(दैनिक समसामयिकी और प्रिलिम्स बूस्टर) यूपीएससी और सभी राज्य लोक सेवा आयोग परीक्षाओं के लिए हिंदी में समाचार पत्रों का संकलन (03 अगस्त 2020)

दैनिक समसामयिकी और प्रिलिम्स बूस्टर

:: राष्ट्रीय समाचार ::

अगरबत्ती आत्म-निर्भर मिशन

चर्चा में क्यों?

  • केंद्रीय सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम मंत्री श्री नितिन गटकरी ने अगरबत्ती उत्पादन में भारत को आत्म-निर्भर बनाने के लिए खादी और ग्रामोद्योग आयोग (केवीआईसी) द्वारा प्रस्तावित ‘खादी अगरबत्ती आत्म-निर्भर मिशन’ कार्यक्रम को मंजूरी दे दी है।

क्या है ‘खादी अगरबत्ती आत्म-निर्भर मिशन’?

  • ‘खादी अगरबत्ती आत्म-निर्भर मिशन’ नाम से शुरू किए गए इस कार्यक्रम का उद्देश्य देश के विभिन्न हिस्सों में बेरोजगारों और प्रवासी श्रमिकों के लिए रोजगार पैदा करना और घरेलू अगरबत्ती उत्पादन में पर्याप्त तेजी लाना है।

मिशन से जुड़ें मुख्य बिंदु

  • निजी सार्वजनिक साझेदारी पर केवीआईसी द्वारा बनाई गई इस योजना में बहुत कम निवेश में ही स्थायी रोजगार का सृजन किया जा सकेगा।
  • यह योजना निजी अगरबत्ती निर्माताओं को उनके द्वारा बिना किसी पूंजी निवेश के ही अगरबत्ती का उत्पादन बढ़ाने में मदद करेगी।
  • इस योजना के तहत, केवीआईसी सफल निजी अगरबत्ती निर्माताओं के माध्यम से कारीगरों को अगरबत्ती बनाने की स्वचालित मशीन और पाउडर मिक्सिंग मशीन उपलब्ध कराएगा।
  • इस संबंध में पीपीपी मोड पर परियोजना के सफल संचालन के लिए केवीआईसी और निजी अगरबत्ती निर्माता के बीच दो-पक्षीय समझौते पर हस्ताक्षर किए जाएंगे।
  • केवीआईसी मशीनों की लागत पर 25% सब्सिडी प्रदान करेगा और कारीगरों से हर महीने आसान किस्तों में शेष 75% की वसूली करेगा।
  • कारीगरों के प्रशिक्षण की लागत केवीआईसी और निजी व्यापार भागीदार के बीच साझा की जाएगी, जिसमें केवीआईसी लागत का 75% वहन करेगा, जबकि 25% व्यापार भागीदार द्वारा भुगतान किया जाएगा।

इस योजना के लाभ

  • इस परियोजना के पूर्ण कार्यान्वयन होने पर अगरबत्ती उद्योग में हजारों की संख्या में रोजगार के अवसर का सृजन होगा।
  • केवीआईसी ने केवल स्थानीय रूप से भारतीय निर्माताओं द्वारा निर्मित मशीनों की खरीद का फैसला किया है, जिससे स्थानीय उत्पादन को प्रोत्साहन मिलेगा।

खादी और ग्रामोद्याग आयोग के बारे में :-

  • खादी और ग्रामोद्याग आयोग संसद के एक अधिनियम द्वारा सृजित वैधानिक संगठन है|
  • इसे अप्रैल 1957 में स्थापित किया गया था।
  • यह संगठन सूक्ष्म,लघु एवं मध्यम मंत्रालय, भारत सरकार के प्रशासनिक नियंत्रण में कार्यरत है।

बाउल दर्शन संस्कृति

चर्चा में क्यों?

  • भारतीय दूतावास द्वारा यहां आयोजित एक सांस्कृतिक कार्यक्रम में कई चीनी और भारतीय विद्वानों ने भाग लिया। कार्यक्रम बाउल संगीत और दर्शन पर केंद्रित था। स्वामी विवेकानंद सांस्कृतिक केंद्र ने भारतीय दूतावास में इस कार्यक्रम का आयोजन किया। इसमें बाउल संगीत और दर्शन का ऑफ़लाइन और ऑनलाइन प्रसारण का अनोखा मिश्रण किया गया था।

क्या है बाउल?

  • बाउल एक प्रकार का आध्यात्मिक लोक गायन है जो ग्रामीण बांग्लादेश और पश्चिम बंगाल में प्रचलित है। यूनेस्को ने भी इसे सांस्कृतिक विरासत की सूची में शामिल किया है। बाउल पंथ, जाति और धर्म से परे है और इसमें तंत्र, सूफीवाद, वैष्णववाद और बौद्ध धर्म का मिश्रण है।

गैर लाभकारी संगठन अक्षय पात्र

चर्चा में क्यों?

