(दैनिक समसामयिकी और प्रिलिम्स बूस्टर) यूपीएससी और सभी राज्य लोक सेवा आयोग परीक्षाओं के लिए हिंदी में समाचार पत्रों का संकलन (01 अगस्त 2020)

दैनिक समसामयिकी और प्रिलिम्स बूस्टर

:: राष्ट्रीय समाचार ::

अंतरराष्ट्रीय सौर गठबंधन (ISA)

चर्चा में क्यों?

  • भारतीय विदेश मंत्रालय ने बताया कि अंतरराष्ट्रीय सौर गठबंधन (ISA) फ्रेमवर्क समझौते में संशोधन किया गया है। अब इसके तहत संयुक्त राष्ट्र के सभी सदस्यों को ISA में शामिल होने का अनुमति देगा।
  • बता दें कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और फ्रांस के तत्कालीन राष्ट्रपति फ्रांसुआ ओलांद ने संयुक्त रूप से पेरिस में 2015 में आइएसए की स्थापना की थी। यह पहला समझौता आधारित अंतरराष्ट्रीय अंतरसरकारी संगठन है। इसका मुख्यालय भारत में गुरुग्राम में है।
  • यह ऐसे 121 देशों का गठबंधन है जो पूरी तरह से या आंशिक रूप से कर्क और मकर उष्णकटिबंधों के बीच स्थित हैं। अब तक 74 देशों ने इसके समझौते पर हस्ताक्षर कर दिए हैं और इनमें 52 ने औपचारिक रूप से संगठन में शामिल होने के लिए उसका अनुमोदन कर दिया है।

क्या है अंतर्राष्ट्रीय सौर गठबंधन?

  • प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और फ्रांस के तत्कालीन राष्ट्रपति फ्रांसुआ ओलांद ने संयुक्त रूप से पेरिस में 2015 में आइएसए की स्थापना की थी।
  • अंतर्राष्ट्रीय सौर गठबंधन एक संधि-आधारित अंतर्राष्ट्रीय अंतर-सरकारी संगठन है।
  • वर्तमान में 122 देश इसके सदस्य हैं इसका मुख्यालय हरियाणा के गुरुग्राम में है।
  • इस गठबंधन का प्राथमिक उद्देश्य जीवाश्म ईंधन पर ऊर्जा की निर्भरता को खत्म कर सौर ऊर्जा को बढ़ावा देना है।
  • इसके अतिरिक्त सदस्य देशों को सस्ती दरों पर सोलर टेक्नोलॉजी का प्रबंध कराना व इस क्षेत्र में अनुसंधान एवं विकास (Research & Development) को बढ़ावा देना।
  • अंतर्राष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी के अनुसार परिवहन और विद्युत क्षेत्र में नवीकरणीय ऊर्जा का कम उपयोग, एक स्वच्छ ऊर्जा वाले भविष्य को अंधकारमय कर सकता है। ऐसे में भविष्य की रणनीति को तय करना बहुत जरूरी हो गया है।

पीएमजीएसवाई योजना

चर्चा में क्यों?

  • केंद्रीय पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार), प्रधानमंत्री कार्यालय, कार्मिक, लोक शिकायत एवं पेंशन, परमाणु ऊर्जा एवं अंतरिक्ष राज्यमंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने पीएमजीएसवाई-II के अंतर्गत विभिन्न योजनाओं का ऑनलाइन शिलान्यास किया। इन परियोजनाओं में, जम्मू-कश्मीर के विभिन्न हिस्सों में पीएमजीएसवाई-II के अंतर्गत लगभग 175 करोड़ रुपये की लागत से निर्माण की जाने वाली 28 सड़कों का आज उद्धाटन किया गया है, जिनमें चन्नुंता खास से भुक्कत्रियन खास, फालटा से बिख्खन गाला, अरनास से ठकराकोट, रामनगर से दूदू, पौनी से कुंड तक की सड़कें शामिल हैं।

पीएमजीएसवाई-I

  • पीएमजीएसवाई दिसम्‍बर 2000 में लांच की गई थी। इसका उद्देश्‍य निर्धारित आकार (2001 की जनगणना के अनुसार 500+मैदानी क्षेत्र तथा 250+ पूर्वोत्‍तर, पर्वतीय, जनजातीय और रेगिस्‍तानी क्षेत्र) के सड़क कनेक्टिविटी से अछूते पात्र रिहायशी क्षेत्र के लिए सभी मौसम के अनुकूल एकल सड़क कनेक्टिविटी प्रदान करना था, ताकि क्षेत्र का समग्र सामाजिक-आर्थिक विकास हो सके। 97 प्रतिशत पात्र और सम्‍भाव्‍य रिहायशी क्षेत्र सभी मौसम के लिए अनुकूल सड़कों से जुड़ गये है।
  • 2013 में पीएमजीएसवाई- II प्रारंभ की गई थी जिसके तहत केवल ग्रामीण सड़कों के अपग्रेडेशन का काम किया जा सकता है।
  • प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी की अध्‍यक्षता में मंत्रिमंडल की आर्थिक समिति ने पूरे देश में ग्रामीण सड़क कनेक्टिविटी को प्रोत्‍साहित करने के लिए प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना- III (पीएमजीएसवाई-III) लांच करने की मंजूरी दे दी है। इस योजना में एक छोर से दूसरे छोर के मार्गों तथा रिहायशी क्षेत्रों को ग्रामीण कृषि बाजारों (जीआरएएम), उच्‍च माध्‍यमिक विद्यालयों तथा अस्‍पतालों से जोड़ने वाली प्रमुख ग्रामीण सम्‍पर्क सड़कें शामिल हैं।

‘इनोवेशन एंड एग्री-एंटरप्रेन्योरशिप डेवलपमेंट’ कार्यक्रम

चर्चा में क्यों?

  • कृषि एवं किसान कल्याण, ग्रामीण विकास तथा पंचायती राज मंत्री श्री नरेंद्र सिंह तोमर ने बताया कि केंद्र सरकार कृषि क्षेत्र को उच्‍च प्राथमिकता देती है। किसानों को अवसर प्रदान करके उनकी आय बढ़ाने के साथ ही ज्यादा से ज्यादा युवाओं को रोजगार प्रदान करने पर भी सरकार का ध्यान है। इसी तारतम्य में कृषि से जुड़े स्टार्ट-अप्‍स को बढ़ावा दिया जा रहा है।

‘इनोवेशन एंड एग्री-एंटरप्रेन्योरशिप डेवलपमेंट’ कार्यक्रम के बारे में

  • कृ‍षि और संबद्ध क्षेत्रों में नवाचार एवं प्रौद्यो‍गि‍की का उपयोग सुनिश्चि‍त करने के लिए स्टार्ट-अप्‍स और कृषि-उद्यमिता को बढ़ावा देने के तहत राष्ट्रीय कृषि विकास योजना (आरकेवीवाई) के अंतर्गत ‘नवाचार और कृषि-उद्यमिता विकास’ कार्यक्रम को अपनाया गया है। इसके तहत ज्यादा स्टार्ट-अप को वित्तीय सहायता दी जाएगी। इसी सिलसिले में मंत्रालय ने उत्‍कृष्‍टता केंद्र के रूप में 5 नॉलेज पार्टनर्स (केपी) और 24 आरकेवीवाई-रफ्तार एग्रीबिजनेस इन्क्यूबेटर्स (आरएबीआई) देशभर से चुने हैं। 112 स्टार्ट-अप्‍स को कृषि प्रसंस्करण, खाद्य प्रौद्योगिकी और मूल्य वर्धन के क्षेत्र में विभिन्न नॉलेज पार्टनर और कृषि व्यवसाय इन्क्यूबेटर्स द्वारा चुना गया।
  • चालू वित्‍त वर्ष में इन 112 स्टार्ट-अप्‍स को अनुदान के रूप में 1,185.90 लाख रुपये किस्तों में दिए जाएंगे। इन स्टार्ट-अप को 29 कृ‍षि व्यवसाय ऊष्‍मायन केंद्रों (केपी और आरएबीआई) में दो माह प्रशिक्षण दिया गया है। ये स्टार्ट-अप युवाओं को रोजगार प्रदान करेंगे व प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष रूप से किसानों की आय बढ़ाने में भी मददगार साबित होंगे।

स्मार्ट इंडिया हैकाथॉन - 2020

चर्चा में क्यों?

