(दैनिक समसामयिकी और प्रिलिम्स बूस्टर) यूपीएससी और सभी राज्य लोक सेवा आयोग परीक्षाओं के लिए हिंदी में समाचार पत्रों का संकलन (04 अप्रैल 2020)

दैनिक समसामयिकी और प्रिलिम्स बूस्टर


(दैनिक समसामयिकी और प्रिलिम्स बूस्टर) यूपीएससी और सभी राज्य लोक सेवा आयोग परीक्षाओं के लिए हिंदी में समाचार पत्रों का संकलन (04 अप्रैल 2020)


:: राष्ट्रीय समाचार ::

राज्यों को राज्य आपदा जोखिम प्रबंधन कोष से 17 हजार करोड़ की सहायता

  • वैश्विक महामारी बन चुके कोरोना वायरस से जंग के लिए मोदी सरकार ने राज्यों को 17,287 करोड़ रुपये की आर्थिक सहायता दी है। गृहमंत्री अमित शाह की अध्यक्षता में हुई बैठक में राज्य आपदा जोखिम प्रबंधन कोष (एसडीआरएमएफ) से 11,092 करोड़ रुपये राज्यों को देने को मंजूरी दी गई। उधर, वित्त मंत्रालय ने 14 राज्यों को राजस्व घाटा अनुदान के तहत 6,195 करोड़ रुपये भी जारी किए हैं।
  • केंद्र सरकार ने वर्ष 2020-21 के लिए एसडीआरएमएफ की पहली किश्त के रूप में 11,092 करोड़ रुपये की राशि जारी की है। कोरोना वायरस के रोकथाम और निवारक उपायों के दौरान राज्यों को धनराशि उपलब्ध कराने के लिए केंद्र ने 14 मार्च को राज्य आपदा जोखिम प्रबंधन कोष के इस्तेमाल को हरी झंडी दी थी। इस फंड का उपयोग राज्य सरकारें कोरोना वायरस के रोकथाम के लिए करेंगी।

इन 14 राज्यों को वित्त मंत्रालय की मदद

  • वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने 15वें वित्त आयोग की सिफारिशों के तहत पंजाब, उत्तराखंड, आंध्र प्रदेश, पश्चिम बंगाल, असम, हिमाचल प्रदेश, केरल, मणिपुर, मेघालय, मिजोरम, नागालैंड, सिक्किम, तमिलनाडु और त्रिपुरा को राजस्व घाटा अनुदान का 6,195 करोड़ रुपये जारी किया है।

क्या है राष्‍ट्रीय आपदा राहत कोष (एनडीआरएफ) और  राज्‍य आपदा राहत कोष (एसडीआरएफ)

  • आपदा प्रबंधन अधिनियम 2005 के तहत राष्‍ट्रीय स्‍तर पर राष्‍ट्रीय आपदा राहत कोष (एनडीआरएफ) और राज्‍य स्‍तर पर राज्‍य आपदा राहत कोष (एसडीआरएफ) के जरिए एक समुचित वित्तीय व्‍यवस्‍था की गई है, ताकि किसी भी अधिसूचित आपदा के दौरान बचाव एवं राहत व्‍यय का इंतजाम हो सके। प्रत्‍येक राज्‍य में एसडीआरएफ बनाया गया है जिसमें केन्‍द्र सरकार अब तक प्रत्‍येक वर्ष सामान्‍य श्रेणी के राज्‍यों के लिए 90 प्रतिशत का योगदान और पहाड़ी क्षेत्रों के विशेष श्रेणी वाले राज्‍यों के लिए 90 प्रतिशत का योगदान देती रही थी।
  • एसडीआरएफ राज्‍यों के लिए उपलब्‍ध एक ऐसा संसाधन है जिससे अनेक तरह की विशिष्‍ट आपदाओं के दौरान तत्‍काल जरूरी समझे जाने वाले राहत कार्यों से जुड़े खर्चों का इंतजाम किया जाता है। एसडीआरएफ के तहत किसी भी समय राज्‍य सरकार के लिए अच्‍छी-खासी धनराशि उपलब्‍ध रहती है। जब भी कोई ऐसी प्राकृतिक आपदा आती है जिसका सामना करने में संबंधित राज्‍य को भारी मुश्किलों का सामना करना पड़ता है तो वैसी स्थिति में निर्धारित मानकों के अनुसार केन्‍द्र सरकार द्वारा एनडीआरएफ से अतिरिक्‍त वित्तीय सहायता मुहैया कराई जाती है। एनडीआरएफ में शत-प्रतिशत वित्त पोषण केन्‍द्र सरकार द्वारा किया जाता है।

क्या है वित्त आयोग?

  • वित्त आयोग एक संवैधानिक निकाय है जो राजकोषीय संघवाद की धुरी है, जिसका गठन संविधान के अनुछेद 280 के तहत किया जाता है। इसका मुख्य दायित्व: संघ व राज्यों की वित्तीय स्थितियों का मूल्यांकन करना, उनके बीच करों के बटवारे की संस्तुति करना तथा राज्यों के बीच इन करों के वितरण हेतु सिद्धांतो का निर्धारण करना है। वित्त आयोग की कार्यशैली की विशेषता सरकार के सभी स्तरों पर व्यापक एवं गहन परामर्श कर सहकारी संघवाद के सिद्धांत को सुदृढ़ करना है। इसकी संस्तुतियां सार्वजनिक व्यय की गुणवत्ता में सुधार लाने और राजकोषीय स्थिरता को बढ़ाने की दिशा में भी सक्षम होती है।
  • प्रथम वित्त आयोग 1951 में गठित किया गया था और अब तक पंद्रह वित्त आयोग गठित किये जा चुके हैं। उनमें से प्रत्येक को अद्वितीय चुनौतियों का सामना करना पड़ा है । श्री एन.के. सिंहभारत के 15 वें वित्त आयोग के अध्यक्ष है।

भारत को 1 अरब डॉलर की आपातकालीन मदद देगा विश्व बैंक

  • दुनिया भर में तेजी से पैर पसार रहे कोरोना वायरस के प्रकोप से निपटने के लिए विश्व बैंक ने विकासशील देशों को तत्काल मदद देने का फैसला किया है। इसके तहत बैंक भारत को एक अरब डॉलर की आपातकालीन आर्थिक मदद देगा। बैंक के कार्यकारी निदेशक इस संबंध में एक प्रस्ताव पर सहमति जताई है।
  • विश्वबैंक ने आर्थिक मदद के तौर पर पहले चरण में 25 देशों को विशेष आपातकालीन मदद देने का ऐलान किया है जिसके बाद वो और 40 देशों की मदद करेगा। इसके तहत पहले चरण में अफ्रीका, पूर्वी एशिया और पेसिफिक, दक्षिण एशिया, यूरोप और केंद्रीय एशिया, मध्यपूर्व और उत्तरी अफ्रीका के कई देश शामिल होंगे। भारत भी इनमें से एक है।
  • भारत को विश्व बैंक से मिलने वाली 1 अरब डॉलर की आपातकालीन मदद से कोरोना वायरस के प्रसार को रोकने में काफी हद तक सफलता मिलने की उम्मीद है। विश्व बैंक ने कहा है कि इस आर्थिक मदद से कोरोना वायरस की जांच करने, कॉन्टेक्ट ट्रेसिंग, प्रयोगशाला में जांच करने, जरूरी मेडिकल उपकरण खरीदने और मरीजों को रखने के लिए नए आइसोलेशन सेंटर बनाने में मदद मिलेगी। इसके साथ ही विश्व बैंक में पड़ोसी देश पाकिस्तान के लिए भी 20 करोड़ की आपातकालीन मदद देने की घोषणा की है।

विश्व बैंक क्या है?

  • विश्व बैंक और अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष की स्थापना एक साथ 1944 में ब्रेटन वुड्स सम्मेलन के दौरान हुई थी.उस समय इसका मकसद द्वितीय विश्व युद्ध और विश्ववयापी आर्थिक मंदी से जूझ रहे देशों में आई आर्थिक मंदी से निपटना था.इसका मुख्य उद्देश्य सदस्य राष्ट्रों को पुनर्निमाण और विकास के कार्यों में आर्थिक सहायता देना है. विश्व बैंक देशो को वित्त और वित्तीय सलाह देता है. विश्व बैंक एक अंतरराष्ट्रीय वित्तीय संस्था है जो कि ऋण प्रदान करती है. इसका मुख्यालय अमरीका की राजधानी वाशिंगटन डीसी में है.

