(दैनिक समसामयिकी और प्रिलिम्स बूस्टर) यूपीएससी और सभी राज्य लोक सेवा आयोग परीक्षाओं के लिए हिंदी में समाचार पत्रों का संकलन (03 मई 2020)

दैनिक समसामयिकी और प्रिलिम्स बूस्टर


(दैनिक समसामयिकी और प्रिलिम्स बूस्टर) यूपीएससी और सभी राज्य लोक सेवा आयोग परीक्षाओं के लिए हिंदी में समाचार पत्रों का संकलन (03 मई 2020)


:: राष्ट्रीय समाचार ::

दिवालिया होगा सीकेपी सहकारी बैंक

चर्चा में क्यों?

  • भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआइ) ने मुंबई स्थित सीकेपी सहकारी बैंक का लाइसेंस रद कर उसे दिवालिया प्रक्रिया में डालने का निर्देश दिया है। शनिवार को आरबीआइ की तरफ से जारी सूचना के मुताबिक उसने पुणो स्थित सहकारी सोसाइटी रजिस्ट्रार को बताया है कि इस बैंक के सभी तरह के बैंकिंग कारोबार का लाइसेंस 30 अप्रैल, 2020 से रद कर दिया गया है और अब इसकी दिवालिया प्रक्रिया के लिए उपयुक्त अधिकारी की नियुक्ति की जा सकती है।
  • आरबीआइ के इस निर्देश का मतलब यह हुआ कि बैंक में जमा रखने वाले ग्राहकों को अधिकतम पांच लाख रुपये मिलने की ही गारंटी है। इससे ज्यादा राशि रखने वाले ग्राहकों को बाकी रकम मिलेगी या नहीं, यह दिवालिया प्रक्रिया से वसूल होने वाली रकम से तय होगी। बैंक में तकरीबन 1.25 लाख जमाकर्ता हैं।

पृष्ठभूमि

  • आरबीआइ की तरफ से बताया गया है कि सीकेपी सहकारी बैंक लिमिटेड की वित्तीय स्थिति अब ऐसी नहीं रह गई है कि उसे चलाया जा सके। बैंक का प्रबंधन इसमें पूरी तरह से असफल हो गया है और इसे किसी दूसरे बैंक में मिलाने या किसी दूसरे बैंक की तरफ से अधिगृहीत करने की भी संभावना नहीं है। न्यूनतम पूंजी की आवश्यकता व रिजर्व पूंजी रखने के मानकों को पूरा करने में भी एकदम असफल रहा है। बैंक अपने मौजूदा जमाकर्ताओं की राशि का भुगतान करने की स्थिति में भी नहीं है। आरबीआइ ने यह भी कहा है कि उसने बैंक प्रबंधन को अपनी स्थिति सुधारने का पूरा मौका दिया था लेकिन उनकी तरफ से ऐसा कोई ठोस प्लान नहीं पेश किया जा सका।
  • पिछले वर्ष सितंबर में पंजाब एंड महाराष्ट्र को-ऑपरेटिव (पीएमसी) बैंक लिमिटेड में भारी अनियमितता पाए जाने पर इसके बोर्ड को निरस्त कर दिया गया था। पीएमसी बैंक के बंद होने के बाद मार्च, 2020 में वित्त मंत्री ने सहकारी बैंकों के नियमन को सुधारने को लेकर मौजूदा बैंकिंग विनियमन कानून में संशोधन करने के लिए विधेयक भी लोकसभा में पेश किया था।

'अ रे ऑफ जीनियस'

  • संस्कृति मंत्रालय के संग्रहालय एवं सांस्‍कृतिक स्‍थल विकास (डीएमसीएस) ने सत्यजीत रे के शताब्दी समारोह का शुभारंभ करते हुए एक लघु फिल्म 'अ रे ऑफ जीनियस' को डिजिटल तरीके से लॉन्‍च किया।
  • यह लघु फिल्म रे की फिल्म निर्माण प्रतिभा के साथ-साथ साहित्य, कला, संगीत और डिजाइन में उनकी दमदार उपलब्धियों को उजागर करती है जिसे कोलकाता और मुंबई के पेशेवरों इसमें समाहित किया है। पुरस्कार विजेता निर्देशक अनिरुद्ध रॉय चौधरी और संपादक अर्घ्य कमल मित्रा ने संदीप रे और सोसाइटी फॉर द प्रिजर्वेशन ऑफ सत्यजीत रे आर्काइव्स की मदद से यह फिल्म बनाई है। इस फिल्म में निमई घोष द्वारा ली गई शानदार तस्‍वीरों को भी शामिल किया गया है जो इस महान फिल्‍म निर्माता के तीन दशक के काम को क्रमवार दर्शाती हैं। ये तस्‍वीरें दिल्‍ली आर्ट गैलेरी की मदद से हासिल की गईं।

सभी नागरिकों को राज्य सरकार की नि:शुल्क स्वास्थ्य बीमा होगी उपलब्ध: महाराष्ट्र

  • महाराष्ट्र के स्वास्थ्य मंत्री राजेश टोपे ने घोषणा की है कि सभी नागरिकों को राज्य सरकार की स्वास्थ्य योजना का लाभ दिया जाएगा. महाराष्ट्र पहला राज्य होगा जो अपने लोगों को नि:शुल्क और कैशलेस (नकदी रहित) बीमा सुरक्षा प्रदान करेगा.
  • महाराष्ट्र दिवस पर आयोजित कार्यक्रम के बाद टोपे ने कहा कि वर्तमान में राज्य की 85 फीसदी आबादी महात्मा ज्योतिबा फूले जन आरोग्य योजना (एमजेपीजेएवाइ) के तहत कवर है और इसका लाभ शेष 15 फीसदी आबादी को भी दिया जाएगा.