  • हाल ही में प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से ‘स्मार्ट इंडिया हैकाथॉन -2020’ के ग्रैंड फिनाले को संबोधित किया ।

स्मार्ट इंडिया हैकाथॉन क्या है?

  • स्मार्ट इंडिया हैकाथॉन एक राष्ट्रव्यापी पहल है जो छात्रों को दैनिक जीवन में आने वाली बड़ी समस्याओं को हल करने के लिए एक मंच प्रदान करता है।
  • यह उत्पाद नवाचार की संस्कृति को बढ़ावा देता है और समस्या को सुलझाने की मानसिकता विकसित करता है।
  • स्मार्ट इंडिया हैकाथॉन हमारे देश के सामने आने वाली चुनौतियों का प्रभावी समाधान निकालने और विघटनकारी डिजिटल प्रौद्योगिकी नवाचारों की पहचान करने के लिए एक अनूठी पहल है।
  • यह एक नॉन-स्टॉप डिजिटल उत्पाद विकास प्रतियोगिता है, जहां नवीन समाधान सुझाने के लिए प्रौद्योगिकी छात्रों को समस्याएं दी जाती हैं।
  • स्मार्ट इंडिया हैकाथॉन जो कि मानव संसाधन विकास मंत्रालय की फ्लैगशिप पहल है , जो अब दुनिया के सबसे बड़े ओपन इनोवेशन मॉडल में विकसित हो गई है।
  • स्मार्ट इंडिया हैकाथॉन पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप का भी एक उत्तम उदहारण है।
  • स्मार्ट इंडिया हैकाथॉन 2017 के पहले संस्करण में 42,000 छात्रों की भागीदारी देखी गई जो 2018 में बढ़कर 1 लाख और 2019 में 2 लाख के पार हो गई।

स्मार्ट इंडिया हैकाथॉन – 2020 के बारे में

  • स्मार्ट इंडिया हैकाथॉन 2020 दुनिया की सबसे बड़ी ऑनलाइन हैकाथॉन है जिसका उद्देश्य सरकारी विभागों और उद्योगों की जटिल समस्याओं का तकनीकी संसाधनों की मदद से नए और प्रभावी समाधान निकलना है।
  • इस हैकाथॉन के लिए छात्रों के विचारों की स्क्रीनिंग कॉलेज स्तर के एक हैकाथॉन के द्वारा जनवरी में ही की गई थी, उसके बाद कॉलेज स्तर पर जो टीमें जीती थीं उनको राष्ट्रीय स्तर पर प्रवेश दिया गया. इसके बाद राष्ट्रीय स्तर पर विशेषज्ञों और मूल्यांकनकर्ताओं द्वारा विचारों की स्क्रीनिंग की गई और अब जो टीमें शॉर्टलिस्ट की गई है वो ग्रैंड फिनाले में प्रतिस्पर्धा करेंगी।
  • कोरोना महामारी को देखते हुए इस वर्ष स्मार्ट इंडिया हैकाथॉन के ग्रैंड फिनाले का आयोजन देश भर के सभी प्रतिभागियों को एक विशेष प्लेटफार्म पर ऑनलाइन माध्यम से किया जा रहा है।
  • स्मार्ट इंडिया हैकाथॉन 2020 के पहले दौर में 4.5 लाख से अधिक छात्रों ने भाग लिया।
  • इस वर्ष सॉफ्टवेयर संस्करण का ग्रैंड फिनाले पूरे देश में सभी प्रतिभागियों को एक विशेष रूप से निर्मित उन्नत प्लेटफॉर्म पर एक साथ जोड़कर ऑनलाइन आयोजित किया जा रहा है। 37 केंद्रीय सरकारी विभागों, 17 राज्य सरकारों और 20 उद्योगों की 243 समस्याओं को हल करने के लिए 10,000 से अधिक छात्र प्रतिस्पर्धा कर रहे हैं।

:: अंतर्राष्ट्रीय समाचार ::

ब्रिक्स (BRICS)

चर्चा में क्यों?

  • पर्यावरण मंत्रियों के छठे ब्रिक्स सम्मेलन (BRICS Summit) का वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए आयोजन किया गया, जिसमें ब्रिक्स देशों (ब्राजील, रूस, भारत, चीन और साउथ अफ्रीका) के पर्यावरण मंत्रियों ने हिस्सा लिया। पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने जानकारी दी है कि इस साल रूस की अध्यक्षता में सम्मलेन का आयोजन किया गया।
  • ब्रिक्स देशों ने बैठक के दौरान कहा कि कोरोना महामारी ने सतत विकास और विकास लक्ष्यों (एसडीजी) के लिए 2030 के एजेंडा की आकांक्षाओं को हासिल करने में एक गंभीर चुनौती पेश की है। साथ ही उन्होंने पर्यावरण में सुधार करने और राष्ट्रीय योजनाओं में संसाधनों के अधिकतम इस्तेमाल की पुन: चक्रण अर्थव्यवस्था को आगे बढ़ाने का आह्वान किया।
  • इसके अलावा ब्रिक्स देशों ने कहा कि कोरोना वायरस के कारण जलवायु परिवर्तन संबंधी बातचीत में देरी हुई है और अब 26वीं कांफ्रेंस ऑफ पार्टीज टू द यूनाइटेड नेशंस फ्रेमवर्क कन्वेंशन ऑन क्लाइमेट चेंज नवंबर महीने में 2021 में होगी।

क्या है यह ब्रिक्स?

  • दुनिया की पाँच सबसे तेज़ी से उभरती अर्थव्यवस्थाओं - ब्राज़ील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका - ने मिलकर एक समूह बनाया है। इसी समूह को ब्रिक्स कहा जाता है। दरअसल ब्रिक्स इन पांचों देशों के नाम के पहले अक्षर B, R, I, C, S के लिये प्रयोग किया जाने वाला एक संक्षिप्त शब्द है।
  • BRICS शब्द का जिक्र सबसे पहले साल 2001 में प्रसिद्ध अर्थशास्री जिम ओ’ नील द्वारा एक रिपोर्ट में किया गया था। इस रिपोर्ट में ब्राज़ील, रूस, भारत और चीन की अर्थव्यवस्थाओं के लिये विकास की बेहतर संभावनाएं व्यक्त की गई थीं। हालांकि उस समय इसमें केवल ब्राजील, रूस भारत और चीन - इन्हीं चार देशों की चर्चा की गई थी यानी शुरुआत में यह BRICS नहीं बल्कि BRIC था।
  • इसकी औपचारिक स्थापना जुलाई 2006 में रूस के सेंट्स पीटर्सबर्ग में जी-8 देशों के सम्मेलन के अवसर पर रूस, भारत और चीन के नेताओं की बैठक के बाद हुई। बाद में, सितंबर 2006 में न्यूयॉर्क में UNGA की एक बैठक के (बैठक से इतर) अवसर पर BRIC देशों के विदेश मंत्रियों की बैठक हुई और इसी में BRIC की औपचारिक शुरुआत हुई।
  • पहले ब्रिक सम्मेलन का आयोजन 16 जून, 2009 को रूस के येकतेरिनबर्ग में हुआ था। दिसंबर 2010 में दक्षिण अफ्रीका को BRIC में शामिल होने का न्यौता दिया गया और इसे BRICS कहा जाने लगा।

यूरोपीय संघ ने रूस, चीन और उत्तर कोरिया के साइबर जासूसों पर पहली बार लगाए प्रतिबंध

चर्चा में क्यों?

