Daily Audio Bulletin for UPSC, IAS, Civil Services, UPPSC/UPPCS, State PCS & All Competitive Exams (01, July 2019)


Daily Audio Bulletin for UPSC, IAS, Civil Services, UPPSC/UPPCS, State PCS & All Competitive Exams (01, July 2019)


बुलेटिन्स

1. आज पेश होगा केन्द्रीय शैक्षणिक संस्थान अध्यापक संवर्ग आरक्षण विधेयक, 2019 । मानव संसाधन विकास मंत्री डॉक्टर रमेश पोखरियाल लोकसभा में पेश करेंगे ये विधेयक
2. जल संचय और संरक्षण को लेकर प्रतिबद्ध है सरकार। आज से शुरू होगा जल शक्ति अभियान
3. GST क़ानून के पूरे हुए दो साल हुए। सरकार ने जारी किया GST 2.0 के तहत रिटर्न भरने की नई प्रणाली
4. और उत्तर कोरियाई शासक किम जोंग से मिले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प। उत्तर कोरिया जाने वाले पहले अमेरिकी राष्ट्रपति बने ट्रम्प

आइये अब ख़बरों को विस्तार से समझते हैं

1. पहली न्यूज़

लोकसभा में आज "केन्द्रीय शैक्षणिक संस्थान, अध्यापक संवर्ग आरक्षण विधेयक, 2019 पेश किया जाएगा। इस विधेयक के ज़रिये अध्यापकों की सीधी भर्ती में अनुसूचित जातियों, अनुसूचित जनजातियों और सामाजिक व शैक्षिक रूप से पिछड़े वर्गों से संबंधित लोगों की काफी पुरानी मांगों का हल होगा और संविधान के तहत उनके अधिकार सुनिश्चित होंगे। विधेयक के तहत आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के लिए भी 10 प्रतिशत आरक्षण भी मिलेगा।

इसके अलावा इस विधेयक के ज़रिए 200 प्वाइंट रोस्टर वाले शिक्षक संवर्ग में सीधी भर्ती से 7000 से अधिक मौजूदा रिक्तियों को भरे जाने की इजाज़त होगी। साथ ही संविधान का अनुच्छेद 14 यानी क़ानून के समक्ष समता समानता का अधिकार, अनुच्छेद 16 यानी सरकारी नौकरियों और सेवाओं में अवसर की समानता मुहैया कराने की ज़िम्मेदारी और जीवन का अधिकार प्रदान करने वाले अनुच्छेद 21 जैसे संवैधानिक प्रावधानों जैसे अधिकार भी इस विधेयक के ज़रिए सुनिश्चित होंगे।

ग़ौरतलब है कि प्रधानमंत्री की अध्यक्षता वाली केंद्रीय मंत्रिमंडल ने विश्वविद्यालय या कॉलेज को एक विभाग या विषय के बजाय एक इकाई मानते हुए केंद्रीय शैक्षिक संस्थान अध्यादेश, 2019 को मार्च महीने में मंजूरी दी थी। कुछ लोगों ने इस अध्यादेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती भी दी गई है। दरअसल, काफी दिनों से 13 पॉइंट रोस्टर को लेकर विवाद चल रहा था, जिसे देखते हुए केंद्र सरकार ने अध्यादेश लाकर अब उसके बजाय 200 पॉइंट रोस्टर को अनुमति दे दी।

रोस्टर एक तरीका होता है जिससे ये निर्धारित किया जाता है कि किसी विभाग में निकलने वाली वेकंसी किस वर्ग को मिलेगी। 13 पॉइंट रोस्टर के बारे में बताएं तो 13 पॉइंट रोस्टर एक ऐसा सिस्टम है जिसमें 13 वैकेंसीज को क्रमानुसार व्यवस्थित किया जाता है। इसमें पूरे विश्वविद्यालय को एकल यूनिट न मानकर सिंगल विभाग को इकाई माना जाता है। यानी इस व्यस्था के तहत शिक्षकों के कुल वैकेंसीज की गणना विश्वविद्यालय या कॉलेज के अनुसार नहीं बल्कि विभाग या विषय के हिसाब से की जाती है।

इसके अलावा केंद्र सरकार के निर्देश पर बनी प्रोफेसर काले कमेटी नें रिज़र्वेशन लागू करने के लिए 200 पॉइंट का रोस्टर बनाया है। ये रोस्टर 13 पॉइंट रोस्टर जैसा ही था लेकिन इसमें 13 वैकेंसीज के बजाय 200 वैकेंसीज को क्रमबद्ध तरीके से व्यवस्थित किया जाता है। 200 वैकेंसीज का एक क्रम पूरा होने के बाद यह फिर से 1,2,3,4 संख्या से शुरू हो जाएगी।

