Daily Audio Bulletin for UPSC, IAS, Civil Services, UPPSC/UPPCS, State PCS & All Competitive Exams (03, July 2019)


Daily Audio Bulletin for UPSC, IAS, Civil Services, UPPSC/UPPCS, State PCS & All Competitive Exams (03, July 2019)


बुलेटिन्स

1. लोकसभा में पारित हुआ भारतीय चिकित्‍सा परिषद संशोधन विधेयक-2019। सरकार 2025 तक GDP का 2.5 फीसदी करेगी स्‍वास्‍थ्‍य सेवा पर खर्च
2. QS वर्ल्ड यूनिवर्सिटी रैंकिंग 2020 की शीर्ष 200 सूची में शामिल भारतीय संस्थाओं को दी केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री डॉ. रमेश पोखरियाल ने बधाई। QS वर्ल्ड यूनिवर्सिटी रैंकिंग में भारत के तीन संस्थानों को मिली है जगह ।
3. यूरोप में हीट वेव बना है मुश्किल का सबब। हीट वेव के चलते जंगलों में लगी आग
4. और बुलेटिन के अंत में जानेंगे कि क्या है फेसबुक की लिब्रा करेंसी। और ये क्यों हैं बनी हुई है सुर्ख़ियों में

आइये अब ख़बरों को विस्तार से समझते हैं

1. पहली न्यूज़

लोकसभा में कल भारतीय चिकित्‍सा परिषद संशोधन विधेयक-2019 पारित हो गया। इस विधेयक का मक़सद देश में मेडिकल शिक्षा और चिकित्‍सा क्षेत्र में पारदर्शिता, जवाबदेही और प्रशासन में गुणवत्ता लाना है। सरकार के मुताबिक़ देश के नागरिकों को गुणवत्‍तापूर्ण स्‍वास्‍थ्‍य कवरेज़ देने के उद्देश्‍य को आगे बढ़ाने के लिए चिकित्‍सा शिक्षा के क्षेत्र में सुधार किया जा रहा है। सरकार का लक्ष्‍य आम आदमी को सक्षम और नैतिक स्‍वास्‍थ्‍य देखभाल उपलब्‍ध कराना है। इसके अलावा सरकार का कहना है कि इस विधेयक के ज़रिए अगले दो सालों में देश के स्‍वास्‍थ्‍य क्षेत्र में क्रांतिकारी सुधार होंगे।

भारतीय चिकित्‍सा परिषद संशोधन विधेयक-2019 में राष्‍ट्रीय चिकित्‍सा आयोग स्‍थापित करने का भी प्रावधान है। ये आयोग देश में मेडिकल शिक्षा और चिकित्‍सा क्षेत्र को नियंत्रित करेगा। साथ ही विधेयक में 26 सितम्‍बर 2018 से दो सालों के लिए संचालक मंडल को भारतीय चिकित्‍सा परिषद से अधिक अधिकार दिए गए हैं।

इस मौके पर स्‍वास्‍थ्‍य मंत्री हर्षवर्धन ने कहा कि देश में मेडिकल सीटों में क़रीब 15 हजार की बढ़ोत्तरी की गई है। इसके अलावा राष्ट्रीय स्वास्थ्य नीति 2017 के तहत साल 2025 तक स्‍वास्‍थ्‍य सेवाओं पर होने वाले खर्च को GDP का ढाई प्रतिशत तक बढाने का लक्ष्‍य तय किया है। स्‍वास्‍थ्‍य मंत्री के मुताबिक़ स्‍वास्‍थ्‍य सेवाओं पर सार्वजनिक खर्च में लगातार बढ़ोत्तरी हो रही है।

