(दैनिक समसामयिकी और प्रिलिम्स बूस्टर) यूपीएससी और सभी राज्य लोक सेवा आयोग परीक्षाओं के लिए हिंदी में समाचार पत्रों का संकलन (02अप्रैल 2020)

दैनिक समसामयिकी और प्रिलिम्स बूस्टर


(दैनिक समसामयिकी और प्रिलिम्स बूस्टर) यूपीएससी और सभी राज्य लोक सेवा आयोग परीक्षाओं के लिए हिंदी में समाचार पत्रों का संकलन (02अप्रैल 2020)


:: राष्ट्रीय समाचार ::

अफगानिस्तान गुरुद्वारा हमले की जांच करेगी एनआईए

  • राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) पिछले महीने अफगानिस्तान की राजधानी काबुल स्थित गुरुद्वारे पर हुए हमले की जांच करेगी जिसमें भारतीय नागरिक सहित 27 लोगों की मौत हुई. एजेंसी ने बुधवार को इस संबंध में प्राथमिकी दर्ज की जो विदेश में एनआईए द्वारा जांच किया जाने वाला पहला मामला है.
  • एनआईए कानून में संशोधन के बाद यह अपने तरह का पहला मामला है. संशोधित कानून में एनआईए को देश के बाहर किसी भी ऐसे मामलों की जांच करने के लिए सशक्त किया गया है जिसमें भारतीय या भारत का हित प्रभावित हुआ हो.मामला भारतीय दंड संहिता और आतंकवाद निरोधी कानून के धाराओं के तहत दर्ज किया गया है.

पृष्टभूमि

  • अफगानिस्तान की राजधानी काबुल में बुधवार को एक प्रमुख गुरद्वारे में हथियारों से लैस आत्मघती बम हमलावर ने हमला किया जिसमें कम से कम 25 श्रद्धालु मारे गये और आठ अन्य घायल हो गए.उल्लेखनीय है कि 25 मार्च को हुए हमले की जिम्मेदारी आतंकवादी समूह इस्लामिक स्टेट खोरसान प्रोविंस (आईएसकेपी) ने ली थी.
  • केंद्रीय एजेंसियां अफगानिस्तान में एक गुरद्वारे पर हमले के सिलसिले में केरल के युवक मोहम्मद मुहसिन की भूमिका की जांच कर रही हैं. समझा जाता है कि मुहसिन आईएसआईएस के आतंकवादियों में से एक था. इसी आतंकी संगठन ने इस हमले की जिम्मेदारी ली थी जिसमें 25 लोग मारे गए थे.

राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए)

  • राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) का गठन मुंबई में हुए आतंकी हमले (26/11) के बाद 2008 के एनआईए एक्ट के तहत किया गया था। राष्ट्रीय जांच एजेंसी (संशोधन) बिल, 2019 से एनआईए कानून में संशोधन के बाद यह अपने तरह का पहला मामला है. संशोधित कानून में एनआईए को देश के बाहर किसी भी ऐसे मामलों की जांच करने के लिए सशक्त किया गया है जिसमें भारतीय या भारत का हित प्रभावित हुआ हो.मामला भारतीय दंड संहिता और आतंकवाद निरोधी कानून के धाराओं के तहत दर्ज किया गया है.

दिल्ली सरकार कोरोना वायरस से जंग में शहीद हॉस्पिटल कर्मी को देगी 1 करोड़

  • कोरोना वायरस से जंग में देश की मदद में लगे हीरोज के लिए दिल्ली सरकार का बड़ा ऐलान। दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने बताया कि इस लड़ाई में अगर किसी हेल्थ सेक्टर के कर्मी की जान गई तो उसके परिवार को दिल्ली सरकार 1-1 करोड़ रुपये की सहायता राशि देगी। यह ऐलान सफाई कर्मचारी, डॉक्टर और नर्स के लिए था।

जम्मू कश्मीर प्रशासन ने एनपीपीए की मूल्य निगरानी और संसाधन इकाई स्थापित की

  • राष्ट्रीय औषधि मूल्य निर्धारण प्राधिकरण(एनपीपीए) द्वारा केंद्र शासित प्रदेश जम्मू कश्मीर में मूल्य निर्धारण और संसाधन इकाई (पीएमआरयू) की स्थापना के साथ ही आज देश में पीएमआरयू वाले राज्यों और संघशासित प्रदेशों की संख्या बढकर 12 हो गई है। केरल, ओडिशा, गुजरात, राजस्थान, पंजाब, हरियाणा, नागालैंड, त्रिपुरा, उत्तर प्रदेश, आंध्र प्रदेश और मिजोरम में पीएमआरयू की स्थापना पहले ही की जा चुकी है।
  • पीएमआरयू, एक पंजीकृत सोसाइटी के रूप में , जम्मू कश्मीर प्रशासन के औषध नियंत्रक के प्रत्यक्ष नियंत्रण और पर्यवेक्षण के तहत कार्य करेगा। इसे एनपीपीए द्वारा आवर्ती और गैर-आवर्ती खर्चों के लिए वित्त पोषित किया जाएगा। पीएमआरयू सस्ती कीमतों पर दवाओं की उपलब्धता और पहुंच सुनिश्चित करने में एनपीपीए और राज्य औषध नियंत्रक की मदद करेगा। इसके द्वारा सभी के लिए दवाओं की उपलब्धता और सामर्थ्य वाले क्षेत्रों में सेमिनार, प्रशिक्षण कार्यक्रम और अन्य प्रकार की जानकारियां उपलब्ध कराने के लिए शिक्षा और संचार (आईईसी) गतिविधियों का आयोजन करने की भी संभावना है।

राष्ट्रीय औषधि मूल्य निर्धारण प्राधिकरण(एनपीपीए) क्या है?

