(Important Day महत्वपूर्ण दिवस) 21 जून (21st June) : अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस (International Yoga Day)


(Important Day महत्वपूर्ण दिवस) 21 जून (21st June) : अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस (International Yoga Day)


21 जून को पूरे विश्व में अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस मनाया जाता है। इस वर्ष 2020 की योग दिवस की थीम ‘Yoga for Health - Yoga at Home’ है।

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा योग की महत्ता को विश्व में ख्याति दिलाने के उद्देश्य से इस दिवस को 2014 में UN में प्रस्तावित किया गया। जिसके उपरान्त दिसंबर 2014 में ‘वैश्विक स्वास्थ्य और विदेश नीति’ की कार्यसूची के तहत UN में सर्वसम्मति से 21 जून को अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के रूप में मनाए जाने की घोषणा की गयी।

इस दिवस के लिए 21 जून की तारीख का चयन इसलिए किया गया क्योंकि यह दिन उत्तरी गोलार्द्ध (ग्रीष्मकालीन संक्रांति) का सबसे लंबा दिन होता है जिसका दुनिया के कई हिस्सों में विशेष महत्त्व है, साथ ही आध्यात्मिक कार्यों के लिए भी यह दिन विशेष महत्त्व रखता है। दरअसल भारतीय मान्यता के अनुसार आदि योगी शिव ने इसी दिन मनुष्य जाति को योग विज्ञान की शिक्षा देनी शुरू की थी, जिसके बाद वे आदि गुरू बने। स्मरणीय हो कि विश्व का पहला अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस (आईवाईडी) 21 जून 2015 को मनाया गया था।

परिचय

योग शब्द की उत्पत्ति संस्कृत के ‘युज’ शब्द से हुई है, जिसका मतलब जोड़ना, एकीकरण करना या बांधना होता है। आध्यात्मिक स्तर पर जुड़ने का अर्थ है आत्मा का सार्वभौमिक चेतना से मिलन होना वहीं व्यावहारिक स्तर पर योग को शरीर, मन और भावनाओं को संतुलित करने तथा तालमेल बनाने का एक साधन माना जाता है।

ज्ञातव्य है कि भारत में तो योग की शुरूआत करीब दस हजार साल पहले ही हो गई थी। वैदिक संहिताओं के अनुसार सप्तऋषियों में से एक अगस्त्य मुनि ने भारत में योग को जनजीवन का हिस्सा बनाने की दिशा में काम किया। ईसा पूर्व दूसरी सदी में भारतीय महर्षि पतंजलि ने पतंजलि योग सूत्र पुस्तक लिखी। यह आधुनिक योग विज्ञान की अति महत्वपूर्ण रचना मानी जाती है।

आधुनिक समय की बात करें तो 1893 में अमेरिका के शिकागो में विश्व धर्म संसद को स्वामी विवेकानंद ने संबोधित किया था, जिसमें उन्होंने उस समय के आधुनिक युग में पश्चिमी दुनिया को योग से परिचय करवाया था। वहीं परमहंस योगानंद ने 1920 में बोस्टन में क्रिया योग सिखाया था। उसके बाद कई गुरुओं और योगियों ने दुनियाभर में योग का प्रसार किया और बड़े पैमाने पर लोगों ने इसको स्वीकार करना शुरू किया। यहां तक की योग को एक विषय के रूप में भी अध्ययन किया जाने लगा।

योग के विविध आयाम

अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस से यूरोप, अमेरिका, एशिया आदि महाद्वीपों में योग पद्धतियों के बारे में जागरूकता एवं लोकप्रियता बढ़ी। अगर देखा जाए तो इसकी वजह योग का व्यक्ति से जुड़कर उसे शारीरिक व मानसिक स्तर पर स्वस्थ रखना है। सामान्यतः योग किसी व्यक्ति के शरीर, मन, संवेदना, संवेग के स्तर पर काम करता है। ऐसे में मोटे तौर पर योग के चार वर्गीकरण हुए हैं-

