Daily Audio Bulletin for UPSC, IAS, Civil Services, UPPSC/UPPCS, State PCS & All Competitive Exams (20, July 2019)


Daily Audio Bulletin for UPSC, IAS, Civil Services, UPPSC/UPPCS, State PCS & All Competitive Exams (20, July 2019)


बुलेटिन्स

1. देश में अवैध आप्रवासियों के लिए नहीं है कोई जगह। केंद्र सरकार ने राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर को अंतिम रूप देने के लिए तय 31 जुलाई को बढ़ाने की मांग।
2. लोकसभा में पारित हुआ मानव अधिकार संरक्षण विधेयक 2019। केंद्रीय गृह राज्य मंत्री नित्यानंद ने NHRC को अधिक समावेशी और कुशल बनाए जाने की कही बात
3. अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी ने की प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना की तारीफ़। सामाजिक-आर्थिक लिहाज़ से बताया बड़ी उपलब्धि।
4. नई दिल्ली में शुरू हुआ पांचवा अंतर्राष्ट्रीय पुलिस एक्सपो। दो दिन चलने वाली इस प्रदर्शनी में क़रीब 25 देश हुए हैं शामिल।
5. और बुलेटिन के अंत में सुनिए कहानी चाँद पर जाने वाले पहले शख़्स की। 20 जुलाई 1969 यानी आज ही के दिन इंसान ने चाँद की धरती पर रखा था कदम

आइये अब ख़बरों को विस्तार से समझते हैं

1. पहली न्यूज़

केंद्र और असम सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में नेशनल रजिस्टर ऑफ सिटीजंस यानी NRC में ग़लत तरीके से नागरिकों को शामिल करने और हटाने का आरोप लगाते हुए इसे आख़िरी रूप देने के लिए इसकी अंतिम तारीख को बढ़ाने की मांग की है। केंद्र सरकार ने अवैध आप्रवासियों पर अपना रुख ज़ाहिर करते हुए कहा है कि देश में अवैध आप्रवासियों के लिए कोई जगह नहीं है। केंद्र सरकार के मुताबिक भारत को दुनिया की अवैध शरणार्थियों की राजधानी नहीं बनने दिया जा सकता है।

आपको बता दें कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर असम के लिए NRC का पहला मसौदा 31 दिसंबर 2017 और एक जनवरी 2018 की आधी रात को प्रकाशित किया गया था। उस समय कुल 3.29 करोड़ नागरिकों में से 1.9 करोड़ लोगों के नाम इसमें शामिल किए गए थे। बाद में NRC को अंतिम रूप देने और उसके प्रकाशन के लिए 31 जुलाई अंतिम तारीख तय की थी। अदालत ने अब प्रस्तावित सेंपल सर्वे के लिए दोनों सरकारों के आवेदनों पर सुनवाई के 23 जुलाई की तारीख़ तय की है।

नेशनल रजिस्टर ऑफ सिटीजंस को भारतीय नागरिकों जानकारी शामिल करने के लिहाज़ से बनाया गया है। भारत में केवल असम ही ऐसा राज्य हैं जहां NRC लागू है। इसे अपडेट करने के नियम और क़ानून का ज़िक्र नागरिकता अधिनियम, 1955 और नागरिकता नियम, 2003 में किया गया है।

मौजूदा वक़्त में NRC को अपडेट करने का काम असम सरकार और भारत सरकार दोनों मिलकर कर रहे हैं। ग़ौरतलब है कि साल 1947 में भारत-पाकिस्‍तान के बंटवारे के बाद कुछ लोग असम से पूर्वी पाकिस्तान चले गए, लेकिन उनकी जमीन असम में थी और लोगों का दोनों ओर से आना-जाना बंटवारे के बाद भी जारी रहा और इस आवागमन की आड़ में भारत में घुसपैठ भी लगातार जारी रहा। इसके लिए असम में पहला NRC 1951 में बना था।

इसके अलावा असम में वर्ष 1971 में बांग्लादेश बनने के बाद भारी संख्‍या में बांग्लादेशी शरणार्थी भारत आये और इससे राज्‍य की आबादी का स्‍वरूप बदलने लगा। 80 के दशक में अखिल असम छात्र संघ यानी आसू ने एक आंदोलन शुरू किया था। आसू के छह साल के संघर्ष के बाद वर्ष 1985 में असम समझौत पर हस्‍ताक्षर किए गए थे। इस समझौते के तहत 25 मार्च 1971 से पहले असम में रह रहे लोगों को भारतीय नागरिक माना गया।