भावनापाडु बंदरगाह

  • अडाणी पोर्ट एंड स्पेशल इकनॉमिक जोन (एपीसेज) ने कहा कि भावनापाडु बंदरगाह के निर्माण के लिए आंध्र प्रदेश के साथ किया गया सौदा नहीं हो सका है क्योंकि राज्य सरकार ने मसौदा रियायत समझौते में बदलाव का अनुरोध किया था।
  • एपीसेज को जनवरी 2018 में आंध्र प्रदेश में बंदरगाह बनाने का ठेका मिला था। कंपनी को आंध्र प्रदेश में भावनापाडु बंदरगाह के निर्माण की परियोजना के संबंध में सिर्फ अभिरुचि पत्र (एलओए) मिला था, लेकिन ये सौदा नहीं हो सका क्योंकि राज्य सरकार ने समझौते में बदलाव का अनुरोध किया।

जामिनी राय की 133वीं जयंती

  • राष्ट्रीय आधुनिक कला संग्रहालय ने वर्चुअल टूर के माध्यम से पथप्रदर्शक कलाकार जामिनी राय को उनकी 133वीं जयंती पर श्रद्धांजलि अर्पित की।

कौन थे जामिनी राय?

  • जामिनी राय 20वीं सदी भारतीय कला के सबसे आरंभिक और सबसे उल्लेखनीय आधुनिकतावादी थे। 1920 के बाद से विधा के सार की उनकी खोज ने उन्हें नाटकीय रूप से अलग अलग विजुअल शैली के साथ प्रयोग करने का अवसर दिया। लगभग छह दशकों तक फैले उनके कैरियर में कई महत्वपूर्ण परिवर्तनशील पड़ाव आए और उनकी कलाकृतियां सामूहिक रूप से उनकी आधुनिकतावाद की प्रकृति और उनके समय के कला प्रचलनों से अलग हटने में उनकी प्रमुख भूमिका को दर्शांती हैं।
  • 20वीं सदी के आरंभिक दशकों में पेंटिंग की ब्रितानी अकादमिक शैली में प्रशिक्षित, जामिनी राय एक कुशल चित्रकार के रूप में विख्यात हो गए। 1916 में अब कोलकाता के गवर्नमेंट आर्ट स्कूल से स्नातक करने के बाद उन्हें नियमित रूप से कमीशन मिलता रहा। 20वीं सदी के आरंभिक तीन दशकों में बंगाल में सांस्कृतिक अभिव्यक्तियों में बहुत बड़ा बदलाव देखा गया।
  • राष्ट्रीय आंदोलन की बढ़ती भावना साहित्य और विजुअल कलाओं में सभी प्रकार के बदलावों को प्रेरित कर रही थी। अबनींद्रनाथ टैगोर द्वारा स्थापित द बंगाल स्कूल और नंदलाल बोस के तहत शांतिनिकेतन में कला भवन ने यूरोपीय नैचुरलिज्म और माध्यम के रूप में तेल के प्रयोग को खारिज कर दिया था और निरूपण के नए मार्गो की खोज कर रहे थे।
  • जामिनी राय ने भी जानबूझ कर उस शैली को अस्वीकार कर दिया जिसमें उन्होंने अपने अकादमिक प्रशिक्षण के दौरान महारत हासिल की थी और 1920 के आरंभ से उन रूपों की खोज शुरू कर दी जिसने उनके अस्तित्व के भीतरी हिस्से को झकझोड़ दिया था। उन्होंने पूर्वी एशियाई हस्तलिपि, टेराकोटा मंदिर चित्रवल्लरियों, लोक कलाओं एवं पांरपरिक शिल्पों तथा इसी प्रकार के विभिन्न स्रोतों से प्रेरणा ली।
  • 1920 के दशक के आखिर से जामिनी राय ने यूरोपीय तेल माध्यम अस्वीकार कर दिया और सब्जी तथा खनिज स्रोतों से पारंपरिक रंगद्रव्यों का उपयोग करना आरेभ कर दिया। बिम्बविधान अक्सर ग्रामीण जीवन से उकेरे गए।
  • जामिनी राय ने किसानों, कलाकारों और बेहद मर्यादापूर्वक ग्रामीण महिलाओं एवं आदिवासियों का चित्रण किया। उन्होंने अपनी चित्रकारियों में उनका जिसे वे लोक कथाओं के उद्धरणों के साथ पवित्र समझते हैं और उन वर्णनों जो ग्रामीण चेतना में व्याप्त हैं, का प्रतिनिधित्व किया। ‘वूमन‘ शीर्षक की इस विशिष्ट चित्रकारी में कलाकार ने मोटे, काले रूपरेखा की लाइनों के साथ एक लाल पृष्ठभूमि में एक महिला की आकृति की चित्रकारी की है। विधा की सरलता विशेष रूप से एक अलंकृत किनारी के साथ एक संरचित वस्त्र विन्यास एक मूर्तिकला गुणवत्ता का आभास देती है।
  • 1924 के बाद से, जामिनी राय ने एक नई शैली का प्रयोग किया क्योंकि वह विधा को सरल बनाने के तरीकों की तलाश कर रहे थे। इस अवधि के दौरान अधिकांश हिस्सों में उनकी छवियां या तो सफेद, नरम धूसर काली आडंबरहीन एकवर्णी बन गईं या रंग मिलाने की पटिया एक या दो रंगों के उपयोग की पटिया तक ही सीमित रह गई। कूची पर अद्वितीय नियंत्रण के साथ, उन्होंनें तरल, हस्तलिपिक लाइनों के साथ विधाओं की रूपरेखाओं का सृजन किया। इस चरण के दौरान राय ने बैठी हुई महिलाओं, माता एवं शिशु की आकृतियों, बाउल, छलांग लगाते हिरणों, रेंग कर चलने वाले नवजातों की चित्रकारी की।