‘एमएचआरडी एआईसीटीई कोविड-19 स्टूडेंट हेल्पलाइन पोर्टल’

  • ‘कोविड-19’ के प्रकोप और 25 मार्च से किए गए देशव्‍यापी लॉकडाउन की वजह से कॉलेजों एवं छात्रावासों को बंद करने के कारण कुछ विद्यार्थियों को कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। अत: इन विद्यार्थियों को सहायता एवं सहयोग प्रदान करने के लिए एआईसीटीई (अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद) ने एक अनूठा ‘एमएचआरडी एआईसीटीई कोविड-19 स्टूडेंट हेल्पलाइन पोर्टल’ लॉन्च किया है, ताकि उनकी समस्‍याओं का निवारण हो सके।
  • यह पोर्टल अनिवार्य रूप से उन विद्यार्थियों को जोड़ने के लिए है, जिन्हें मदद की सख्‍त आवश्यकता है। इसके तहत जो सहयोग दिया जाएगा वह आवास, भोजन, ऑनलाइन कक्षाओं, उपस्थिति, परीक्षाओं, छात्रवृत्ति, स्वास्थ्य, परिवहन, उत्पीड़न से मुक्ति इत्‍यादि से संबंधित होगा।

कोविड-19 से लड़ने के लिए साइन, आईआईटी बांबे में त्वरित प्रतिक्रिया केंद्र की स्थापना की

  • भारत सरकार के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग ने वैश्विक महामारी कोविड-19 से लड़ने के लिए एक प्रतिक्रिया के रूप में उन नवोन्मेषों तथा स्टार्ट-अप्स की खोज करने, मूल्यांकन करने एवं सहायता करने जो कोविड-19 की चुनौतियों का समाधान करती हैं, के लिए 56 करोड़ रुपये की कुल लागत से कोविड-19 स्वास्थ्य संकट से युद्ध परिवर्धन के लिए केंद्र (कवच) की स्थापना को मंजूरी दे दी। डीएसटी द्वारा समर्थित आईआईटी बांबे में एक टेक्नोलॉजी बिजनेस इंक्यूबेटर, सोसाइटी फॉर इनोवेशन एंड एंटरप्रेन्योरशिप (साइन) की पहचान कवच के लिए कार्यान्वयन एजेंसी के रूप में की गई है।
  • एक वैश्विक महामारी के रूप में कोविड-19 के प्रकोप को देखते हुए, जिसने दुनिया भर के देशों को तत्काल कार्रवाई करने एवं लोगों के जीवन को बचाने के लिए रोग का पता लगाने, उपचार करने तथा संक्रमण को घटाने के लिए विवश़ करके रख दिया है, डीएसटी इस खतरे से लड़ने के लिए भारत के प्रयासों को तेज करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।

क्या है कवच का अधिदेश?

  • कवच का अधिदेश आवश्यक वित्तीय सहायता उपलब्ध कराने एवं उन नवोन्मेषों को लक्षित फंड प्रदान करने के जरिये संभावित स्टार्ट-अप्स को समयबद्ध सहायता उपलब्ध कराने का होगा जो अगले छह महीने की अवधि के दौरान बाजार में परियोजनयोग्य हैं।
  • कवच उन 50 नवोन्मेषों एवं स्टार्ट-अप्स की पहचान करेगा जो नवीन, निम्न लागत, सुरक्षित एवं कारगर वेंटिलेटरों, रेस्पिरेटरी एड्स, प्रोटेक्टिव गियर्स, सैनिटाइजर के लिए नवीन समाधानों, डिस्इंफेक्टैंट्स, डायगनोस्टिक्स, थेराप्यूटिक्स, इंफार्मेटिक्स एवं कोविड-19 पर नियंत्रण के लिए अन्य प्रभावी उपायों के क्षेत्र में हैं।
  • यह कोविड-19 के प्राथमिकता वाले समाधानों के चिन्हित क्षेत्रों में इन उत्पादों एवं साल्यूशंस के परीक्षण, जांच तथा बाजार तैनाती के लिए भारत भर के नेटवर्कों को पहुंच प्रदान करेगा। यह कोविड-19 के तेज दुष्प्रभाव के कारण देश के समक्ष प्रस्तुत विभिन्न चुनौतियों का सामना करने में मदद करेगा।
  • विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के सचिव प्रोफेसर आशुतोष शर्मा ने कहा, ‘ डीएसटी के कवच कार्यक्रम का फोकस हमारे टेक्नोलाजी इंक्यूबेटर्स एवं स्टार्ट-अप्स की युवा ऊर्जा, बुद्धिमत्ता एवं असाधारण नवोन्मेषी क्षमता का लाभ उठाने एवं उन्हें रेस्पिरेटरी एड्स, डिस्इंफेक्टरी सिस्टम, प्रोटेक्टिव गियर्स एवं कोटिंग्स, सूचना एवं निगरानी सहायता, डायगनोस्टिक्स एवं अन्य कई संगत सामग्रियों, उपकरणों तथा समाधानों से संबंधित कोविड-19 की बहुआयामी चुनौतियों के त्वरित समाधान में तेजी लाने में उन्हें सशक्त बनाता है। ‘

अस्पतालों के पृथक वार्ड के कचरे का प्रबंधन अब ‘आवश्यक सेवा’ का हिस्सा

  • कोरोना वायरस संक्रमण के मद्देनजर अस्पतालों में बनाए गए पृथक वार्ड और पृथक वास केन्द्रों से निकलने वाले कचरे का प्रबंधन/निपटान अब ‘‘आवश्यक सेवाओं’’ का हिस्सा होगा। कोरोना वायरस महामारी के मद्देनजर केन्द्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने अस्पतालों में बनाए गए कोविड-19 के लिए पृथक वार्ड और पृथक वास केन्द्रों से निकलने वाले कचरे के प्रबंधन/निपटान से जुड़ा सामान्य बायोमेडिकल कचरा उपचार एवं निपटान (सीबीडब्ल्यूटीएफ) अब ‘‘आवश्यक सेवाओं’’ का हिस्सा होगा।
  • प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने कहा है, ‘‘बोर्ड को बायो-मेडिकल कचरे का निपटारा करने के संबंध में कुछ दिक्कतें आने की सूचना मिली थी।’’ बोर्ड ने एक अधिसूचना में कहा, ‘‘इसलिए तय किया गया है कि अस्पतालों के कोविड-19 पृथक वार्ड, पृथक वास केन्द्रों आदि से बायो-मेडिकल कचरे को एकत्र करने, उसके परिवहन, उपचार आदि में शामिल सीबीडब्ल्यूटीएफ के कर्मचारी और बायोमेडिकल कचरा उपचार एवं निपटान (सीबीडब्ल्यूटीएफ) की सेवाओं को स्वास्थ्य सुविधाओं से जुड़ी आवश्यक सेवा माना जाए।’’ उसमें कहा गया है कि यह सुनिश्चित किया जाए कि सीबीडब्ल्यूटीएफ का कामकाज सामान्य रूप से चलता रहे। इससे पहले बोर्ड ने कोविड-19 से जुड़े कचरे के प्रबंधन के संबंध में दिशा-निर्देश जारी किया था।

:: अंतर्राष्ट्रीय समाचार ::

पेरू में लिंग आधारित क्वारंटाइन

  • पूरी दुनिया में कोरोना वायरस का कहर जारी है। करीब एक तिहासी से ज्यादा आबादी अपने घरों में कैद है। इस बीच कोरोना से निपटने के लिए पेरू ने एक अलग तरह के नियम की घोषणा की है। दरअसल, पेरू ने कोरोना वायरस को फैलने से रोकने के लिए लिंग आधारित क्वारंटाइन की घोषणा की है। इसके अनुसार अब एक दिन सिर्फ महिलाएं घर से बाहर निकलेंगी तो दूसरे दिन सिर्फ पुरुष घर से बाहर निकलेंगे। ये नियम शुक्रवार से लागू हो चुका है।
  • पेरू के राष्ट्रपति मार्टिन विजकारा ने इस नए नियम की घोषणा गुरुवार को की। अब तक पेरू में कोरोना वायरस के 1414 मामले सामने आ चुके हैं जिनमें 55 लोगों की मौत हो चुकी है।

क्या है नियम :

