(दैनिक समसामयिकी और प्रिलिम्स बूस्टर) यूपीएससी और सभी राज्य लोक सेवा आयोग परीक्षाओं के लिए हिंदी में समाचार पत्रों का संकलन (03 अप्रैल 2020)

दैनिक समसामयिकी और प्रिलिम्स बूस्टर


(दैनिक समसामयिकी और प्रिलिम्स बूस्टर) यूपीएससी और सभी राज्य लोक सेवा आयोग परीक्षाओं के लिए हिंदी में समाचार पत्रों का संकलन (03 अप्रैल 2020)


:: राष्ट्रीय समाचार ::

कोरोना के संक्रमण से बचाने में मदद करेगा सरकारी एप 'आरोग्य सेतु'

  • सरकार ने एक मोबाइल एप लॉन्च किया है. इस एप नाम 'आरोग्य सेतु' (Arogya Setu app) है. इस एप की मदद से लोगों को कोरोना वायरस संक्रमण के खतरे और जोखिम का आकलन करने में मदद मिल सकेगी. यह एप लोगों को वायरस से संक्रमित व्यक्ति के नजदीक जाने पर सतर्क करेगा.
  • एप केवल ताजा मामलों का पता लगाएगा और केवल उन्हीं लोगों को सतर्क करेगा जो संक्रमित व्यक्ति के आस-पास रहे हैं. एक ' यह एप आवाज के जरिये इस्तेमाल में आने वाली तकनीक से संकमितों का पता लगाने में मदद करेगा. इसमें अति आधुनिक ब्लूटूथ टेक्नोलॉजी, एल्गोरिदम और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का उपयोग शामिल है. यह एप 11 भाषाओं में उपलब्ध है. इसे एंड्रियोड और ioS दोनों प्लेटफार्म पर लॉन्च किया गया है.
  • यदि कोई व्यक्ति चिकित्सा परीक्षण के दौरान कोरोना वायरस से संक्रमित पाया जाता है तो संक्रमित व्यक्ति का मोबाइल नंबर स्वास्थ्य मंत्रालय द्वारा बनाए गए रजिस्टर में शामिल होगा और एप पर भी इस सूचना को अपडेट किया जा जायेगा.

ई-नाम प्लेटफ़ॉर्म के तहत तीन नए सॉफ्टवेयर प्रोग्राम

  • राष्ट्रीय कृषि बाजार (ई-नाम) प्लेटफ़ॉर्म की प्रभावशीलता बढ़ाने के लिए केंद्रीय कृषि और किसान कल्याण मंत्री श्री नरेंद्र सिंह तोमर ने तीन नई सुविधाएं लॉन्च की। इससे किसानों को अपनी उपज को बेचने के लिए खुद थोक मंडियों में आने की जरूरत कम हो जाएगी। वे उपज  वेयरहाउस  में रखकर वहीं से बेच सकेंगे। कोरोना वाय़रस के संक्रमण के इस दौर में इसकी आवश्यकता है। साथ ही एफपीओ अपने संग्रह से उत्पाद को लाए बिना व्यापार कर सकते हैं व लॉजिस्टिक मॉड्यूल के नए संस्करण को भी जारी किया गया है, जिससे देशभर के पौने चार लाख ट्रक जुड़ सकेंगे।
  • केंद्रीय मंत्री श्री तोमर द्वारा लांच किए गए तीन सॉफ्टवेयर मॉड्यूल हैं
  • ई-नाम में गोदामों से व्यापार की सुविधा के लिए वेयरहाउस आधारित ट्रेडिंग मॉड्यूल
  • एफपीओ का ट्रेडिंग मॉड्यूल, जहां एफपीओ अपने संग्रह से उत्पाद को लाए बिना व्यापार कर सकते हैं
  • इस जंक्शन पर अंतर-मंडी तथा अंतरराज्यीय व्यापार की सुविधा के साथ लॉजिस्टिक मॉड्यूल का नया संस्करण, जिससे पौने चार लाख ट्रक जुड़े रहेंगे।

क्या है राष्ट्रीय कृषि बाज़ार (इ-नाम)

  • कृषि विपणन क्षेत्र में प्रवेशक सुधार के उद्देश्य से और किसानों को अधिकतम लाभ देने के लिए पूरे देश में कृषि जिंशों को ऑन–लाइन विपणन को प्रोत्साहन देने के लिए भारत सरकार ने दिनांक 01.07.2015 को राष्ट्रीय कृषि बाजार को कार्यान्वयन के लिए एक योजना अनुमोदित की है। यह एक पैन-इंडिया इलेक्ट्रॉनिक व्यापार पोर्टल है जो कृषि से संबंधित उपजो के लिए एक एकीकृत राष्ट्रीय बाजार का निर्माण करने के लिए मौजूदा ए.पी.एम.सी मंडी का एक प्रसार है। ई-नाम पोर्टल सभी ए.पी.एम.सी से संबंधित सूचना और सेवाओं के लिए एक ही स्थान पर सेवा प्रदान करता है।

तब्‍लीगी जमात से संबंध रखने वाले 960 विदेशी किए ब्‍लैकलिस्‍ट

  • तब्‍लीगी जमात से ताल्‍लुक रखने वाले 960 विदेशियों के खिलाफ केंद्र सरकार ने बड़ी कार्रवाई की है। उक्‍त सभी विदेशियों को ब्लैक लिस्ट कर दिया गया है। इन पर यह कार्रवाई विदेशी कानून 1946 (Foreigners Act 1946) एवं आपदा प्रबंधन अधिनियम 2005 (Disaster Management Act 2005) के प्रावधानों को तोड़ने के आरोप में की गई है। केंद्रीय गृह मंत्रालय की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि पर्यटक वीजा पर तब्लीगी गतिविधियों में लिप्‍त पाए जाने के कारण 960 विदेशियों को ब्लैक लिस्ट कर दिया गया है। इन सभी का भारतीय वीजा भी रद कर दिया गया है।