दरअसल दरअसल स्वास्थ्य का मतलब किसी व्यक्ति के बीमारियों और चोट जैसी समस्याओं से मुक्त रहना है। इसके अलावा कुछ और भी कारण हैं जिनके चलते हमारा स्वास्थ्य प्रभावित होता है। इन कारणों में स्वच्छ पानी, प्रदूषण-मुक्त वातावरण और भरपेट भोजन न मिलने जैसे कई महत्वपूर्ण कारण शुमार हैं। WHO के मुताबिक़ भी स्वास्थ्य केवल बीमारी या दुःख का होना ही नहीं है बल्कि स्वास्थ्य के लिए शारीरिक, मानसिक और सामाजिक तंदरुस्ती भी पूरी तरह से ज़रूरी है।

देश में मौजूद स्वास्थ्य संकट की मुख्य वजहों में बढ़ती जनसंख्या, प्रदूषण, ग़रीबी और खाद्य असुरक्षा जैसे महत्वपूर्ण कारक ज़िम्मेदार हैं। इसके अलावा डॉक्टरों और अस्पतालों की कमी, स्वास्थ्य पर कम खर्च और स्वास्थ्य सेवाओं के निजीकरण होने से स्वास्थ्य सेवाएं काफी महंगी हुई है। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय की ओर से जारी एक रिपोर्ट के मुताबिक़ भारत में औसतन एक डॉक्टर पर क़रीब 11 हज़ार की जनसंख्या निर्भर हैं। जबकि WHO के तय मानकों के मुताबिक़ 1 डॉक्टर पर सिर्फ 1 हज़ार जनसंख्या होनी चाहिए।

भारत में नागरिकों को स्वास्थ्य का अधिकार संविधान की धारा 21 के तहत मौलिक अधिकार के रूप में मिला हुआ है। सुप्रीम कोर्ट ने अपने कई फैसलों में स्वास्थ्य के अधिकार को जीवन का अधिकार बताया है। इसके अलावा संविधान का अनुच्छेद 47 भी राज्यों पर सार्वजनिक स्वास्थ्य के सुधार, पोषण स्तर में बढ़ावा और जीवन स्तर को बेहतर बनाने की ज़िम्मेदारी देता है।

2. दूसरी न्यूज़

केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री डॉ. रमेश पोखरियाल ने कल IIT मुंबई, IIT दिल्ली और भारतीय विज्ञान संस्थान को क्यूएस वर्ल्ड यूनिवर्सिटी रैंकिंग 2020 में शीर्ष 200 संस्थानों में अपनी जगह बनाने के लिए बधाई दी। केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री ने बधाई देते हुए कहा कि किसी भी राष्ट्र की सफलता का मार्ग उसके शैक्षिक संस्थाओं से होकर गुजरता है l इसके अलावा उन्होंने कहा कि हमारी शोध परियोजनाओं को स्थानीय मुश्किलों का हल का ढूंढना चाहिए। हमारा अनुसंधान हमारी ज़रूरतों के आधार पर केंद्रित होना चाहिए।

आपको बता दे कि पिछले महीने QS वर्ल्ड यूनिवर्सिटी रैंकिंग 2020 की लिस्ट जारी की गई थी। इस लिस्ट में भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान बॉम्बे 152वाँ स्थान हासिल करते हुए भारत का सर्वश्रेष्ठ विश्वविद्यालय बना है। इसके अलावा भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान दिल्ली और भारतीय विज्ञान संस्थान, बंगलूरू ने भी दुनिया के शीर्ष 200 प्रमुख संस्थानों की सूची में जगह बनाई है। ये दोनों संस्थान क्रमशः 182वें और 184वें स्थान पर हैं। ग़ौरतलब है कि भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान बॉम्बे लगातार दूसरे साल भारत का सर्वश्रेष्ठ विश्वविद्यालय बना हुआ है।

वैश्विक स्तर पर शीर्ष 1,000 शैक्षणिक संस्थानों की सूची में भारत के कुल 23 संस्थान शामिल हैं। इनमें IIT-मद्रास -271 वें, IIT-खड़गपुर -281 वें और IIT- कानपुर जैसे संस्थान 291 वें पायदान पर मौजूद हैं।