  • नए नियम के अनुसार सोमवार, बुधवार और शुक्रवार को सिर्फ पुरुष ही घर से बाहर जा सकेंगे। वहीं, मंगलवार, गुरुवार और शनिवार को सिर्फ महिलाएं ही घर से बाहर निकल सकेंगी। ये लिंग आधारित क्वारंटाइन का नियम 12 अप्रैल (रविवार) तक लागू रहेगा।
  • यह फैसला पनामा द्वारा लिंग आधारित क्वारंटाइन की घोषणा करने के ठीक दो दिन बाद लिया गया है। पनामा में भी महिलाओं और पुरुषों के लिए बाहर निकलने के खास दिन तय किए गए हैं। इस नियम को लागू करने का उद्देश्य लोगों से आग्रह करना है कि चूंकि उनके प्रियजन घर में क्वारंटाइन में हैं, इसलिए उन्हें जल्दी घर पहुंच जाना चाहिए।
  • पेरू ने कहा कि वह भी ऐसे ही नियम का पालन करेगा क्योंकि इससे अन्य देशों को सकारात्मक परिणाम मिले हैं। विजकारा ने कहा, इस नियम से ये पहचानने में आसानी रहेगी कि किसे बाहर नहीं रहने देना चाहिए।

ऑस्ट्रेलिया ने चीन मांस बाजार के खिलाफ कार्रवाई की अपील

  • कोरोनावायरस से दुनियाभर में अब तक 59 हजार 141 लोगों की मौत हो चुकी है। संक्रमितों की संख्या 10 लाख 98 हजार पहुंच गई है। वहीं, दो लाख 28 हजार 405 व्यक्ति स्वस्थ भी हुए हैं। ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री स्कॉट मॉरिसन ने विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्लयूएचओ) और संयुक्त राष्ट्र (यूएन) से मांस बाजार के खिलाफ कार्रवाई की अपील की। उन्होंने कहा कि चीन का यह मार्केट दुनिया के अन्य देशों और लोगों के लिए गंभीर खतरा है। माना जाता है कि पिछले साल दिसंबर में कोरोना की शुरुआत वुहान के अवैध पशु बाजार से ही शुरू हुई थी।
  • चीन में कोरोनावायरस से मरने वाले लोगों के लिए शनिवार को तीन मिनट का मौन रखा गया। इस दौरान पुरे देश में नेशनल फ्लैग का आधा झुकाकर रखा गया। देश में इस महामारी से करीब तीन हजार 300 लोगों की मौत हुई है। स्थानीय समय के अनुसार दस बजे (भारतीय समय के अनुसार 8.30 बजे सुबह) देशभर में मौन रखा गया। चीन में कोरोना का पहला मामला दिसंबर में वुहान शहर में सामने आया था।

कोरोना महामारी से लड़ने के लिए संयुक्त राष्ट्र महासभा ने प्रस्ताव किया अंगीकार

  • संयुक्त राष्ट्र महासभा ने सर्वसम्मति से भारत समेत दुनिया के 188 देशों का समर्थन प्राप्त करने वाले प्रस्ताव को अंगीकार कर लिया। इस प्रस्ताव में कोविड-19 की महामारी को खत्म करने के लिए अंतरराष्ट्रीय सहयोग तेज करने का प्रस्ताव दिया गया था और कहा गया था कि वायरस से ‘समाज और अर्थव्यवस्था को भीषण’ खतरा है।
  • इस प्रस्ताव का शीर्षक ‘कोविड-19 के खिलाफ लड़ाई में वैश्विक एकजुटता’ है। इस वैश्विक महामारी पर संयुक्त राष्ट्र द्वारा अंगीकार किया गया यह पहला दस्तावेज है। पूरी दुनिया में इस वायरस से संक्रमित लोगों की संख्या 10 लाख तक पहुंच गई है लेकिन संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में अब तक इस वैश्विक महामारी पर चर्चा नहीं हुई है।
  • इस दस्तावेज में कोरोना वायरस से पूरी दुनिया के समाज पर पड़ने वाले बुरे प्रभाव और अर्थव्यवस्था को पहुंचने वाला नुकसान शामिल है। इसके अलावा इसमें वैश्विक यात्रा और कारोबार के खतरे और लोगों की आजीविका का संकट भी शामिल किया गया है।
  • इसमें यह भी कहा गया है कि इस वायरस से निपटने में मानवाधिकार का पूरी तरह से सम्मान होना चाहिए और किसी भी तरह के भेदभाव की इसमें कोई जगह नहीं है। इस प्रस्ताव का घाना, इंडोनेशिया, नॉर्वे, सिंगापुर और स्विट्जरलैंड ने समर्थन किया है।

:: भारतीय राजव्यवस्था ::

राष्ट्रीय सुरक्षा कानून -1980 (National security act NSA)

  • कोराना वायरस Coronavirus के संक्रमण के बीच कोरोना वॉरियर्स पर हो रहे हमलों से गुस्‍साए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ yogi adityanath ने स्‍पष्‍ट कर दिया कि पुलिस तथा मेडिकल टीम पर हमला करने वालों के खिलाफ राष्ट्रीय सुरक्षा कानून NSA(एनएसए) के तहत कार्रवाई होगी। यहां यह जानना जरूरी है कि आखिर क्‍या है राष्ट्रीय सुरक्षा कानून NSA? जानिए कब बना था ये कानून? किन नागरिकों को पकड़ा जा सकता है? इसमें कितने महीने जेल में रहने की सजा मिलती है?

क्‍या है राष्ट्रीय सुरक्षा कानून NSA 1980 (National security act NSA)

  • नाम से ही स्‍पष्‍ट है कि ये कानून जो राष्‍ट्रीय सुरक्षा में बाधा डालने वालों पर नकेल डालने का काम करे। अर्थात राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम-1980, देश की सुरक्षा के लिए सरकार को अधिक शक्ति देने से संबंधित एक कानून है। अगर सरकार को लगता कि कोई व्यक्ति कानून-व्यवस्था को सुचारू रूप से चलाने में उसके सामने बाधा खड़ा कर रहा है तो वह उसे एनएसए के तहत गिरफ्तार करने का आदेश दे सकती है। साथ ही, अगर उसे लगे कि वह व्यक्ति आवश्यक सेवा की आपूर्ति में बाधा बन रहा है तो वह उसे एनएसए के तहत गिरफ्तार करवा सकती है।

कब हुआ था लागू

  • रासुका यानी राष्ट्रीय सुरक्षा कानून NSA 23 सितंबर, 1980 को इंदिरा गांधी की सरकार के कार्यकाल में अस्‍तित्‍व में आया था। ये कानून देश की सुरक्षा मजबूत करने के लिए सरकार को अधिक शक्ति देने से संबंधित है। यह कानून केंद्र और राज्य सरकार को संदिग्ध व्यक्ति को हिरासत में लेने की शक्ति देता है। सीसीपी, 1973 के तहत जिस व्यक्ति के खिलाफ आदेश जारी किया जाता है, उसकी गिरफ्तारी भारत में कहीं भी हो सकती है।

कब-कब हो सकती है गिरफ्तारी

  • अगर सरकार को लगता है कि कोई व्यक्ति उसे देश की सुरक्षा सुनिश्चित करने वाले कार्यों को करने से रोक रहा है तो वह उसे एनएसए के तहत गिरफ्तार करने की शक्ति दे सकती है। 
  • यदि सरकार को लगता है कि कोई व्यक्ति कानून व्यवस्था को सुचारू रूप से चलाने में उसके सामने बाधा खड़ी कर रहा है को वह उसे हिरासत में लेने का आदेश दे सकती है।
  • इस कानून का इस्तेमाल जिलाधिकारी, पुलिस आयुक्त, राज्य सरकार अपने सीमित दायरे में भी कर सकती है।

कितने महीने जेल में

  • राष्ट्रीय सुरक्षा कानून NSA के तहत किसी संदिग्ध व्यक्ति को बिना किसी आरोप के 12 महीने तक जेल में रखा जा सकता है। राज्य सरकार को यह सूचित करने की आवश्यकता है कि NSA के तहत व्यक्ति को हिरासत में लिया गया है।
  • राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम के तहत हिरासत में लिए गए व्यक्ति को उनके खिलाफ आरोप तय किए बिना 10 दिनों के लिए रखा जा सकता है। हिरासत में लिया गया व्यक्ति उच्च न्यायालय के सलाहकार बोर्ड के समक्ष अपील कर सकता है लेकिन उसे मुकदमे के दौरान वकील की अनुमति नहीं है।