  • गैर लाभकारी संगठन अक्षय पात्र ने भारत में स्कूली बच्चों को मिड-डे मील खिलाने के लिए अमेरिका में अपने टेक्सास चैप्टर के माध्यम से 9,50,000 डॉलर (सात करोड़ 11 लाख रुपये से ज्यादा) जुटाए हैं। 'वर्चुअल गाला-टेक्नोलॉजी फॉर चेंज' नामक इस कार्यक्रम में एक हजार से अधिक व्यवसायियों, गैर लाभकारी संगठनों, सरकारी अधिकारियों और विश्व के परोपकारी व्यक्तियों ने हिस्सा लिया। बता दें कि अक्षय पात्र भारत में भूख से पीडि़त बच्चों को ना केवल भोजन उपलब्ध कराता है बल्कि उनमें शिक्षा को भी बढ़ावा देने का काम करता है।

गैर लाभकारी संगठन अक्षय पात्र के बारे में

  • अक्षय पात्र दुनिया का सबसे बड़ा गैर लाभकारी संगठन है जो देश के 12 राज्यों और दो केंद्र शासित प्रदेशों के 19,039 स्कूलों के 18 लाख बच्चों को प्रतिदिन पौष्टिक भोजन उपलब्ध कराता है।
  • अक्षय पात्र की शुरुआत साल 2000 में अक्षय पात्र 5 स्कूलों के 1500 बच्चों को मिड-डे मील खिलाने के साथ शुरू हुआ था। दरअसल, बेंगलुरु के इस्कॉन मंदिर के अध्यक्ष पद्मश्री मधु पंडित दास ने देखा कि कुछ बच्चे रोजाना मंदिर में आते हैं और खाना खाते हैं। जब बच्चों से पूछा तो उन्होंने बताया कि हम स्कूल में पढ़ते हैं। हम गरीब परिवार से हैं। भरपेट भोजन यहीं मिलता है। इसके बाद अक्षय पात्र फाउंडेशन की शुरूआत की गई।

दुनिया का सबसे ऊंचा रेल पुल

  • जम्मू-कश्मीर में चिनाब नदी पर बन रहा दुनिया का सबसे ऊंचा रेलवे पुल अगले साल तक तैयार हो जाएगा। यह पुल कश्मीर घाटी को शेष भारत से जोड़ेगा। इस पुल की कुल ऊंचाई 467 मीटर होगी और यह नदी तल से 359 मीटर ऊंचाई पर होगा। अभी चीन के बेपेजिंयाग नदी पर बने दुनिया के सबसे ऊंचे रेलवे ब्रिज से भी बड़ा होगा। चीन का यह रेलवे पुल 275 मीटर ऊंचा है। दिल्ली में स्थित कुतुब मीनार की ऊंचाई 72 मीटर और एफिल टावर की ऊंचाई 324 मीटर है।
  • रियासी जिले में चिनाब नदी पर बनने वाला यह मेहराबदार पुल नदी तल से 359 मीटर ऊपर और कुतुब मीनार से पांच गुना ऊंचा होगा। यह बारामूला और श्रीनगर को उधमपुऱ-कटरा़-काजीगुंड के जरिए जम्मू से जोड़ेगा। इससे समूचा रास्ता करीब सात घंटे में तय किया जा सकेगा।
  • सुरक्षा चिंताओं जैसे विभिन्न मुद्दों की शिकार हुई इस महत्वाकांक्षी योजना के दिसंबर 2016 तक पूरा होने की संभावना थी, लेकिन यह तय समय से काफी विलंब है। एक हजार 315 मीटर लंबे इस अभियांत्रिकी अजूबे की कई अदभुत विशेषताएं होंगी। इसमें विस्फोट एवं भूकंप रोधी गुणों के साथ ही इस तरह की सिग्नल प्रणाली लगी होगी जिससे कि ऊंचाई पर तेज हवाओं का ट्रेन पर केाई प्रभाव नहीं पड़े। योजना के अनुसार दिसंबर 2022 तक कश्मीर को ट्रेन सेवाओं से जोड़ दिया जाएगा।

:: अंतर्राष्ट्रीय समाचार ::

अरब जगत का पहला परमाणु ऊर्जा संयंत्र: बरकाह परमाणु ऊर्जा संयंत्र

  • संयुक्त अरब इमारात (यूएई) के परमाणु ऊर्जा विभाग (ईएनईसी) ने कहा है कि अरब जगत के पहले परमाणु ऊर्जा संयंत्र की पहली इकाई ने काम करना शुरू कर दिया है।
  • प्रमुख तेल उत्पादक देशों में से एक यूएई की राजधानी अबू-धाबी के पश्चिम में फ़ार्स खाड़ी के तट पर स्थित बरकाह परमाणु ऊर्जा संयंत्र को 2017 से काम शुरू करना था, लेकिन इसके उद्घाटन में कई बार देरी हुई।
  • कोरिया इलेक्ट्रिक पॉवर कॉरपोरेशन (केईपीसीओ) द्वारा तामीर किया जाने वाला अरब जगत का यह पहला परमाणु ऊर्जा संयंत्र है, जिसने काम करना शुरू कर दिया है। परियोजना के पूरा होने पर, बरकाह में 5,600 मेगावाट क्षमता वाले चार रिएक्टर होंगे।
  • यूएई के पास पर्याप्त तेल और गैस भंडार हैं, लेकिन एक करोड़ की आबादी वाले इस अरब देश ने सौर ऊर्जा सहित स्वच्छ ऊर्जा के विकल्पों के विकास पर भारी निवेश किया है।
  • फ़ारस खाड़ी के अरब देशों में यह पहला परमाणु संयंत्र है। दुनिया में सबसे अधिक तेल निर्यात करने वाले देश सऊदी अरब ने कहा है कि वह 16 परमाणु रिएक्टर बनाने की योजना बना रहा है, हालांकि अभी तक इस परियोजना पर अमल किया जाना बाक़ी है।

चीन के कन्फ्यूशियस संस्थान

चर्चा में क्यों?

