Daily Audio Bulletin for UPSC, IAS, Civil Services, UPPSC/UPPCS, State PCS & All Competitive Exams (10, July 2019)


Daily Audio Bulletin for UPSC, IAS, Civil Services, UPPSC/UPPCS, State PCS & All Competitive Exams (10, July 2019)


बुलेटिन्स

1. रोहिंग्या मसले पर केंद्र सरकार ने उठाया सवाल। क्या अवैध घुसपैठियों को माना जा सकता है शरणार्थी?
2. केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने 52 कंपनियों को जारी किया नोटिस। प्लास्टिक कचरे पर लगाम लगाने के लिए कम्पनियाँ पेश करें प्लान।
3. भारी बारिश के बाद अब देश में आ सकती है मानसून विच्छेद की स्थिति। स्काईमेट वेदर संस्था ने की भविष्यवाणी।
4. तालिबान और अफगान प्रतिनिधियों के बीच दोहा में शान्ति वार्ता जारी। हिंसा कम करने के लिए तालिबान हुआ राजी।
5. NCRB ने शुरू की AFRS तकनीक अपनाने की तैयारी। अपराध पर नकेल कसने में मिलेगी मदद।

आइये अब ख़बरों को विस्तार से समझते हैं

1. पहली न्यूज़

रोहिंग्या मसले पर सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट के सामने ये सवाल उठाया है कि अवैध घुसपैठियों को शरणार्थी का दर्जा कैसे दिया जा सकता है? मामले की अंतिम सुनवाई मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली पीठ अब अगस्त महीने में करेगी। ग़ौरतलब है कि केंद्र सरकार ने भारत में अवैध रूप से घुसे 40 हजार रोहिंग्याओं को वापस म्यांमार भेजने का फैसला लिया था। इस फैसले के खिलाफ दो रोहिंग्या मुस्लिमों समेत दर्जनों अन्य लोगों ने केंद्र सरकार के खिलाफ याचिका दायर कर दी थी।

आपको बता दें कि रोहिंग्या म्यांमार के रखाइन प्रान्त और इसके आस-पास इलाक़े में रहने वाला एक मुस्लिम अल्पसंख्यक समुदाय है। रखाइन में एक हिंसा के बाद बड़ी संख्या में रोहिंग्या मुस्लिम वहां से भागकर अवैध तरीके से भारत में घुस आए थे। अब समस्या ये है कि जहाँ रोहिंग्या अपने आपको शरणार्थी बता रहे हैं वहीँ केंद्र सरकार इन्हें अवैध घुसपैठिया मान रही है।

दरअसल जब कोई व्यक्ति किसी दूसरे देश में अवैध दस्तावेज़ो के ज़रिए दाखिल होता है या फिर वहाँ तय समय सीमा से ज़्यादा दिन रुकता है तो इसे अवैध घुसपैठिया माना जाता है। वहीँ शरणार्थी वो इंसान होता है जो उत्पीड़न, युद्ध या हिंसा के कारण अपना देश छोड़कर किसी दूसरे देश में रहने के लिए जाता है और डरवश अपने मुल्क़ वापस नहीं लौटना चाहता है।

आपको बता दें कि 1951 का शरणार्थी कन्वेंशन एक ऐसा अंतर्राष्ट्रीय क़ानून है जो शरणार्थियों को परिभाषित करता है। इस कन्वेंशन के मुताबिक़ इस पर दस्तख़त करने वाले देश शरणार्थियों की सुरक्षा, सहायता और उनके सामाजिक अधिकारों का ध्यान रखेंगे। मौजूदा वक़्त में कुल 140 देशों ने इस पर दस्तख़त किए हैं। भारत ने न तो शरणार्थी कन्वेंशन 1951 पर दस्तख़त किए हैं और न ही शरणार्थी कन्वेंशन से जुड़े 1967 के प्रोटोकॉल पर।

