बिहार लोक सेवा आयोग मुख्य परीक्षा पाठ्यक्रम - वैकल्पिक विषय "भू-विज्ञान" (Bihar Public Service Commission (BPSC) Mains Exam Syllabus - Optional Subject "Geology"


बिहार लोक सेवा आयोग मुख्य परीक्षा पाठ्यक्रम - वैकल्पिक विषय "भू-विज्ञान" (Bihar Public Service Commission (BPSC) Mains Exam Syllabus - Optional Subject "Geology"


खण्ड- I (Section - I)

(सामान्य भू-विज्ञान, भू-आकृति विज्ञान संरचनात्मक भू-विज्ञान, जीवाश्म विज्ञान और स्तरिकी)

1. सामान्य भू-विज्ञान- भूगति विज्ञान से सम्बद्ध ऊर्जा की गतिविधि, भूमि का उद्गम और अंतस्थ, भूमि के विभिन्न विधि और काल द्वारा चट्टानों की तिथि निर्धारण। ज्वालामुखी के कारण और उत्पत्ति, ज्वालामुखी मेखलाएँ, भूचाल ज्वालामुखी मेखलाओं से संबद्धकरण और भू-वैज्ञानिक प्रभाव तथा फैलाव। मुद्रीणी तथा उनका वर्गीकरण। द्वीप-द्वीपचापों, संभीर सागर खाइयाँ तथा मध्य-महासागरीय कटक समस्थितिक पर्वतों - प्रकार और उद्गम, महाद्वीप बहाव का संक्षिप्त विचार, महाद्वीपों तथा सागरों की उत्पत्ति, वायु तंरगों और भू-वैज्ञानिक समस्याओं से इसका लगाव।

2. भू-आकृति विज्ञान- प्रारभ्भिक सिद्वांत तथा महत्व। भू-आकृति और प्रक्रिया तथा पैरामीटर भू-आकृतिक चक्रों तथा उनके प्रतिपादन, उन्मुक्ति गुण, स्थलाकृति संरचनाओं और अश्म विज्ञान से इनका संबंध, बड़ी भू-आकृतियाँ, अपवहनता, भारतीय उपमहाद्वीप के भू-प्राकृतिक गुण। छोटानागपुर पठार के भू-आकृतिक गुण।

3. संरचनात्मक भू-विज्ञान- दबाव तथा भार दीर्घबतज तथा चट्टान विरूपण। वलन और भ्रंशन का मैकेनिकल लाइनर और प्लानर संरचनाएँ और उत्पत्तिमूलक महत्व। पेट्रीफैब्रिक विश्लेषण और इसका भू-वैज्ञानिक समस्याओं से मानचित्रीय प्रतिवेदन और लगाव। भारत का विवर्तनिकी ढांचा।

4. जीवाश्म विज्ञान- सूक्ष्म तथा वृहत्-जीवाश्म जीवारना का संरक्षण और उपयोगिता, नाम पद्धति के वर्गीकरण का सामान्य विचार। स्नायाविक उद्वव और इस पर पुरा सात्विकी अध्ययन का प्रभाव।

आकृति विज्ञान ब्राकिपोड्स, विवालब्स गैस्ट्रोपोड्स, अम्मोनोइड्स, ट्रिलोवाइट्स, एचिनोइड्स तथा कोरलस की विकासवादी प्रवृद्धि का भू-वैज्ञानिक इतिहास सहित वर्गीकरण।

पृष्ठावंशियों के प्रधान समूह तथा उनके आकृति गुण। गुणों से पृष्ठावंश जीवन, डायनोसोर, सिवालिक पृष्ठावंश। अश्वों, हाथियों तथा मानव का विस्तृत अध्ययन। गोंडवाना फ्लोरा और इनके महत्व।

सूक्ष्म जीवाश्मों के प्रकार तथा उनके तेल की गवेषणा के विशेष सन्दर्भ सहित महत्व।

5. स्तरिकी- स्तरिकी के सिद्धांत। स्तरीय वर्गीकरण तथा नाम पद्धति। स्तरिकीय मानक माप, भारतीय उपमहाद्वीप के विभिन्न भू-वैज्ञानिकों पद्धति का विस्तृत अध्ययन, भारतीय आकृति विज्ञान की सीमा समस्याएँ। विभिन्न भू-वैज्ञानिक पद्धतियों की उनके प्रकार क्षेत्र में स्तरीकी की रूप रेखा। भारतीय उप-महाद्वीप की भूतकाल की अवधि। संक्षिप्त जलवायु और आग्नेय क्रियाकलापों का अध्ययन। पूरा भौगोलिक पुनर्निर्माण।

:: खण्ड- II (Section - II) ::

