर काफी विवाद हो गया था।

:: अंतराष्ट्रीय समाचार ::

इंडोनेशिया के जावा द्वीप में भूकंप

  • इंडोनेशिया के घनी आबादी वाले जावा द्वीप के दक्षिणी तट पर आए शक्तिशाली भूकंप में चार लोगों की मौत हो गई है और कई अन्य घायल हैं। हालांकि भूकंप के बाद सुनामी की चेतावनी भी जारी की गई है।
  • शुक्रवार शाम को 6.9 की तीव्रता वाले भूकंप के बाद निवासियों को अन्य सुरक्षित जगह पर भेज दिया गया है। इस प्राकृतिक आपदा में 200 इमारतें क्षतिग्रस्त हो गई हैं और 13 घरों को नुकसान पहुंचा है।
  • पिछले साल सुलावेसी के पालु में आए 7.5 की तीव्रता वाले भूकंप और सुनामी में 2.200 से अधिक लोग मारे गए थे।

चक्रवाती तूफान वाइफा

  • दक्षिण-पूर्वी चीन और फिलीपींस के बीच दक्षिणी चीन सागर पर चक्रवाती तूफान वाइफा विकसित हुआ है। यह तूफान धीरे-धीरे पश्चिमी और उत्तर पश्चिमी दिशा में बढ़ रहा है। जल्द ही तूफान वाइफा बंगाल की खाड़ी में पहुंचेगी। इस समय तूफान चीन के दक्षिण-पूर्वी प्रांत हैनान के काफी करीब है।
  • वाइफा चीन के हैनान के किनारे से होकर टोनकिन खाड़ी में आएगा। लेकिन यह तूफान अब और शक्तिशाली नहीं बनेगा क्योंकि यह ज़मीनी क्षेत्रों के काफी करीब पहुँचने वाला है।
  • मौसम विशेषज्ञों के अनुसार अगले 24 घंटों में तूफान वाइफा उत्तरी वियतनाम और लाओस पहुँच जाएगा। उसके बाद थाईलैंड को पार करते हुए 4 अगस्त को यह म्यांमार के पास पहुंचेगा।
  • माना जा रहा है कि 5 अगस्त तक तूफान वाइफा बंगाल की खाड़ी में पहुंचेगा। इसी दौरान बंगाल की खाड़ी पर एक चक्रवाती हवाओं का क्षेत्र भी विकसित हो रहा होगा। उम्मीद है कि यह दोनों सिस्टम मिल जाएंगे और बंगाल खाड़ी में एक डिप्रेशन विकसित होगा जो ओडिशा और पश्चिम बंगाल के पास पहुँच जाएगा।
  • इस सिस्टम के प्रभाव से 6 अगस्त से पूर्वी तटीय भागों पर बारिश की गतिविधियां बढ़ेंगी। उम्मीद है कि पश्चिम बंगाल और ओडिशा से मॉनसून ज़ोर पकड़ना शुरू होगा। उसके बाद झारखंड, छत्तीसगढ़ और मध्य प्रदेश में भी मॉनसून का प्रभाव बढ़ेगा और बारिश ज़ोर पकड़ेगी। साथ ही राजस्थान, हरियाणा और पंजाब समेत दिल्ली में भी बारिश बढ़ जाएगी।

एशिया में मिसाइलें तैनात करेगा अमेरिका

  • अमेरिका एशिया में अपनी इंटरमीडिएट-रेंज की नई मिसाइलों को जल्द से जल्द तैनात करना चाहता है। अमेरिका की तरफ से यह कदम क्षेत्र में चीन के बढ़ते प्रभाव का मुकाबला करने के लिए उठाया जा रहा है। शनिवार को इसका एलान अमेरिका के रक्षा मंत्री मार्क एस्पर ने किया।
  • एस्पर ने कहा, हां हम एशिया में अपनी मिसाइलें तैनात करना चाहते हैं, यह जवाब उन्होंने तब दिया जब उनसे पूछा गया कि क्या अमेरिका एशिया में मध्यम-दूरी की अपनी नई मिसाइलों को तैनात करने की योजना बना रहा है। रक्षा मंत्री ने कहा, अमेरिका अब इंटरमीडिएट-रेंज न्यूक्लियर फोर्सेज (आइएनएफ) संधि से बंधा हुआ नहीं है।
  • हम देर-सबेर मिसाइलें तैनात करना चाहेंगे। इसमें कई माह लगेंगे, क्योंकि ये चीजें अधिक समय लेती हैं। उन्होंने यह नहीं बताया कि अमेरिका ये मिसाइलें कहां तैनात करेगा। उन्होंने कहा, मैं इस पर ज्यादा नहीं बोलूंगा, क्योंकि यह सब योजना और अपने सहयोगियों से बातचीत पर निर्भर होगा।

