(Important Day महत्वपूर्ण दिवस) 09 दिसंबर (9th December) : अंतरराष्ट्रीय भ्रष्टाचार निरोध दिवस (International Anti Corruption Day)


(Important Day महत्वपूर्ण दिवस) 09 दिसंबर (9th December) : अंतरराष्ट्रीय भ्रष्टाचार निरोध दिवस (International Anti Corruption Day)


  • 9 दिसंबर को प्रति वर्ष पूरे विश्व में ‘अंतरराष्ट्रीय भ्रष्टाचार निरोध दिवस (International Anti Corruption Day)' मनाया जाता है। इस दिवस को मनाए जाने का प्रमुख उद्देश्य भ्रष्टाचार के खिलाफ जागरूकता फैलाते हुए सरकारी, निजी एवं गैर सरकारी संस्थाओं समेत नागरिक समाज को भ्रष्टाचार उन्मूलन हेतु संयुक्त रुप से कार्यवाही करने हेतु प्रेरित करना है।

  • उल्लेखनीय है कि संयुक्त राष्ट्र महासभा ने वर्ष 2003 में यूनाइटेड नेशंस कन्वेंशन अगेंस्ट करप्शन (United Nations Convention against Corruption) प्रस्ताव पारित किया एवं इसी के साथ अंतरराष्ट्रीय भ्रष्टाचार निरोध दिवस को मनाए जाने की घोषणा की थी।

  • कोविड-19 महामारी के कारण ध्वस्त हुई वैश्विक अर्थव्यवस्था एवं आपूर्ति प्रणाली के पुनरुद्धार के मद्देनजर भ्रष्टाचार पर तुरंत कार्रवाई करने की आवश्यकता को देखते हुए इस वर्ष अंतरराष्ट्रीय भ्रष्टाचार निरोध दिवस की थीम ‘रिकवरी विद इंटीग्रिटी Recover with Integrity’ रखी गई है।

भ्रष्टाचार क्या है?

  • संयुक्त राष्ट्र के मुताबिक भ्रष्टाचार एक गंभीर अपराध है जो देश के सामाजिक और आर्थिक विकास को कमजोर करता है। आज के समय में भ्रष्टाचार से कोई देश, क्षेत्र या समुदाय बचा नहीं है। यह दुनिया के सभी हिस्सों में फैल गया है चाहे वो राजनीतिक, सामाजिक या आर्थिक हो। इसके साथ ही यह लोकतांत्रिक संस्थाओं को भी कमजोर करता है, सरकारी अस्थिरता में योगदान देता है और आर्थिक विकास को भी धीमा करता है।

विश्व में भ्रष्टाचार से संबंधित कुछ महत्वपूर्ण तथ्य

  • विश्व भर में हर साल लगभग 2.6 ट्रिलियन डॉलर की रक़म या तो रिश्वतख़ोरी या फिर भ्रष्ट तरीकों की भेंट चढ़ जाती है।
  • हर साल 1 ट्रिलियन डॉलर का भुगतान रिश्वत के रूप में किया।
  • हर साल भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ने वाली खरबों डॉलर की ये रक़म वैश्विक घरेलू उत्पाद (जीडीपी) के लगभग 5 फ़ीसदी के बराबर है।
  • वैश्विक रिश्वत जोखिम सूचकांक 2020 के अनुसार वैश्विक रिश्वत जोखिम के मामले में उत्तर कोरिया, तुर्कमेनिस्तान, दक्षिण सूडान, वेनेजुएला और इरीट्रिया शीर्ष पर हैं, जबकि डेनमार्क, नॉर्वे, फिनलैंड, स्वीडन और न्यूजीलैंड में यह सबसे कम है। इस सूचकांक में भारत 77 वें स्थान पर है।
  • 180 देशों के लिए जारी हुई 2019 के भ्रष्टाचार बोध सूचकांक के अनुसार जहां डेनमार्क में सबसे कम भ्रष्टाचार था तो वहीं सोमालिया में सर्वाधिक भ्रष्टाचार था।