2. दूसरी न्यूज़

प्लास्टिक कचरे पर लगाम लगाने के लिहाज़ से सेंट्रल पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड ने 52 कंपनियों को नोटिस जारी कर उनका EPR प्लान पेश करने को कहा है। दरअसल प्लास्टिक कचरे को नियंत्रित करने के लिए केंद्र सरकार ने प्लास्टिक वेस्ट मैनेजमेंट रूल्स 2016 बनाया है। इस नियम के तहत ऐसी कंपनियां जो अपने पैकेजिंग में प्लास्टिक का उपयोग करती हैं तो इस प्लास्टिक को नष्ट करने की जिम्मेदारी भी उन्हीं की होगी। इसके लिए कंपनियों को एक्सटेंडेड प्रोडक्ट रिस्पॉंसिबिलिटी प्लान यानी EPR के तहत रजिस्ट्रेशन कराना होता है। यदि कोई कंपनी EPR के तहत रजिस्ट्रेशन नहीं कराती है तो उस पर पर्यावरण सुरक्षा अधिनियम 1986 और NGT एक्ट 2010 के तहत कार्रवाई की जा सकती है। EPR के प्रावधानों के तहत कंपनियों को एक वेस्ट कलेक्शन सिस्टम तैयार करना होता है ताकि प्लास्टिक को प्रयोग होने के बाद उसका सही प्रबंधन किया जा सके।

सीपीसीबी की ओर से साल 2018 में किए गए एक अध्ययन के मुताबिक़ देश में रोज़ाना क़रीब 26 हजार टन प्लास्टिक कचरा पैदा होता है। ज्यादातर कचरा पैकेजिंग इंडस्ट्री के उत्पादों से निकलता है। जबकि इसमें से मात्र 60 फीसदी उत्पादों की ही रिसाइकिलिंग हो पाती है। तक़रीबन दस हजार टन प्लास्टिक कचरा लैंडफिल या समुद्र में जाता है या नालों में जा कर उन्हें जाम करता है।

आपको बता दें कि केन्द्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड एक सांविधिक संगठन है। इसका गठन जल (प्रदूषण निवारण एवं नियंत्रण) अधिनियम, 1974 के तहत सितंबर, 1974 में किया गया था। CPCB वायु गुणवत्ता में सुधार और वायु प्रदूषण की रोकथाम, नियंत्रण और उन्मूलन से जुड़े किसी भी मामले पर केंद्र सरकार को सलाह देने का काम करता है।

3. तीसरी न्यूज़

मौसम की जानकारी देनी वाली निजी संस्था स्काईमेट ने भारी बारिश के बाद अब मॉनसून विच्छेद की आशंका जताई है। मानसून के दौरान बारिश लगातार ना होकर कुछ दिनों के अंतराल पर रुक रुक कर होता है, इसे ही मानसून विच्छेद कहते हैं। मॉनसून विच्छेद मानसून के दौरान होने वाली एक सामान्य परिघटना है। कभी-कभी बारिश के दौरान लगातार 1 महीने तक वर्षा नहीं होती है इससे सूखे की स्थिति पैदा हो जाती है।

आपको बता दें कि मानसून मूलतः हिन्द महासागर और अरब सागर की ओर से भारत के दक्षिण-पश्चिम तट पर आनी वाली हवाओं को कहते हैं। ये हवाएं भारत, पाकिस्तान, बांग्लादेश आदि में भारी वर्षा करातीं हैं। ये ऐसी मौसमी पवन होती हैं, जो दक्षिणी एशिया क्षेत्र में जून से सितंबर तक क़रीब चार महीने तक सक्रिय रहती हैं।

ग़ौरतलब है कि स्काईमेट ने इस साल मॉनसून पर अल नीनो के प्रभाव की भी आशंका जताई थी। अल-नीनो के चलते प्रशांत महासागर में समुद्र की सतह गर्म हो जाती है, जिससे हवाओं का रास्ते और रफ्तार में बदलाव आ जाता है। इस बदलाव के कारण मौसम चक्र बुरी तरह से प्रभावित होता है। मौसम में बदलाव के कारण कई स्थानों पर सूखा पड़ता है तो कई जगहों पर बाढ़ आती है। इसका असर दुनिया भर में दिखाई देता है। अल नीनो बनने से जहाँ भारत और आस्ट्रेलिया में सूखा पड़ता है, वहीँ अमेरिका में भारी बारिश देखने को मिलती है।

4. चौथी न्यूज़

पिछले कुछ दिनों से रुकी हुई अफगान शांति वार्ता क़तर की राजधानी दोहा में फिर से शुरू हो गई है। अफगानिस्तान के प्रतिनिधियों ने तालिबान के साथ दुबारा बातचीत शुरू की है। जर्मनी और कतर की कोशिशों के फलस्वरूप आयोजित इस दो दिवसीय सभा में लगभग 70 प्रतिनिधि हिस्सा ले रहे हैं। वार्ता में अफगान अधिकारी सरकार के प्रतिनिधि के तौर पर शामिल नहीं हुए। दरअसल अमेरिका के साथ चल रही वार्ता में तालिबान के विरोध के चलते इसमें अफगान सरकार को शामिल नहीं किया गया है।

