(Global मुद्दे) श्रीलंका में सियासी संकट (Political Crisis in Sri Lanka)



(Global मुद्दे) श्रीलंका में सियासी संकट (Political Crisis in Sri Lanka)


एंकर (Anchor): कुर्बान अली (पूर्व एडिटर, राज्य सभा टीवी)

अतिथि (Guest): संजय कपूर (वरिष्ठ पत्रकार), शशांक (पूर्व विदेश सचिव)

सन्दर्भ:

श्रीलंका में प्रधानमंत्री रानिल विक्रमसिंघे की बर्खास्तगी से वहां राजनितिक संकट गहरागया है।राष्ट्रपति सिरीसेना ने अपने पूर्व विरोधी रहे महिंदा राजपक्षे को देश का नया पीएम नियुक्त कर दिया है। वैसे सिरीसेना और राजपक्षे का रिश्ता नया नहीं है और दोनों लंबे समय तक राजनीतिक सहयोगी भी रह चुके है।बाद में मतभेद बढ़ने के बाद सिरीसेना ने अपनी अलग पार्टी बनाई और 2015 में राजपक्षे को सत्ता से बेदखल करने में कामयाब रहे उधर विक्रमसिंघे और राष्ट्रपति सिरीसेना के बीच मतभेद सत्ता में आने के बाद से ही बहुत साफ नजर आने लगे थे।आर्थिक सुधार, नीति निर्माण और गृहयुद्ध के दौरान सैन्य अधिकारियों के मानवाधिकार उल्लंघन मामले की जांच को लेकर दोनों शीर्ष नेताओं के बीच मतभेद लगातार बढ़ते ही गए।

श्री लंका भारत के लिए अहम सहयोगी देश रहा है, लेकिन राजपक्षे का झुकाव चीन की तरफ अधिक रहा है। राजपक्षे के दो बार के कार्यकाल में चीन ने श्री लंका में 'इन्फास्ट्रक्चर प्रॉजेक्टस' में भारी निवेश किया था। विक्रमसिंघे सरकार ने बढ़ते कर्ज को देखते हुए चीन के कई प्रॉजेक्टस पर रोक लगा दी और भारत की तरफ दोस्ती का हाथ बढ़ाया। पिछले दिनों पूर्व प्रधानमंत्री विक्रमसंघे ने भारत यात्रा के दौरान भारत श्रीलंका के संबंधों को नया आयाम देने की कोशिश की थी । इस यात्रा में विक्रमसिंघे ने व्यापार, निवेश और नौवहन जैसे कई क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर चर्चा भी की थी । इससे पूर्व भारत ने श्रीलंका में हम्बनटोटा पोर्ट के निकट मट्टाला हवाई अड्डे को विक्सित करने की मंशा जाहिर की थी ।

श्रीलंका और चीन संबंधों की बात करें तो चीन श्रीलंका का सालों से अहम् साझीदार रहा है। चीन की बहुउद्देशीय परियोजना 'वन बेल्ट वन रोड' परियोजना में भी श्रीलंका साझेदार है। श्रीलंका में कई परियोजनाओं में चीन अपना पैसा लगा चुका है । इनमे ज्यादातर परियोजनाएं पूर्व राष्ट्रपति महिंदा राजपक्षे के कार्यकाल में शुरू की गई थी । चीन की ज्यादातर परियोजनाएं श्रीलंका की सरकार पर क़र्ज़ के तौर पर शुरू की गई। हालांकि चीन के श्रीलंका में बढ़ते प्रभाव को लेकर अमेरिका, भारत और जापान ने चिंता जताई थी की कहीं चीन श्रीलंका में अपना सैन्य ठिकाना न बना ले। इन परियोजनाओं को लेकर श्रीलंका के भीतर भी विरोध हो रहा है। एक रिपोर्ट के मुताबिक़ श्रीलंका एशिया में सबसे बड़ा कर्ज़दार देश है।श्रीलंका का यह क़र्ज़ उसकी जीडीपी का 77 फीसदी है ।

श्रीलंका में भारतीय मूल के तमिल लोग बड़ी संख्या में रहते हैं ऐसे में भारत का श्रीलंका में चीनी विस्तार से परेशान होना लाज़मी है। भारत को लगता है कि चीन श्रीलंका के साथ उसकी सांस्कृतिक संबंधों की जड़ों को कमज़ोर कर रहा है। चीन की श्रीलंका में बढ़ती मौजूदगी और वहां विकास कार्यों से भारत का असहज होना स्वाभाविक भी है ।ऐसे में श्रीलंका में चीन के बेहद करीब माने जाने वाले महिंदा राजपक्षे का प्रधानमंत्री बनना भारत की परेशानिओं को और बढ़ा सकता है और आने वाले सालों में भारत-श्रीलंका रिश्तों पर भी प्रतिकूल असर पड़ सकता है ।

Click Here for Global मुद्दे Archive

Click Here for More Videos

Print Friendly and PDF

Get Daily Dhyeya IAS Updates via Email.

 

After Subscription Check Your Email To Activate Confirmation Link