(Global मुद्दे) भारत- श्रीलंका संबंध (Indo - Srilanka Relation)



(Global मुद्दे) भारत- श्रीलंका संबंध (Indo - Srilanka Relation)


एंकर (Anchor): कुर्बान अली (पूर्व एडिटर, राज्य सभा टीवी)

अतिथि (Guest): प्रो. एस डी मुनि (दक्षिण एशियाई मामलों के जानकार और पूर्व राजनयिक), स्मिता शर्मा (द ट्रिब्यून अख़बार की डेप्युटी एडिटर )

सन्दर्भ:

श्रीलंका को भारत के पड़ौसी और एक अहम दोस्त के तौर पर देखा जाता है । दोनों देशों के बीच धार्मिक, सांस्कृतिक और भाषाई रिश्ते ढाई हज़ार साल से भी ज़्यादा पुराने हैं। लेकिन बीच बीच में कुछ राजनितिक और कूटनीतिक कारणों से दोनों देशों के आपसी रिश्तों में खटास भी आती रही है। हाल के वर्षों में श्रीलंका में चीन की सक्रियता ने भारत-श्रीलंका संबंधों को काफी प्रभावित किया है। पिछले सप्ताह श्रीलंका के राष्ट्रपति मैत्रीपाला सिरीसेना की कथित हत्या की साज़िश में एक भारतीय ख़ुफ़िया एजेंसी का हाथ होने की ख़बरों ने दोनों देशों के रिश्तों में ग़लतफ़हमी पैदा करने की कोशिश की। हालाँकि बाद में ये खबर ग़लत साबित हुई। इस बीच श्रीलंका के प्रधानमंत्री रानिल विक्रमसिंघे भारत यात्रा पर दिल्ली पहुंचे और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात कीI साथ ही प्रतिनिधि मंडल स्तरीय वार्ता में दोनों देशों ने द्विपक्षीय संबंधों से जुड़े सभी पक्षों की समीक्षा की I इसमें श्रीलंका में भारत की सहायता से की जा रही विकास परियोजनाओं पर खासा ज़ोर रहा I दोनों देशों में कारोबार, निवेश, नौवहन सुरक्षा समेत अन्य क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर भी बातचीत हुई I इसके अलावा भारत ने श्रीलंका के हम्बनटोटा के निकट मट्टाला हवाई अड्डे को विक्सित करने के लिए भी अपनी दिलचस्पी दिखाई है। साथ ही जाफना में श्रीलंका के सहयोग से 28000 मकानों को बनाने का भी ठेका श्रीलंका ने भारत को दे दिया है । गौरतलब है कि पूर्व में यह ठेका चीन को दिया गया था |

श्रीलंका और चीन संबंधों की बात करें तो चीन श्रीलंका का सालों से अहम् साझीदार रहा है। चीन की बहुउद्देशीय परियोजना वन बेल्ट वन रोड परियोजना में भी श्रीलंका साझेदार है। श्रीलंका में कई परियोजनाओं में चीन अपना पैसा लगा चुका है । इनमे ज्यादातर परियोजनाएं पूर्व राष्ट्रपति महिंदा राजपक्षे के कार्यकाल में शुरू की गई थी । चीन की ज्यादातर परियोजनाएं श्रीलंका की सरकार पर क़र्ज़ के तौर पर शुरू की गई थी । हालांकि चीन के श्रीलंका में बढ़ते प्रभाव को लेकर अमेरिका, भारत और जापान ने चिंता जताई थी की कहीं चीन श्रीलंका में अपना सैन्य ठिकाना न बना ले । इन परियोजनाओं को लेकर श्रीलंका के भीतर भी विरोध है। एक रिपोर्ट के मुताबिक़ श्रीलंका एशिया में सबसे बड़ा कर्ज़दार है। श्रीलंका का यह क़र्ज़ उसकी जी डी पी का 77 फीसदी है ।

श्रीलंका में सत्ता परिवर्तन के बाद नए राष्ट्रपति सिरिसेना ने राजपक्षे के कार्यकाल में शुरू की गई योजनाओं को बंद कर दिया था लेकिन एक साल बाद मामूली बदलावों के साथ इन सारी योजनाओं को फिर से बहाल कर दिया गया। श्रीलंका में भारतीय मूल के तमिल लोग बड़ी संख्या में रहते हैं ऐसे में भारत का श्रीलंका में चीनी विस्तार से परेशान होना लाज़मी है। भारत को लगता है कि चीन श्रीलंका के साथ उसकी सांस्कृतिक संबंधों की जड़ों को कमज़ोर कर रहा है ।

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