  • यूरोपीय संघ (ईयू) ने साइबर हमलों पर पहली बार प्रतिबंध लगाते हुए उन्हें कथित रूसी सैन्य एजेंटों, चीनी साइबर जासूसों और उत्तर कोरिया की एक कंपनी समेत कुछ अन्य संगठनों पर लागू किया है। जिन छह लोगों और तीन समूहों पर ये प्रतिबंध लगाए गए हैं उनमें रूस की जीआरयू सैन्य खुफिया एजेंसी भी शामिल है।
  • यूरोपीय संघ मुख्यालय ने एक बयान में उन्हें 2017 के “वाना क्राय” रैंसमवेयर और “नॉटपेट्या” मालवेयर हमलों तथा ‘‘क्लाउड हॉपर” साइबर जासूसी अभियान के लिए जिम्मेदार बताया है।
  • ईयू विदेश नीति प्रमुख जोसेफ बोरेल ने बृहस्पतिवार को कहा था कि ये प्रतिबंध “व्यक्तियों के संबंध में यात्रा पर और संपत्तियों के लेन-देन पर रोक है तथा कंपनियों एवं निकायों की संपत्ति के हस्तांतरण पर रोक है। इसके साथ ही सूचीबद्ध व्यक्तियों और कंपनियों एवं निकायों को प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष तौर पर निधि उपलब्ध कराना भी प्रतिबंधित किया गया है।”

प्रतिबंध से जुड़े तथ्य

  • जीआरयू सदस्यों के तौर पर पहचाने गए चार रूसी नागरिकों पर नीदरलैंड के संगठन “प्रोहिबिशन ऑफ केमिकल वेपन्स” या ओपीसीडब्ल्यू का वाई-फाई नेटवर्क हैक करने का आरोप है इस संगठन ने सीरिया में रसायनिक हथियारों के प्रयोग की जांच की थी। 2018 में हुए इस हमले को डच अधिकारियों ने विफल कर दिया था। जीआरयू पर नोटपेट्या के लिए भी प्रतिबंध लगाए गए हैं जिसने यू्क्रेन के साथ कारोबार करने वाली कंपनियों को निशाना बनाया था और विश्व भर में इसके कारण अरबों डॉलर का नुकसान हुआ था तथा 2015 और 2016 में यूक्रेन की पावर गिर्ड पर साइबर हमले भी किए गए।
  • वहीं प्रतिबंधित दो चीनी नागरिकों पर “ऑपरेशन क्लाउड हॉपर” में संलिप्तता का आरोप है जिसके बारे में ईयू का कहना है कि इसने क्लाउड सेवा प्रदाताओं के जरिए छह द्वीपों की कंपनियों को प्रभावित किया था और “व्यावसायिक दृष्टि से संवेदनशील डेटा तक अनधिकृत पहुंच बनाई थी जिससे काफी आर्थिक नुकसान हुआ था।” इसके अलावा उत्तर कोरियाई कंपनी चोसून एक्सपो पर प्रतिबंध लगाए गए हैं जिसके बारे में ईयू का कहना है कि उसने वानाक्राय साइबर हमलों, सेनी पिक्चर्स की हैकिंग और वियतनामी तथा बांग्लादेशी बैंकों की साइबर लूट में सहयोग किया है।

तुर्की बना 'भारत-विरोधी गतिविधियों' का बड़ा केंद्र: रिपोर्ट

चर्चा में क्यों?

  • आर्टिकल 370 के मुद्दे पर पाकिस्तान की भाषा बोल चुका तुर्की अब भारत में मुसलमानों को कट्टर बनाने और भारत विरोधी गतिविधियों के लिए खूब फंडिंग कर रहा है। इतना ही नहीं, तुर्की अब पाकिस्तान के बाद 'भारत-विरोधी गतिविधियों' का दूसरा सबसे बड़ा केंद्र बनकर उभरा है। अंग्रेजी वेबसाइट हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक केरल और कश्मीर समेत देश के तमाम हिस्सों में कट्टर इस्लामी संगठनों को तुर्की से फंड मिल रहा है।

रिपोर्ट के मुख्य बिंदु

  • रिपोर्ट में कहा गया है कि तुर्की भारत में मुसलमानों में कट्टरता घोलने और चरमपंथियों की भर्तियों की कोशिश कर रहा है। उसकी यह कोशिश दक्षिण एशियाई मुस्लिमों पर अपने प्रभाव के विस्तार की कोशिश है। तुर्की को फिर से मजहबी कट्टरता की ओर ले जा रहे राष्ट्रपति एर्दोआन का सपना खुद को मुस्लिम देशों के नेता के तौर पर स्थापित करने का है। एर्दोआन ने पिछले दिनों ऐतिहासिक हगिया सोफिया संग्रहालय को मस्जिद में बदल दिया जो सन 1453 तक एक चर्च रहा था। एर्दोआन मुस्लिम जगत में सऊदी अरब की बादशाहत को चुनौती देने की लगातार कोशिशों में लगे हैं। पिछले साल उन्होंने मलयेशिया के तत्कालीन पीएम महातिर मोहम्मद और पाकिस्तान पीएम इमरान खान के साथ मिलकर नॉन-अरब इस्लामी देशों का एक गठबंधन तैयार करने की कोशिश की थी।
  • भारतीय अधिकारियों का मानना है कि एर्दोआन अपने पोलिटिकल अजेंडा के तहत दक्षिण एशियाई मुस्लिमों खासकर भारतीय मुसलमानों पर तुर्की के प्रभाव का विस्तार करना चाहते हैं। अधिकारियों का कहना है कि तुर्की की सरकार सैयद अली शाह गिलानी जैसे कश्मीर के कट्टरपंथी अलगाववादी नेताओं को कई सालों से पैसे देती रही है। हालांकि, हाल के दिनों में उसने कश्मीर के अलावा देश के तमाम हिस्सों में चरमपंथी संगठनों के लिए फंडिंग की है जिसके बाद सुरक्षा एजेंसियों के कान खड़े हो गए हैं।
  • एर्दोआन सरकार भारत में मजहबी आयोजनों और लोगों को कट्टर बनाने के लिए चरमपंथियों की भर्ती के लिए भी फंडिंग कर रही है। इसके अलावा नए नवेले कट्टरपंथियों को अपने खर्चे पर तुर्की का दौरा भी करा रही है। सुरक्षा एजेंसियों को पता चला है कि तुर्की ने केरल के एक कट्टर मुस्लिम संगठन को भी कुछ समय के लिए फंड दिए थे। इस ग्रुप के कुछ लोगों ने तुर्की के लोगों से मुलाकात के लिए कतर का दौरा किया ताकि उन्हें अपनी गतिविधियों के लिए पैसे मिलें। पाकिस्तान के साथ मिलकर तुर्की जाकिर नाइक को भी कतर के रास्ते फंडिंग की है। विवादित इस्लामी उपदेशक नाइक मुस्लिमों को कट्टर बनाने और आतंक का रास्ता चुनवाने का आरोपी है। भारत को उसकी तलाश है और फिलहाल वह मलेशिया में रह रहा है।
  • अधिकारियों ने यह भी कहा कि तुर्की अब पाकिस्तान का 'नया दुबई' बन चुका है। दरअसल संयुक्त अरब अमीरात का यह शहर 2000 से 2010 के बीच पाकिस्तान की कुख्यात खुफिया एजेंसी आईएसआई का दूसरा घर और पश्चिम एशिया में भारत विरोधी गतिविधियों का धुरी बन गया था।

:: राजव्यवस्था ::

पिछड़ा वर्ग कल्याण से संबंधित स्थायी समिति

चर्चा में क्यों?

