Daily Audio Bulletin for UPSC, IAS, Civil Services, UPPSC/UPPCS, State PCS & All Competitive Exams (18, June 2019)


Daily Audio Bulletin for UPSC, IAS, Civil Services, UPPSC/UPPCS, State PCS & All Competitive Exams (18, June 2019)


बुलेटिन्स

1. लोकसभा के पहले सत्र में कई निर्वाचित सांसदों को दिलाई गई शपथ। वीरेंद्र कुमार बने प्रोटेम स्पीकर
2. बिहार में दिमाग़ी बुखार का कहर जारी। बिहार में लू भी बनी हुई है बड़ी मुसीबत
3. नवम्बर महीने में आयोजित किया जायेगा वर्ल्ड फूड इंडिया 2019 सम्मलेन। कई देश करेंगे इस सम्मलेन में शिरकत
4. दुनिया भर में कल मनाया गया विश्व मरुस्थलीकरण और सूखा रोकथाम दिवस। देश की लाखों हेक्टेयर बेकार पड़ी वन ज़मीन पर फिर से उगाया जायेगा जंगल।
5. और ईरान ने 10 दिन के भीतर परमाणु समझौते से बाहर होने की दी धमकी। फिर से अपने यूरेनियम भण्डार को बढ़ाएगा ईरान

आइये अब ख़बरों को विस्तार से समझते हैं

1. पहली न्यूज़

सत्रवीं लोकसभा के पहले सत्र में कल कई निर्वाचित सांसदों को शपथ दिलाई गई। निर्वाचित सांसदों को शपथ दिलाने की कार्रवाई आज भी दिन भर जारी रही। निर्वाचित सांसदों को शपथ दिलाने के लिए प्रोटेम स्पीकर के रूप में मध्य प्रदेश से सांसद वीरेंद्र कुमार को चुना गया है, जिन्होंने सत्रवीं लोकसभा के सभी नव- निर्वाचित सांसदों को शपथ दिलाई।

प्रोटेम स्पीकर सदन का का सबसे वरिष्ठ सदस्य होता है। प्रोटेम स्पीकर का चुनाव राष्ट्रपति द्वारा किया जाता है। दरअसल किसी भी लोकसभा के गठन के बाद जब तक सदन के लिए एक स्थायी अध्यक्ष व उपाध्यक्ष का चुनाव नहीं हो जाता तब तक सदन का पूरा काम काम प्रोटेम स्पीकर ही संभालता है। आम तौर पर प्रोटेम स्पीकर का काम नव - निर्वाचित सांसदों को शपथ दिलाना और सदन को नए अध्यक्ष का चुनाव कराने में सक्षम बनाना होता है। लोकसभा के अध्यक्ष के चुने जाने के बाद प्रोटेम स्पीकर का काम समाप्त हो जाता है। प्रोटेम स्पीकर शब्द के बारे में बताएं तो प्रोटेम शब्द लैटिन भाषा के ‘प्रो टेम्पोर’ शब्द का संक्षिप्त रूप है। जिसका मतलब ‘कुछ समय के लिये’ होता है।

2. दूसरी न्यूज़

बिहार में लू और दिमाग़ी बुखार पिछले कुछ दिनों से मुसीबत का सबब बना हुआ है। बिहार में लू और दिमाग़ी बुखार के चलते अब तक क़रीब 200 से अधिक लोगों की मौत हो गई है। पिछले दिनों बिहार में हालात का जायज़ा लेने गए केन्द्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्री डॉ. हर्षवर्धन ने कल नई दिल्ली में एक उच्चस्तरीय बैठक की। बैठक में AES यानी एक्यूट इंसेफेलाइटिस सिंड्रोम से पैदा हुई बीमारी की स्थिति की समीक्षा की गई और मौजूद हालात पर क़ाबू पाने के लिए जल्द से जल्द एक उच्चस्तरीय बहु-विषयी टीम को बिहार भेजने का निर्देश दिया गया है।

