(Important Day महत्वपूर्ण दिवस) 4 फरवरी (4th February) : विश्व कैंसर दिवस (World Cancer Day)


(Important Day महत्वपूर्ण दिवस) 4 फरवरी (4th February) : विश्व कैंसर दिवस (World Cancer Day)


  • अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर “विश्व कैंसर दिवस” प्रतिवर्ष 4 फरवरी को मनाया जाता है। इस दिवस को मनाने का उद्देश्य कैंसर बीमारी के सन्दर्भ में लोगों के मध्य शिक्षा और जागरूकता बढ़ाना तथा सरकार समेत सभी हितधारकों को कार्रवाई करने के लिए संवेदनशील बनाना है।
  • ‘विश्व कैंसर दिवस’ अंतर्राष्ट्रीय कैंसर नियंत्रण संघ (UICC) के द्वारा उठाया गया एक वैश्विक पहल है। अंतर्राष्ट्रीय कैंसर नियंत्रण संघ विश्व का सबसे बड़ा एवं पुराना संगठन है जो कैंसर से लड़ने के लिए क्षमता संवर्धन, सभी घटकों का संयोजन एवं कैंसर से पीड़ित समुदायों को एकजुट करता है। इसके साथ ही है यह विश्व स्वास्थ और विकास के एजेंडे में कैंसर के रोकथाम वाली गतिविधियों को बढ़ावा देता है। वर्ष 2019 से वर्ष 2021 के लिए विश्व कैंसर दिवस की थीम है ‘मैं हूँ और मैं करूँगा/ मैं हूँ और मैं करूंगी (I Am and I Will)।’

कैंसर क्या है ?

  • कैंसर शरीर की कोशिकाओं के समूह की असामान्य, अव्यवस्थित एवं अनियंत्रित वृद्धि है। यदि कोशिकाओं के समूह की असामान्य, अव्यवस्थित एवं अनियंत्रित की समय पर जांच व इलाज न हो तो यह शरीर के दूसरे हिस्सों में भी फैल सकता है।

कैंसर क्यों होता है?

  • कैंसर हमारी कोशिकाओं के भीतर डी. एन. ए. (आनुवांशिक सामग्री) की क्षति के कारण होता है। डी. एन. ए. की क्षति सभी सामान्य कोशिकाओं में होती रहती है। लेकिन इस क्षति का सुधार हमारे स्वयं के शरीर द्वारा हो जाता है। कभी कभी इस क्षति का सुधार नहीं हो पाता जिससे कोशिकाओं के गुणों में परिवर्तन हो जाते हैं। संचित डीएनए की क्षति अंत में कैंसर को जन्म दे सकती है।
  • कैंसर के लिए कोई एक विशेष कारक जिम्मेदार नहीं होता है। कुछ तत्व बाहरी एजेंट के रूप में कैंसर उत्पन्न करने के कारक (कैस्किनोजेन्स) के रूप में कार्य करते हैं। ये निम्नलिखित हैं:
  1. शारीरिक कैंसरकारी तत्व: पराबैंगनी और आयनीकरण विकिरण।
  2. रासायनिक कैंसरकारी तत्व: ऐस्बेस्टस, तंबाकू, एफ्लोटॉक्सिन (दूषित आहार से), और आर्सेनिक (दूषित पेयजल से)
  3. जैविक कैंसरकारी तत्व: वायरस, बैक्टीरिया या हेपेटाइटिस बी और सी वायरस और मानव पेपिलोमावायरस (एचपीवी) जैसे परजीवियों से होने वाला संक्रमण
  4. वृद्धावस्था, कैंसर के विकास के लिए एक अन्य महत्वपूर्ण कारक है।
  5. तंबाकू और अल्कोहल का सेवन, अस्वास्थ्यकर आहार एवं शारीरिक निष्क्रियता इत्यादि