केन्द्रीय शैक्षणिक संस्थान अध्यापक संवर्ग आरक्षण विधेयक, 2019 200 प्वाइंट रोस्टर पर आधारित पहले के आरक्षण प्रणाली को कायम रखते हुए विश्वविद्यालय या महाविद्यालय को एक यूनिट के रूप में मानेगा। इसका मतलब ये है कि अब से शिक्षक संवर्ग में सीधी भर्ती में पदों के आरक्षण के लिए विश्ववि़द्यालय या शैक्षिक संस्थानों को यूनिट माना जायेगा, न कि विभाग को।

2. दूसरी न्यूज़

जल संरक्षण के तरीकों में तेज़ी लाने के लिए देशभर में आज से जल शक्ति अभियान की शुरुआत की जा रही है। जल शक्ति मंत्री गजेन्द्र सिंह शेखावत इस अभियान को हरी झंडी दिखाएंगे। जल शक्ति अभियान का मक़सद पानी बचाने और सिंचाई के दौरान जल प्रयोग के तरीके को और किफायती बनाना है। साथ ही तलाब और जल संचय ईकाइ जैसी परिसम्पत्तियों का निर्माण और जागरूकता अभियान पर इस योजना के तहत ज़ोर दिया जाएगा।

जल शक्ति अभियान के तहत ब्लॉक और ज़िला स्तर पर जल संरक्षण योजना का मसौदा तैयार किया गया है। देश में राष्ट्रीय जल संसाधन के सरंक्षण के लिए क़रीब ढाई सौ अधिकारियों को सूखे से प्रभावित ज़िलों का प्रभारी नियुक्त किया गया है। ये अधिकारी सूखे से प्रभावित 255 चुने हुए ज़िलों और पानी की कमी वाले क्षेत्रों में जाएंगे और जल संचय व संरक्षण के उपायों पर काम करेंगे। ये अभियान तीन मंत्रालयों द्वारा चलाए जायेंगे जिनमें जल शक्ति मंत्रालय, कृषि मंत्रालय और पर्यावरण मंत्रालय शामिल है।

भारतीय मौसम विभाग के मुताबिक़ किसी क्षेत्र में सामान्य से 25 फीसदी कम वर्षा होने पर सूखे की स्थिति पैदा हो जाती है। भारत में मानसून की अनिश्चितता तथा अनियमितता, अल-नीनो और ख़राब जल प्रबंधन जैसे कारक जल संकट के लिए ज़िम्मेदार माने जाते हैं।

मौजूदा वक़्त में भारत के कई इलाके भीषण जल संकट से गुजर रहे हैं। पिछले साल नीति आयोग द्वारा जारी ‘समग्र जल प्रबंधन सूचकांक’ के मुताबिक इस समय देश में 60 करोड़ लोग पानी की किल्लत से जूझ रहे हैं। स्वच्छ जल की उपलब्धता न होने के कारण हर साल तक़रीबन दो लाख लोगों की मौत हो जाती है। इसके अलावा दुनिया की 17% आबादी वाले भारत में पानी उपलब्ध कराना भी भारत के बड़ी चुनौती है, क्यूंकि हमारे पास विश्व का केवल 4% पानी ही मौजूद है।

3. तीसरी न्यूज़

वस्तु और सेवा कर यानी GST के लागू हुए आज दो साल पूरे हो गए। साल 2017 में आज ही के दिन पूरे भारत में GST क़ानून की शुरुआत हुई थी। GST क़ानून के 2 साल पूरा होने के मौके पर जीएसटी रिटर्न भरने की नई प्रणाली आज आज से प्रायोगिक आधार पर शुरु हो रही है। इस प्रणाली के ज़रिए छोटे करदाताओं को रिटर्न भरने में आसानी होगी। ख़बरों के मुताबिक़ GST रिटर्न दायर करने की नई प्रणाली के ज़रिए कारोबारियों को अब कई तरह के प्रारूप के बजाय महीने में सिर्फ एक बार ही एकल फॉर्मेट में ही रिटर्न भरना होगा।

सरकार का कहना है कि जब GST को डिजाइन किया गया तो रिटर्न के तीन फॉर्मेट थे और एक व्यापारी को महीने में क़रीब 36 रिटर्न भरने होते थे। इसके अतिरिक्त कई अन्य रिटर्न और ऑडिट रिपोर्ट भी होते थे। नई प्रणाली में सारी मुश्किलें दूर हो जाएंगी और महीने में सिर्फ एक बार रिटर्न भरना होगा। इससे बड़े करदाताओं को साल में 12 रिटर्न और छोटे करदाताओं को सिर्फ चार रिटर्न भरने होंगे।

दरअसल GST पूरे देश के लिए एक अप्रत्यक्ष कर है जो भारत को एकीकृत समान्य बाज़ार बनाने के लिहाज से तैयार किया गया है। GST विनिर्माता से उपभोगता तक माल और सेवाओं की आपूर्ति पर एकल कर है। GST कर अधार को विस्तार प्रदान करने और सहकारी संघवाद को बढावा देने में भी सक्षम है।