(स्फट रूपिकीः, खनिज विज्ञान, शैल विज्ञान, आर्थिक भू-विज्ञान एवं प्रयुक्त भू-विज्ञान)

1. स्फट रूपिकीः- स्फटात्मक तथा अस्फाटात्मक तत्व, विशेष ग्रुप प्रवास समिति। समिति की 32 श्रेणियों में स्फटी का वर्गीकरण। स्फटरूपिकी संकेतना की अंतर्राष्ट्रीय पद्धति, स्फट समिति को विज्ञत करने के लिए त्रिविम प्रक्षेप। यमलन तथा यमल-जनन विधियाँ। स्फट अनियमितताएँ। स्फिट अध्ययन के लिए एक्स किरणों का उपयोग।

2. प्रकाशीय खनिज विज्ञानः- प्रकाश के सामान्य सि़द्धांत, समदेशिक और अनिसोट्रोपिज्म दृष्टि सूचिका की धारणा, तकर्वन्ता, व्यतिकरण रंग तथा निर्वापण स्फटों में दृष्टि में दिगविन्यास, विश्लेषण अतिरिक्त दृष्टि।

3. खनिज विज्ञानः- क्रिस्टल रसायन के तत्व बंधक के प्रकार। आयोनीक्रेडी सहन्वय संख्या, आइसोमाॅर्फिज्म, पाॅलिमाॅर्फिज्म तथा स्यूडो माॅर्फिज्म। सिलीकेट का रचनात्मक वर्गीकरण। चट्टान बनाने वाले खनिजों का विस्तृत अध्ययन, उनका भौतिक, रासायनिक तथा प्रकाशीय गुण तथा उनके प्रयोग, यदि कोई हो, इन खनिजों के उत्पादों के परिवर्तनों का अध्ययन।

4. सैलविज्ञानः- मैगमा, इसका प्रजनन, स्वभाव तथा संयोजन। बाइनरी तथा टर्नरी पद्धति का साधारण फेज का डायग्राम तथा उनका महत्व, वोबिन प्रतिक्रिया सिद्धांत, मैगमेटिक विनेदीकरण, आत्मयात्करण। बनावट तथा संरचना और उनकी पाषाण, उत्पति, महत्व, आग्नेय चट्टानों का वर्गीकरण, भारत के महत्वपूर्ण चट्टान टाईप की पेट्रोग्राफी तथा पेट्रोजेनेसिस, ग्रेनाइट्स, कार्नोकाइट्स, एनोर्थोसाइटस तथा क्षारीय चट्टान।

तलछट चट्टानों के बनावट की प्रक्रियाएँ, डाइजेनेसिस तथा लिथिफिकेशन, बनावट तथा संरचना और उसका महत्व, आग्नेय चट्टानों का वर्गीकरण, क्लास्टिक तथा नन-क्लस्टिक। भारी खनिज और उसका महत्व। जमाव पर्यावरण के आरम्भिक सिद्धांत। आग्नेय का अग्रभाग तथा उत्पत्ति स्थान, सामान्य चट्टान प्रकारों के शिलालेख।

रूपान्तरण का परिवर्तन, रूपान्तरण के प्रकार, रूपान्तरिक गे्रड, जोन तथा अग्रभाग। ए॰सी॰एफ॰, ए॰के॰एफ॰ तथा ए॰एफ॰एम॰ आकृति। चट्टानों के रूपान्तरण की बनावट, संरचना तथा नामांकण, महत्वपूर्ण चट्टानों के शिला या शैल जनन।

5. आर्थिक भू-विज्ञान- कच्चे धातु का सिद्धांत, धातु खनिज तथा विधातु, कच्चे धातु की गतिविधि, खनिज संग्रहों की बनावट की प्रक्रिया, कच्चे धातु का वर्गीकरण, कच्चे धातु संग्रह ज्ञान का नियंत्रण, मेटालीजेनेटिक इपीह, महत्वपूर्ण धातु संबंधी बिना धातु संबंधी संग्रह, तेल तथा प्राकृतिक गैस, क्षेत्र, भारत के कोयला क्षेत्र। भारत की खनिज सम्पदा, खनिज अर्थ, राष्ट्रीय खनिज नीति, खनिजों की सुरक्षा तथा उपयोगिता।

6. प्रयुक्त भू-विज्ञान- आशाजनक और यंत्र कला प्रधानताएँ। खनन विज्ञान की प्रधान पद्धति, नमूना कच्चा धातु भंडारण तथा लाभ अभियांत्रिक कार्यों में भू-विज्ञान का प्रयोग।

मृदा तथा भूमिगत जल - भू विज्ञान। बिहार के भूमिगत जल प्रदेश। भू-वैज्ञानिक गवेषण में वायु सम्बन्धी चित्रों का प्रयोग।

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Courtesy: BPSC