बिहार लोक सेवा आयोग मुख्य परीक्षा पाठ्यक्रम - वैकल्पिक विषय "वाणिज्यिक शास्त्र तथा लेखा विधि" (Bihar Public Service Commission (BPSC) Mains Exam Syllabus - Optional Subject "Commerce and Accountancy"


बिहार लोक सेवा आयोग मुख्य परीक्षा पाठ्यक्रम - वैकल्पिक विषय "वाणिज्यिक शास्त्र तथा लेखा विधि" (Bihar Public Service Commission (BPSC) Mains Exam Syllabus - Optional Subject "Commerce and Accountancy"


खण्ड- I (Section - I)

लेखा कार्य तथा वित्त (Accounting and Finance)

भाग- 1 लेखा कार्य, लेखा परीक्षा तथा कराधान

वित्तीय सूचना पद्धति के रूप में लेखा कार्य - व्यावहारात्मक विज्ञानों का प्रभाव - वर्तमान क्रय शक्ति लेखाकरण के विशिष्टि सन्दर्भ में बदलते कीमत दर के लेखाकरण की पद्धति कंपनी लेखा की प्रगत समस्याएं, कंपनियों क्रय समामेलन, अन्तर्लयन तथा पुनर्गठन नियंत्रक कंपनियों का लेखा कार्य शेयरों और गुडविल (सुनाम) का मुख्यांकन नियंत्रकों का कार्य सम्पत्ति, नियंत्रण सांविधिक तथा प्रबंध।

आयकर अधिनियम, 1961 के प्रमुख उपबंध- परिभाषाएँ- आयकर, लगाना, छूट मूल्यह्रास तथा निवेश छूट विभिन्न मदों के अधीन आय के अभिकलन की सरल समस्या तथा कर निर्धारण योग्य आय का निश्चयन आयकर अधिकारी।

लागत लेखा विधिक का स्वरूप तथा कार्य- लागत वर्गीकरण- अर्द्धपरिवत्र्ती लागतों के स्थिर और परिवत्र्ती घटकों के बीच बांटने की प्रविधि- जांच लागत का निर्धारण पिको तथा उत्पादन का समकक्ष इकाइयों के परिकलन की भारित औसत पद्धति लागत तथा वित्तीय लेखाओं का समाधान सीमांत लागत निर्धारण लागत परिमाण लाभ संबंध बीजगणीतीय सूत्र तथा आलेखीय चित्रण मूल बिन्दु- लागत नियंत्रण तथा लागत घटाव की प्रविधि- बजट नियंत्रण लचीला बजट मानक लागत का निर्धारण तथा प्रसारण विश्लेषण दायित्व लेखा विविध-उपरि व्यय लगाने के आधार तथा उनके अन्तर्निहित दोष- कीमत तय करने के निर्णय के लिए लागत निर्धारण।

सांक्षांकन कार्य का महत्व। लेखा परीक्षण कार्य का प्रोग्राम बनाना परिसम्पत्ति का मूल्यांकन तथा सत्यापन स्थायी छपी तथा चालू परिसम्पत्ति देनदारियों का सत्यापन, सीमित कंपनियों की लेखा परीक्षा लेखा परीक्षा की नियुक्ति पदप्रतिष्ठा शक्ति, कर्तव्य तथा दायित्व लेखापरीक्षक की रिपोर्ट शेयर पूंजी की लेखा परीक्षा तथा शेयरों का हस्तांतरण बैंकिंग और बीमा कंपनियों की लेखा परीक्षा की विशेष बातें।

भाग- 2 व्यापार वित्तीय तथा वित्तीय संस्थायें।

वित्त प्रबन्ध की अवधारणा तथा विषय क्षेत्र नियमों के वित्तीय लक्ष्य पूंजीगत बजट बनाना, अनुमानाश्रित नियम तथा बट्टागत नकदी प्रवाह सम्बन्धी उपागम, निवेश निर्णयों में अनिश्चितता का समावेश ईष्टतम पूंजी। संरचना का अभिकल्पन- पूंजी की भारित औसत लागत तथा अल्पकालिक, मध्यकालिक तथा दीर्घकालिक वित्त जुटाने के मोदीगतियानी तथा मिलर माॅडल स्रोतों से संबंधित विवाद सार्वजनिक तथा परिवर्तनीय डिवेंचरों की भूमिका- ऋण इक्विटी अनुपात के संबंध में प्रतिमान तथा निदेशक संकेत इष्टतम लाभांश नीति के नियामक तत्व जैम्स ईबातर और जान लिटनर का प्रतिरूपों (माॅडलों) की इष्टतम रूप देना, लाभांश के भुगतान के फार्म कार्यशील पूंजी का ढांचा तथा विभिन्न घटकों के स्तर को प्रभावित करने वाले चार कार्यशील पूंजी के पूर्वानुमान का नकदी प्रवाह दृष्टिकोण भारतीय उद्योगों में कार्यशील व पूंजी का पाश्र्वचित्र-उधार प्रबंध या उधार नीति वित्तीय आयोजना और नकदी।