  • भारत की नजर अब उन संस्थानों पर है जिनपर भारत में चीन के प्रचार-प्रसार का शक है। ऐसे 7 कॉलेज और यूनिवर्सिटीज का रिव्यू आनेवाले हफ्तों में होनेवाला है। जानकारी मिली है चीन ने इन संस्थानों के साथ मिलकर अपने कन्फ्यूशियस संस्थानों के लोकल चैप्टर खोल लिए हैं। कन्फ्यूशियस संस्थानों से यहां मतलब ऐसे संस्थानों से है जिनका काम ही चीन का प्रॉपेगैंडा फैलना होता है।
  • अब शिक्षा मंत्रालय 54 MoUs का रिव्यू करेगी। यह जाने-पहचानी यूनिवर्सिटीज जैसे आईआईटी, बीएचयू, जेएनयू, एनआईटी आदि और चीनी यूनिवर्सिटीज के बीच हुए। इसके लिए विदेश मंत्रालय और यूजीसी (यूनिवर्सिटी ग्रांट कमिशन) को लिखा जा चुका है।

कन्फ्यूशियस संस्थान के बारे में

  • कन्फ्यूशियस संस्थान सीधे तौर पर चीनी सरकार के शिक्षा मंत्रालय से फंड प्राप्त करते हैं। इनका काम चीनी भाषा और कल्चर को फैलाना होता है। बीते कुछ वक्त से कन्फ्यूशियस संस्थान दुनियाभर में निशाने पर है। अमेरिका, ब्रिटेन ने इनपर चीनी प्रॉपेगैंडा फैलना के आरोप लगाए हैं। पिछले साल सितंबर में खबर आई थी कि ऑस्ट्रेलिया ने भी अपने यहां ऐसी यूनिवर्सिटीज की जांच के आदेश दिए थे। दुनियाभर की कई यूनिवर्सिटीज ने ऐसे कई कोर्स बंद किए थे जिनका संबंध कन्फ्यूशियस संस्थान से था।
  • कन्फ्यूशियस संस्थानों के खिलाफ जांच का आदेश ऐसे वक्त में आया है जब भारत और चीन के बीच तनाव चरम पर है। गलवान घाटी में हिंसक झड़प के बाद भारत चीन को कड़ा रुख दिखा रहा है। 100 से ज्यादा चाइनीज ऐप्स को भारत में बैन किया जा चुका है। इतना ही नहीं कई ऐसे प्रॉजेक्ट्स कैंसल किए गए हैं जिन्हें चीनी कंपनियों को दिया गया था।

:: राजव्यवस्था ::

नागरिकता संशोधन कानून

चर्चा में क्यों?

  • संशोधित नागरिकता कानून (CAA) के नियमों को तय करने के लिए गृह मंत्रालय ने तीन महीनों का अतिरिक्त समय मांगा है।
  • संसदीय कार्य नियमावली के तहत किसी भी विधेयक को राष्ट्रपति से मंजूरी मिलने के छह महीने के भीतर उससे संबंधित नियम बनाए जाने चाहिए, या तो समयावधि विस्तार की अनुमति ली जानी चाहिए और यह समय विस्तार एक बार में तीन महीने से अधिक नहीं होगा।

क्या है संशोधित नागरिकता कानून?

  • राष्ट्रपति द्वारा 12 दिसंबर, 2019 नागरिकता संशोधन विधेयक, 2019 हस्ताक्षर किए गए थे और उसी दिन से यह कानून प्रभावी हो गया था।
  • इस कानून में तीन पड़ोसी देशों पाकिस्तान, बांग्लादेश, अफगानिस्तान से भारत आए गैर- मुस्लिम प्रवासियों को भारत की नागरिकता देने का प्रावधान है।
  • इस कानून के तहत बांग्लादेश, पाकिस्तान और अफनागिस्तान से ऐसे गैर-मुस्लिम शरणार्थियों को भारत की नागरिकता मिलेगी, जो यहां 31 दिसंबर 2014 से पहले आ चुके हैं।
  • इनमें हिंदू, जैन, सिख, बौद्ध, पारसी और ईसाई शामिल हैं, अब भारत में 5 साल बिता चुके ऐसे लोग यहां की नागरिकता पाने के हकदार होंगे। पहले यह अवधि 11 साल थी।
  • नागरिकता संशोधन कानून त्रिपुरा, मिजोरम, असम और मेघालय के जनजातीय इलाकों में लागू नहीं होगा। क्योंकि ये क्षेत्र संविधान की छठी अनुसूची में शामिल हैं।
  • इसके अलावा जो इलाके बंगला ईस्टर्न फ्रंटिटर रेगुलेशन, 1873 के तहत इनर लाइन परमिट के दायरे में आते हैं वे भी इस कानून के दायरे से बाहर होंगे।

:: अर्थव्यवस्था ::

भारतीय राष्ट्रीय कृषि सहकारी विपणन महासंघ (NAFED)

चर्चा में क्यों?

