(Global मुद्दे) ग्लोबल वॉर्मिंग (Global Warming)



(Global मुद्दे) ग्लोबल वॉर्मिंग (Global Warming)


एंकर (Anchor): कुर्बान अली (पूर्व एडिटर, राज्य सभा टीवी)

अतिथि (Guest): प्रोफेसर सी. के. वार्ष्णेय (पर्यावरण मामलों के जानकार), डॉक्टर विजेता रतानी (दिल्ली के सेंटर फ़ॉर साइंस एंड एनवायर्नमेंट - सीएसई के क्लाइमेट चेंज डिवीज़न की प्रोग्राम मैनेजर)

सन्दर्भ:

पूरी दुनिया को इस वक़्त ग्लोबल वार्मिंग के गंभीर खतरों कि चिंता सता रही है | ग्लोबल वार्मिंग की वजह से लगातार आती बाढ़, तूफ़ान और दूसरी आपदाएं इस चिंता को और भी बढ़ा देती हैं | इसी चिंता के मद्देनज़र दक्षिण कोरियाई शहर इंचोन में कई देशों के विशेषज्ञों ने वैज्ञानिक सन्दर्भों कि मदद से संयुक्त राष्ट्र की संस्था  |PCC के लिए रिपोर्ट तैयार की है | 400 पन्नों की रिपोर्ट के मुताबिक़ अगर तापमान इसी रफ़्तार से बढ़ता रहा तो 2030 से 2052 के बीच वैश्विक तापमान में 1 .5 डिग्री तक इज़ाफ़ा हो सकता है | इसके पीछे ग्रीन हाउस गैसों के मौजूदा उत्सर्जन स्तर को बड़ा कारण बताया गया है | कहा गया है कि अगर दुनिया में 2 डिग्री सेल्सियस से ज्यादा तापमान बढ़ गया तो गंभीर संकट पैदा हो सकते हैं और भारतीय उपमहाद्वीप में भी इसके भयंकर नतीजे होंगे | 

वैज्ञानिकों के अनुसार इतना तापमान महासागर का स्तर बढ़ाने और खतरनाक तूफ़ान, बाढ़ और सूखा जैसी स्थिति लाने के लिए काफी है | इस रिपोर्ट के मुताबिक़ ग्लोबल वार्मिंग के कारण ग़रीबी भी बढ़ेगी | रिपोर्ट के मुताबिक़ ग्लोबल वार्मिंग को 2 डिग्री सेल्सियस कि बजाय 1 .5 डिग्री सेल्सियस तक रोकने से 2050 तक करोङों लोग जलवायु परिवर्तन से जुड़े खतरों और ग़रीबी में जाने से बच जायेंगे |

इस साल दिसंबर में पोलैंड में केटोवाइज में जलवायु परिवर्तन पर होने वाली बैठक में इस विषय पर चर्चा की जाएगी | साथ ही दुनिया भर के देश जलवायु परिवर्तन को रोकने के लिए पेरिस समझौते कि समीक्षा करेंगे | हालांकि ग्लोबल वार्मिंग को 1 .5 डिग्री सेल्सियस तक सीमित करने के लिए समाज के सभी पहलुओं में दूरगामी और अभूतपूर्व बदलाव की जरूरत पर बल दिया गया है  |मसलन वैश्विक तापमान को 1 .5 डिग्री तक सीमित करने के लिए साल 2035 तक करीब 2 .4 लाख करोड़ डॉलर के निवेश की जरूरत होगी |

इस वक़्त धरती का औसत तापमान करीब 15 डिग्री सेल्सियस है और पर्यावरणविदों का अनुमान है की इसमें धीरे धीरे बढ़ोत्तरी हो रही है | तापमान में बढ़ोत्तरी की जो दर है अगर उसी रफ़्तार से धरती गरम होती रही तो आने वाले दिनों में पृथ्वी पर मौजूद विशाल ग्लेशियर का भण्डार तेज़ी से पिघलना शुरू कर देगा और इसके चलते समुद्र का जल स्तर 1 -2 मीटर तक बढ़ सकता है | ये सुनने में भले ही इतना खौफनाक न मालूम होता हो लेकिन इसके नतीजे बेहद खतरनाक होंगे | पर्यावरणविदों की माने तो धरती का तापमान अतीत में बहुत कम भी रहा है और बहुत ज्यादा भी लेकिन औद्योगिक क्रांति के बाद यानि बीते 300 सालों में तापमान में लगातार बढ़ोत्तरी हो रही है  | ख़ास बात ये है ग्लोबल वार्मिंग के पीछे मानवजनित कारण ज्यादा हैं  |बीसवीं सदी में धरती का औसत तापमान 0 .8 डिग्री सेल्सियस की दर से बढ़ा लेकिन इसमें 0 .6 डिग्री सेल्सियस की बढ़ोत्तरी महज़ तीन दशकों मे ही हुई है | 2016 को अब तक का सबसे गर्म साल दर्ज़ किया गया | तापमान बढ़ाने के पीछे ग्रीन हाउस गैसों को सबसे बड़ी वजह माना जा रहा है | वैज्ञानिकों के अनुसार ग्रीन हाउस गैसों को बढ़ाने में सबसे ज्यादा जीवाश्म ईंधन जिम्मेदार हैं  |इस उत्सर्जन को कम करने को लेकर विक्सित और विकासशील देशों में जद्दोजहद काफी लम्बे अरसे से चल रही है लेकिन इस पर कोई आम राय नहीं बन पा रही है |

पूरे विश्व में ग्लोबल वार्मिंग के कारण आ रही पर्यावरणीय आपदाएं लोगों की चिंता का सबब बनी हुई हैं | संयुक्त राष्ट्र की माने तो इस ग्लोबल वार्मिंग के खतरे से निजात पाना बेहद जरूरी है क्यूंकि दुनिया एक बड़े खतरे की तरफ बढ़ रही है | अगर हालात जल्द काबू में न किये गए तो न सिर्फ खेती की बर्बादी होगी बल्कि ग़रीबी, भुखमरी और मानवीय संघर्ष बढ़ने का भी खतरा है |

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