  • कर्म योग: इसमें शरीर का उपयोग होता है।
  • ज्ञान योग: इसमें बुद्धि का उपयोग किया जाता है।
  • भक्ति योग: इसमें भावनाओं का उपयोग किया जाता है।
  • क्रिया योग: इस योग में ऊर्जा का उपयोग होता है।

ज्ञातव्य है कि आज योग की जिस भी पद्धति का उपयोग किया जाता है, वह ऐसी ही किसी एक या ज्यादा श्रेणियों के दायरे में आता है। हर व्यक्ति को इन चार पहलुओं का संयोजन माना जाता है।

व्यापक स्तर पर देखें तो प्रचलित योग साधनाएँ निम्न तरह की होती हैं-

  • यम: यह जीवन में अहिंसा, आत्मसंयम, सत्य इत्यादि पर जोर देती हैं।
  • नियम: इसके अंतर्गत पवित्रता, एकाग्रता और दृढ़ता जैसे नियमों के नित्य पालन पर बल दिया जाता है।
  • आसन: देह को अनुशासित करने के लिए शारीरिक अभ्यास पर बल देता है, जैसे योग मुद्राएँ, स्वास्थ्यवर्द्धन कृत्य आदि।
  • प्राणायाम: जीवन-शक्ति के संरक्षण के लिए श्वास का नियमन करने पर बल देता है।
  • प्रत्याहार: संवेदी अंगों के उपयोग को सीमित करता है अर्थात् बाहरी वस्तुओं से स्वयं को दूर रखने पर जोर देता है।
  • धारण: एक ही लक्ष्य पर ध्यान देने को महत्त्व देता है।
  • समाधि: ध्यान की वस्तु को चेतना के साथ विलय करता है। यह योग की चरमावस्था मानी जाती है।

योग दिवस मनाये जाने के कारण

यहाँ हम उन कारणों का जिक्र कर सकते हैं, जिसके तहत योग को अंतर्राष्ट्रीय दिवस के रूप में ख्याति दिलाई गई।

  • योग के द्वारा लोगों के बीच वैश्विक समन्वय स्थापित करना।
  • लोगों को योग के फायदों के बारे में जागरूक करना और उनको प्रकृति से जोड़ना।
  • विश्वभर में चुनौतीपूर्ण बीमारियों की दर को घटाना।
  • पूरे विश्व में संवृद्धि, विकास और शांति को फैलाना।
  • लोगों को शारीरिक और मानसिक बीमारियों के प्रति जागरूक बनाना और योग के माध्यम से इसका समाधान उपलब्ध कराना।

योग का महत्त्व

योग के महत्त्व को निम्न बिन्दुओं के अन्तर्गत समझा जा सकता है-

  • यह शारीरिक व्यवस्था को सृदढ़ करने के साथ व्यक्तित्व की कमियों को दूर कर हमें मानसिक रूप से सबल बनाता है।
  • असीम ऊर्जा और उत्साह का संचार कर योग हमारी व्यवहारकुशलता व कार्यक्षमता को बढ़ाता है।
  • अगर नियमित योग अभ्यास किया जाए तो सभी स्वास्थ्य चुनौतियाँ इसके माध्यम से पार लगायी जा सकती हैं।
  • योग से मानसिक शांति के साथ शांतिपूर्ण वातावरण का भी निर्माण किया जा सकता है, जो वर्तमान विश्व की माँग भी है। दरअसल आज मानसिक अशांति के चलते व्यक्तिगत व सामूहिक संघर्ष बढ़े हैं।
  • हमारी बदलती जीवन शैली के लिए भी योग करना अनिवार्य हो जाता है।
  • यह हमें जलवायु परिवर्तन से निपटने में भी मदद कर सकता है।
  • योग से शरीर में लचीलापन और मांसपेशियों में ताकत आती है, साथ ही संतुलित रक्तचाप भी बना रहता है।
  • इसकी महत्ता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि यूनेस्को द्वारा 2016 में योग को मानवता की अमूर्त सांस्कृतिक विरासत की सूची में अंकित किया जा चुका है।