  • बीजेपी सांसद गणेश सिंह की अध्यक्षता वाली समिति ने भारत सरकार के तहत आने वाली सेवाओं एवं पदों पर ओबीसी के लिए रोजगार में क्रीमी लेयर को तर्कसंगत बनाने संबंधी रिपोर्ट प्रसतुत की है।

समिति की सिफारिशें

  • समिति ने सिफारिश की है कि अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) श्रेणी के लिए क्रीमी लेयर की सीमा को आठ लाख रुपये से बढ़ाकर 15 लाख रुपये किया जाए तथा वार्षिक आय के निर्धारण में वेतन एवं कृषि से होने वाली आमदनी को शामिल नहीं किया जाए।
  • ओबीसी वर्ग से संबंध रखने वालों के लिए शिक्षण संस्थानों और सरकारी नौकरियों में 27 प्रतिशत आरक्षण का प्रावधान है, हालांकि आठ लाख रुपये से अधिक की सालाना आमदनी वाले परिवार क्रीमी लेयर में आते हैं।
  • सदस्यों की आम राय थी कि क्रीमी लेयर की सीमा आठ लाख रुपये से बढ़ाकर 15 लाख रुपये की जाए क्योंकि इससे नौकरी अथवा शिक्षण संस्थान में प्रवेश के लिए ओबीसी श्रेणी के तहत आवेदकों की संख्या में काफी गिरावट आ जाती है। सूत्रों ने यह भी कहा कि समिति के कुछ सदस्य क्रीमी लेयर की व्यवस्था से सहमत नहीं थे क्योंकि उनका कहना था कि अरक्षण आर्थिक विषमता नहीं, बल्कि सामाजिक रूप से पिछड़ेपन पर आधारित है।

परिसीमन प्रक्रिया

चर्चा में क्यों?

  • सुप्रीम कोर्ट ने नगालैंड में वर्ष 2001 की जनगणना के आधार पर परिसीमन प्रक्रिया बहाल करने के आदेश को चुनौती देने वाली याचिका पर केंद्र से जवाब मांगा है। चीफ जस्टिस एसए बोबडे, जस्टिस एएस बोपन्ना व जस्टिस वी. रामासुब्रमणियन की पीठ ने इस याचिका को पड़ोसी असम में परिसीमन से संबंधित एक अर्जी के साथ संलग्न कर दिया। इसमें 28 फरवरी को केंद्र की तरफ से जारी आदेश को निरस्त करने की मांग की गई है।
  • याचिका में आदेश को मनमाना व संविधान के अनुच्छेद 14 का उल्लंघन करने वाला बताया गया है। इसमें वर्ष 2021 की जनगणना के आधार पर परिसीमन कराए जाने की मांग की गई है। इससे पहले आठ फरवरी, 2008 के एक आदेश के माध्यम से राज्य में परिसीमन की प्रक्रिया टाल दी गई थी।

पृष्ठभूमि

  • लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने जम्मू-कश्मीर, असम, मणिपुर, नगालैंड व अरुणाचल प्रदेश के 15 सांसदों को परिसीमन आयोग का सहयोगी सदस्य नामित किया है। ये सांसद पूर्वोत्तर राज्यों तथा केंद्र शासित प्रदेशों के लोकसभा और विधानसभा क्षेत्रों के परिसीमन में आयोग की मदद करेंगे। इनमें केंद्रीय मंत्री किरन रिजिजू व जितेंद्र सिंह शामिल हैं।

क्या होती है परिसीमन प्रक्रिया?

  • परिसीमन प्रक्रिया से तात्पर्य है देश में या राज्य में विधायी निकाय वाले निर्वाचन क्षेत्रों की सीमा तय करने की क्रिया या प्रक्रिया।
  • परिसीमन का काम एक उच्चाधिकार निकाय को सौंपा जाता है। ऐसे निकाय को परिसीमन आयोग या सीमा आयोग के रूप में जाना जाता है।
  • प्रत्येक जनगणना के बाद भारत की संसद द्वारा संविधान के अनुच्छेद-82 के तहत एक परिसीमन अधिनियम लागू किया जाता है।
  • भारत में ऐसे परिसीमन आयोगों का गठन 4 बार किया गया है-
  • 1952 में परिसीमन आयोग अधिनियम, 1952 के अधीन
  • 1963 में परिसीमन आयोग अधिनियम, 1962 के अधीन
  • 1973 में परिसीमन अधिनियम, 1972 के अधीन
  • 2002 में परिसीमन अधिनियम, 2002 के अधीन

परिसीमन आयोग की संरचना

  • अध्यक्ष- उच्चतम न्यायालय के एक अवकाश प्राप्त न्यायाधीश
  • सदस्य- मुख्य निर्वाचन आयुक्त या मुख्य निर्वाचन आयुक्त द्वारा नामित कोई निर्वाचन आयुक्त और संबंधित राज्यों के निर्वाचन आयुक्त
  • परिसीमन आयोग भारत में एक उच्च अधिकार प्राप्त निकाय है जिसके आदेशों को कानून के तहत जारी किया गया है और इन्हें किसी भी न्यायालय में चुनौती नहीं दी जा सकती।

:: अर्थव्यवस्था ::

‘फ्रंट रनिंग’ मामले में चार निकायों पर जुर्माना

चर्चा में क्यों?

  • बाजार नियामक भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (सेबी) ने एचडीएफसी एसेट मैनेजमेंट कंपनी (एएमसी) से जुड़े ‘फ्रंट-रनिंग’ मामले में चार निकायों पर दो करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया है। नियामक ने नीलेश कपाड़िया और धर्मेश शाह पर 50-50 लाख रुपये, अशोक नायक पर 40 लाख रुपये तथा आईकेएबी सिक्योरिटीज एंड इनवेस्टमेंट्स लिमिटेड पर 60 लाख रुपये का जुर्माना लगाया।

पृष्ठभूमि

  • सेबी ने कहा कि अक्टूबर 2006 से जून 2007 की जांच अवधि के दौरान, एचडीएफसी एएमसी के इक्विटी डीलर रहे कपाड़िया ने जून 2000 से 2010 के दौरान धर्मेश शाह को जानकारियां दी। धर्मेश शाह ने इन जानकारियों के आधार पर एचडीएफसी एएमसी के शेयरों के कारोबार में 109 बार फ्रंट रनिंग को अंजाम दिया। फ्रंट रनिंग के इन मामलों में आईकेएबी सिक्योरिटीज के डीलरों नायक और बंकिम शाह तथा अन्य के ट्रेडिंग खातों का इस्तेमाल किया गया। धर्मेश शाह और नायक आईकेएबी सिक्योरिटीज के ग्राहक थे। सेबी ने कहा कि बंकिम शाह और आईकेएबी सिक्योरिटीज की मदद से कपाड़िया और धर्मेश शाह ने एचडीएफसी एएमसी के शेयरों की खरीद-बिक्री में फ्रंट रनिंग को अंजाम दिया।

क्या होती है ‘फ्रंट रनिंग’?