दरअसल AES मच्छरों द्वारा फैलने वाली एन्सेफलाइटिस की एक गंभीर स्थिति है। AES के फैलने में वायरसों की मुख्य भूमिका होती है। लेकिन बीते कुछ सालों में बैक्टीरिया, फंगस, पैरासाइट भी एक्यूट इंसेफेलाइटिस सिंड्रोम के प्रसार में शुमार रहे हैं। ये बीमारी जापानी इन्सेफेलाइटिस वायरस JEV के संपर्क में आने से भी होती है। इंसेफलाइटिस को जापानी बुखार के नाम से भी जाना जाता है। इंसेफलाइटिस बीमारी फ्लैविवायरस (Flavivirus) के संक्रमण से होती है। और ये बीमारी भी बच्चों को ज़्यादा प्रभावित करती है।

AES के प्रमुख लक्षणों में बुखार ,सिरदर्द , मानसिक भ्रम, जैसी गतिविधियां शुमार हैं। 1955 में मद्रास की एक रिसर्च में सामने आई इस बीमारी के चलते साल 2018 में क़रीब 10 हज़ार से अधिक एक्यूट इंसेफेलाइटिस सिंड्रोम के केसज सामने आए थे जिसमें से लगभग 600 लोगों की मौत भी हुई थी। ये केस कुल 17 राज्यों से आए थे जिनमें गंभीर AES केसेज असम, बिहार, झारखण्ड, कर्णाटक, मणिपुर, मेघालय, त्रिपुरा, तमिल नाडु और उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों से सामने आए थे।

हालाँकि भारत सरकार ने इस बीमारी से निपटने के लिए कार्यक्रम भी चलाए हैं। एक्यूट इंसेफेलाइटिस सिंड्रोम की रोकथाम और नियंत्रण के लिये राष्ट्रीय कार्यक्रम के तहत JE टीकाकरण और सार्वजनिक स्वास्थ्य गतिविधियों को मज़बूत बनाना। JE और AES मामलों से निपटने के लिए बेहतर सुविधा, ज़िला परामर्श केंद्र की स्थापना और निगरानी, पर्यवेक्षण व समन्वय बढ़ाने जैसे महत्वपूर्ण कदम उठाए गए हैं।

3. तीसरी न्यूज़

केन्द्रीय खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्री श्रीमती हरसिमरत कौर बादल ने कल उद्योग हस्तियों और खाद्य प्रसंस्करण करने वाले प्रमुख देशों के राजदूतों के साथ एक बैठक की। बैठक में बताया गया कि इस साल भारत एक बार फिर वर्ल्ड फूड इंडिया 2019 कार्यक्रम आयोजित करेगा। केन्द्रीय खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्रालय के मुताबिक़ ये सम्मलेन खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र के सभी वैश्विक व घरेलू हितधारकों का सबसे बड़ा सम्मेलन होगा जिसमें मंत्रालय लगभग 15 देशों के साथ साझेदारी करेगा और क़रीब 80 देश इस सम्मलेन में शिरकत करेंगे।

वर्ल्ड फूड इंडिया 2019 के तहत कई शीर्ष स्तरीय संगोष्ठियों का आयोजन और उच्चस्तरीय गोलमेज बैठकें प्रस्तावित हैं। इसके अलावा कंट्री सेशन, बी2बी यानी बिज़नेस तो बिज़नेस और बी2जी यानी बिज़नेस तो गवर्नमेंट नेटवर्किंग जैसी गतिविधियां भी 2019 की वर्ल्ड फूड इंडिया सम्मलेन का हिस्सा रहेंगी। वर्ल्ड फूड इंडिया 2019 का स्लोगन ‘विकास के लिए साझेदारी’ रखा गया है।

ग़ौरतलब है कि साल 2017 में भी वर्ल्ड फूड इंडिया का आयोजन हुआ था। 2017 में हुए इस सम्मलेन को भारतीय खाद्य मेले का कुंभ मेला कहा गया था जहां 27 राज्यों के अलावा 800 वैश्विक व घरेलू प्रदर्शनकारियों के साथ दुनिया के 61 देशों ने शिरकत किया था।