यह होती है पूरी प्रक्रिया

  • कानून के तहत उसे पहले तीन महीने के लिए गिरफ्तार किया जा सकता है। फिर, आवश्यकतानुसार, तीन-तीन महीने के लिए गिरफ्तारी की अवधि बढ़ाई जा सकती है। एकबार में तीन महीने से अधिक की अवधि नहीं बढ़ाई जा सकती है। अगर, किसी अधिकारी ने ये गिरफ्तारी की हो तो उसे राज्य सरकार को बताना होता है कि उसने किस आधार पर ये गिरफ्तारी की है। जब तक राज्य सरकार इस गिरफ्तारी का अनुमोदन नहीं कर दे, तब तक यह गिरफ्तारी बारह दिन से ज्यादा नहीं हो सकती। अगर अधिकारी पांच से दस दिन में जवाब दाखिल करता है तो ये अवधि 12 की जगह 15 दिन की जा सकती है। अगर रिपोर्ट को राज्य सरकार मंजूर कर देती है तो इसे सात दिनों के भीतर केंद्र सरकार को भेजना होता है। इसमें इस बात का जिक्र करना आवश्यक है कि किस आधार पर यह आदेश जारी किया गया और राज्य सरकार का इसपर क्या विचार है और यह आदेश क्यों जरूरी है।

क्‍यों पड़ी जरूरत?

रामपुर, मेरठ, मुजफ्फनगर तथा अलीगढ़ में मेडिकल टीम पर हमले की जानकरी मिलने के बाद से यह कदम उठाया गया हैं। पुलिस तथा मेडिकल टीम पर हमला करने वालों के खिलाफ राष्ट्रीय सुरक्षा कानून NSA(एनएसए) के तहत कार्रवाई होगी।

पीआईएल की दुकानों को बंद करने की मांग: सॉलिसिटर जनरल

  • केंद्र सरकार ने मजदूरों के पलायन पर सुप्रीम कोर्ट में दायर एक जनहित याचिका पर कहा है कि एसी कमरों में बैठकर जनहित याचिका दाखिल करने से कोई फायदा नहीं होता. सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने इन याचिकाओं पर आपत्ति जताते हुए कहा कि पीआईएल की दुकानों को बंद करना चाहिए.

पृष्टभूमि

  • दरअसल कोरोना के चलते पूरे देश में लॉकडाउन की परिस्थिति में पलायन कर रहे मजदूरों को लेकर सुप्रीम कोर्ट (Supreme court) में हर्ष मंदर, प्रशांत भूषण समेत कई वकीलों ने एक जनहित याचिका दायर की थी. जिसमें कहा गया था कि शेल्टर होम्स में पर्याप्त स्वच्छता और सुविधा नहीं मिल पा रही है. अतः उन लोगों के लिए होटल और रिसॉर्ट्स की व्यवस्था की जाये. इस याचिका को कोर्ट ने ये कहते हुए खारिज कर दिया कि लाखों लोगों के पास लाखों विचार हैं. हम सभी के विचार नहीं सुन सकते और इसके लिए सरकार को बाध्य नहीं कर सकते.

क्या है जनहित याचिका?

  • भारतीय नागरिकों के मूल अधिकारों का हनन हो रहा है तो हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर अधिकारों की रक्षा की गुहार लगाई जा सकती है। हाईकोर्ट में अनुच्छेद-226 के तहत और सुप्रीम कोर्ट में अनुच्छेद-32 के तहत याचिका दायर की जा सकती है।
  • अगर किसी एक आदमी के अधिकारों का हनन हो रहा है तो उसे निजी यानि पर्सनल इंट्रेस्ट लिटिगेशन माना जाएगा और अगर ज्यादा लोग प्रभावित हो रहे हैं तो उसे जनहित याचिका माना जाएगा। पीआईएल डालने वाले शख्स को अदालत को यह बताना होगा कि कैसे उस मामले में आम लोगों का हित प्रभावित हो रहा है। दायर की गई याचिका जनहित है या नहीं, इसका फैसला कोर्ट ही करता है। जनहित याचिका, भारतीय कानून में, सार्वजनिक हित की रक्षा के लिए मुकदमे का प्रावधान है। अन्य सामान्य अदालती याचिकाओं से अलग, इसमे यह आवश्यक नहीं की पीड़ित पक्ष स्वयं अदालत में जाए, यह किसी भी नागरिक या स्वयं न्यायालय द्वारा पीडितों के पक्ष में दायर किया जा सकता है।
  • यहां पर यह ध्यान देने की बात है कि जनहित याचिका भारतीय संविधान या किसी कानून में परिभाषित नहीं है, बल्कि यह उच्चतम न्यायालय के संवैधानिक व्याख्या से व्युत्पन्न है, जिसका कोई अंत‍‍‍र्राष्ट्रीय समतुल्य नहीं है और इसे एक विशिष्ट भारतीय संप्रल्य के रूप में देखा जाता है। यूं तो इस प्रकार की याचिकाओं का विचार सबसे पहले अमेरिका में जन्मा। जहां इसे 'सामाजिक कार्यवाही याचिका' कहते हैं। यह न्यायपालिका का आविष्कार तथा न्यायधीश निर्मित विधि है। जबकि, भारत में जनहित याचिका पी.एन. भगवती ने प्रारंभ की थी।

आयोग ने कोविड-19 को देखते हुए राज्‍य सभा के चुनाव किए स्‍थगित

  • सार्वजनिक स्वास्थ्य आपातकाल की वर्तमान अप्रत्याशित स्थिति को देखते हुए, भारत के निर्वाचन आयोग ने जन प्रतिनिधित्व कानून, 1951 की धारा 153 के साथ भारत के संविधान के अनुच्छेद 324 के तहत अपनी शक्तियों का उपयोग करते हुए सात राज्यों की 18 सीटों के लिए राज्यसभा चुनाव की अवधि को आगे बढ़ा दिया है ।
  • उल्‍लेखनीय है कि 25.02.2020 और 6 मार्च 2020 को जारी अधिसूचना में भारत के निर्वाचन आयोग ने अप्रैल 2020 में सेवानिवृत्त होने वाले सदस्यों में से 17 राज्यों की 55 सीटों को भरने के लिए राज्यों की परिषद के चुनाव की घोषणा की थी। नाम वापसी की अंतिम तिथि 18.03.2020 को, संबंधित निर्वाचन अधिकारियों ने 10 राज्यों में 37 सीटों को निर्विरोध निर्वाचित घोषित कर दिया। इसके बाद संबंधित निर्वाचन अधिकारियों से प्राप्त रिपोर्टों के अनुसार, आंध्र प्रदेश, गुजरात, झारखंड, मध्य प्रदेश, मणिपुर, मेघालय और राजस्थान राज्यों की 18 सीटों के लिए द्विवार्षिक चुनाव 26.03.2020 को होने थे और चुनाव प्रक्रिया 30 मार्च 2020 तक पूरी होनी थी।

निर्वाचन आयोग क्या है?

  • भारत निर्वाचन आयोग एक स्‍वायत्‍त संवैधानिक प्राधिकरण है जो भारत में निर्वाचन प्रक्रियाओं के संचालन के लिए उत्‍तरदायी है। यह निकाय भारत में लोक सभा, राज्‍य सभा, राज्‍य विधान सभाओं और देश में राष्‍ट्रपति एवं उप-राष्‍ट्रपति के पदों के लिए निर्वाचनों का संचालन करता है। निर्वाचन आयोग संविधान के अनुच्‍छेद 324 और बाद में अधिनियमित लोक प्रतिनिधित्‍व अधिनियम के प्राधिकार के तहत कार्य करता है

:: भारतीय अर्थव्यवस्था ::

एडीबी ने भारत की आर्थिक विकास दर घटकर चार फीसदी रहने का लगाया अनुमान

  • कोरोना वायरस वैश्विक महामारी के कारण दुनियाभर में पैदा हुए स्वास्थ्य आपात के बीच, एशियाई विकास बैंक (एडीबी) ने अनुमान जताया है कि वित्त वर्ष 2021 में भारत की आर्थिक विकास दर घटकर चार फीसदी रह सकती है।
  • बैंक ने अपने ‘एशियन डेवलपमेंट आउटलुक’ (एडीओ) 2020 में कहा कि भारत में सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) की वृद्धि अगले वित्त वर्ष में 6.2 प्रतिशत तक मजबूत होने से पहले वित्त वर्ष 2021 में घटकर चार फीसदी रह सकती है।

क्या है एशियाई विकास बैंक?