पृष्टभूमि

  • गौरतलब है कि अब तक 400 तब्लीगियों में कोरोना वायरस के संक्रमण की पुष्टि हो चुकी है। इतना ही नहीं इनकी संख्या और बढ़ने की आशंका है। केंद्रीय गृह मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि पर्यटन वीजा पर भारत आने के बाद तब्लीगी गतिविधियों में शामिल होकर इन लोगों ने वीजा नियमों का उलंघन किया है और इस कारण उनका मौजूदा वीजा रद्द कर दिया गया है। इसके साथ ही इन लोगों ने कोरोना के संकट के दौरान बड़ी संख्या में एकजुट नहीं होने के निर्देशों का भी उल्लंघन किया है। इस कार्रवाई के बाद भविष्य में अब ये भारत में दाखिल नहीं हो सकेंगे।

क्या हैं तब्लीगी, जमात और मरकज के मायने

  • कोरोना वायरस के बढ़ते प्रकोप को देखते हुए देश में लागू किए गए लॉकडाउन के बीच बीते सोमवार को तेलंगाना से आई एक खबर से हड़कंप मच गया था। वहां छह लोगों की मौत हो गई थी। पड़ताल में पता चला था कि ये सभी दिल्ली में हुए एक बड़े धार्मिक जलसे में शामिल होने के बाद घर लौटे थे। यह जलसा था तब्लीगी जमात, जो दिल्ली के निजामुद्दीन इलाके में स्थित मरकज में आयोजित किया गया था।

तब्लीगी, जमात और मरकज क्या हैं?

  • तब्लीगी, जमात और मरकज ये तीन अलग-अलग शब्द हैं। तब्लीगी का मतलब होता है, अल्लाह के संदेशों का प्रचार करने वाला। जमात मतलब है समूह और मरकज का अर्थ होता है बैठक आयोजित करने की जगह।
  • यानी की अल्लाह की कही बातों का प्रचार करने वाला समूह। तब्लीगी जमात से जुड़े लोग जो पारंपरिक इस्लाम को मानते हैं और इसी का प्रचार-प्रसार करते हैं।
  • इसका मुख्यालय दिल्ली के निजामुद्दीन इलाके में स्थित है। एक दावे के मुताबिक इस जमात के दुनियाभर में 15 करोड़ सदस्य हैं। 20वीं सदी में तबलीगी जमात को इस्लाम का एक बड़ा और अहम आंदोलन माना गया था।

कहां से, कैसे हुई शुरू

  • कहा जाता है 'तब्लीगी जमात' की शुरुआत इस्लाम का प्रचार-प्रसार और मुस्लिम को धर्म संबंधी जानकारियां देने के लिए की गई थी।
  • इसके पीछे कारण यह था कि मुगल काल में कई लोगों ने इस्लाम धर्म कबूल किया था, लेकिन फिर वो सभी हिंदू परंपरा और रीति-रिवाज में लौट रहे थे।
  • ब्रिटिश काल में भारत में आर्य समाज ने उन्हें दोबारा से हिंदू बनाने के लिए शुद्धिकरण अभियान शुरू किया था, जिसके चलते मौलाना इलियास कांधलवी ने इस्लाम की शिक्षा देने का काम प्रारंभ किया।
  • तबलीगी जमात आंदोलन 1927 में मुहम्मद इलियास अल-कांधलवी ने भारत में हरियाणा के नूंह जिले के गांव से शुरू किया था।
  • जमात के छह मुख्य उद्देश्य या "छ: उसूल" हैं (कलिमा, सलात, इल्म, इक्राम-ए-मुस्लिम, इख्लास-ए-निय्यत, दावत-ओ-तब्लीग) हैं। आज यह 213 देशों तक फैल चुका है।

कैसे करता है यह काम

  • तब्लीगी जमात के मरकज से ही अलग-अलग हिस्सों के लिए तमाम जमातें या समूह या फिर आप इसे जत्था भी कह सकते हैं, निकलती हैं।
  • यह जमात तीन दिन, पांच दिन, दस दिन, 40 दिन और चार महीने तक की यात्रा पर जाती हैं।
  • एक जमात में आठ से दस लोग शामिल होते हैं। इनमें दो लोग सेवा के लिए होते हैं जो कि खाना बनाते हैं।
  • जमात में शामिल लोग सुबह-शाम शहर में निकलते हैं और लोगों से नजदीकी मस्जिद में पहुंचने के लिए कहते हैं।
  • सुबह के वक्त ये हदीस पढ़ते हैं और नमाज पढ़ने और रोजा रखने पर इनका ज्यादा जोर होता है। इस तरह से ये अलग-अलग इलाकों में इस्लाम का प्रचार करते हैं और अपने धर्म के बारे में लोगों को बताते हैं।

पहली मरकज और इज्तिमा

  • हरियाणा के नूंह से वर्ष 1927 में शुरू हुई तब्लीगी जमात की पहली मरकज 14 साल बाद हुई थी। साल 1941 में 25 हजार लोगों के साथ पहली बैठक हुई थी।
  • इसके बाद ही यह यहां से पूरी दुनिया में फैल गया। विश्व के अलग-अलग देशों में हर साल इसका सालाना जलसा होता है, जिसे इज्तिमा कहते हैं। मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल में साल 1949 में सबसे पहले इज्तिमा आयोजित किया गया था।

:: अंतर्राष्ट्रीय समाचार ::

जलवायु परिवर्तन पर होने वाला सीओपी-26 सम्मेलन

  • संयुक्त राष्ट्र का जलवायु परिवर्तन पर होने वाला सम्मेलन सीओपी-26 कोरोना वायरस के प्रकोप को देखते हुए स्थगित कर दिया गया है। ब्रिटेन की सरकार ने यह जानकारी दी। सीओपी-26 नवंबर में स्कॉटलैंड के शहर ग्लासगो में होने वाला था।
  • बढ़ते वैश्विक तापमान को रोकने के उपायों पर चर्चा करने के लिए यह दस दिन का सम्मेलन होता है जिसमें दुनियाभर के 200 नेताओं समेत करीब 30,000 लोग शामिल होते हैं।