QS वर्ल्ड यूनिवर्सिटी रैंकिंग के बारे में बताएं तो ये एक ऐसा वैश्विक मंच है जो हर साल रैंकिंग जारी करता है। QS वर्ल्ड यूनिवर्सिटी रैंकिंग महत्वाकांक्षी पेशेवरों को उनके व्यक्तिगत और व्यावसायिक विकास को बढ़ावा देने के लिए एक प्रमुख वैश्विक कैरियर और शिक्षा नेटवर्क प्रदान करता है। QS संस्थानों में उपलब्ध संसाधनों के आधार पर रैंकिंग जारी करता है। QS वर्ल्ड यूनिवर्सिटी रैंकिंग में एशिया, लैटिन अमेरिका, उभरते यूरोप और मध्य एशिया व अरब क्षेत्र देशों के संस्थान शामिल होते हैं।

3. तीसरी न्यूज़

दुनिया भर में बढ़ती गर्मी की वजह से लोग प्रभावित है। पिछले हफ्ते यूरोप में चली गर्म हवाओं ने पिछले कई रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं। गर्म हवाओं के चलते जंगलों में आग ने भी जन जीवन को प्रभावित किया है। वर्ल्ड मेट्रोलॉजिकल आर्गेनाईजेशन WMO के मुताबिक़ यूरोप में तापमान ये बढ़ोत्तरी अफ्रीका से चलने वाली गर्म हवाओं के चलते हुई है। इन्हीं गर्म हवाओं का असर भारत, पाकिस्तान और मध्य पूर्व के भी कुछ हिस्सों पर पड़ा है।

हीटवेव की परिभाषा को अलग - अलग देश ने अपने से हिसाब से बनाया है। क्यूंकि हो सकता है किसी देश का तापमान जो जगह सबसे गर्म है वही तापमान किसी दूसरे देश के लिए सामान्य हो सकता है। भारतीय मौसम विभाग ने हीट वेव के लिए कुछ मानदंड तय किए हैं। मानदंडों के मुताबिक़ मैदानी इलाकों में 40 डिग्री सेल्सियस और पहाड़ी इलाकों में 30 डिग्री सेल्सियस तापमान की दशा को हीटवेव या लू कहा जाता है।

वैज्ञानिक इन हीट वेव्स के पीछे जलवायु परिवर्तन को कारण मान रहे हैं। जलवायु परिवर्तन औसत मौसमी दशाओं के पैटर्न में ऐतिहासिक रूप से बदलाव आने को कहते हैं। जलवायु परिवर्तन को लेकर लम्बे वक़्त से पूरा विश्व परेशान है। तेज़ी से बदलते मौसम, अकाल बाढ़, सूखा, और बेमौसम बारिश जैसी हैरान करने वाली घटनाये जलवायु परिवर्तन के ही कारण होती है। दरअसल पिछले कुछ सालों में ग्रीन हॉउस गैसों का उत्सर्जन काफी तेज़ी से बढ़ा है जिसके कारण हमारा इको सिस्टम बुरी तरह प्रभावित हो रहा है।

मौजूदा वक़्त में हमारे वातावरण को हानि पहुंचाने वाली गैसों मे Co2 -77 से 80% , मेथेन - 14 और नाइट्रस ऑक्साइड की 8 फीसदी मौजूदगी है। पर्यावरण विदों का मानना है की यदि इन ग्रीन हाउस गैसों की मात्रा में कमी नहीं की गई तो आने वाले समय में पृथ्वी पर मौजूद विशाल ग्लेशियर तेज़ी से पिघल कर समुद्री जल स्तर को बढ़ा सकते हैं। जिससे मानव जीवन के संकट और गहरे हो जायेंगे।