2005 तक आते आते 1951 के NRC को अपडेट करने का निर्णय लिया गया। लेकिन ये काम आगे नहीं बढ़ सका। एक अनुमान के मुताबिक़ असम में मुसलमानों की संख्या लगभग 34 फीसदी से ज़्यादा है और इनमें से क़रीब 85 फीसदी मुसलमान बाहर से आकर बसे हैं। बाहरी मुसलमानों में ज़्यादातर लोग बंगलदेश से है जो आए दिन भारतीय सीमा में अवैध तरीके से प्रवेश करते रहते है। 2015 में एक बार फिर से ये मसला सर्वोच्च न्यायालय के संज्ञान में आया। जिसके बाद से सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में असम में NRC को अपडेट करने का काम जारी है।

2. दूसरी न्यूज़

लोकसभा में कल मानव अधिकार संरक्षण विधेयक 2019 पारित हो गया। NHRC ने कुछ वैश्विक मंचों पर उठाई गयी मुश्किलों को दूर करने के लिए अधिनियम में कुछ संशोधन प्रस्तावित किए हैं। इसके अलावा, कुछ राज्य सरकारों ने अधिनियम में संशोधन के लिए भी प्रस्ताव दिया है, क्योंकि उन्हें संबंधित राज्य आयोगों के अध्यक्ष के पद के लिए उपयुक्त उम्मीदवारों को खोजने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।

सरकार के मुताबिक़ पेरिस सिद्धांत के आधार पर इस प्रस्तावित संशोधन से आयोग और राज्य आयोगों को उनकी स्वायत्तता, स्वतंत्रता, बहुवाद और मानव अधिकारों के प्रभावी संरक्षण और उनका संवर्धन करने में बल मिलेगा।

मानव अधिकार संरक्षण विधेयक, 2019 के तहत आयोग के सदस्यों की संख्या को दो से बढ़ाकर तीन करने का प्रस्ताव जिसमें से एक महिला भी शामिल होगी। इसके अलावा विधेयक में ये भी प्रस्तावित है कि भारत के मुख्य न्यायमूर्ति के अलावा किसी ऐसे व्यक्ति, जो उच्चतम न्यायालय का न्यायाधीश रहा है, को भी आयोग के अध्यक्ष के रूप में नियुक्ति के लिए पात्र बनाया जा सके। साथ ही इस विधेयक में राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग के अध्यक्ष, राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग के अध्यक्ष और दिव्यांगजनों सम्बन्धी मुख्य आयुक्त को आयोग के सदस्यों के रूप में शामिल किए जाने की बात कही गई है। मानव अधिकार संरक्षण विधेयक 2019 में अध्यक्षों और सदस्यों के कार्यकाल को भी पांच साल से घटा कर तीन साल कर दिया गया है।

केंद्रीय गृह राज्य मंत्री श्री नित्यानंद ने कल लोक सभा में कहा कि NHRC को अधिक समावेशी और कुशल बनाए जाने की बात कही। इसके लिए उन्होंने सरकार के कदम का समर्थन करने के लिए संसद को एक साथ आने की अपील की है।

राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग के बारे में बताएं तो ये एक स्वतंत्र वैधानिक संस्था है। इसकी स्थापना मानव अधिकार संरक्षण अधिनियम, 1993 के प्रावधानों के तहत 12 अक्टूबर, 1993 को हुई थी। राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग संविधान के ज़रिए मिले सभी मानवाधिकारों की रक्षा करता है। इन अधिकारों में जीवन का अधिकार, स्वतंत्रता का अधिकार और समानता जैसे कई और भी महत्वपूर्ण अधिकार शामिल हैं।

ग़ौरतलब है कि राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग का गठन पेरिस सिद्धांतों के मुताबिक़ है जिन्हें अक्तूबर, 1991 में पेरिस में मानव अधिकार संरक्षण एवं संवर्द्धन के लिए राष्ट्रीय संस्थानों पर आयोजित पहली अंतरराष्ट्रीय कार्यशाला में अंगीकृत किया गया था और 20 दिसम्बर 1993 में संयुक्त राष्ट्र महासभा द्वारा संकल्प के रूप में समर्थित किया गया था।