:: अंतर्राष्ट्रीय समाचार ::

विश्व प्रेस स्वतंत्रता दिवस: 3 मई

  • प्रतिवर्ष 3 मई को विश्व में World Press Freedom Day या विश्व प्रेस स्वतंत्रता दिवस मनाया जाता है। वर्ष 2020 के विश्व स्वतंत्रता दिवस की थीम “journalism without fear or favour” है। इस दिवस को मनाने का उद्देश्य दुनिया भर की सरकारों को यह याद दिलाना है कि अभिव्यक्ति की आजादी के अधिकार की रक्षा और सम्मान करना इसका कर्तव्य है। प्रेस चौथे स्तंभ के रूप में लोकतंत्र के मूल्यों की सुरक्षा और उनको बहाल करने में अहम भूमिका निभाता है। इसलिए सरकारों को पत्रकारों की सुरक्षा सुनिश्चित करनी चाहिए।
  • आपको बता दें प्रेस की आजादी के लिए सबसे पहले पहल अफ्रीका के पत्रकारों द्वारा 1991 में किया गया। इसके उपरांत उन्होंने 3 मई को प्रेस की आजादी से जुड़े सिद्धांतों का प्रतिपादन किया जिसे डिक्लेरेशन ऑफ विंडहोक (Declaration of Windhoek) के नाम से जाना जाता है। यूनेस्को की प्रतिवेदन पर 1993 में संयुक्त राष्ट्र की महासभा ने पहली बार विश्व प्रेस स्वतंत्रता दिवस का आयोजन किया। इसके उपरांत प्रत्येक वर्ष 3 मई को विश्व प्रेस स्वतंत्रता दिवस मनाया जाता है।

विश्व में प्रेस की स्वतंत्रता से जुड़े तथ्य: वैश्विक प्रेस स्वतंत्रता सूचकांक 2020

रिपोर्टर्स विदाउट बॉर्डर्स(RSF):

  • पेरिस स्थित रिपोर्टर्स सैन्स फ्रन्टियर्स (आरएसएफ़) यानी रिपोर्टर्स विदाउट बॉर्डर्स दुनिया भर के पत्रकारों पर हुए हमले को डॉक्यूमेंट करने और उनके ख़िलाफ़ आवाज़ उठाने का काम करता है। यह एक गैर-लाभकारी संगठन है। इसके द्वारा प्रतिवर्ष विश्व में प्रेस की स्वतंत्रता की स्थिति दर्शाने के लिए ‘वैश्विक प्रेस स्वतंत्रता सूचकांक’ जारी किया जाता है।
  • वैश्विक प्रेस स्वतंत्रता सूचकांक 2020 में नार्वे प्रथम स्थान पर है जबकि द्वितीय और तृतीय स्थान पर क्रमश: फिनलैंड और डेनमार्क हैं।
  • इस सूची में लगातार चौथी बार नॉर्वे पहले नंबर पर है और नॉर्थ कोरिया सबसे निचले स्थान पर है। दूसरे नंबर पर फिनलैंड, तीसरे पर डेनमार्क, 11वें पर जर्मनी, 34वें पर फ्रांस, 35वें पर यूके, 45वें पर अमेरिका, 66वें पर जापान और 107वें पर ब्राजील है।
  • दक्षिण एशिया इस सूचकांक में बुरे स्तर पर ही रहा है। भारत दो पायदान खिसककर 142वें नंबर पर पहुंच गया है वहीं पाकिस्तान तीन नुक़सान के साथ ही पाकिस्तान 145वें स्थान पर आ गया है। बांग्लादेश को भी एक स्थान का नुक़सान हुआ है और बांग्लादेश सूची में 151वें स्थान पर है।
  • इस सूचकांक में सबसे निम्न स्थान 180वें उत्तर कोरिया को प्राप्त हुआ है।

कुलभूषण की रिहाई के लिए पाक से अनौपचारिक वार्ता: साल्वे

  • भारत ने उम्मीद जताई थी कि वह भारतीय नौसेना के सेवानिवृत्त अधिकारी कुलभूषण जाधव को ‘‘अनौपचारिक बातचीत’’ के माध्यम से रिहा करने के लिए पाकिस्तान को मना लेगा, जिन्हें 2017 में ‘‘जासूसी और आतंकवाद’’ के आरोपों में पाकिस्तान की एक सैन्य अदालत ने मौत की सजा सुनाई थी। यह बात वरिष्ठ अधिवक्ता हरीश साल्वे ने कही है।
  • अंतरराष्ट्रीय न्यायालय (आईसीजे) में जाधव मामले में साल्वे भारत की तरफ से प्रमुख वकील थे । आईसीजे ने पिछले वर्ष फैसला दिया था कि पाकिस्तान को नौसेना के सेवानिवृत्त अधिकारी की मौत की सजा की समीक्षा करनी चाहिए।