इस समय सबसे ज़्यदा कार्बन उत्सर्जन करने वाले देशों में चीन 27 प्रतिशत के साथ सबसे आगे है जबकि पेरिस जलवायु संधि से खुद को अलग करने वाला राष्ट्र अमेरिका 16 % के साथ दूसरे नंबर पर बना हुआ है। भारत का कार्बन उत्सर्जन में कुल 6 . 6 % योगदान हैं जिसे कम करने के लिए राष्ट्रीय सौर्य ऊर्जा मिशन, ग्रीन इंडिया मिशन और जल संरक्षण जैसे मिशनों पर भारत जोर दे रहा है।

दरअसल मौजूदा वक़्त में जलवायु परिवर्तन और उससे उत्पन्न संकट विश्व के सामने सबसे गंभीर समस्या है। जिससे निपटने के लिए सामूहिक प्रयास और उन्हें लागू करने की सख्ती दिखानी चाहिए ताकि जलवायु परिवर्तन की नीतियों को प्रभावी बना कर इस संकट का हल निकाला जा सके।

4. चौथी न्यूज़

पिछले कुछ दिनों से दुनिया की सबसे लोकप्रिय सोशल मीडिया साइट फेसबुक अपनी क्रिप्टो करेंसी लिब्रा को लेकर सुर्ख़ियों में हैं। फेसबुक ने ई-कॉमर्स और वैश्विक भुगतान प्रणाली के लिए लिब्रा करेंसी को लॉन्च करने की घोषणा की है। ख़बरों के मुताबिक ये क्रिप्टोकरेंसी साल 2020 की पहली छमाही में लॉन्च की जाएगी।

दरअसल फेसबुक की डिजिटल करेंसी लिब्रा एक 'क्रिप्टो करेंसी' है। क्रिप्टो करेंसी के बारे में बताएं तो ये एक डिजिटल करेंसी है। क्रिप्टोग्राफी प्रोग्राम पर आधारित एक ऑनलाइन मुद्रा है जिसे आभासी मुद्रा भी कहा जाता है। फेसबुक की डिजिटल करेंसी लिब्रा सार्वभौमिक, स्थायी और आसानी से लोगों और कारोबार के बीच स्थानांतरित की जा सकने वाली मुद्रा है। इसके लिए किसी स्थायी पेमेंट नेटवर्क की ज़रूरत नहीं होगी। फेसबुक ने लिब्रा के प्रबंधन के लिए 28 सहयोगियों के साथ मिलकर लिब्रा एसोसिएशन भी बनाया है। इसके अलावा फेसबुक कैलिब्रा नाम की एक सहायक कंपनी भी लॉन्च कर रहा है जो इसके क्रिप्टो लेन-देन को नियंत्रित करने का काम करेगी और लिब्रा भुगतान को फेसबुक डेटा के साथ जोड़ेगे नहीं। इस तरह से के डेटा की गोपनीयता का भी खयाल रखा गया है। इसे इस्तेमाल करने वाले लोग व्हाट्सएप और मैसेंजर के ज़रिए लिब्रा का उपयोग कर सकते हैं।

इसके अलावा इसके कुछ और भी फायदे गिनाए गए हैं जिनमें अगर कोई व्यक्ति दूसरे देश में जाता है या किसी दूसरे देश से किसी के पास पैसा आता है तो उसे उस देश की करेंसी में बदलना पडता है। लेकिन लिब्रा करेंसी में ऐसे कोई ज़रूरत नहीं है आप कहीं से भी इसका इस्तेमाल कर सकते हैं।

हालाँकि अभी ये करेंसी आधार में है। क्यूंकि इस करेंसी के भुगतान शुल्क का मसला अभी अटका हुआ है। भुगतान शुल्क विश्व बैंक द्वारा तय किया जायेगा। गौरतलब है कि किसी दूसरे देश से आने वाले पैसे की अदला बदली में मौजूदा औसत शुल्क 7 फीसदी है। लेकिन फेसबुक का दावा है कि इसके लेन - देन का शुल्क न के बराबर है।

आज के न्यूज़ बुलेटिन में इतना ही... कल फिर से हाज़िर होंगे एग्जाम के लिहाज़ से महत्वपूर्ण कुछ अहम ख़बरों के साथ...

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