(दैनिक समसामयिकी और प्रिलिम्स बूस्टर) यूपीएससी और सभी राज्य लोक सेवा आयोग परीक्षाओं के लिए हिंदी में समाचार पत्रों का संकलन (01अप्रैल 2020)

दैनिक समसामयिकी और प्रिलिम्स बूस्टर


(दैनिक समसामयिकी और प्रिलिम्स बूस्टर) यूपीएससी और सभी राज्य लोक सेवा आयोग परीक्षाओं के लिए हिंदी में समाचार पत्रों का संकलन (01अप्रैल 2020)


:: राष्ट्रीय समाचार ::

टाटा पावर का मुंद्रा बिजली संयंत्र

  • देश में कोरोनावायरस के बढ़ते मामलों के बीच विद्युत उत्पादन में निजी क्षेत्र की कंपनी टाटा पावर ने मुंद्राअल्ट्रा मेगा पावर प्रोजेक्ट (यूएमपीपी) इकाई को दोबारा शुरू करने का निर्णय लिया है। कंपनी ने संशोधित दरों के अभाव में मुंद्रा स्थित तीन संयंत्रों को मार्च में बंद कर दिया था।
  • कंपनी ने कहा कि राज्य में मांग तथा असाधारण स्थिति की वजह से कंपनी ने मुंद्रा यूएमपीपी इकाई को दोबारा शुरू करने का फैसला किया है। वेस्टर्न रीजनल लोकल डिस्पैच सेंटर की एक साप्ताहिक (16-22 मार्च) रिपोर्ट के अनुसार 21 मार्च से मुंद्रा की पांच इकाइयां काम नहीं कर रही थीं। इसका कारण सप्लीमेंट पावर परचेज एग्रीमेंट (पीपीए) पर हस्ताक्षर नहीं होना था।
  • टाटा पावर ने अगले पांच वर्षों तक टैरिफ कटौती के एमईआरसी के आदेश का स्वागत किया है।

तब्लीगी जमात के मरकज पर सरकार की बड़ी कार्रवाई

  • देश में कोरोना से जंग में बड़े संकट के रूप में उभरे तब्लीगी जमात के खिलाफ सरकार ने सख्त कदम उठाए हैं। जमात में शामिल विदेशी सदस्यों को तलाश कर उन्हें तुरंत वापस भेजने का आदेश दिया गया है। साथ ही उसके किसी भी सदस्य को टूरिस्ट वीजा नहीं जारी करने का फैसला किया गया है। यह निर्णय दिल्ली के निजामुद्दीन में तब्लीगी जमात के कार्यक्रम में शामिल लोगों के बड़ी संख्या में कोरोना वायरस से संक्रमित पाए जाने और छह लोगों की मौत के बाद किया गया है। जमात में शामिल होने एक जनवरी से अब तक 2100 विदेशी सदस्य भारत आए और देश के विभिन्न हिस्सों में तब्लीगी गतिविधियों को अंजाम दिया।

यह है मरकज और तब्लीगी जमात

  • तब्लीगी जमात सुन्नी मुसलमानों का एक ऐसा संगठन है जो चाहता है कि दुनिया भर के मुसलमान वैसे ही रहें जैसे कि वे पैगंबर साहब के समय में रहते थे। यानी उनका खानपान, वेशभूषा और रीति-रिवाज सब कुछ उसी समय का हो। माना जाता है कि इस जमात के दुनिया भर में करीब 20 करोड़ सदस्य हैं। 1927 में स्थापित इस संगठन का मजबूत गढ़ दक्षिण एशिया है, लेकिन करीब सौ से ज्यादा देशों में इसकी पहुंच बताई जाती है। इसकी स्थापना भारत में हरियाणा के मेवात में मुहम्मद इल्यास अल कंधालवी ने की थी। तब्लीगी जमात के छह सिद्धांत हैं। कलमा, सलाह, इल्म ओ जिक्र, इकराम ओ मुस्लिम, इखलास ए नीयत और दावत ओ तब्लीगी। इसका मुख्यालय दिल्ली के निजामुद्दीन इलाके में स्थित है। इससे देश से लेकर विदेश तक लोग जुड़े हुए हैं। जमात के मुताबिक वह किसी राजनीतिक विचारधारा का समर्थन नहीं करती क्योंकि उसका उद्देश्य धार्मिक है।

विदेशी पर्यटकों की सहायता के लिए ‘स्ट्रैंडेड इन इंडिया’ पोर्टल का शुभारम्भ

  • पर्यटन मंत्रालय, भारत सरकार ने भारत में विभिन्न हिस्सों में फंसे विदेशी पर्यटकों को सहायता पहुंचाने के उद्देश्य से एक पोर्टल का शुभारम्भ किया है। इस पोर्टल पर अपने-अपने देश से दूर भारत में फंसे विदेशी पर्यटकों के लिए विभिन्न सेवाओं से जुड़ी जानकारियां दी गई हैं। इस पोर्टल का नाम ‘स्ट्रैंडेड इन इंडिया’ है और इसका उद्देश्य विदेशी पर्यटकों के लिए एक सहायक नेटवर्क के रूप में काम करना है।
  • पूरी दुनिया कोरोना वायरस के चलते अचानक पैदा हुए हालात का सामना कर रही है और यह पर्यटकों विशेषकर दूसरे देशों से घूमने आए पर्यटकों की बेहतरी सुनिश्चित करने की दिशा में किया गया एक प्रयास है। इस क्रम में पर्यटन मंत्रालय लगातार सतर्क बना हुआ है और पर्यटकों की जरूरतों के आधार पर सहायता के लिए विभिन्न पहलों को प्रोत्साहित कर रहा है।

औषधीय पौधा ‘कालमेघ’

