(Important Day महत्वपूर्ण दिवस) 20 मार्च (20th March) : विश्व गौरैया दिवस (World Sparrow Day)


(Important Day महत्वपूर्ण दिवस) 20 मार्च (20th March) : विश्व गौरैया दिवस (World Sparrow Day)


  • प्रति वर्ष 20 मार्च को संपूर्ण विश्व में ‘विश्व गौरैया दिवस’ (World Sparrow Day) मनाया जाता है। विश्व भर में गौरैया की 26 प्रजातियां पाई जाती हैं, जिनमें से 5 भारत में भी मिलती हैं। गौरैया की घटती आबादी को देखते हुए ‘नेचर फॉरेवर सोसायटी’ के अध्यक्ष मोहम्मद दिलावर के विशेष प्रयासों से पहली बार वर्ष 2010 में विश्व गौरैया दिवस मनाया गया था। महाराष्ट्र के नासिक जिले के मोहम्मद दिलावर वर्ष 2008 से गौरैया के संरक्षण को लेकर काम कर रहे हैं।
  • इस वर्ष विश्व गौरैया दिवस की थीम है 'आई लव स्पैरो'

गौरेया पक्षी के बारे में जानकारी

  • घरेलू गौरेया पास्सेर डोमेस्टिकस विश्व गौरैया परिवार पास्सेराइडे की सबसे पुरानी सदस्य है। कुछ लोग मानते हैं कि यह वीबर फिंच परिवार की सदस्य है।
  • इस पक्षी की कई अन्य प्रजातियां भी पायी जातीं हैं। इन्हें प्राय इसके आकार तथा गर्दन के रंग के आधार पर अलग किया जाता है। विश्व के पूर्वी भाग में पायी जाने वाली इस चिड़िया के गाल धवल तथा पश्चिमी भाग में भूरे होते हैं। इसके अलावा नर गौरैया की छाती का रंग अंतर के काम में लाया जाता है। दक्षिण एशिया की गौरैया पश्चिमी गोलार्ध्द की तुलना में छोटी होती है।
  • यूरोप में मिलने वाली गौरैया को पास्सेर डोमेस्टिकस. खूजिस्तान में मिलने वाली को पास्सेर पर्सीकस, अफगानिस्तान व तुर्कीस्तान में पास्सेर बैक्टीरियन, रूसी तुर्कीस्तान के पूर्वी भाग के सेमीयेरचेंस्क पर्वतों पर मिलने वाली गौरैया को पास्सेर सेमीरेट्सचीन्सिस कहा जाता है। फिलीस्तीन और सीरिया में मिलने वाली गौरैया की छाती का रंग हल्का होता है।
  • भारत, श्रीलंका और हिमालय के दक्षिण में पायी जानी वाली गौरैया को पास्सेर इंडिकस कहते हैं जबकि नेपाल से लेकर कश्मीर श्रीनगर में इस चिड़िया की पास्सेर परकीनी नामक प्रजाति पायी जाती है।
  • भारत के हिन्दी पट्टी इलाके में इसका लोकप्रिय नाम गौरैया है तथा केरल एवं तमिलनाडु में इसे कुरूवी के नाम से जाना जाता है। तेलुगू में इसे पिच्चूका, कन्नड में गुब्बाच्ची, गुजराती में चकली, मराठी में चिमनी, पंजाब में चिरी, जम्मू कश्मीर में चायर, पश्चिम बंगाल में चराई पाखी तथा उडीसा में घाराचटिया कहा जाता है। उर्दू भाषा में इसे चिड़िया और सिंधी भाषा में इसे झिरकी के नाम से पुकारा जाता है।