दरअसल खाद्य प्रसंस्करण उद्योग का मतलब ऐसे कामों से है जिसमें प्राथमिक कृषि उत्पादों में सुधार कर उन्हें और बेहतर बनाया जाता है और इससे सामानों के दाम में इज़ाफ़ा होता है। भारत का खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र उत्पादन, वृद्धि, खपत और निर्यात की दृष्टि से सबसे बड़ा क्षेत्र है। भारत के खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र में फल और सब्जियां, मसाले, मांस और पोल्ट्री जैसे उत्पाद शामिल हैं। इसके अलावा मिष्ठान्न, चाकलेट और कोको उत्पाद, सोया आधारित उत्पाद, मिनरल जल, उच्च प्रोटीन खाद्य जैसे पदार्थ भी खाद्य प्रसंस्करण में शामिल हैं।

खाद्य प्रसंस्करण के ज़रिए किसानों का अतिरिक्त लाभ सुनिश्चित होता है। साथ ही नई आर्थिक गतिविधियों और रोज़गार को बढ़ावा, पोषण में सुधार और खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने जैसे फायदे भी खाद्य प्रसंस्करण के ज़रिए होते हैं। इसके अलावा खेती में विविधता और निर्यात आय में भी बढ़ोत्तरी होती है। सरकार ने खाद्य प्रसंस्करण के लिए संपदा योजना की भी शुरुआत की है। इस योजना के लक्ष्यों में खेती को पूरक बनाना, संसाधनों का आधुनिकीकरण करना और कृषि उत्पादों के नुकसान को कम करने जैसे मक़सद शुमार हैं।

4. चौथी न्यूज़

दुनिया भर में 17 जून को विश्व मरुस्थलीकरण व सूखा रोकथाम दिवस मनाया गया। विश्व मरुस्थलीकरण व सूखा रोकथाम दिवस के मौके पर पर्यावरण मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने देश की बेकार पड़ी लाखो हेक्टेयर वन भूमि पर हरियाली लाई जाएगी। पर्यावरण मंत्रालय ने इस काम के लिए एक पायलेट प्रोजेक्ट शुरू किया है। ये पायलेट प्रोजेक्ट के 3.5 साल के लिए तैयार की गई है जिसे हरियाणा, मध्यप्रदेश, महाराष्ट्र, नागालैंड और कर्नाटक में लागू किया जाएगा।

पर्यावरण मंत्री के मुताबिक़ ज़मीन के क्षरण से देश के कुल भौगोलिक क्षेत्र का लगभग 30 प्रतिशत प्रभावित हो रहा है। और यही वजह है कि भारत समेत पूरी दुनिया के लिए ये समस्या चुनौती का विषय है।
ग़ौरतलब है कि भारत सरकार ने बंजर भूमि को कम करने के लिए प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना और मृदा स्वास्थ्य कार्ड जैसी योजनाएं चलाई हैं। इसके अलावा मृदा स्वास्थ्य प्रबन्धन योजना, प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना और प्रति बूंद अधिक फसल जैसी भारत सरकार की अलग - अलग योजनाएं मिट्टी के क्षरण में कमी ला रही हैं।

दरअसल संयुक्त राष्ट्र के मुताबिक़ मरुस्थलीकरण से का मतलब शुष्क और अर्ध-शुष्क क्षेत्र में भूमि के निम्नीकरण से है। मरुस्थलीकरण के ख़िलाफ़ लड़ाई के लिए संयुक्त राष्ट्र समझौता एक मात्र अंतर्राष्ट्रीय समझौता है जो पर्यावरण और विकास के मुद्दों पर कानूनी बाध्यता प्रदान करता है। संयुक्त राष्ट्र ने 17 जून को ‘विश्व मरुस्थलीकरण व सूखा रोकथाम दिवस’ घोषित किया है।