  • कोरोना वायरस के इलाज में दवाओं की खोज में मॉडर्न मेडिसिन के साथ आयुर्वेद की तरफ भी निरंतर शोध किये जा रहा है। इस दिशा में केंद्रीय औषधि अनुसंधान संस्थान(लखनऊ) के वैज्ञानिकों को औषधीय पौधा कालमेघ को लेकर उम्मीद की किरण जगी है।
  • ‘कालमेघ’ आयुर्वेद, सिद्ध, यूनानी और होम्योपैथी जैसी पारंपरिक चिकित्सा पद्धति में उपयोग किया जाने वाला औषधीय पौधा है। इसका वैज्ञानिक नाम एंडोग्रेफिस पैनिकुलाटा है। यह पौधा भारत में उत्तर प्रदेश से लेकर केरल तक और बांग्लादेश, पाकिस्तान और सभी दक्षिण पूर्वी एशियाई देशों में पाया जाता है। इस पौधे के सभी हिस्से बेहद होने के कारण इस पौधे कड़वाहट का राजा भी कहा जाता है। यह पौधा हरे रंग का होता है और इसकी पत्तियों की बनावट मिर्च के पौधों जैसी होती है।
  • वायरल रोगों के नियंत्रण की अपारशक्ति होने के कारन कालमेघ पौधे का प्रयोग फीवर व वायरल संक्रमण में किया जाता है। कालमेघ पौधे में एंडो ग्राफीलाइट पैनीकुलेटम पाया जाता है। यह एक टेट्रासाइक्लिक कंपाउंड है जो वायरस की प्रोटीन के साथ जुड़ता है और उसे खत्म कर देता है।
  • इसके अलावा इस पौधें को एनीमिया,उच्च रक्तचाप, कुष्ठ रोग और सर्पदंश के इलाज के साथ-साथ यकृत और त्वचा रोगों के संरक्षण के रूप में इसका प्रयोग किया जाता है।

बीएस-6 उत्सर्जन मानक लागू

  • आज से पूरे देश में बीएस6 उत्सर्जन मानक लागू हो जाएंगे। अक्टूबर 2019 में सुप्रीम कोर्ट ने अपना अंतिम फैसला सुनाया था कि बीएस4 वाहनों को बेचने की अंतिम तिथि 31 मार्च 2020 है और 1 अप्रैल 2020 से बीएस6 मानक लागू हो जाएंगे।
  • आपको बता दें कि बीएस6 मानकों को इसलिए लागू किया गया है, जिससे वाहनों से निकलने वाले धुएं से वातावरण को नुकसान न पहुंचे। वाहन के निकले वाली नॉक्स गैस और कण पदार्थ वातावरण को प्रदूषित करते हैं।

सल्फर के उत्सर्जन में कमी लाना

  • हर एक उत्सर्जन मानक में पेट्रोल और डीजल गाड़ियों से निकलने वाले धुएं के साथ सल्फर की मात्रा को कम करना होता है। बीएस3 स्टैंडर्ड के तहत पेट्रोल गाड़ियां 150 मिलीग्राम प्रति किलोग्राम सल्फर उत्सर्जित कर सकती थी। जो बीएस6 में घटकर 10 मिलीग्राम प्रति किग्रा हो गया है। इसी तरह डीजल गाड़ियां बीएस3 स्टैंडर्ड नॉर्म्स के तहत 350 मिलीग्राम प्रति किग्रा सल्फर उत्सर्जित कर सकती थी, जिसकी मात्रा घटकर 10 मिलीग्राम प्रति किग्रा हो गई है।

बीएस4 और बीएस 6 में क्या अंतर

  • बीएस4 इमीशन नार्म्स के तहत वाहन के इंजन को इस हिसाब से डिजाइन किया जाता है कि उससे निकलने वाले धुएं से सल्फर की मात्रा भारत सरकार के तय पैमाने के आधार पर निकले। इसके लिए कम सल्फर वाले ईंधन (डीजल) का इस्तेमाल किया जाता है। इसके लिए सरकार की तरफ से ईंधन का ग्रेड तय किया जाता है।

ग्रेड आधारित ईंधन

  • बीएस6 ईंधन देशभर में एक अप्रैल 2020 से मिलना शुरू होगा। बीएस-6 नियम आने से कार्बन उत्सर्जन में कमी आएगी। इससे पहले 1 अप्रैल 2017 से ही पेट्रोलियम मंत्रालय ने पूरे देश में बीएस-IV ग्रेड के पेट्रोल और डीजल की बिक्री शुरू किया था। वर्तमान में जम्मू कश्मीर, पंजाब, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, दिल्ली, राजस्थान के कुछ हिस्सों और पश्चिमी उत्तर प्रदेश सहित उत्तर भारत में बीएस-4 ईंधनों की आपूर्ति की जा रही है, जबकि देश के बाकी हिस्से में बीएस-3 ईंधन की आपूर्ति की जा रही हैं.

:: अंतर्राष्ट्रीय समाचार ::

'द कोविड -19 शॉक टू डेवलपिंग कंट्रीज: टूवर्ड्स'- अंकटाड

  • संयुक्त राष्ट्र के व्यापार और विकास सम्मेलन (अंकटाड) के नए विश्लेषण के अनुसार, संयुक्त राष्ट्र व्यापार और विकास निकाय का 'द कोविड -19 शॉक टू डेवलपिंग कंट्रीज: टूवर्ड्स'  कार्यक्रम दुनिया के दो-तिहाई लोगों के लिए है। अनुमान है कि कमोडिटी से समृद्ध निर्यातक देश अगले दो वर्षों में विदेशों से निवेश में 2 ट्रिलियन से 3 ट्रिलियन अमरीकी डालर तक की गिरावट का सामना करेंगे।
  • कोरोना के कहर से वैश्विक मंदी की ओर दुनिया बढ़ रही है पर भारत और चीन के लिए राहत भरी खबर ये है कि इन पर मंदी की मार दूसरे देशों की तुलना में कम पड़ेगी। राष्ट्रसंघ की एक ताजा रिपोर्ट में कहा गया है कि इस साल कोरोना की महामारी के चलते पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था को खरबों डालर की चोट पड़ेगी। इसका सबसे ज्यादा असर विकासशील देशों पर पड़ेगा। रिपोर्ट के मुताबिक दुनिया की दोतिहाई आबादी विकासशील देशों में रह रही है, जो  COVID-19 संकट से अभूतपूर्व आर्थिक क्षति झेल रहे हैं। इन देशों के लिए यूएन ने 2.5 ट्रिलियन यूएस डॉलर के पैकेज की घोषणा की है।
  • यूएनसीटीएडी ने कहा कि हाल के दिनों में उन्नत अर्थव्यवस्थाओं के साथ चीन ने बड़े पैमाने पर सरकारी पैकेजों को एक साथ रखा है, जो कि 20 प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं (जी 20) वाले देशों के समूह के अनुसार, उनकी अर्थव्यवस्थाओं में 5 ट्रिलियन डॉलर की जीवन रेखा का विस्तार करेगा।हालाँकि, रिपोर्ट में यह विस्तृत विवरण नहीं दिया गया है कि क्यों और कैसे भारत और चीन अपवाद होंगे क्योंकि दुनिया को वैश्विक आय में मंदी और नुकसान का सामना करना पड़ रहा है जो विकासशील देशों को प्रभावित करेगा।

अंकटाड क्या है?