प्रवाह वितरण के संबंध में कर का विचारण।

भारतीय द्रव्य का भार का संगठन तथा कमियाँ- वाणिज्यिक बैंकों की परिसम्पत्तियों तथा देयताओं की संरचना- राष्ट्रीयकरण की उपलब्धियाँ तथा विफलातएँ- क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक उधार से सम्बद्ध अनुवर्ती कार्यवाही पर टंडन पी.एल, अध्ययन दल की सिफारिशों 76 तथा पीरे के. वी. समिति द्वारा इनका संशोधन, 1979- भारतीय रिजर्व बैंक का मुद्रा तथा उधार सम्बन्धी नीतियों का मूल्यांकन-भारतीय पूँजी बाजार के संघटक अखिल भारतीय स्तर संबंध को वित्तीय संस्थाओं (आई.डी.बी.आई., आई.एफ.सी.आई., आई.सी.आई.सी.आई. और आई.आर.सी.आई.) के कार्य और कार्य संचालन विधि- भारतीय जीवन बीमा निगम तथा भारतीय यूनिट ट्रस्ट की निवेश नीतियाँ स्टॉक एक्सचेंजों की वर्तमान स्थिति तथा उनका विनियमन।

परक्राम्य लिखित अधिनियम, 1981 के उपबन्ध अदाकर्ता गता वसूली बैंकरों के सांविधिक संरक्षण के विशेष सन्दर्भ में रेखांकन तथा पृष्ठांकन बैंकों के चार्टरीकरण पर्यवेक्षण तथा विनियमन से सम्बद्ध बैंकिंग विनियमन अधिनियम, 1949 के विशिष्ट उपबन्ध।

खण्ड- II (Section - II)

संगठन सिद्धांत तथा औद्योगिक संबंध (Organization Theory and Industrial Relations)

भाग- 1- संगठन सि़द्धांत

संगठन की प्रगति तथा आधारण- संगठन के लक्ष्यः प्राथमिक एवं द्वितीय लक्ष्य, एकल तथा बहुल लक्ष्य, उपाय, श्रृंखला लक्ष्यों का विस्थापन, अनुक्रमण, विस्तार गथा वसुलीकरण- औपचारिक संगठन प्रचार संरचना लाइन और स्टाफ, कार्यात्मक, आधारों तथा परियोजना- अनौपचारिक संगठन- कार्य तथा सीमायें।

संगठन सिद्धांत का विकास शास्त्रीय नव शास्त्रीय तथा प्रणाली उपक्रम नौकरशाही शक्ति का स्वरूप तथा आधार, शक्ति के स्रोत शक्ति संरचना द्वारा राजनीति-गतिक प्रणाली के रूप में संगठनात्मक व्यवहार, तकनीकी सामाजिक तथा शक्ति प्रणालियाँ-अंतःसंबंध और अंतरक्रियाएँ, प्रत्याग-स्थिति प्रणाली - मैस्लो मोगे्रनर, हर्जवर्ग, लिकेर्ट, ब्रूम, पोर्टर तथा लालर के सैद्धांतिक तथा अनुभदाक्षित आधार अभिप्रेरण के आदन और हुमन मोडल मनोबल तथा उत्पादकता, नेतृत्व सिद्धांत तथा मनोबली संगठनों में संधर्म प्रबंध- संव्यवहारात्मक विश्लेषण- संगठन में संस्कृति का महत्व, तर्कबुद्धि की सीमाएँ, साईमन मार्क उपागम। संगठनिक परिवर्तन, अनुकूलन, वृद्धि और विकास संगठनिक नियंत्रण तथा प्रभाविकता।

भाग- 2 औद्योगिक संबंध

औद्योगिक सम्बन्धों का स्वरूप और विषय क्षेत्र- भारत में औद्योगिक श्रम तथा उसकी प्रतिवद्धता- सम्वाध्य के सिद्धांत- भारत में श्रमिक संघ आंदोलन, सवं ृद्धि तथा संरचना- बाहरी नेतृत्व की भूमिका, श्रमिकों की शिक्षा तथा अन्य समस्याएँ- सामूहिक सौदेबाजी उपागमन स्थितियाँ, सीमाएँ और भारतीय परिस्थितियों में उनकी प्रभाविकता।

वाणिज्य तथा लेखा विधि

प्रबंध में श्रमिकों की भागीदारी, दर्शन, तर्कोधार, वर्तमान स्थिति और भावी सम्भावनाएँ।

भारत में औद्योगिक विवादों का निवारण तथा समाधान निवारक उपाय समाधन तंत्र तथा व्यवहार में आने वाले अन्य उपाय- सार्वजनिक उद्यमों में औद्योगिक संबंध-भारतीय उद्योगों में अनुपस्थिति तथा श्रमिक परिवर्धन सापेथ मजदूरियों तथा मजदूरी विभेदक तत्व, भारत में मजदूरी नीति- बोनस का प्रश्न- अंतर्राष्ट्रीय श्रम संगठन और भारत-संगठन में कार्मिक विभाग की भूमिका- कार्यकारी (एक्जीक्यूटिव) विकास, कार्मिक नीतियाँ, कार्मिक लेखा परीक्षा और कार्मिक अनुसंधान।

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Courtesy: BPSC