  • राष्ट्रीय फार्मास्युटिकल प्राइसिंग अथॉरिटी (एनपीपीए) का गठन 29 अगस्त, 1997 को फार्मास्युटिकल विभाग (डीओपी), रसायन और उर्वरक मंत्रालय के एक संलग्न कार्यालय के रूप में दवाओं के मूल्य निर्धारण और सस्ती कीमतों पर दवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए एक स्वतंत्र नियामक के रूप में भारत सरकार के संकल्प के साथ किया गया था।

आरोग्य सेतु मोबाइल एप

  • भारत सरकार ने कोरोना वायरस पर लगाम लगाने के लिए आरोग्य सेतु (Aarogya Setu) नाम का मोबाइल एप लॉन्च किया है। सरकार इस एप के जरिए संक्रमित लोगों की लोकेशन को ट्रैक कर सकेगी। साथ ही सरकार इस प्लेटफॉर्म के जरिए यह जान सकेगी कि यूजर्स मरीजों के संपर्क में है या नहीं। आपको बता दें कि सरकार इससे पहले भी कोरोना कवच नाम के मोबाइल एप को पेश कर चुकी है।

आरोग्य सेतु मोबाइल ऐसे करता है काम

  • आरोग्य सेतु एप यूजर के स्मार्टफोन की लोकेशन को ट्रैक करता है। साथ ही यह एप ब्लूटूथ के जरिए यह पता लगाता है कि यूजर संक्रमित मरीजों के संपर्क में है या नहीं। साथ ही दोनों में कितनी दूरी है। इसके अलावा यह एप अपने यूजर को कोविड-19 से बचने की टिप्स देता है।

मोबाइल एप में चैटबॉट है शामिल

  • आरोग्य सेतु मोबाइल एप में एक चैटबॉट मौजूद है, जो यूजर्स को इस वायरस से संबंधित सभी सवालों के जवाब देता है। साथ ही यह भी तय करता है कि यूजर्स में इस वायरस के लक्षण है या नहीं। वहीं, दूसरी तरफ इस एप में कई राज्यों के हेल्पलाइन नंबर भी उपलब्ध हैं।

कोरोना कवच मोबाइल एप

  • सरकार ने कुछ दिनों पहले ही कोरोना वायरस को रोकने के लिए एक खास मोबाइल एप कोरोना कवच (Corona Kavach) लॉन्च किया था। लोग इस मोबाइल एप की मदद से यह जान सकेंगे कि उनपर वायरस का कितना खतरा है और उन्हें इससे बचने के लिए किस तरह के कदम उठाने चाहिए। इसके अलावा कोरोना कवच एप यूजर्स इस वायरस से जुड़ी हर तरह की जानकारी भी देता है।

:: अंतर्राष्ट्रीय समाचार ::

कोरोना वायरस के कारण दुनिया के सामने भोजन का संकट

  • सरकारें अगर कोरोना वायरस के कारण उपजे इस संकट का समाधान नहीं निकाल पाई तो दुनिया के सामने नया संकट पैदा हो सकता है। यह संकट है भोजन का। विश्व व्यापार संगठन (डब्ल्यूटीओ), विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) और संयुक्त राष्ट्र के खाद्य एवं कृषि संगठन (एफएओ) ने एक संयुक्त बयान में यह चेतावनी दी है।

कारण

  • इस समय कोरोना के कारण कई देशों में लॉकडाउन चल रहा है। इसके कारण अंतरराष्ट्रीय व्यापार और खाद्य आपूर्ति चेन बुरी तरह प्रभावित हुआ है। इसके अलावा लोगों ने अफरा-तफरी के चलते बड़े पैमाने पर खरीदारी करके सामान घरों में जुटा लिया है। इससे भी खाद्य वस्तुओं की किल्लत देखने को मिल रही है।
  • लॉकडाउन के दौरान भी जहां तक संभव हो व्यापार को सुचारू तरीके से चलाते रहने का प्रयास होना चाहिए। अपने नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करते समय विभिन्न देशों को यह भी ध्यान रखना चाहिए कि खाद्य आपूर्ति की चेन प्रभावित नहीं हो। ज्यादा समय तक ऑर्डर रुके रहने और यात्रा पर प्रतिबंध से श्रमिकों की कमी हो रही है, जिससे कृषि उत्पादन प्रभावित हो रहा है। इससे बाजार तक खाद्य पदार्थो का पहुंचना मुश्किल हो रहा है। संयुक्त बयान में खाद्य उत्पादन से जुड़े कार्य में लगे लोगों का रोजगार सुनिश्चित करने पर भी जोर दिया गया।

विश्व स्वास्थ्य संगठन क्या है?

  • विश्व स्वास्थ्य संगठन या डब्ल्यूएचओ संयुक्त राष्ट्र का हिस्सा है इसका मुख्य काम दुनियाभर में स्वास्थ्य समस्याओं पर नजर रखना और उन्हे सुलझाने में मदद करना है। डब्ल्यूएचओ की स्थापना 7 अप्रैल 1948 को हुई थी इसका मुख्यालय स्विट्जरलैंड के जिनीवा शहर में है।

एफएओ क्या है?

  • एफएओ (फूड एंड एग्रीकल्चरल ऑर्गेनाइजेशन) एक अंतर्राष्ट्रीय संगठन है। । यह संयुक्त राष्ट्र संघ की स्पेशलाइज्ड एजेंसी है। एफएओ ज्ञान और जानकारियों के आदान-प्रदान करने का मंच भी है। वह विकासशील देशों को बदलती तकनीक जैसे कृषि, पर्यावरण, पोषक तत्व और फूड सिक्योरिटी के बारे में जानकारी देता है।एफएओ की स्थापना 16 अक्तूबर, 1945 को कनाडा में हुई थी। 1951 में इसका मुख्यालय वाशिंग्टन से रोम चला गया था।

क्या है विश्व व्यापार संगठन?