  • भारतीय राष्ट्रीय कृषि सहकारी विपणन महासंघ (नाफेड) ने सरकार की ओर से बफर स्टॉक बनाने के लिए किसानों से सीधे मौजूदा दरों पर 95,000 टन प्याज खरीदा है। पिछले साल नाफेड ने मूल्य स्थिरीकरण कोष (पीएसएफ) के तहत 2018-19 की रबी (सर्दियों) की फसल से 57,000 टन प्याज खरीदा था। इस साल का लक्ष्य प्रमुख उत्पादक राज्यों से एक लाख टन प्याज खरीदने का है। रबी फसल के प्याज को खरीफ फसल की तुलना में अधिक समय तक सुरक्षित रखा जा सकता है। रबी के प्याज की खरीद मुख्य रूप से महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश और गुजरात से किसान उत्पादक संगठनों (एफपीओ) और सहकारी समितियों के लिए सीधे खरीद केंद्रों से की गई।

भारतीय राष्ट्रीय कृषि सहकारी विपणन महासंघ के बारे में

  • NAFED की स्थापना 1958 में बहु-राज्यीय सहकारी संस्था अधिनियम के अंतर्गत हुई थी। NAFED का लक्ष्य है कृषि उत्पादों के सहकारी विपणन को बढ़ावा देना जिससे किसानों को लाभ पहुँच सके। NAFED का उद्देश्य कृषि, बागबानी और वन के उत्पादों के विपणन, प्रसंस्करण और भंडारण की व्यवस्था करना, कृषि मशीनों, औजारों और अन्य निवेशों का वितरण करना और एक से अधिक राज्यों के बीच आयात-निर्यात से सम्बंधित व्यापार हाथ में लेना इत्यादि है।

:: विज्ञान और प्रौद्योगिकी ::

मोतियाबिंद

चर्चा का कारण

  • नैनो विज्ञान और प्रौद्योगिकी संस्थान (आईएनएसटी) के वैज्ञानिकों ने हाल ही में मोतियाबिंद की सरल, सस्ती और बिना ऑपरेशन के इलाज की तकनीक विकसित की है।

महत्वपूर्ण बिन्दु

  • भारत सरकार के विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग के अंतर्गत आने वाले एक स्वायत्त संस्थान नैनो विज्ञान और प्रौद्योगिकी संस्थान (आईएनएसटी) के वैज्ञानिकों की एक टीम ने गैर-स्टेरॉयडल एंटी-इंफ्लेमेटरी ड्रग (गैर-दाहक या उत्तजेक दवा)-एनएसएआईडी एस्पिरिन से नैनोरोड विकसित किया है।
  • आईएनएसटी का यह शोध एक सस्ते और कम जटिल तरीके से मोतियाबिंद को रोकने में मदद कर सकता है। यह मोतियाबिंद के खिलाफ एक प्रभावी गैर-आक्रामक छोटे अणु- आधारित नैनोथेरेप्यूटिक्स के रूप में भी उपयोगी है ।
  • एस्पिरिन नैनोरोड क्रिस्टलीय प्रोटीन और इसके विखंडन से प्राप्त विभिन्न पेप्टाइड्स के एकत्रीकरण को रोकता है, जो मोतियाबिंद बनने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। वे जैव- आणविक संबंधों के माध्यम से प्रोटीन/पेप्टाइड के एकत्रीकरण को रोकते हैं, जो बीटा-टर्न जैसे क्रिस्टलीय पेप्टाइड्स की संरचना में बदल देते हैं, जो कॉइल्स (लच्छे) और कुंडल में अमाइलॉइड बनने के लिए जिम्मेदार होते हैं।
  • उम्र बढ़ने के साथ और विभिन्न परिस्थितियों में, लेंस प्रोटीन क्रिस्टलीन समुच्चय नेत्र लेंस में अपारदर्शी संरचनाओं का निर्माण करता है, जो दृष्टि को बाधित करता है और बाद में मोतियाबिंद का कारण भी बनता है।
  • अपने नैनो-आकार के कारण एस्पिरिन नैनोरोड्स जैव उपलब्धता, दवा की गुणवत्ता, कम विषाक्तता आदि में सुधार कर सकते हैं । इसलिए, आई-ड्रॉप के रूप में एस्पिरिन नैनोरोड्स मोतियाबिंद के इलाज के लिए एक प्रभावी और व्यवहार्य विकल्प के रूप में देखा जा रहा है।

मोतियाबिंद

  • मोतियाबिंद अंधेपन का एक प्रमुख रूप है जो तब होता है जब हमारी आंखों में लेंस बनाने वाले क्रिस्टलीय प्रोटीन की संरचना बिगड़ जाती है, जिससे क्षतिग्रस्त या अव्यवस्थित प्रोटीन एकत्र होकर एक और नीली या भूरी परत बनाते हैं, जो अंततः लेंस की पारदर्शिता को प्रभावित करता है।
  • अक्सर देखा गया है कि 50 से अधिक उम्र के लोगों को मोतियाबिंद की समस्या हो जाती है।
  • मोतियाबिंद आँखों की वो समस्या जिसमें धीरे-धीरे आँखों की रोशनी में धुंधलापन आने लगता है जिससे दिखाई देना कम हो जाता है। मोतियाबिंद की बीमारी जन्मजात भी हो सकती है।
  • मोतियाबिंद का कारण है बढ़ती उम्र, डायबिटीज की समस्या,आंखों पर देर तक सूरज की रोशनी पड़ना, आंख में किसी तरह की चोट या सूजन,धूम्रपान का सेवन, अल्ट्रावायलेट रेडिएशन के संपर्क में आना,रेडिएशन थेरेपी, अनुवांशिक ।
  • मोतियाबिंद के चार प्रकार के होते हैं , यथा - सेकेंडरी मोतियाबिंद, ट्रॉमेटिक मोतियाबिंद, कन्जेनिटल मोतियाबिंद और रेडिएशन मोतियाबिंद ।
  • भारत सरकार के स्वास्थ्य मंत्रालय ने राष्ट्रीय दृष्टिहीनता नियंत्रण कार्यक्रम (National Blindness Control Programme-NBCP) को 1976 में शुरू किया था। इस कार्यक्रम का उद्देश्य अंधेपन की व्यापकता को कम करना तथा इस हेतु आधारभूत ढाँचा एवं कार्यक्षमता स्थापित करना है।