  • संयुक्त राष्ट्र व्यापार और विकास सम्मेलन अंकटाड की स्थापना 1964 में की गई थी। अंकटाड का मुख्यालय जेनेवा में है। अंकटाड के द्वारा व्यापार एवं विकास रिपोर्ट, अल्पविकसित देशों की रिपोर्ट तथा विश्व निवेश रिपोट (वार्षिक) इत्यादि का प्रकाशन किया जाता हैं। अंकटाड का उद्देश्य अल्पविकसित देशों के त्वरित आर्थिक विकास हेतु अंतरराष्ट्रीय व्यापार को प्रोत्साहित करना, व्यापारको प्रोत्साहित करना, व्यापार व विकास नीतियों का निर्माण एवं क्रियान्वयन करना, व्यापार व विकास के सम्बंध में संयुक्त राष्ट्र परिवार की विभिन्न संस्थाओं के मध्य समन्वय की समीक्षा व संवर्द्धन करना तथा सरकारों एवं क्षेत्रीय आर्थिक समूहों की व्यापार व विकास नीतियों में सामंजस्य लाना है।

:: भारतीय अर्थव्यवस्था ::

छोटी बचत योजनाओं पर मिलने वाले ब्याज में बड़ी कटौती

  • कोरोना के लॉकडाउन के बीच छोटी बचत योजनाओं पर मिलने वाले ब्याज में बड़ी कटौती हो गई है। आर्थिक सुस्ती के दौर में सरकार ने अप्रैल-जून तिमाही में सुकन्या समृद्धि योजना, पब्लिक प्रोविडेंट फंड खातों, सीनियर सिटिजंस सेविंग्स स्कीम, नेशनल सेविंग्स सर्टिफिकेट समेत कई अहम योजनाओं की ब्याज दर में कमी की है। आरबीआई की ओर से रेपो रेट में 75 बेसिस पॉइंट्स की कटौती के बाद यह फैसला लिया गया है। सुकन्या समृद्धि योजना की ब्याज दर अगली तिमाही के लिए 7.6 फीसदी ही तय की गई है, जो अब तक 8.4 पर्सेंट थी। इसके अलावा सबसे ज्यादा ब्याज वाली योजना मानी जाने वाली सीनियर सिटिजंस सेविंग्स स्कीम पर इंटरेस्ट रेट को 8.6 पर्सेंट से घटाकर 7.4 पर्सेंट कर दिया है।
  • इसके अलावा नेशनल सेविंग्स सर्टिफिकेट स्कीम की ब्याज दर को 7.9 फीसदी से घटाकर 6.8 पर्सेंट कर दिया गया है। इसकी तरह टैक्स सेविंग स्कीम के तौर पर लोकप्रिय रहे पीपीएफ खातों पर मिलने वाले ब्याज में भी बड़ी कटौती की गई है। अब 7.9 पर्सेंट सालाना की बजाय 7.1 फीसदी इंटरेस्ट ही मिलेगा। किसान विकास पत्र स्कीम के ब्याज को 7.6 पर्सेंट से घटाकर 6.9 फीसदी किया गया है। बीते साल जुलाई-सितंबर तिमाही में बचत योजनाओं के ब्याज में 10 बेसिस पॉइंट्स की कटौती के बाद यह पहला मौका है, जब इस तरह से कमी की गई है।

पृष्टभूमि

  • एक तरफ बचत योजनाओं पर ब्याज कम हुआ है तो आरबीआई ने उससे पहले ही अपने रेपो रेट में 210 बेसिस पॉइंट्स यानी 2.1 फीसदी की बड़ी कमी की है। बीते 20 सालों में यह सबसे निचला स्तर है। रेपो रेट में इस बड़ी कटौती के चलते होम लोन समेत तमाम कर्ज सस्ते होने की संभावना है। बता दें कि अकसर बैंकों की ओर से दिए जाने वाले कर्ज की दर में कमी होने पर सेविंग स्कीम्स के ब्याज में भी कटौती की जाती रही है। इससे पहले 2009 में आर्थिक संकट के दौरान भी आरबीआई ने रेपो रेट में बड़ी कटौती की थी और यह लेवल 4.75 पर्सेंट तक जा पहुंचा था। इस बार उस संकट से भी ज्यादा निचले लेवल पर रेपो रेट है।

क्या है सुकन्या समृद्धि योजना

  • सरकार द्वारा सुकन्या समृद्धि योजना 2015 में शुरू की गयी छोटी बचत स्कीम है.'बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ' अभियान के तहत इसे शुरू किया गया था. यह स्कीम बेटियों की शिक्षा और उनके शादी-ब्याह के लिए रकम जुटाने में मदद करती है.  बेटी की उम्र 10 साल होने से पहले कभी भी सुकन्या समृद्धि खाता खुलवाया जा सकता है.
  • वैसे तो इस योजना में बच्ची के 21 वर्ष का हो जाने के बाद ही पूरा पैसा मिलता है, लेकिन बच्ची के 18 वर्ष की आयु पूरी कर लेने के बाद उच्च शिक्षा या विवाह के लिए पिछले वित्त वर्ष की समाप्ति पर खाते में मौजूद बैलेंस का 50% तक निकाला जा सकता है।इस योजना में जमा की जा रही रकम आयकर अधिनियम की धारा 80C के तहत कर मुक्त होती है।