:: भारतीय राजव्यवस्था ::

जम्मू-कश्मीर में भारतीय संविधान की शपथ लेने वाले पहले जज बने ओसवाल

  • एडवोकेट रजनीश ओसवाल जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट के जजों की श्रेणी में शामिल हो गए हैं। गुरुवार को उन्होंने शपथ ली। हाईकोर्ट की चीफ जस्टिस गीता मित्तल ने उन्हें शपथ दिलाई। ओसवाल हाईकोर्ट के पहले ऐसे जज हैं, जिन्होंने भारतीय संविधान के तहत शपथ ली है। इससे पहले जम्मू-कश्मीर का अपना संविधान था।

पृष्ठभूमि

  • जम्मू-कश्मीर के केंद्र शासित प्रदेश बनने के बाद पुनर्गठन होने पर अब हाईकोर्ट की कार्यवाही भारतीय संविधान के तहत चलती है। इससे पहले रहे जजों ने राज्य के संविधान के तहत शपथ ली थी। कोरोना वायरस की रोकथाम के लिए लागू लॉकडाउन के चलते शपथ ग्रहण समारोह का आयोजन ऑनलाइन किया गया।
  • इससे पहले हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार संजय धर ने राष्ट्रपति के वारंट को पढ़कर सुनाया। उपराज्यपाल द्वारा प्रमाणित पत्र को भी पढ़ा गया। शपथ समारोह में डीजीपी दिलबाग सिंह, एडवोकेट जनरल समेत कुछ अन्य जज मौजूद रहे।
  • जस्टिस पोसवाल के आने से अब जजों की संख्या 9 हो गई है। हालांकि अभी भी 8 जजों की कमी है। हाईकोर्ट में जजों के कुल 17 पद मंजूर हैं। वर्ष 1973 में जन्मे ओसवाल जम्मू यूनिवर्सिटी में एलएलबी के गोल्ड मेडलिस्ट रहे हैं।

:: भारतीय अर्थव्यवस्था ::

मार्च में कमजोर रही भारत की विनिर्माण गतिविधियां

  • कोरोना वायरस का असर देश की निर्माण गतिविधियों पर भी दिख रहा है। मार्च महीने में निर्माण गतिविधियों की वृद्धि दर पिछले चार महीनों में सबसे कम स्तर पर रही है। मार्केट इकोनॉमिक्स द्वारा गुरुवार को जारी आईएचएस मार्किट भारत विनिर्माण खरीद प्रबंधक सूचकांक (पीएमआई) घटकर 51.8 रह गया। फरवरी में पीएमआई 54.5 दर्ज किया गया था। सूचकांक का 50 से ऊपर रहना गतिविधियों में तेजी और इससे कम रहना गिरावट दिखाता है। यह नवंबर 2019 के बाद से सबसे कम वृद्धि दर रही है।
  • यह लगातार 32वां महीना है, जिसमें विनिर्माण पीएमआई 50 अंक के ऊपर रही है जिसका अर्थ यह है कि विनिर्माण में विस्तार हो रहा है। आईएचएस मार्किट के अनुसार भारतीय विनिर्माण सेक्टर अभी भी वैश्विक कोरोना आउटब्रेक के नकारात्मक असर की तुलना में बचा हुआ है। सर्वेक्षण के अनुसार कोविड-19 की चिंताओं के कारण सकारात्मकता के साथ व्यापार के दृष्टिकोण के प्रति विश्वास कम हो गया है। हालांकि आनेवाले महीनों में उम्मीद है कि भारतीय विनिर्माण क्षेत्र का ज्यादा नकारात्मक असर दिख सकता है।
  • सर्वेक्षण के अनुसार 12 महीने के कारोबारी दृष्टिकोण के प्रति मार्च में सेंटीमेंट कमजोर हुआ है। आईएचएस मार्किट के अर्थशास्त्री एलिएट केर ने भारत के नवीनतम सर्वेक्षण परिणामों पर कहा कि नए ऑर्डर और आउटपुट दोनों कम दर से बढ़े हैं लेकिन यूरोप और एशिया के अन्य हिस्सों में माल उत्पादकों की तुलना में अपेक्षाकृत अधिक थे।
  • केर ने कहा कि परेशानी के सबसे प्रमुख संकेत नए निर्यात आदेशों और भविष्य की गतिविधि सूचकांकों से आए, जो क्रमशः वैश्विक मांग में गिरावट और घरेलू विश्वास में नरमी का संकेत देते हैं। भारतीय निर्माताओं को दिए गए नए ऑर्डर मार्च में धीमी गति से बढ़े, जबकि, नए निर्यात कारोबार में तेजी से गिरावट आई। सर्वेक्षण में कहा गया है, "वास्तव में, कोविड-19 महामारी के कारण व्यापक लॉकडाउन के बीच 2013 सितंबर के बाद से अंतरराष्ट्रीय बिक्री में गिरावट सबसे तेज गिरावट थी।"

चीन की पीएमआई पिछले महीने से 16.3% बढ़ी

  • इससे पहले चीनी राजकीय सांख्यिकी ब्यूरो के सेवा उद्योग अनुसंधान केंद्र और चीन फेडरेशन ऑफ लॉजिस्टिक्स एंड पर्चेजिंग द्वारा 31 मार्च को जारी आंकड़ों के अनुसार इस साल मार्च में चीन में पीएमआई 52 प्रतिशत रही, जो पिछले महीने से 16.3 प्रतिशत अधिक है। उद्यम के पैमाने की दृष्टि से देखा जाए तो बड़े, मध्यम और छोटे उद्यमों की पीएमआई क्रमश: 52.6 प्रतिशत, 51.5 प्रतिशत और 50.9 प्रतिशत रही, जो पिछले महीने से अलग अलग तौर पर 16.3 फीसदी, 16 फीसदी और 16.8 फीसदी अधिक है।

क्या है पीएमआई?