पृष्ठभूमि

  • वह नौसेना के पूर्व कमांडर हैं और उनका मामला है कि वह ईरान में व्यवसाय करते थे तथा एक दिन उनका अपहरण कर लिया गया। ‘‘तालिबान ने उन्हें पाकिस्तान की सेना को सौंप दिया। पाकिस्तान की सेना ने ईरान के साथ लगती पाकिस्तान की सीमा पर उन्हें अपनी हिरासत में लिया। पाकिस्तान इस बात को स्वीकार नहीं करता कि तालिबान ने उनका अपहरण किया।

क्या है अंतर्राष्ट्रीय न्यायालय?

  • संयुक्त राष्ट्र के प्रमुख न्यायिक अंग के रूप में अंतर्राष्ट्रीय न्यायालय (International Court of justice-ICJ) की स्थापना 1945 में संयुक्त राष्ट्र के चार्टर द्वारा की गई। ICJ ने अप्रैल 1946 में काम करना शुरू किया। ICJ का मुख्यालय हेग (नीदरलैंड्स) के पीस पैलेस में स्थित है।

:: भारतीय अर्थव्यवस्था ::

भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (सेबी)

चर्चा में क्यों?

  • सेबी ने जौली प्लास्टिक इंडस्ट्रीज के शेयरों की खरीद-फरोख्त में धोखाधड़ी मामले में 21 इकाइयों पर कुल 1.05 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया है। नियामक ने फरवरी 2012 से नवंबर 2014 के बीच जॉली प्लास्टिक इंडस्ट्रीज लिमिटेड के शेयरों की जांच की थी। सेबी ने जांच के दौरान पाया कि ये संस्थाएं एक-दूसरे से जुड़ी हुईं थीं और हेराफेरी से शेयरों के भाव गिरा रहीं थीं। सेबी ने पाया कि भाव गिराने की कोशिश इसलिए की जा रही थी ताकि कुछ अन्य संस्थाएं सस्ते भाव पर शेयर खरीद सकें। इस सिलसिले में नियामक ने सभी 21इकाइयों पर पांच-पांच लाख रुपये का जुर्माना लगाया है।

क्या है भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (सेबी)?

  • भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (सेबी) की स्थापना भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड अधिनियम, 1992 के प्रावधानों के अनुसार 12 अप्रैल, 1992 को हुई थी । सेबी का मुख्यालय मुंबई में बांद्रा कुर्ला परिसर के व्यावसायिक जिले में हैं और क्रमश: नई दिल्ली, कोलकाता, चेन्नई और अहमदाबाद में उत्तरी, पूर्वी, दक्षिणी व पश्चिमी क्षेत्रीय कार्यालय हैं।
  • भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (सेबी) की उद्देशिका में सेबी के मूल कार्य प्रतिभूतियों (सिक्यूरिटीज़) में निवेश करने वाले निवेशकों के हितों का संरक्षण करना, प्रतिभूति बाजार (सिक्यूरिटीज़ मार्केट) के विकास का उन्नयन करना तथा उसे विनियमित करना और उससे संबंधित या उसके आनुषंगिक विषयों का प्रावधान करना है।

अंतरराष्ट्रीय वित्तीय सेवा केंद्र (आईएफएससी)

  • रांकपा प्रमुख शरद पवार ने अंतरराष्ट्रीय वित्तीय सेवा केंद्र (आईएफएससी) का मुख्यालय मुंबई के बजाए गुजरात के गांधीनगर में स्थापित करने के फैसले की आलोचना की है। उन्होंने कहा है कि केंद्र की तरफ से लिया गया यह फैसला बेहद खराब, गलत और अनुचित है। इस मामले में उन्होंने केंद्र सरकार से इस पर पुनर्विचार करने का अनुरोध किया है।

क्या है अंतरराष्ट्रीय वित्तीय सेवा केंद्र?

  • अंतरराष्ट्रीय वित्तीय सेवा केंद्रों (आईएफएससी) में सभी तरह की वित्तीय सेवाओं के नियमन के लिए एकीकृत प्राधिकरण की स्थापना के उद्देश्य से एक विधेयक के मसौदे को केंद्रीय मंत्रिमंडल ने मंजूरी दी थी। यह प्राधिकरण आईएफएससी केंद्र में अन्य वित्तीय नियामकों के अधिकारों को लागू कराने का एकमात्र प्राधिकारी होगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई मंत्रिमंडल की बैठक में अंतरराष्ट्रीय वित्तीय सेवा केंद्र प्राधिकरण विधेयक-2019 को मंजूरी दी गई।
  • वित्त मंत्रालय के आर्थिक मामलों के विभाग द्वारा तैयार मसौदा विधेयक के अनुसार इस प्राधिकरण का एक चेयरमैन होगा और उसमें भारतीय रिजर्व बैंक, भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (सेबी), भारतीय बीमा विनियामक एवं विकास प्राधिकरण (इरडा) और पेंशन नियामक पीएफआडीए के एक-एक प्रतिनिधि होंगे। इसके अलावा दो सदस्य केंद्र सरकार नामित करेगी और दो अन्य सदस्य रखे जाएंगे जो पूर्णकालिक या अंशकालिक हो सकते हैं।
  • आईएफएसी केंद्र में इन अधिकारों को लागू करने की यह एकमात्र एजेंसी होगी। गौरतलब है कि देश में ऐसा पहला केंद्र गुजरात में गांधीनगर की गिफ्ट सिटी में खोला गया है।