सितंबर तक सरकार लेगी 4.88 लाख करोड़ कर्ज, उधारी लक्ष्‍य का है 62.56 फीसद

  • कोविड-19 महामारी से लड़ने के लिए सरकार वित्तीय रूप से कोई कसर नहीं छोड़ना चाहती है। यही वजह है कि शुरू हो रहे वित्त वर्ष (2020-21) के लिए तय उधारी लक्ष्य का 62 फीसद से अधिक पहली छमाही में ही पूरा कर लिया जाएगा। आर्थिक मामलों के सचिव अतनु चक्रवर्ती ने बताया कि नए वित्त वर्ष की पहली छमाही (अप्रैल-सितंबर, 2020) में सरकार 4.88 लाख करोड़ रुपये उधार लेगी जो पूरे वित्त वर्ष के लिए निर्धारित उधारी लक्ष्य का 62.56 फीसद है।
  • बीते वित्त वर्ष (2019-20) की पहली छमाही में तय उधारी लक्ष्य के 62.25 फीसद का कर्ज लिया गया था। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने गत एक फरवरी को बजट पेश करने के दौरान वित्त वर्ष 2020-21 के दौरान 7.8 लाख करोड़ रुपये उधार लेने का लक्ष्य रखा था। वित्त वर्ष 2019-20 में उधार लेने का अनुमानित लक्ष्य 7.1 लाख करोड़ रुपये था।सरकार ने कहा है कि वह सिर्फ अप्रैल माह में ही 79,000 करोड़ रुपये मूल्य के प्रतिभूति (सिक्युरिटीज) जारी करेगी। इनकी परिपक्वता अवधि दो से लेकर 40 वर्षो तक के लिए होगी।
  • अतनु चक्रवर्ती ने बताया कि कोविड-19 की वजह से सरकार के खर्च में बढ़ोतरी लाजिमी है और स्वास्थ्य क्षेत्र को हर प्रकार की मदद देने के साथ उद्योग को राहत पैकेज देने के लिए सरकार इस प्रकार के कदम उठाने जा रही है। चक्रवर्ती ने यह भी बताया कि सरकार ने डेट एक्सचेंज ट्रेडेड फंड (ईटीएफ) के माध्यम से भी उधार लेने का प्रस्ताव रखा है। वित्त वर्ष 2020-21 के लिए राजकोषीय घाटे का लक्ष्य जीडीपी का 3.5 फीसद रखा गया है जबकि वित्त वर्ष 209-20 के लिए यह ल क्ष्य 3.8 फीसद का है।

बीपीसीएल

  • सरकार ने देश की दूसरी सबसे बड़ी तेल रिफाइनरी कंपनी भारत पेट्रोलियम कॉरपोरेशन लि. (बीपीसीएल) में अपनी पूरी 52.98 प्रतिशत हिस्सेदारी की नीलामी में बोली लगाने की समयसीमा 13 जून तक बढ़ा दी है।
  • बीपीसीएल की नेटवर्थ फिलहाल 55 हजार करोड़ रुपये है। अपनी पूरी 53.3 फीसदी बेचकर के सरकार का लक्ष्य 65 हजार करोड़ रुपये की उगाही करने का है।

सरकार का राजकोषीय घाटा बजट अनुमान के 135.2 फीसद पर पहुंचा: CGA

  • सरकार के राजकोषीय घाटे ने फरवरी के आखिर में ही पूरे साल के लक्ष्य को छू लिया है। यह फरवरी महीने के आखिर में बजट में बताए गए अनुमान के 135.2 फीसद तक चला गया। मंगलवार को जारी आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, राजस्व संग्रह की धीमी रफ्तार के कारण ऐसा हुआ है।  कंट्रोलर जनरल ऑफ अकाउंट्स (CGA) द्वारा बताए गए आंकड़ों के अनुसार, राजकोषीय घाटा या राजस्व और व्यय का अंतर 10,36,485 करोड़ था।
  • फरवरी महीने के दौरान, अर्थव्यवस्था पर कोरोना वायरस के प्रकोप का प्रभाव इतना नहीं था। सीजीए द्वारा पूरे वित्त वर्ष के आंकड़े जारी होने पर अर्थव्यवस्था पर कोरोना वायरस के प्रकोप का प्रभाव काफी अधिक देखा जा सकेगा।
  • सरकार का लक्ष्य वित्त वर्ष 2019-20 में राजकोषीय घाटे को जीडीपी के 3.8 फीसद या 7.1 लाख करोड़ रुपये तक सीमित करना था। इस समय में घाटा साल 2018-19 बजट अनुमान का 134.2 फीसद हो गया है। सीजीए के अनुसार, सरकार को 2019-20 के संशोधित आकलन  का 74.5 फीसद या 13.77 लाख करोड़ रुपये राजस्व प्राप्त हुआ है। पिछले वर्ष की समान अवधि में संसोधित आकलन का 73.2 फीसद संग्रह हुआ था।
  • आंकड़ों के अनुसार, कुल व्यय संसोधित आकलन का 91.4 फीसद या 24.65 लाख करोड़ रुपये था। साल 2018-19 की समान अवधि में व्यय संशोधित आकलन का 89.1 फीसद था। पिछले महीने में केंद्रीय बजट प्रस्तुत करते समय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने साल 2019-20 के लिए राजकोषीय घाटे के लक्ष्य को राजस्व की कमी के कारण जीडीपी के 3.3 फीसद से बढ़ाकर 3.8 फीसद कर दिया था।

क्या होता है राजकोषीय घाटा?

  • सरकार की कुल आय और व्यय में अंतर को राजकोषीय घाटा कहा जाता है। राजकोषीय घाटा बताता है कि सरकार को अपने खर्चों को पूरा करने के लिए कितने पैसों की जरूरत है. ज्‍यादा राजकोषीय घाटे का मतलब यह हुआ कि सरकार को ज्‍यादा उधारी की जरूरत पड़ेगी.

:: विज्ञान और प्रौद्योगिकी ::

कोरोना की जांच के लिए पेपर किट विकसित

  • भारतीय वैज्ञानिकों के लिए कोरोना अब अबूझ पहेली नहीं रहा। हर दिन उनकी ओर से कोरोना को हराने को लेकर कुछ न कुछ नई खबरें आ रही हैं। इस बीच वैज्ञानिक एवं औद्योगिक अनुसंधान परिषद (CSIR) से भी एक अच्छी खबर आयी है। इसके दिल्ली स्थित इंस्टीट्यूट आफ जेनामिक्स एंड इटेग्रेटिव बायोलाजी (IGIB) ने कोरोना की जांच के लिए एक ऐसी पेपर किट विकसित की है, जिसकी लागत पांच सौ रुपए से भी कम है। साथ ही एक घंटे से भी कम समय में इससे जांच हो जाती है। यह पेपर किट मौजूदा समय में प्रेगनेंसी की जांच में इस्तेमाल होने वाली यूज एंड थ्रो जैसी ही है।
  • आईजीआईबी के डायरेक्टर डाक्टर अनुराग अग्रवाल के मुताबिक उनकी टीम ने अपनी लैब में यह किट तैयार कर ली है। इसे टेस्टिंग और औद्योगिक उत्पादन की मंजूरी के लिए आईसीएमआर के पास भेजा गया है। उन्होंने बताया कि इस किट के जरिए आम पैथालाजी में भी कोरोना की जांच हो सकेगी।