  • पर्चेजिंग मैनेजर्स इंडेक्‍स (पीएमआई) मैन्‍युफैक्‍चरिंग सेक्‍टर की आर्थिक सेहत को मापने का एक इंडिकेटर है। इसके जरिए किसी देश की आर्थिक स्थिति का आकलन किया जाता है। पीएमआई सेवा क्षेत्र समेत निजी क्षेत्र की अनेक गतिविधियों पर आधारित होता है। इसमें शामिल तकरीबन सभी देशों की तुलना एक जैसे मापदंड से होती है। पीएमआई का मुख्‍य मकसद इकोनॉमी के बारे पुष्‍ट जानकारी को आधिकारिक आंकड़ों से भी पहले उपलब्‍ध कराना है, जिससे अर्थव्‍यवस्‍था के बारे में सटीक संकेत पहले ही मिल जाते हैं।
  • पीएमआई 5 प्रमुख कारकों पर आधारित होता है। इन पांच प्रमुख कारकों में नए ऑर्डर, इन्‍वेंटरी स्‍तर, प्रोडक्‍शन, सप्‍लाई डिलिवरी और रोजगार वातावरण शामिल हैं। आमतौर पर बिजनेस और मैन्युफैक्चरिंग माहौल का पता लगाने के लिए ही पीएमआई का सहारा लिया जाता है। फिलहाल निक्‍केई पीएमआई आंकड़ों के आधार पर भारत में इकोनॉमी की दिशा का अनुमान लगाया जाता है। इससे पहले यही आंकड़ें एचएसबीसी पीएमआई के नाम से जारी होते थे।

20 करोड़ महिलाओं के जनधन खातों में भुगतान

  • देश में लॉकडाउन के दौरान जरूरतमंदों को पैसा पहुंचाने के मकसद से वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने हाल ही में जनधन खाते में अगले तीन महीनों तक प्रत्येक महीने 500 रुपये डालने का ऐलान किया है। वित्त मंत्री के इस ऐलान के बाद देश की करीब 20 करोड़ महिलाओं को इसका सीधा लाभ मिलेगा। पहली किस्त 3 अप्रैल को खाताधारकों के एकाउंट में जमा होगी। प्रधानमंत्री मोदी ने तारीखों का ऐलान कर दिया है।

क्या है जनधन योजना?

  • प्रधानमंत्री जन-धन योजना का उद्देश्य वंचित वर्गो जैसे कमजोर वर्गो और कम आय वर्गो को विभिन्न वित्तीय सेवाएं जैसे मूल बचत बैंक खाते की उपलब्धता, आवश्यकता आधारित ऋण की उपलब्धता, विप्रेषण सुविधा, बीमा तथा पेंशन उपलब्ध कराना सुनिश्चित करना है। किफ़ायती लागत पर व्यापक प्रसार केवल प्रौद्योगिकी के प्रभारी उपयोग से ही संभव है। 28 अगस्त 2014 को इस योजना का शुभारंभ किया गया।
  • पीएमजेडीवाई वित्तीय समावेशन संबंधी राष्ट्रीय मिशन है जिसमें देश के सभी परिवारों के व्यापक वित्तीय समावेशन के लिए एकीकृत दृष्टिकोण शामिल है इस योजना में प्रत्येक परिवार के लिए कम से कम एक मूल बैंकिंग खाता, वित्तीय साक्षारता, ऋण की उपलब्धता, बीमा तथा पेंशन सुविधा सहित सभी बैंकिंग सुविधाएं उपलब्ध कराने की अभिकल्पना की गयी है । इसके अलावा, लाभार्थियों को रूपे डेबिट कार्ड दिया जाएगा जिसमे एक लाख रुपए का दुर्घटना बीमा कवर शामिल है। इस योजना में सभी सरकारी (केन्द्र / राज्य / स्थानीय नीकाय से प्राप्त होने वाले ) लाभो को लाभार्थियों के खातो में प्रणालीकृत किए जाने तथा केन्द्र सरकार की प्रत्यक्ष लाभांतरण (डीबीटी) योजना को आगे बढ़ाने की परिकल्पना की गई है। कमजोर सम्पर्क, ऑनलाइन लेन देन जैसे प्रौद्योगिकीय मामलो का समाधान किया जाएगा। टेलीकॉम आपरेटरों के जरिये मोबाइल बैंकिंग तथा नकद आहरण केन्द्र के रूप में उनके स्थापित केन्द्रो का इस योजना के अंतर्गत वित्तीय समावेशन हेतु प्रयोग किए जाने की योजना है। इसके अलावा, देश के युवाओं को भी इस मिशन पद्धति वाले कार्यक्रम में भाग लेने के लिए प्रेरित करने के प्रयास किए जा रहे हैं।

:: विज्ञान और प्रौद्योगिकी ::

कोरोना संक्रमण को रोकेगी विटामिन-डी

  • दुनिया में कोरोना संक्रमण से हुई मौतों का प्रमुख कारण विटामिन-डी की कमी के रूप में भी सामने आया है। यह रिपोर्ट हमें भी सतर्क कर रही है, क्योंकि देश में भी बड़ी आबादी विटामिन-डी की कमी से जूझ रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि शरीर में विटामिन-डी की स्थिति बेहतर करके हम कोरोना वायरस के खतरे को कम कर सकते हैं।
  • लंदन के डॉ. ब्राउन और डॉ. सरकार ने कई देशों के अस्पतालों में 12 फरवरी से 16 मार्च तक भर्ती हुए मरीजों पर अध्ययन किया। इसमें आइसीयू में भर्ती गंभीर मरीजों की जांच रिपोर्ट का बारीकी से जांचा गया। वायरस से मृत्यु का शिकार हुए मरीजों में विटामिन-डी की कमी मौत का प्रमुख कारण मिली। अमेरिका, यूरोप, ईरान में आइसीयू में हुई मौतों में 80 फीसद मरीज 65 वर्ष से अधिक आयु के थे। वहीं इनमें 16 से 54.5 फीसद मृतकों में विटामिन डी की मात्र न्यूनतम से भी कम मिली है। अंतरराष्ट्रीय जर्नल में यह शोध 24 मार्च को प्रकाशित हो चुका है। इन देशों के आधार पर विटामिन-डी (25 हाइड्रोक्सी-डी) का शरीर में मानक 25 नैनो मोल प्रति लीटर मानकर यह स्टडी की गई।

क्या है विटामिन D?