करेंसी की प्रिंटिंग के पीछे का गणित: एक समग्र अध्यनन

  • देश और दुनिया कोरोनावायरस की वजह से अभूतपूर्व संकट से जूझ रही है। कोरोना वायरस संक्रमण को रोकने के लिए दुनिया के अधिकतर हिस्सों में लॉकडाउन लागू है। इससे लोगों की आजीविका पर बहुत अधिक असर पड़ा है। दुनियाभर के अधिकतर देशों में लोग अपनी सरकारों से सीधी मदद मांग रहे हैं। हालांकि, सरकारों के हाथ भी बंधे हुए हैं और वह एक सीमा तक ही राहत पैकेज दे सकती है। ऐसे में कई लोगों के मन में यह सवाल आता होगा कि किसी भी देश के पास नोट छापने की अपनी मशीन होती है तो वह बड़ी संख्या में नोट छापकर गरीबों, वंचितों और मध्यम वर्ग के लोगों को क्यों नहीं बांट देता है? इसके साथ ही एक और सवाल कौंधता होगा कि गरीब देश अधिक-से-अधिक नोट छापकर अमीर क्यों नहीं बन जाते हैं? ऐसे में हमने एक्सपर्ट्स से बात करके इस बारे में जानना चाहा कि आखिर केंद्रीय बैंक या सरकार के अधिक नोट छापने पर देश की इकोनॉमी पर क्या असर पड़ता है।

नोट की छपाई को लेकर क्या है आदर्श स्थिति

  • कोई भी देश सामान्यत: जीडीपी के दो से तीन प्रतिशत के बराबर नोट छापता है। इस कारण अधिक नोट छापने के लिये जीडीपी को बढ़ाना जरूरी होता है और जीडीपी बढ़ाने के लिये विनिर्माण व सेवा जैसे विभिन्न क्षेत्रों की वृद्धि, व्यापार घाटे को कम करने आदि जैसे कारकों पर ध्यान होता है।

अधिक नोट छापने से चरम पर पहुंच सकती है महंगाई

  • जानी-मानी अर्थशास्त्री बृंदा जागीरदार से जब इस बाबत सवाल किया गया तो उन्होंने कहा, ''हम इस बात को जिम्बाब्वे और वेनेजुएला में उपजी परिस्थितियों के जरिए आसानी से समझ सकते हैं। इन दोनों देशों की सरकारों ने कर्ज के निपटारे के लिए बड़े पैमाने पर नोट छापे। हालांकि, आर्थिक वृद्धि, सप्लाई और डिमांड के बीच सामंजस्य नहीं होने के कारण इन दोनों देशों में महंगाई आसमान पर पहुंच गई।''
  • उल्लेखनीय है कि अफ्रीकी देश जिम्बाब्वे और दक्षिण अमेरिकी देश वेनेजुएला ने अपनी अर्थव्यवस्था को मजबूती देने के लिए अधिक नोटों की प्रिंटिंग की। हालांकि, इन देशों ने नोटों की जितनी अधिक छपाई की, महंगाई उतनी अधिक बढ़ती गई और ये दोनों देश 'Hyperinflation' यानी बहुत अधिक महंगाई के दौर में पहुंच गए। वर्ष 2008 में जिम्बाब्वे में महंगाई दर में 231,000,000% की वृद्धि दर्ज की गई।

सामान्यतः कारगर नहीं है अधिक नोट छपाई का मॉडल

  • इसके पीछे की वजह यह है कि सरकार या केंद्रीय बैंक अगर अधिक नोट छापकर सबके हाथ में बांट देंगे तो सभी के पास पैसा हो जाएगा। दूसरी तरफ अगर सामान का उत्पादन थम गया है या आपूर्ति में दिक्कत है तो महंगाई का बढ़ना तय है। जागीरदार के मुताबिक वर्तमान परिस्थितियों में भी हालात ऐसे हैं कि औद्योगिक उत्पादन ठप है, आपूर्ति प्रभावित हुई है, अनिश्चितता के कारण डिमांड नहीं है, ऐसे में सरकार एक सीमा तक ही लोगों के हाथों में पैसे दे सकती है।

अधिक नोट छापने पर करेंसी के वैल्यू, सॉवरेन रेटिंग पर पड़ता है असर

  • जागीरदार ने कहा कि एक सीमा से अधिक नोटों की छपाई से देश के करेंसी की वैल्यू घटती है। साथ ही रेटिंग एजेंसियां भी देश की सॉवरेन रेटिंग घटा देती हैं। इससे सरकार को दूसरे देशों से कर्ज मिलने में दिक्कत होती है। इसके साथ ही सरकार को ऊंची दरों पर कर्ज मिलता है।

इस सिद्धांत को समझना भी है जरूरी

  • किसी भी देश को अमीर बनने के लिए अधिक-से-अधिक सामान के विनिर्माण एवं उत्पादन और बिक्री की जरूरत होती है। साथ ही सर्विस सेक्टर को भी मजबूत करना होता है। अधिक से अधिक सामान के उत्पादन की स्थिति में अधिक नोट छापना थोड़ा-बहुत कारगर सिद्ध हो सकता है। रेटिंग एजेंसी क्रिसिल के मुख्य अर्थशास्त्री कहते हैं कि आर्थिक वृद्धि को मजबूती देने के लिए थोड़े पैमाने पर रुपये की छपाई मददगार साबित हो सकती है लेकिन उसकी एक सीमा है।