मौजूदा समय में रीयल टाइम पीसीआर मशीनों की होती है जरूरत

  • मौजूदा समय में कोरोना की जांच के लिए महंगी रीयल टाइम पीसीआर मशीनों की जरूरत होती है, जिसकी कीमत 10 लाख से ज्यादा ही होती है। जो कि सिर्फ बड़ी लैबों में ही मौजूद है। ऐसे अभी कोरोना की जो भी जांच हो रही है, वह सिर्फ इन्हीं मंहगी मशीनों पर होती है। जिसमें लंबा समय भी लगता है। सरकार ने इसीलिए चुने हुए प्राइवेट लैब को ही इसकी अनुमति दी है।

एक घंटे के भीतर ली जा सकती है रिपोर्ट

  • आईजीआईबी के मुताबिक लैब में तैयार की गई कोरोना की इस पेपर किट के जरिए एक घंटे के भीतर ही रिपोर्ट ली जा सकेगी। उन्होंने बताया कि इसके तहत जांच के दौरान सेंपल में सिर्फ कुछ केमिकल का इस्तेमाल होता है। जिसे पैथालाजी में मौजूद रहने वाली ब्लाक में करीब तीस से 40 मिनट तक रखा गया जाता है। इसके बाद पेपर किट को उसके संपर्क में लाया जाता है। यदि कोरोना पॉजीटिव है, तो पेपर किट पर कुछ ही मिनट में लाइनें उभर आती है। जाहिर है कि इस किट के जरिए छोटे पैथलैब भी जाच कर सकेंगे।
  • डॉ. अग्रवाल के मुताबिक इसकी लागत पांच सौ से भी कम है। साथ ही इसे आसानी से नष्ट भी किया जा सकता है। उन्होंने बताया कि इस पूरे योजना में सबसे अहम ऐसी किट विकसित करना था, जिसे आसानी ने नष्ट भी किया जा सके। ऐसे में यह पेपर किट है। यह पानी में कुछ देर रखने पर खुद ही नष्ट हो जाएगी।

अमेरिका ने विकसित किया सस्ता वेंटीलेटर

  • अमेरिका में कोरोना के बढ़ते मामलों के बीच टेक्सास विश्वविद्यालय ने एक स्वचालित, हाथ में पकड़े जा सकने वाला वेंटीलेटर विकसित किया है। पारंपरिक वेंटीलेटर के मुकाबले इसकी कीमत भी बहुत कम है। कोरोना से दुनिया भर में अब तक 37,550 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है।
  • टेक्सास स्थित राइस यूनिवर्सिटी और कनाडा की वैश्विक हेल्थ डिजाइन फर्म मीट्रिक टेक्नालीजीस ने मिलकर स्वचालित बैग वाल्व मास्क वेंटीलेशन यूनिट तैयार की है। इसकी लागत 300 डालर से भी कम है। यह मरीजों के इलाज में सक्षम है। दुनिया भर में इसे आनलाइन बिक्री के जरिये उपलब्ध कराने की दिशा में दोनों संस्थाएं योजना तैयार कर रही हैं।

कैसे कार्य करता है?

  • इस वेंटीलेटर को विकसित करने वाली टीम के सदस्य प्रोफेसर वेटरग्रीन ने बताया कि यह बिजली से चलने वाला स्वचालित उपकरण है। यह उन लोगों के लिए नहीं जिनकी हालत बहुत गंभीर है बल्कि उनके लिए है जिनको सांस लेने में दिक्कत है।
  • टीम ने ऐसा उपकरण बनाया है जिसे प्रोग्राम करके बैग वाल्व मास्क को बार बार पंप किया जा सकता है। इन मास्क को मरीजों को राहत देने के लिए इमरजेंसी मेडिकल स्टाफ हाथ में भी लेकर चल सकता है। लेकिन हाथ से इसे कुछ मिनट तक ही दबाया जा सकता है।
  • उन्होंने बताया कि जिन मरीजों की हालत में सुधार हो रहा हो उन्हें पारंपरिक वेंटीलेटर से हटाकर इस उपकरण पर शिफ्ट किया जा सकता है। प्रोफेसर वेटरग्रीन ने कहा कि हमारे उपकरण से रक्षा विभाग भी प्रभावित है। वह भविष्य में इसे नौसेना में इस्तेमाल करने की इजाजत दे सकता है।उपकरण विकसित करने वाली टीम जिसे हम लोगों ने 'अपोलो बीवीएम टीम' का नाम दिया है के लिए यह एक बड़ी उपलब्धि है। इससे जुड़े छात्रों ने अपना प्रोजेक्ट तैयार करने के लिए दिन रात एक कर दिया।

जॉनसन एंड जॉनसन सिंतबर में करेगी कोरोना वायरस की वैक्सीन का मानव पर परीक्षण

  • दुनियाभर में फैले कोरोना वायरस का अभी कोई इलाज नहीं मिल पाया। इस बीमारी से निजात पाने के लिए वैक्सीन बनाने पर लगातार काम हो रहा है। इसमें दवा कंपनी जॉनसन एंड जॉनसन कंपनी भी जुटी हुई है। कंपनी इस साल सितंबर महीने में इस कोरोना वायरस वैक्सीन को मानव पर परीक्षण करेगा और आपातकाल में इस वैक्सीन को अगले साल तक इस्तेमाल किया जा सकता है।
  • बता दें कि वैश्विक तौर पर इस वक्त कोरोना वायरस से 30,000 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है जबकि 3 लाख से ज्यादा लोग संक्रमित हैं। चीन के वुहान से फैले इस वायरस की चपेट में कम से कम 150 से ज्यादा देश आ चुके हैं। चीन के बाद इटली और स्पेन इस वायरस की सबसे ज्यादा मामले सामने आए हैं। इस महामारी से लड़ने के लिए अभी तक कोई भी वैक्सीन तैयार नहीं हुई है। इंसान से इंसान से फैलने वाले इस वायरस से भारत भी अछूता नहीं रहा है। अबतक भारत में 1000 से ज्यादा मामले सामने आ चुके हैं। वहीं 25 से ज्यादा लोग इस वायरस से अपनी जांग गंवा चुके हैं।
  • इस बीमारी के लिए अन्य देश भी वैक्सीन बनाने में जुटे हुए हैं। इससे पहले अमेरिका ने भी इसके लिए वैक्सीन तैयार करने की तैयारी शुरू की है। इसके लिए अमेरिका को 5 से 6 महीने लग सकते हैं। बता दें कि अमेरिका भी इस वक्त कोरोना वायरस की चपेट में है।