  • विटामिन डी वसा-घुलनशील प्रो-हार्मोन का एक समूह होता है। इसके दो प्रमुख रूप हैं: विटामिन डी2 (या अर्गोकेलसीफेरोल) एवं विटामिन डी3 (या कोलेकेलसीफेरोल)। विटामिन डी सूरज की रोशनी, खानपान और विभिन्न सप्लिमेंट्स से मिलता है। ये विभिन्न रासायनिक प्रक्रियाओं के माध्यम से शरीर को सक्रिय रखता है।

क्या होता है विटामिन D से लाभ?

  • हड्डी-मांस पेशियों में दर्द विटामिन-डी की कमी का लक्षणभर है। विटामिन-डी का शरीर में मल्टीपल रोल है। यह फेफड़े का फंक्शन दुरुस्त रखने में मददगार है, जो कि संक्रमण से भी बचाने में कारगर साबित होता है। शरीर की कोशिकाओं में रिसेप्टर की बांडिंग होती है। विटामिन-डी इस बांडिंग को मजबूती प्रदान करता है।

देश की 45 फीसद आबादी में विटामिन डी की कमी

  • डॉ. सुब्रत चंद्रा के मुताबिक, देश में शरीर में विटामिन-डी की सामान्य वैल्यू 50-70 नैनो मोल प्रति लीटर निर्धारित की गई है, इसकी मात्र 50 से कम होने पर इसे डिफीसिएंसी माना जाता है। देश की विभिन्न स्टडी में 30 से 45 फीसद आबादी में विटामिन-डी की कमी बताई गई है। ऐसे में लोगों को प्रतिरोधक क्षमता मेनटेन करने के लिए विटामिन-डी की कमी को पूरा करना होगा।

विटामिन-डी की कमी दूर करने के उपाय

  • धूप विटामिन-डी का प्राकृतिक स्नोत है। सुबह 11 बजे तक इसकी मात्र प्रचुर रहती है। रोज धूप में 30 मिनट बैठें, मगर जिन व्यक्तियों में पहले से विटामिन कम है, उनमें इस प्रक्रीया से पूर्ति होने में देर लगेगी।
  • विटामिन-डी का इंजेक्शन, सीरप बेहतर उपाय हैं। 18 से 80 वर्ष तक की आयु के लोगों के लिए पहले 12 सप्ताह का कोर्स चलता है। इसमें सप्ताह में एक बार इंजेक्शन, सीरप की डोज दी जाती है। इसके बाद दोबारा टेस्ट कर कोर्स तय किया जाता है।
  • विटामिन-डी की टैबलेट और पाउडर का भी विकल्प है। यह यूनिट के अनुसार डॉक्टर के परामर्श पर लें। इसका कोर्स लंबा हो जाता है।

विटामिन डी व कोरोना का संबंध साबित

  • विटामिन-डी की कमी से जूझ रही है। लंदन के डॉ. ब्राउन और डॉ. सरकार ने कई देशों के अस्पतालों में अध्ययन किया। आइये जानते हैं उनके अध्ययन के बारे में।
  • लंदन में हुई स्टडी में पाया गया कि विटामिन-डी की कमी से सेल्स में मौजूद रिसेप्टर साइक्लिक एएमपी, ऑक्ट 3/4, पी 53 की बांडिंग में कमजोरी आ जाती है। यहीं मौका पाकर वायरस सेल में दाखिल हो जाता है। इसके बाद फेफड़े तक पैठ बनाकर शरीर पर हमला करता है। ऐसे में यदि विटामिन-डी शरीर में ठीक है, तो वायरस से मुकाबला आसान हो जाएगा।

12 फरवरी से 15 मार्च तक कहां-क्या रहा प्रभाव

  • लंदन :- अस्पताल में 3,983 पॉजिटिव मरीज भर्ती हुए। इसमें 177 की मौतें हुईं। स्टडी में पाया कि मृतकों में 16 फीसद में विटामिन-डी का स्तर न्यूनतम से कम पाया गया।
  • इटली :- अस्पताल में 47 हजार 221 पॉजिटिव भर्ती किए गए। इसमें चार हजार 32 लोगों की मौत हुई। यहां 54.5 फीसद में विटामिन-डी की मात्र न्यूनतम मानक से कम पाई गई।
  • स्पेन :- अस्पताल में 21 हजार 5 71 मरीज भर्ती किए गए। 1093 की मौत हुई। यहां मृतकों में 47 फीसद में विटामिन-डी की मात्र न्यूनतम मानक से कम पाई गई।
  • ईरान :- अस्पताल में 19 हजार 664 मरीज भर्ती किए गए। यहां 1433 मरीजों की मौत हुई, जिसमें 31 फीसद में विटामिन-डी की मात्र न्यूनतम मानक से कम मिली।
  • यूएस-चीन :- इन देशों ने मरीजों की रिपोर्ट में विटामिन-डी डिफीसिएंसी मिली है। मगर, न्यूनतम मानक अंकित न होने से यह साफ न हो सका कि कितने फीसद मरीजों की मौत इसके चलते हुए। हालांकि, आइसीयू में 65 उम्र से अधिक के मरीजों की 80 फीसद मौतें हुई।