संधि टूटने के बाद बदली रणनीति

  • बता दें कि अमेरिका शुक्रवार को आइएनएफ संधि से अलग हो गया। उसने रूस पर इस संधि के उल्लंघन का आरोप लगाया। दोनों देशों के बीच 1987 में यह संधि हुई थी। इसपर तत्कालीन राष्ट्रपति रोनाल्ड रीगन और सोवियत नेता मिखाइल गोर्बाचेव ने हस्ताक्षर किए थे। संधि के तहत दोनों देश इस बात पर राजी हुए थे कि वे पारंपरिक और परमाणु लैस मीडियम-रेंज मिसाइलों को सीमित करेंगे। अमेरिका और रूस के बीच बढ़ी कड़वाहट से यह संधि टूट गई।
  • अमेरिकी रक्षा मंत्री ने कहा, संधि से अलग होने के बाद अमेरिका अब चीन से मुकाबला करने को स्वतंत्र है। चीन के पास ज्यादातर मिसाइलें ऐसी हैं जो संधि के तहत प्रतिबंधित थीं। चीन ने उस संधि पर हस्ताक्षर भी नहीं किए।उन्होंने कहा कि चीन को हैरानी नहीं होनी चाहिए, क्योंकि अमेरिका कुछ समय से इसपर विचार कर रहा है। एस्पर ने कहा, मैं यह बताना चाहता हूं कि उनके 80 फीसद मिसाइल अन्वेषण आइएनएफ रेंज सिस्टम के हैं, इसलिए उन्हें हैरान नहीं होना चाहिए, क्योंकि हम भी ऐसी क्षमता चाहते हैं।

उत्तर कोरिया में मानवाधिकार उल्लंघन पर संयुक्‍त राष्‍ट्र की रिपोर्ट

  • संयुक्त राष्ट्र की एक नई रिपोर्ट में उत्तर कोरिया में मानवाधिकार उल्लंघन की भयावह तस्वीर सामने आई है। इस देश में जेल से भागने का प्रयास करने वाले कैदियों को सरेआम गोली मार दी जाती है। साथ ही हिरासत में लिए गए लोगों को अमानवीय यातनाएं दी जाती हैं। उनके साथ यौन हिंसा होती है। उन्हें डंडे और लोहे की राड से बुरी तरह मारा-पीटा भी जाता है।
  • संयुक्त राष्ट्र महासभा में रखी गई रिपोर्ट के अनुसार, जेल के सुरक्षाकर्मी बंदियों के कपड़े उतरवा लेते हैं। पैसे या छिपाए गए सामान का पता लगाने के लिए कैदियों की बार-बार तलाशी ली जाती है। कई बार उनसे महीने भर या ज्यादा समय तक पूछताछ भी होती है। कैदियों को जेल की उन कोठरियों में रखा जाता है, जिनमें क्षमता से ज्यादा बंदी होते हैं।
  • ऐसी कोठरियों में बंदी ठीक से लेट भी नहीं पाते हैं। संयुक्त राष्ट्र (यूएन) महासचिव एंटेनियो गुतेरस ने बताया कि उत्तर कोरिया के पूर्व बंदियों ने अधिकारियों पर जिंदगी, आजादी और सुरक्षा संबंधी मानवाधिकारों का घोर उल्लंघन करने का आरोप लगाया।

इस तरह तैयार की गई रिपोर्ट

  • गुतेरस के अनुसार, संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार कार्यालय ने यह रिपोर्ट उन उत्तर कोरियाई नागरिकों की आपबीती के आधार पर तैयार किया है, जिन्हें हिरासत में रखा गया था। इनमें ज्यादातर महिलाएं थीं, जो भागकर चीन चली गई। मानवाधिकार कार्यालय ने गत वर्ष सितंबर से इस साल मई के बीच 330 से ज्यादा पूर्व बंदियों का साक्षात्कार लिया था। ये लोग उत्तर कोरिया छोड़ चुके हैं।

उत्तर कोरिया ने नकारे आरोप

  • उत्तर कोरिया कई बार कह चुका है कि वह मानवाधिकारों का उल्लंघन नहीं करता है। जिनेवा में उसके दूत हान ताई सांग ने गत मई में कहा था कि सरकार लोगों के हित के लिए हर संभव प्रयास कर रही है। यूएन अधिकारियों को नहीं दिया वीजा
  • मानवाधिकार हनन के आरोपों से इन्कार करने वाला उत्तर कोरिया इन मामलों की जांच करने वाले यूएन अधिकारियों को वीजा देने से मना करता रहा है।

बदहाल स्थिति में रखे जाते हैं बंदी

  • यूएन प्रमुख गुतेरस ने पूर्व बंदियों के हवाले से बताया कि कैदियों को बहुत बदहाल स्थितियों में रखा जाता है। बेहद कम भोजन दिया जाता है। इस कारण कई बंदी तो कुपोषण और बीमारी का शिकार हो गए। कई की मौत तक हो गई। मानवाधिकार कार्यालय को यह भी पता चला कि अधिकारियों के हाथों कई महिला बंदी यौन हिंसा का शिकार भी हुई।
  • गुतेरस ने बताया कि उत्तर कोरिया में बंदियों को ट्रायल के पूर्व वकील तक मुहैया नहीं कराए जाते हैं। उन्हें उन अपराधों में सिर्फ सजा की जानकारी दे जाती है, जिनमें छह माह तक की सजा का प्रावधान है।

चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारा (सीपीईसी)