शारीरिक लक्षण

  • 14 से 16 सेंटीमीटर लंबी इस पक्षी के पंखों की लंबाई 19 से 25 सेंटीमीटर तक होती है जबकि इसका वजन 26 से 32 ग्राम तक का होता है। नर गौरैया का शीर्ष व गाल और अंदरूनी हिस्से भूरे जबकि गला. छाती का ऊपरी हिस्सा श्वेत होता है। जबकि मादा गौरैया के सिर पर काला रंग नहीं पाया जाता बच्चों का रंग गहरा भूरा होता है।
  • गौरैया की आवाज की अवधि कम समय की और धात्विक गुण धारण करती है जब उसके बच्चे घोंसले में होते हैं तो वह लंबी सी आवाज निकालती है। गौरैया एक बार में कम से कम तीन अंडे देती है। इसके अंडे का रंग धवल पृष्ठभूमि पर काले .भूरे और धूसर रंग का मिश्रण होता है। अंडो का आकार अलग अलग होता है जिन्हें मादा गौरैया सेती है। इसका गर्भधारण काल 10 से 12 दिन का होता है। इनमें गर्भधारण की क्षमता उम्र के साथ बढती है और ज्यादा उम्र की चिड़िया का गर्भकाल का मौसम जल्द शुरू होता है।

गौरेया पक्षी से संबंधित अन्य तथ्य

  • घरेलू गौरैया को एक समझदार चिड़िया माना जाता है और यह इसकी आवास संबंधी समझ से भी पता चलता है जैसे घोसलों की जगह. खाने और आश्रय स्थल के बारे में यह चिड़िया बदलाव की क्षमता रखती है।
  • विश्वभर में गाने वाली चिड़िया के नाम से मशहूर गौरैया एक सामाजिक पक्षी भी है तथा लगभग साल भर यह समूह में देखा जा सकता है। गौरैया का समूह 1.5 से दो मील तक की दूरी की उडान भरता है लेकिन भोजन की तलाश में यह आगे भी जा सकता है।
  • गौरैया मुख्य रूप से हरे बीज, खासतौर पर खाद्यान्न को अपना भोजन बनाती है। लेकिन अगर खाद्यान्न उपलब्ध नहीं है तो इसके भोजन में परिवर्तन आ जाता है इसकी वजह यही है कि इसके खाने के सामानों की संख्या बहुत विस्तृत है। यह चिड़िया कीड़ो मकोड़ों को भी खाने में सक्षम है खासतौर पर प्रजनन काल के दौरान यह चिड़िया ऐसा करती है।
  • घरेलू गौरैया को अपने आवास के निर्माण के लिए आम घर ज्यादा पसंद होते हैं। वे अपने घोंसलों को बनाने के लिए मनुष्य के किसी निर्माण को प्राथमिकता देती हैं। इसके अलावा ढंके खंभों अथवा घरेलू बगीचों या छत से लटकती किसी जगह पर यह पक्षी घोंसला बनाना पसंद करता है लेकिन घोंसला मनुष्य के आवास के निकट ही होता है।
  • नर गौरैया की यह जिम्मेदारी होती है कि वह मादा के प्रजननकाल के दौरान घोंसले की सुरक्षा करे और अगर कोई अन्य प्रजाति का पक्षी गौरैया समुदाय के घोंसले के आसपास घोंसला बनाता है तो उसे गौरैया का कोपभाजन बनना पडता है। गौरैया का घोंसला सूखी पत्तियों व पंखों और डंडियों की मदद से बना होता है। इसका एक सिरा खुला होता है।

क्यों चिंता की बात है?

  • गौरैया गिद्ध के बाद सबसे संकट ग्रस्त पक्षी है। यूरोप में गौरैया संरक्षण-चिंता के विषय वाली प्रजाति बन चुकी है और ब्रिटेन में यह रेड लिस्ट में शामिल हो चुकी है।
  • भारत में भी इस चिड़िया की जनसंख्या में हाल के वर्षो में भारी गिरावट दर्ज की गयी है। यूरोप महाद्वीप के कई जगहों पर पायी जाने वाली गौरैया की तादाद में यूनाइटेड किंगडम. फ्रांस. जर्मनी, चेक गणराज्य, बेल्जियम, इटली और फिनलैंड में खासी कमी पायी गयी है।
  • केंद्रीय पर्यावरण और वन मंत्रालय भी मानता है कि देशभर में गौरेया की संख्या में कमी आ रही है। देश में मौजूद पक्षियों की 1200 प्रजातियों में से 87 संकटग्रस्त की सूची में शामिल हैं। गौरैया के जीवन संकट को देखते हुए वर्ष 2012 में उसे दिल्ली के राज्य पक्षी का दर्जा भी दिया गया था।

गौरैया की जनसंख्या में गिरावट के कारण?