  • फ्रंट-रनिंग वैसे अनैतिक प्रचलनों को कहा जाता है, जिनमें शेयरों में कारोबार करने वाला कोई व्यक्ति किसी ब्रोकर, विश्लेषक या किसी कार्यकारी द्वारा दी गयी अग्रिम सूचना के आधार पर उस इकाई के सौदों से पहले शेयरों की खरीद-बिक्री करता है।

‘एमएसएमई सक्षम’ पोर्टल

  • भारतीय लघु उद्योग विकास बैंक (सिडबी) ने ट्रांस यूनियन सिबिल के साथ मिलकर सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) के लिये एक व्यापक वित्तीय शिक्षा व ज्ञान मंच शुरू किया है।
  • ‘एमएसएमई सक्षम’ पोर्टल वित्तपोषण की इच्छा रखने वाले एमएसएमई को मार्गदर्शन प्रदान करेगा और कर्ज देनदारियों के प्रबंधन में उन्हें मदद मुहैया करायेगा।
  • सिडबी एमएसएमई को वित्तीय रूप से जागरूक और ऋण के लिये तैयार करके सशक्त बनाने में ट्रांस यूनियन सिबिल के साथ साझेदारी करके खुश है। इस पोर्टल का उद्देश्य ऋण व वित्तपोषण को लेकर शुरू से अंत तक एमएसएमई का मार्गदर्शन करना है।’’
  • इस पोर्टल पर एमएसएमई के लिये केंद्र और राज्य सरकारों द्वारा शुरू की गयी सभी योजनाओं की समेकित सूची होगी। यह जानकारीपूर्ण लेखों के साथ एक ज्ञान केंद्र होगा, जो उद्यमियों और व्यवसायियों को व्यवसाय शुरू करने या बढ़ने में मदद करेगा।

अर्थव्यवस्था के बुनियादी क्षेत्र (कोर इंडस्ट्री)

चर्चा में क्यों?

  • अर्थव्यवस्था के बुनियादी क्षेत्र के उत्पादन में जून महीने में 15 प्रतिशत की गिरावट आई है, जबकि इसके पहले महीने में 22 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई थी।

संबन्धित जानकारी

  • देशव्यापी बंदी की वजह से उद्योग मजदूरों की कमी, मांग में कमी और नकदी के संकट से जूझ रहे हैं, जिसका सीधा प्रभाव उनके उत्पादन पर पड़ रहा है।
  • आंकड़ों के मुताबिक मई 2020 में उर्वरक को छोड़कर सभी सात क्षेत्रों - कोयला, कच्चा तेल, प्राकृतिक गैस, रिफाइनरी उत्पाद, इस्पात, सीमेंट, और बिजली में नकारात्मक वृद्धि दर्ज हुई है।
  • आठ प्रमुख उद्योगों का उत्पादन लगातार पिछले चार माह से नकारात्मक वृद्धि कर रहा है हालांकि जून 2020 में गिरावट 15% रही जो मई में 22% की गिरावट से कुछ कम थी।

क्या होते है अर्थव्यवस्था के बुनियादी क्षेत्र?

  • अर्थव्यवस्था के बुनियादी क्षेत्र में उन उद्योगों को रखा जाते है जो देश की अर्थव्यवस्था रीढ़ होते है तथा इनकी विकास दर में कमी या बढोत्‍तरी बताती है कि किसी देश की अर्थव्‍यवस्‍था की बुनियाद की हालत कैसी है?
  • अर्थव्यवस्था के बुनियादी क्षेत्र में अधिकतर ऐसे उद्योगों को शामिल किया जाता है जिनके स्थापना से अन्य उद्योगों की स्थापना का आधार बनती है।
  • ज्यादातर देशों में विशेष उद्योग स्थापित हैं जो अन्य सभी उद्योगों की रीढ़ (Backbone) माने जाते हैं तथा कोर उद्योग होने के योग्य प्रतीत होते हैं।
  • आठ प्रमुख उद्योगों में कोयला, कच्चा तेल, प्राकृतिक गैस, रिफाइनरी उत्पाद, उर्वरक, इस्पात, सीमेंट और बिजली शामिल हैं।
  • औद्योगिक उत्पादन सूचकांक (IIP) में इन आठ उद्योगों की हिस्सेदारी 40.27 प्रतिशत है।

उनके भार के घटते क्रम में आठ कोर उद्योग:

  1. रिफाइनरी उत्पाद - 28.04%
  2. बिजली - 19.85%
  3. स्टील - 17.92%
  4. कोयला - 10.33%
  5. कच्चा तेल - 8.98%
  6. प्राकृतिक गैस - 6.88%
  7. सीमेंट - 5.37%
  8. उर्वरक - 2.63%

चीन से कलर टीवी के आयात पर प्रतिबंध

चर्चा में क्यों?

  • सरकार ने चीन को एक और झटका देते हुए रंगीन टेलीविजन सेट के आयात पर प्रतिबंध लगा दिया है। इस मकसद घरेलू विनिर्माण को बढ़ावा देना और दूसरे देशों खासकर चीन से रंगीन टीवी के आयात को हतोत्साहित करना है। डीजीएफटी ने एक अधिसूचना में कहा कि कलर टेलीविजन की आयात नीति में बदलाव किया गया है। इस अब मुक्त (free) से प्रतिबंधित (restricted) कैटगरी में डाल दिया गया है।
  • किसी सामान को प्रतिबंधित (restricted) कैटगरी में डालने का मतलब है कि उस सामान का आयात करने वाले को इसके लिए डायरेक्टर जनरल ऑफ फॉरेन ट्रेड (डीजीएफटी) से लाइसेंस लेना होगा। डीजीएफटी वाणिज्य मंत्रालय के तहत आता है। भारत में सबसे अधिक टीवी सेट चीन से ही आयात किए जाते हैं। सरकार के इस कदम के बाद अब चीन को तगड़ा झटका लगना तय है।

पृष्ठभूमि

  • नियंत्रण रेखा (LAC) पर भारत चीन की आक्रामकता का सख्ती से जवाब तो दे ही रहा है, अर्थव्यवस्था के मोर्चे पर भी उसे करारा जवाब दिया जा रहा है। सरकार ने सरकारी खरीद में चाइनीज कंपनियों की एंट्री बैन कर दी है। मतलब, केंद्र और राज्य सरकार की तरफ से किसी भी तरह की सरकारी खरीद में चाइनीज कंपनियां बोली में शामिल नहीं हो सकती हैं। एलएसी पर तनाव से पहले ही अप्रैल में भारत ने प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) से जुड़े नियमों में बदलाव किया था ताकि कोरोना महामारी से पैदा हुए नाजुक हालात का फायदा उठाकर चीनी कंपनियां घरेलू कंपनियों का अधिग्रहण न कर लें।
  • राष्ट्रीय सुरक्षा का हवाला देते हुए सरकार टिकटॉक, हेलो, यूसी ब्राउजर जैसे चीन के 59 मोबाइल ऐप्स पर बैन लगा चुकी है। हाल में कुछ और ऐप्स को भी बैन किया गया है। भारत में इनके करोड़ों यूजर्स थे। बैन से चीन को तगड़ा झटका लगा है और उसने खुद स्वीकार किया है कि इससे उसे अरबों रुपये का नुकसान होगा। साथ ही चीनी कंपनियों के कई ठेके रद्द हुए हैं।

:: विज्ञान और प्रौद्योगिकी ::

बेईदोउ नेविगेशन सैटेलाइट सिस्टम

चर्चा में क्यों?

  • चीन ने देश के स्वदेशी नेवीगेशन सेटेलाइट सिस्टम (बीडीएस) बेइदोऊ-3 की पूर्ण वैश्विक सेवाओं की औपचारिक शुरुआत कर दी है।
  • चीन की यह नेवीगेशन प्रणाली अमेरिकी के ग्लोबल पोजिशनिंग सिस्टम (जीपीएस) को टक्कर दे सकती है।

बेईदोउ सैटेलाइट सिस्टम क्या है?

