(Global मुद्दे) सीरिया: शांति की ओर बढ़ते कदम (Syria: Towards Peace)


(Global मुद्दे) सीरिया: शांति की ओर बढ़ते कदम (Syria: Towards Peace)


एंकर (Anchor): कुर्बान अली (पूर्व एडिटर, राज्य सभा टीवी)

अतिथि (Guest): विरेन गुप्ता (पूर्व राजनयिक), डॉ. वाइल अव्वाद (वरिष्ठ अरब पत्रकार)

सन्दर्भ:

हाल में सीरिया की सरकार ने ‘इदलिब प्रांत’ में शांति विराम की मांग को ठुकराने के बाद रूस और ईरान के साथ मिलकर हवाई हमले शुरू कर दिया है। इदलिब प्रांत सीरिया के राष्ट्रपति ‘बशर-अल-असद’ को सत्ता से बेदखल करने की कोशिश कर रहे हथियारबंद विद्रोहियों और जि़हादी गुटों का आखिरी गढ़ है। इन हमलों में बड़ी तादाद में लोग मारे गएे हैं और घायल भी हुए हैं जिनमें बच्चे भी शामिल हैं। इस शहर में रहने वाले ज्यादातर लोग विद्रोहियों के कब्जे वाले दूसरे इलाकों से भागकर आए हुए लोग हैं। इसलिए यहां जंग का छिड़ना किसी शरणार्थी शिविर में जंग छिड़ने जैसा ही है। ऐसे हालात में इदलिब पर सीरियाई सरकार का हमला एक मानवीय संकट पैदा कर सकता है। इदलिब में लड़ाई छिड़ती देख तुर्की सरकार ने सीरिया से लगी अपनी दक्षिणी सीमा पर और अधिक सेना तैनात कर दी है, ताकि उसके देश में सीरियाई लोग फिर से शरण न ले सकें। तुर्की में पहले से ही 30 लाख सीरियाई शरणार्थी मौजूद हैं। अगर इदलिब प्रांत की बात करें तो यहां पर सरकार के खिलाफ किसी एक विद्रोही गुट का कब्जा नही है, सभी गुटों को मिलाकर लगभग यहां 30 हजार लड़ाके मौजूद हैं। विद्रोही गुटों में प्रमुख ताकत ‘हयात तहरीर अल-शम’ है, जिसके तार अल-कायदा से जुड़े हैं। शहर की दूसरी बड़ी ताकत ‘नेशनल लिबरेशन फ्रंट’ है, जिसके सिर पर तुर्की का हाथ है। इस संगठन में ‘अहरार अल-शम’ और ‘नूर अल-दीन अल-जिंकी’ जैसे कई कट्टर इस्लामी गुट शामिल हैं। ‘फ्री सीरियन आर्मी’ भी इसी संगठन के बैनर तले लड़ रही है जिसे पश्चिमी देशों का समर्थन प्राप्त है। सीरिया के उत्तर-पूर्वी इलाके में कुर्दीश लोगों की आर्मी ‘सीरियन डेमोक्रेटिक फोर्सेज’ यानि एस-डी-एफ- मौजूद है, जो लगातार असद सरकार के खिलाफ मोर्चा संभाले हुए है। इस गुट को ‘यू-एस-ए-’ और ब्रिटेन का समर्थन हासिल है। सीरिया के अन्दर आई-एस-आई-एस- को कमजोर करने में एस-डी-एफ- की अहम भूमिका है।

2011 में लोकतंत्र की मांग कर रहे बच्चों की गिरफ्रतारी के बाद असद सरकार ने प्रदर्शनकारियों पर गोलियां चलवाई थी जिसमें कई लोगों की जानें चली गईं थी । इसके बाद सीरिया में जो हालात बिगड़ने शुरू हुए उस पर आज तक काबू नहीं पाया जा सका है।

सीरिया की 80 फीसदी से ज्यादा आबादी सुन्नी मुसलमानों की है, जबकि बसर अल-असद एक शिया मुसलमान है। 1963 से ही यहां आपातकाल लागू है और 1970 के बाद से सीरिया की सत्ता पर असद परिवार का कब्जा है। मौजूदा समय में सीरिया की यह जंग अब गृहयुद्ध न रहकर अमेरिका और रूस जैसे बड़े देशों के लिए युद्ध का अखाड़ा बन चुका है। गौरतलब है कि बशर अल-असद के समर्थन में जहां एक ओर रूस और ईरान जैसे देश शामिल हैं, वहीं दूसरी ओर असद के विरोध में अमेरिका, ब्रिटेन, फ्रांस, तुर्की और सऊदी अरब जैसे देश खड़े हैं। अब देखने वाली बात यह है की लम्बे समय से चल रहा यह जंग कब ख़त्म होता है |
 

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