आर्सेलरमित्तल बनाएगी 3डी प्रिंटेड वेंटिलेटर

  • दुनिया की सबसे बड़ी इस्पात निर्माता आर्सेलरमित्तल भी कोविड-19 के खिलाफ चिकित्सकीय लड़ाई में शामिल हो गई है। कंपनी चिकित्सा उपकरणों की बढ़ती जरूरत को पूरा करने के लिए मैदान में आ गई है। मंगलवार को इस्पात निर्माता ने कहा कि वैश्विक मेकर्स मूवमेंट के लिए स्पेन की राष्ट्रीय प्रतिनिधि द्वारा संपर्क किए जाने के बाद उसने अपनी 3डी प्रिंटिंग दक्षता को इस्तेमाल के लिए पेश किया है।
  • कंपनी ने एक बयान में कहा है, 'इस्तेमाल के लिए चिकित्सकीय प्रमाणन पाने के प्रयास में इस नए वेंटिलेटर का परीक्षण आने वाले दिनों में अस्पताल में किया जाएगा। प्रिंटिंग वेंटिलेटरों के लिए जरूरी आपूर्ति शृंखला स्थापित करने का काम भी चल रहा है जिससे कि इन्हें ज्यादा जरूरतमंद लोगों द्वारा इस्तेमाल किया जा सके और स्वास्थ्य कर्मियों पर बोझ घट सके।'

मरीजों को ऑक्सीजन देने वाली सी-पैप मशीन

  • यूनिवर्सिटी कॉलेज ऑफ लंदन के वैज्ञानिकों ने चार दिन के भीतर आधुनिक सी-पैप मशीन तैयार की है। मशीन सांस की तकलीफ से जूझ रहे मरीज के मास्क में ऑक्सीजन और हवा भरेगी जिससे रोगी का फेफड़ा फूलेगा और सांस की तकलीफ से राहत मिलेगी।
  • रोगी को बेहोशी में लाने के लिए कोई दवा नहीं दी जाएगी जैसा आईसीयू या वेंटिलेटर यूनिट में रोगी के साथ होता है। ब्रिटेन की मेडिसिन एंड हेल्थकेयर प्रोडक्ट रेगुलेटरी एजेंसी ने इसे मंजूरी दे दी है। जल्द ही इसका प्रयोग सप्ताह के अंत तक यूनिवर्सिटी के अस्पताल में कोरोना पीड़ितों के लिए होगा।
  • यूनिवर्सिटी कॉलेज लंदन में क्रिटिकल केयर विभाग के प्रो. टीम बेकर बताते हैं कि वेंटिलेटर की मात्रा सीमित है। इस मशीन के जरिए पर्याप्त मात्रा में हवा आधुनिक सी-पैप मशीन और मास्क के जरिए रोगी के फेफड़े तक पहुंचाई जा सकेगी।

7 दिन में बना सकते हैं हजार मशीन

  • वैज्ञानिकों का दावा है कि क्लीनिकल ट्रायल पूरा होने के बाद सात दिन के भीतर 1000 मशीनें बनाई जा सकती है जिससे पूरी दुनिया को इससे राहत मिलेगी। जहां भी वेंटिलेटर या आईसीयू का संकट है वहां पर इस मशीन के प्रयोग से कई लोगों की जान बचाई जा सकती है।

हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन और एजीथ्रोमाइसीन

  • स्वास्थ्य मंत्रालय ने कोरोना के संक्रमण से गंभीर रूप से प्रभावित मरीजों के इलाज के लिये मलेरिया रोधी दवा हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन के साथ एजीथ्रोमाइसीन देने की सिफारिश की है। मंत्रालय द्वारा मंगलवार को जारी संशोधित दिशा-निर्देश में कहा कि यह दवा फिलहाल 12 साल से कम उम्र के बच्चों और गर्भवती महिलाओं तथा शिशुओं को दुग्धपान कराने वाली महिलाओं को नहीं नहीं दी जा रही हैं।
  • मंत्रालय ने दिशा-निर्देश में इन दवाओं को देने की सिफारिश करते हुए कहा कि मरीजों के इलाज के बारे में मौजूदा आंकड़ों के मुताबिक कोई अन्य वायरल रोधी (एंटीवायरल) दवा कारगर साबित नहीं हो रही है। ऐसे में सघन चिकित्सा केन्द्र (आईसीयू) में भर्ती गंभीर हालत वाले रोगियों को ये दोनों दवायें एक साथ दी जा सकेंगी।
  • दिशानिर्देश में कोरोना के मरीजों को संक्रमण की तीन श्रेणियो, गंभीर, मध्यम और मामूली संक्रमण में बांटते हुये इलाज का तरीका तय किया गया है। इसमें गंभीर हालत में संक्रमण की पहचान होने वाले मरीजों को आईसीयू प्रोटोकॉल के दायरे में लेकर इलाज करने को कहा गया है। दिशानिर्देश में स्पष्ट रूप से मरीजों का इलाज कर रहे चिकित्सकों को मरीज के श्वसन तंत्र की निरंतर निगरानी करने को भी कहा गया है। साथ ही मरीज और उसके परिजनों को समय समय पर वस्तुस्थिति की वास्तविक जानकारी से अवगत कराते रहने को कहा गया है।