‘क्वांटिटेटिव इजींग’ (Quantitative Easing)

वर्ष 2008 के वित्तीय संकट के समय डिमांड को मजबूती देने के लिए लगभग सभी देश के केंद्रीय बैंकों ने थोड़े अधिक रुपयों की प्रिंटिग की थी। इससे डिमांड को फिर से शुरू करने में मदद मिली थी। इसी आर्थिक संकट के समय ‘क्वांटिटेटिव इजींग’ (Quantitative Easing) शब्द मुख्यधारा में आया। इसका अर्थ लोगों के हाथों में अधिक पैसे पहुंचाने के लिये नोटों की छपाई बढ़ाने से है। हालांकि तब यह भी देखने को मिला था जिन भी देशों ने क्वांटिटेटिव इजींग का सहारा लिया, वहां महंगाई बढ़ने के साथ ही मुद्रा(करंसी) का अवमूल्यन भी हुआ। अत: कह सकते हैं कि नोटों की छपाई बढ़ाने के लाभ से अधिक नुकसान हैं।

:: विज्ञान और प्रौद्योगिकी ::

अमेरिका में रेमडेसिविर के इस्तेमाल को मंजूरी

  • अमेरिका के दवा नियामक फूड एंड ड्रग एडिमिनस्ट्रेशन (एफडीए) ने कोविड-19 के मरीजों के इलाज के लिए एंटी वायरल दवा रेमडेसिविर के आपात इस्तेमाल की मंजूरी दे दी है। हाल ही में भारतवंशी शोधकर्ता अरुणा सुब्रण्यम समेत शोधकर्ताओं के एक दल ने बायोटेक फर्म गिलियड साइंसेज की इस दवा को कोरोना पॉजिटिव मरीजों पर कारगर पाया था। यह दवा मरीजों के स्वास्थ्य में तेज सुधार करने में सक्षम है।

:: पर्यावरण और पारिस्थितक  ::

‘नदी प्रबंधन का भविष्य '

चर्चा में क्यों?

  • जल शक्ति मंत्रालय के अंतर्गत राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन (एनएमसीजी) और शहरी मामलों का राष्ट्रीय संस्थान (एनआईयूए) ने "नदी प्रबंधन का भविष्य" पर एक आइडियाथॉन का आयोजन किया, जिससे पता लगाया जा सके कि कोविड-19 का संकट कैसे भविष्य में प्रबंधन के लिए रणनीतियों को आकार दे सकता है।

पृष्ठभूमि

  • कोविड-19 के संकट से निपटना दुनिया भर के अधिकांश देशों के लिए एक चुनौती बनी हुई है, जिसके कारण अधिकांश स्थानों पर लॉकडाउन जैसी स्थिति देखी जा रही है। हालांकि, इस संकट के इर्द-गिर्द आम चिंता और व्यग्रता रही है, लेकिन इस संकट ने कुछ सकारात्मक घटनाक्रमों को भी सामने लेकर आया है। इन्हीं में से एक है प्राकृतिक पर्यावरण में दिखाई देने वाला सुधार। नदियां स्वच्छ हो गई हैं। हवाएं साफ हो गई है। जीएचजी उत्सर्जन में काफी गिरावट दर्ज की गई है। पशु-पक्षी वापस लौट रहे हैं और अपने आवासों का आनंद ले रहे हैं। विशुद्ध रूप से नदी प्रबंधन के दृष्टिकोण से, भारत में पिछले कुछ सप्ताहों में गंगा और यमुना में जल की गुणवत्ता में उल्लेखनीय सुधार हुआ है।
  • पिछले वर्ष के दौरान, गंगा डॉल्फिन, एक संकेतक प्रजाति, को नदी के कई हिस्सों में देखा जाने लगा है, जो कि सुधार को दिखा रहा है। गंगा और उसकी सहायक नदियों में लॉकडाउन के दौरान इसका ज्यादा झलक देखने को मिल रहा है। वेनिस की प्रसिद्ध प्रदूषित नहरें साफ हो गई हैं क्योंकि उसके पास पर्यटक नहीं आ रहे हैं। हाल के इतिहास में पहली बार, डॉल्फ़िन इटली के जलमार्ग में वापस आ गई हैं क्योंकि वहां नेविगेशन बंद हो गया है।
  • सवाल सिर्फ इतना है कि इनमें लंबे समय तक कितना बदलाव आएगा। आइडियाथॉन में इस बात की जांच की गई है कि संकटों से निपटने के लिए नदियों की सामाजिक दृष्टिकोण का लाभ कैसे उठाया जा सकता है? महामारी ने हमें नदी प्रबंधन के लिए क्या-क्या सबक सिखाया है? और नदी संकट की स्थिति में किस प्रतिक्रिया वाले तंत्र की आवश्यकता है?

क्यों की गयी शुरुआत?