  • एशियाई विकास बैंक (एडीबी) एक क्षेत्रीय विकास बैंक है जिसकी स्थापना 19 दिसंबर 1966 को एशियाई देशों के आर्थिक विकास के सुगमीकरण के लिए की गयी थी। एडीबी (ADB) का प्रारूप काफी हद तक वर्ल्ड बैंक के आधार पर बनाया गया था और वर्ल्ड बैंक (विश्व बैंक) के समान यहां भी भारित वोट प्रणाली की व्यवस्था है जिसमे वोटों का वितरण सदस्यों के पूंजी अभिदान अनुपात के आधार पर किया जाता है। इसका मुख्यालय “मनीला”, फिलीपींस में स्थित हैl

:: विज्ञान और प्रौद्योगिकी ::

कोरोना वायरस वैक्सीन के लिए दूसरा ट्रायल शुरू करेगा डब्ल्यूएचओ

  • विश्व स्वास्थ्य संगठन ( डब्ल्यूएचओ ) ने कहा कि वह जल्द ही कोरोना वायरस वैक्सीन के लिए दूसरा ट्रायल शुरू करेगा। संगठन की दक्षिण-पूर्व एशिया की क्षेत्रीय निदेशक डॉ. पूनम खेत्रपाल सिंह ने एक प्रेस वक्तव्य में कहा कि डब्ल्यूएचओ जल्द ही सॉलिडरिटी ट्रायल के लिए दूसरा प्रोटोकॉल शुरू करने जा रहा है।
  • संक्रमण और वायरस के भविष्य के व्यवहार को समझने में मदद मिलेगी। कई देशों में किए जाने वाले इस परीक्षण में शामिल होने के लिए भारत, इंडोनेशिया और थाईलैंड पहले ही हस्ताक्षर कर चुके हैं। उन्होंने कहा कि ट्रायल के दौरान कोविड-19 के खिलाफ चार अलग-अलग दवाओं या दवा के संयोजन की सुरक्षा और प्रभावशीलता की तुलना की जाएगी। क्षेत्रीय निदेशक ने सॉलिडरिटी ट्रायल में भाग लेने के लिए इस क्षेत्र के देशों की सराहना की।
  • इससे पहले गुरुवार को विश्व स्वास्थ्य संगठन के प्रमुख डॉ टेड्रोस एडनोम घेब्रेयेसस ने एक संवाददाता सम्मेलन में कहा कि सॉलिडरिटी ट्रायल के दौरान कोविड-19 के संभावित उपचार का आकलन किया जाएगा। पहले से ही 74 देश या तो परीक्षण में शामिल हो चुके हैं या इसमें शामिल होने की प्रक्रिया में हैं। 200 से अधिक रोगियों पर दवाओं का परीक्षण किया जाएगा।

पृष्ठभूमि

  • कोरोना वायरस का कहर कम होने का नाम नहीं ले रहा। स्पेन में पिछले चौबीस घंटों में 932 लोगों की जान गई है। गुरुवार को यह आंकड़ा 950 था। वहां मृतकों की कुल तादाद 10,935 हो गई है। खास बात यह है कि अमेरिका के बाद स्पेन में सबसे ज्यादा लोग संक्रमित हैं। इनकी संख्या 1,17,710 है। यह हाल तब है, जब स्पेन की आबादी अमेरिका से सात गुना कम है। महामारी से राजधानी मैड्रिड सबसे ज्यादा प्रभावित है। वहां पर 4400 से ज्यादा मौतें हुई हैं। राजधानी के नर्सिग होम बीमार लोगों से भरे पड़े हैं और यहां रहने वाले पचास हजार बुजर्ग लोगों को सबसे ज्यादा खतरा है।

‘इम्युनिटी पासपोर्ट’

  • गुरुवार को प्रधानमंत्री ने सभी राज्यों के मुख्यमंत्रियों से सलाह मांगी की कैसे लॉकडाउन को खत्म करके धीरे-धीरे सामान्य जनजीवन बहाल किया जाए। द गार्जियन के अनुसार पूरी दुनिया में इस बात की चिंता है कि एक बार कोरोना वायरस के खिलाफ लड़ाई जीतने के बाद कैसे सामान्य जनजीवन बहाल किया जाए, ताकि कोरोना वायरस का संक्रमण फिर से न फैले। चीन से संकेत मिल चुके हैं कि सही हो चुके मरीजों में कोरोना संक्रमण के लक्षण फिर से उभर आए। जर्मनी ने इस दिशा में पुख्ता पहल की है और ब्रिटेन ने आधिकारिक रूप से इस योजना में रुचि दिखाई है। योजना है ‘इम्युनिटी पासपोर्ट’।
  • आपको सामान्य पासपोर्ट के बारे में शायद सब कुछ पता होगा। यह आपको विदेश यात्रा का पहला अधिकार और योग्यता देता है। इसके बाद वीजा और इमिग्रेशन जैसी शर्तें होती हैं, जिन्हें पूरा करके ही आप विदेश यात्रा कर सकते हैं। जैसे विदेश यात्रा के लिए पासपोर्ट जरूरी होता है वैसे ही कोरोना वायरस के बाद की दुनिया में इम्युनिटी पासपोर्ट होगा, जो आपको काम करके का अधिकार देगा।

योजना जरूरी क्यो :

  • लॉकडाउन के कारण औद्योगिक उत्पादन ठप हो गया है। सामान्य दुकानों से लेकर स्कूल तक बंद हैं। द गार्जियन के अनुसार दुनिया को हर दिन अरबों डॉलर की आर्थिक चपत लग रही है। ऐसे में वर्क फोर्स को दोबारा काम पर लगाने की चुनौती है। जर्मनी ने इस दिशा में पहल की है। उसने इम्युनिटी पासपोर्ट योजना पर लॉकडाउन का फैसला करने के साथ ही काम करना शुरू कर दिया था। जिन लोगों के पास इम्युनिटी पासपोर्ट होगा उन्हें सबसे पहले काम पर आने का मौका मिलेगा। कोरोना वायरस का हमला अगर दोबारा नहीं होता है तो फिर धीरे-धीरे अन्य लोगों को।

ये कर रहे हैं शोध :

  • जर्मनी के रॉबर्ट रोच इंस्टीट्यूट, जर्मन इंस्टीट्यूट ऑफ वायरस इंफेक्शन और बर्लिन के चैरिएट अस्पताल के इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी को जर्मनी के सार्वजनिक स्वास्थ्य मंत्रालय ने इस प्रोजेक्ट पर लगाया है। ब्लड डोनेशन में लगे एनजीओ से मदद ली जा रही है ताकि ज्यादा से ज्यादा सैंपल एकत्रित किए जा सकें। इस दौरान मानव शरीर में मौजूद लाखों तरीके की एंटी बॉडीज को पहचानने और उन्हें कोरोना से लड़ाई पर लगाने की युक्ति सोची जा रही है। स्वस्थ एंटी बॉडीज को पहचाना जाएगा, खासकर वे जो कोरोना के खिलाफ ताकतवर हैं।

ब्रिटेन भी तैयारी में :

  • ब्रिटेन के शैडो हेल्थ सेक्रेट्री जोनाथन एशवर्थ ने बताया कि जर्मनी ने पहल की है। हमारी नजर उनके टेस्ट पर है। हम अपने यहां अपनी जरूरतों के मुताबिक टेस्ट कराएंगे और इम्युनिटी पासपोर्ट योजना पर अमल करेंगे। यह अच्छी योजना शुरुआती रूप से लग रही है। हेलमोट्ज इंस्टीट्यूट फॉर इंफेक्शन रिसर्च के एपिडोलॉजी के अध्यक्ष डॉ. गेराड क्रूज ने बताया कि ये लोग (इम्युनिटी पासपोर्ट होल्डर) एक तरह के वैक्सिनेशन कार्यक्रम का हिस्सा होंगे, जिन्हें काम करने की रियायत दी जाएगी। हालांकि जर्मनी की सरकार ने आधिकारिक रूप से इस संबंध में अब तक कोई टिप्पणी नहीं की है।

कैसे तैयार किया जा रहा है इम्युनिटी पासपोर्ट :