इस वार्ता में दोनों पक्षों के प्रतिनिधियों ने शांति की दिशा में महत्वपूर्ण क़दम बढ़ाए हैं। उनमें शांति समझौते के लिए खाका तैयार करने पर सहमति बन गई है। तालिबान भी हिंसा कम करने के लिए राजी हो गया है। इस शांति वार्ता से यह उम्मीद जगी है कि अफगानिस्तान में 18 साल से जारी संघर्ष के ख़त्म होने का रास्ता खुल सकता है। अफ़ग़ानिस्तान शांति वार्ता की शुरुआत जनवरी महीने में अमेरिका-तालिबान की बातचीत से शुरू हुई थी।

ग़ौरतलब है कि आज से क़रीब 2 दशक पहले अमेरिका में एक आतंकवादी हमला हुआ था। ये हमला तालिबान गुट की ओर से ही कराया गया था। जिसके बाद से अमेरिकी सैनिक अफ़ग़ानिस्तान में मौजूद है। अमेरिका अब अपने सैनिकों को चरणबद्ध तरीके से वापस बुला रहा है। अमेरिका ने इसके लिए तालिबान और अफ़ग़ान सरकार के बीच सुलह की अपनी गतिविधियों को भी तेज़ कर दिया है।

5. पांचवी न्यूज़

राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो यानी NCRB ने ऑटोमेटेड फेशियल रेकॉग्निशन सिस्टम तकनीक को अपनाने की तैयारी शुरू कर दी है। ऑटोमेटेड फेशियल रेकॉग्निशन सिस्टम यानी AFRS तकनीक की मदद से सरकारी डाटाबेस में मौज़ूद फोटो, वीडियो से लोगों की पहचान करने में मदद मिलेगी। एनसीआरबी ने AFRS तकनीक से जुड़े सॉफ्टवेयर और हार्डवेयर बनाने वाली कंपनियों से टेंडर भी मांगा है। दरअसल कई बार अपराधियों और धोखाधड़ी में लिप्त व्यक्ति का पता लगाना, किसी आपदा में खोए हुए व्यक्ति को ढूढ़ना और किसी मृत व्यक्ति की पहचान करना बेहद जटिल हो जाता है। ऐसे में, AFRS की सहायता से इस तरह की समस्याओं से निजात पाने में अब काफी आसानी होगी।

AFRS इंटरनेट से जुड़ा एक सिस्टम होगा, जो नई दिल्ली स्थित NCRB के डाटा सेंटर से नियंत्रित होगा। साथ ही तमाम पुलिस स्टेशन में भी इसका एक्सेस होगा। इसके लिए क्राइम एंड क्रिमिनल ट्रैकिंग नेटवर्क एंड सिस्टम यानी CCTNS का भी इस्तेमाल किया जाएगा। इस सिस्टम के ज़रिए अपराधी सीसीटीवी के दायरे में आते ही ब्लैक लिस्ट लोगों की सूची में उसकी फोटो पहचान कर अलर्ट भेज देगा।
लेकिन कुछ विशेषज्ञों ने इस तकनीक के दुरूपयोग का भी सवाल उठाया है। उनका कहना है कि इस तरह डेटा इकट्ठा करने से सरकारी एजेंसियों द्वारा इसका दुरुपयोग हो सकता है, साथ ही यह लोग के निजता के अधिकार के उल्लंघन का भी मामला है।

आपको बता दें कि राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो की स्थापना केंद्रीय गृह मंत्रालय के तहत साल 1986 में की गई थी। इसका उद्द्येश्य था कि भारतीय पुलिस तंत्र को सूचना प्रौद्योगिकी समाधान और आपराधिक गुप्त सूचनाएँ प्रदान करके इसे बेहतर बनाया जा सके। ये संस्था देशभर में अपराधों का रिकॉर्ड रखती है।

आज के न्यूज़ बुलेटिन में इतना ही... कल फिर से हाज़िर होंगे एग्जाम के लिहाज़ से महत्वपूर्ण कुछ अहम ख़बरों के साथ...

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