शोध: भारत में कोरोना के कम मामलों के पीछे बीसीजी के टीका का योगदान

  • दूसरे देशों की तुलना में भारत में कोरोना के कम मामले होने के पीछे क्या बीसीजी का टीका जिम्मेदार है। भले ही इसका कोई और कारण हो लेकिन अमेरिकी शोधकर्ता मान रहे हैं कि इसके पीछे बीसीजी टीके की अहम भूमिका है। अगर यह बात सिद्ध हो जाती है तो यह टीका कोरोना से लड़ाई में गेम चेंजर साबित हो सकता है। कोरोना का प्रकोप फैलने पर अमेरिका सहित दुनिया के कई देशों को आशंका थी कि विशाल आबादी वाले भारत में बड़े पैमाने पर मौतें होंगी। लेकिन अभी तक जो पैटर्न है इससे उनकी आशंका गलत साबित हो गई है।

बीसीजी हो सकता है कारगर

  • अमेरिकी वैज्ञानिकों का मानना है कि भारत में नवजात बच्चों को बैसिलस कैलमेट गुयरिन (बीसीजी) टीका देने की जो परंपरा है उसके कारण कोरोना का इतना प्रभाव नहीं हो रहा है। जबकि इटली, नीदरलैंड्स और अमेरिका जहां बच्चों को यह टीका नहीं दिया जाता वहां संक्रमितों व मरने वालों की संख्या बेतहाशा बढ़ती जा रही है। न्यूयार्क इंस्टीट्यूट आफ टेक्नालाजी बायोकेमिकल साइंसेज के असिस्टेंट प्रोफेसर गोंजालो ओताजू ने कहा कि इस संबंध में किये गये अध्ययन में हमने पाया कि कोविड-19 से निपटने में बीसीजी कारगर हो सकता है। इस अध्ययन की रिपोर्ट अभी प्रकाशित होनी है।

1948 में शुरू हुआ था टीके का चलन

  • अध्ययन के मुताबिक बीसीजी भारत के राष्ट्रीय टीकाकरण अभियान का महत्वपूर्ण हिस्सा है। यह मवेशियों में टीबी रोग के लिए जिम्मेदार बैक्टीरिया माइकोबक्टीरियम बोविस के कमजोर स्वरूप से तैयार किया जाता है। यह मनुष्यों में टीबी के लिए जिम्मेदार बैक्टीरिया से भिन्न होता है। भारत में बीसीजी टीके का चलन 1948 में शुरू हुआ था। तब भारत में टीबी (ट्यूबर कोलोसिस) के मामले दुनिया में सबसे ज्यादा होते थे। इस संबंध में भारतीय विशेषज्ञों का कहना है कि हम लोग इस बात से आशांवित हैं लेकिन अभी कुछ भी कहना जल्दबाजी होगा।

सार्स में प्रभावी साबित हुई बीसीजी वैक्सीन

  • लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी, पंजाब के एप्लाइड मेडिकल साइंसेज फैकल्टी की सीनियर डीन मोनिका गुलाटी ने बताया कि ऐसे मौकों पर छोटी सी बात भी उम्मीद बंधाती है। खास बात यह है कि सार्स के संक्रमण में बीसीजी वैक्सीन प्रभावी साबित हुई है। सार्स का वायरस भी मूलत: कोरोना परिवार का वायरस है। अमेरिका में कोरोना के अब तक 190,000 से अधिक मामले सामने आ चुके हैं जबकि 4000 से अधिक की मौत हो चुकी है। जबकि इटली में105,000 सामने आये हैं और 12 हजार से अधिक मौतें हो चुकी हैं। इसी तरह नीदरलैंड्स में 12,000 से अधिक मामले आने के साथ एक हजार से अधिक मौतें हो चुकी हैं।

बीसीजी के टीके की खोज -

  • बीसीजी वैक्सीन को माईकोबैक्टीरियम बोविस के सबसे कमजोर बैक्टीरिया से तैयार किया जाता है। यह बैक्टीरिया टीबी के मुख्य कारण माने जाने वाले बैक्टीरिया एम. ट्यूबरकुलोसिस से संबंधित होता है। यह दवा 13 सालों (1908 से 1921 तक) में तैयार की गई थी। इसको फ्रांस के बैक्टीरियोलोजिस्ट एडबर्ट कैलमिटी व कैमिली ग्युरिन ने तैयार किया था। इन दोनों ही बैक्टीरियोलोजिस्ट के नाम के कारण इस वैक्सीन को बेसिल कालमेट ग्युरिन (Bacillus calmette-guerin) नाम दिया गया। यह टीका टीबी के उच्च जोखिम वाले शिशुओं को जन्म के तुरंत बाद दिया जाता है। बीसीजी वैक्सीन टीबी से बचाव के लिए शिशुओं की रोग प्रतिरोधक क्षमता को तैयार करती है।

सोडियम हाइपोक्लोराइट रसायन

  • उत्तर प्रदेश के बरेली सहित देश के विभिन्न हिस्सों से सामने आ रहे वीडियो में पलायन कर रहे श्रमिकों पर कर्मचारी डिसइन्फेक्टेंट छिड़कते नजर आ रहे हैं। इसके लिए सोडियम हाइपोक्लोराइट का इस्तेमाल किया जा रहा है। यह स्वीमिंग पूल की सफाई, संक्रमण-बदबू खत्म करने में इस्तेमाल होता है। यह शरीर के लिए अत्यंत घातक है। विशेषज्ञों के अनुसार पानी में इस रसायन की 0.5 प्रतिशत मात्रा  ही काफी नुकसानदेह है।