  • जर्मनी ने मानव शरीर में मौजूद एंटी बॉडी को लेकर शुरुआती शोध पूरी कर लिया है। अप्रैल के मध्य तक एक लाख लोगों पर इसका प्रयोग किया जाएगा। कोरोना वायरस के प्रति इनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता को नापा और मापा जा रहा है। इसके बाद इस टेस्ट को बड़ी आबादी पर किया जाएगा। जिन लोगों की एंटी बॉडीज कोरोना वायरस के खिलाफ लड़ने में कामयाब रहेंगी उन्हें एक सर्टिफिकेट दिया जाएगा, जो इम्युनिटी पासपोर्ट कहलाएगा। लॉकडाउन के बाद ये लोग ही सबसे पहले अपने काम पर लौटेंगे।

पांच साल लागू रह सकती है योजना :

  • ब्रिटेन के सांसद और सर्जन डॉ. फिलिप विदफोर्ड ने बताया कि इससे मुश्किल काम में लगे लोगों को आसानी से वापसी का मौका मिलेगा। खासकर हेल्थ सिस्टम और हेल्थ सिस्टम के सहयोग में लगे लोगों को। उन्होंने बताया कि हम अब भी कोरोना वायरस के बारे में बहुत कुछ नहीं जानते हैं, ऐसे में सतर्क रहना ही होगा। ब्रिटिश सरकार के स्वास्थ्य सलाहकार प्रो. ओपनशॉ का कहना है कि इम्युनिटी पासपोर्ट योजना पांच साल तक अमल में लाई जा सकती है। यह हमें नए वायरसों के प्रभाव के बारे में भी जानने का मौका देगी।

युवाओं को लेकर चिंता :

  • हालांकि ब्रिटेन में योजना को लेकर चिंता भी है। खासकर कमजोर स्वास्थ्य वाले युवाओं को लेकर, जिन्होंने भारी कर्ज लेकर पढ़ाई की है। काम नहीं कर पाने के कारण उनका कर्ज बढ़ता ही जा रहा है। निश्चित रूप से इम्युनिटी पासपोर्ट के कारण उनका काम पर लौटना कठिन होगा। मगर स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मत है कि ऐसे लोगों के बारे में बाद में सोचा जा सकता है।

मरीजों की मस्तिष्क संबंधी समस्याएं भी बढ़ा रहा है कोरोना वायरस

  • कोरोना वायरस कोविड-19 की चपेट में आने वाले लोगों को खांसी, जुकाम, सीने में जकड़न, सांस लेने में कठिनाई और न्यूमोनिया ही नहीं मस्तिष्क संबंधी गंभीर दिक्कतों का भी सामना करना पड़ रहा है। डॉक्टरों के मुताबिक, कोरोना के कारण लोगों के दिमाग पर असर पड़ने को इंसेफैलोपैथी (Encephalopathy) के नाम से भी जाना जाता है। इसमें लोगों की दिमागी क्षमता प्रभावित होने के साथ ही सूंघने और स्वाद लेने की क्षमता घट जा रही है।

क्या हो रहा है प्रभाव

  • फ्लोरिडा के बोका रैटन अस्पताल में आए 74 वर्षीय एक मरीज का सांस लेने की दिक्कत के साथ वह मानसिक चेतना खो चुका था।
  • डेट्रायट की एक महिला मरीज सिर में दर्द रहने से यह भ्रम की शिकार हो गई है। उसके मस्तिष्क की स्कैनिंग करने पर कई हिस्सों में सूजन मिली। इन हिस्सों में कुछ कोशिकाएं (सेल) मृत भी पाई गईं। डाक्टरों ने इस दशा को काफी गंभीर बताते हुए इसे एक्यूट नेक्रोटाइजिंग इंसेफैलोपैथी का नाम दिया। यह दशा इंफ्लुएंजा जैसे वायरल संक्रमण के बिगड़ने के कारण पैदा होती है।
  • कोरोना पीडि़त कई मरीजों में पक्षाघात, सुन्नपन, रक्त के थक्के बनने के लक्षण मिले है। चिकित्सा विज्ञान में इन्हें एक्रोपैरेस्थेशिया भी कहा जाता है। कुछ मामलों में तो लोगों को बुखार चढ़ने और सांस की तकलीफ होने से पहले ही दिमागी हालत बिगड़ गई।
  • इटली के ब्रेसिया शहर में इलाज के लिए लाए गए इंसेफैलोपैथी के लक्षण वाले ज्यादातर मरीज भ्रमित और संज्ञाशून्य थे। ये कुछ बता नहीं पा रहे थे। इनमें से तो कई बेहोश भी हो जा रहे थे। विशेषज्ञों ने इस तरह के मरीजों का इलाज कर रहे डाक्टरों और अन्य चिकित्साकर्मियों को संक्रमण में आने से सावधान किया है।

अमेरिका में खोजी गई कोविड-19 वैक्सीन पिटकोवैक का सफल परीक्षण

  • कोरोनावायरस के खिलाफ भारत समेत पूरी दुनिया में जंग चल रही है और 10 लाख से ज्यादा लोग इससे संक्रमित हैं, जबकि अब तक 50 हजार से ज्यादा लोग मारे जा चुके हैं। दुनिया के अधिकांश देशों में लॉकडाउन जैसे कदम उठाए जा रहे हैं और सारा कारोबार चौपट हो चुका है। ऐसे में अमेरिकी वैज्ञानिकों की तरफ से एक अच्छी खबर आई है। उन्होंने चूहों पर संभावित वायरस परीक्षण में सफलता पाई है।
  • शोधकर्ताओं का कहना है कि उनकी खोजी गई वैक्सीन कोविड-19 से लड़ने के लिए पर्याप्त मात्रा में एंटीबॉडीज बनाने में सक्षम है। वैज्ञानिकों ने दावा किया है कि यह वैक्सीन इंजेक्ट करने के दो सप्ताह में ही वायरस को बेअसर करने में सक्षम होगी। चूहों पर परीक्षण के उत्साहजनक नतीजे मिलने के बाद शोधकर्ताओं ने अमेरिकी फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (एफडीए) से इसके मानव परीक्षण की अनुमति मांगी है।
  • कोरोनावायरस काफी कुछ सार्स और एमएआरएस नामक वायरस से मिलता जुलता है। वैज्ञानिकों ने चेताया, चूंकि पशुओं को बहुत लंबे वक्त तक ट्रैक नहीं किया गया है, ऐसे में यह कहना जल्दबाजी होगा कि इम्यून सिस्टम कोरोनावायरस से कितना लड़ सकता है। लेकिन चूहों पर यह टीका बेजोड़ साबित हुआ है। इसने इतने एंटीबॉडीज पैदा किए कि कम से कम साल भर तक यह वायरस को बेअसर करने में सक्षम है।

वैक्सीन का नाम पिटकोवैक

  • शोधकर्ताओं ने बताया कि कोविड-19 के साथ करीब से जुड़े दो वायरस (सार्स और मर्स) ने हमें स्पाइक प्रोटीन के बारे में सिखाया जो वायरस के खिलाफ इम्यूनिटी पैदा करने में अहम है। इस वैक्सीन को इन शोधकर्ताओं ने पिटकोवैक नाम दिया है। यह वायरल प्रोटीन के प्रयोगशाला में निर्मित टुकड़ों से बनकर प्रतिरोधी क्षमता बढ़ाता है जैसा कि फ्लू में होता है।

ऐसे होता है इस्तेमाल?