बीसीजी टीकाकरण वाले देशों में कोरोना संक्रमण का कम खतरा

  • कोरोना वायरस के बढ़ते संक्रमण के बीच अमेरिका में हुई स्टडी में चौंकाने वाली बात सामने आई है। टीबी (यक्ष्मा/तपेदिक) जैसी गंभीर बीमारी से बचाव के लिए नवजात शिशु को दिया जाने वाला बीसीजी का टीका कोरोना वायरस संक्रमण में सुरक्षा के तौर पर सामने आया है।
  • इस स्टडी के मुताबिक कोरोना संक्रमण और उससे हुई मौत के मामले उन देशों में अधिक हैं, जहां बीसीजी टीकाकरण की पॉलिसी या तो नहीं है या फिर बंद हो गई है। वहीं, जिन देशों में बीसीजी टीकाकरण अभियान चल रहा है, वहां कोरोना संक्रमण और मौत के मामले अपेक्षाकृत कम हैं।
  • न्यूयॉर्क इंस्टिट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी के डिपार्टमेंट ऑफ बायोमेडिकल साइंसेस की ओर से बीसीजी टीकाकरण वाली आबादी पर कोरोना संक्रमण के असर का विश्लेषण करने के लिए यह स्टडी की गई। इसमें पाया गया कि बिना बीसीजी टीकाकरण वाले देशों जैसे इटली, अमेरिका, लेबनान, नीदरलैंड और बेल्जियम की तुलना में भारत, जापान, ब्राजील जैसे बीसीजी टीकाकरण वाले देशों में कोरोना संक्रमण और उससे हुई मौत के मामले कम हैं। हालांकि चीन में भी बीसीजी टीकाकरण पॉलिसी है, लेकिन चूंकि कोरोना वायरस की शुरुआत वहीं से हुई, इसलिए इस स्टडी में चीन को अपवाद माना गया।
  • दरअसल, भारत समेत कई देशों में जन्म के बाद नवजात शिशु को बीसीजी (Bacillus Calmette-Guérin) का टीका लगाया जाता है। यह टीबी यानी तपेदिक और सांस से जुड़ी अन्य बीमारियों से बचाव के लिए दिया जाता है। विश्व में इस टीके की शुरुआत साल 1920 में हुई। ब्राजील में तभी से, जापान में 1947 से जबकि भारत में 1948-49 से इसकी शुरुआत हुई। वहीं ईरान में इसकी शुरुआत 1984 में हुई। इस अनुसार से देख जाए तो टीके की शुरुआत वाले वर्ष से पहले जन्म लेने वाली आबादी, जो अभी जीवित है, इस टीके से वंचित है।

कैसे हुई स्टडी, क्या कहते हैं आंकड़े

  • इस स्टडी में अलग-अलग देशों की स्वास्थ्य सुविधाएं, टीकाकरण कार्यक्रमों और कोरोना संक्रमण के आंकड़ों का विश्लेषण किया गया। वैज्ञानिकों ने पाया कि बीसीजी टीकाकरण से टीबी के अलावा वायरल संक्रमण और सांस संबंधी सेप्सिस जैसी बीमारियों से लड़ने में भी मदद मिलती है। ऐसे में वैज्ञानिक बीसीजी टीकाकरण वाले देशों में कोरोना संक्रमण का खतरा कम होने की उम्मीद जता रहे हैं।
  • वैज्ञानिकों ने यह भी पाया कि जहां बीसीजी की शुरुआत पहले हुई, वहां कोरोना से हुई मौत के आंकड़े बहुत कम हैं। वहीं, इटली, अमेरिका, स्पेन जैसे देशों में बीसीजी टीकाकरण अभियान नहीं चलता, इसलिए यहां कोराना संक्रमण फैलने का खतरा ज्यादा है।
  • वैज्ञानिकों का मानना है कि चीन, इटली या अमेरिका की तुलना में भारत में कोरोना वायरस का संक्रमण ज्यादा व्यापक नहीं होगा। सभी देशों में पाए गए इस वायरस के स्ट्रेन यानी जेनेटिक वैरिएंट में अंतर पाया गया है। भारत में वैज्ञानिकों ने कोरोना के स्ट्रेन को अलग करने में कई देशों से पहले कामयाबी पा ली थी। ऐसा करने वाला यह दुनिया का पांचवां देश है।
  • भारतीय वैज्ञानिकों ने कोरोना के 12 नमूनों की जांच कर जिनोम की जो क्रम तैयार किया है, उसकी प्राथमिक रिपोर्ट के मुताबिक देश में मिला वायरस सिंगल स्पाइक है, जबकि इटली चीन और अमेरिका में मिले वायरस ट्रिपल स्पाइक हैं। इस आधार पर वैज्ञानिकों का कहना है कि भारत में फैला वायरस इंसानी कोशिकाओं को ट्रिपल स्पाइक वाले वायरस की अपेक्षा कम मजबूती से पकड़ पाता है।
  • हालांकि वैज्ञानिकों यह बात भी जोड़ते हैं कि यह एक प्राथमिक स्टडी है और इस आधार पर बिना ट्रायल के इसके परिणाम पर बहुत निश्चिंत नहीं हुआ जा सकता। फिर भी इस स्टडी ने कोरोना के खिलाफ इस लड़ाई में एक उम्मीद दिखाई है।

भारत के लिए कितनी सुकून भरी बात?

  • देश में आजादी के बाद साल 1948 में बीसीजी टीकाकरण पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर शुरु हुआ।  साल 1949 से इसे देशभर के स्कूलों में दिया जाने लगा। इसके तीन साल बाद 1951 में बड़े पैमाने पर टीकाकरण होने लगा। वहीं, जब 1962 में राष्ट्रीय स्तर पर टीबी उन्मूलन कार्यक्रम की शुरुआत हुई तो देशभर में बच्चों को जन्म के समय ही यह टीका लगाया जाने लगा। विशेषज्ञ बताते हैं कि भारत में 97 फीसदी बच्चों को बीसीजी का टीका लगा हुआ है। हालांकि टीकाकरण अभियान की शुरुआत से पहले जन्म लेने वाली आबादी, जो अभी जिंदा हैं, उन्हें यह टीका नहीं लगा हुआ है।
  • पांच साल से कम उम्र के बच्चों के लिए होने वाले टीकाकरण अभियानों में से बीसीजी सबसे  यूनिवर्सल है। यदि जन्म के समय शिशु को बीसीजी का टीका किसी कारणवश नहीं लगाया जा सके तो एक वर्ष की उम्र में उसे यह टीका दिया जाता है। देश के सभी राज्यों की बात करें तो बीसीजी का टीकाकरण 95 फीसदी से ज्यादा है। जिन राज्यों में 85 फीसदी से कम है, वहां अतिरिक्त कार्यक्रम चलाए जाते हैं।
  • बीसीजी वैक्सीन एक तरह से इम्यूनोमॉड्यूलेटर है, जो सांस संबंधी गंभीर संक्रमण की स्थिति में प्रतिरक्षा प्रक्रिया को बढ़ाता है। यही नहीं, यह कुष्ठ रोग और सेप्टीसीमिया जैसी बीमारियों में भी प्रयोग के लिए अनुमोदित किया गया है। पीजीआई चंडीगढ़ में हाल ही में सार्स-कोव-19 जैसे वायरसों के कारण होने वाले सांस की गंभीर समस्याओं में प्रतिरक्षा के रूप में इसके इस्तेमाल को लेकर प्रयोग हुआ है, जिसके परिणाम फिलहाल प्रकाशन के लिए भेजे गए हैं।

क्या है बीसीजी का टीका?

