(Global मुद्दे) बिम्सटेक सार्क के विकल्प के रूप में (BIMSTEC: As an Alternative of SAARC)


(Global मुद्दे) बिम्सटेक सार्क के विकल्प के रूप में (BIMSTEC: As an Alternative of SAARC)


सन्दर्भ:

नए सपने, नयी उम्मीदों और नयी आकांक्षाओं के साथ बिम्सटेक दक्षिण एशिया और दक्षिण पूर्व एशिया के बीच एक सतरंगी पुल के रूप में नज़र आता है ।बिम्सटेक सात देशों का एक समूह है जिसमे बांग्लादेश भूटान भारत म्यांमार नेपाल श्रीलंका और थाईलैंड शामिल हैं ।ये सभी देश बंगाल की कड़ी के आस पास के इलाके हैं ।बिमस्टेक की नीव जून 1997 को बैंकाक घोषणापत्र के जरिये पड़ी थी और जुलाई 2004 से यह अपने वर्तमान स्वरुप में है ।यह अंतर्क्षेत्रीय संगठन अपने 150 करोड़ की आबादी के साथ वैश्विक आबादी का 21 फीसदी है ।यह समूह विश्व अर्थव्यवस्था में 2.7 ट्रिलियन डॉलर के संयुक्त जीडीपी का दवा भी करता है । इसके सदस्य देश पिछले वर्षों में वैश्विक आर्थिक मंदी के बावजूद औसतन 6 .5 फीसद की आर्थिक विकास की दर को बनाये रखने में सफल रहे हैं ।बिम्सटेक का उद्देश्य सदस्य देशों के बीच तकनिकी तथा आर्थिक सहयोग को बढ़ावा देना है ।व्यापर परिवहन ऊर्जा जनसम्पर्क आतंकवाद और ग़रीबी को दूर करने जैसे कुल 14 मुद्दे इस बहुपक्षिक मंच के लिए आवाज़ बने हैं ।भारत बिम्सटेक और सार्क दोनों समूहों का एक अहम् सदस्य है लेकिन पाकिस्तान के अड़ियल रवैये के चलते सार्क की भूमिका पर सवालिया निशान लगाए जाने लगे हैं ।ऐसे हालात में भारत को एक ऐसे मंच की तलाश थी जो वैश्विक धरातल पर उसके आर्थिक विकास के सपने को एक नया आयाम दे सके ।साथ ही उस मंच पर पाकिस्तान को खड़ा करने की मज़बूरी भी न हो ।आज ये चर्चा का विषय है कि भारत बिम्सटेक के रूप में सार्क का विकल्प तैयार कर रहा है यह सवाल तब से उठाया जाने लगा जबसे 2016 के गोवा ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में मेजबान भारत ने बिम्सटेक देश के नेताओं को आउटरीच पहल के तहत आमंत्रित किया था। उरी हमले के बाद पाकिस्तान को अलग-थलग करने की नीति के तहत ही भारत में इस्लाम बाद में तय सार्क शिखर सम्मेलन के बहिष्कार का ऐलान किया था ।संकेत है कि इसके बाद ही भारत ने बिम्सटेक पर ध्यान देने की रणनीति अपनाई ।बहरहाल, बिम्सटेक सार्क का विकल्प कहां तक बन पाएगा यह तो आने वाला कल ही बताएगा लेकिन इस सच्चाई से मुंह नहीं मोड़ा जा सकता कि सार्क देशों के बीच एक प्राकृतिक निर्भरता है जिसका विकल्प शायद ही कभी बिम्सटेक बन सकता है। हां यह सार्क का पूरक जरूर बन सकता है ।बिम्सटेक के जरिये दक्षिण पूर्वी एशियाई देशों से जुड़ाव और सहयोग भारत के उत्तर पूर्वी राज्यों की सुरक्षा और विकास के लिए बेहद जरूरी है।बिम्सटेक भारत की एक्ट ईस्ट पॉलिसी और पड़ोसी प्रथम नीति को अधिक प्रभावी बनाएगा। सदस्य देशों के प्रमुख इस महीने के अंत में 30 और 31 अगस्त को बिम्सटेक के चौथे शिखर सम्मेलन के मौके पर काठमांडू में मिलेंगे इस दो दिवसीय सम्मेलन के दौरान क्षेत्रीय सहयोग को बढ़ावा दिए जाने की तरीकों की समीक्षा की जाएगी और आने वाले समय के लिए ब्लू प्रिंट भी तैयार किया जाएगा सम्मेलन में संपर्क बढ़ाने पर भी खास जोर रहेगा।बिम्सटेक देशों के बीच सदियों पुराने सांस्कृतिक संबंधों का एक लंबा इतिहास रहा है और इन संबंधों को जोड़ने और मजबूत करने का मुद्दा शिखर सम्मेलन में अहम् रहेगा।

मुख्य बिंदु:

