(Global मुद्दे) मालदीव में नई सरकार और उम्मीदें (New Government in Maldive and Expectations)


(Global मुद्दे) मालदीव में नई सरकार और उम्मीदें (New Government in Maldive and Expectations)


एंकर (Anchor): कुर्बान अली (पूर्व एडिटर, राज्य सभा टीवी)

अतिथि (Guest): शशांक (पूर्व विदेश सचिव, भारत सरकार), कमोडोर सी उदय भास्कर (सामरिक मामलों के जानकार)

सन्दर्भ:

मालदीव की पहचान दुनिया भर में एक खूबसूरत पर्यटन स्थल के रूप में है | लेकिन हाल के वर्षों में इस देश की अहमियत भारत और चीन के लिए रणनीतिक रूप से बढ़ी है हिन्द महासागर में चीन अपना प्रभाव बढ़ाने के लिए कई देशों में मौजूदगी बढ़ा रहा है तो दूसरी तरफ भारत चीन को रोकने के लिए चाहता है की वह इन देशों में अपनी मौजूदगी को पुख्ता करे चीन वैश्विक व्यापार और इंफ्रास्ट्रक्चर के जरिये इन देशों में तेजी से अपने पाँव जमा रहा है 1200 द्वीपों वाला 90000 वर्ग किलोमीटर का यह देश समुद्री जहाज़ों का महत्त्वपूर्ण मार्ग है भारत और चीन दोनों चाहते हैं की उनकी नौसैनिक रणनीति के दायरे में यह इलाका रहे भारत पिछले कुछ सालों से मालदीव से दूर होता गया इसकी वजह यह रही की अब्दुल्ला यामीन की सर्कार को चीन ज्यादा रास आया और उन्होंने भारत के साथ बेरुखी दिखाई 23 सितम्बर को हुए चुनाव में अब्दुल्ला यामीन को हार मिली और विपक्ष के साझे उम्मीदवार इब्राहिम मोहम्मद सोलीह को जीत मिली सोलीह को 58 फीसदी से ज्यादा वोट मिले हैं भारत ने सोलीह की जीत का तत्काल स्वागत किया है और कहा की यह लोकतंत्र की जीत है करीब 4 लाख की आबादी वाले इस देश में सालों से भारत का प्रभाव रहा है मालदीव में चीन की दिलचस्पी हाल के वर्षों में बढ़ी है मालदीव को चीन अपनी महत्वाकांक्षी परियोजना वोन बेल्ट वन रोड में एक महत्वपूर्ण रूट के रूप में देख रहा है चीन की बढ़ती दिलचस्पी से भारत का असहज होना लाज़मी था वैश्विक संबंधों में यह आम राय बन रही है की जहाँ जहाँ चीन होगा वहां वहां भारत मज़बूत नहीं रह सकता मालदीव से लक्षद्वीप की दूरी महज़ 1200 किलोमीटर है ऐसे में भारत यह नहीं चाहता है की चीन पडोसी देशों के ज़रिये उसके और करीब पहुंचे यामीन ने चीन के पैसों से मालदीव में निर्माण कार्य शुरू किया तो भारत का यह दर और बढ़ा यामीन ने चीन से कई परियोजनाओं के लिए समझौते किये हैं जिनमे राजधानी माले में एक एयरपोर्ट, सिनमाले पुल भी शामिल है यामीन के कार्यकाल में चीन ने मालदीव में भारी निवेश किया है पिछले साल अगस्त महीने में जब चीनी नौसैनिक जहाज़ माले पहुंचे तो भारत और सजग हो गया |

मार्च 2015 में प्रधानमंत्री मोदी ने मालदीव का दौरा रद्द कर दिया था कहा जाता है की मोदी पूर्व राष्ट्रपति मोहम्मद नशीद के निर्वासन को लेकर नाराज़ थे मोहम्मद नशीद को भारत के समर्थक राष्ट्रपति कहा जाता है भारत ने मालदीव को इस साल मिलान में 8 दिवसीय सैन्य अभ्यास में शामिल होने का न्योता दिया था जिसे मालदीव ने अस्वीकार कर दिया था मालदीव में वैध रूप से काम कर रहे वीज़ा के नवीनीकरण पर भी मालदीव ने अपनी असहमति जताई थी एक रिपोर्ट के अनुसार इस छोटे से देश पर चीन का 1.3 अरब डॉलर का क़र्ज़ है यह क़र्ज़ उसकी जीडीपी के एक तिहाई से भी ज्यादा है

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