Daily Audio Bulletin for UPSC, IAS, Civil Services, UPPSC/UPPCS, State PCS & All Competitive Exams (11, July 2019)


Daily Audio Bulletin for UPSC, IAS, Civil Services, UPPSC/UPPCS, State PCS & All Competitive Exams (11, July 2019)


बुलेटिन्स

1. DNA टेक्नोलॉजी बिल 2019 लोकसभा में हुआ पेश। विपक्ष ने जताई आपत्ति।
2. विश्व जनसंख्या दिवस मनाया जा रहा है आज। दुनियाभर में बढ़ती जनसंख्या के प्रति लोगों को जागरुक करना है उद्द्येश्य।
3. 18 जुलाई को लॉन्च होगा CPSE ETF का छठां संस्करण। 10 हजार करोड़ रूपया जुटाने का है लक्ष्य।
4. बाल यौन अपराध संरक्षण कानून 2012 में संशोधन को कैबिनेट की मज़ूरी। बच्‍चों से जुड़े यौन अपराधों के लिए सख़्त हो सकते हैं नियम।
5. और अमेरिकी हाउस ऑफ़ रिप्रेजेन्टेटिव ने ग्रीन कार्ड कोटा हटाने के लिए पारित किया विधेयक। हजारों कुशल भारतीय IT पेशेवरों को मिलेगा लाभ।

आइये अब ख़बरों को विस्तार से समझते हैं

1. पहली न्यूज़

केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्री डॉ. हर्षवर्धन ने लोकसभा में डीएनए तकनीक बिल पेश कर दिया है। इस बिल को DNA टेक्नोलॉजी (उपयोग एवं अनुप्रयोग) विनियमन विधेयक, 2019 नाम दिया गया है। इस बिल के ज़रिए अपराधियों, संदिग्धों, लापता लोगों और अज्ञात रोगियों की पहचान निर्धारित करने में मदद मिलेगी।

लोकसभा में केंद्रीय विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्री हर्षवर्धन ने बताया कि इसके तहत एक डीएनए नियामक बोर्ड बनाया जाएगा। ये बोर्ड बिल से जुड़े विषयों पर केंद्र और राज्यों को सुझाव देगा। उन्होंने कहा कि गृह, विदेश, रक्षा और महिला एवं बाल विकास मंत्रालय समेत छह मंत्रालयों को इस विधेयक के पारित हो जाने से लाभ होगा। सीबीआई, एनआईए जैसी जांच एजेंसियों और आपदा प्रबंधन प्राधिकरणों को भी ये बिल सीधा लाभ पहुंचाएगा।

विधेयक में नेशनल डीएनए डाटा बैंक और रीजनल डीएनए डाटा बैंकों की स्थापना का भी प्रावधान है। प्रत्येक डाटा बैंक में अपराध स्थलों, संदिग्धों या विचाराधीनों और अपराधियों की सूची समेत सभी तरह की सूचियां रखी जाएंगी। आपराधिक जांच और लापता लोगों की पहचान में डीएनए प्रोफाइलिंग के इस्तेमाल के लिए विधेयक में संबंधित व्यक्ति की अनुमति लेने का भी प्रावधान किया गया है। मंत्री ने आश्वासन दिया कि इसमें निजता, गोपनीयता और डेटा संरक्षण का बेहतर तरीके से ध्यान रखा गया है।

विपक्ष ने इस बिल के विरोध में तर्क देते हुए कहा कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा निजता के अधिकार पर दिए गए फैसले के अनुरूप विधेयक में कुछ भी नहीं लाया गया है। साथ ही इस तरह के किसी भी विधेयक को लाने से पहले सरकार को डेटा संरक्षण कानून बनाना चाहिए। विपक्ष ने आशंका व्यक्त की कि डीएनए प्रोफाइलिंग का देश में दुरुपयोग भी हो सकता है। आपको बता दें कि सुप्रीम कोर्ट की संवैधानिक खंडपीठ ने न्यायमूर्ति के.एस. पुट्टास्वामी और अन्य बनाम भारतीय संघ एवं अन्य के फैसले में 24 अगस्त 2017 को निजता को संविधान के अनुच्छेद 21 के अधीन मूल अधिकार घोषित किया था।

2. दूसरी न्यूज़

दुनियाभर में, हर साल 11 जुलाई को विश्व जनसंख्या दिवस मनाया जाता है। साल 1989 से ही मनाये जाने वाले इस दिन की शुरुआत, संयुक्त राष्ट्र संघ के विकास कार्यक्रम के तहत हुई। बाद में सारे देशों में विश्व जनसंख्या दिवस मनाया जाने लगा। लोगों को बढ़ती जनसंख्या के प्रति जागरुक करने के लिए इस दिवस को मनाया जाता है। इस दिन लोगों को परिवार नियोजन, लैंगिक समानता, मानवाधिकार और मातृत्व स्वास्थ्य के बारे में जानकारी दी जाती है।