  • चीन के बेइदोऊ नेविगेशन परियोजना की शुरुआत 1990 के दशक के आरंभ में की गई थी।
  • इस प्रणाली ने 2000 से चीन के भीतर सैटेलाइट नेविगेशन की सुविधा प्रदान करना शुरू कर दिया था।
  • 2012 में चीन ने इसका विस्तार एशिया प्रशांत क्षेत्र में जीपीएस सेवाएँ प्रदान करने के लिए किया जाने जाने लगा।
  • इस पूरी प्रणाली में 35 उपग्रहों को स्थापित किया गया है और इसके तीसरी पीढ़ी के उपग्रहों के उन्नयन के साथ यह प्रणाली वैश्विक कवरेज प्रदान करने के लिए तैयार है।

महत्व

  • इससे चीन की सेना को स्वतंत्र नेवीगेशन सुविधा मुहैया होंगी।
  • इससे चीन अपनी मिसाइलों को निर्देशित करने के लिए जीपीएस के बदले अपने नेवीगेशन प्रणाली का इस्तेमाल कर सकता है।
  • पाकिस्तान इस प्रणाली का पहले से ही इस्तेमाल कर रह है। साथ ही चीन अपनी बैल्ट एंड रोड परियोजना (बीआरआई) में शामिल देशों को भी इसके उपयोग के लिए प्रोत्साहित कर रहा है।
  • बेइदोऊ प्रणाली को रूस के ग्लोनास और यूरोपीय संघ के गैलीलियो सिस्टम और अमेरिका के जीपीएस के लिए एक विकल्प के रूप में देखा जा रहा है।

अन्य वैश्विक नेविगेशन सिस्टम

  • वर्तमान में चीन के बेईदोउ अलावा तीन अन्य वैश्विक नेविगेशन प्रणालियां कार्यरत हैं:
  • अमेरिका का जीपीएस सिस्टम
  • रूस का ग्लोनास
  • यूरोपियन संघ का गैलीलियो
  • इनके अलावा दो क्षेत्रीय नेविगेशन प्रणालिया भी है:
    1. भारत का नाविक (IRNSS)
    2. जापान का QZSS

‘ब्लैकरॉक’ एंड्रॉयड मालवेयर

चर्चा में क्यों?

  • देश की साइबर सुरक्षा एजेंसी कंप्यूटर इमरजेंसी रिस्पांस टीम ऑफ इंडिया (सीईआरटी- इन) ने 'ब्लैकरॉक' नाम के एक एंड्रॉयड मालवेयर को लेकर चेतावनी जारी की है, जिसमें बैंकिंग और उपयोगकर्ता के गोपनीय डेटा को चुराने की क्षमता है।

‘ब्लैकरॉक’ एंड्रॉयड मालवेयर के बारे में

  • ‘ब्लैकरॉक’ एंड्रॉयड मालवेयर 'ट्रोजन' श्रेणी के वायरस का "हमला अभियान" वैश्विक स्तर पर सक्रिय है। एंड्रॉयड मालवेयर 'ब्लैकरॉक' एंड्रॉयड ऐप की एक विस्तृत श्रृंखला पर हमला कर रहा है। इसमें जानकारियां चुराने की क्षमता है। इस मालवेयर को बैंकिंग मालवेयर ‘शेरशेस’ के सोर्स कोड का उपयोग करके विकसित किया गया है, जो खुद लोकीबोट एंड्रॉइड ट्रोजन का एक प्रकार है।" \इस मैलवेयर की विशेषता यह है कि इसकी लक्ष्य सूची में 337 एप्लिकेशन (ऐप) शामिल हैं, जिनमें बैंकिंग और वित्तीय ऐप भी शामिल हैं।
  • सीईआरटी-इन ने कहा, "यह ईमेल क्लाइंट्स, ई-कॉमर्स ऐप, वर्चुअल करेंसी, मैसेजिंग या सोशल मीडिया ऐप, एंटरटेनमेंट ऐप, बैंकिंग और वित्तीय ऐप आदि जैसे 300 से अधिक ऐप से सूचनाएं व क्रेडिट कार्ड की जानकारी चुरा सकता है।"
  • ‘‘जब पीड़ित के डिवाइस पर मालवेयर से हमला किया जाता है, तो यह अपने आइकॉन को ऐप ड्रॉअर से छिपा लेता है। इसके बाद यह स्वयं को नकली गूगल अपडेट के रूप में सामने लाता है। जैसे ही उक्त अपडेट के लिये उपयोगकर्ता मंजूरी देता है, यह इसके बाद स्वतंत्र रूप से बिना किसी अन्य मंजूरी की मांग किये अपनी मर्जी से काम करने लगता है।’’
  • इस मालवेयर की मदद से हमलावर कीपैड को काम करने से रोकने, पीड़ित के कांटैक्ट सूची व मैसेज को स्कैन करने, मालवेयर को डिफॉल्ट एसएमएस माध्यम बनाने, नोटिफिकेशन प्रणाली को कमांड एंड कंट्रोल सर्वर में धकेलने, उपयोगकर्ता को होम स्क्रीन तक ही सीमित कर देने और नोटिफिकेशन को छिपाकर जानकारियां चुराने, स्पैम भेजने, एसएमएस के मैसेज चुराने समेत कई अन्य प्रकार के कमांड दे सकता है।
  • यह वायरस इस कारण भी और घातक हो जाता है, क्योंकि यह अधिकांश एंटी-वायरस को धोखा देने में सक्षम है।

सीईआरटी-इन द्वारा बचाव हेतु दिए गए परामर्श

  • साइबर सुरक्षा एजेंसी ने इससे बचने के उपाय बताते हुए कहा कि अज्ञात स्रोतों से ऐप को डाउनलोड या इंस्टॉल न करें, प्रतिष्ठित व प्रमाणित ऐप स्टोर का ही प्रयोग करें, ऐप की विस्तृत जानकारियां जैसे डाउनलोड की संख्या, यूजर रीव्यू आदि हमेशा देखें। इसके अलावा एक्सटर्नल एसडी कार्ड को इनक्रिप्ट करने के लिये डिवाइस के इनक्रिप्शन का प्रयोग करें और अज्ञात वाई-वाई नेटवर्क आदि का इस्तेमाल न करें।
  • यदि बैंकिंग ऐप इंस्टॉल करने जा रहे हों तो हमेशा आधिकारिक व सत्यापित संस्करणों की जांच करें। इसके साथ ही उपयोगकर्ताओं को यह भी सुनिश्चित करना चाहिये कि उनके डिवाइस में कृत्रिम मेधा (एआई) से लैस मजबूत एंटीवायरस मौजूद है।

:: पर्यावरण और पारिस्थितिकी ::

दुनिया के 80 करोड़ बच्‍चों में सीसा (Lead) से प्रभावित: UNICEF

  • संयुक्त राष्ट्र बाल कोष (UNICEF) की एक रिपोर्ट में कहा गया हे कि दुनिया के लगभग तीन चौथाई बच्चे सीसा (Lead) धातु के जहर के साथ जीने को मजबूर हैं। इतनी बड़ी संख्या में बच्चों के सीसा धातु से प्रभावित होने की वजह एसिड बैटरियों के निस्‍तारण को लेकर बरती जाने वाली लापरवाही है। इसकी वजह से यूनिसेफ ने इस तरह की लापरवाही के प्रति आगाह करते हुए इसको तत्‍काल बंद करने की अपील भी की है।
  • यूनिसेफ और प्‍योर अर्थ की The report - The Toxic Truth: Children’s exposure to lead pollution undermines a generation of potential के नाम से सामने आई इस रिपोर्ट में कहा गया है कि दुनिया भर के करीब 80 करोड़ बच्चों के खून में इसकी वजह से इस जहरीली सीसा धातु का स्तर 5 माइक्रोग्राम प्रति डेसीलीटर या उससे भी ज्‍यादा है। यूनिसेफ की इस रिपोर्ट में बच्‍चों की जितनी संख्‍या बताई गई है उसके मुताबिक दुनिया का हर तीसरा बच्‍चा इस जहर के साथ जी रहा है। यूनिसेफ ने आगाह किया है कि खून में सीसा धातु के इतने स्तर पर मेडिकल ट्रीटमेंट की जरूरत होती है। इस रिपोर्ट की दूसरी सबसे बड़ी चौंकानें वाली बात ये भी है कि इस जहर का मजबूरन सेवन करने वाले आधे बच्‍चे दक्षिण एशियाई देशों में रहते हैं।