  • नीदरलैंड के एक स्वतंत्र थिंक टैंक ने बहुप्रचारित चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारे (सीपीईसी) को लेकर आगाह किया है। उसका कहना है कि इस परियोजना के कारण पाकिस्तान न सिर्फ चीन के कर्ज के जाल में फंस जाएगा, बल्कि उसके कब्जे वाले गिलगित-बाल्टिस्तान में दस हजार से ज्यादा लोग बेरोजगार भी हो जाएंगे।
  • थिंक टैंक यूरोपीय फाउंडेशन फॉर साउथ एशियन स्टडीज (ईएफएसएएस) की विश्लेषक योना बारोकोवा ने कहा, 'सीपीईसी से पाकिस्तान, चीनी कर्ज के जाल में फंस जाएगा। बड़ी तादाद में चीनी कर्मचारियों के बढ़ने से गिलगित-बाल्टिस्तान में दस हजार से ज्यादा लोगों की नौकरी छिन जाएगी।'
  • उन्होंने कहा, 'पाकिस्तान ने ढांचागत विकास के नाम पर गिलगित-बाल्टिस्तान इलाका चीन को बेच दिया है। इस क्षेत्र को परियोजना के फायदे से पूरी तरह अलग रखा गया है। सीपीईसी का यहां के पर्यावरण और पारिस्थितिक पर कई तरह का नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा।'
  • नीदरलैंड की राजधानी एम्सटर्डम स्थित ईएफएसएएस की विश्लेषक ने यह भी कहा, 'पाकिस्तान का चीन सदाबहार दोस्त है, लेकिन सच्चाई यह भी है कि उनकी दोस्ती हमेशा असंतुलित रही है। पाकिस्तान पर चीन का कर्ज है और यह बढ़ता जाएगा।'

बुनियादी अधिकारों से वंचित

  • गिलगित-बाल्टिस्तान के लोगों और अंतरराष्ट्रीय पर्यवेक्षकों के अनुसार, इस क्षेत्र को सभी बुनियादी मानवीय और नागरिक अधिकारों से वंचित रखा गया है। इस क्षेत्र का पाकिस्तान की नेशनल असेंबली में कोई प्रतिनिधित्व तक नहीं है।

भारत ने जताई है आपत्ति

  • भारत ने 50 अरब डॉलर (करीब 3.48 लाख करोड़ रुपये) की लागत वाली सीपीईसी परियोजना पर आपत्ति जताई है, क्योंकि यह गलियारा गुलाम कश्मीर और गिलगित-बाल्टिस्तान से होकर गुजरेगा। करीब तीन हजार किमी लंबे सीपीईसी से पश्चिमी चीन के काशगर को पाकिस्तान में अरब सागर के तट पर स्थित ग्वादर बंदरगाह से जोड़ा जाना है।

सीपीईसी के खिलाफ सियोल में प्रदर्शन

  • दक्षिण कोरिया की राजधानी सियोल में बलूच नेशनल मूवमेंट के कार्यकर्ताओं ने शुक्रवार को सीपीईसी और बलूचिस्तान में जारी पाकिस्तान के अत्याचार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने पाकिस्तानी और चीनी दूतावासों तक रैली निकाल कर अपने गुस्से का इजहार किया। इसके बाद एमनेस्टी इंटरनेशनल के ऑफिस जाकर एक ज्ञापन भी सौंपा। इसमें यह आरोप लगाया है कि पाकिस्तान ने हजारों बलूच लोगों को लापता कर दिया है।

उत्तर कोरिया में रॉकेट प्रक्षेपण प्रणाली का परीक्षण

  • उत्तर कोरिया ने कहा है कि उनके नेता किम जोंग उन की निगरानी में एक नये ‘मल्टीपल रॉकेट लॉन्चर सिस्टम’ का परीक्षण किया गया है जो दक्षिण कोरिया और अमेरिका के सैन्य ठिकानों पर हमले की क्षमता को बढ़ा सकता है। उत्तर कोरिया की आधिकारिक ‘कोरियन सेंट्रल न्यूज एजेंसी’ ने शनिवार को इसकी जानकारी दी।
  • गौरतलब है कि एक दिन पहले दक्षिण कोरिया की सेना ने कहा था कि उत्तर कोरिया ने अपने पूर्वी तट से समुद्र में बृहस्पतिवार देर रात दो बार अज्ञात प्रोजेक्टाइल (एक तरह की मिसाइल) प्रक्षेपित किए। महज एक हफ्ते में उत्तर कोरिया का यह तीसरा हथियार प्रक्षेपण है। उत्तर कोरिया ने कहा है कि किम की निगरानी में बुधवार को इसी रॉकेट प्रणाली का पहला परीक्षण किया था।
  • विशेषज्ञों का कहना है कि अमेरिका-दक्षिण कोरिया के बीच होने वाले सैन्य अभ्यास और अमेरिका के साथ ठप पड़ी परमाणु वार्ता को लेकर उत्तर कोरिया अपनी हताशा का प्रदर्शन कर रहा है। यदि अगले कुछ महीनों में वार्ता तेजी से आगे नहीं बढ़ती है तो उसके हथियार परीक्षणों की गति और तेज हो सकती है।

:: राजव्यवस्था और महत्वपूर्ण विधेयक ::