जनगणना 2011 के आंकड़ों के मुताबिक़ देश की जनसंख्या बढ़कर 121.07 करोड़ से भी ज़्यादा हो चुकी है। इसके अलावा हाल ही में, संयुक्त राष्ट्र जनसंख्या कोष यानी UNFPA ने स्टेट ऑफ़ वर्ल्ड पॉपुलेशन-2019 रिपोर्ट जारी की। इसके मुताबिक़, साल 2010 से 2019 के बीच भारत की आबादी औसतन 1.2 फीसद बढ़ी है, जो चीन की सालाना वृद्धि दर के दोगुने से भी ज़्यादा है। इन आंकड़ों से साफ है कि भारत में जनसँख्या अभी भी एक बड़ी समस्या बनी हुई है।

जीवन प्रत्याशा में वृद्धि, परिवार नियोजन की कमी, बाल विवाह और अशिक्षा जैसे कारकों को भारत में जनसंख्या वृद्धि के लिए ज़िम्मेदार माना जा रहा है। इसके अलावा धार्मिक कारण, रूढ़िवादिता, गरीबी और अवैध प्रवासन के चलते भी जनसंख्या वृद्धि हुई है।

जनसंख्या विस्फोट के कारण बेरोजगारी, खाद्य समस्या, कुपोषण, प्रति व्यक्ति निम्न आय और ग़रीबी जैसी दिक्कतें उभरकर सामने आयीं हैं। इसके अलावा बचत और पूंजी निर्माण में कमी, जनोपयोगी सेवाओं पर अधिक खर्च, अपराध, पलायन और शहरी समस्याओं में वृद्धि जैसी दूसरी समस्याएं भी पैदा हुई हैं।

भारत दुनिया का पहला ऐसा देश है जिसने सबसे पहले 1952 में परिवार नियोजन कार्यक्रम को अपनाया। साल 1976 में देश की पहली जनसंख्या नीति की घोषणा की गई, बाद में 1981 में इस जनसंख्या नीति में कुछ संशोधन भी किए गए। इसके बाद फरवरी 2000 में सरकार ने राष्ट्रीय जनसंख्या नीति, 2000 की घोषणा की। इस जनसंख्या नीति का प्रमुख मक़सद प्रजनन तथा शिशु स्वास्थ्य की देखभाल के लिए बेहतर सेवातंत्र की स्थापना तथा गर्भ निरोधकों और स्वास्थ्य सुविधाओं के बुनियादी ढांचे की ज़रूरतें पूरी करना है। इसका दीर्घकालीन लक्ष्य जनसंख्या में साल 2045 तक स्थायित्व प्राप्त करना है।

3. तीसरी न्यूज़

केंद्र सरकार CPSE - ETF का छठा भाग 18 जुलाई को लॉन्च करने जा रही है। सरकार ने इससे 10,000 करोड़ रुपये जुटाने की योजना बनाई है। CPSE - ETF केंद्र सरकार के 11 सरकारी कंपनियों के इंडेक्स को फॉलो करता है, जिसमें ओएनजीसी, एनटीपीसी, कोल इंडिया और आईओसी समेत कई अन्य कंपनियां शामिल हैं।

दरअसल ETF में किया जाने वाला निवेश म्यूच्यूअल फण्ड में निवेश जैसा ही होता है लेकिन इन दोनों में थोड़ा अंतर होता है। म्यूच्यूअल फंड में आम लोगों का पैसा इकट्ठा किया जाता है। और इस पैसे को आगे कैसे निवेश करना है इसकी जिम्मेदारी एक फण्ड मैनेजर को दी जाती है। ये फंड मैनेजर निवेश के मामलों का विशेषज्ञ होता है। ये मैनेजर शेयर या बांड में पैसे लगाकर ज्यादा से ज्यादा लाभ कमाने की कोशिश करता है। और इस लाभ को उन लोगों में बांटा जाता है जिनका पैसा निवेश किया गया रहता है। इस तरह म्यूचुअल फंड के जरिए एक छोटा निवेशक भी विशेषज्ञ की सेवा का लाभ ले पाता है। जबकि ETF यानी एक्सचेंज ट्रेडेड फंड के जरिए कोई म्यूचुअल फंड कंपनी शेयरों, सरकारी बॉन्ड जैसे इंस्ट्रूमेंट में निवेश करने के लिए निवेशकों से पैसे जुटाती है। और उन पैसों को किसी एक विशेष कंपनी में निवेश न करके किसी स्टॉक विशेष की सारी कंपनियों में निवेश किया जाता है। मसलन अगर कोई ETF निवेशक सेंसेक्स को फॉलो करता है तो वो Sensex में शामिल 30 कंपनियों के शेयरों में उनके मार्किट कैपिटल के अनुसार पैसा निवेश करेगा। यानी जिस कंपनी का मार्किट कैपिटल ज़्यादा होगा उसमें निवेश भी ज़्यादा होता है।

4. चौथी न्यूज़

केंद्रीय मंत्रिमंडल ने बच्‍चों को यौन अपराधों से सुरक्षा प्रदान करने के लिए बाल यौन अपराध संरक्षण कानून 2012 यानी पोक्‍सो क़ानून में संशोधन को मंजूरी दे दी है। संशोधन को मंजूरी मिलने के बाद इसके कई प्रभाव होंगे जिनमें कड़े दंडात्‍मक प्रावधानों के ज़रिए बच्‍चों से जुड़े यौन अपराधों में कमी आने की संभावना है।