भारत में भ्रष्टाचार से संबंधित कुछ महत्वपूर्ण तथ्य

  • हाल ही में जारी हुई ट्रांसपेरेंसी इंटरनेशनल के द्वारा एशिया के लिए जारी हुई ‘ग्लोबल करप्शन बैरोमीटर’ के भ्रष्टाचार के संदर्भ में एशिया में सबसे ज्यादा रिश्वत की दर भारत में है और सार्वजनिक सेवाओं का उपयोग करने के लिए व्यक्तिगत संपर्कों (personal connections) का उपयोग करने वाले लोगों की संख्या भी यहीं सबसे अधिक है।
  • इस रिपोर्ट के मुताबिक, भारत में रिश्वत देने वालों में से लगभग 50 प्रतिशत से ऐसा करने को कहा गया था, वहीं सार्वजनिक सेवाओं का उपयोग करने के लिए व्यक्तिगत संपर्कों का उपयोग करने वालों में से 32 प्रतिशत का कहना था कि रिश्वत नहीं देने पर उन्हें सेवा प्राप्त नहीं होती है।
  • लगभग 39 फीसद भारतीय मानते हैं कि उन्होंने अपना काम करवाने के लिए रिश्वत का सहारा लिया।
  • ज्यादातर लोगों का मानना है कि पुलिस और स्थानीय अफसर रिश्वत लेने के मामले में सबसे आगे हैं।
  • वैश्विक रिश्वत जोखिम सूचकांक 2020 के अनुसार भारत 77 वें स्थान पर था
  • 2019 के भ्रष्टाचार बोध सूचकांक के अनुसार भारत 180 देशों की सूची में 80 वां स्थान प्राप्त किया।

भ्रष्टाचार के कारण

  • निरक्षरता, गरीबी और जागरूकता के अभाव के कारण लोगों का अपने अधिकार के प्रति सजग ना होना
  • कम वेतनमान और पारिश्रमिक भ्रष्टाचार की गतिविधियों को बढ़ावा देती है
  • कठोर कानूनों एवं त्वरित न्याय व्यवस्था का अभाव
  • सार्वजनिक खरीद, व्यापार समझौते इत्यादि में पारदर्शिता का अभाव
  • राजनीतिक, प्रशासनिक एवं न्यायिक व्यवस्था में उत्तरदायित्व की कमी
  • कुशल नियामक के अभाव में अनुचित व्यापार गतिविधियों को प्रोत्साहन
  • विकासमुखी कार्यक्रमों के प्रभावी प्रबंधन और कुशल कार्यान्वयन का अभाव
  • देश में आर्थिक विकास और आर्थिक स्थिरता का अभाव
  • प्रभावी राजनीतिक नेतृत्व एवं स्थाई राजनीतिक नेतृत्व का अभाव
  • जनसंख्या के आकार में संसाधनों का अल्प होना
  • किसी देश में कारपोरेट और राजनीतिक गठजोड़ का होना
  • भ्रष्टाचार को समाज के द्वारा मौन स्वीकृति
  • विवेकाधीन शक्तियों का दुरुपयोग करना