कैंसर से जुड़े आकड़े एक नजर में

  • विश्व स्वस्थ्य संगठन (डबल्यूएचओ) के अनुसार सबसे ज़्यादा मौतों के मामले में कैंसर विश्व में दूसरे स्थान पर आता है।
  • पुरे विश्व में प्रतिवर्ष 9.6 मिलियन लोग कैंसर से मर जाते हैं जिसे बढ़कर वर्ष 2030 तक लगभग दोगुना हो जाने का अनुमान है।
  • सामान्य कैंसर से प्रभावित कम से कम एक तिहाई लोगो को ईलाज से ठीक किया जा सकता हैं लेकिन स्वास्थय शिक्षा समेत स्वास्थय अवसंरचना की कमी इसे चुनौतीपूर्ण बना देती है।
  • फेफड़ों के कैंसर से होने वाली मृत्यु में 71% तंबाकू के उपभोग से जुड़े है तथा यह सभी प्रकार के कैंसरों से होने वाली मृत्यु में से कम से कम 22 % के लिए उत्तरदायी है।
  • पुरुषों में सबसे सामान्य प्रकार के कैंसर- फेफड़े, प्रॉस्टैटट, कोलोरेक्टल (पेट के कैंसर या बड़ी आंत्र के कैंसर को कोलोरेक्टल कैंसर कहा जाता है), अमाशय और यकृत कैंसर हैं तथा महिलाओं में सबसे सामान्य प्रकार के कैंसर- स्तन, कोलोरेक्टल, फेफड़े, गर्भाशय ग्रीवा और थायरॉयड कैंसर हैं।
  • भारत में पांच सबसे अधिक होने वाले कैंसर- स्तन कैंसर, सर्वाइकल कैंसर या ग्रीवा का कैंसर, मुंह का कैंसर, फेफड़े और कोलोरेक्टल कैंसर हैं।
  • वर्ष 2018 में विश्व में तकरीबन 18 मिलियन कैंसर के मामले सामने आए थे, जिसमें 1.5 मिलियन अकेले भारत में थे।
  • 2018 में ही विश्व में कैंसर के चलते होने वाली 9.5 मिलियन मौतों की तुलना में भारत में 0.8 मिलियन मौतें हुई थीं।
  • भारत में वर्ष 2040 तक नए रोगियों की संख्या दोगुनी होने की आशंका जताई जा रही है।

कैंसर नियंत्रण हेतु सरकारी प्रयास

  • कैंसर नियंत्रण एवं उपचार, हृदयरोग और आघात के राष्ट्रीय कार्यक्रम (एनपीसीडीसीएस) का क्रियान्वयन राष्ट्रीय स्वस्थ्य मिशन (एनएचएम) के अंतर्गत ज़िला स्तर पर किया जा रहा है।
  • केंद्र सरकार कैंसर नियंत्रण और सस्ती सुलभ चिकित्सा सेवा उपलब्ध करवाने के राज्य सरकारों के प्रयास में सहायक की भूमिका निभाती है।
  • आयुष्मान भारत के अंतर्गत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (पीएम-जेएवाई) का क्रियान्वयन किया जा रहा है ताकि बीमारी की चपेट में आए गरीब परिवारों को बेहतर चिकित्सा सुविधा और आर्थिक सहायता उपलब्ध कराई जा सके। इसके अंतर्गत प्रत्येक लाभार्थी को प्रति वर्ष 5 लाख रुपये का स्वस्थ्य बीमा उपलब्ध कराया जा रहा है।
  • एनपीपीएऔषधि कीमत नियंत्रण आदेश (डीपीसीओ) 2013 के अंतर्गत सभी प्रकार की दवाओं की कीमतों को नियंत्रित करता है। यह आवश्यक औषधियों की राष्ट्रीय सूची में दर्ज दवाओं के लिए कीमतों का निर्धारण करती है। डीपीसीओ, 2013 की पहली अनुसूची में जिन दवाओं को शामिल किया गया था उनमें कैंसर के उपचार की दवाएं भी शामिल है।
  • भारत-ब्रिटेन कैंसर शोध पहल: विज्ञान और टेक्नोलॉजी मंत्रालय के जैव प्रौद्योगिकी विभाग तथा कैंसर रिसर्च यूके (सीआरयूके) का 5 वर्ष का सहयोगी द्विपक्षीय शोध कार्यक्रम है। यह कार्यक्रम कैंसर के किफायती दृष्टिकोण पर फोकस करेगा।
  • कैंसर अनुसंधान के वर्तमान परिदृश्य में व्यापक बदलाव लाने के लिए जैव प्रौद्योगिकी विभाग (डीबीटी) विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय तथा परमाणु ऊर्जा विभाग (डीएई), भारत सरकार ने कैंसर के क्षेत्र में साझा सहयोगपूर्ण अनुसंधान कार्यक्रमों का समर्थन करने के लिए एक समझौता ज्ञापन (एमओयू) किया गया है। उल्लेखनीय है कि परमाणु ऊर्जा विभाग (डीएई) प्रतिनिधित्व टाटा मेमोरियल सेंटर द्वारा किया गया जाता है जो भारतीय राष्ट्रीय कैंसर ग्रिड की ओर से समन्वय केंद्र के रूप में भी कार्य करता है।
  • परमाणु ऊर्जा विभाग (डीएई) द्वारा आईएईए के 63वें सम्मेलन के दौरान “एनसीजी विश्वम कैंसर केयर कनेक्ट” का विएना में शुभारंभ किया गया। इसके आधार पर नेशनल कैंसर ग्रिड (एनसीजी) की स्थापना हुई। इसमें भारत से 183 हितधारक हैं और इसे कैंसर अस्पतालों और विदेशों के अन्य संबंधित संस्थानों के लिए खोला गया है। एनसीजी का उद्देश्य कैंसर के इलाज में असमानता को दूर करना है।