रेडियो नेटवर्क पर आधारित संपूर्ण दूरसंचार कनेक्टिविटी: भारत एयर फाइबर

चर्चा में क्यों?

  • केंद्रीय एचआरडी, इलेक्ट्रोनिक्स, संचार एवं आईटी राज्य मंत्री श्री संजय धोत्रे ने महाराष्ट्र के अकोला में ‘ भारत एयर फाइबर सेवाओं‘ का उद्घाटन किया। भारत एयर फाइबर सेवाओं के उद्घाटन के साथ ही, अकोला और वाशिम जिले के निवासी मांग के आधार पर वायरलेस इंटरनेट कनेक्शन प्राप्त कर सकेंगे।

क्या है भारत एयर फाइबर?

  • भारत एयर फाइबर सेवाएं बीएसएनएल द्वारा भारत सरकार की डिजिटल इंडिया पहलों के एक हिस्से के रूप में प्रस्तुत की गई हैं और इसका लक्ष्य बीएसएनएल स्थान से 20 किमी के दायरे में वायरलेस कनेक्टिविटी उपलब्ध कराना है और इस प्रकार दूरदूराज के स्थान के ग्राहक भी लाभान्वित हो सकेंगे क्योंकि टेलीकॉम इंफ्रास्ट्रक्चर पाटनर्स (टीआईपी) की सहायता से बीएसएनएल सबसे सस्ती सेवाएं उपलब्ध कराती है।
  • ये भारत एयर फाइबर सेवाएं उचित लागत पर सबसे तेज वायरलेस इंटरनेट कनेक्टिविटी तथा वायस सेवाओं के नए रास्ते खोलती हैं। बीएसएनएल 100 एमबीपीएस स्पीड तक भारत एयर फाइबर कनेक्टिविटी उपलब्ध कराती है। बीएसएनएल वायरलाइन एवं वायरलेस वर्गों में आकर्षक ब्रॉडबैंड प्लान की पेशकश कर रही है तथा लॉकडाउन के दौरान बीएसएनएल इंटरनेट कनेक्टिविटी के लिए सबसे भरोसेमंद ब्रांड के रूप् में सामने आई। इस प्रकार उसने सरकार एवं कई निजी कंपनियों द्वारा आरंभ वर्क फ्राम होम को सफलतापूर्वक कार्यान्वित किया।

‘इक्वीलीब्रियम’ उपकरण

  • खिलाड़ियों के प्रदर्शन को सुधारने, उनकी चोटों को रोकने और उबरने की प्रक्रिया को तेज करने के लिये एक ‘स्पोर्ट्स डायनामिक्स इक्वीलीब्रियम’ उपकरण लांच किया गया। भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व ‘स्ट्रेंथ एवं कंडिशनिंग कोच’ रामजी श्रीनिवासन और पूर्व एथलीट से खेल वैज्ञानिक बने करण कंचन ने इसे डिजाइन किया है जिसमें सेंसर लगे हुए हैं और इसमें ‘आर्टिफिशियल टेक्नालॉजी’ का इस्तेमाल किया गया है। विज्ञप्ति के अनुसार दोनों के प्रयास से बने इस यंत्र से जमीनी स्तर से लेकर शीर्ष खिलाड़ियों को मदद मिलेगी।

ड्रोन परिचालन प्रणाली के लिए सुरक्षा दिशा-निर्देश जारी

चर्चा में क्यों?

  • विमानन सुरक्षा नियामक बीसीएएस ने ड्रोन परिचालन प्रणालियों के लिए दिशा-निर्देश जारी किए हैं जो जमीन पर कॉकपिट की तरह काम करते हुए इस मानवरहित हवाई वाहन का दूर से संचालन करती हैं। बीसीएएस ने उन नियमों की सूची बनाई है जिनका साइबर सुरक्षा, भंडारण क्षमता, ड्रोन परिचालन प्रणालियों या दूर से संचालित विमान प्रणालियों के लिए स्टाफ के प्रशिक्षण एवं पृष्ठभूमि जांच के संबंध में पालन किया जाना चाहिए। दूर से संचालित विमान (आरपीए), इससे जुड़े संचालन केंद्र, इसके जरूरी आदेश एवं नियंत्रण लिंक आदि मिलकर दूर से संचालित वायु प्रणाली (आरपीएएस) बनती है।