कहाँ होता है सोडियम हाइपोक्लोराइट रसायन का प्रयोग

  • हाइजीन उत्पादों में होता है प्रयोग: इसका उपयोग प्रदूषित जल की सफाई में भी। घरों में सफाई के उत्पादों में यह 2-10 प्रतिशत तक होता है। 0.005% मात्रा युक्त तरल का उपयोग त्वचा की ब्लीचिंग व जख्मों को ठीक करने में भी होता है।
  • त्वचा और आंखों के लिए घातक
  • पानी में 0.5 प्रतिशत से ज्यादा सोडियम हाइपोक्लोराइट से त्वचा झुलस सकती है।
  • आंखों को भी नुकसान पहुंच सकता है।
  • खुजली-जलन की शिकायत हो सकती है।

सीलिंग ग्लू के साथ जैविक सूट विकसित

  • रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) द्वारा कोविड-19 से मुकाबला करने वाले मेडिकल, पैरामेडिकल और अन्य कर्मियों को जानलेवा वायरस से सुरक्षित रखने के लिए जैविक सूट तैयार किया गया है। डीआरडीओ के विभिन्न प्रयोगशालाओं के वैज्ञानिकों ने अपने इसके लिए अपने तकनीकी ज्ञान का इस्तेमाल किया है- कि कैसे व्यक्तिगत सुरक्षा उपकरण (पीपीई) को विकसित करने के लिए टेक्सटाइल, कोटिंग और नैनोटेक्नालजी की दक्षता का उपयोग किया जाए, जिसमें कोटिंग के साथ विशिष्ट प्रकार के कपड़े शामिल हों।
  • इस सूट को उद्योग की मदद से तैयार किया गया है और यह टेक्सटाइल मापदंडों के साथ-साथ कृत्रिम रक्त से सुरक्षा के लिए कठोर परीक्षण के अधीन है। इसमें कृत्रिम रक्त से सुरक्षा का मानदंड, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा बॉडी सूट के लिए निर्धारित मानदंडों से कहीं ज्यादा है।

एक विशेष सीलेंट को किया गया तैयार

  • सीम सीलिंग टेप नहीं मिलने के कारण, डीआरडीओ के उद्योग साझेदारों और अन्य उद्योगों द्वारा देश में जैविक सूट का उत्पादन बाधित हो रहा है। डीआरडीओ द्वारा पनडुब्बी अनुप्रयोगों में इस्तेमाल की जाने वाली सीलेंट के आधार पर सीम सीलिंग टेप के विकल्प के रूप में एक विशेष सीलेंट तैयार किया गया है। वर्तमान समय में, एक उद्योग साझेदार द्वारा सीम सीलिंग के लिए इस ग्लू का उपयोग करके तैयार किए गए जैविक सूट को दक्षिण भारत वस्त्र अनुसंधान संघ, कोयंबटूर में परीक्षण में पास कर दिया गया है। यह कपड़ा उद्योग के लिए एक गेम चेंजर साबित हो सकता है। डीआरडीओ, उद्योग के माध्यम से सूट निर्माताओं द्वारा सीम सीलिंग गतिविधि का समर्थन करने के लिए इस ग्लू का बड़े पैमाने पर उत्पादन कर सकता है। 

कोरोना जांच के लिए कम लागत वाली इन्फ्रारेड सेंसर गन

  • नौसेना के मुबंई स्थिति डॉकयार्ड ने अपने  प्रवेश द्वारों पर बड़ी संख्या में कर्मियों की स्क्रीनिंग के लिए इन्फ्रारेड तापमान सेंसर गन डिजाइन की है, ताकि सुरक्षा जांच गतिविधियों पर बोझ कम किया जा सके। डॉकयार्ड द्वारा खुद के उपलब्ध संसाधनों से विकसित इस गन की कीमत 1000 रूपए से भी कम है जो कि बाजार में उपलब्ध ऐसे अन्य गनों की कीमत का अंश भर है।
  • कोविड के प्रकोप के बाद से, गैर-संपर्क वाले थर्मामीटर या इन्फ्रारेड तापमान सेंसर गन बाजार में दुर्लभ हो गई हैं, और बहुत अधिक कीमत पर बेची जा रही हैं। इनकी कमी को दूर करने और मांग के अनुरूप इसकी आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए  मुंबई के नौसेनिक डॉकयार्ड ने 0.02 डिग्री सेल्सियस तक के शारीरिक तापमान को सटीकता के साथ नापने में सक्षम गन डिजाइन और विकसित किया है। यह एक तरह का थर्मामीटर है जो किसी के शारीरिक संपर्क में आए बिना ही उसके शरीर का तापमान जांच लेता है। इसमें एक इन्फ्रारेड सेंसर और एक एलईडी डिस्प्ले लगा हुआ है जो एक माइक्रोकंट्रोलर के साथ जुड़ा हुआ है। यह 9  वोल्टेज की क्षमता वाली बैटरी पर चलता है ।
  • इस गन की विनिर्माण लागत 1000 रुपये से कम होने की वजह से , आवश्यकता पडने पर डॉकयार्ड में इन्हे बडी संख्या में बनाया जा सकता है। इसके लिए जरुरी संसाधनों को जुटाने का कार्य प्रगति पर है

आटोमेटेड वेंटिलेटरों का निर्माण करने के लिए विप्रो 3डी के साथ करार किया

  • विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के राष्ट्रीय महत्व के संस्थान, श्री चित्र तिरुनल चिकित्सा विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी संस्थान (एससीटीआईएमएसटी) ने विप्रो 3डी, बेंगलुरु के साथ एससीटीआईएमएसटी द्वारा अपने नैदानिक परीक्षण एवं विनिर्माण के बाद विकसित आर्टिफिशियल मैनुअल ब्रीदिंग यूनिट (एएमबीयू) पर आधारित एक आपातकालीन वेंटिलेटर सिस्टम के प्रोटाटाइप का संयुक्त रूप से निर्माण करने के लिए करार किया है।ये वेंटिलेटर कोविड-19 से संबंधित खतरे से उत्पन्न तात्कालिक आवश्यकताओं की पूर्ति करने में सहायता कर सकते हैं।