धारा 370 और 35A

  • कश्मीर में जारी गहमागहमी के बीच इन अफवाहों का बाजार गर्म है कि क्या मोदी सरकार जम्मू-कश्मीर में धारा 370 और 35A खत्म करने जा रही है? कुछ लोग तो जम्मू-कश्मीर को 3 भागों में बांटने तक की आशंका जता रहे हैं। इस बीच, कश्मीर मामलों से जुड़े वरिष्ठ अधिकारियों और विशेषज्ञों की मानें तो सरकार धारा 370 और 35A को रद्द करने के बजाय उनमें जरूरी संशोधनों का फैसला कर सकती है।
  • कश्मीर पर नीति निर्धारण से जुड़े एक वरिष्ठ अधिकारी का कहना है कि धारा 370 और 35A सियासी मुद्दा हो सकता है, लेकिन इन्हें पूरी तरह रद्द किए बिना भी जरूरी लक्ष्यों को हासिल किया जा सकता है।
  • धारा 370 निजी निवेश के रास्ते में सबसे बड़ी बाधा है। यदि इसमें बदलाव कर निवेश की इच्छुक कंपनियों और व्यक्तियों को लंबी लीज पर जमीन उपलब्ध कराने का प्रावधान कर दिया जाए तो राह आसान हो जाएगी।
  • इसी तरह, 35A में बदलावों के साथ राज्य से बाहर के किसी व्यक्ति से शादी करने वाली महिला को पैतृक संपत्ति में अधिकार और पाकिस्तान से आए शरणार्थियों को नागरिकता से रोकने जैसे प्रावधानों को आसानी से बदला जा सकता है।
  • जानकारों का भी मानना है कि धारा 370 और 35ए को पूरी तरह निरस्त करने के बजाय इसमें संशोधनों के साथ आगे बढ़ना ज्यादा बेहतर विकल्प हो सकता है।
  • धारा 370 के लिए सरकार को संवैधानिक संशोधन का रास्ता चुनना होगा। जबकि 35ए में संशोधन के लिए ऐसी कोई मजबूरी नहीं होगी। यहां सुप्रीम कोर्ट में लंबित होने के बावजूद सरकार 35ए में संशोधनों के साथ आगे बढ़ सकती है और बाद में सुप्रीम कोर्ट को इन संशोधनों की जानकारी दे सकती है।
  • 35ए की संवैधानिकता को चुनौती देने वाली जनहित याचिका सुप्रीम कोर्ट में लंबित है और अब तक इस पर सुनवाई शुरू नहीं हो पाई है।
  • एक वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक, इन धाराओं को हटाने का विरोध करने वाले कश्मीरी नेता भी अब इनमें संशोधनों की बात करने लगे हैं। उन्होंने पिछले दिनों जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री फारूक अब्दुल्ला के साक्षात्कार हवाला दिया।
  • जानकारों के मुताबिक, सरकार ये धाराएं न हटाते हुए इनमें बदलाव का विकल्क चुनती है तो इससे जहां कश्मीर के भीतर इन अनुच्छेदों को हटाने को लेकर हो रहे विरोध के स्वर कमजोर होंगे, वहीं इनके कारण विभिन्न वर्गों के साथ हो रहे पक्षपात को समाप्त करने और निजी निवेश को आकर्षित कर विकास की गति को तेज करने का रास्ता भी साफ हो जाएगा।

पृष्ठभूमि

  • एक वरिष्ठ अधिकारी ने कश्मीर को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पिछले कुछ महीनों के भाषणों को ध्यान से देखने की सलाह देते हुए कहा कि उन्होंने 370 और 35ए की आलोचना सिर्फ इस आधार पर की है कि इसके कारण पिछले 70 साल में कश्मीर का विकास नहीं हो सका।
  • पिछले हफ्ते अपने 'मन की बात' कार्यक्रम में भी प्रधानमंत्री ने बताया था कि किस तरह कश्मीर की आम जनता विकास और अमन चाहती है। उन्होंने कहा था, 'जो लोग विकास की राह में नफरत फैलाना चाहते हैं, वे कभी अपने नापाक इरादों में कामयाब नहीं हो सकते।'

समान नागरिक संहिता

  • अभी देश में विभिन्न धर्मों और संप्रदायों के लोगों के लिए शादी, बच्चे को गोद लेना, संपत्ति या उत्तराधिकार आदि मामलों को लेकर अलगअलग नियम है। लिहाजा किसी धर्म में जिस बात को लेकर पाबंदी है, दूसरे संप्रदाय में उसी बात की खुली छूट है। इससे देश के बीच एकरूपता नहीं आ पा रही है। आजादी के बाद से ही सभी धर्मों के लिए एक ऐसे कानून बनाए जाने की बात होती रही है जो सब पर एक समान लागू हो। हालांकि अभी तक सहमति नहीं बन सकी है। पूर्व में हिंदू कोड बिल और अब तत्काल तीन तलाक पर बना कानून इस दिशा में बड़े कदम माने जा रहे हैं।

समान नागरिक संहिता

  • धार्मिक मान्यताओं से जुड़े कानूनों को समाप्त करने और इसकी जगह पर एक समान कानून लागू करने का प्रस्ताव है समान नागरिक संहिता। फिलहाल भारत में विभिन्न धर्म और संप्रदाय के लोगों के अपने निजी धार्मिक कानून हैं। समान नागरिक संहिता केवल शादी, तलाक, संपत्ति, उत्तराधिकार, बच्चा गोद लेने और गुजारा भत्ता जैसे मुद्दों पर लागू होगी।

पर्सनल लॉ

  • गोवा देश का एकमात्र ऐसा राज्य है जहां गोवा फैमिली लॉ के नाम से समान नागरिक संहिता लागू है। दरअसल पर्सनल लॉ की मांग आजादी से काफी पहले हुई थी। उस वक्त तक इसकी जरूरत भी थी। समान नागरिक संहिता का मसला 20वीं सदी की शुरुआत से जोर पकड़ने लगा। खासतौर पर महिला अधिकारों की मांग तेज होती गई।

मांगी गई जनता की राय

  • समान नागरिक संहिता पर जनता की राय जानने के लिए साल 2016 में सात अक्टूबर को विधि आयोग ने एक प्रश्नावली जारी की। इसका मकसद विभिन्न समुदायों के लोग खासतौर पर महिलाओं के साथ सांस्कृतिक और धार्मिक रीति-रिवाजों के नाम पर हो रहे भेदभावपूर्ण बर्ताव को खत्म करना और उन्हें समान अधिकार सुनिश्चित कराना था।