  • बीसीजी (बैसिल्लस काल्मेट्ट ग्यूरिन) का टीका टीबी रोग से बचाव करता है। बीसीजी जन्म के समय 1 खुराक (अगर पहले नहीं दिया गया है तो एक साल तक इसे दे सकते हैं)

:: विविध ::

विश्व एथलेटिक्स चैम्पियनशिप का आयोजन 2022 में

  • कोविड-19 महामारी के कारण तोक्यो ओलंपिक के एक साल तक टलने से 2021 में प्रस्तावित विश्व एथलेटिक्स चैम्पियनशिप का आयोजन 2021 की जगह अब 2022 में होगा। ‘विश्व एथलेटिक्स’ ने तोक्यो ओलंपिक की नयी तारीख घोषित होने के बाद यह फैसला करते हुए कहा कि अमेरिका के यूजीन में छह से 15 अगस्त 2021 तक प्रस्तावित इस चैम्पियनशिप का आयोजन 2022 में होगा।
  • विश्व एथलेटक्स ने कहा कि वह इसके लिए राष्ट्रमंडल खेल महासंघ के अलावा यूरोपीय एथलेटिक्स चैम्पियनशिप के आयोजकों से भी चर्चा कर रहे हैं। बर्मिंघम राष्ट्रमंडल खेलों का आयोजन 27 जुलाई से सात अगस्त तक होगा जबकि यूरोपीय एथलेटिक्स चैम्पियनशिप का आयोजन म्यूनिख में 11 से 21 अगस्त तक होना है।

फीफा अंडर-17 महिला विश्व

  • अखिल भारतीय फुटबाल महासंघ (एआईएफएफ) ने कोविड-19 महामारी के कारण दुनिया भर के खेल आयोजनों के रद्द या स्थगित होने के बीच उम्मीद जताई है कि फीफा अंडर-17 महिला विश्व कप का आयोजन इस साल नवंबर में अपने तय समय पर होगा। टूर्नामेंट के शुरू होने में अभी सात महीने का समय है और ऐसे में आयोजन समिति को उम्मीद है कि आयुवर्ग के इस टूर्नामेंट को आयोजित करने के लिए इतना समय काफी है। विश्व कप का आयोजन दो से 21 नवंबर तक नवी मुंबई, कोलकाता, अहमदाबाद, भुवनेश्वर और गुवाहाटी में होगा।

:: प्रिलिम्स बूस्टर ::

  • हाल ही में चर्चा में रही सुकन्या समृद्धि योजना को किस वर्ष एवं किस अभियान के तहत प्रारंभ किया गया था? (2015, 'बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ')

  • हाल ही में किस देश के द्वारा मरीजों को ऑक्सीजन देने के लिए आधुनिक सी-पैप मशीन तैयार की गई है? (यूनिवर्सिटी कॉलेज ऑफ लंदन, ब्रिटेन)

  • भारत सरकार के संशोधित दिशानिर्देशों में कोरोना के संक्रमण से गंभीर रूप से प्रभावित मरीजों के इलाज के लिये कौन सी दवा की संस्तुति की गई है? (हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन और एजीथ्रोमाइसीन)

  • हाल ही में चर्चा में रहे  टीका बीसीजी का पूरा नाम क्या है एवं यह किस रोग के विरुद्ध प्रतिरोधकता प्रदान करता है? (बीसीजी-बैसिल्लस काल्मेट्ट ग्यूरिन, टीबी रोग)

  • 'द कोविड -19 शॉक टू डेवलपिंग कंट्रीज: टूवर्ड्स' रिपोर्ट से चर्चा में रहे अंकटाड की स्थापना कब की गई थी एवं इसके द्वारा कौन सी मुख्य रिपोर्ट प्रकाशित की जाती है? (1964, व्यापार एवं विकास रिपोर्ट, अल्पविकसित देशों की रिपोर्ट तथा विश्व निवेश रिपोर्ट)

  • हाल ही में चर्चा में रहे राजकोषीय घाटा क्या होता है? (सरकार की कुल आय और व्यय में अंतर)

  • हाल ही में स्थगित हुए विश्व एथलेटिक्स चैंपियनशिप 2021 का आयोजन कब और कहाँ किया जाएगा? (2022, अमेरिका)

  • फीफा अंडर 17 महिला विश्वकप 2020 का आयोजन कहाँ  किया जाएगा? (भारत- नवी मुंबई, कोलकाता, अहमदाबाद, भुवनेश्वर और गुवाहाटी)

  • हाल ही में चर्चा में रहे अल्ट्रा मेगा पावर प्रोजेक्ट मुंद्रा किस राज्य में स्थित है एवं किस कंपनी द्वारा संचालित है? (गुजरात, टाटा पावर)

  • हाल ही में भारत सरकार के द्वारा विदेशी पर्यटकों की सहायता के लिए कौन-से पोर्टल की शुरुआत की गई है? (‘स्ट्रैंडेड इन इंडिया’)

  • किस संस्था के द्वारा ‘पेपर किट’ कोरोना जांच की तकनीक विकसित की गई है? (इंस्टीट्यूट आफ जेनामिक्स एंड इटेग्रेटिव बायोलाजी -IGIB, दिल्ली)

  • औषधीय गुणों वाले पौधे ‘कालमेघ’ पर शोध से चर्चा में रहे केंद्रीय औषधि अनुसंधान संस्थान कहाँ स्थित है? (लखनऊ)

 

 

 

स्रोत साभार: Dainik Jagran (Rashtriya Sanskaran), Dainik Bhaskar (Rashtriya Sanskaran), Rashtriya Sahara (Rashtriya Sanskaran) Hindustan Dainik (Delhi), Nai Duniya, Hindustan Times, The Hindu, BBC Portal, The Economic Times (Hindi & English), PTI, PIB

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