(राष्ट्रीय मुद्दे) खाद्य पदार्थों में मिलावट (Adulteration in Food Items)


(राष्ट्रीय मुद्दे) खाद्य पदार्थों में मिलावट (Adulteration in Food Items)


एंकर (Anchor): कुर्बान अली (पूर्व एडिटर, राज्य सभा टीवी)

अतिथि (Guest): आशीष बहुगुणा (पूर्व अध्यक्ष, खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (FSSAI), प्रो. श्रीराम खन्ना (अध्यक्ष, "कंस्यूमर वॉइस " NGO)

सन्दर्भ:

शरीर को पौष्टिकता और ताकत देने वाला दूध अब लोगों में कैंसर जैसी खतरनाक बीमारियां बांट रहा है। दरअसल विश्व स्वास्थ्य संगठन ने हाल ही में भारत सरकार के लिए एडवायजरी जारी की थी जिसमे कहा गया था कि अगर दूध और दूध से बने प्रोडक्ट में मिलावट पर लगाम नहीं लगाई गई तो साल 2025 तक देश की करीब 87 फीसदी आबादी कैंसर की चपेट में होगी।

एनीमल वेलफेयर बोर्ड के सदस्य मोहन सिंह अहलूवालिया के अनुसार देश में बिकने वाला 68.7 फीसदी दूध और दूध से बना प्रोडक्ट मिलावटी है और ये फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड अथॉरिटी ऑफ इंडिया (FSSAI) की ओर से तय मानकों से कहीं भी मेल नहीं खाते है।

देश में दूध के उत्पादन और खपत के आंकड़ों को देखें तो 31 मार्च 2018 को देश में दूध का कुल उत्पादन 14.68 करोड़ लीटर रोजाना रिकॉर्ड किया गया, जबकि देश में दूध की प्रति व्यक्ति खपत 480 ग्राम प्रति दिन ठहरती है। सीधे तौर पर यह गैप करीब 68 फीसदी का ठहरता है। यानी दूध की खपत उसके उत्पादन के मुकाबले चार गुना से भी ज्यादा है। जाहिर है उत्पादन और खपत के इस गैप को भरने के लिए मिलावट का इस्तेमाल किया जा रहा है. आमतौर पर लोग सोचते हैं कि दूध में पानी की मिलावट सबसे ज्यादा होती है, लेकिन आंकड़े बताते हैं कि इसमें डिटर्जेंट, यूरिआ और सफेद पेंट जैसी जहरीली चीजों की मिलावट का ट्रेंड ज्यादा है। हालात ये है कि अमूल व मदर डेयरी जैसे नामी ब्रांडों के दूध के नमूने भी मानकों पर खरे नहीं पाए गए हैं।

ये मिलावट लोगों की सेहत के लिए बेहद नुकसान दायक है। और इसके चलते उपभोक्ताओं के शारीरिक अंग न सिर्फ काम करना बंद कर सकते हैं बल्कि उन्हें कैंसर जैसी कई गंभीर बीमारियां भी हो सकती है।

सवाल सिर्फ दूध में मिलावट का ही नहीं है, आनाज, मसाले, दवाइयों से लेकर हरी सब्जियों तक में मिलावट पाई गई है। कंकण्- पत्थर, मिटटी, घोड़े कि लीद, पपीते के बीज, कृत्रिम रंग , हैवी मेटल और जहरीले कीटनाशकों का प्रयोग मिलावटी वस्तुओं के रूप में किया जा रहा है।

ऐसा नहीं है कि इस जानलेवा मिलावट को रोकने के लिए कोई कानून नहीं है। खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम- 2006 में सजा और जुर्माना दोनों का प्रावधान है।इस कानून में दूषित एवं मिलावटी भोजन के उत्पादकों, वितरकों, विक्रेताओं और सेवा प्रदाताओं के लिए कम से कम 10 लाख रुपये का जुर्माना और 6 महीने से लेकर उम्रकैद तक का प्रावधान किया गया है। वहीं आईपीसी की धारा 272 एवं 273 के अंतर्गत पुलिस प्रशासन को भी सीधे कार्रवाई की छूट है। इसके वावजूद आपसी मिलीभगत, सरकारी तंत्र की नाकामी और लोगों में जागरूकता कि कमी के कारण मिलावट का यह धंधा खूब फलफूल रहा है।

अब देखना ये है कि विश्व स्वास्थ्य संगठन की एडवायजरी के बाद सरकार मिलावट की समस्या से निपटने के लिए कोई सख्त कदम उठती है या नहीं?

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