मौजूदा स्थिति

  • फिलहाल विभिन्न धर्म को मानने वाले अपनी धार्मिक मान्यताओं, संस्कृति और रीति-रिवाजों के आधार पर शादी, संपत्ति, तलाक और बच्चा गोद लेने के फैसले कर सकते हैं। यदि इसमें कोई विवाद पैदा हो जाए तो इसके लिए कोई कानून नहीं होता है।
  • संविधान में राज्य के नीति-निर्देशक के अनुच्छेद 44 में समान नागरिक संहिता की चर्चा की गई है।

संविधान का हिस्सा

  • नागरिक संहिता का मुद्दा आज का नहीं है। भारतीय संविधान निर्माताओं ने जब इसकी नींव डाली उसी वक्त समान नागरिक संहिता भी अस्तित्व में आई। संविधान सभा में बाकायदा इस पर चर्चा भी हुई। यह जरूर है कि उस वक्त भी इसे लेकर काफी मतभेद थे। 1949 और फिर 1951 से 1954 के बीच संसद में इस पर तीखी बहस हुई। तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू तो इस विधेयक के समर्थन में थे पर इसे लेकर सभी को मनाने में वह सफल नहीं हुए। लिहाजा इसे नीति निर्देशक तत्व के अनुच्छेद 44 में शामिल कर दिया गया।

विवाद क्यों

  • संविधान के अनुच्छेद 29 और 30 अल्पसंख्यकों को अपनी संस्कृति, धार्मिक रीति-रिवाज के संरक्षण का अधिकार सुनिश्चित करते हैं। वे अपने धर्म के हिसाब से शिक्षण संस्थानों का संचालन कर सकते हैं। अपने धर्म, रीति रिवाज और मान्यताओं का अनुसरण कर सकते हैं। जबकि समान नागरिक संहिता को इन अधिकारों पर खतरे के तौर पर देखा जा रहा है।
  • हिंदू राष्ट्रवादी समय-समय पर इस कानून की मांग करते रहे हैं। इस पर उनका तर्क यह है कि हिंदू रूढ़िवादियों के विरोध के बावजूद जब जवाहरलाल नेहरू के समय हिंदुओं को शादी, गोद लेने, और संपत्ति और उत्तराधिकारी से संबंधित कानून का पालन करना पड़ा तो इससे अन्य संप्रदायों और धर्मों को मानने वालों को क्यों बचाकर रखा गया है।
  • निजी और नागरिक संहिता खासतौर पर शादी, संपत्ति के अधिकार और बच्चा गोद लेने के मुद्दे को लेकर अलग है। पुरुषों के प्रभुत्व वाला ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड तीन तलाक मामले में कोई बदलाव नहीं चाहता था, लेकिन सुप्रीम कोर्ट इसे खत्म करने का फैसला सुनाया और सरकार ने इसके खिलाफ कानून बना सदियों की कुप्रथा का अंत किया। यह मुस्लिम संगठन बहुविवाह की परंपरा को भी जारी रखना चाहता है।

:: आर्थिक समाचार ::

8वीं आरसीईपी अंतः सत्रात्मक मंत्रालयी बैठक

  • वाणिज्य सचिव डॉ. अनुप वधावन ने 02-03 अगस्त, 2019 को बीजिंग में आयोजित 8वीं आरसीईपी अंतः सत्रात्मक मंत्रालयी बैठक में एक प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व किया। बैठक के दौरान उन्होंने अभी तक हुई आरसीईपी वार्ताओं को आकार देने में भारत के योगदान को रेखांकित किया। उन्होंने बातचीत में समायोजन की समझ की भावना तथा संतुलित परिणाम पर पहुंचने की दिशा में लचीलेपन का समर्थन किया। बैठकों के दौरान बाजार पहुंच एवं अन्य मुद्दों, जिससे कुछ साझेदार देशों के बीच असंतुलित व्यापार की नौबत आती है, को लेकर भारत की चिन्ताओं को रेखांकित किया गया।
  • मंत्रालयी बैठक से इतर, वाणिज्य सचिव ने चीन, थाइलैंड, दक्षिण कोरिया, न्यूजीलैंड, आस्ट्रेलिया, सिंगापुर, इंडोनेशिया, जापान के वाणिज्य सचिवों एवं आसियान आर्थिक मंत्रियों के साथ बैठक की।
  • चीन के वाणिज्य उपमंत्री श्री वांग शौवेन के साथ अपनी बैठक में वाणिज्य सचिव ने एक आरसीईपी के समझौते पर महत्व दिया जिससे वर्तमान व्यापार असंतुलनों की समस्या पर समुचित रूप से ध्यान दिया जा सकेगा। उन्होंने इस अवसर का उपयोग उत्पादों के विभिन्न वर्गों पर द्विपक्षीय बाजार पहुंच संबंधित मुद्दों को उठाने में किया जिसके बारे में भारत और चीन के बीच वर्तमान में चर्चा जारी है। उन्होंने भारतीय व्यवसाय पर्यटकों के लिए चीन का व्यवसाय वीजा व्यवस्था में सुगमता के महत्व पर भी जोर दिया।
  • थाइलैंड के परमानेंट सेक्रेटरी श्री बुनियारित काल्यानामित के साथ मुलाकात के दौरान वाणिज्य सचिव ने थाइलैंड से आरसीईपी के तहत वस्तुओं एवं सेवाओं में अपनी पेशकश में सुधार लाने का आग्रह किया। सिंगापुर के व्यापार एवं उद्योग मंत्री श्री चान चून सिंग के साथ मुलाकात के दौरान वाणिज्य सचिव ने सिंगापुर से नर्सिंग पर एमआरए के प्रचालन का समर्थन करने, जैसे कि दूसरी सीईसीए समीक्षा में सहमति हुई थी एवं तीसरी सीईसीए समीक्षा पर त्वरित प्रगति की दिशा में कार्य करने का आग्रह किया।
  • आसियान आर्थिक मंत्रियों के साथ बैठक के दौरान वाणिज्य सचिव ने सेवा व्यापार के महत्व को रेखांकित किया जो वस्तुओं के व्यापार एवं निवेश दोनों का समर्थन करता है। वाणिज्व सचिव ने ऑस्ट्रेलिया के व्यापार, पर्यटन एवं निवेश मंत्री श्री सिमोन बर्मिंघम के साथ भी मुलाकात की जिसमें दोनों पक्षों ने आरसीईपी के तहत की गई प्रगति एवं भारत के सेवा क्षेत्र संबंधित आग्रहों सहित एक दूसरे के अनुरोधों पर आगे बढ़ने की आवश्यकता की सराहना की।
  • वाणिज्य सचिव ने इंडोनेशिया के व्यापार मंत्री श्री इंगारितियास्तो लुकिता से भारतीय वस्तुओं और सेवाओं के लिए अधिक बाजार पहुंच का आग्रह किया। कोरिया गणराज्य की व्यापार मंत्री सुश्री म्योंग ही वू के साथ अपनी बैठक में वाणिज्य सचिव ने भारत को सीईपीए में सुधार लाने के लिए ठोस कदम उठाने तथा असंतुलनों के संबंध में चिन्ताओं को दूर करने पर जोर दिया। उन्होंने भारत के सेवा क्षेत्र के लिए बाजार पहुंच से संबंधित मुद्दों के आरंभिक समाधान का भी आग्रह किया। वाणिज्य सचिव ने जापान के अंतर्राष्ट्रीय मामलों के उपमंत्री श्री एस. तानाका एवं न्यूजीलैंड के व्यापार राज्य मंत्री श्री डैमियन ओ कोन्नोर से भी मुलाकात की।