भ्रष्टाचार के दुष्प्रभाव

  • देश की अर्थव्यवस्था के समानांतर अर्थव्यवस्था का सृजन होना
  • आय का असमान वितरण
  • भ्रष्टाचार के कारण किसी भी देश का उपभोग पैटर्न प्रभावित हो जाता है
  • भ्रष्टाचार के कारण निजी निवेश ( घरेलू और विदेशी) प्रभावित होते हैं
  • भ्रष्टाचार संसाधनों और अवसरों की उपलब्धता के रास्ते में रुकावट पैदा करता है
  • भ्रष्टाचार से सार्वजनिक संस्थानों में भरोसा कम होता है और सामाजिक सेवाओं की अहमियत कम होती है
  • भ्रष्टाचार धन व संसाधनों को ग़रीबी दूर करने के प्रयासों से हटा देता है
  • भ्रष्टाचार की वजह से समाज में टकराव और संघर्ष पनपते और बढ़ते हैं
  • भ्रष्टाचार सरकार की बजट व्यवस्था आय और व्यय दोनों को प्रभावित करता है। उदाहरण के लिए- सरकार को कर चोरी से कम आय, सरकार द्वारा किए गए खर्च का अधिकांश हिस्सा तक वांछित लोगों की पहुंच नहीं होना, सरकार द्वारा किए जा रहे कार्यों की लागत का बढ़ जाना
  • सरकार के द्वारा किए जा रहे आर्थिक सुधारों का प्रभावित होना
  • देश के संसाधनों (वन्य जीव संसाधन, खनिज संसाधन) इत्यादि का अविवेकपूर्ण प्रबंधन जिससे ना केवल संसाधनों का अपव्यय होता है बल्कि इससे प्रदूषण( जल, थल एवं वायु) इत्यादि की भी समस्या आती है।

भ्रष्टाचार को रोकने हेतु महत्वपूर्ण वैश्विक संस्थाएं एवं पहल

  • यूनाइटेड नेशंस कन्वेंशन अगेंस्ट करप्शन (United Nations Convention against Corruption): संयुक्त राष्ट्र महासभा ने वर्ष 2003 में यूनाइटेड नेशंस कन्वेंशन अगेंस्ट करप्शन (United Nations Convention against Corruption) के प्रस्ताव को प्रस्ताव पारित किया गया।
  • संयुक्त राष्ट्र मादक पदार्थ एवं अपराध कार्यालय (UNODC): UNODC की स्थापना 1997 में संयुक्त राष्ट्र मादक पदार्थ नियंत्रण कार्यक्रम और अंतर्राष्ट्रीय अपराध रोकथाम केन्द्र को मिलाकर संयुक्त राष्ट्र सुधारों के तहत की गई थी। यह भ्रष्टाचार के विरुद्ध संयुक्त राष्ट्र समझौता के मानकों के कार्यान्वयन हेतु संयुक्त राष्ट्र की अधिकृत एजेंसी है।
  • संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम-UNDP: संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम UNODC के साथ मिलकर विश्व में भ्रष्टाचार के उन्मूलन हेतु मिलकर कार्य करता है।
  • ट्रांसपेरेंसी इंटरनेशनल (Transparency International): ट्रांसपेरेंसी इंटरनेशनल एक स्वतंत्र अन्तरराष्ट्रीय गैर-सरकारी संगठन है, जो वैश्विक स्तर पर भ्रष्टाचार से जुड़े सूचकांक निर्धारित करता है। यह संस्था कई रिपोर्ट प्रकाशित करती है जिसमें विश्व के विभिन्न देशों में भ्रष्टाचार की स्थिति का मूल्यांकन होता है।इस संगठन के द्वारा भ्रष्टाचार धारणा सूचकांक (Corruption Perceptions Index-CPI), वैश्विक भ्रष्टाचार रिपोर्ट (Global Corruption Report) और रिश्वत भुगतानकर्ता सूचकांक (Bribe Payers Index) प्रकाशित किया जाता है।
  • वैश्विक भ्रष्टाचार निरोधक कानून प्रवर्तन नेटवर्क (Global Anti-Corruption Law Enforcement Network): इस साल आयोजित हुए जी-20 सम्मेलन में एक महत्वपूर्ण पहल के रूप में ‘वैश्विक भ्रष्टाचार निरोधक कानून प्रवर्तन नेटवर्क’ की मंजूरी प्रदान की गयी है।