रिपोर्ट की सिफारिश

  • प्योर अर्थ के अध्यक्ष रिचर्ड फ्यूलर का कहना है कि सीसा धातु को कामगारों और उनके बच्चों और आसपास की बस्तियों के लिये जोखिम पैदा किये बिना ही सुरक्षित तरीके से री- सायकिल किया जा सकता है। इसके अलावा लोगों को सीसा धातु के खतरों के बारे में जानकार व जागरूक बनाकर उन्हें और उनके बच्चों को इसके खतरों से सुरक्षित रहने के लिये सशक्त बनाया जा सकता है। उनके मुताबिक इस निवेश के भी कई फायदे हैं। रिपोर्ट में सिफारिश की गई है कि प्रभावित देशों की सरकारें सीसा धातु की मौजूदगी की निगरानी रखने और उसकी जानकारी मुहैया कराने की प्रणालियां विकसित करने के लिये एकजुट रुख अपनाएं। इसके अलावा रोकथाम व नियंत्रण के उपाय लागू करें।

शुरुआती लक्षण नहीं आते नजर

  • यूनीसेफ की कार्यकारी निदेशक हेनरिएटा फोर के मुताबिक खून में सीसा धातु की मौजूदगी के शुरुआती लक्षण नजर नहीं आते हैं और ये धातु खामोशी के साथ बच्चों के स्वास्थ और विकास को बबार्द कर देती है। उनके मुताबिक इसके परिणाम घातक भी होते हैं। उनका कहना है कि सीसा धातु के प्रदूषण के व्यापक फैलाव के बारे में जानने और व्यक्तियों के जीवन व समुदायों पर इसकी तबाही को समझने के बाद बच्चों को अभी और हमेशा के लिये इससे सुरक्षित बनाने के लिये ठोस कार्रवाई की प्रेरणा सामने आनी चाहिए। इस रिपोर्ट बच्चों के सीसा धातु की चपेट में आने का पूरा विश्लेषण मौजूद है जिसे स्वास्थ्य मैट्रिक्स मूल्यांकन संस्थान के तत्वावधान में किया गया है।

रिपोर्ट में पांच देशों का जिक्र

  • इस रिपोर्ट में पांच देशों की वास्तविक परिस्थितियों का मूल्यांकन भी किया गया। इनमें बांग्‍लादेश के कठोगोरा, जियार्जिया का तिबलिसी, घाना का अगबोगब्लोशी, इंडोनेशिया का पेसारियान और मैक्सिको का मोरोलॉस प्रांत शामिल है। इसमें कहा गया है कि सीसा धातु में न्यूरोटॉक्सिन होता है जिनके कारण बच्चें के मस्तिष्क को वो नुकसान पहुंचता है जिसकी भरपाई नहीं की जा सकती है। इसका इलाज भी संभव नहीं है।

नवजात शिशुओं के लिए घातक

  • इस घातु का संपर्क नवजात शिशुओं और पांच वर्ष से कम उम्र के बच्चों के लिए अत्‍यंत घातक होता है। इसकी वजह से उनके मस्तिष्कों में जीवन भर के लिये समस्‍याएं बन जाती हैं। इस रिपोर्ट के मुताबिक बचपन में ही सीसा धातु की चपेट में आने से बच्चों और व्यस्कों में मानसिक स्वास्थ्य और व्यवहार संबंधी परेशानियां देखने को मिलती हैं। इसका एक असर अपराध और हिंसा में बढ़ोतरी के रूप में भी सामने आ सकता है। निम्‍न और मध्य आय वाले देशों में इस तरह के बच्चों और व्यस्कों से उनके जीवन काल में देशों की अर्थव्यवस्थाओं को खरबों डॉलर का नुकसान होता है।

बैटरियों के सही डिस्‍पोजल की कोई व्‍यवस्‍था नहीं

  • रिपोर्ट में पाया गया है कि इस तरह की आय वाले देशों में बैटरियों के सही डिस्‍पोजल की कोई व्‍यवस्‍था नहीं है। इसके अलावा इनकी री-सायकिलिंग भी कोई सही व्यवस्था नहीं है, जो इस समस्‍या का सबसे बड़ा कारण है। यही बच्चों में सीसा धातु का जहर फैलने का एक बहुत बड़ा कारण भी है। इन देशों में वाहनों की संख्या में बढ़ोत्तरी के साथ बैटरियों का कचरा भी काफी निकल रहा है। इसमें ये भी कहा गया है इन देशों में री-सायकिलिंग की सही व्‍यवस्‍था न होने की वजह से सीसा-एसिड बैटरी असुरक्षित तरीके से ही री- सायकिल कर दी जाती हैं।

ये हैं स्रोत

  • बच्चों के सीसा धातु की चपेट में आने के दूसरे स्रोतों में पानी भी शामिल होता है। इसके अलावा खदान जैसे सक्रिय उद्योग, सीसा युक्त पेंट और पिगमेंट व सीसा युक्त गैसोलान भी बच्चों में सीसा धातु के खतरे के अन्य प्रमुख स्रोत हैं। खाद्य पदार्थों की धातु बोतलें, मसालों, सौंदर्य उत्पादों, आयुर्वेदिक दवाओं, खिलौनों और अन्य उपभोक्ता उत्पादों का भी सीसा धातु के फैलाव में बड़ा हिस्सा है। जो लोग इन क्षेत्रों में काम करते हैं इस घातु के कण उनके शरीर और कपड़ों से चिपटकर उनके घर और फिर बच्‍चों तक पहुंच जाते हैं।

मेंढक की संख्या में गिरावट

चर्चा में क्यों?

  • छत्तीसगढ़ में बिलासपुर के गुरु घासीदास केंद्रीय विश्वविद्यालय में प्राणी विज्ञान विभाग के सहायक प्राध्यापक डॉ. कोमल सिंह सुमन प्रकृति में मेंढकों की मौजूदगी पर न केवल शोध कर रहे हैं वरन चार साल से उनके संरक्षण के लिए मुहिम भी चला रहे हैं। डॉ. सिंह का कहना है कि शोध के नाम पर और कीटनाशकों के चलते बड़ी संख्या में मेंढकों का खात्मा हुआ है। यही मलेरिया, डेंगू, चिकनगुनिया जैसी कई घातक बीमारियों के विस्तार का कारण बन गया है।

देश में मेंढकों की संख्या घटी

  • शोधकर्ता का दावा है कि छत्तीसगढ़ ही नहीं, देश में मेंढकों की संख्या तेजी से कम हो रही है। डॉ.कोमल देश के अलग-अलग इलाकों में जाकर मेंढकों को बचाने की लोगों से अपील कर रहे हैं। संरक्षण को लेकर चलाई जा रही इस मुहिम में पांच सौ से अधिक युवा जुड़ चुके हैं। डॉ. कोमल के मुताबिक अब घर व आसपास बारिश के दिनों में टर्र-टर्र की आवाज सुनाई कम देती है।

प्रदूषण के कारण मेंढक कम हुए

  • मेंढक कम होने से डेंगू, मलेरिया जैसी बीमारियों के वाहक मच्छरों और फसलों को नुकसान पहुंचाने वाले कीट, टिड्डे, बीटल्स, कनखजूरा, चींटी, दीमक और मकड़ी तेजी से पनपने लगे हैं। प्रदूषण के कारण मेंढक कम हुए हैं। खेतों में कीटनाशक उनके लिए सबसे खतरनाक साबित हो रहे हैं। इंसानी हस्तक्षेप इन उभयचर जंतुओं की मौत की सबसे बड़ी वजह है।

क्या है मेंढक की विशेषता?