कार्यप्रणाली

  • एएमबीयू बैग या एक बैग-वाल्व-मास्क (बीवीएम) एक हाथ में रखा जाने वाला उपकरण है जिसका उपयोग किसी रोगी को, जो या तो सांस नहीं ले रहा है, या अपर्याप्त रूप से सांस ले रहा है, को सकारात्मक प्रेशर वेंटिलेशन देने में किया जाता है। बहरहाल, एक नियमित एएमबीयू के उपयोग को अपने परिचालन के लिए एक बाईस्टैंडर की आवश्यकता होती है जो काफी संवेदनशील होती है तथा कोविड 19 के मरीज के घनिष्ठ संपर्क में रहने के लिए उपयुक्त नहीं होती। क्लिनिकल फैकल्टी से इनपुट के साथ श्री चित्र का आटोमेटेड एएमबीयू वेंटिलेटर गंभीर रोगियों के श्वसन में सहायता करेगा, जिनके पास आईसीयू वेंटिलेटर की सुविधा नहीं है।
  • त्वरित उत्पादन में सक्षम बनाने के लिए, इस उपकरण का डिजाइन सहजता से तैयार कंपोनेंट से बनाया गया है जिससे कि यह वैकल्पिक समाधान बन सकता है। यह जरुरतमंदों को वेंटिलेशन की सुविधा प्रदान करता है एवं वेंटिलेशन की कमियों का एक आदर्श समाधान है।
  • यह पोर्टेबल और हल्के वजन का उपकरण श्वसन संबंधी अनुपात, टाइडल वाल्यूम, आदि के साथ एक्सपिरेशन, इंसपिरेशन की नियंत्रित दर पर सकारात्मक प्रेशर वेंटिलेशन में सक्षम बनाता है। यह आटोमैटिक उपकरण आइसोलेशन कक्ष में सहायता कार्मिक की आवश्यकता को न्यून करेगा तथा इसके द्वारा कोविड रोगियों के लिए एक सुरक्षित और कारगर फेफड़ा-सुरक्षा ऑपरेशन में सक्षम बनाएगा।

:: विविध ::

डकवर्थ-लुईस नियम बनाने वाले 78 साल के गणितज्ञ टोनी का निधन

  • क्रिकेट जगत को डकवर्थ-लुईस नियम देने वाले गणितज्ञ टोनी लुईस का निधन हो गया है। वे 78 साल के थे। उन्होंने साथी गणितज्ञ फ्रैंक डकवर्थ के साथ मिलकर मौसम के कारण बाधित क्रिकेट मैच के लिए 1997 में डकवर्थ-लुईस फॉर्मूला दिया था। इसे आईसीसी ने इंग्लैंड में खेले गए 1999 वर्ल्ड कप से अपनाया था।

:: प्रिलिम्स बूस्टर ::

  • मरकज के आयोजन से चर्चित किस संगठन से जुड़े विदेशियों को ब्लैक लिस्ट किया गया है एवं इस संगठन की शुरुआत कहाँ से हुई थी? (तब्लीगी जमात,हरियाणा के नूंह)

  • हाल ही में चर्चा में रही ई-नाम क्या है? (कृषि उत्पादों का अखिल भारतीय इलेक्ट्रॉनिक ट्रेडिंग पोर्टल)

  • हाल ही में स्थगित हुए संयुक्त राष्ट्र का जलवायु परिवर्तन पर होने वाला सम्मेलन सीओपी-26 का आयोजन कहाँ किया जाना था? (ग्लासगो- स्कॉटलैंड) 

  • जम्मू कश्मीर उच्च न्यायालय में भारतीय संविधान की शपथ लेकर नियुक्त होने वाले प्रथम न्यायाधीश कौन है? (रजनीश ओसवाल)

  • मैन्‍युफैक्‍चरिंग सेक्‍टर की आर्थिक सेहत को मापने वाले पर्चेजिंग मैनेजर्स इंडेक्‍स (पीएमआई) का निर्धारण किन कारकों पर होता है? (5 कारक - नए ऑर्डर, इन्‍वेंटरी स्‍तर, प्रोडक्‍शन, सप्‍लाई डिलिवरी और रोजगार वातावरण)

  • हाल ही में चर्चा में रही वित्तीय समावेशन की अग्रणी योजना ‘जन धन योजना’ की शुरुआत कब की गई थी? (28 अगस्त 2014)

  • कोरोना वायरस पर शोध से चर्चा में रहे विटामिन डी का वैज्ञानिक नाम क्या है? (अर्गोकेलसीफेरोल और कोलेकेलसीफेरोल)

  • कोरोना वायरस पर शोध से चर्चा में रहे बीसीजी के टीके की खोज किन वैज्ञानिकों के द्वारा की गई थी? (एडबर्ट कैलमिटी व कैमिली ग्युरिन)

  • हाल ही में चर्चा में रहे ‘सोडियम हाइपोक्लोराइट’ का उपयोग किन उत्पादों में किया जाता है? (हाइजीन उत्पादों में- सफाई एवं संक्रमण मुक्त क्रियाकलापों में)

  • हाल ही में राष्ट्रीय महत्व के एससीटीआईएमएसटी संस्थान ने आटोमेटेड वेंटिलेटरों के निर्माण हेतु किस संस्थान के साथ समझौता किया है? (विप्रो 3डी, बेंगलुरु)

  • क्रिकेट में डकवर्थ लुईस नियम को किन गणितज्ञों के द्वारा विकसित किया गया था एवं इसे आईसीसी के द्वारा कब अपनाया गया था? (टोनी लुइस और फ्रैंक डकवर्थ, 1999)

 

 

 

स्रोत साभार: Dainik Jagran (Rashtriya Sanskaran), Dainik Bhaskar (Rashtriya Sanskaran), Rashtriya Sahara (Rashtriya Sanskaran) Hindustan Dainik (Delhi), Nai Duniya, Hindustan Times, The Hindu, BBC Portal, The Economic Times (Hindi & English), PTI, PIB

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