  • विश्व व्यापार संगठन (डब्ल्यूटीओ) एक बहुपक्षीय संस्था है जो अंतरराष्ट्रीय व्यापार का नियमन करती है। इसकी स्थापना मराकेश संधि के तहत 1995 को हुई और इसका मुख्यालय स्विटजरलैंड के जेनेवा शहर में है।

पाकिस्तान का हजारा समुदाय

  • कोरोना संक्रमण को लेकर पाकिस्तान का ब्लेम गेम शुरू हो गया है। इस बार उसके निशाने पर हिंदू, सिख या ईसाई नहीं बल्कि हजारा शिया समुदाय है। संक्रमण के लिए हजारा समुदाय को जिम्मेदार ठहराने वाली खबरों से पाकिस्तान के अखबार भरे पड़े हैं। अंतरराष्ट्रीय धार्मिक स्वतंत्रता मामलों से जुड़े अमेरिकी आयोग (यूएससीआइआरएफ) ने इन्हीं खबरों का संज्ञान लेते हुए पाकिस्तान के बलूचिस्तान प्रांत की सरकार पर इस महामारी के बहाने हजारा समुदाय को बलि का बकरा बनाने का आरोप लगाया है।

पृष्टभूमि

  • पाकिस्तान में कोरोना संक्रमण के दो हजार से ज्यादा मामले आ चुके हैं। देश में 26 लोगों की मौत हो चुकी है। बलूचिस्तान की राजधानी क्वेटा में लॉकडाउन के आदेशों के तहत हजारा बहुल दो इलाकों हजारा टाउन और मारियाबाद को पूरी तरह सील कर दिया गया है।
  • यही नहीं, सरकारी कर्मचारियों को इन इलाकों में जाने से मना कर दिया गया है और हजारा समुदाय से ताल्लुक रखने वाले पुलिसकर्मियों को छुट्टी पर भेज दिया गया है।
  • पाकिस्तान में कोरोना संक्रमण को ईरान से लौटे तीर्थयात्रियों की देन माना जा रहा है। इसी को देखते हुए पाकिस्तानी सोशल मीडिया यूजर ने कोरोना वायरस को 'शिया वायरस' नाम दे दिया है।-
  • आयोग ने 2019 की अपनी वार्षिक रिपोर्ट में कहा था कि हाल के वर्षो में पाकिस्तान में सांप्रदायिक ¨हसा में वृद्धि हुई है और इस्लामिक स्टेट, लश्कर-ए-झांगवी और पाकिस्तान तालिबान जैसे आतंकी संगठन हजारा समुदाय को निशाना बना रहे हैं।

कोरोना वायरस से निपटने के लिए यूएन में दो प्रस्ताव

  • संयुक्त राष्ट्र महासभा के 193 सदस्य देशों को कोरोना वायरस की महामारी से किस प्रकार निपटना चाहिए, इस मुद्दे पर दो प्रस्ताव पेश किए गए हैं। वैश्विक संस्था की इन दिनों बैठकें नहीं हो रही हैं और इसके कारण मतदान के नियमों में बदलाव किया गया है। इसके अनुसार अगर किसी एक सदस्य ने भी प्रस्ताव का विरोध किया तो वह गिर जाएगा।
  • 135 से अधिक देशों के अनुमोदन के साथ संयुक्त राष्ट्र (यूएन) महासभा में पेश प्रस्ताव में इस महामारी को रोकने, इसके प्रभाव को कम करने और इसे हराने के लिए अधिक अंतरराष्ट्रीय सहयोग की अपील की गई है। अन्य प्रयासों में सूचना का आदान-प्रदान, वैज्ञानिक ज्ञान और सर्वोत्तम अभ्यास तथा विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) द्वारा सुझाए गए संबद्ध दिशानिर्देश भी शामिल किए गए हैं।
  • दूसरा प्रस्ताव रूस ने मध्य अफ्रीकी गणराज्य, क्यूबा, निकारागुआ और वेनेजुएला के समर्थन से पेश किया है। इसमें महामारी से मुकाबले के लिए डब्ल्यूएचओ की नेतृत्व करने वाली भूमिका पर बल दिया गया है। हालांकि, इसमें ट्रेडवार बंद करने और संरक्षणवादी उपायों को लागू करने की भी अपील की गई है। इसमें संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की मंजूरी के बगैर एकपक्षीय तरीके से प्रतिबंध नहीं लगाने की भी अपील की गई है।
  • संयुक्त राष्ट्र महासभा प्रमुख टी. तिजानी मुहम्मद बांडे ने दोनों प्रस्ताव सोमवार को सभी सदस्य देशों को भेज दिए हैं। आमतौर पर महासभा प्रस्तावों को बहुमत या सर्वसम्मति से स्वीकार करता है। चूंकि, राजदूत अपने दूतावास या आवास से काम कर रहे हैं, इसलिए नए नियम के तहत सभी का मतदान अनिवार्य होगा।

तुर्कमेनिस्तान में कोरोना का नाम लेने पर भी पाबंदी

  • कोरोनावायरस से दुनिया की जंग जारी है। विकसित हों या विकासशील। हर देश संक्रमण खत्म करने में जुटा है। लेकिन, ईरान से सटे तुर्कमेनिस्तान में कोरोना शब्द पर ही बैन लगा दिया गया है। यहां कोरोना बोलने और लिखने वालों पर कार्रवाई हो रही है। मास्क पहनने पर पहले ही बैन है। उल्लंघन करने पर जेल हो सकती है। मीडिया भी कोरोना शब्द का प्रयोग नहीं कर सकता। स्वास्थ्य मंत्रालय संक्रमण ने स्कूल और सरकारी दफ्तरों के साथ ही सार्वजनिक स्थानों पर ब्रोशर बांटे गए हैं। इनमें हेल्थ गाइड लाइंस हैं लेकिन, यहां भी कोरोना शब्द नदारद है। राष्ट्रपति गुरबांगुली बेयरडेमुकामेडॉव ने यह बैन लगाया है। वो 2006 से सत्ता में हैं।

:: भारतीय राजव्यवस्था ::

