(राष्ट्रीय मुद्दे) केरल में बाढ़ : प्राकृतिक या मानवीय? (Kerala Flood: Natural Or Man-made?)


(राष्ट्रीय मुद्दे) केरल में बाढ़ : प्राकृतिक या मानवीय? (Kerala Flood: Natural Or Man-made?)


मुख्य बिंदु:

  • केरल में महज एक पखवाड़े में हुई बारिश ने पूरे राज्य को तहस-नहस करके रख दिया है। राज्य के 14 में से 12 जिले बाढ़ की त्रासदी से जूझ रहे हैं।
  • केरल में बाढ़ की भयावह स्थिति को देखते हुए भारत सरकार ने इसे ‘गंभीर प्रकृति की आपदा’ घोषित किया है जिससे विभिन्न रूपों में राष्ट्रीय सहायता का मार्ग प्रशस्त हो गया है।
  • सभी नदियां उफन रही हैं सारे बांध खोल दिए गए हैं।
  • केरल में आई बाढ़ से अब तक कम से कम 373 लोगों की मौत हो चुकी है और राज्य में करीब 1400 घर पूरी तरह तबाह हो चुके हैं. माना जा रहा है कि अब तक 20 हजार करोड़ रुपये का नुकसान हो चुका है.
  • केरल में राहत, बचाव एवं पुनर्निर्माण कार्यों के लिये देश दुनिया के विभिन्न राज्यों ने आर्थिक सहायता की खबरें भी विशेष रूप से काफी चर्चा में रही हैं।
  • विभिन्न विदेशी सरकारों ने केरल में राहत, बचाव एवं पुनर्निर्माण कार्यों के लिये विभिन्न प्रस्ताव दिए जिसमें संयुक्त अरब अमीरात से लगभग 700 करोड़ रुपये तथा मालदीव ने लगभग 35 लाख रुपये तक की आर्थिक सहायता की पेशकश की गई है।
  • इसके अलवा संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) ने केरल के बाढ़ प्रभावित इलाकों में मदद हेतु एक कमेटी बनाने की भी घोषणा की।
  • इसमें पर्यावरणीय कानूनों की अनदेखी से लेकर बांधों को देर से खोलने जैसी वजहें सामने आ रही हैं.
  • केरल में इस मॉनसून सीजन में 42% ज्यादा बारिश हुई. 3 जिलों को छोड़कर बाकी के 11 जिलों में सामान्य से ज्यादा बारिश हुई.
  • इडुक्की में सबसे ज्यादा बारिश हुई जो कि सामान्य से 92% ज्यादा दर्ज की गई. पलक्कड में 72% तो कोट्टायम में 51% ज्यादा बारिश हुई.
  • बांधों से बड़ी मात्रा में अचानक पानी छोड़ने से हालात और बिगड़ गए.
  • 100 साल पहले 1924 में आई बाढ़ ने लगभग इसी तरह केरल को डुबो दिया था।
  • 1924 में लगातार तीन हफ्तों तक आसमान से 3368 मिमि पानी गिरा था। मुलापेरियार बांध टूट गया था, कारिंथिरी मलाई नामका पूरा पहाड़ ही इस बाढ़ में बह गया था। हजार से ज्यादा लोग इस बाढ़ में मारे गए थे।
  • वैज्ञानिक माधव गाडगिल ने कहा है कि केरल में आई आपदा की वजह मानवीय भी है. उन्होंने कहा है कि अत्यधिक बारिश के अलावा केरल में पिछले कुछ सालों में हुआ विकास भी इस बाढ़ की विभीषिका को न झेल पाने की वजह बना है.
  • वैज्ञानिक माधव गाडगिल ने कहा है कि केरल में आई आपदा की वजह मानवीय भी है. उन्होंने कहा है कि अत्यधिक बारिश के अलावा केरल में पिछले कुछ सालों में हुआ विकास भी इस बाढ़ की विभीषिका को न झेल पाने की वजह बना है.
  • इस इलाके के पर्यावरण को लेकर केंद्र सरकार ने माधव गाडगिल समिति गठित की थी. इस समिति की रिपोर्ट 2011 तक आ गई थी, लेकिन यह जारी नहीं हो सकी. अंत में न्यायालय ने इन सिफारिशों पर काम करने के लिए सरकार को दिशा-निर्देश जारी किए।
  • तब सरकार ने आगे की दिशा तय करने के लिए कस्तूरीरंगन समिति का गठन किया, जिसने अप्रैल, 2013 में अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंप दी। प्रसिद्ध अंतरिक्ष वैज्ञानिक और योजना आयोग के सदस्य के. कस्तूरीरंगन की अध्यक्षता वाले नौ सदस्यीय समूह का गठन केरल सहित कई राज्यों के विरोध को देखते हुए पर्यावरण मंत्रालय ने किया था।
  • गाडगिल समिति और कस्तूरीरंगन समिति की रिपोर्ट में तीन मुख्य अंतर हैं:
  • गाडगिल समिति ने तो पूरे पश्चिमी घाट को ही ईएसजेड के तौर पर चिह्नित किया है। कस्तूरीरंगन समिति ने ईएसजेड के तहत पश्चिमी घाट के 37 प्रतिशत हिस्से को चिह्नित किया है, जो 60,000 हेक्टेयर का है और यह गाडगिल समिति के प्रस्तावित 1,37,000 हेक्टेयर से कम है।
  • संरक्षित क्षेत्र में चलाई जाने वाली गतिविधियों की अनुमति की सूची दोनों के बीच अंतर का दूसरा बिंदु है। इस मामले में गाडगिल समिति की सिफारिशें काफी व्यापक हैं, जिसमें कृषि क्षेत्रों में कीटनाशकों और जीन संवर्धित बीजों के उपयोग पर प्रतिबंध से लेकर पनबिजली परियोजनाओं को हतोत्साहित करना और वृक्षारोपण के बजाय प्राकृतिक वानिकी को प्रोत्साहन देने जैसी सिफारिशें शामिल हैं। लेकिन कस्तूरीरंगन समिति ने इस सूची को अधिक महत्त्व नहीं दिया।
  • गाडगिल समिति ने एक राष्ट्रीय प्राधिकरण की सिफारिश की है, जिसमें राज्य और जिला स्तर पर भी प्रतिनिधि हों। वहीं कस्तूरीरंगन समिति ने पर्यावरणीय मंजूरी के वर्तमान ढांचे को ही मजबूत बनाने और एक अत्याधुनिक निगरानी एजेंसी बनाने की सिफारिश की है।
  • पर्यावरण मंत्रालय ने कस्तूरीरंगन समिति द्वारा की गई सभी प्रमुख सिफारिशें स्वीकार कर लीं

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