विश्व मरुस्थलीकरण व सूखा रोकथाम दिवस के मौके पर पर्यावरण मंत्री ने बताया कि इस साल कॉन्फ्रेंस ऑफ़ द पार्टीज यानी COP की 14 की बैठक भारत में आयोजित की जाएगी। इस मौके पर मरुस्थलीकरण, भूमि क्षरण और सूखे की वजह से उपजाऊ ज़मीन को हो रहे नुकसान पर चर्चा की जाएगी। ये बैठक 2 से 13 सितंबर के बीच नई दिल्ली में आयोजित की जा जाएगी। इसमें दुनिया के क़रीब 197 देशों के पांच हज़ार से ज़्यादा प्रतिनिधियों के श्रीकांत करने की उम्मीद है।

5. पांचवी न्यूज़

अमेरिकी प्रतिबंधों के चलते ईरान ने परमाणु समझौते से बाहर होने की चेतावनी दी है। ईरान की परमाणु एजेंसी ये चेतावनी ख़ास तौर पर अमेरिका और पश्चिमी देशों को दी है जो साल 2015 के ईरान परमाणु समझौते में शामिल थे।

2015 में और संयुक्त राष्ट्र के पांच स्थायी सदस्यों व जर्मनी के बीच एक परमाणु समझौता हुआ। समझौते के मुताबिक़ ईरान को अपने संवर्धित यूरेनियम भंडार को कम करने और अपने परमाणु संयंत्रों को संयुक्त राष्ट्र के निरीक्षकों को निगरानी की इजाज़त देनी थी। इसके अलावा इस समझौते के तहत ईरान को हथियार और मिसाइल ख़रीदने की भी मनाही थी। ऐसा करने पर ईरान पर क्रमशः पाँच साल और आठ साल तक का प्रतिबंध लगाया जा सकता था।

अमेरिका इन समझौते के बदले ईरान को तेल और गैस के कारोबार, वित्तीय लेन देन, उड्डयन और जहाज़रानी के क्षेत्रों में लागू प्रतिबंधों में ढील देने के लिए राजी था। लेकिन साल 2016 में आए ट्रम्प ने इस समझौते को घाटे का सौदा बताया और पिछले साल अमेरिका ईरान परमाणु समझौते से बाहर हो गया। परमाणु डील से बाहर होने के बाद अमेरिका ने यूरोप और एशिया के कुछ बड़े देशों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं।

अमेरिका ने ईरान से तेल ख़रीदने वाले देशों पर भी प्रतिबन्ध लगा रखा है। दरअसल अमेरिका का मेन मक़सद ईरान के तेल निर्यात को शून्य पर लाना है, ताकि ईरान को नए समझौते के लिए राज़ी किया जा सके। ग़ौरतलब है कि अमेरिकी प्रतिबंधों के चलते ईरान की अर्थव्यवस्था पर बुरा प्रभाव पड़ा है। ईरानी करेंसी इस वक़्त अपने रिकॉर्ड निचले स्तर पर है। साथ ही सालाना महंगई दर भी चार गुना तक बढ़ गई है और विदेशी निवेशक देश छोड़ कर जा रहे हैं।

हालाँकि ईरान अमेरिकी फैसलों का शुरू से ही विरोध करता रहा है। मौजूदा वक़्त में ईरान ने यूरेनियम के भंडारण की सीमा को बढ़ाने की चेतावनी ऐसे समय में दी है जब अगले हफ्ते ब्रसेल्स में यूरोपीय संघ (ईयू) के विदेश मंत्रियों की बैठक होनी है। वैश्विक संकट बना अमेरिका ईरान तनाव लाजिमी है कि इस बैठक का प्रमुख मुद्दा होगा। ऐसे में जानकार ईरान की धमकी को यूरोप पर दबाव बनाने की कोशिश के तौर पर देख रहे हैं।

आज के न्यूज़ बुलेटिन में इतना ही... कल फिर से हाज़िर होंगे एग्जाम के लिहाज़ से महत्वपूर्ण कुछ अहम ख़बरों के साथ...

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