जम्मू कश्मीर में नए डोमिसाइल नियम

  • केंद्र सरकार ने बुधवार को एक अहम फैसले में केंद्र शासित प्रदेश जम्मू कश्मीर में डोमिसाइल लागू कर दिया है। अब प्रदेश में 15 साल से रह रहे नागरिक इस डोमिसाइल के हकदार होंगे। जिन बच्चों ने सात वर्ष तक प्रदेश के स्कूलों में पढ़ाई की है और दसवीं या बारहवीं कक्षा की परीक्षा दी है, वे भी डोमिसाइल के हकदार होंगे। केंद्र सरकार ने गजट अधिसूचना जारी कर डोमिसाइल के नियम और शर्तें भी तय कर दी हैं। लेवल-चार तक की नौकरियों के लिए डोमिसाइल होना जरूरी होगा। इससे स्थानीय युवाओं को राहत मिलेगी।
  • केंद्रीय गृह मंत्रालय ने जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन आर्डर 2020 (राज्य कानूनों का अनुकूलन) जारी कर दिया है। जम्मू-कश्मीर सिविल सर्विस विकेंद्रीयकरण और भर्ती कानून 16 ऑफ 2010 में बदलाव किया गया है। उसमें नौकरियों और डोमिसाइल के नियम और शर्तें तय की गई हैं।

पंजीकृत विस्थापित भी डोमिसाइल होंगे :

  • प्रदेश में राहत और पुनर्वास आयुक्त (माइग्रेंट) के साथ पंजीकृत विस्थापित भी डोमिसाइल के हकदार होंगे। जिन बच्चों के अभिभावक प्रदेश में 15 साल से रह रहे हैं या विस्थापित के तौर पर पंजीकृत हैं, उन्हें भी डोमिसाइल का लाभ मिलेगा।
  • दस साल तक काम करने वाले केंद्र के अधिकारी भी हकदार :
  • केंद्र सरकार के अधिकारी, ऑल इंडिया सर्विस अधिकारी, सार्वजनिक उपक्रमों के अधिकारी, केंद्र सरकार के स्वायत इकाइयां, सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक, केंद्रीय विश्वविद्यालय और पंजीकृत रिसर्च संस्थानों में दस साल तक काम करने वाले अधिकारियों व कर्मचारियों के बच्चे भी डोमिसाइल के हकदार होंगे।

बाहरी राज्यों में रह रहे प्रदेश के बच्चे भी हकदार :

  • जम्मू-कश्मीर के नागरिकों के बच्चे जो बाहरी राज्यों में नौकरियां, व्यापार या अन्य पेशेवर कामों के लिए रह रहे हैं, अगर उनके अभिभावक नियम व शर्तें पूरी करते हैं तो वे भी डोमिसाइल के हकदार होंगे।

डोमिसाइल जारी करने का अधिकार तहसीलदार को होगा :

  • कानून के तहत डोमिसाइल जारी करने का अधिकार तहसीलदार को होगा या सरकार इसमें कोई भी अधिकारी नियुक्त कर सकती है। अगर किसी को कोई समस्या होगी तो वह डिप्टी कमिश्नर के पास अपील कर सकता है।

स्टेट कैडर अब केंद्र शासित प्रदेश कैडर कहलाएगा :

  • सरकारी नौकरियों में लेवल-चार (25500 रुपये ग्रेड) तक के पदों में आवेदन करने के लिए डोमिसाइल जरूरी होगा। कैंटोन बोर्ड पर यह लागू नहीं होगा। स्टेट कैडर अब केंद्र शासित प्रदेश कैडर कहलाएगा। इसी तरह स्टेट सर्विस सिलेक्शन बोर्ड का नाम सर्विस सिलेक्शन बोर्ड होगा। राज्य के स्थायी नागरिक शब्द को केंद्र शासित प्रदेश जम्मू कश्मीर के डोमिसाइल से बदला गया है।

पृष्टभूमि

  • अनुच्छेद 370 हटाए जाने के बाद पांच और छह अगस्त को जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन कानून 2019 लागू किया गया था। इसके तहत जम्मू-कश्मीर और लद्दाख को अलग-अलग केंद्र शासित प्रदेश बना दिया गया था। पिछले काफी समय से विपक्षी पार्टियां जम्मू-कश्मीर में डोमिसाइल लागू करने की मांग करते हुए इसे मुद्दा बना रही थीं। पीएमओ में राज्यमंत्री डॉ. जितेंद्र ङ्क्षसह ने कई बार आश्वासन दिया था कि जम्मू-कश्मीर में डोमिसाइल कानून जल्द आएगा, जिसमें स्थानीय लोगों के नौकरियों के हक सुरक्षित रहेंगे।

क्या होता है डोमिसाइल?

  • यह एक ऐसा प्रमाणपत्र है, जो बताता है कि कोई नागरिक कितने साल से प्रदेश में रह रहा है। इससे प्रदेश के नागरिक के तौर पर व्यक्ति की पहचान होती है। नागरिक को उसी हिसाब से तय नियम व शर्तों के हिसाब से सुविधाएं मिलेंगी। केंद्र ने जम्मू कश्मीर में 15 साल तक रहने वाले नागरिक के लिए डोमिसाइल का प्रावधान रखा है।

क्या होगा लाभ?

  • डोमिसाइल लागू होने का फायदा स्थानीय लोगों को मिलेगा। विभिन्न प्रोफेशनल, तकनीकी कोर्सों में आवेदन करने में डोमिसाइल काम आएगा। प्रधानमंत्री विशेष स्कालरशिप योजना का फायदा भी डोमिसाइल वाले युवाओं को मिलेगा। प्रधानमंत्री विशेष स्कालरशिप योजना सिर्फ प्रदेश के युवाओं के लिए ही लागू है। नीट का पेपर तो प्रदेश के युवा देंगे, लेकिन जम्मू कश्मीर के मेडिकल कॉलेजों में दाखिला प्रदेश के डोमिसाइल वालों को ही मिलेगा।

:: भारतीय अर्थव्यवस्था ::