:: पर्यावरण और पारिस्थितिकी ::

गंगा की जल गुणवत्ता में सुधार

प्रदूषण से कराह रही गंगा की सेहत अब सुधरने लगी है। लोगों में बढ़ी जागरूकता एवं स्वच्छता अभियान के चलते गंगा में आने वाले मल से उत्पन्न जीवाणुओं की मात्रा में भी कमी आई है। यह तस्वीर प्रयागराज व काशी से लिए गए पानी के नमूनों की केंद्रीय जल आयोग की प्रयोगशाला में हुई जांच के बाद साफ हुई है। फरवरी में प्रयागराज में जहा 2.67 लाख फीकल कोलीफार्म यानी मलजनित बैक्टीरिया थे वहीं जून में कोलीफार्म की मात्रा घटकर अब 9300 हो गई है।

वहीं काशी में यह आंकड़ा फरवरी में जहां 1.64 लाख था वहीं जून में यह फीकल कोलीफार्म की मात्रा 14 हजार पर आ गई है। इसके साथ ही डीओ (घुलित ऑक्सीजन) एवं बीओडी (जैविक ऑक्सीजन की मांग) की स्थिति में भी बेहतर बताई जा रही है। हालांकि मानक के अनुसार 500 एमपीएन/100 एमएल ही मात्रा होनी चाहिए। ऐसे में और सुधार की जरूरत है। वहीं एक अन्‍य वजह के तौर पर माना जा रहा है कि बारिश और गंगा में उफान आने से गंगा में प्रवाह बढने से भी प्रदूषक तत्‍वों की मात्रा में कमी आती है।

जल गुणवत्ता की जांच निरंतर हो रही है। फीकल कोलीफार्म एवं टोटल कोलीफार्म की जांच की रिपोर्ट से उम्मीद की किरण जगी है। गंगा के जल की गुणवत्ता में सुधार आया है। अगर गंगा में सीवर में बहाव को पूरी तरह रोकने के साथ ही जनसंख्या पर भी नियंत्रण किया जाए तो स्थिति में और सुधार हो सकता है।

यहां से लिए गए नमूने : 300 मीटर डाउन मालवीय ब्रिज, वाराणसी से 500 मीटर डाउन संगम के समीप छतनाग प्रयागराज से

तीन दिन लिए जाते हैं नमूने : महीने की एक, 11 और 21 तारीख को पानी के नमूने लिए जाते हैं। इनका परीक्षण केंद्रीय जल आयोग की बिल्डिंग में मध्य गंगा जल गुणवत्ता प्रयोगशाला, वाराणसी में किया जाता है।

फीकल कोलीफार्म

माह काशी  प्रयागराज
फरवरी 1.64 लाख 2.67 लाख
मार्च 66 हजार 52 हजार
अप्रैल 37 हजार 40 हजार
मई  20 हजार  19 हजार
जून  14 हजार  9300

टोटल कोलीफार्म

माह काशी  प्रयागराज
फरवरी 3.50 लाख 4.44 लाख
मार्च 1.06 लाख  1.11 लाख
अप्रैल 59 हजार 57 हजार
मई  33 हजार 34 हजार
जून  23 हजार  17 हजार
 

:: विज्ञान और प्रौद्योगिकी ::