  • नेपाल में चैथा बिम्सटेक सम्मलेन
  • नेपाल ने बिम्सटेक समिट की अध्यक्षता की है
  • 2004 से हर 2 साल पर बिम्सटेक सम्मलेन का आयोजन किया जाता है
  • बिम्सटेक की स्थापना सार्क के विकल्प के रूप में
  • दक्षिण एशिया और दक्षिण पूर्व एशिया के मध्य सेतु
  • पाकिस्तान की वजह से बिम्सटेक का महत्त्व बढ़ा
  • हिमालय से लेकर बंगाल तक एक सिस्टम को जोड़ने का है लक्ष्य
  • भूटान और नेपाल को बाद में शामिल किया गया
  • बिम्सटेक में पहले बंगाल की खाड़ी देशों का संगठन था
  • BBIN (भारत, नेपाल, भूटान और बांग्लादेश) भी बिम्सटेक से जुड़ा है
  • आसिआन के दो देश म्यांमार और थाईलैंड इसके सदस्य है
  • बिम्सटेक के माध्यम से व्यापार और जुड़ाव को महत्त्व
  • 2016 में गोवा में हुआ था सम्मलेन
  • बिम्सटेक की शुरुआत सार्क के बाद हुई थी
  • सार्क की अपेक्षा बिम्सटेक की प्रगति ज्यादा पाकिस्तान की वजह से
  • सार्क में केवल 3 .5 प्रतिशत या 4 .0 प्रतिशत ही व्यापार
  • बिम्सटेक में पाकिस्तान को शामिल नहीं किया गया
  • बिम्सटेक कुल 7 देश - बांग्लादेश भूटान भारत म्यांमार नेपाल श्रीलंका और थाईलैंड
  • बिम्सटेक की कुल अर्थव्यवस्था 2 .7 से 2 .8 ट्रिलियन डॉलर की
  • बिम्सटेक की अर्थव्यवस्था में भारत की हिस्सेदारी सबसे ज्यादा 2 .1 ट्रिलियन डॉलर की
  • बिम्सटेक की जनसँख्या विश्व की कुल जनसंख्यां की 21प्रतिशत है जो विश्व की 5 वी बड़ी जनसंख्यां है
  • वियतनाम तक संपर्क स्थापित करना है मकसद
  • बिम्सटेक के विकास की गति थोड़ी धीमी है
  • आसिआन के देशों के व्यापार सम्बन्ध अधिक मज़बूत है बिम्सटेक की अपेक्षा
  • 40 बिलियन डॉलर का आतंरिक व्यापार होता है बिम्सटेक के देशों में
  • 700 बिलियन डॉलर तक बढ़ सकता है बिम्सटेक देशों का व्यापार
  • फ्री ट्रेड एरिया बनाने की कोशिश
  • आसिआन के साथ भारत का फ्री ट्रेड एरिया शुरू हो चुका है
  • बिम्सटेक में दो अलग अलग संगठनों के देश सदस्य है
  • इंटीग्रेटेड कॉरिडोर को बढ़ाना होगा
  • बिम्सटेक में राजनीतिक समस्या नहीं है
  • बिम्सटेक का मुख्य उद्देश्य सदस्य देशों के बीच आर्थिक, तकनिकी व्यापर परिवहन ऊर्जा आतंकवाद ग़रीबी को दूर करने के साथ 14 मुख्य मुद्दे
  • बिम्सटेक देशों द्वारा आपस में आतंकवाद विरोधी दस्तावेज़ तैयार की जाने की योजना
  • मोटर वाहन अधिनियम को 6 देशों की मान्यता प्राप्त है भूटान ने अभी तक नहीं किया है स्वीकृत
  • भूटान का पर्यावरण प्रदूषण की वजह से सहमति देने से इंकार
  • यातायात (परिवहन) की समस्या
  • रेल यातायात की समस्या
  • भारत ने दिया है 1 बिलियन का लाइन ऑफ़ क्रेडिट
  • कलादान प्रोजेक्ट की गति धीमी
  • बिम्सटेक के 14 मुख्य उद्देश्यों की पूर्ति के लिए हर देश को लेना होगा लीड
  • भारत के लिए यातायात, संचार, पर्यटन , आतंकवाद, कानूनी मुद्दे, आपदा प्रबंधन मुख्य मुद्दे
  • बिम्सटेक के कुल फण्ड का 33 प्रतिशत से 34 प्रतिशत तक भारत देता है
  • बिम्सटेक की सामरिक आवश्यकता भारत को ज्यादा
  • बिम्सटेक का सूत्रधार भारत ही
  • 21 वी सदी में आर्थिक सम्बन्ध अधिक आवश्यक
  • भारत को अपना दायरा बढ़ाने की आवश्यकता
  • बिम्सटेक के सेनाध्यक्षों की मीटिंग पुणे में
  • आसिआन के अधिकतर देश चीन से नाखुश
  • चीन भी सार्क में आने की कोशिश करता रहा है
  • भारत ने चीन को सार्क में शामिल करने से किया इंकार
  • चीन MTCR में शामिल होना चाहता है
  • चीन NSG के माध्यम से भारत से समझौता करना चाहता है
  • बांग्लादेश में विश्व बैंक से ज्यादा सहायता चीन ने दी
  • चीन की मंशा अमेरिका से आगे निकलने की
  • चीन के वन बेल्ट वन रोड में भारत का सहयोग नहीं
  • भारत एशिया अफ्रीका ग्रोथ कॉरिडोर जापान के साथ कर रहा है
  • क्या बिम्सटेक सार्क का विकल्प बन सकता है
  • बिम्सटेक की सार्क का स्थान लेने की संभावना है
  • बिम्सटेक में मुद्दों की संख्या ज्यादा है
  • आसिआन को भी बिम्सटेक में जोड़ा जा सकता है

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