दस बैंकों का हुआ विलय, इन 6 बैंकों का अस्तित्व हुआ खत्म

  • देश में विश्व स्तर के बड़े बैंक बनाने की दिशा में सरकार की तरफ से की गई पहल के तहत एक अप्रैल यानि आज से सार्वजनिक क्षेत्र के छह बैंकों का अलग- अलग चार बैंकों में विलय हो जाएगा। अगले तीन वर्ष के दौरान इस विलय के जरिए बैंकों को 2,500 करोड़ रुपये का लाभ होने का अनुमान है।

इन बैंकों का होगा विलय

बैंकों के विलय की इस योजना के तहत ओरिएंटल बैंक ऑफ कामर्स और यूनाइटेड बैंक ऑफ इंडिया का पंजाब नेशनल बैंक (पीएनबी) में विलय किया जाएगा। वहीं सिंडीकेट बैंक का केनरा बैंक में, आंध्र बैंक और कॉर्पोरेशन बैंक का यूनियन बैंक ऑफ इंडिया तथा इलाहाबाद बैंक का इंडियन बैंक में विलय किया गया है। इस विलय के पूरा होने के बाद सरकारी क्षेत्र में सात बड़े और पांच छोटे बैंक रह जाएंगे।

विलय के बाद 12 सरकारी बैंक रह जाएंगे

  1. पंजाब नेशनल बैंक+यूनाइटेड बैंक+ओरिएंटल बैंक ऑफ कॉमर्स (पंजाब नेशनल बैंक)
  2. केनरा बैंक+सिंडिकेट बैंक (केनरा बैंक)
  3. इंडियन बैंक+इलाहाबाद बैंक (इंडियन बैंक)
  4. यूनियन बैंक+आंध्रा बैंक+कॉरपोरेशन बैंक (यूनियन बैंक)
  5. बैंक ऑफ इंडिया
  6. बैंक ऑफ बड़ौदा
  7. बैंक ऑफ महाराष्ट्र
  8. सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया
  9. इंडियन ओवरसीज बैंक
  10. पंजाब एंड सिंध बैंक
  11. भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई)
  12. यूको बैंक

साल 2017 तक देश में थे 27 सरकारी बैंक

  • साल 2017 तक देश में सार्वजनिक क्षेत्र के 27 बैंक परिचालन में थे। वहीं अब 1 अप्रैल यानि आज (बुधवार) से देश में सरकारी बैंकों की संख्या 18 से घटकर 12 रह जाएगी। 

इससे पहले इन बैंकों का हो चुका है विलय

  • पिछले वित्त वर्ष में देना बैंक और विजय बैंक का बैंक ऑफ बड़ौदा में विलय किया गया। इससे पहले भारतीय स्टेट बैंक में उसके सभी सहयोगी बैंकों और भारतीय महिला बैंक का विलय किया गया। स्टेट बैंक आफ पटियाला, स्टेट बैंक आफ बीकानेर एण्ड जयपुर, स्टेट बैंक आफ मैसूर, स्टेट बैंक आफ त्रावणकोर और स्टेट बैंक आफ हैदराबाद का देश के सबसे बड़े बैंक भारतीय स्टेट बैंक में विलय एक अप्रैल 2017 से प्रभाव में आ चुका है।

1 अप्रैल: आरबीआई स्थापना दिवस

  • वर्ष 1926 में इंडियन करंसी एंड फाइनैंस से संबंधित रॉयल कमिशन ने भारत के लिए एक सेंट्रल बैंक बनाने का सुझाव दिया। उस कमिशन को हिल्टन यंग कमिशन के नाम से भी जाना जाता था। अलग सेंट्रल बैंक की स्थापना का उद्देश्य करंसी और क्रेडिट के कंट्रोल के लिए एक अलग संस्था बनाना और सरकार को इस काम से मुक्त करना था। साथ ही देश भर में बैंकिंग सुविधा मुहैया कराना भी मकसद था। वर्ष 1934 के रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया एक्ट के तहत रिजर्व बैंक की स्थापना हुई और 1935 में इसने अपना कामकाज शुरू किया। उसके बाद से जैसे-जैसे भारत की अर्थव्यवस्था और वित्तीय क्षेत्र का स्वरूप बदलता रहा, वैसे-वैसे रिजर्व बैंक की भूमिकाओं और कामकाज में बदलाव होता रहा।

सेंट्रल बैंक की जरूरत क्यों पड़ी?

  • सेंट्रल बैंक की स्थापना के कई कारण थे। हालांकि उस समय रुपया आम करंसी थी लेकिन कई रुपये के कई अलग-अलग सिक्के चलन में थे जिनकी अलग-अलग वैल्यू होती थी। अथॉरिटीज ने एक स्टैंडर्ड सिक्का मार्केट में लाने की कोशिश की। कई सालों तक मुर्शिदाबाद का सिक्का सैद्धांतिक रूप से मानक सिक्का रहा जो सिक्कों के लिए रेट्स ऑफ एक्सचेंज का आधार था। मुगलों के समय से एक मानक सिक्के का चलन रहा। उस सिक्के के वजन से अन्य सिक्कों का वजन अगर कम होता तो उस पर एक चार्ज वसूला जाता था जिसको अंग्रेजी में डिस्काउंट और हिंदी में बट्टा कहा जाता था। अभी भी अगर आप फटे-पुराने नोट बदलवाने जाते हैं तो कुछ पैसे आपके काटते हैं जिसको बट्टा ही बोलते हैं। उस समय के सिक्कों की स्थिति अभी की दुनिया भर में डॉलर और अन्य करंसी की स्थिति से समझ सकते हैं। अभी तो पूरे भारत में एक ही मुद्रा यानी रुपया चलन में है जिसकी हर जगह एक वैल्यू है। लेकिन दुनिया भर में अलग-अलग करंसी है जिसकी वैल्यू डॉलर के मुकाबले तय होती है। उसी तरह भारत में भी अलग-अलग सिक्कों का चलना था जिसका मूल्य अलग होता था। ऐसे में एक ऐसी संस्था की जरूरत महसूस हुई जो देश भर में कोई एक मानक सिक्का को चलवाए।