ड्रोन परिचालन दिशा-निर्देश से जारी मुख्य तथ्य

  • नागर विमानन सुरक्षा ब्यूरो (बीसीएएस) के दिशा-निर्देशों में कहा गया है, “आरपीए और भंडारण क्षमता के भीतर सीसीटीवी कैमरा लगाना सुनिश्चित करें। लघु एवं सूक्ष्म को छोड़कर सभी श्रेणी के आरपीए के लिए 30 दिन की रिकॉर्डिंग रखने की क्षमता हो।” सूक्ष्म श्रेणी का ड्रोन या आरपीए वो होता है जिसका वजन 250 ग्राम से कम होता है। अगर इसका वजन 250 ग्राम से दो किलोग्राम के बीच रहता है तो यह लघु श्रेणी में आएगा।
  • बीसीएएस के मुताबिक, आरपीएएस में संचालन केंद्र की प्रकृति “निश्चित और स्पष्ट’’ होती है जबकि व्यावसायिक विमानों की प्रकृति “सीमित” होती है जहां घुसपैठ और भारी हथियारों के प्रयोग की आशंका कम होती है। इसमें कहा गया कि इसलिए गैरकानूनी हस्तक्षेपों के खिलाफ दूरदराज के संचालन केंद्रों के परिसर की “संभावित संवेदनशीलता” पर और विचार किया जाना चाहिए।
  • दिशा-निर्देशों में कहा गया, “विमान (ड्रोन) को उड़ान के लिए इस तरह से संग्रहित और तैयार किया जाना चाहिए जिससे उसमें छेड़छाड़ को रोका जा सके और महत्त्वपूर्ण भागों की अखंडता सुनिश्चित हो सके।” इसके मुताबिक डेटा एवं संचार लिंक तथा सेवाओं की सुरक्षा ड्रोन और उनके दूरस्थ संचालन केंद्रों के लिए समान रूप से महत्त्वपूर्ण है।
  • इसमें कहा गया, “इसी अनुसार, यह सुनिश्चित किया जाए कि वे (लिंक और सेवाएं) हैकिंग, धोखाधड़ी और अन्य प्रकार के हस्तक्षेप या दुर्भावनापूर्ण हाइजैक से बचे रहें।”
  • दिशा-निर्देशों में कहा गया कि इसके अलावा ड्रोन संचालक को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि उसके प्रत्येक स्टाफ को बीसीएएस की अनुशंसा के अनुरूप एक दिवसीय ऑनलाइन विमानन सुरक्षा जागरुकता प्रशिक्षण प्राप्त हो।
  • इसमें यह भी कहा गया कि किसी तरह की सुरक्षा घटना या दुर्घटना होने पर इसकी जानकारी स्थानीय पुलिस, बीसीएएस नियंत्रण कक्ष और बीसीएएस के क्षेत्रीय निदेशक को बिना किसी देरी के दी जानी चाहिए।
  • इनमें कहा गया कि आरपीएएस के संचालक को इनके परिचालन से पहले स्थानीय प्रशासन और नागर विमानन महानिदेशालय (डीजीसीए) से जरूरी अनुमति लेनी होगी।

कोरोना मरीजों का नेशनल क्लीनिकल रजिस्टर

चर्चा में क्यों?

  • देश में कोरोना वायरस के बढ़ते कहर के बीच दिन प्रतिदिन कोरोना मरीजों की तादादा बढ़ रही है। इसको देखते हुए सरकार अब पुख्ता तैयारी करने जा रही है। सरकार देश भर में भर्ती कोरोना मरीजों की संख्या का लेखा-जोखा रखने जा रही है। इसके तहत देश भर में भर्ती कोरोना मरीजों के लिए एक नेशनल क्लीनिकल रजिस्टर बनाने की तैयारी चल रही है। भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) इसको लेकर तैयारियों में जुटा हुआ है।

कोरोना मरीजों का नेशनल क्लीनिकल रजिस्टर के बारे में

  • देश भर के अस्पतालों में भर्ती कोरोना के मरीजों का रियल टाइम डाटा एकत्र करने के लिए ऐसा किया जा रहा है, जो उपचार के परिणामों को बेहतर बनाने, महामारी की प्रगति में रुझान का विश्लेषण करने और इसके खिलाफ प्रतिक्रिया करने में मदद करेगा। स्वास्थ्य मंत्रालय और अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान(AIIMS) के सहयोग से भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद(ICMR), नेशनल क्लिनिकल रजिस्ट्री स्थापित करने की योजना बना रहा है जो शोधकर्ताओं और नीति निर्माताओं को कोरोना मरीजों के इलाज में सुधार के लिए जांच उपचारों की प्रभावशीलता, प्रतिकूल प्रभाव पड़ने और सबूत उत्पन्न करने में मदद करेगा।
  • इसका उद्देश्य अस्पताल में भर्ती कोरोना मरीजों से जुड़ी जानकारी,जैसे कि डाटा क्लीनिकल ​​और प्रयोगशाला सुविधाएं, उनकी संख्या, मौतों की संख्या, उपचार परिणाम, अन्य लोगों के बीच सभी आयु समूहों में जटिलताओं को इकट्ठा करना है। उन्होंने कहा कि कोरोना वायरसऔर इससे होने वाली बीमारी के कई अज्ञात पैरामीटर हैं जो बीमारी की उचित समझ और प्रबंधन में बाधा हैं।
  • देश के विभिन्न क्षेत्रों को कवर करने वाला एक व्यवस्थित रूप से व्यापक डेटाबेस, दोनों शोधकर्ताओं और नीति निर्माताओं को महामारी की प्रगति की प्रवृत्ति का पता लगाने और तदनुसार महामारी के प्रति प्रतिक्रिया व्यक्त करने के रुझान के बारे में पता लगाने के लिए, कोरोना की महत्वपूर्ण समझ को सूचित करने के लिए शोधकर्ताओं और नीति निर्माताओं दोनों को सक्षम करेगा।
  • इस काम के लिए देश में 15 संस्थानों को चुना गया है। इसमें चंडीगढ़ में पोस्ट ग्रेजुएट इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल एजुकेशन एंड रिसर्च (PGIMER), AIIMS दिल्ली, AIIMS जोधपुर, नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ मेंटल हेल्थ एंड न्यूरोसाइंसेस (NIMHANS), बेंगलुरु और सशस्त्र बल मेडिकल कॉलेज, पुणे सहित राष्ट्रीय ख्याति के पंद्रह संस्थान शामिल हैं। यह सभी संस्थान देश भर के अस्पतालों और मेडिकल कॉलेजों के साथ मिलकर इस काम को पूरा करेंगे।