  • सीसे रहित पेट्रोल का प्रयोग होना जिसके जलने से मिथाइल नाइट्रेट जैसे पदार्थ निकलते हैं। ये पदार्थ छोटे कीड़े के लिए जानलेवा होते हैं और ये कीड़े ही गौरैया के भोजन का मुख्य अंग हैं।
  • भवनों के नए तरह के डिजायन जिससे गौरेया को घोंसला बनाने की जगह नहीं मिलती है। कंक्रीट के भवनों की वजह से घोंसला बनाने में मुश्किल आती हैं।
  • इसके अलावा घरेलू बगीचों की कमी व खेती में कीटनाशकों के बढते प्रयोग के कारण भी इनकी संख्या में कमी आयी है।
  • हाल के दिनों में इनकी जनसंख्या में गिरावट का मुख्य कारण मोबाइल फोन सेवा मुहैया कराने वाली टावरें हैं। इनसे निकलने वाला विकिरण गौरैया के लिए खतरनाक साबित हो रहा है। ये विकिरण कीड़ो-मकोड़ों और इस चिड़िया के अंडो के विकास के लिए हानिकारक साबित हो रहा है।
  • इंडियन क्रेन्स और वेटलैंडस वकिर्गं ग्रुप से जुडे के एस गोपी के अनुसार हालांकि मोबाइल टावरों के विकिरण बारे में कोई ठोस सुबूत या अध्ययन नहीं है जो इसकी पुष्टि कर सके पर एक बात निश्चित है कि इनकी जनसंख्या में गिरावट अवश्य आयी है। उनके अनुसार खेतों में प्रयोग होने वाले कीटनाशक आदि वजहों से गौरैया का जीवन परिसंकटमय हो गया है।
  • कोयम्बटूर के सालिम अली पक्षी विज्ञान केंद्र एवं प्राकृतिक इतिहास के डा. वी एस विजयन के अनुसार यह पक्षी विश्व के दो तिहाई हिस्सों में अभी भी पाया जाता है लेकिन इसकी तादाद में गिरावट आयी है। बदलती जीवन शैली और भवन निर्माण के तरीकों में आये परिवर्तन से इस पक्षी के आवास पर प्रभाव पड़ा है।

गौरैया के संरक्षण के लिए क्या करे?

हालाँकि 'State of India's Birds Report 2020' के अनुसार गौरैया और मोर जैसे पक्षियों के सन्दर्भ में सकारात्मक खबर है। फिर भी इस दिशा में काफी कुछ करने की आवश्यकता है-

  • अगर वह हमारे घर में घोंसला बनाए, तो उसे बनाने दें। हम नियमित रूप से अपने आंगन, खिड़कियों और घर की बाहरी दीवारों पर उनके लिए दाना-पानी रखें।
  • कृत्रिम घर बनाये (जूते के डिब्बों, प्लास्टिक की बड़ी बोतलों और मटकियों में छेद करके) एवं उन्हें उचित स्थानों पर लगाये
  • शोधकर्ताओ और जनता के बीच सहयोग को बढ़ावा दें
  • उपेक्षित प्रजातियो को बेहतर ढंग से समझने के प्रयास शुरू करें
  • गिरावट के कारणो की जांच करें
  • देखे हुये पक्षियो को अभिलिखित करें एवं सार्वजनिक मंच पर डेटा प्रविष्ट करें
  • कम बर्डवॉचिग वाले क्षेत्रों में जानकारी के अंतर को भरने में मदद करें
  • बर्डवॉचिग का संदेश फैलाएं, और क्षेत्रीय निगरानी प्रयासों की शुरुआत करें

स्रोत- PIB और अन्य समाचार पत्र