टाइमलाइन

  • 1926: इंडियन करंसी एंड फाइनैंस से संबंधित रॉयल कमिशन ने भारत के लिए एक सेंट्रल बैंक की स्थापना का सुझाव दिया।
  • 1927: लेजिस्लेटिव असेंबली में इस संबंध में एक विधेयक पेश किया गया। लेकिन विभिन्न वर्गों के बीच सहमति की कमी थी जिस कारण उस विधेयक को वापस ले लिया गया।
  • 1933: भारतीय संवैधानिक सुधारों पर एक श्वेत पत्र लाया गया जिसमें रिजर्व बैंक की स्थापना का सुझाव दिया गया। लेजिस्लेटिव असेंबली में एक नया विधेयक पेश किया गया।
  • 1934: विधेयक पारित हो गया और गवर्नर जनरल की मंजूरी मिल गई।
  • 1935: रिजर्व बैंक इंडिया ने 1 अप्रैल से भारत के सेंट्रल बैंक के तौर पर अपना कामकाज शुरू किया। शुरू में इसका सेंट्रल ऑफिस कोलकाता था जिसे बाद में मुंबई शिफ्ट किया गया। पांच करोड़ रुपये पेड अप कैपिटल (paid up capital) के साथ प्राइवेट शेयरहोल्डर्स के बैंक के रूप में इसकी शुरुआत हुई। स्टॉक के बदलने में शेयरधारकों से प्राप्त होने वाले पैसों को पेड अप कैपिटल कहा जाता है।
  • 1942: इससे पहले तक रिजर्व बैंक बर्मा (म्यांमार) के लिए भी करंसी जारी करता था लेकिन इसके बाद यह सेवा बंद कर दी।
  • 1947: बर्मा की सरकार के बैंकर के तौर पर रिजर्व बैंक ने काम करना बंद किया। .
  • 1948: आजादी के बाद कुछ सालों तक रिजर्व बैंक पाकिस्तान को भी सेंट्रल बैंकिंग सेवा उपलब्ध कराता था जिसे 1948 में बंद किया गया।
  • 1949: भारत सरकार ने रिजर्व बैंक (ट्रांसफर ऑफ पब्लिक ओनरशिप) एक्ट, 1948 के तहत रिजर्व बैंक का राष्ट्रीयकरण किया

:: विज्ञान और प्रौद्योगिकी ::

उल्कापिंडों और ज्वालामुखी विस्फोट के कारण 25.2 करोड़ वर्ष पहले हुआ 'सामूहिक विनाश'

  • करोड़ों साल पहले पृथ्वी में उल्कापिंडों के गिरने से हुई सामूहिक विनाश की घटना में कई जीव-जंतुओं का समूल नाश हो गया था। इस दौरान पृथ्वी के वातावरण में सल्फर की मात्रा बढ़ गई थी, जिससे यहां के महासागर भी काफी अम्लीय हो गए थे जलीय जीवन भी प्रभावित हो गया था। अब एक नए अध्ययन में शोधकर्ताओं ने 'सामूहिक विनाश' की घटनाओं के बारे में नया दावा किया है।
  • उनका कहना है कि 25.2 करोड़ वर्ष पहले हुआ 'सामूहिक विनाश' पृथ्वी और समुद्र में अलग-अलग समय में हुआ है। इसमें लगभग 70 फीसद जीव-जंतु मारे गए थे। यह दावा दक्षिण अफ्रीका और ऑस्ट्रेलिया में खोजे गए जीवाश्मों के अध्ययन के आधार पर किया गया है। नेचर कम्युनिकेशंस नामक जर्नल में प्रकाशित शोध में पाया गया है कि ये जीवाश्म 29.9 करोड़ से 25.1 साल पुराने थे, जो इस बात को पुख्ता करते हैं कि सामूहिक विनाश की घटनाएं अलग -अलग समय पर हुई थी।

95 फीसद जलीय जीव हो गए थे खत्म

  • अमेरिका की यूनिवर्सिटी ऑफ कैलिफोर्निया, बर्कले (यूसी) के शोधकर्ताओं के अनुसार, इस सामूहिक विनाश की घटना के दौरान पारिस्थितिकी तंत्र में परिवर्तन समुद्र की तुलना में हजारों साल पहले पृथ्वी पर शुरू हुआ था। जब समुद्री में विनाश की घटनाएं होनी शुरू हुई तो उस समय लगभग 95 फीसद जलीय जीव खत्म हो गए थे।

उल्कापिंडों और भयंकर ज्वालामुखी विस्फोट के कारण हुआ सामूहिक विनाश

  • अब तक वैज्ञानिकों का मानना था कि लाखों वर्ष की अवधि में हुई 'सामूहिक विनाश' की घटनाएं उल्कापिंडों के गिरने और भयंकर ज्वालामुखी विस्फोट के कारण हुई थी, लेकिन पृथ्वी के दक्षिणी गोलार्ध में भूमि पर हुए 'सामूहिक विनाश' और उत्तरी गोलार्ध में समुद्री क्षेत्रों में हुई 'सामूहिक विनाश' की घटनाएं अलग-अलग तात्कालिक कारणों से हुई थी।
  • यूनिवर्सिटी ऑफ बर्कले से इस अध्ययन की सह-लेखक कैंडी लॉय ने कहा, ' ज्यादा लोग मानते हैं कि समुद्री और स्थलीय क्षेत्रों में एक ही समय पर 'सामूहिक विनाश' की घटनाएं हुई थी पर अध्ययन के निष्कर्ष कुछ और कहते हैं।' उन्होंने कहा कि इस बात की प्रबल संभावनाएं हैं कि पृथ्वी के हर हिस्से में 'सामूहिक विनाश' की घटनाएं अलग-अलग समय पर हुई। इसीलिए हर दूसरे क्षेत्र में मिले एक से जीवाश्मों का अध्ययन करने पर अलग-अलग निष्कर्ष सामने आते हैं।