:: पर्यावरण और पारिस्थितिकी ::

बन्नेरघट्टा बायोलॉजिकल पार्क

चर्चा में क्यों?

  • कर्नाटक के बन्नेरघट्टा बायोलॉजिकल पार्क में 12 वर्षीय हथिनी रूपा ने शनिवार को एक नर बच्चे को जन्म हो दिया है। बीबीपीपी के कार्यकारी निदेशक ने कहा कि मां और बछड़ा दोनों स्वस्थ हैं और अच्छा काम कर रहे हैं। कार्यकारी निदेशक ने कहा, "यह रूपा द्वारा दिया गया दूसरा बछड़ा था, उसने 2016 में 8 साल की उम्र में एक मादा बच्चे को जन्म दिया था।" इस बछड़े के साथ, वर्तमान हाथी की आबादी बीबीपी में 24 है।

बन्नेरघट्टा बायोलॉजिकल पार्क के बारे में

  • कर्नाटक की राजधानी बेंगलुरु के पास बन्नेरघट्टा राष्ट्रीय उद्यान, 1970 में स्थापित किया गया था और 1974 में इसे राष्ट्रीय उद्यान घोषित किया गया था। पार्क में चिड़ियाघर के साथ एक पालतू कोने, एक पशु बचाव केंद्र, एक तितली परिक्षेत्र, एक मछलीघर, एक सांप घर और एक सफारी पार्क के साथ एक लोकप्रिय पर्यटन स्थल है।

:: विविध ::

महात्मा गांधी, नूर इनायत खान और मैरी सीकोल

  • राष्ट्रपिता महात्मा गांधी भारतीय नोटों के बाद अब ब्रिटेन में भी सिक्कों पर नजर आएंगे। वित्त मंत्री ऋषि सुनक के दफ्तर ने इसकी पुष्टि करते हुए बताया कि यह अश्वेत शख्सियतों महात्मा गांधी, भारतीय मूल के ब्रिटिश जासूस नूर इनायत खान और जमैकन ब्रिटिश नर्स मैरी सीकोल की उपलब्धियों और योगदान का जश्न मनाने के प्रयासों के तहत इनकी तस्वीरों वाले सिक्के जारी किए जाएंगे।
  • सुनक ने इसके लिए रॉयल मिंट अडवाइजरी कमिटी को लिखा है जो सिक्कों के लिए थीम और डिजाइजन के प्रस्ताव भेजती है। सुनक ने यह लेटर 'वी टु बील्ट ब्रिटेन' (हमने भी ब्रिटेन को बनाया) कैंपेन के समर्थन में लिखा है, जिसमें ब्रिटिश करंसी पर अश्वेत शख्सियतों को प्रतिनिधित्व देने की मांग की जा रही है।

अर्चना सोरेंग

  • ओडिशा के एक छोटे से गांव की खड़िया जनजाति की लड़की अर्चना सोरेंग को चार दिन पहले तक ज्यादा लोग नहीं जानते थे लेकिन अब उन्हें उनके गांव, जिला, राज्य और देश ही नहीं, बल्कि दुनियाभर के बहुत से लोग जानते हैं। संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुतारेस ने उन्हें अपने नए सात सदस्यीय सलाहकार समूह में शामिल करने का निर्णय किया है, जो जलवायु संकट से निपटने के वास्ते जरूरी सलाह और समाधान उपलब्ध कराएगा।
  • संयुक्त राष्ट्र ने एक बयान में सोरेंग को इस समूह में शामिल करने की जानकारी देते हुए बताया कि वह शोध और अनुसंधान में अनुभवी हैं तथा वह स्वदेशी समुदायों के पारंपरिक ज्ञान के दस्तावेजीकरण, संरक्षण और प्रोत्साहन के लिए काम कर रही हैं।

‘इंडिया टूमॉरो: कनवरसेशन विथ नेक्स्ट जेनरेशन ऑफ पॉलिटिकल लीडर’