शोधकर्ताओं ने इसका प्रभाव बढ़ाने के लिए दवा देने की नई तकनीक का उपयोग किया उन्होंने  उंगली की नोंक के बराबर के 400 बहुत महीन सुइयों का पैच बनाया  जो त्वचा में स्पाइक प्रोटीन के टुकड़े इंजेक्ट कर देती है, जहां प्रतिरोधी क्षमता सबसे मजबूत होती है। यह पैच प्लास्टर की तरह चिपकता है और सुइयां त्वचा के अंदर चली जाती है, जो शुगर और प्रोटीन से बनी होती हैं।

शोध में शामिल रहे त्वचारोग विशेषज्ञ प्रोफेसर लुईस फालो ने बताया, हमने वही स्टार्च पद्धति अपनाई जो स्मॉल पॉक्स के टीके को लगाने के लिए उपयोग की जाती थी। लेकिन यह एक एक हाई टेक संस्करण हैं जो ज्यादा कारगर है और इसे दूसरे मरीजों से भी बनाया जा सकता है और इसमें दर्द भी नहीं होता। शोधकर्ताओं ने बताया कि इस वैक्सीन को बड़े पैमाने पर बनाया जा सकता है।

भारत के COVID-19 हॉटस्पॉट पर ‘एंटीबॉडी ब्लड टेस्ट’ की तैयारी शुरू

कोरोना वायरस के मामलों के बीच इसके इलाज के अनुसंधान भी तेज़ हो रहे है। ऐसे में इन मामलों की पहचान के लिए कोविड-19 हॉटस्पॉट या ऐसे इलाके जहां सबसे ज्यादा मामले मिले हैं, वहां के लोगों का ‘एंटीबॉडी ब्लड टेस्ट’ किया जाएगा। भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) ने अपने अंतरिम एडवाइजरी में कोरोना से प्रभावित इलाकों में रैपिड एंटीबॉडी ब्लड टेस्ट कराने का सुझाव दिया है।

आरटी और पीसीआर से होगी संक्रमित मामलों की पुष्टि

  • कोरोना संकट से निपटने को लेकर गठित नेशनल टास्क फोर्स की गुरूवार की बैठक में यह फैसला ये फैसला लिया गया है। आईसीएमआर ने अंतरिम एडवाइजरी में कहा, ज्यादा प्रभावित इलाकों के लोगों की जांच रैपिड एंटीबॉडी टेस्ट के जरिये की जा सकती है। संक्रमित पाए मामलों की पुष्टि गले या नाक से लिए नमूनों के आरटी-पीसीआर से की जाएगी।

प्राथमिक ड्राफ्ट तैयार होते शुरू होगा काम

  • कोरोना जांच नकारात्मक मिलने पर लोगों को घर पर क्वारंटीन रहना होगा। एंटीबॉडी ब्लड टेस्ट अन्य ब्लड टेस्ट की तरह है और इसका नतीजा 15 से 30 मिनट में आ जाता है। इससे पहले, स्वास्थ्य मंत्रालय ने देशभर में 20 हॉटस्पॉट की पहचान की थी, जहां कोरोना वायरस के सबसे अधिक मामले में मिले हैं। वहीं, 22 ऐसे स्थानों की भी पहचान की गई है, जो इस सूची में शामिल हो सकते हैं। इनकी पहचान के बाद ये काम शुरू किआ जाएगा। इस से अस्पतालों को चिकित्सा कर्मियों को कोरोना के इलाज़ में सहायक होने के आसार है।

हबल टेलीस्कोप ने ‘ब्लैक होल को खोजा

  • कोरोना वायरस को लेकर अमेरिका में बहुत खराब हालात होने के बाद भी नासा के वैज्ञानिकों ने अपना काम जारी रखा है और उन्हें पिछले कई सालों की मेहनत के नतीजे भी मिल रहे हैं. अब हबल टेलीस्कोप के ताजा आंकड़े ब्लैक होल (Black Hole) के होने के अब तक के सबसे बड़े सबूत देते दिख रहे हैं.
  • नासा और यूरोपीय स्पेस एजेंसी के संयुक्त कार्यक्रम के तहत भेजे गए हबल स्पेस टेलीस्कोप ने ब्रह्माण्ड में मौजूद मध्यम आकार के ब्लैक होल को होने के अब तक सबसे मजबूत प्रमाण भेजे हैं. नासा ने 1990 में हबल स्पेस टेलीस्कोप प्रक्षेपित किया था. हबल ने इस बात की पुष्टि की है कि यह ‘मध्यवर्ती द्रव्यमान’ (Intermediate mass) वाला ब्लैक होने एक घने तारा समूह में स्थित है.

मध्यवर्ती द्रव्यमान ब्लैक होल

  • मध्यवर्ती द्रव्यमान ब्लैक होल (IMBH) होने के विकास में एक ऐसे कड़ी थी जिसकी वैज्ञानिकों को शुरू से ही तलाश थी. अभी तक इस तरह के और ब्लैक होल मिलने के संकेत मिल चुके हैं. यह विशालकाय (Supermassive) ब्लैक होल की तुलना में छोटे होते हैं और बड़ी गैलेक्सी के केंद्र में स्थित होते हैं लेकिन ये नक्षत्रीय ब्लैग होल (Stellar-mass black holes) से बड़े होते हैं जो बड़े तारों केखत्म होने से बनते हैं. इस बार जो ब्लैक होल हबल ने देखा है वह हमारे सूर्य से 50,000 गुना ज्यादा बड़ा है.
  • मध्यवर्ती द्रव्यमान ब्लैक होल (IMBH) ब्लैक होल के बारे में अंतरिक्ष में पता लगाना आसान नहीं होता. वे विशालकाय ब्लैक होल के मुकाबले छोटे और कम सक्रिय होते हैं, उनके पास उर्जा का खुद का स्रोत नहीं होता, न ही उनके पास इतना ज्यादा गुरुत्वाकर्षण होता है कि वे लगातार तारों और अंतरिक्ष की दूसरी वस्तुओं को अपनी ओर खींच सकें.

ब्लैक होल क्या है?

  • ब्लैक होल स्पेस में वह जगह है जहां भौतिक का कोई नियम काम नहीं करता। मतलब समय और स्थान का कोई मतलब नहीं है। यहां बस गुरुत्वाकर्षण और अंधकार है। इसका गुरुत्वाकर्षण इतना शक्तिशाली होता है कि जिसकी आप कल्पना नहीं कर सकते हैं। इसके खिंचाव से यह प्रकाश को भी अवशोषित कर लेता है। मतलब यह कि इसमें जो भी डाला, वह बाहर नहीं निकलेगा।

भारतीय वैज्ञानिकों ने विकसित की पेपर-स्ट्रिप किट

  • वैज्ञानिक तथा औद्योगिक अनुसंधान परिषद (सीएसआईआर) के वैज्ञानिकों को कोविड-19 के त्वरित परीक्षण के लिए एक नई किट विकसित में बड़ी सफलता मिली है। सीएसआईआर से संबद्ध नई दिल्ली स्थित जिनोमिकी और समवेत जीव विज्ञान संस्थान (आईजीआईबी) के वैज्ञानिकों द्वारा विकसित यह एक पेपर-स्ट्रिप आधारित परीक्षण किट है, जिसकी मदद से कम समय में कोविड-19 के संक्रमण का पता लगाया जा सकता है।
  • यह पेपर स्ट्रिप-आधारित परीक्षण किट आईजीआईबी के वैज्ञानिक डॉ सौविक मैती और डॉ देबज्योति चक्रवर्ती की अगुवाई वाली एक टीम ने विकसित की है। यह किट एक घंटे से भी कम समय में नये कोरोना वायरस (एसएआरएस-सीओवी-2) के वायरल आरएनए का पता लगा सकती है। वैज्ञानिकों का कहना है कि आमतौर पर प्रचलित परीक्षण विधियों के मुकाबले यह एक पेपर-स्ट्रिप किट काफी सस्ती है और इसके विकसित होने के बाद बड़े पैमाने पर कोरोना के परीक्षण चुनौती से निपटने में मदद मिल सकती है।

कैसे कार्य करता है पेपर-किट?

  • आईजीआईबी के वैज्ञानिक डॉ देबज्योति चक्रवर्ती ने इंडिया साइंस वायर को बताया कि “संक्रमण के शिकार संदिग्ध व्यक्तियों में कोरोना वायरस के जीनोमिक अनुक्रम की पहचान करने के लिए इस पेपर-किट में जीन-संपादन की अत्याधुनिक तकनीक क्रिस्पर-कैस-9 का उपयोग किया गया है।” इस किट की एक खासियत यह है कि इसका उपयोग तेजी से फैल रही कोविड-19 महामारी का पता लगाने के लिए व्यापक स्तर पर किया जा सकेगा।
  • अभी इस परीक्षण किट की वैद्यता का परीक्षण किया जा रहा है, जिसके पूरा होने के बाद इसका उपयोग नये कोरोना वायरस के परीक्षण के लिए किया जा सकेगा। इस किट के आने से वायरस के परीक्षण के लिए वर्तमान में इस्तेमाल की जाने वाली महँगी रियल टाइम पीसीआर मशीनों की जरूरत नहीं पड़ेगी। नई किट के उपयोग से परीक्षण की लागत करीब 500 रुपये आती है।

:: पर्यावरण और पारिस्थितिकी ::