NHRC के बारे में और बताएं तो ये एक बहु-सदस्यीय संस्था है जिसमें एक अध्यक्ष समेत कुल 7 सदस्य होते हैं। NHRC में अध्यक्ष और सदस्यों की नियुक्ति राष्ट्रपति के ज़रिए की जाती है जिसकी सिफारिश प्रधानमंत्री की अध्यक्षता वाली उच्चस्तरीय कमेटी के आधार पर की जाती है। इसके अलावा राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग में पाँच विशिष्ट विभाग होते हैं जिनमें - विधि विभाग, जाँच विभाग, नीति अनुसंधान और कार्यक्रम विभाग के अलावा प्रशिक्षण और प्रशासन विभाग भी शामिल होते हैं।

3. तीसरी न्यूज़

अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी IEA ने कल भारत की महत्वाकांक्षी उज्ज्वला योजना की सराहना की। अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी मुताबिक़ ये योजना पर्यावरण को स्वच्छ बनाने और महिलाओं का स्वास्थ्य बेहतर करने की दिशा में बेहतरीन क़दम है। अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी के कार्यकारी निदेशक फातिह बिरोल ने मुताबिक़ ‘‘साल 2020 तक देशभर में एलपीजी उपलब्ध कराना बड़ी उपलब्धि है। भारत में एलपीजी उपलब्ध कराना सिर्फ ऊर्जा का ही मुद्दा नहीं है बल्कि ये आर्थिक और सामाजिक मुद्दा भी है।’’ इससे पहले साल 2018 में विश्व स्वास्थ्य संगठन ने भी प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना की तारीफ़ की थी।

ग़ौरतलब है कि प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना की शुरुआत साल 1 मई 2016 में की गई थी। इस योजना का मक़सद ग़रीब परिवारों को नि:शुल्क एलपीजी कनेक्शन मुहैया कराकर महिलाओं और बच्चों का स्वास्थ्य बेहतर बनाना है। इस योजना के तहत अबतक कुल क़रीब साढ़े 7 करोड़ कनेक्शन दिये जा चुके हैं। सरकार ने प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना योजना के तहत 2020 तक आठ करोड़ कनेक्शन देने का लक्ष्य तय किया गया है। दरअसल ग्रामीण परिवारों में खाना पकाने का काम लकड़ी, उपले और दूसरे कृषि अपशिष्टों के ज़रिए किया जाता है। इनके चलते सांस संबंधी घातक बीमारियों का ख़तरा रहता है लेकिन एलपीजी से स्वच्छ पर्यावरण मुहैया कराने में मदद मिल रही है।

अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी यानी IEA के बारे में बताएं तो ये एक स्वायत्त संगठन है। इसका मुख्यालय फ्राँस के पेरिस में स्थित है। भारत साल 2017 में अंतर्राष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी का एक सहयोगी सदस्य बना था। मौजूदा वक़्त ,में अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी अपने 30 सदस्य देशों, 8 सहयोगी देशों और अन्य दूसरों देशों के लिये विश्वसनीय, सस्ती और स्वच्छ ऊर्जा निर्धारित करने का काम करती है। अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी की स्थापना 1973 के तेल संकट के बाद 1974 में की थी। अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी के प्रमुख क्षेत्रों में ऊर्जा सुरक्षा, आर्थिक विकास पर्यावरण जागरूकता और दुनिया भर से इंगेजमेंट को बढ़ावा देने जैसे क्षेत्र शामिल है।

4. चौथी न्यूज़

19 जुलाई को नई दिल्ली में दो दिवसीय अंतर्राष्ट्रीय पुलिस एक्सपो का आगाज़ हुआ। प्रगति मैदान में चल रहे इस एक्सपो में दुनियाभर के 25 से अधिक देशों की कम्पनियाँ शरीक हुई हैं जो युद्ध वआपदा राहत उपकरण बनाने का काम करती हैं। ख़बरों के मुताबिक़ लगभग 100 से अधिक राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय कंपनियां अंतर्राष्ट्रीय पुलिस एक्सपो में अपने बेहतरीन सुरक्षा उपकरणों का दर्शकों के लिए प्रदर्शन कर रही हैं। इस एक्सपो का मक़सद पुलिस आधुनिकरण और आंतरिक सुरक्षा के ढांचे के बढ़ावा देना है। साथ ही सुरक्षा व बचाव की आधुनिक तकनीकि के बारे में भी लोगों को जागरूक करना है।