  • नदी प्रबंधन की ओर ज्यादा ध्यान आकर्षित करने और नदी के साथ शहरों की इंटरकनेक्टिविटी को उजागर करने के लिए राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन द्वारा इस आइडियाथॉन की शुरुआत की गई। शहरी नियोजन की पारंपरिक विधियों की तुलना में एक अलग दृष्टिकोण, अगर ठीक से योजना बनाई जाए तो नदी वाले शहरों को न केवल नदी के सामाजिक-सांस्कृतिक महत्व का लाभ उठाने के लिए विशेष ध्यान देने की जरूरत है बल्कि पारिस्थितिक महत्व और आर्थिक क्षमता का भी लाभ उठाने की जरूरत है, जो कि शहर के लिए मददगार साबित हो सकती है।
  • शहर के लिए शहरी नियोजन रूपरेखा में नदी प्रबंधन को मुख्यधारा में लाने के उद्देश्य से एनएमसीजी, राष्ट्रीय शहरी मामलों का संस्थान के साथ मिलकर शहरी नदी प्रबंधन योजना के लिए एक नमूना विकसित कर रहा है। आइडियाथॉन ने कोविड-19 महामारी, उसके कारण हुए लॉकडाउन और नदी प्रबंधन पर इसके प्रभाव से सीखी गई बातों पर मंथन करने की मांग की है। एनआईयूए के डॉ विक्टर शिंदे ने इस वेबिनार की शुरुआत की और ऊपर दिए गए संदर्भ को निर्धारित किया और शहरी नदी प्रबंधन योजना आदि का विकास करने के लिए एनआईयूए और एनएमसीजी के सहयोग की शुरूआत की।

आइडियाथॉन के मुख्य तथ्य

  • राजीव रंजन मिश्रा, महानिदेशक, एनएमसीजी ने वक्ताओं और उपस्थित लोगों से नमामि गंगे पहल का परिचय कराया। नमामि गंगे, नदी के लिए सबसे बड़े कायाकल्प कार्यक्रमों में से एक है जिसका उद्देश्य प्रदूषण का प्रभावी रूप से उन्मूलन और गंगा बेसिन के कायाकल्प के लिए एकीकृत नदी बेसिन का दृष्टिकोण अपनाना, व्यापक योजना और प्रबंधन के लिए अंतर-क्षेत्रीय समन्वय को बढ़ावा देना है।
  • लॉकडाउन के दौरान, नदी आगंतुकों द्वारा अपने तटों पर फेंके जानेवाले ठोस कचरे की समस्याओं से मुक्त है और उद्योगों और अन्य वाणिज्यिक प्रतिष्ठानों से भी बहिस्त्राव बंद है। नगर निगम द्वारा सीवेज उत्पादन और प्रशोधन का कारक लगभग एक समान ही होता है और अभी तक चालू किए गए एसटीपी भी पूरी तरह से काम कर रहे हैं। लॉकडाउन के बाद नदी को इसी स्थिति में रखना बहुत चुनौतीपूर्ण होगा जो कि आधारभूत संरचना के निर्माण के पूरक के लिए व्यवहारिक परिवर्तन के साथ ही संभव हो सकता है। कोविड-19 और लॉकडाउन से पता चलता है कि अगर हम सब मिलकर अच्छा काम करते हैं तो नदियों का कायाकल्प किया जा सकता है।
  • उन्होंने नदी के प्रति संवेदनशील होने के लिए शहरी नियोजन मापदंडों के महत्व पर बल दिया। कोविड-19 से सीख, केवल भूमि आधारित शहरी नियोजन को मानव और पारिस्थितिकी उन्मुखीकरण की ओर स्थानांतरित भी किया जा सकता है। लोगों को आपस में जोड़ने के लिए भी नदियों को पुनर्जीवित करने की आवश्यकता है। नागरिक सहभागिता कार्यक्रमों को एक व्यवहारिक परिवर्तन लाने के लिए डिज़ाइन किया गया है, अपने जल संसाधनों के लिए लोगों के प्रयासों को कारगर बनाना समय की जरूरत है। श्री मिश्रा ने गंगा नदी के बारे में जानकारी प्राप्त लोगों को शामिल करने वाले पहलों में से एक 'गंगा क्वेस्ट' (gangaquest.com पर एक ऑनलाइन क्विज़) की शुरुआत की, जिसको एक बहुत अच्छी प्रतिक्रिया मिल रही है, लॉकडाउन के मद्देनजर, अभी इसमें 6,00,000 से ज्यादा छात्र और अन्य लोग शामिल हो रहे हैं।
  • सतत विकास लक्ष्य, जिनका एक निश्चित दृष्टिकोण जल संचालन के लिए है, सरकारों को क्या लक्ष्य निर्धारित करना चाहिए उसके लिए है, विशेष रूप से भारत के लिए नदी बेसिन प्रबंधन के महत्व को देखते हुए। इसमें बहु-हितधारकों और अंतर-मंत्रालयी दृष्टिकोणों के साथ-साथ एकीकृत सूचना प्रणालियों की ओर एक बदलाव करने की भी आवश्यकता है। एनएमसीजी, जीआईजेड के साथ मिलकर नदी बेसिन संगठन, नदी बेसिन योजना और प्रबंधन चक्र के विकास की दिशा में भी काम कर रहा है जिससे गंगा नदी बेसिन प्रबंधन के लिए नमामि गंगे के अंतर्गत अनुकूल ढांचा विकसित किया जा सके।
  • विभिन्न मंत्रालयों द्वारा अधिग्रहीत और संचित डेटा, प्रणालियों का आधारभूत एकीकरण, कार्य योजनाओं का बेहतर प्रबंधन करने और कार्यान्वयन करने में सहायक होगा। भविष्य में जल गवर्नेंस के लिए, न केवल सरकारी अवसंरचना के भीतर, बल्कि समुदायों, समाजों, गैर सरकारी संगठनों, कार्रवाई समूहों, स्टार्टअप और व्यक्तियों के प्रयासों को भी एकीकृत करना होगा। यद्यपि, अमूर्त चीजों के आर्थिक मूल्यों की गणना करना बहुत कठिन है लेकिन पारिस्थितिकी तंत्र सेवाओं का आर्थिक मूल्यांकन भी उन क्षेत्रों में से एक है जहां पर प्राकृतिक संसाधनों का बेहतर प्रबंधन करने के लिए ध्यान देने की आवश्यकता है।
  • राष्ट्रीय गंगा परिषद की अध्यक्षता करते हुए ‘अर्थ गंगा’ की अवधारणा के बारे में बात की। सिंचाई, बाढ़ नियंत्रण, बांध, जैविक खेती को बढ़ावा, मत्स्य पालन, औषध वृक्षारोपण, पर्यटन,परिवहन और जैव विविधता वाले पार्कों पर किए जाने वाले सरकारी खर्च, ‘अर्थ गंगा’ के लिए कुछ प्रमाणिक मॉडल हैं।
  • कोविड-19 परिदृश्य से उनकी महत्वपूर्ण सीख यह थी कि अब यह, "उपयोज्यता का अस्तित्व नहीं, बल्कि सबसे अनुकूल का अस्तित्व" बन गया है, उन्होंने अनुकूलनीय गवर्नेंस के विचार पर बल दिया, जहां पर सहयोगी साझेदारी के साथ भविष्य की चुनौतियों को समाविष्‍ट करने के लिए नदी प्रबंधन को कैसे देखा जाए।