2021 में 16 से ज्यादा खतरनाक समुद्री तूफानों की भविष्यवाणी

  • इस साल के शुरुआत में ही खतरनाक कोरोना वायरस के दस्तक ने पूरी दुनिया को आतंकित कर रखा है। मगर कोरोना वायरस के बाद भी खतरे के बादल मंडराएंगे। कोलोराडो स्टेट यूनिवर्सिटी के मौसम विज्ञानियों ने इस साल दुनियाभर में 16 से ज्यादा समुद्री तूफान आने का पूर्वानुमान लगाया है। इनमें आठ हेरिकन भी शामिल हैं। इन आठ में चार तूफान बेहद खतरनाक और शक्तिशाली होंगे।
  • विशेषज्ञों ने कहा, हमें इस साल फिर से बड़ी गतिविधियां होने के संकेत मिले हैं। मौसम विज्ञानी फिल क्लॉटजबेक ने कहा, हमारा अनुमान है कि 2020 में अटलांटिक बेसिन हरिकेन मौसम की गतिविधि सामान्य से उपर होगी। जिन हरिकेन तूफान की श्रेणी 3 से 5 होगी, वो बड़े तूफान बन जाएंगे। इनमें 111 मील प्रति घंटे और इससे अधिक गति की तेज हवाएं चलेंगी। अनुमान है कि ये तूफान 1 जून से 30 नवंबर के हरिकेन मौसम के दौरान आएंगे।

भूस्खलन होने के संकेत भी मिले:

  • लॉटजबेक ने कहा, इन बड़े तूफानों से भूस्खलन होने के संकेत भी मिले हैं। उनके मुताबिक, इस साल कम-से-कम एक बड़े तूफान से अमेरिका के तटों के पास 69 फीसदी भूस्खलन होने की संभावना है। हालांकि, पूर्वानुमान में सटीक रूप से यह अनुमान नहीं लग पाया है कि तूफान कहां पर हमला कर सकते हैं और किसी स्थान पर भू-स्खलन की संभावना कम है। क्लॉटजबेक और अन्य विशेषज्ञों ने बताया कि अटलांटिक बेसिन में प्रतिवर्ष औसतन 12 उष्णकटिबंधीय *तूफान होते हैं, जिनमें से छह *हरिकेन होते हैं।

जानें क्या है हरिकेन:

  • हरिकेन एक प्रकार का तूफान है, जिसे उष्णकटिबंधीय चक्रवात कहा जाता है। ये शक्तिशाली व विनाशकारी तूफान होते हैं। इनक उत्पत्ति अटलांटिक बेसिन में होती है। वैज्ञानिकों के मुताबिक, एक उष्णकटिबंधीय तूफान तब एक हरिकेन बन जाता है, जब इसकी हवा की गति 74 मील प्रति घंटे तक पहुंच जाती है। इसकी तीव्रता को सैफिर-सिंपसन हरिकेन विंड स्केल (saffir-simpson hurricane wind scale) से मापा जाता है|।

ये तूफान आएंगे :

  • आर्थुर , बेरथा, क्रिस्टोबल, डॉली, एडुअर्ड,  फे, गोंजालो, हन्ना, इजाइअस, जोसफिन, केली , लौरा, मार्को , नाना, ओम , पौलेट, रेने, सैली, टेडी, विक्की, विल्फ्रेड
  • इनमें आठ तूफान हेरिकेन श्रेणी के होंगे, चार तबाही वाले होंगे, बाकी सामान्य प्रकार के। वैज्ञानिकों ने इन सभी के नाम भी तय कर दिए।

:: विविध ::

फीफा ने अंडर 19 महिला विश्व कप स्थगित किया

  • भारत में नवंबर में होने वाला फीफा अंडर 17 महिला विश्व कप कोरोना वायरस महामारी के कारण स्थगित कर दिया गया । यह टूर्नामेंट पांच शहरों कोलकाता, गुवाहाटी, भुवनेश्वर, अहमदाबाद और नवी मुंबई में दो से 21 नवंबर के बीच होना था । टूर्नामेंट में 16 टीमें भाग लेने वाली थी जिसमें मेजबान होने के नाते भारत को स्वत: प्रवेश मिला था । यह अंडर 17 महिला विश्व कप में भाग लेने का भारत का पहला मौका था । फीफा परिसंघों के कार्यसमूह ने यह फैसला लिया।
  • फीफा परिषद के ब्यूरो ने कोरोना वायरस महामारी के परिणामों से निपटने के लिये इस कार्यसमूह का गठन किया है । कार्यसमूह ने फीफा परिषद से पनामा कोस्टा रिका में 2020 में होने वाला फीफा अंडर 20 विश्व कप भी स्थगित करने का अनुरोध किया

:: प्रिलिम्स बूस्टर ::

  • हाल ही में संयुक्त राष्ट्र के द्वारा कोविड-19 महामारी को समाप्त करने के लिए स्वीकार किए गए प्रस्ताव का शीर्षक क्या है? (‘कोविड-19 के खिलाफ लड़ाई में वैश्विक एकजुटता’)

  • किस देश के द्वारा पृथक दिन पर महिलाओं और पुरुषों को घर से बाहर निकलने संबंधी क्वारंटाइन (QUARANTINE) नियम की घोषणा की गई है? (पेरु और पनामा)

  • हाल ही में निर्वाचन आयोग ने किन प्रावधानों के तहत राज्यसभा चुनाव की अवधि को आगे बढ़ाया है? (जन प्रतिनिधित्व कानून, 1951 की धारा 153 और अनुच्छेद 324)

  • ‘एशियन डेवलपमेंट आउटलुक’-2020 को जारी करने से चर्चा में रहे एशियाई विकास बैंक की स्थापना कब की गई थी एवं इसका मुख्यालय कहाँ है? (1966, मनीला-फिलीपींस)

  • चर्चा में रहे ‘राष्ट्रीय सुरक्षा कानून’ (National security act-NSA) को कब लागू किया गया था? (1980)

  • कोरोना वायरस कोविड-19 से ग्रसित मरीजों दिमागी क्षमता प्रभावित होने को किस बीमारी के तहत संबोधित किया जाता है? (इंसेफैलोपैथी -Encephalopathy)

  • चर्चा में रहे जनहित याचिका के जन्मदाता कौन थे एवं किस अनुच्छेद के तहत मूल अधिकारों के हनन पर न्यायालय की शरण ली जा सकती है? (पी.एन. भगवती, हाईकोर्ट में अनुच्छेद-226 और सुप्रीम कोर्ट में अनुच्छेद-32)

  • अमेरिका के द्वारा जानवरों पर सफल परीक्षण किए गए कोरोनावायरस के संभावित वैक्सीन का क्या नाम है? (पिटकोवैक-PittCoVacc)

  • हाल ही में चर्चा में रहे राज्‍य आपदा राहत कोष (SDRF) का गठन किस अधिनियम के तहत किया गया एवं इसमें केंद्र-राज्य की भागीदारी कितनी होती है? (आपदा प्रबंधन अधिनियम 2005, क्रमशः 90:10)

  • हाल ही में चर्चा में रहे वित्त आयोग का गठन संविधान के किस अनुच्छेद के तहत किया जाता है एवं वर्तमान 15 वें वित्त आयोग के अध्यक्ष कौन हैं? (अनुच्छेद 280, श्री एन.के. सिंह)

  • कोविड-19 हेतु भारत को 1 अरब डॉलर की आपातकालीन मदद देने वाली संस्था विश्व बैंक की स्थापना कब हुई थी एवं इसका मुख्यालय कहाँ है? (ब्रेटन वुड्स सम्मेलन 1944, वाशिंगटन- अमेरिका)

  • हाल ही में ब्लैक होल की खोज करने से चर्चा में रहे ‘हबल स्पेस टेलीस्कोप’ किस स्पेस एजेंसी का मिशन है? (नासा और यूरोपीय स्पेस एजेंसी)

  • हाल ही में चर्चा में रहे ‘हरिकेन तूफान’ की तीव्रता किस स्केल पर नापी जाती है? (सैफिर-सिंपसन हरिकेन विंड स्केल-Saffir-simpson hurricane wind scale)

 

 

 

स्रोत साभार: Dainik Jagran (Rashtriya Sanskaran), Dainik Bhaskar (Rashtriya Sanskaran), Rashtriya Sahara (Rashtriya Sanskaran) Hindustan Dainik (Delhi), Nai Duniya, Hindustan Times, The Hindu, BBC Portal, The Economic Times (Hindi & English), PTI, PIB

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