सोडियम हाइपोक्लोराइट रसायन

  • उत्तर प्रदेश के बरेली सहित देश के विभिन्न हिस्सों से सामने आ रहे वीडियो में पलायन कर रहे श्रमिकों पर कर्मचारी डिसइन्फेक्टेंट छिड़कते नजर आ रहे हैं। इसके लिए सोडियम हाइपोक्लोराइट का इस्तेमाल किया जा रहा है। यह स्वीमिंग पूल की सफाई, संक्रमण-बदबू खत्म करने में इस्तेमाल होता है। यह शरीर के लिए अत्यंत घातक है। विशेषज्ञों के अनुसार पानी में इस रसायन की 0.5 प्रतिशत मात्रा  ही काफी नुकसानदेह है।

कहाँ होता है सोडियम हाइपोक्लोराइट रसायन का प्रयोग

  • हाइजीन उत्पादों में होता है प्रयोग: इसका उपयोग प्रदूषित जल की सफाई में भी। घरों में सफाई के उत्पादों में यह 2-10 प्रतिशत तक होता है। 0.005% मात्रा युक्त तरल का उपयोग त्वचा की ब्लीचिंग व जख्मों को ठीक करने में भी होता है।

त्वचा और आंखों के लिए घातक

  • पानी में 0.5 प्रतिशत से ज्यादा सोडियम हाइपोक्लोराइट से त्वचा झुलस सकती है।
  • आंखों को भी नुकसान पहुंच सकता है।
  • खुजली-जलन की शिकायत हो सकती है।

जेएनसीएएसआर ने एंटी-माइक्रोबियल कोटिंग

  • विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग के तहत आने वाले स्वायत्त संस्थान जवाहरलाल नेहरू सेंटर फॉर एडवांस्ड सांइसटफिक रिसर्च (जेएनसीएएसआर) ने एक एंटी-माइक्रोबियल कोटिंग विकसित की है। इसे कपड़े, प्लास्टिक पर लगाने से कोविड-19 जैसे वायरस मर जाएंगे। 
  • रासायनिक पदार्थों को मिलाकर तैयार किए गए इस सहसंयोजक कोटिंग को लेकर किए अनुसंधान संबंधी शोध पत्र को रिसर्च जर्नल 'एप्लाइड मैटेरियल एंड इंटरफेस' ने स्वीकार कर लिया है। शोध में पाया गया कि यह कोटिंग मेथिसिलिन प्रतिरोधी स्टैफिलोकोकस ऑरियस और फ्लुकोनाज़ोल प्रतिरोधी सी. अल्बिकंस एसपीपी सहित रोगजनक बैक्टीरिया और कवक से बचाने के साथ ही इन्फ्लूएंजा वायरस को पूरी तरह खत्म कर देगा।  
  • हाल ही में सामने आए सार्स-कोवी-2 हालिया प्रकोप ने वैश्विक सार्वजनिक स्वास्थ्य में अभूतपूर्व हलचल पैदा की है। कोरोना वायरस भी इन्फ्लूएंजा की तरह ही है। इसलिए यह अनुमान है कि कोटिंग से संपर्क में आने पर सार्स-कोवी-2 को निष्क्रिय कर सकती है और विभिन्न सतहों पर इसे लेपित करने पर यह संक्रमण को रोकने में मदद कर सकती है।

कोटिंग के लाभ

  • अनुसंधानकर्ताओं का कहना है कि, "आज तक, हमारी जानकारी में कोई सहसंयोजक कोटिंग रणनीति नहीं है जो सभी वायरस, बैक्टीरिया और कवक को खत्म सकती है।" इस कोटिंग को विभिन्न सतहों पर लगाया जा सकता है, और इसकी सुलभता और मजबूती कोटिंग की खरीद कुशल कर्मियों की आवश्यकता को पूरा कर सकती है।
  • विकसित अणुओं में यूवी विकिरण पर विभिन्न सतहों के साथ रासायनिक रूप से क्रॉस-लिंक करने की क्षमता होती है। कोटिंग का इस्तेमाल रोगजनकों (यानी बैक्टीरिया) की झिल्ली को निष्क्रिय करने में अग्रणी भूमिका निभा सकता है।
  • माइक्रोबियल संक्रमण और अलग-अलग सतहों पर इसे लगाने से सामुदायिक संक्रमण को रोकने के साथ-साथ स्वास्थ्य देखभाल व्यवस्था में यह एक प्रमुख भूमिका निभाएगा। इसे ध्यान में रखते हुए, दैनिक जीवन में और साथ ही नैदानिक व्यवस्था में उपयोग की जाने वाली कई प्रकार की वस्तुओं को कोट करने के लिए एक सहज नजरिये के साथ इसे विकसित किया गया था।

कैसे की जाती है कोटिंग?

  • अणु की एक विस्तृत श्रृंखला (जैसे कि पानी, इथेनॉल, क्लोरोफॉर्म इत्यादि) में उनकी इष्टतम घुलनशीलता को ध्यान में रखते हुए और आसानी से और उच्च क्षमता के साथ तीन से चार लेयर वाली सिंथेटिक रणनीति के साथ एक लागत प्रभावी डिजाइन तैयार किया गया था। अणु कपड़ा, पॉलीयुरेथेन, पॉलीप्रोपाइलीन, पॉलीस्टीरिन आदि विभिन्न वस्तुओं पर लगे होते हैं, जो कि हमारे आस-पास दिखाई देने वाली अधिकांश वस्तुओं का निर्माण करते हैं। संक्षेप में कहें तो कपड़े पर इसकी कोटिंग का तरीका बताते हैं। कोटिंग करने के लिए इसे पानी में मिलाकर कपड़े की चादर को उसमें डुबोना होगा। जबकि अन्य मामलों में इथेनॉल सब्सट्रेट पर यूवी विकिरण के द्वारा इसकी कोटिंग की जाती है। कोटिंग के बाद, सतहों का मूल्यांकन उनके जीवाणुरोधी, एंटिफंगल और एंटीवायरल गतिविधि के लिए किया जा चुका है।
  • कोरोना वायरस के मौजूदा प्रकोप को ध्यान में रखते हुए, यदि इसका इस्तेमाल किया जाए, तो सीआरओ (कॉन्ट्रैक्ट रिसर्च ऑर्गनाइजेशन) के माध्यम से अणु को बड़े पैमाने पर संश्लेषित किया जा सकता है और निजी संगठनों के साथ मिलकर इसे विभिन्न व्यक्तिगत सुरक्षात्मक उपकरण जैसे मास्क, दस्ताने, गाउन आदि पर लेपित किया जा सकता है। इस कोटिंग को अस्पताल-अधिग्रहित या नोसोकोमियल संक्रमण से बचने के लिए अन्य चिकित्सा उपकरणों और उपकरणों पर भी लेपित किया जा सकता है।

