(राष्ट्रीय मुद्दे) आपदाएं और हमारी तैयारियां (Disasters and Our Preparedness)


(राष्ट्रीय मुद्दे) आपदाएं और हमारी तैयारियां (Disasters and Our Preparedness)


एंकर (Anchor): कुर्बान अली (पूर्व एडिटर, राज्य सभा टीवी)

अतिथि (Guest): प्रोफेसर सी.के. वार्ष्णेय (पर्यावरण मामलों के जानकार), प्रो. संतोष कुमार (पूर्व निदेशक-सार्क आपदा प्रबंधन केंद्र)

सन्दर्भ:

बाढ़ हो या भूकंप या फिर सुनामी, किसी भी तरह की प्राकृतिक आपदा कई मायनों में हमारी तैयारियों की असली परीक्षा होती है  | हर आपदा के बाद एक सवाल उभरकर हमारे सामने हमेशा आता है क़ि किसी भी आपदा के मद्देनज़र हमारी तैयारियां किस तरह की थी ? हर त्रासदी से हमने क्या सीखा ? दुनिया के किसी भी देश की तरह हमारे देश में भी आपदा प्रबंधन को लेकर कड़े इंतज़ाम हैं लेकिन सवाल ये कि हमारे ये इंतज़ाम कितने पुख्ता हैं ?

आज़ादी के बाद से ही भारत में प्राकृतिक आपदाओं कि तैयारियों पर खासा ध्यान दिया गया , लेकिन साल 2005 में आपदा प्रबंधन अधिनियम 2005 के ज़रिये आपदा प्रबंधन के क्षेत्र में व्यापक पहल की गई | इस कानून के तहत कुदरती और मानव निर्मित आपदाओं से निपटने के लिए अलग अलग एजेंसियों की भूमिकाएं तय की गयीं हैं | देश में आपदा प्रबंधन से जुडी सभी एजेंसियां गृह मंत्रालय के अधीन काम करती हैं  | हमारे देश में किसी भी आपदा से निपटने के लिए तीन स्तरीय व्यवस्था की गई है- जिला स्तर पर डिस्ट्रिक्ट डिजास्टर मैनेजमेंट अथॉरिटी यानि DDM होती है  | ये जिला कलेक्टर के अधीन काम करती है | दुसरे स्तर पर स्टेट डिजास्टर मैनेजमेंट अथॉरिटी होती है , राज्य के मुख्यमंत्री इसके मुखिया होते हैं  | तीसरे स्तर पर नेशनल डिजास्टर मैनेजमेंट अथॉरिटी होती है , प्रधानमंत्री इसके प्रमुख होते हैं  | ये सभी एजेंसियां समय समय पर आपदा प्रबंधन कि तैयारियों की समीक्षा करती हैं  | इसके अलावा प्राकृतिक त्रासदी की सूरत में हालात से निपटने के लिए रोड मैप भी तैयार करती हैं |

भारत में किसी भी तरह की आपदा से निपटने के लिए नेशनल डिजास्टर रिस्पांस फाॅर्स यानि NDRF का गठन भी किया गया है | किसी भी बड़ी त्रासदी की सूरत में भारतीय सेना, अर्ध सैनिक बल, राज्य पुलिस बल, फायर ब्रिगेड और सिविल डिफेन्स की मदद भी ली जाती है |

साल 2013 में उत्तराखंड बाढ़, 2014 में जम्मू कश्मीर में आयी बाढ़ और पिछले साल असम कि बाढ़ के दौरान भारतीय सेना और अर्ध सैनिक बलों के अलावा आपदा प्रबंधन टीमों ने राहत और बचाव के काम में उल्लेखनीय योगदान दिया  |प्राकृतिक आपदाओं से निपटने के लिए दुनिया भर में कई स्थानीय तरीके इज़ाद किये गए हैं - भूकंप से निपटने में जापान, बर्फ़बारी के मामले में अमेरिका , समुद्री तूफानों से लड़ने में ऑस्ट्रेलिया देशों का काम काबिले तारीफ है |

हालांकि अक्सर कुदरत के आगे इंसानी तैयारियां बौनी साबित हो जाती हैं  | कई बार राहत पहुँचाने में देर और समुचित सहायता न पहुंचने जैसी शिकायतें भी मिलती हैं  | ऐसी खामियों से निपटने के लिए स्थानीय स्तर पर भी पुख्ता इंतज़ाम होने जरूरी हैं | जानकारों के मुताबिक़ आपदा प्रबंधन का दायरा काफी व्यापक है इसलिए आपदा से निपटने के लिए तैयारियों की सतत समीक्षा बेहद जरूरी है  | लेकिन आज़ादी के 70 साल बाद भी हम प्राकृतिक आपदाओं से निपटने का कोई कारगर तरीका नहीं खोज पाए हैं |

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