  • भारतीय नेताओं पर लिखी गयी एक नयी किताब पाठकों को देश के भविष्य के प्रमुख राजनीतिज्ञों के 20 साक्षात्कारों के जरिये मौजूदा भारतीय राजनीति को समझने में मदद करेगी। ‘ इंडिया टूमॉरो: कनवरसेशन विथ नेक्स्ट जेनरेशन ऑफ पॉलिटिकल लीडर’ नाम से प्रकाशित किताब में 50 साल से कम उम्र के राजनीतिज्ञों के साक्षात्कार हैं जिसके जरिये राहुल गांधी, स्मृति जुबीन ईरानी, वरुण गांधी, उमर अब्दुल्ला, अखिलेश यादव और अन्य के जीवन और व्यक्तित्व को जानने का मौका मिलेगा। इस किताब को शिक्षाविद प्रदीप छिब्बर और हर्ष शाह ने लिखा है। किताब के प्रकाशक ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी प्रेस (ओयूपी) के मुताबिक इस किताब में शामिल नेताओं के व्यक्तित्व, महत्वकांक्षा, विचारधारा, रुचि, जुनून और प्रेरणा को जानने की कोशिश की गई जो अगली पीढ़ी के राजनेता हैं और भारत का भविष्य तय करेंगे।

:: प्रिलिम्स बूस्टर ::

  • महाराष्ट्र के अकोला में उद्घाटन किए जाने से चर्चा में रहे ‘भारत एयर फाइबर सेवाएं’ किस विभाग एवं किस सेवा से संबंधित है? (बीएसएनएल, वायरलेस इंटरनेट कनेक्टिविटी प्रदान करना)
  • हाल ही में किस गैर-लाभकारी संगठन के द्वारा 'वर्चुअल गाला-टेक्नोलॉजी फॉर चेंज' कार्यक्रम के माध्यम से भारत में स्कूली बच्चों के मिड डे मील हेतु 9,50,000 डॉलर जुटाया गया? (अक्षय पात्र)
  • हाल ही में किस देश ने अश्वेत शख्सियतों महात्मा गांधी, जासूस नूर इनायत खान और मैरी सीकोल की उपलब्धियों पर इनके तस्वीरों वाले सिक्के जारी करने की योजना बनायीं है? (ब्रिटेन)
  • हाल ही में चर्चा में रहे दुनिया के सबसे ऊंचा रेलवे पुल का निर्माण किस नदी पर किया जा रहा है एवं यह कहां स्थित है? (चिनाब नदी, रियासी जिला-जम्मू कश्मीर)
  • हाल ही में खिलाड़ियों के प्रदर्शन को सुधारने, उनकी चोटों को रोकने और उबरने की प्रक्रिया को तेज करने के लिये किस उपकरण को लांच किया गया है? (स्पोर्ट्स डायनामिक्स इक्वीलीब्रियम)
  • सरकार के निर्देश से बफर स्टाक बनाने हेतु प्याज की खरीद से चर्चा में रहे नाफेड-NAFED की स्थापना कब एवं किस उद्देश्य हेतु हुई थी? (1958, कृषि उत्पादों के सहकारी विपणन हेतु)
  • UN के जलवायु कार्यकर्ताओं के समूह में शामिल होने वाली अर्चना सोरेन सोरेंग को जलवायु संरक्षण के हेतु किस कार्य की जिम्मेदारी मिली है? (विभिन्न स्वदेशी समुदायों के परंपरागत ज्ञान का दस्तावेजीकरण)
  • भारत द्वारा शिक्षण संस्थानों में चीन से जुड़े किस संस्थान की गतिविधियों की समीक्षा किए जाने का निर्णय लिया गया है एवं इसका क्या कार्य है? (कन्फ्यूशियस संस्थान, चीनी भाषा एवं संस्कृति का प्रचार)
  • स्वामी विवेकानंद सांस्कृतिक केंद्र द्वारा आयोजन से चर्चा में रहे ‘बाउल (Baul)’ क्या है? (पश्चिम बंगाल और बांग्लादेश में प्रचलित आध्यात्मिक लोक गायन, यूनेस्को के सांस्कृतिक विरासत सूची में शामिल)
  • हाल ही में दिशा निर्देश जारी करने से चर्चा में रहे ‘ड्रोन परिचालन प्रणालियों’ का विनियमन किस संस्था के द्वारा किया जाता है? (नागर विमानन सुरक्षा ब्यूरो-बीसीएएस)
  • संशोधित नागरिकता कानून (सीएए) हेतु अतिरिक्त समय सीमा की मांग से चर्चा में रहे सीएए कानून के द्वारा किन धार्मिक समुदाय को नागरिकता प्रदान की गई थी? (हिंदू, सिख, जैन, ईसाई, बौद्ध, पारसी)
  • 50 साल से कम उम्र के राजनीतिज्ञों के साक्षात्कार पर आधारित किताब ‘ इंडिया टूमॉरो: कनवरसेशन विथ नेक्स्ट जेनरेशन ऑफ पॉलिटिकल लीडर’ किसने लिखी है? (प्रदीप छिब्बर और हर्ष शाह)
  • अगरबत्ती के निर्माण में भारत को आत्मनिर्भर बनाने हेतु खादी और ग्रामोद्योग आयोग-KVIC द्वारा किस कार्यक्रम को प्रारंभ किया गया है? (खादी अगरबत्ती आत्मनिर्भर मिशन)


स्रोत साभार: Dainik Jagran (Rashtriya Sanskaran), Dainik Bhaskar (Rashtriya Sanskaran), Rashtriya Sahara (Rashtriya Sanskaran) Hindustan Dainik (Delhi), Nai Duniya, Hindustan Times, The Hindu, BBC Portal, The Economic Times (Hindi & English), PTI, PIB