पांचवे अंतर्राष्ट्रीय पुलिस एक्सपो के मौके पर भारत की ऑर्डिनेंस फैक्ट्री बोर्ड ने देश की सबसे हल्की बुलेट प्रूफ जैकेट लांच की है। भाभा कवच बुलेट प्रूफ जैकेट को हैदराबाद स्थित ऑर्डिनेंस फैक्ट्री ने बनाया है। ये बुलेट प्रूफ जैकेट AK - 47 , मिनी इंसास और SLR से चली हुई गोलियों को रोक सकती है। इसके अलावा ये 7.62 MM हार्ड स्टील कोर गोलियों का भी सामना कर सकती है। ख़बरों के मुताबिक़ जैकेट का वजन 9 किलो 200 ग्राम है

बताया जा रहा है कि ये जैकेट NIJ - III +सुरक्षा स्तर की है जो 360 डिग्री पर सुरक्षा प्रदान करेगी। आने वाले दिनों में ये बुलेट प्रूफ जैकेट भारतीय सेना के लिए बड़ी सफलता साबित हो सकती है।

5. पांचवी न्यूज़

दुनिया की चाँद पर जाने की ज़िद काफी पुरानी है। चाँद पर जाने के लिए समय- समय पर वैज्ञानिकों द्वारा प्रयास किए जाते रहे हैं। 20 जुलाई 1969 को पहली बार किसी इंसान ने चाँद पर कदम रखा था जिसके बाद चाँद पर जाने का सिलसिला शुरू हो गया।

आज से पचास साल पहले 20 जुलाई 1969 को जब पहली बार नील एल्डन आर्मस्ट्रांग ने चाँद की धरती पर कदम रखा तो ये पल हमेशा के लिए इतिहास के पन्नों में कैद हो गया। ये पहला ऐसा मौका था जब किसी इंसान को चाँद की धरती पर उतारा गया था। अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा के अपोलो मिशन के ज़रिये वैज्ञानिकों को चाँद पर भेज गया था। अपोलो मिशन 1960 के दशक में चन्द्रमा पर इन्सानों को भेजने के लिए तैयार की गई थी। जिसकी सफलता साल 1969 में अपोलो मिशन की 11वीं उड़ान के ज़रिये अमेरिकी वैज्ञानिकों को हांसिल हुई।

नील आर्मस्ट्रांग अपोलो मिशन के कमांडर थे। इस मिशन में नील आर्मस्ट्रांग के आलावा 2 और वैज्ञानिक बज़ एल्ड्रिन, और माइकल कॉलिंस भी शामिल थे।

इस मिशन के दौरान ही आर्मस्ट्रांग के बाद बज़ एल्ड्रिन ने चाँद की धरती पर कदम रखा। जिसके बाद से उन्हें चनद पर जाने वाले दुसरे वैज्ञानिक के नाम से जाना जाता है। जबकि इस मिशन में शामिल माइकल कॉलिंस चंद्रमा की कक्षा में चक्कर लगा रहे यान से ही जानकारियां जुटाते रहे। इस मिशन के दौरान करीब 166 घंटे तक ये वैज्ञानिक चाँद पर मौजूद रहे और वहां से मिट्टी और चट्टानों के टुकड़े जमा किए।

नील एल्डन आर्मस्ट्रांग के बारे में आपको बताएं तो वो अमेरिका के एक ASTRONAUT यानी खगोलयात्री होने के साथ एयरोस्पेस इंजीनियर, नौसेना अधिकारी, परीक्षण पायलट, और प्रोफ़ेसर भी थे। जिन्हे इस काम के लिए अमेरिका के 37वें राष्ट्रपति रिचर्ड निक्सन ने प्रेसिडेंसियल मेडल ऑफ फ्रीडम से सम्मानित किया गया था ।

ग़ौरतलब है कि चाँद पर इन्सानों को भेजने के लिए मानव रहित विमान और रोबो रोवेरों का इस्तेमाल किया जाता है। और अभी तक कुल 12 अंतरिक्षयात्री चाँद पर उतर चुके हैं।

आज के न्यूज़ बुलेटिन में इतना ही... कल फिर से हाज़िर होंगे एग्जाम के लिहाज़ से महत्वपूर्ण कुछ अहम ख़बरों के साथ...

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