:: विविध ::

लोकपाल सदस्य जस्टिस त्रिपाठी

  • कोरोना वायरस से संक्रमित लोकपाल के सदस्य जस्टिस अजय कुमार त्रिपाठी की मौत हो गई है. जस्टिस अजय कुमार लोकपाल के न्यायिक सदस्य थे. कोरोना से संक्रमित होने के बाद दिल्ली के एम्स ट्रामा सेंटर में उनका इलाज चल रहा था. शनिवार रात 9 बजे दिल का दौरा पड़ने से उनका निधन हो गया.

:: प्रिलिम्स बूस्टर ::

  • हाल ही में रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया ने किस बैंक का लाइसेंस रद्द करते हुए उसे दिवालिया प्रक्रिया में डालने का निर्देश दिया है? (सीकेपी सहकारी बैंक-मुंबई)
  • हाल ही में चर्चा में रही 'अ रे ऑफ जीनियस' क्या है? (सत्यजीत रे पर आधारित लघु फिल्म)
  • हाल ही में चर्चा में रहे ‘जामिनी राय’ को किस क्षेत्र में ख्याति हासिल थी? (चित्रकला, यूरोपीय आयल कलर की जगह पारंपरिक रंगों का प्रयोग)
  • हाल ही में चर्चा में रहे ‘अर्थ-गंगा परियोजना’ का उद्देश्य क्या है? (गंगा नदी के किनारे सतत आर्थिक विकास मॉडल को अपनाना)
  • किस राज्य ने सभी नागरिकों को नि:शुल्क और कैशलेस (नकदी रहित) बीमा सुरक्षा प्रदान करने की घोषणा की है? (महाराष्ट्र)
  • अर्थव्यवस्था में ‘क्वांटिटेटिव इजींग’ (Quantitative Easing) का अर्थ क्या है? (लोगों को अधिक नगदी प्रदान करने के लिए करेंसी के मुद्रण को बढ़ाना)
  • विश्व प्रेस स्वतंत्रता दिवस कब मनाया जाता है एवं वर्ष 2020 की थीम क्या है? (3 मई, “journalism without fear or favour”)
  • चर्चा में रहे अंतरराष्ट्रीय न्यायालय की स्थापना कब हुई थी एवं इसका मुख्यालय कहाँ स्थित है? (1945, हेग-नीदरलैंड)
  • चर्चा में रहे भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) की स्थापना कब हुई एवं इसका मुख्यालय कहाँ स्थित है? (1992, मुंबई)
  • हाल ही में चर्चा में रहे ‘भावनापाडु बंदरगाह’ किस राज्य में स्थित है? (आंध्र प्रदेश)
  • केंद्र सरकार के द्वारा अंतरराष्ट्रीय वित्तीय सेवा केंद्र (IFSC) का मुख्यालय मुंबई के बजाय कहाँ स्थापित करने की घोषणा की है? (गांधीनगर-गुजरात)
  • चर्चा में रहे ‘वैश्विक प्रेस स्वतंत्रता सूचकांक’ को किस संस्थान के द्वारा जारी किया जाता है एवं 2020 में इस सूचकांक में भारत की रैंकिंग कितनी है? (रिपोर्टर्स विदाउट बॉर्डर्स, 142)

स्रोत साभार: Dainik Jagran (Rashtriya Sanskaran), Dainik Bhaskar (Rashtriya Sanskaran), Rashtriya Sahara (Rashtriya Sanskaran) Hindustan Dainik (Delhi), Nai Duniya, Hindustan Times, The Hindu, BBC Portal, The Economic Times (Hindi & English), PTI, PIB

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