आर्टिकल एनालिसिस - 10 Apr 2018

अंतर्राष्ट्रीय उत्तर-दक्षिण परिवहन गलियारा

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सन्दर्भ:

परिवर्तनशील विश्व राजनीति में भारत के लिये भी यह आवश्यक है कि वह अपने विस्तृत पड़ोसियों (Extended Neighbourhood) से आर्थिक रणनीतिक संबंधों के साथ-साथ परिवहन मार्गों के द्वारा भी जुड़ाव (Connectivety)  को बढ़ाए।

  • अपने पड़ोस संबंधों का यह विस्तार भारत के लिए विशेष रूप से मध्य एशिया के संदर्भ में है जो भारत के लिए भूजरानीतिक व आर्थिक रूप से महत्वपूर्ण है।
  • इसलिए भारतीय रणनीतिकारों के द्वारा INSTC (International North-South Transport Corridor) के रूप में प्रारंभ की गई नवीन पहल की संकल्पना का विकास किया जाना भविष्य में एक उल्लेखनीय पहल सिद्ध हो सकती है।

INSTC  क्या है?

  • INSTC एशियाई देशों के मध्य क्षेत्रीय कनेक्टिविटी (Via स्थलीय एवं जलीय मार्ग) बढ़ाने के उद्देश्य से भारतीय उपमहाद्वीप को मध्य एशिया व रूस से परिवहन मार्गों द्वारा जोड़ने के लिए प्रारंभ की गई एक महत्वाकांक्षी परियोजना है।
  • मूलतः INSTC समझौते के अंतर्गत एक गलियारा (Corridor) विकसित किया जायेगा, जो हिन्द महासागर को फारस की खाड़ी से एवं वहां से कैस्पीयन सागर होते हुए ईरान के स्थलीय मार्ग के रास्ते सेन्ट पीट्सबर्ग तक एक लघु्त्तम मल्टी-मॉडल ट्रांसपोर्टेशन मार्ग का निर्माण करेगा।
  • एक बार पूर्णतः ऑपरेशनलाइज होने के पश्चात् INSTC की महत्ता एक मुख्य व्यापारिक व रणनीतिक चैनल के रूप में स्पष्ट है क्योंकि परिवहन मार्गों द्वारा भारत का जुड़ाव समस्त मध्य एशिया व यूरोपीय बाजार से संभव होगी।
  • इसलिए वैश्विक परिप्रेक्ष्य में INSTC को एक मील के पत्थर के रूप में देखा जा रहा है, जो क्षेत्रीय समृद्धि के साथ वैश्विक राजनीति में एक नवीन अध्याय का सूत्रपात कर सकता है।

प्रकाश में क्यों है?

  • INSTC के प्रादुर्भाव के लगभग 17 वर्षों पश्चात्, भारत, ईरान एवं रूस के मध्य हुए समझौते के कारण जनवरी 2018 में वस्तुओं की प्रथम खेप मुम्बई से सेन्ट पीट्सबर्ग जाने को तैयार है, तथा इसके कुछ महीने पश्चात् वस्तुओं की लगातार आवाजाही प्रारंभ हो जायेगी।
  • इसके साथ ही हाल ही में चाबहार पत्तन के प्रथम चरण को पूर्ण किया जाना, इस महत्वाकांक्षी परियोजना को पूर्ण करने की दिशा में उठाए गए एक महत्वपूर्ण कदम के रूप में देखा जा रहा है।

प्रमुख सदस्य राष्ट्र

  • प्रारंभ में (2000) में भारत, ईरान एवं रूस द्वारा इसकी संकल्पना विकसित की गई थी।
  • प्रभाव में आने के पश्चात् 11 नए सदस्य भी INSTC में शामिल हो चुके हैं। उनमें से कुछ सदस्य इस प्रकार हैं-अजरबैजान, अर्मेनिया, कजाकस्तान, किर्गीज रिपब्लिक, तजाकिस्तान, टर्की, यूक्रेन, बेलारूस, ओमान, सीरिया एवं बुल्गारिया (पर्यवेक्षक राष्ट्र)।

INSTC  के मुख्य अवयव

  • मुम्बई, INSTC के दक्षिणी बिन्दु के रूप में है।
  • इसके अंतर्गत दो मुख्य मार्गों का प्रस्ताव है।

a. मुम्बई से बाकू (अजरबैजान) जो भाया बन्दर अब्बास (ईरान का बंदरगाह)

b. मुम्बई से अस्त्रखान (रूस) भाया बन्दर अब्बास, तेहरान एवं बन्दर अंजिल (ईरान)

मुख्य लाभ

  • विशेषज्ञों का मानना है कि रूस, मध्य एशिया, ईरान एवं भारत के मध्य कनेक्टिविटी में सुधार होने के कारण क्षेत्र में द्विपक्षीय व्यापार में वृद्धि होगी।
  • विभिन्न आंकलनों के अनुसार यह प्रस्तुत किया जा चुका है कि भारत के लिए यह मार्ग परिवहन लागत को लगभग 30% तक कम कर सकता है एवं दूरी को 40% तक कम कर सकता है।
  • विशेषकर, भारत के लिए मध्य एशिया व पूर्वी यूरोप के बाजारों तक पहुंच आसान हो जायेगी।
  • तथापि भारत के लिए पाकिस्तान द्वारा उत्पन्न अवरोधों का विकल्प ढूंढ़ा जा सकेगा। (परिवहन मार्गों के संदर्भ में)
  • एशिया में अपनी स्थिति मजबूत कर रहे चीन को संतुलित करने के लिए भी भारत के लिये उपयोगी सिद्ध हो सकता है। इस परियोजना के क्रियान्वयन हेतु जिस प्रकार से कार्य हो रहे हैं, इससे हम कह सकते हैं कि भारतीय पक्ष भी चीन की वन बेल्ड वन रोड (OBOR) के समक्ष INSTC के रूप में एक प्रबल चुनौती प्रस्तुत करने की सोच रहा है।

मुख्य चुनौतियाँ

  • INSTC को अब तक कोई रूप नहीं दिया गया है जो भविष्य में ऑपरेशनल मुद्दों के समाधान के लिए अति आवश्यक शर्त है।
  • परियोजना के अंतर्गत होने वाले व्यापक स्तरीय अवसंरचना निर्माण हेतु यह आवश्यक होगा कि एक वित्तीय कोष या कोई स्पष्ट श्रोत उपलब्ध हो जिसके द्वारा परियोजना लागत की पूर्ति की जाए। परन्तु अब तक ऐसे किसी भी श्रोत की चर्चा नहीं है।
  • निर्बाध परिवहन हेतु सुरक्षा का वातावरण निर्मित रहना आवश्यक है, परन्तु मध्य-पूर्व में इस्लामिक आतंकवाद इसके लिए एक बड़ी सुरक्षा चुनौती है।
  • सदस्य राष्ट्रों के मध्य साझा सीमा प्रवेश नियमों (Common Border Crossing Rules) से संबंधित समस्याएं जिस पर किसी स्पष्ट क्रियाविधि (Mechanism) तैयार करना अभी बाकी है।

निष्कर्ष

वैचारिक धरातल पर  INSTC (अपने प्रारंभिक चरण में) सफतापूर्वक प्रदर्शन कर रहा है। परन्तु वास्तविकता में ऑपरेशनल जाँच अभी शेष है। इसलिए सभी पक्षकारों को सभी संभावनाओं के साथ-साथ परियोजना से जुड़े सभी बुनियादी प्रश्नों पर विचार करना चाहिए।