इंसान और बंदर के जेनेटिक मटेरियल से तैयार दुनिया का पहला डिजाइनर भ्रूण

  • स्पेन के वैज्ञानिक ने चीन की लैब में पहली बार ऐसा डिजाइनर भ्रूण तैयार किया गया है, जो इंसान और बंदर से मिलाकर तैयार किया गया है। इस हाइब्रिड भ्रूण से तैयार होने वाले बच्चे में दोनों की खूबियां होंगी। कानूनी कार्यवाही से बचने के लिए यह प्रयोग चीन में किया गया। भ्रूण को 14 दिन का विकसित करने के बाद इस पर रोक लगा दी गई। यह कदम इंसानों में जानवर के अंगों को ट्रांसप्लांट करने के लिए अहम माना जा रहा है।
  • स्पेनिश शोधकर्ता जुआन कार्लोस ने जेनेटिकली मोडिफाइड बंदर के भ्रूण से वे जीन डिएक्टिवेट किए, जो अंगों को विकसित करने का कम करते हैं। इसके बाद भ्रूण में इंसान की स्टेम कोशिकाओं को डाला किया गया। नतीजा यह रहा है कि भ्रूण किसी भी तरह के ऊतक के निर्माण के लिए सक्षम बन गया।
  • शोधकर्ताओं की टीम ने हालांकि किसी भी पत्रिका में रिसर्च के परिणाम नहीं प्रकाशित कराए हैं। वेबसाइट एल-पेस के मुताबिक, हाइब्रिड भ्रूण तैयार किया गया लेकिन विकसित होने के 14 दिन बाद ही उसे खत्म कर दिया गया। भ्रूण में लाल लाइनें देखी गई थीं, जो बताती है इसमें भविष्य में इसमें सेंट्रल नर्वस सिस्टम विकसित नहीं हो सकता। हालांकि भ्रूण तैयार करने का प्रयोग सफल रहा।
  • शोधकर्ता जुआन कार्लोस 2017 में भी पहली बार इंसान और सुअर के जेनेटिक मैटेरियल को मिलाकर एक भ्रूण तैयार किया था। हालांकि यह प्रयोग बहुत सफल नहीं हो पाया था। रिसर्च के प्रोजेक्ट कॉलाब्रेटर और अमेरिकी मर्सिया कैथेलिक यूनिवर्सिटी के वाइस चांसलर एस्ट्रेला न्यूनेल के मुताबिक, टीम इस अध्ययन को जर्नल में प्रकाशित कराने की तैयारी कर रही

हाइड्रोपैनल

  • जल संकट के आसन्न खतरे को टालने की दिशा में वैज्ञानिक तेजी से आगे बढ़ रहे हैं। मंडी स्थित भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आइआइटी) ने हवा की नमी से पानी तैयार करने की तकनीकी विकसित की है। इसके तहत सोलर हाइड्रोपैनल के माध्यम से आठ से दस घटों में करीब छह लीटर पानी एकत्र किया जा सकता है। वैज्ञानिकों का दावा है कि यह प्रणाली घटते भूजल के कारण पैदा हो रही पेयजल समस्या को दूर करने में भी मील का पत्थर साबित हो सकती है।
  • राष्ट्रीय हिमालयी अध्ययन मिशन के तहत हिमाचल प्रदेश के मंडी स्थित आइआइटी के वैज्ञानिक पिछले एक साल से हवा की नमी से पानी तैयार करने की योजना पर काम कर रहे हैं। वैज्ञानिकों ने ऐसा हाइड्रोपैनल और सोलर सिस्टम ईजाद किया है, जिससे आसानी से हवा की नमी से पानी पैदा किया जा सकता है।
  • इस हाइड्रोपैनल में एक छोटी बैटरी लगाई गई है, जो सूर्योदय के साथ ही सक्रिय हो जाती है। इसमें लगा एक विशेष प्रकार का पदार्थ वायुमंडल की हवा की नमी अवशोषित करता है, जो संघनित होकर पानी में तब्दील हो जाती है। अशुद्धियों को दूर कर इसे पीने योग्य बनाया जाएगा। वैज्ञानिकों का कहना है कि हिमालयी क्षेत्रों के लिए खनिज-लवण युक्त कम लागत वाली त्वरित जल शोधन प्रणाली और सौर ऊर्जा से स्वच्छ पानी प्राप्त करने प्रणाली को विकसित करने के लक्ष्य पर यहा काम किया जा रहा है। ताकि भविष्य में पेयजल की बढ़ रही समस्या पर अंकुश पाया जा सके।