सरकार ने GST के के कई लाभ गिनाए हैं। जिनमें व्यवसाय और उद्योग के लिए सरल अनुपालन, कर दरों और ढांचों में एकरूपता, अधिक प्रतिस्पर्धा और विनिर्माताओं और निर्यातकों को लाभ मिलने जैसी बातें बताई गई हैं। सरकार के मुताबिक़ GST केंद्र और राज्य सरकारों के लिए सरल और सुकर है। GST के ज़रिए टैक्स चोरी पर लगाम लगी है साथ ही राजस्व में भी बढ़ोत्तरी हुई। इसके आलावा GST उपभोक्ताओं के लिए भी बेहतर बताई गई हैं, जिसमें माल और सेवाओं के मूल के प्रति एकल और पारदर्शी कर समानुपात और समग्र कर बोझ में राहत मिलने की बात कही गई है।

4. चौथी न्यूज़

अमेरिकी राष्ट्रपति ने उत्तर कोरिया के नेता किम जोंग के साथ कल मुलाक़ात की। ये दोनों नेता DMZ यानी डीमिलिट्राइज़्ड ज़ोन उत्तर कोरिया और दक्षिण कोरिया को अलग करने असैन्यकृत इलाक़े में मिले थे। ये अनोखी मुलाक़ात डोनल्ड ट्रंप के अचानक से किम जोंग उन को DMZ में मिलने का प्रस्ताव देने के बाद हुई है।

इससे पहले ट्रंप और किम की ऐतिहासिक मुलाक़ात पिछले साल सिंगापुर में हुई थी। इस मुलाक़ात में परमाणु निरस्त्रीकरण को लेकर उत्तर कोरियाई शासक किम जोंग अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के फैसले से सहमत थे। लेकिन इस मुद्दे पर उत्तर कोरिया ने कोई ठोस क़दम नहीं उठाया। इसके अलावा दोनों नेता इसी साल फ़रवरी में हनोई में हुई बैठक में मिले थे। उम्मीद की जा रही थी कि इस बैठक में दोनों नेता किसी नतीज़े पर पहुंचेंगे लेकिन लेकिन ये वार्ता पूरी तरह से नाक़ाम रही।

उत्तर कोरिया पिछले क़रीब 2 दशकों से परमाणु परीक्षण कर रहा है। परमाणु परीक्षणों के चलते ही संयुक्त राष्ट्र और अमेरिका ने उत्तर कोरिया पर कई प्रतिबन्ध लगाए हैं। मौजूदा समय में उत्तर कोरिया के हालात काफी ख़राब हैं। आर्थिक प्रतिबंधों के कारण उत्तर कोरियाई अर्थव्यवस्था संकट में है। 2017 में आई संयुक्त राष्ट्र की एक रिपोर्ट के मुताबिक़ भी उत्तर कोरिया के लोग लंबे समय से खाद्य असुरक्षा का सामना कर रहे हैं।

दरअसल कोरियाई प्रायद्वीप में मौजूद संकट काफी पुराना है। 1910 से 1945 तक कोरिया जापान के कब्ज़े में था। लेकिन 1945 में द्वितीय विश्व युद्ध के समाप्त होने के बाद कोरियाई प्रायद्वीप उत्तर और दक्षिण दो हिस्सों में बंट गया। 1948 तक आते आते इन दोनों इलाक़ों को एक अलग देश के रूप में मान्यता भी मिल गई। अलग देश बनने के बाद 1950 में उत्तर कोरिया ने रूस और चीन की मदद से दक्षिण कोरिया पर आक्रमण कर दिया। दक्षिण कोरिया पर हुए हमले का अमेरिका समेत 16 अन्य संयुक्त राष्ट्र गठबंधन के देशों ने मिलकर जवाब दिया। जिसके बाद कोरियाई प्रायद्वीप में लगभग 3 साल तक युद्ध चलता रहा।

जुलाई 1953 को हुए युद्धविराम के ऐलान बाद से ही उत्तर कोरिया और दक्षिण कोरिया के बीच तनाव बना हुआ था। लेकिन साल 2018 की शुरुआत में उत्तर और दक्षिण कोरिया के राष्ट्राध्यक्षों के बीच हुई मुलाक़ात के बाद से ही कोरियाई प्रायद्वीप में तनाव कम होने के कयास लगाए जा रहे हैं। अमेरिका और उत्तर कोरिया में हुई बातचीत भी कोरियाई प्रायद्वीप में कम हुए तनाव का ही नतीज़ा है। कोरियाई प्रायद्वीप में चले तनाव के पीछे कई और देशों का भी हाथ रहा है। एक ओर जहां चीन और रूस उत्तर कोरिया के समर्थन में हैं तो वहीं जापान और अमेरिका समेत कई और भी देश दक्षिण कोरिया के साथ हैं।

आज के न्यूज़ बुलेटिन में इतना ही... कल फिर से हाज़िर होंगे एग्जाम के लिहाज़ से महत्वपूर्ण कुछ अहम ख़बरों के साथ...

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