भारत के लिए योग का महत्त्व

  • एसोचैम के अध्ययन के मुताबिक केवल भारत में ही करीब तीन लाख एवं विश्व में करीब 5 लाख योग प्रशिक्षकों की कमी है।
  • अध्ययन के अनुसार योग प्रशिक्षकों की सबसे अधिक माँग दक्षिण-पूर्व एशिया में है। रोजगार की इन संभावनाओ का लाभ भारत उठा सकता है।
  • सॉफ्ट पावर (परोक्ष रूप से सांस्कृतिक अथवा वैचारिक साधनों के माध्यम से किसी अन्य देश के व्यवहार अथवा हितों को प्रभावित करना) के लिहाज से भी भारत के लिए योग का महत्त्व बढ़ जाता है। ज्ञातव्य है कि भारत हमेशा से ही सॉफ्ट पावर पावर नीति का समर्थक रहा है एवं भारत योग गुरू की भूमिका निभा सकता है।
  • इसके अतिरिक्त भारत योग के जरिये विश्व में सांस्कृतिक बढ़त बना सकता है। उदाहरण के तौर पर जैसे चीन जहाँ 3000 से ज्यादा योग शिक्षक हैं, वैसे विश्व के अन्य देशों में इसका प्रचार-प्रसार कर अपनी संस्कृति की महानता से विश्व को परिचित करा कर उसे अपने पक्ष में कर सकता है।
  • भारत योग के माध्यम से मेडिकल टूरिज्म को प्रमोट करने के साथ ही रोग को भी कम कर सकता है। आज भारत में आए दिन नई-नई बीमारियाँ जन्म ले रही हैं उदाहरण कोविड19, ऐसे में अगर योग को बढ़ावा दिया जाएगा तो स्वास्थ्य के क्षेत्र में व्यापक सुधार किया जा सकेगा।
  • इस प्रकार योग अपनाने से लोगों की आय का एक बड़ा हिस्सा स्वास्थ्य पर खर्च होने से बचेगा जिसका प्रयोग अन्य क्षेत्रें में किया जा सकेगा। साथ ही सरकार स्वास्थ्य के क्षेत्र में जो धन व्यय करती है वह भी बचेगा। अतः योग भारत के लिए अवसरों की खुली खिड़की साबित हो सकती है।

सरकारी प्रयास

अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस को सरकार द्वारा राष्ट्रीय स्तर पर भी प्रोत्साहन दिया जा रहा है। सरकार द्वारा योग को प्रोत्साहित करने के लिए किए जा रहे प्रयासों को निम्न बिन्दुओं के अन्तर्गत समझा जा सकता है-

  • राष्ट्रीय स्वास्थ्य नीति 2017 में अच्छी सेहत को बढ़ावा देने के उद्देश्य से स्कूलों और कार्यस्थलों में योग अभ्यास को शामिल किया है।
  • स्कूली पाठ्यक्रम में बढ़ावा देने के मकसद से राष्ट्रीय शिक्षक शिक्षा परिषद (एनसीटीई) ने अपने 15 शिक्षक शिक्षा कार्यक्रमों के जरिये योग शिक्षा को जरूरी बना दिया है।
  • आयुष मंत्रालय ने योग प्रशिक्षकों के सर्टिफिकेशन और योग संस्थानों व कार्मिक प्रमाणीकरण ईकाई को मान्यता देने के लिए योग प्रमाणीकरण बोर्ड का गठन किया है।
  • UGC ने 6 केन्द्रीय विश्वविद्यालयों में योग विभाग का गठन किया है और एक विशेषज्ञ समिति बनाकर बीएससी, एमएससी और पीएचडी कार्यक्रमों के लिए मानक पाठ्यक्रम तैयार किया है।
  • विदेश मंत्रालय भारतीय दूतावासों में भी योग शिक्षकों की नियुक्ति करता है ताकि स्थानीय छात्र-छात्राओं और शिक्षकों को प्रशिक्षण मिल सके।
  • आईसीसीआर ने भारत-चीन योग कॉलेज नाम से एक योग कॉलेज स्थापित करने के लिए चीन के ‘युत्र मिन्जु’ विश्वविद्यालय के साथ समझौता किया है।
  • सरकार ने योग को प्रसारित करने के लिए राष्ट्रीय आयुष मिशन की शुरूआत की है।
  • सरकार ने मोरारजी देसाई राष्ट्रीय योग संस्थान, आयुष मंत्रालय केन्द्रीय सैन्य बल को योग प्रशिक्षण देने की भी शुरूआत की है। उल्लेखनीय है कि इन संस्थानों द्वारा अभी तक 1,385 योग शिक्षकों को प्रशिक्षित किया जा चुका है।
  • हाल ही में सरकार ने अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर प्रधानमंत्री पुरस्कार की शुरूआत की है जिसके तहत योग के क्षेत्र में दो राष्ट्रीय, दो अंतर्राष्ट्रीय समेत 4 पुरस्कारों का ऐलान किया गया है।
  • गौरतलब है कि योग को बच्चों तक पहुँचाने के लिए एनसीईआरटी ने कुछ समय पूर्व योग ओलंपियाड की पहल की है।