3डी बायो-प्रिंटिंग से निर्मित मानव हृदय

  • अमेरिकी वैज्ञानिकों ने 3-डी बायो-प्रिंटर और अपनी नई तकनीक के जरिए जीवित कोशिकाओं और प्रोटीन से मानव हृदय के विभिन्न हिस्से बनाने में सफलता पाई है। इससे उत्साहित वैज्ञानिकों का दावा है कि निकट भविष्य में पूरे मानव हृदय का निर्माण हो सकेगा। अमेरिका के कार्नेगी मेलन विश्वविद्यालय के साइंस पत्रिका में प्रकाशित पेपर में यह दावा किया गया है।
  • पेपर के सह-लेखक एडम फेनबर्ग ने कहा कि हमने कोलेजन से 3-डी प्रिंट के जरिये हृदय का वॉल्व बनाया जो काम करता है। कोलेजन प्रोटीन वह तत्व है जो शरीर की लगभग हर अंग व कोशिका के ढांचे में पाया जाता है।
  • हृदय के साथ-साथ, मानव शरीर के सभी अंग कुछ विशेष कोशिकाओं से बने होते हैं। इन्हें प्रोटीन का एक बायोलॉजिक ढांचा बांध कर रखता है, जिसे एक्सट्रो सैल्यूलर मैट्रिक्स (ईसीएम) कहा जाता है। इनमें कोलेजन प्रमुख रूप से शामिल है। ईसीएम ही कोशिकाओं को ऐसे बायोकेमिकल संदेश देता है, जिससे कोशिकाएं विभिन्न अंगों को उनका निर्धारित काम करवाती हैं।
  • जटिल ढांचा बड़ी दिक्कत
  • ईसीएम जैसा जटिल ढांचा 3डी प्रिंटिंग कर कोलेजन से बनाना संभव नहीं था। दरअसल, कोलेजन तरल होता है। हृदय का एमआरआई कर उसे जीवित कोशिकाओं और कोलेजन से बनाने पर लिजलिजा अंग बनता है जो उपयोगी नहीं होता। इस पेपर में नई तकनीक ‘फ्रीफॉर्म रिवर्सिबल एम्बेडिंग ऑफ सस्पेंडेड हाइड्रोजेल्स’ (फ्रेश) रखी गई।
  • इसमें 3डी प्रिटिंग के समय कोलेजन को परत दर परत जमाया जाता है। हर परत के बीच जेल की सतह लगाई जाती है। जेल सामान्य वातावरण के तापमान में पिघलकर ढांचे से निकल जाता है। कोलेजन बिना किसी नुकसान ठोस हृदय का रूप ले लेता है।
  • इसी तकनीक से कई अन्य तत्वों को भी 3डी प्रिंट में ढाला जा सकता है। विश्वविद्यालय में बायोमेडिकल इंजीनियरिंग के प्रो. एडम फीनबर्ग के अनुसार फ्रेश तकनीक पर कुछ और अध्ययन होने हैं। यह तकनीक घावों को भरने से लेकर बेकार हो चुके अंग बनाने में काम आ सकती है।

:: विविध ::

मागोमेड सलाम उमाखानोव स्मृति अंतरराष्ट्रीय मुक्केबाजी टूर्नामेंट

  • लवलीना बोरगोहेन और नीरज ने रूस में चल रहे मागोमेड सलाम उमाखानोव स्मृति अंतरराष्ट्रीय मुक्केबाजी टूर्नामेंट में स्वर्ण पदक जीता जबकि गौरव सोलंकी को रजत पदक से संतोष करना पड़ा। भारतीय मुक्केबाजों ने इस टूर्नामेंट में छह पदक जीते जिनमें दो स्वर्ण, एक रजत और तीन कांस्य पदक जीते।

:: प्रिलिमिस बूस्टर ::

  • सरकार द्वारा राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर की प्रक्रिया को आगे बढ़ाने हेतु कौन से रजिस्टर को तैयार करने का फैसला किया गया है? (राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर-एनपीआर)
  • देशभर में राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर को लागू करने हेतु राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर (एनपीआर) को कब तक पूरा किया जाएगा? (2020)
  • हाल ही में इंडोनेशिया के किस द्वीप पर शक्तिशाली भूकंप आया? (जावा द्वीप)
  • हाल ही में दक्षिणी चीन सागर में विकसित हुए चक्रवाती तूफान का क्या नाम है? (वाइफा)
  • हाल ही में अमेरिकी रक्षा मंत्री के द्वारा किस क्षेत्र में इंटरमीडिएट रेंज की नई मिसाइलों की तैनाती हेतु प्रतिबद्धता व्यक्त की गई है? (एशिया)
  • हाल ही में किस देश के संस्थान के द्वारा चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारे (सीपीईसी) के संदर्भ में चीन के कर्ज के जाल के प्रति पाकिस्तान को आगाह किया गया है? (नीदरलैंड)
  • हाल ही में चर्चा में रहे समान नागरिक संहिता का उल्लेख संविधान के किस अनुच्छेद में है? (राज्य के नीति-निर्देशक के अनुच्छेद 44 में)
  • हाल ही में आयोजित 8वीं आरसीईपी अंतः सत्रात्मक मंत्रालयी बैठक कहाँ आयोजित की गई? (बीजिंग- चीन)
  • हाल ही में किस वैज्ञानिक के द्वारा इंसान और बंदर से मिलाकर एक हाइब्रिड भ्रूण का निर्माण किया गया है? (स्पेन)
  • हाल ही में किस संस्थान के वैज्ञानिकों के द्वारा हवा की नमी से पानी तैयार करने वाली तकनीक हाइड्रोपैनल का निर्माण किया गया? (भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान-आइआइटी मंडी)
  • हाल ही में किस देश के द्वारा 3-डी बायो-प्रिंटर और नई तकनीक के जरिए जीवित कोशिकाओं और प्रोटीन से मानव हृदय के विभिन्न हिस्से बनाने में सफलता पाई है? (अमेरिका)
  • मागोमेड सलाम उमाखानोव स्मृति अंतरराष्ट्रीय मुक्केबाजी टूर्नामेंट में किन भारतीय खिलाड़ियों में स्वर्ण पदक जीता? (लवलीना बोरगोहेन और नीरज)

स्रोत साभार: Dainik Jagran (Rashtriya Sanskaran), Dainik Bhaskar (Rashtriya Sanskaran), Rashtriya Sahara (Rashtriya Sanskaran) Hindustan Dainik (Delhi), Nai Duniya, Hindustan Times, The Hindu, BBC Portal, The Economic Times (Hindi & English), PTI, PIB

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