  • बरसात मेंढकों का प्रजनन काल होता है। ये पानी की आपूर्ति को शुद्ध रखते हैं। 1980 के करीब इनका निर्यात होता था। केंद्र सरकार ने अब प्रतिबंध लगा दिया है। मेंढक में करीब दो सौ प्रकार के लाभकारी अल्केलाइड पाए जाते हैं। बंगाल, सिक्किम, असम व गोवा में लोग इसका भोजन में इस्तेमाल करते हैं।

प्रकृति के लिए वरदान हैं मेंढक

  • डॉ. कोमल सिंह सुमन कहते हैं कि प्रकृति में मेंढक की मौजूदगी अनिवार्य है। 1982 में देश से 25 सौ टन से अधिक मेंढक निर्यात किए गए थे। बाद में इस पर प्रतिबंध लगा दिया गया। मेंढक उस समय से कम होते जा रहे हैं। इन पर शोध व खेतों में कीटनाशक के चलते इनकी संख्या कम हुई है।

:: विविध ::

शकुंतला देवी को गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड का मानव कंप्यूटर होने का प्रमाणपत्र

  • दुनिया भर में अपनी गणितीय क्षमता का लोहा मनवाने वाली ‘मानव कंप्यूटर’ शकुंतला देवी को अपनी उपलब्धि के करीब 40 साल बाद मरणोपरांत गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड की ओर से आधिकारिक प्रमाणपत्र दिया गया है। गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड ने औपचारिक रूप से शकुंलता देवी के मानव कंप्यूटर होने का प्रमाणपत्र उनकी बेटी को सौंपा।
  • मनुष्य द्वारा सबसे तेज गणना करने का रिकॉर्ड 28 सेकेंड का है जो शकुंतला देवी ने 18 जून, 1980 को ब्रिटेन के इम्पिरियल कॉलेज ऑफ लंदन में बनाया था। उन्होंने 13-13 अंकों की दो संख्याओं का महज 28 सेकेंड में सही गुणा किया था। यह प्रमाणपत्र दिवंगत शकुंतला देवी की बेटी अनुपमा बनर्जी ने प्राप्त किया।

दीपांकर घोष, वेबसाइट परी(PARI) को 2020 का प्रेम भाटिया पत्रकारिता पुरस्कार

  • इस वर्ष उत्कृष्ट पत्रकारिता के लिए प्रेम भाटिया पुरस्कार समाचारपत्र ‘इंडियन एक्सप्रेस’ के दीपांकर घोष और गैर-लाभकारी पत्रकारिता वेबसाइट ‘पीपुल्स आर्काइव ऑफ रूरल इंडिया’ (PARI) को कोविड-19 महामारी और देश भर में इसके प्रभाव के उनकी कवरेज लिए दिये गए हैं।
  • इस साल के लिए उत्कृष्ट पत्रकारिता के लिए प्रेम भाटिया अवार्ड प्रवासी मजदूरों के संकट और अन्य कोविड-19 संबंधित मुद्दों के कवरेज के लिए ‘इंडियन एक्सप्रेस’ के दीपांकर घोष और एक गैर लाभकारी पत्रकारिता वेबसाइट ‘पीपुल्स आर्काइव ऑफ रूरल इंडिया (PARI) को जलवायु परिवर्तन एवं ग्रामीण भारत पर महामारी के प्रभाव सहित व्यापक क्षेत्र की रिपोर्टिंग के लिए दिया गया है।’’
  • पुरस्कारों की स्थापना 1995 में जानेमाने पत्रकार प्रेम भाटिया (1911-1995) की याद में की गई थी।

:: प्रिलिम्स बूस्टर ::

  • साइबर सुरक्षा एजेंसी सीईआरटी-इन द्वारा चेतावनी जारी करने से चर्चा में रहे 'ब्लैकरॉक' क्या है एवं यह कैसे प्रभावित करता है? (एंड्रॉयड मालवेयर- बैंकिंग और गोपनीय डाटा को चुराकर)
  • हाल ही में यूरोपीय संघ के द्वारा साइबर हमलों के कारण किस देश के खुफिया एजेंसी पर प्रतिबंध लगा दिया गया है? (रूस- GRU:रूस की सैन्य खुफिया एजेंसी)
  • सदस्यता नियमों में संशोधन से चर्चा में रहे अंतरराष्ट्रीय सौर गठबंधन (ISA) को कब प्रारंभ किया गया था एवं संशोधन उपरांत इसके सदस्य राष्ट्र कौन हो सकते हैं? (2015, संयुक्त राष्ट्र के सभी सदस्य)
  • उत्पादन सूचकांक जारी होने से चर्चा में रहे ‘बुनियादी उद्योगों’ में कितने और कौन से उद्योग शामिल हैं? (8- कोयला, कच्चा तेल, प्राकृतिक गैस, रिफाइनरी उत्पाद, इस्पात, सीमेंट, बिजली और उर्वरक)
  • कई संस्थाओं पर सेबी द्वारा जुर्माना लगाने से चर्चा में रहे ‘फ्रंट-रनिंग’ क्या होता है? (ऐसे अनैतिक व्यापार जिसमें अग्रिम सूचना के आधार पर इकाइयों के सौदों से पहले शेयरों की खरीद-बिक्री हो)
  • हाल ही में किन संगठनों के द्वारा मिलकर एमएसएमई उद्योगों के वित्तीय शिक्षा और ज्ञान हेतु ‘एमएसएमई सक्षम’ पोर्टल की शुरुआत की गई है? (सिडबी और ट्रांस यूनियन सिबिल)
  • हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के द्वारा उद्घाटन से चर्चा में रहे ‘स्मार्ट इंडिया हैकाथॉन’को आयोजित करने का उद्देश्य क्या है? (दैनिक जीवन से जुड़ी समस्याओं को हल कर नवाचार की संस्कृति बढ़ाना)
  • हाल ही में उत्कृष्ट पत्रकारिता के लिए किन्हें ‘प्रेम भाटिया’ पुरस्कार प्रदान किया गया है? (दीपंकर घोष और पत्रकारिता वेबसाइट पीपुल्स आर्काइव ऑफ रूरल इंडिया’-PARI)
  • हाल ही में किस देश के द्वारा अमेरिकी जीपीएस के समतुल्य स्वदेशी नेविगेशन सिस्टम बेइदोऊ (BeiDou) को प्रारंभ किया गया? (चीन)
  • हाल ही में गणितीय क्षमता में माहिर किस व्यक्तित्व को मरणोपरांत गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड के द्वारा ‘मानव कंप्यूटर’ होने का प्रमाण पत्र दिया गया? (शकुंतला देवी)
  • ओबीसी कोटा पर गठित संसदीय समिति ने क्रीमी लेयर की सीमा 8 लाख रुपए से बढ़ाकर कितनी करने की सिफारिश की है एवं इस समिति के अध्यक्ष कौन हैं? (15 लाख रुपए, गणेश सिंह)

स्रोत साभार: Dainik Jagran (Rashtriya Sanskaran), Dainik Bhaskar (Rashtriya Sanskaran), Rashtriya Sahara (Rashtriya Sanskaran) Hindustan Dainik (Delhi), Nai Duniya, Hindustan Times, The Hindu, BBC Portal, The Economic Times (Hindi & English), PTI, PIB