चुनौतियाँ

सरकार योग को अंतर्राष्ट्रीय व राष्ट्रीय स्तर पर ख्याति दिलाने के प्रयासों में निम्न चुनौतियाँ मौजूद हैं -

  • भारत में योग को लेकर व्यापक जन जागरूकता की कमी है।
  • विभिन्न धर्मों (विशेषतः मुस्लिम) में योग को लेकर विभिन्न मत हैं। नतीजतन कुछ धर्म इसको हिन्दू धर्म से जोड़कर देखते हैं। उदाहरण के तौर पर मुस्लमानों द्वारा ‘सूर्य नमस्कार’ व ‘श्लोक’ जप पर आपत्ति दर्ज करना।
  • योग को लेकर राज्य सरकारों की नीति का स्पष्ट न हो पाना।
  • देश में योग से संबंधित शिक्षकों तथा बुनियादी सुविधाओं का अभाव।

आगे की राह

योग एक विज्ञान है, सकारात्मक व्यक्तित्व एवं स्वास्थ्यकर जीवन जीने में है। ऐसे में इसकी महत्ता से आम जन व विश्व को परिचित कराना आवश्यक हो जाता है। इस संदर्भ में यहाँ कुछ सुझावों का जिक्र किया जा सकता है-

  • योग प्रशिक्षण शिविर या सभाएँ के जरिये शहरों तरह योग का लाभ आम जनता तक पहुचाने के लिए ऐसी गतिविधियाँ ग्रामीण स्तर पर हो।
  • योग का संबंध स्वास्थ्य के नजरिये से देखें न कि धर्म से एवं योग की महत्ता को समझते हुए विभिन्न धर्मों के लोगों को अपनाना चाहिए।
  • योग के क्षेत्र में भारत को विश्व गुरू बनने के लिए योग से संबंधित शिक्षकों तथा बुनियादी सुविधाओं का विकास करने की जरूरत है।
  • योग के महत्व से अपरचित लोगों को समाचार पत्र, रेडियो, दूरदर्शन, सोशल मीडिया, नुक्कड़ नाटक के साथ-साथ स्कूलों, कॉलेजों तथा कैंपों के माध्यम से जागरूक किया जाए।
  • पिछले लगभग दो दशकों में जिस तरह से स्वामी रामदेव, श्री श्री रविशंकर और अभिजात श्रीधर आयंगर समेत विभिन्न योग प्रचारकों ने योग को लोकप्रिय बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है, ठीक इसी तरह की भूमिका योग गुरूओं, शिष्यों और संस्थाओं को भी निभाने की जरूरत है। इसके लिए केन्द्र और राज्य स्तर पर सरकार द्वारा पूरा सहयोग दिया जाना चाहिए।

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