साथ ही संशोधन के बाद किसी मुश्किल में फंसे बच्‍चों के हितों की रक्षा हो सकेगी और उनकी सुरक्षा और सम्‍मान सुनिश्चित किया जा सकेगा। इसके अलावा संशोधन का मक़सद बच्‍चों से जुड़े अपराधों के मामले में दंडात्‍मक व्‍यवस्‍थाओं को ज़्यादा पारदर्शी बनाना है।

ग़ौरतलब है कि पोक्‍सो अधिनियम, 2012 बच्‍चों को यौन अपराधों, यौन शोषण और अश्‍लील सामग्री से सुरक्षा प्रदान करने के लिए लाया गया था। इसका उद्देश्‍य बच्‍चों के हितों की रक्षा करना और उनका कल्‍याण सुनिश्चित करना है। अधिनियम के तहत बच्‍चे को 18 साल की कम उम्र के व्‍यक्ति के रूप में परिभाषित किया गया है और हर स्‍तर पर बच्‍चों के हितों और उनके कल्‍याण को सर्वोच्‍च प्राथमिकता देते हुए उनके शारीरिक, मानसिक और सामाजिक विकास को सुनिश्चित किया गया है। यह कानून लैंगिक समानता पर आधारित है। पॉक्सो अधिनियम का पूरा नाम Protection of Children from Sexual Offences Act है।

कुछ लोग इस बिल का विरोध भी कर रहे हैं। उनका कहना है कि इस क़ानून में बर्डेन ऑफ़ प्रूफ यानि अपने आप को निर्दोष साबित करने की जिम्मेदारी आरोपी पर होता है ऐसे में यदि इस कानून में मौत की सजा का प्रावधान हो जाता है तो इन मामलों में आरोपित कमजोर तबके और गरीब व्यक्तियों के लिए न्याय पाना काफी मुश्किल हो जाएगा।

बाल अधिकारों के लिए काम करने वाले गैर सरकारी संगठन चाइल्ड राइट्स एंड यू यानी क्राई के पिछले साल के एक विश्लेषण के मुताबिक भारत में हर 15 मिनट में एक बच्चा यौन अपराध का शिकार बनता है और पिछले 10 सालों में नाबालिगों के खिलाफ अपराध में 500 प्रतिशत से ज्यादा की वृद्धि हुई है। रिपोर्ट में यह भी खुलासा किया गया कि बच्चों के खिलाफ होने वाले अपराध के मामलों में से 50 प्रतिशत से भी ज्यादा महज पांच राज्यों में दर्ज किए गए। इन राज्यों में उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, दिल्ली और पश्चिम बंगाल शामिल हैं।

5. पांचवी न्यूज़

अमेरिकी हाउस ऑफ़ रिप्रेजेन्टेटि ने हर देश के लिए लागू 7 प्रतिशत कोटे का प्रावधान हटाने से संबंधित विधेयक को पारित कर दिया है। नई आव्रजन योजना में वीज़ा कोटा 12% से बढ़ाकर 57% करने का प्रस्ताव है। ये नई आव्रजन योजना योग्यता और मैरिट पर आधारित होंगी। बताया जा रहा है कि इस योजना के लागू होने से कुशल पेशेवरों को काफी राहत मिलेगी और हजारों उच्‍च दक्षता प्राप्‍त भारतीय सूचना प्रौद्योगिकी पेशेवरों को फायदा होगा, क्यूंकि इससे पहले ग्रीन कार्ड के लिए दस साल से ज़्यादा समय तक इंतजार करना होता था।

फेयरनेस ऑफ हाई स्किल्ड इमिग्रेंट्स एक्ट, 2019 विधेयक 435 सदस्यीय सदन में 65 के मुकाबले 365 मतों से पारित हो हुआ है । हालांकि इस विधेयक को अभी सीनेट द्वारा पारित किया जाना बाकी है। जहां डेमोक्रेट्स के मुक़ाबले रिपब्लिकन सदस्‍यों की संख्या काफी अधिक है।

ग़ौरतलब है कि ग्रीन कार्ड किसी व्यक्ति को अमेरिका में स्थायी रूप से रहने और काम करने की इजाज़त देता है। अमेरिकी राष्ट्रपति ने बीते दिनों सीनेट में ग्रीन कार्ड की जगह नई आव्रजन योजना यानी 'बिल्ड अमेरिका' वीज़ा का प्रस्ताव रखा था। आपको बता दे कि अमेरिका हर साल करीब 11 लाख विदेशियों को ग्रीन कार्ड देता है। इसके मिल जाने के बाद लोगों को अमेरिका में स्थायी रूप से काम करने और रहने की अनुमति होती है। वर्तमान में ग्रीन कार्ड परिवार से संबंध के आधार पर दिया जाता रहा है।

आज के न्यूज़ बुलेटिन में इतना ही... कल फिर से हाज़िर होंगे एग्जाम के लिहाज़ से महत्वपूर्ण कुछ अहम ख़बरों के साथ...

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