भारत में भ्रष्टाचार को रोकने हेतु महत्वपूर्ण संस्थाएं एवं पहल

  • अखिल भारतीय सेवा (आचरण) नियम 1954 एवं केंद्रीय नागरिक सेवा नियम 1956
  • 1964 में केंद्रीय सतर्कता आयोग की स्थापना
  • बेनामी लेन-देन (निषेध) अधिनियम, 1988
  • सरकारी सेवाओं का डिजिटलीकरण
  • सूचना का अधिकार,2005
  • व्हिसल ब्लोअर्स प्रोटेक्शन एक्ट, 2014
  • सरकारी सहायता का प्रत्यक्ष नकद हस्तांतरण (DBT)
  • लोकपाल
  • विमुद्रीकरण और डिजिटल मनी को प्रोत्साहन
  • लेखा परीक्षण एवं लेखांकन प्रक्रियाओं को मजबूत करना
  • भ्रष्टाचार निरोधक अधिनियम,1988, भ्रष्टाचार रोकथाम (संशोधन) विधेयक, 2018
  • गवर्नमेंट-ई-मार्केट (जीईएम) जैसे उपायों ने सार्वजनिक खरीद में जवाबदेही
  • सरकार के द्वारा ई गवर्नेंस को बढ़ावा दिया जाना
  • काले धन से लड़ने के लिए एक विशेष जाँच टीम का गठन
  • बेनामी लेन-देन (निषेध) अधिनियम, 1988 को मजबूत बनाने के लिए संशोधन

भ्रष्टाचार को प्रभावी रूप से रोकने हेतु महत्वपूर्ण सुझाव

  • सत्ता में सामान्य जनता की भागीदारी सुनिश्चित किया जाए जिससे सरकारी कामकाज में ज्यादा से पारदर्शिता आ सके।
  • भ्रष्टाचार और इसे रोकने के तरीकों के बारे में जनता को ज्ञान प्रदान करने के लिए विभिन्न संगोष्ठियों, अभियानों, नाटकों इत्यादि का आयोजन किया जाना चाहिए।
  • पत्रकारों की सुरक्षा एवं बिना किसी भय के उनकी कार्य करने की क्षमता को सुनिश्चित करने के साथ-साथ स्वतंत्र मीडिया का समर्थन किया जाना चहिए।
  • उन लोगों और संस्थाओं को समर्थन एवं प्रोत्साहित करना चाहिए जिन्होंने भ्रष्टाचार के खिलाफ अपनी आवाज उठाई हो। साथ ही, हमें विभिन्न विभागों के कामकाज में पारदर्शिता की मांग करनी चाहिए।
  • सोशल मीडिया संदेश फैलाने, लोगों को प्रोत्साहित करने और जहाँ भी भ्रष्टाचार होता है, देश के हर कोने से जानकारी प्रदान करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। अतः इसको प्रोत्साहित करना चाहिए।
  • लोकपाल के दायरे में सरकारी कर्मचारियों के साथ-साथ एनजीओ, सिविल सोसाइटी, मीडिया और कारपोरेट जगत को भी लाया जाना चाहिए।
  • एक ऐसा कानून बनाया जाना चाहिए जो अनिवार्य करे कि सांसद, विधायक, ग्राम प्रधान, मेयर, पार्षद, सरकारी कर्मचारी, वकील, शिक्षक, डाक्टर, पत्रकार और कॉर्पोरेट कंपनियों में काम करने वाले अपने साल भर की कमाई की जानकारी सरकार को दें।
  • शीर्ष राजनीतिक नेतृत्व भ्रष्टाचार को भ्रष्टाचार से मुक्त करने हेतु दलों में आंतरिक लोकतंत्र के साथ राजनीतिक दलों के खातों को सूचना के अधिकार के तहत कर दिए लाया जाना चाहिए।
  • देश के सुरक्षा-बजट समेत हर प्रकार के पारदर्शिता।
  • भ्रष्टाचार विरोधी संस्थाओं में समन्वय को बढ़ाना इसके साथ ही प्रचलित कानूनों का कुशल क्रियान्वयन
  • भ्रष्टाचार के मामले में त्वरित न्याय व्यवस्था हेतु फास्ट ट्रैक कोर्ट का गठन
  • सरकार के द्वारा ई गवर्नेंस को बढ़ावा दिया जाना जिससे सरकारी सेवाओं की ऑनलाइन डिलीवरी सुनिश्चित की जा सके।