:: विविध ::

भारतीय मूल की प्रख्यात विषाणु विज्ञानी गीता रामजी

  • भारतीय मूल की प्रख्यात विषाणु विज्ञानी गीता रामजी की कोरोना वायरस संक्रमण से मौत हो गई. रामजी मशहूर दवा विज्ञानी थीं और एचआईवी निरोधक शोध की प्रमुख थीं. वह एक सप्ताह पहले लंदन से लौटी थीं लेकिन उनमें कोविड-19के कथित तौर पर कोई लक्षण नहीं थे. उनकी उम्र 64 वर्ष थी.

विंबलडन रद्द 2021 में खेला जाएगा

  • कोरोनावायरस के कारण विंबलडन टेनिस चैम्पियनशिप रद्द हो गई है। दूसरे विश्व युद्ध के बाद ऐसा पहली बार हुआ, जब ग्रास कोर्ट के इस टूर्नामेंट को कैंसिल करना पड़ा। अब यह ग्रैंड स्लैम टूर्नामेंट 2021 में 28 जून से 11 जुलाई तक खेला जाएगा। ऑल इंग्लैंड लॉन टेनिस क्लब (एईएलटीसी) ने बुधवार को इसकी घोषणा की।

विश्व ऑटिज्म जागरूकता दिवस- 2 अप्रैल

  • विश्व ऑटिज्म जागरूकता दिवस (डब्ल्यूएएडी) ऑटिज्म के बारे में जागरूकता बढ़ाने के लिए प्रतिवर्ष 2 अप्रैल को मनाया जाता है। वर्ष 2008 में पहला डब्ल्यूएएडी मनाया गया था। डब्ल्यूएएडी ऑटिज्म से पीड़ित लोगों के जीवन की गुणवत्ता में सुधार और मदद की आवश्यकता को उजागर करता है, ताकि वे समाज के अभिन्न अंग के रूप में संपूर्ण एवं सार्थक जीवन जी सके।
  • विश्व ऑटिज्म जागरूकता दिवस वर्ष 2020 की थीम “The Transition to Adulthood” है।

:: प्रिलिम्स बूस्टर ::

  • जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन आर्डर 2020 के तहत जम्मू-कश्मीर में कितने वर्ष से निवास कर रहे पंजीकृत विस्थापित व्यक्ति डोमिसाइल के लिए वैध होंगे? (15 वर्ष)

  • हाल ही में चर्चा में रहे हजारा समुदाय किस धार्मिक पंथ से संबंधित हैं? (शिया समुदाय-इस्लाम)

  • 1 अप्रैल से प्रभावी हुए 10 बैंकों के विलय उपरांत भारत में सार्वजनिक क्षेत्र के कितने बैंक अब शेष हैं? (12 बैंक)

  • हाल ही में राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) को किस देश में जांच की अनुमति प्रदान की गई है एवं इस जांच एजेंसी का गठन कब किया गया था? (अफगानिस्तान, 2008)

  • जम्मू-कश्मीर में अपनी 12वीं इकाई खोलने से चर्चा में रही राष्ट्रीय औषधि मूल्य निर्धारण प्राधिकरण (एनपीपीए) की स्थापना कब की गई थी? (1997)

  • हाल ही में भारत सरकार के द्वारा कोरोनावायरस संक्रमित लोगों के लोकेशन को ट्रैक करने हेतु किस  मोबाइल ऐप को जारी किया है? (आरोग्य सेतु)

  • कोरोना वायरस के संक्रमण से दिवंगत हुई भारतीय मूल की गीता रामजी को किस क्षेत्र में ख्याति हासिल थी? (प्रख्यात विषाणु वैज्ञानिक)

  • हाल ही में ग्रास कोर्ट पर होने वाला टेनिस के किस आयोजन को स्थगित कर दिया गया है? (विंबलडन)

  • हाल ही में किस राष्ट्र ने कोरोना वायरस के नाम को प्रतिबंधित कर दिया है? (तुर्कमेनिस्तान)

  • अपनी स्थापना से चर्चा में रहे भारतीय रिजर्व बैंक स्थापना की संस्तुति किस समिति ने की थी एवं इसका गठन एवं राष्ट्रीयकरण किस वर्ष हुआ था? (क्रमशः हिल्टन यंग/रॉयल कमीशन, 1935, 1949)

  • विश्व ऑटिज्म जागरूकता दिवस किस तिथि को मनाया जाता है एवं वर्ष 2020 की थीम क्या थी? (2 अप्रैल,“The Transition to Adulthood”)

  • कोरोना वायरस के कारण खाद्य संकट की चेतावनी देने वाले संस्थाओं FAO, WHO और WTO के  प्रमुख कौन हैं? (क्रमशः क्यू डोंगयू, टेड्रोस अधानोम और रॉबर्टो एजेवेडो)

 

 

 

स्रोत साभार: Dainik Jagran (Rashtriya Sanskaran), Dainik Bhaskar (Rashtriya Sanskaran), Rashtriya Sahara (Rashtriya Sanskaran) Hindustan Dainik (Delhi), Nai Duniya, Hindustan Times, The Hindu, BBC Portal, The Economic Times (Hindi & English), PTI, PIB

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